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संवत्सरी पर पीएम मोदी का संदेश: क्षमा और करुणा हर रिश्ते को मजबूत बनाते हैं, ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’

15-Sep-2026
नई दिल्ली। जैन धर्म के सबसे पवित्र पर्व संवत्सरी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस पावन दिन पर उन्होंने न केवल बधाई संदेश साझा किए, बल्कि जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सबकी क्षमा भी मांगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “संवत्सरी हमें याद दिलाती है कि क्षमा और करुणा हर रिश्ते को मजबूत बनाते हैं। इस पवित्र अवसर पर, विनम्रता हमारा मार्गदर्शन करे और दया व सद्भावना हमारे हर काम का आधार बनें। मिच्छामि दुक्कड़म्!”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पर्युषण पर्व और संवत्सरी को याद करते हुए कहा, “आइए हम जाने-अनजाने में अपने विचारों, शब्दों या कार्यों से किसी को भी पहुंचाई गई ठेस के लिए सभी से क्षमा मांगें। सभी को मिच्छामि दुक्कड़म!”
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने संवत्सरी को क्षमा, करुणा और आत्मशुद्धि का संदेश देने वाला पर्व बताते हुए सभी को बधाई दी। उन्होंने कामना की कि यह अवसर जीवन में प्रेम, सद्भाव और आत्मचिंतन की भावना को प्रगाढ़ करे तथा सुख-शांति लाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा, करुणा, संयम और क्षमा के शाश्वत संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि संवत्सरी आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और सदाचार का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मैत्री, प्रेम और शांति की भावना बढ़ाने की मंगलकामना व्यक्त की।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी समस्त देश और प्रदेशवासियों को संवत्सरी की बधाई दी। उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी के संदेश हमें आत्मचिंतन और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। यह पर्व समाज में प्रेम, शांति और मैत्री की भावना को और मजबूत करे।
संवत्सरी जैन समुदाय के लिए आत्मशुद्धि, क्षमायाचना और नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। नेताओं के इन संदेशों ने एक बार फिर क्षमा और करुणा के महत्व को रेखांकित किया है। 

ICWA की सिल्वर जुबली पर विदेश मंत्री जयशंकर बोले-भारत अब वैश्विक चुनौतियों पर आत्मविश्वास से रख रहा विचार

15-Sep-2026
नई दिल्ली। नई द‍िल्‍ली के मंडी हाउस स्‍थित विवेक ऑडिटोरियम में मंगलवार को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के तौर पर ‘इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स’ की सिल्वर जुबली (25वीं वर्षगांठ) का जश्न मनाया गया। इस अवसर पर मुख्‍य अत‍िथि के तौर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, व‍िदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद रहे।
इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स की सिल्वर जुबली कार्यक्रम को संबोध‍ित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज यहां उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि हम इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) को राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा मिलने के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
इस दौरान जयशंकर ने आईसीडब्ल्यूए के अध्यक्ष के रूप में समारोह में उपस्‍थित होने के ल‍िए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आभार व्‍यक्‍त क‍िया। उन्‍होंने कहा क‍ि 1943 में अपनी स्थापना के बाद से आईसीडब्ल्यूए अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन और उनके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम करता रहा है। वर्ष 2001 में संसद ने इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा दिया, जो दुनिया से जुड़े मुद्दों पर भारत की बौद्धिक भागीदारी में इसके विशेष योगदान की पहचान थी।
उन्होंने कहा कि अब 25 साल बाद, यह वर्षगांठ सिर्फ उसकी यात्रा को याद करने का मौका नहीं है, बल्कि यह सोचने का भी अवसर है कि आने वाले वर्षों में आईसीडब्ल्यूए की क्या भूमिका हो सकती है। यह सवाल आज इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि भारत बदल चुका है और दुनिया भी पहले जैसी नहीं रही।
उन्‍होंने कहा क‍ि आज भारत पहले की तुलना में दुनिया के कहीं अधिक देशों और क्षेत्रों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। हमारे राष्ट्रीय हित अब पहले से ज्यादा वैश्विक हो गए हैं। हमारी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और दुनिया की भारत से अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ी हैं।
भारत अब वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ सामने रख रहा है, खासकर उन मुद्दों पर जो पूरी मानवता को प्रभावित करते हैं। जैसे-जैसे दुनिया में भारत की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर हमारी बौद्धिक समझ और भागीदारी को भी उसी गति से आगे बढ़ना होगा।
जयशंकर ने कहा क‍ि अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर जो पारंपरिक सोच और चर्चा लंबे समय से चलती रही है, वह काफी हद तक दूसरे देशों के अनुभवों और वहां विकसित हुए विचारों पर आधारित रही है।
एक उभरते हुए भारत को अब दुनिया को देखने और समझने के अपने तरीके में अपनी बुद्धिमत्ता, अनुभव, हितों, विचारों और यहां तक कि अपनी शब्दावली को भी शामिल करना होगा। भारत को सिर्फ दूसरों की ओर से बनाए गए ढांचों के आधार पर दुनिया को नहीं समझना चाहिए, बल्कि अपनी सोच और अपने दृष्टिकोण के साथ वैश्विक विमर्श में योगदान देना चाहिए।
इस प्रयास में आईसीडब्ल्यूए की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय दृष्टिकोण से जानकारीपूर्ण और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देकर, आईसीडब्ल्यूए हमें यह बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है कि हमारे सामने कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं। साथ ही, यह भारत के दृष्टिकोण को अधिक आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने रखने में भी योगदान देता है। इसलिए, किसी भी उभरते हुए राष्ट्र के विकास के दौरान जो बहसें और चर्चाएं होती हैं, उनमें आईसीडब्ल्यूए को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा क‍ि ब्र‍िक्‍स सम‍िट में सर्वसम्मति से अपनाए गए ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जैसे कि सभी को साथ लेकर चलने वाली वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना। यह सर्वसम्मति से पारित घोषणा हम सभी के लिए एक बड़ी सफलता है।
 

असम के मुख्यमंत्री बिस्वा ने जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ने का निर्देश दिया

15-Sep-2026
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जिला आयुक्तों (District Commissioners) को निर्देश दिया है कि वे औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता का परित्याग करें तथा जन-सेवा में अनुशासन एवं कार्यकुशलता लाएं। उन्होंने जिला आयुक्तों के दो-दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चूंकि प्रौद्योगिकी और कत्रिम मेधा (AI) रोजमर्रा के कामकाज का अहम हिस्सा बन गए हैं, इसलिए अधिकारियों को प्रशासन के कामकाज में निजी क्षेत्र जैसा पेशेवर अंदाज लाना चाहिए।
यह सम्मेलन सोमवार आधी रात के बाद संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आधी रात के कुछ ही समय बाद, हमने जोरहाट में जिला आयुक्तों के दो दिवसीय सम्मेलन का समापन किया। इसमें मंत्रियों, उपायुक्तों तथा 15 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 27 घंटे से अधिक समय तक गहन विचार-विमर्श किया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा संदेश साफ था: हमारे जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता से बाहर निकलना होगा तथा जन-सेवा में निजी क्षेत्र जैसा अनुशासन, कार्यकुशलता और पेशेवर अंदाज लाना होगा। रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासन में प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम मेधा को अहम भूमिका निभानी होगी।’’
उन्होंने निर्देश दिया कि हर जिला आयुक्त विभागों के साथ बैठक करे ताकि यह पक्का किया जा सके कि हर निर्देश बिना किसी देरी के क्षेत्र स्तर के अधिकारियों तक पहुंचे और उस पर अमल हो। शर्मा ने कहा, ‘‘असम के जिलों को बेहतर प्रदर्शन के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि हर जिला आयुक्त अपने जिले को देश का सबसे अच्छा जिला बनाने की दिशा में काम करेगा।’’
सीएम बिस्वा ने कहा कि प्रशासन के रोजमर्रा के कामकाज को सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इन चर्चाओं के साथ-साथ, मैंने 85 से ज़्यादा फाइलें मंजूर कीं तथा गणमान्य लोगों को 34 से ज़्यादा नोट एवं पत्र भी लिखे।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं से ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव देखने को मिलेंगे और ‘‘यही वह संकल्प है जिसके साथ हम जोरहाट से जा रहे हैं।’

 


असम की सरकारी बसों में लगेगा GPS और SOS बटन, यात्रियों की सुरक्षा होगी सुनिश्चित : हिमंता बिस्वा सरमा

15-Sep-2026
नई दिल्ली। असम अपने सार्वजनिक परिवहन तंत्र को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। यात्री सुरक्षा, परिचालन दक्षता और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से असम राज्य परिवहन निगम (एएसटीसी) की बसों में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि नए सिस्टम को अपनाकर राज्य की बसों को न सिर्फ स्मार्ट, बल्कि बहुत ज्यादा सुरक्षित बनाया जा रहा है।
इस पहल के तहत एएसटीसी बसों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे बसों की रियल-टाइम निगरानी, संचालन प्रबंधन और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इस सिस्टम को स्मार्ट शेड्यूलिंग में मदद करने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे यात्रियों के इंतजार का समय कम हो सकता है और फ्लीट मैनेजमेंट (बस बेड़े का प्रबंधन) बेहतर हो सकता है। इस पहल का एक अहम हिस्सा बसों के अंदर इमरजेंसी पैनिक/एसओएस बटन लगाना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, ये इमरजेंसी सिस्टम सीधे कंट्रोल सेंटर से जुड़े होंगे। इनका मकसद इमरजेंसी रिस्पांस को मजबूत करना और सुरक्षा को बेहतर बनाना है। अपग्रेड किया गया सिस्टम ऑटोमेटेड टिकटिंग और ई-पेमेंट को भी सपोर्ट करेगा, जिससे पारंपरिक टिकटिंग प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होगी और रोजमर्रा के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में डिजिटल पेमेंट की सुविधा आएगी।
सरकार का कहना है कि टेक्नोलॉजी पर आधारित इस बदलाव का मकसद राज्य परिवहन निगम के कामकाज को ज्यादा तेजी से काम करने वाला और कुशल बनाना है। साथ ही यात्रियों के लिए सुरक्षा का माहौल बेहतर करना है। आईटीएमएस की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है, जब असम पब्लिक सर्विस और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। रियल टाइम मॉनिटरिंग से अधिकारियों को बसों के बेड़े की आवाजाही पर नजर रखने, कामकाज में देरी का पता लगाने और सड़क पर होने वाली घटनाओं पर ज्यादा असरदार तरीके से कार्रवाई करने में भी मदद मिल सकती है।
यह पहल ऐसे राज्य में खास तौर पर अहम साबित हो सकती है जहां पब्लिक बसें शहरी केंद्रों को छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों से जोड़ने वाला ट्रांसपोर्ट का एक अहम जरिया बनी हुई हैं। जीपीएस-इनेबल्ड ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और स्मार्ट शेड्यूलिंग को बसों के बेड़े में शामिल करके, असम सरकार आईटीएमएस को असम राज्य परिवहन निगम के आधुनिकीकरण में एक नए चरण के तौर पर पेश कर रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO–Industry Synergy Meet ‘VIMARSH 2026’ को किया संबोधित

15-Sep-2026
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मंगलवार को नई दिल्ली में DRDO–Industry Synergy Meet ‘VIMARSH 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए डीआरडीओ और इंडस्ट्री के बीच सहयोग सिर्फ़ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे रिसर्च, डिज़ाइन, टेस्टिंग, सर्टिफ़िकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसी पूरी वैल्यू चेन तक बढ़ाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य सिर्फ एक आर्थिक रूप से मज़बूत देश बनाना ही नहीं है, बल्कि उसे तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाना भी है। उन्होंने कहा, “2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी, घरेलू स्तर पर बनी चीज़ों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा, रक्षा निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी करनी होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।”
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व सुधारों का ज़िक्र किया। इनमें ‘पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट (Positive Indigenisation List) की घोषणा, ‘मेक इन इंडिया’ पहल, iDEX, ADITI और आयात पर निर्भरता कम करने व आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने के लिए रक्षा R&D बजट का 25% हिस्सा निजी क्षेत्र को आवंटित करने का फैसला शामिल है।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के जरिए स्टार्ट-अप्स को ग्रांट दी जा रही है और कई टेक्नोलॉजी पहले ही प्रोडक्शन के स्टेज तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि iDEX ने डिफेंस इनोवेशन के लिए एक नया इकोसिस्टम भी बनाया है, जहां स्टार्ट-अप्स असल ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर समाधान विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “DRDO के पास ज्ञान और टेक्नोलॉजी है, इंडस्ट्री के पास बड़े पैमाने पर काम करने और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है, स्टार्ट-अप्स इनोवेशन और तेजी लाते हैं, और युवाओं के मन में ‘नए भारत’ का सपना है। जब ये चारों ताकतें एक साथ मिलकर आगे बढ़ती हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।”
रक्षा मंत्री ने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी को भविष्य के युद्ध के लिए अहम क्षेत्र बताया। उन्होंने स्टार्टअप्स से इन क्षेत्रों में अवसरों को पहचानने, इनोवेशन को तेज़ करने और भारत की तकनीकी व रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपील की।
राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली में DRDO और इंडस्ट्री के बीच तालमेल बढ़ाने वाली बैठक ‘विमर्श’ (VIMARSH) के दौरान कई अहम पॉलिसी पहल की शुरुआत की है। इन पहलों में MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय रुकावटों को कम करने का एक व्यापक ढांचा शामिल है। इसमें उन्हें सीधे फंडिंग, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की टेस्टिंग सुविधाओं का खास एक्सेस देने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही, सॉफ्टवेयर-आधारित रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और पुराने हो रहे सिस्टम के मैनेजमेंट के लिए, DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर सोर्स कोड को लाइसेंस-प्राप्त इंडस्ट्रीज़ के साथ शेयर करने के लिए एक स्टैंडर्ड और सुरक्षित ढांचा भी लॉन्च किया गया। 
 

वैश्विक मंच पर शांति और समृद्धि की मजबूत आवाज के रूप में उभर रहा है भारत : उपराष्ट्रपति

15-Sep-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश)   भारत के उपराष्ट्रपति एवं इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सप्रू हाउस में आईसीडब्ल्यूए के ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा प्राप्त करने की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानव प्रगति और वैश्विक शांति एक-दूसरे की पूरक हैं। दुनिया में स्थायी शांति और समावेशी विकास तभी संभव है, जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी हितों के लिए सहयोग एवं साझेदारी की भावना से मिलकर काम करें।
उपराष्ट्रपति ने ब्रिक्स समिट के सफल आयोजन के लिए विदेश मंत्री और आईसीडब्ल्यए के उपाध्यक्ष डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टकराव और विरोधाभासों से जूझ रही दुनिया में, ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ को सर्वसम्मति से अपनाना एक बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति का पहला मकसद देशों के बीच अच्छे संबंध बनाना है। इंसानी तरक्की और विश्व शांति साथ-साथ चलनी चाहिए, और यह तभी संभव है जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी फायदे के लिए काम करें।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत शांति, तरक्की और खुशहाली के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात पर जोर दिया और इस सोच को असल में लागू करने के उदाहरण के तौर पर कोविड संकट के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’, भारत की आपदा-प्रबंधन कोशिशों, ‘लाइफ’ और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी वैश्विक पहलों का जिक्र किया।

उपराष्ट्रपति ने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की उपलब्धियों पर जोर देते हुए कहा कि “पारदर्शी पेमेंट सिस्टम से पारदर्शी गवर्नेंस आती है।” उन्होंने कहा कि भारत आईटीईसी और शैक्षिक सहयोग के जरिए ग्लोबल साउथ के साथ अपनी तकनीकी और संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है, जिसमें जांजीबार में भारत के बाहर पहला आईटीआई कैंपस भी शामिल है।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल ने आईसीड्ब्ल्यू की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘ग्लोबल साउथ’ और ‘इंडो-पैसिफिक’ प्राथमिकताओं पर रिसर्च को मजबूत करना; साइबर सिक्योरिटी, स्पेस, अहम टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर काम का दायरा बढ़ाना; यूनिवर्सिटी और युवा स्कॉलर्स के साथ जुड़ाव को गहरा करना और दुनिया के मामलों पर भरोसेमंद जानकारी का स्रोत बनना, जिसमें भारत का अपना सही नजरिया हो।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईसीडब्ल्यू को ‘विकसित भारत-2047’ के लिए बौद्धिक और संस्थागत रूप से खुद को तैयार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन के लिए दुनिया के सम्मानित केंद्रों में से एक बनने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि काउंसिल अपनी गोल्डन जुबली तक भारत और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था में और भी बड़ा योगदान देगी। उपराष्ट्रपति ने आसीडब्ल्यूए के सफर और विकास को दिखाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और काउंसिल में योगदान के लिए पूर्व महानिदेशकों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।
 

वाराणसी से राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ, आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन पर जोर

10-Sep-2026
नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ किया। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ विषय के तहत शुरू हुए महीने भर के राष्ट्रव्यापी अभियान में आहार में विविधता, भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, ताजा और गर्म पका भोजन, स्वच्छता तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए विभागों के बीच निरंतर समन्वय, सक्रिय सामुदायिक भागीदारी और अग्रिम पंक्ति के सेवा प्रदाताओं की प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बुनियादी ढांचे और शिक्षण वातावरण के साथ उन्नत और नवीनीकृत कर जीवंत सामुदायिक संस्थानों में बदला गया है।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वास्तविक समय में डेटा प्रविष्टि और डिजिटल निगरानी के जरिए सेवाओं की निगरानी और वितरण को बेहतर बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से जमीनी स्तर पर पोषण सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने पूरक पोषण सेवाओं को मजबूत किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र पात्र लाभार्थियों को नियमित रूप से गर्म पका भोजन और घर ले जाने के लिए राशन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि पोषण पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता, क्योंकि इसका लाभ स्वस्थ बच्चों, सशक्त परिवारों और मजबूत राष्ट्र के रूप में लंबे समय तक मिलता है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से पोषण परिणामों में सुधार की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों, 1.10 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा करीब 16 लाख किशोरियों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
अन्नपूर्णा देवी ने जीवन के पहले 1000 दिनों को बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों के रूप में उन्नत कर रही है। इनमें उत्तर प्रदेश के करीब 24 हजार केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों में बेहतर बुनियादी ढांचे और सेवाओं के माध्यम से बच्चों तथा माताओं को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के कार्यान्वयन के दस वर्ष पूरे हो गए हैं। योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए अब तक देशभर में 4.65 करोड़ से अधिक माताओं को 21 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि योजना मातृ स्वास्थ्य और पोषण परिणामों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान लोगों को संतुलित और विविध आहार के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन, स्वच्छता और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े विषय अभियान के प्रमुख केंद्र में रहेंगे। अन्नपूर्णा देवी ने पोषण संबंधी व्यवहार में स्थायी बदलाव के लिए सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
अन्नपूर्णा देवी ने लोगों से 2047 तक सुपोषित भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पोषण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों की सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब परिवार, समुदाय और स्थानीय संस्थाएं इनमें सक्रिय रूप से भागीदारी करें।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने समुदायों, पंचायती राज संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों और परिवारों से पोषण आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पोषण और बाल देखभाल सेवाओं को मजबूत करने में इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
महिला एवं बाल विकास सचिव अनिल मलिक ने कहा कि पोषण अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि व्यापक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही को और मजबूत करना होगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र के संस्थागत और तकनीकी सुदृढ़ीकरण को बेहतर सेवा गुणवत्ता में बदलने पर भी उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ से पहले गणमान्य व्यक्तियों ने पोषण मेले का अवलोकन किया। मेले में पोषण केंद्रित नवाचार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थ और आंगनवाड़ी केंद्रों की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में ताजा पका भोजन, घर ले जाने वाले राशन, गृह भ्रमण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से जुड़े लाभार्थियों के अनुभवों पर वीडियो भी दिखाए गए।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक किया जाएगा। अभियान के दौरान आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों में ताजा और गर्म भोजन, आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों एवं पूरक पोषण कार्यक्रम के मेनू बोर्डों के जरिए सामुदायिक स्वामित्व तथा बाल विकास से जुड़े पोषण और प्रारंभिक प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में एआई और तकनीक की भूमिका अहम: उपराष्ट्रपति

10-Sep-2026
नई दिल्ली। ईटानगर में दिव्यांग बच्चों के लिए बने डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा करने पहुंचे उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, खुद पर भरोसा रखने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ के गायन को सुनकर उपराष्ट्रपति भावुक हो गए और कहा कि उन्हें बच्चों के दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
उपराष्ट्रपति ने ईटानगर के चिम्पू स्थित डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा किया और सुनने, देखने तथा बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने संस्थान के विभिन्न गतिविधि क्षेत्रों का जायजा लिया और छात्रों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान का दौरा उन्हें गहरी भावुकता और देशभक्ति की भावना से भर गया। खास तौर पर छात्रों को ‘वंदे मातरम’ गाते हुए सुनना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों ने यह गीत इतनी ईमानदारी से गाया कि उन्हें उनके दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
सी. पी. राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश सरकार, डोनी-पोलो मिशन, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, पुनर्वास विशेषज्ञों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में राज्य सरकार की उपलब्धियां समाज के हर पहलू को कवर करती हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति अनोखा होता है और हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को खुद पर विश्वास रखने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रेरणादायक यात्रा का उदाहरण देते हुए छात्रों से उन लोगों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, जिन्होंने अपनी चुनौतियों पर विजय हासिल की है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि डोनी-पोलो मिशन स्कूल जैसे संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं। ये बच्चों को आशा, गरिमा, अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समावेशी ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में सार्थक योगदान देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकियां बाधाओं को दूर करने के साथ शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने छात्रों के लिए एआई-संचालित शिक्षण सामग्री और समग्र सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में डोनी-पोलो मिशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए सीखने के अवसरों को और बेहतर बना सकता है।
उपराष्ट्रपति ने विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए शिक्षकों तथा कर्मचारियों के असाधारण धैर्य, करुणा और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने बच्चों को सहयोग और प्रोत्साहन देने में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
अपने संबोधन के अंत में सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा, “आज, आपने मुझे बहुत सी बातें सिखाई हैं।” उन्होंने छात्रों के दृढ़ संकल्प और उनसे मिली प्रेरणा की सराहना की।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चौना मेन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा जनजातीय मामलों के मंत्री कोंटो जिनी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, डोनी-पोलो मिशन और उसके प्रबंधन के प्रतिनिधि, शिक्षक, पुनर्वास विशेषज्ञ, कर्मचारी तथा संस्थान के छात्र मौजूद रहे।
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने ईटानगर स्थित जे. एन. राज्य संग्रहालय का भी दौरा किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर की समृद्ध मानव जाति विज्ञान संबंधी विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने में संग्रहालय की भूमिका की सराहना की।

 


भारत इनोवेट्स युवा नवोन्मेषकों को वैश्विक अवसरों से जोड़ता है : प्रह्लाद जोशी

10-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विकास यात्रा के केंद्र में नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ जैसी पहल देश के युवा नवोन्मेषकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ वैश्विक हितधारकों, उद्योग जगत और नेटवर्क से जुड़ने का अवसर देती है। जोशी ने नई दिल्ली में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन करते हुए यह बात कही। पुस्तक में भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ के पहले संस्करण की यात्रा को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ प्रधानमंत्री के उस विजन का प्रतीक है, जिसके तहत युवा नवोन्मेषकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और वैश्विक हितधारकों के साथ जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल युवा भारत के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाती है तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े देश के इकोसिस्टम की क्षमता को सामने लाती है।
 केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ ने यह दिखाया है कि युवा प्रतिभाओं को यदि अवसरों, उद्योग जगत और वैश्विक नेटवर्क से जोड़ा जाए तो वे बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में मौजूद वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा को सही मंच देकर भारत नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है।
 केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने विकसित भारत के विजन को साकार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुसंधान, नवाचार, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई है। ‘भारत इनोवेट्स’ जैसी पहल इन प्राथमिकताओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है।
स्मारक पुस्तक में ‘भारत इनोवेट्स’ की पूरी यात्रा का विवरण दिया गया है। इसमें देशभर से प्रतिभाशाली डीप-टेक नवोन्मेषकों की खोज और चयन से लेकर फ्रांस के नीस में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उनके नवाचारों के प्रदर्शन तक की प्रक्रिया को दर्ज किया गया है। पुस्तक में इस पहल के दौरान हुई सहभागिता, संवाद और सामने आए परिणामों को भी शामिल किया गया है।
‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा और अनुसंधान इकोसिस्टम से उभरने वाले उच्च क्षमता वाले डीप-टेक नवाचारों की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ाना है। यह पहल नवोन्मेषकों को उद्योग, निवेशकों और अन्य संबंधित हितधारकों से जोड़ने के साथ प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक इस्तेमाल को गति देने पर केंद्रित है।
इस पहल का उद्देश्य नवोन्मेषकों को वैश्विक बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच के अवसर उपलब्ध कराना भी है। ‘भारत इनोवेट्स’ प्रयोगशाला से बाजार और परिसर से दुनिया तक एक निर्बाध मार्ग तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि शोध और नवाचार को व्यावसायिक उपयोग और वैश्विक सहयोग से जोड़ा जा सके।
‘भारत इनोवेट्स’ के पहले संस्करण में पूरे भारत से 120 डीप-टेक स्टार्टअप और नवोन्मेषकों के साथ 45 अनुसंधान परियोजनाओं को एक मंच पर लाया गया। प्रतिभागियों को अपनी तकनीकों का प्रदर्शन करने, उद्योग और निवेशकों के साथ संवाद करने तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बाजार के अवसर तलाशने का अवसर मिला।
स्मारक पुस्तक इस पूरी यात्रा के जरिए भारत के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, स्टार्टअप्स, उच्च शिक्षण संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े साझेदारों की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार क्षमता को सामने लाती है। इसमें देश के युवाओं की उद्यमशीलता की भावना और नई तकनीकों के क्षेत्र में उनकी संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है।
 

 


अमेरिका ने 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए, तीसरे देश की कंपनियों को भी निशाना बनाया

09-Sep-2026
नई दिल्ली(शोर संदेश) अमेरिका के वित्त विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी ‘स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स’ (एसडीएन) सूची में शामिल कर लिया है। इस कदम के साथ अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करते हुए उसकी बची हुई सभी एयरलाइंस को निशाने पर ले लिया है।
मंगलवार (स्थानीय समय) को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा कि ‘ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से ईरानी सरकार की अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों का समर्थन करती रही हैं।’ विभाग के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कथित तौर पर निजी एयरलाइंस का इस्तेमाल हथियारों की खरीद और ढुलाई तथा अपने कर्मियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करता रहा है।
स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पहली बार अक्टूबर 2011 में ईरान की एयरलाइन ‘महान एयर’ पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद 30 जुलाई को उसने उन कई कंपनियों को भी निशाना बनाया जिन्हें ‘महान एयर’ के जनरल सेल्स एजेंट के रूप में देखा जाता है। विज्ञप्ति के अनुसार, नए प्रतिबंध उन गुप्त फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और भ्रामक ट्रांजिट मार्गों को भी निशाना बनाते हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए करता है।
खास तौर पर, वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की चार कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियां ‘महान एयर’ को कार्गो सेवाएं और बिक्री से जुड़ी सहायता प्रदान कर रही थीं।
ओएफएसी ने उन अनुमतियों को भी निलंबित कर दिया है जिनके तहत विमान ईरान के ऊपर से उड़ान भर सकते थे और गैर-अमेरिकी एयरलाइंस अमेरिकी मूल या अमेरिकी नियंत्रण वाले वाणिज्यिक विमानों को ईरान ले जा सकती थीं।
इसके अलावा, वित्त विभाग के तहत काम करने वाले फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क ने वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि वे ईरान के विमानन उद्योग को समर्थन देने वाले खरीद नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दें।
विज्ञप्ति के मुताबिक, माहान एयर को 2026 की गर्मियों में कम से कम तीन बी-777 विमान मिले थे, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान के रास्ते भेजा गया था।
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍कि‍यन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि ‘आक्रमण करने वालों’ को अपने कदमों पर पूरी तरह पछतावा न हो जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है।
पेजेश्‍क‍ियन ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध का विरोध करता रहा है। हमारा मानना है कि लोगों के हितों की रक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने का रास्ता युद्ध भड़काने से बचने में है।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए। ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।”





 


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