
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत हाईब्रिड धान बीज को बढ़ावा देने के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम अधिकतम या 50 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। जिले में 100 क्विंटल हायब्रिड धान बीज का वितरण का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 630 हेक्टर क्षेत्र में धान फसल के प्रदर्शन का लक्ष्य है। हाईब्रिड धान बीज के अलावा सूक्ष्म पोषक तत्व पर 500 रुपये, पौध संरक्षण औषधि पर 500 और नींदानाशक औषधि पर 500 रुपये का अनुदान जिले में उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार कृषकों को प्रदान किया जायेगा। एक कृषक को अधिकतम 2 हेक्टर के लिये एक हजार रुपये अनुदान दिया जायेगा। पंजीयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा और कृषकों ने देयक प्रस्तुत के पश्चात् उनके खाते में राशि सीधे हस्तांतरित की जायेगी। जिससे कृषकों को कृषि कार्य के लिये आर्थिक मदद मिलेगी। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिये 07752-426644 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति सहयोग एवं समर्थन का संकल्प दोहराया
आंचलिक किसानों ने `किसान न्याय योजना` के लिए मुख्यमंत्री से मिलकर जताया आभार
कोरोना संकट में मानवता की सेवा के लिए किसानों ने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री सहायता कोष में दी राशि
रायपुर (शोर सन्देश)। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए राज्य के विभिन्न अंचलों के किसान प्रतिनिधि एवं कृषणगण आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों ने इस मौके पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना की सराहना की और कहा कि इस योजना को शुरू कर प्रदेश सरकार ने न सिर्फ किसानों के हितों की रक्षा की है, बल्कि प्रदेश सरकार ने किसानों से किए अपने वायदे को निभाया है।
किसानों ने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की बेहतरी हेतु लिए गए फैसले और राज्य में खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। किसानों ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार को सदैव सहयोग एवं अपना समर्थन का संकल्प दोहराया। इस मौके पर किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों ने कोरोना संकट के काल में छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा में जुटे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का साथ देने के लिए अपनी ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए दान राशि का चेक भेंट किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न अचंलों से आए किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों का आभार जताते हुए कहा कि राज्य के किसानों, गरीबों एवं मजदूरों की बेहतरी के काम में किसी भी तरह की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट का मामला हो या किसानों और गरीबों की मदद का सरकार पूरी तत्परता एवं पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के शुरूआती चरण में राज्य में धान, मक्का और गन्ना उत्पादक कृषकों को 5750 करोड़ रूपए की राशि मिलेगी। इसमें अगले चरण में भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा। आगामी वर्ष से इस योजना में दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसानों को भी लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना के कारण आर्थिक संकट के बावजूद भी इस योजना के प्रथम किस्त की राशि किसानों को इसलिए दी गई ताकि किसान भाईयों को खरीफ की खेती के लिए मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने गरीबों और किसानों की बेहतरी के लिए न्याय योजना की अवधारणा को अमल में लाने की बात कही थी। छत्तीसगढ़ राज्य देश का पहला राज्य है, जिसने न्याय योजना को मूर्त रूप दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार और देश की अन्य राज्य सरकारें कोरोना संकट के चलते कई कामों एवं वेतन में कटौती कर रहीं हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के हितों पर आंच नहीं आने दी है, हमने अपने कर्मचारियों के वेतन में किसी भी तरह की कटौती नहीं की है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में छत्तीसगढ़ राज्य में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए हर गांव में बड़े पैमाने पर रोजगारमूलक कार्य संचालित किए जा रहे है, जिसके जरिए गांवों में 23 लाख लोगों को रोजाना काम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में 90 प्रतिशत लघु वनोपज की वाजिब मूल्य पर खरीदी कर संग्राहकों के हितों का संरक्षण किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के 13 लाख संग्राहक परिवारों को तेंदूपत्ता एवं लघु वनोपज संग्रहण के जरिए 2500 करोड़ रूपए मिलेगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय में सरकार समाज के सभी वर्ग के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर कोरोना संक्रमण और उसके चलते लॉकडाउन तथा प्रवासी मजदूरों की स्थिति का भी विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग सवा लाख श्रमिकों की वापसी हुई है। उन्होंने इस मौके पर गांवों में कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए की गई व्यवस्था को बनाए रखने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी से हमें गांव और शहर को बचाना है। सर्तकता और सुरक्षा से ही इसका बचाव संभव है।
इस अवसर पर उपस्थित विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों की हितैषी सरकार है। उन्होंने कहा कि किसानों और गरीबों की मदद और उनकी बेहतरी के कामों को लेकर प्रदेश सरकार देश में रोल मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने वायदे को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था किसानों पर आधारित है। प्रदेश सरकार किसानों और गरीबों को मदद पहुंचाकर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी नीतियों के चलते ही आज प्रदेश में खेती-किसानी की ओर लोगों का रूझान बढ़ा है। किसानों की पंजीयन संख्या में 2 लाख की बढ़ोत्तरी इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण जहां अन्य सरकारें कटौती कर रही हैं वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार किसानों की मदद कर रहे हैं। पूर्व विधायक बैजनाथ चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. खूबचंद बघेल और स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर की परिकल्पना को साकार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते आज लोग खेती-किसानी में रूचि लेने लगे हैं। उन्होंने न्याय योजना के लिए बिलासपुर के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री का आभार जताया।
बलौदाबाजार के कृषक रामविलास साहू, राजनांदगांव के मुरली वर्मा, रायपुर के प्रमोद अग्रवाल, राजनांदगांव के कृषक कमलू निषाद, कवर्धा के महेश चंद्रवंशी, खरोरा के कृषक डॉ. महेन्द्र देवांगन, कुरूद के कृषक शिरीष साहू, महासमुंद के महेन्द्र चन्द्राकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के दुख दर्द को समझती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट की कठिन परिस्थिति में किसानों की मदद की है। उन्होंने अपनी ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष में सहायता राशि का चेक भी मुख्यमंत्री को भेंट किया। इस मौके पर तुलसी साहू ने विभिन्न संगठनों एवं दानदाताओं की ओर से संकलित 5 लाख 56 हजार 400 रूपए, खरोरा के कृषक महेन्द्र देवांगन ने 25 हजार रूपए, प्रमोद अग्रवाल ने 21 हजार रूपए, बलराम नशीने ने 3100 रूपए, हरीश चंद वर्मा, अजय वर्मा, इसराइल खान, शेषनारायण बघेल ने 5100-5100 रूपए, वीरनारायण देवांगन ने एक हजार रूपए, होमदत्त वर्मा, मुरलीराम वर्मा एवं कृषक बाबूलाल वर्मा ने 11-11 हजार रूपए का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए प्रदान किया। कबीरधाम जिले के सहकारी समिति सांरगपुरकला एवं मड़मड़ा के किसानों ने प्रति क्विंटल धान के मान से 50 रूपए की सहायता राशि का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए प्रदान किया।

कांकेर(शोर सन्देश)। जिले के कृषकों से अपील करते हुए बीज प्रक्रिया केन्द्र कांकेर के प्रभारी माधुरी बाला ने बताया है कि बीज निगम कांकेर में खरीफ 2020 एवं आगामी रबी फसल 2020-21 के लिए प्रमाणित बीज एवं प्रचलित किस्मों का बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत किसान सीधे लाभ ले सकते हैं। कृषकों द्वारा उत्पादित बीजों को कृषि विभाग के मांग अनुसार सहकारी समितियों एवं योजनाओं के माध्यम से वितरण किया जाएगा।
पंजीकृत इच्छुक कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर निःशुल्क प्रशिक्षण देकर बीज उत्पादन कार्यक्रम में बरती जाने वाली सावधानियां एवं अधिक उपज से लाभ की जानकारी देगा। पंजीयन के लिए खरीफ फसल के लिए बोनी के 20 दिनों के अन्दर या 31 अगस्त तक और रबी फसल के लिए बोनी के 20 दिनों के अन्दर या 21 दिसम्बर तक करा सकते हैं। पंजीयन किये जाने वाली खरीफ फसलें-धान के किस्में इस प्रकार हैः-एमटीयू-1010, एमटीयू-1001, आईआर-64, पीकेव्ही (एचएमटी) इत्यादि धान की किस्में हैं। इसी प्रकार दलहन तिलहन की फसलों में कोदो, रागी, उड़द, मूंग, अरहर, कुल्थी, तिल और रामतिल का पंजीयन करा सकते हैं। रबी फसल में गेहॅू, चना, मटर, मसूर, तिवड़ा, कुसुम, सरसों, तोरिया और अलसी और ग्रीष्म में बोये जाने वाले दलहन-तिलहन के लिए पंजीयन शुल्क एवं दस्तावेज बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने वाले कृषकों को छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम, कृषि महाविद्यालय एवं मान्यता प्राप्त संस्थान के वितरण केन्द्र से बीज उत्पादन हेतु आधार एवं प्रमाणित श्रेणी 01 का बीज क्रय किया जा सकता है एवं प्रमाणीकरण संस्था से निर्धारित शुल्क पर प्राप्त कर सकते हैं।
कृषकों को सामान्य फसल उत्पादन की अपेक्षा बीज उत्पादन के लिए राज्य शासन द्वारा धान के समर्थन मूल्य पर मोटा धान सहकारी समिति में प्रति क्विंटल 1815 रूपये और बीज निगम के मानक बीजों पर प्रति क्विंटल 2390 रूपये एवं पतला धान सहकारी समिति में प्रति क्विंटल 1835 रूपये और बीज निगम के मानक बीजों पर प्रति क्विंटल 2410 रूपये लाभ ले सकते हैं।

जशपुरनगर(छत्तीसगढ़ )।छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजनांतर्गत जिले के किसान लाॅकडाउन के दौरान अपने खेत में साग-सब्जी उगाकर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे है। उद्यान विभाग के सहायक संचालक श्री रामअवध सिंह भदौरिया के सहयोग से उन्हें उन्नत तकनीकी के माध्मय से खेती बाड़ी करने की विधि बताई जा रही है। जशपुर विकासखंड के ग्राम पोरतेंगा के किसान श्री खुनाईर ने बाड़ी विकास से जुड़कर अपने निजी भूमि पर आलू की खेती की अच्छी पैदावार होने से लाॅकडाउन के दौरार घर चलाने में आर्थिक मदद मिल गई। आस-पास के गांव और साप्ताहिक बाजार में आलू बेचकर किसान खुनाईर ने माह में लगभग 18000 रुपए का आर्थिक आमदनी प्राप्त हुई। उन्होंने शासन की योजना की सराहना करते हुए कहा है कि बाड़ी विकास योजना किसानों के लिए अंत्यंत लाभकारी है। इससे जुड़कर किसान अपने खेतों में उन्नत तकनीकी से खेती करके आमदनी में बढोतरी कर रहे हैं।

कांकेर(छत्तीसगढ़ )। कलेक्टर के.एल. चौहान ने आज कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ सीजन के लिए खाद एवं बीज के भण्डारण की समीक्षा किया। कृषि विभाग के उप संचालक एन. के. नागेश ने बताया कि जिले के सहकारी समितियों में अब तक 18 हजार 115 किलोमीटर धान बीज का भण्डारण किया गया है, जिसमें से 797 क्विंटल धान बीज का वितरण भी किया जा चुका है। जिले के सहकारी समितियों में 10 हजार 518 मेट्रिक टन उर्वरक का भण्डारण किया गया है, जिसमें से किसानों को 2448 मेट्रिक टन उर्वरक का वितरण भी किया जा चुका है। समितियों में 4186 मेट्रिक टन यूरिया का भण्डारण एवं 853 मेट्रिक टन यूरिया का वितरण, डी.ए.पी 3097 मेट्रिक टन भण्डारण एवं 913 मेट्रिक टन का वितरण, एस.एस.पी. 1541 मेट्रिक टन का भण्डारण तथा 364 मेट्रिक टन का वितरण, एम.ओपी. 1499 मेट्रिक टन का भरण्डारण और 299 मेट्रिक टन का वितरण, एन.पी.के. 195 मेट्रिक टन का भण्डारण एवं 19 मेट्रिक टन का वितरण जिले के किसानों को किया गया है। कलेक्टर श्री चौहान ने जिले के किसानों से अपील किया है कि खरीफ सीजन के लिए खाद एवं बीज का अग्रिम उठाव कर लेवे, अभी खाद, बीज का उठाव करने से ब्याज की राशि से बचा जा सकता है। उन्होंने कृषि विभाग के उप संचालक को भी निर्देशित किया है कि खाद, बीज का अग्रीम उठाव करने से होने वाले फायदों की जानकारी किसानों को दिया जाय एवं गांवों में मुनादी कराई जाए।

धमतरी (छत्तीसगढ़) । छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के अध्यक्ष आरएन ध्रुव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर किसानों की तैयार फसल की बिक्री के लिए व्यवस्था करने बाबत निवेदन किया है।
ज्ञात हो सन्ना क्षेत्र बगीचा ब्लॉक छत्तीसगढ़ में किसानों की कुल आबादी दो से तीन लाख है। इसी क्षेत्र से पूरे भारत में सब्जी, टमाटर और हरी मिर्ची की वृहद सप्लाई होती है। इन दिनों किसानों के पास खेत में पूरी फसल पककर तैयार है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्ट पूर्णत: बंद है। चूंकि बड़े-बड़े शहरों में रेलवे लाइन होने की वजह से आवश्यक सामग्री जैसे दूध, सब्जी और दैनिक जीवन का उपयोग हेतु सामग्री रेलवे द्वारा सप्लाई हो रही है। लेकिन इस क्षेत्र में ट्रेन रूट नहीं होने की वजह से एक मात्र साधन छोटे ट्रक या छोटे-छोटे मालवाहक चारपहिया वाहन है। जिसके माध्यम से सड़क मार्ग द्वारा सप्लाई करना होता है। वह भी पूर्णता बंद हो जाने से किसानों का पका पकाया कच्चा माल पूरा बर्बाद हो रहा है। किसानों के साल भर की मेहनत बर्बाद हो रही है। छोटे-छोटे किसानों की एक से दो लाख की पूंजी डूब रही है। किसान मरने के कगार पर आ गए हैं। आरएन ध्रुव ने अनुरोध किया कि आप हमारे प्रदेश के मुखिया के अलावा जमीन से जुड़े हुए एवं गांव के किसान भी हैं। इसलिए आप इन किसानों की पीड़ा को भलीभांति समझ सकते हैं। इसलिए किसानों की तैयार फसल की सप्लाई बड़े शहरों में करने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था अतिशीघ्र जारी करें। जिससे सन्ना-बगीचा ब्लॉक के सब्जी, टमाटर और हरी मिर्च देश के सभी बड़े शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायपुर, ओडिशा, नागपुर, मुंबई और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में सप्लाई हो सके।

दुर्ग (chhatishgarh)। जिले में खरीफ सत्र अंतर्गत कृषि कार्य के लिए आवश्यक कृषि आदान यथा बीज एवं खाद कृषकों को अग्रिम उपलब्ध हो इस के लिए सेवा सहकारी समितियों में बीज एवं खाद का निरन्तर भण्डारण एवं वितरण किया जा रहा है। जिले में खरीफ के लिए मुख्य फसल धान के 31000 क्वि. बीज की मांग के विरूद्ध अद्यतन छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रूआबांधा द्वारा 16452 क्वि. बीज का भण्डारण जिले की सहकारी समितियों में किया गया जिसके विरूद्ध 3847.50. क्वि. धान बीज कृषकों को वितरण किया गया है।
शासन के मंशानुरूप कृषकों को मानक स्तर के कृषि आदान उपलब्ध हो सके इसके लिए विभागीय निरीक्षकों द्वारा कृषि आदानों का गुणवत्ता परीक्षण कार्य के लिए निरन्तर नमूने लिये जा कर गुण नियंत्रण प्रयोगशालाओं को प्रेषित किया जा रहा है। छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रूआबांधा द्वारा जिले में भण्डारित किये गये बीजों में से अद्यतन 63 बीज के नमूनें गुण नियंत्रण परीक्षण के लिए बीज गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, रायपुर को प्रेषित किये गये जिसके विरूद्ध 25 नमूनों के परिणाम प्राप्त हुये है, जिसमें से 16 मानक एवं 9 अमानक स्तर के परिणाम प्राप्त हुये है।
धान बीज नमूनों के परिणाम अमानक स्तर के प्राप्त होने पर अनुज्ञप्तिधारी अधिकारी एवं उप संचालक कृषि, दुर्ग द्वारा बीज नियंत्रण आदेश 1983 के प्रावधानों के अनुसार धारा 11 में प्रदत्त अधिकार का उपयोग कर बीज विक्रय तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर संबंधितों को कारण बताओं सूचना जारी की गई । भण्डारित किये गये अमानक स्तर के बीजों को सहकारी समितियों से वापस प्राप्त कर व उसके स्थान पर मानक स्तर का बीज तत्काल भण्डारण करने और उक्त बीजों के कृषकों को वितरण होने की दशा में कृषकों से वापस प्राप्त कर मानक स्तर का बीज उपलब्ध कराने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के माध्यम से संबंधित समितियों के समिति प्रबंधक को आदेशित करने के निर्देश जारी किये गये है। जिले में कृषि आदानों के समुचित एवं गुणवत्तायुक्त व्यवस्था के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जिसका दूरभाष क्रमांक 0788-2323755 है। नियंत्रण कक्ष में जिला स्तर पर अधिकारियों को नामांकित कर दूरभाष एवं समक्ष भेट के माध्यम से जिले में कृषि आदान से संबंधित समस्त गतिविधियां यथा मांग, उपलब्धता, भण्डारण-वितरण एवं गुण नियंत्रण का नियमित संचालन किया जा रहा है।

दुर्ग(chhatishgarh) जिले में खरीफ सत्र 2020 अंतर्गत कृषि कार्य हेतु आवश्यक कृषि आदान यथा बीज एवं खाद कृषकों को अग्रिम उपलब्ध हो इस हेतु सेवा सहकारी समितियों में बीज एवं खाद का निरन्तर भण्डारण एवं वितरण किया जा रहा है। जिले में खरीफ 2020 हेतु मुख्य फसल धान के 31000 क्वि. बीज की मांग के विरूद्ध अद्यतन छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रूआबांधा द्वारा 16452 क्वि. बीज का भण्डारण जिले की सहकारी समितियों में किया गया जिसके विरूद्ध 3847.50. क्वि. धान बीज कृषकों को वितरण किया गया है।
शासन के मंशानुरूप कृषकों को मानक स्तर के कृषि आदान उपलब्ध हो सके इस हेतु विभागीय निरीक्षकों द्वारा कृषि आदानों का गुणवत्ता परीक्षण कार्य हेतु निरन्तर नमूने लिये जा कर गुण नियंत्रण प्रयोगशालाओं को प्रेषित किया जा रहा है। छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रूआबांधा द्वारा जिले में भण्डारित किये गये बीजों में से अद्यतन 63 बीज के नमूनें गुण नियंत्रण परीक्षण हेतु बीज गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, रायपुर को प्रेषित किये गये जिसके विरूद्ध 25 नमूनों के परिणाम प्राप्त हुये है, जिसमें से 16 मानक एवं 9 अमानक स्तर के परीणाम प्राप्त हुये है।
छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रूआबांधा द्वारा उपरोक्त अमानक स्तर के धान बीजों को जिले की 19 सेवा सहकारी समितियों में निम्नानुसार भण्डारित किया गया था, ओटेबंद-50.10 क्वि. सांतरा-30 क्वि. खोपली-21.60 क्वि. अहेरी-15.90 क्वि. बोरीगारका-30 क्वि. ठेगाभाठ-105 क्वि. रिसामा-63.30 क्वि. कोहका-30 क्वि. ननक_ी-61.80 क्वि. बोरी-35.70 क्वि. तर्रा-45 क्वि. जामगांव एम-50.10 क्वि. बटंग-15 क्वि. धमधा-33 क्वि. सांकरा-30 क्वि. मोहरेंगा-60 क्वि. टेमरी-60 तेलीगुण्डरा-2.70 क्वि. उतई-20.70 क्वि. कुल 760.20 क्वि. का भण्डारण किया गया था।
धान बीज नमूनों के परिणाम अमानक स्तर के प्राप्त होने पर अनुज्ञप्तिधारी अधिकारी एवं उप संचालक कृषि, दुर्ग द्वारा बीज नियंत्रण आदेश 1983 के प्रावधानों के अनुसार धारा 11 में प्रदत्त अधिकार का उपयोग कर बीज विक्रय तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर संबंधितों को कारण बताओं सूचना जारी किया गया। भण्डारित किये गये अमानक स्तर के बीजों को सहकारी समितियों से वापस प्राप्त कर व उसके स्थान पर मानक स्तर का बीज तत्काल भण्डारण करने तथा उक्त बीजों के कृषकों को वितरण होने की दशा में कृषकों से वापस प्राप्त कर मानक स्तर का बीज उपलब्ध कराने हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के माध्यम से संबंधित समितियों के समिति प्रबंधक को आदेशित करने के निर्देश जारी किये गये है। उप संचालक कृषि, दुर्ग द्वारा कृषकों से भी अपील की गई है कि वे समितियों से उक्त अमानक बीज का उठाव न करें व अमानक बीज प्राप्त किये जाने की दशा में बीज को समिति में वापस कर मानक स्तर का बीज प्राप्त करें

स्थानीय थाना से सटे झारखण्ड प्रांत के गढ़वा जिले के धुरकी थाने के रक्शी गांव में रविवार रात दिल दहला देने वाली घटना घटी। यहां एक किसान अपनी पत्नी और दो बेटियों की हत्या कर खुद फांसी के फंदे से झूल गया। मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। उसमें उसने अपनी व अपने परिवार की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है।
झारखण्ड प्रान्त के गढ़वा जिले के धुरकी थाना के रक्शी निवासी 30 वर्षीय शिवकुमार बैठा ने अपनी 26 वर्षीया पत्नी बबीता देवी, 10 वर्षीय पुत्री तान्या कुमारी एवं छह वर्षीय श्रेया कुमारी की हत्या कर शव को कुएं में डाल दिया। खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सोमवार की सुबह जब शिवकुमार की मां उसके घर गई तो उसके घर का दरवाजा खुला था और घर से थोड़ी दूर पर स्थित अमरूद के पेड़ पर उसका शव झूल रहा था। मां के रोने और चिल्लाने पर जुटे लोगों को घर में शिवकुमार की पत्नी और बेटियां भी नहीं मिलीं। इस पर लोगों ने उनकी खोजबीन की तो शुरुआत में एक बच्ची का शव कुएं में मिला। एक बच्ची एवं पत्नी गायब थी। घटना को देखकर लोगों को आशंका हुई कि कहीं शिवकुमार ने पत्नी एवं दूसरे बच्ची की भी हत्या तो नहीं कर दी है। लोगों ने इस लिहाज से फिर से कुएं में खोजबीन की तो दूसरी बच्ची एवं पत्नी का शव उसमें मिला। ग्रामीणों ने बताया कि शिवकुमार के ऊपर लगभग पांच-छह लाख रुपये का कर्ज था। वह छोटा किसान था और बीमार भी रहता था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि उसने गरीबी तथा बीमारी से तंग आकर ऐसा कदम उठाया है। मौके पर मिले सुसाइड नोट में शिवकुमार ने लिखा है कि वह अपने परिवार के साथ मौत को गले लगा रहा है। इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है। इसके लिए मेरे माता-पिता को परेशान न किया जाए। थाना प्रभारी धुरकी योगेन्द्र कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गढ़वा जिले के धुरकी थाना क्षेत्र के रक्शी गांव में शिवकुमार बैठा नामक किसान ने रविवर रात पत्नी और दो बच्चियों संग खुदकुशी कर ली। सोमवार सुबह शिवकुमार का शव अमरूद के पेड़ से झूलता हुआ मिला जबकि अन्य तीनों का शव घर के पास स्थित एक कुएं से बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि शिवकुमार ने अलग-अलग जगहों से करीब पांच लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। आशंका है कि कर्ज में डूबे होने के चलते ही उसने यह कदम उठाया। हालांकि, उसके घर से मिले सुसाइड नोट में इसकी चर्चा नहीं है।
घटना की सूचना मिलने में एसडीपीओ नीरज कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच जायजा लिया। शिवकुमार का शव अमरूद के पेड़ से लटका हुआ था जबकि पत्नी बबीता और दो बेटियों तान्या तथा श्रेया का शव कुएं से बरामद किया गया। एसडीपीओ ने बताया कि आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चला है। मामले की छानबीन की जा रही है।
घर में मिला सुसाइड नोट
घर के अंदर से एक सुसाइड नोट भी मिला है। बताया जाता है कि आत्महत्या करने से पहले मृतक ने उसे लिखा था। नोट में लिखा गया है कि उनकी मौत का जिम्मेवार कोई नहीं है, बल्कि आपसी सलाह के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।
UP : दुष्कर्म करने में असफल हुआ तो युवक ने महिला को जिंदा जलाया
पांच लाख से ज्यादा का कर्ज था
बताया जाता है कि शिवकुमार ने बैंक और महाजन से पांच लाख रुपये से अधिक का कर्ज लिया था। उसपर इस कर्ज को चुकाने का दबाव था। इसके चलते वह कई महीनों से तनाव में था। दोनों पति-पत्नी भी बीमार चल रहे थे। उसके पिता रामनाथ बैठा ने बताया कि उसका बेटा इलाज के लिए रांची जानेवाला था।
परिवार के लोग बताते हैं कि शिवकुमार पहले बाहर रहकर मजदूरी करता था। फिलहाल कुछ वर्षों से गांव में रहकर ही खेती और अन्य काम करता था। परिजनों ने बताया कि शिवकुमार ने कैशपार, आरोहन, स्पंदना नन बैंकिंग से डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया था। उसके अलावा केसीसी का लोन भी उसपर था। वहीं महजनों से साढ़े तीन लाख रुपए का कर्ज लिया था।
यूपी: मंत्री की आलोचना से प्रिंसिपल हुए परेशान, दे डाला इस्तीफा