नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध तरीके से E85 ईंधन वितरण स्टेशनों का विस्तार करेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), मुंबई, पुणे और नागपुर सहित प्रमुख शहरी गलियारों में शुरुआत में 100 तक E85 ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
नई दिल्ली में मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल के लॉन्च कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि E85, जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित होता है, को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों के तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मोनो-फ्यूल मानक के रूप में चिन्हित किया गया है।
उन्होंने कहा कि E85 को भारत के वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ते कदम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में भी सबसे स्वच्छ ईंधन विकल्पों में से एक माना जा रहा है।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल अवसंरचना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। दिसंबर 2026 तक E85 स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी और 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में 5,000 आउटलेट स्थापित करने का लक्ष्य है।
भारत की परिवहन व्यवस्था में हो रहे बदलाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अब दोपहिया वाहनों से आगे बढ़कर चारपहिया वाहनों तक पहुंच चुकी है, जो इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि यदि नए बिकने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल आधारित हो जाएं, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा होगी, किसानों की आय में लगभग 12,403 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी और लगभग 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
उन्होंने कहा, “इससे न केवल ऊर्जा आयात बिल कम होगा, बल्कि किसानों को आय का एक अतिरिक्त और टिकाऊ स्रोत भी मिलेगा। इससे किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि ऊर्जा प्रदाता (ऊर्जादाता) भी बनेंगे।”
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत के स्वच्छ परिवहन समाधानों की ओर तेजी से बढ़ने के साथ अधिक वाहन निर्माता कंपनियों के फ्लेक्स-फ्यूल क्षेत्र में आने की उम्मीद है।
E85 ईंधन को बढ़ावा ऐसे समय में दिया जा रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ा है और देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जापान की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है।