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चक्रवात ‘अर्नब’ का झारखंड पर पड़ेगा बड़ा असर, 28-29 अक्टूबर को भारी बारिश और आंधी का ऑरेंज अलर्ट

27-Oct-2026
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए शक्तिशाली चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से झारखंड के मौसम में अचानक भारी बदलाव के आसार हैं। मौसम विभाग ने इसके मद्देनजर राज्यभर में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस तूफान के बाहरी प्रभाव (आउटर बैंड) के कारण झारखंड में 28 से 30 अक्टूबर के दौरान मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और भयंकर वज्रपात की आशंका जताई गई है। संभावित खतरे को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
मौसम केंद्र रांची के अनुसार, चक्रवात के असर से राज्य में मौसम का मिजाज तीन चरणों में बिगड़ेगा। 27 अक्टूबर से ही गोड्डा, देवघर, दुमका, रांची, धनबाद और बोकारो समेत 16 जिलों में येलो अलर्ट के तहत आसमान में घने बादल छाने और हल्की बारिश की शुरुआत होने की संभावना है। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर को और अधिक गंभीर रूप ले लेगा। इन दो दिनों के लिए राजधानी रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां समेत अधिकांश जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
30 अक्टूबर को भी पश्चिमी और मध्य झारखंड में इसका असर बना रहेगा, जबकि 31 अक्टूबर से मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है। आपदा की इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। रांची के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने नगर निगम, पुलिस, बिजली और स्वास्थ्य विभागों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा कर दिशानिर्देश जारी किए हैं। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए 28 और 29 अक्टूबर को कई प्रभावित जिलों में स्कूलों को बंद रखने का निर्णय स्थानीय समीक्षा के आधार पर लिया जा सकता है।
प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रांची समेत प्रमुख शहरों के निचले इलाकों, जलजमाव वाले हॉटस्पॉट और बड़े नालों की चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कच्चे मकानों या झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा सके। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित न हो, इसके लिए प्रमुख मार्गों पर क्रेन और भारी मशीनरी को स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि आंधी से गिरे पेड़ों या खंभों को तुरंत हटाया जा सके।
इसके अलावा, किसी भी संभावित विद्युत व्यवधान से निपटने के लिए बिजली विभाग का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है। कृषि विभाग ने भी किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उनसे आग्रह किया गया है कि वे अपनी कटी हुई फसलों और तैयार धान को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं ताकि खेतों में जलभराव से फसलों को बचाया जा सके।


 

लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस का भारत दौरा, राष्ट्रपति भवन में किया गया औपचारिक स्वागत

27-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  भारत दौरे पर आए लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलोइस का मंगलवार को राष्ट्रपति भवन प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रिंस एलोइस का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रिंस सोमवार को गुजरात के वडोदरा से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री (एमओएस) जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भारत और लिकटेंस्टीन के संबंधों में एक नया अध्याय। लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस अपनी भारत यात्रा के तहत वडोदरा का दौरा करने के बाद नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया। यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी।” प्रिंस एलोइस का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा: “दावोस में हमारी पिछली मुलाकात के बाद, मुझे उम्मीद है कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच के मैत्रीपूर्ण संबंधों को और सुदृढ़ किया जाएगा और आपसी सहयोग के जरिए हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाया जाएगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राजकीय यात्रा पर आए प्रिंस ने दौरे की शुरुआत मुंबई से की थी। उनके साथ पत्नी राजकुमारी सोफिया और उद्योगपतियों का एक उच्च-स्तरीय आधिकारिक और व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। यह 2026 में प्रिंस एलोइस की भारत की दूसरी यात्रा है; इससे पहले वे फरवरी में ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। वे इससे पहले 2010 और 2018 में भी भारत आ चुके हैं।
प्रिंस एलोइस राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक करेंगे। मंगलवार को प्रिंस एलोइस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में भी बैठक प्रस्तावित है। इस दौरान वे व्यापार और निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, तथा लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। साथ ही, वे क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी मंगलवार को प्रिंस एलोइस से मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रिंस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे, जो उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन भी करेंगी।






 

जो संकटों का सामना कर आगे बढ़ता है, वही सफलता के शिखर तक पहुंचता है : पीएम मोदी

27-Oct-2026
नई दिल्ली।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक सुभाषित शेयर किया है, जिसमें चुनौतियों का सामना कर सफलता के शिखर तक पहुंचने का संदेश दिया गया है।
पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति। संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जो मनुष्य चुनौतियों का सामना करने का साहस नहीं रखता, उसके लिए सफलता का मार्ग कठिन बना रहता है। किंतु जो व्यक्ति साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ संकटों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ता है, वही जीवन में सफलता के शिखर तक पहुंचता है।

पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से लिया गया है। इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया गया है कि महान सफलता या लक्ष्य प्राप्ति के लिए जीवन में जोखिम लेना अनिवार्य है। बिना जोखिम उठाए बड़ी उपलब्धियां नहीं मिलती।
इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि मनुष्य बिना किसी खतरे या जोखिम (संशय) में पड़े कभी कल्याण या श्रेष्ठ फल नहीं देख पाता, और अगर वह संकट या जोखिम मोल लेता है और जीवित बच जाता है, तभी उसे वास्तविक सफलता या सुख देखने को मिलते हैं। यानी जीवन में बड़ी उपलब्धियां या तरक्की बिना किसी अनिश्चितता या जोखिम का सामना किए संभव नहीं हैं।
इसके माध्यम से कहा गया है कि जोखिम उठाना जरूरी है, लेकिन पूरी बुद्धिमत्ता और सावधानी के साथ, जिससे कि उस संकट को पार करके जीवित रह सके और फल का आनंद लिया जा सके। प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया गया है कि लोगों को चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहिए।











 

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक आर्थिक शक्ति को मिली नई पहचान : योगी आदित्यनाथ

25-Oct-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए रविवार को कहा कि भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी आर्थिक शक्ति का नया अध्याय लिखा है। वाराणसी में भारतीय वायुसेना के ‘एयर शो’ में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं निर्णायक नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी आर्थिक शक्ति का नया अध्याय लिखा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है और आत्मनिर्भरता, नवाचार तथा विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ ‘नए भारत’ में लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हुई हैं। नीति-निर्माण के केंद्र में आम जनता है, गरीब कल्याण शासन की प्राथमिकता है, अंत्योदय आत्मनिर्भरता का आधार है और जनभागीदारी विकास को जन-आंदोलन का रूप दे रही है।’’ आदित्यनाथ ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, ‘‘आस्था, अस्मिता और आत्मविश्वास से परिपूर्ण नए भारत में सामाजिक न्याय, नारी सशक्तिकरण, डिजिटल नवाचार और आर्थिक समृद्धि की संभावनाएं साकार हो रही हैं। विकास की यह यात्रा जन-आकांक्षाओं को अवसरों में बदलते हुए राष्ट्र की सामर्थ्य को निरंतर विस्तार दे रही है।’’

उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आज जब विश्व के अनेक हिस्से हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, भारत लोकतांत्रिक स्थिरता, आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक चेतना के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में संकीर्ण मानसिकता वाली कुछ राजनीतिक ताकतें सत्ता के स्वार्थ में देश को अस्थिरता, अराजकता और अलगाववाद की भट्टी में झोंकने का षड्यंत्र रच रही हैं। वे राष्ट्रीय हितों को ताक पर रखकर वैश्विक मंचों पर भारत की छवि धूमिल करने का निरंतर प्रयास कर रही हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा इन चुनौतियों के बावजूद भारत अपने विकास के लक्ष्य के प्रति अडिग संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस राष्ट्रीय यात्रा में उत्तर प्रदेश अपनी विशाल कृषि क्षमता, विस्तृत होते औद्योगिक आधार, आधुनिक बुनियादी ढांचे और युवा शक्ति के सामर्थ्य के बल पर कृषि से विनिर्माण तक, निवेश से रोजगार सृजन तक, हर क्षेत्र में प्रगति को गति दे रहा है और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।’’

आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमारा संकल्प अटल है- राष्ट्रहित सर्वोपरि, राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण और विकास की गति अविराम। राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ भारत की प्रगति का यह महायज्ञ अनवरत जारी रहेगा।’’ मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो के लिए वाराणसी आ रहे प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आज अविनाशी काशी का आकाश भारतीय वायुसेना के शौर्य और पराक्रम से गौरवान्वित होगा। इस गौरवपूर्ण अवसर पर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।’’उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में आप दोनों का आत्मीय सानिध्य प्राप्त होगा।’’

नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : राष्ट्रपति मुर्मु

23-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खतरे से मुक्त हुआ है और माओवादी हिंसा का दर्द पीछे छोड़कर अब तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। जगदलपुर लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा महोत्सव-2026 के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि आदिवासी युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद के खतरे से जूझता रहा।” लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ इस खतरे से मुक्त हुआ और तेजी से प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’’ रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘केवल वानर सेना और ऋषि-मुनियों ने ही नहीं, बल्कि मेरा मानना है कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी समुदायों ने भी रावण को हराने में योगदान दिया था।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि नक्सली हिंसा का दर्द पीछे छोड़कर छत्तीसगढ़ तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज छत्तीसगढ़ के सामने विकास के कई रास्ते खुल रहे हैं। इसके लिए मैं केंद्र और राज्य सरकार को बधाई देती हूं। मुझे बताया गया है कि आदिवासी उद्यमियों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बाजारों से जोड़ने के प्रयास तेज किए गए हैं।’’

उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इन प्रयासों से समान विकास के जरिए 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी युवा देश को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएंगे।














 

भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास ‘इंद्र 2026’ संपन्न, व्लादिवोस्तोक से रवाना हुआ आईएनएस सह्याद्रि

23-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय नौसेना और रूसी नौसेना के बीच आयोजित द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘इंद्र 2026’ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। अभ्यास के समापन के बाद भारतीय नौसेना का जहाज ‘सह्याद्रि’ 20 अक्टूबर 2026 को रूस के व्लादिवोस्तोक से रवाना हुआ। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, आपसी तालमेल और पेशेवर सहयोग को मजबूत करना था।
‘इंद्र 2026’ में बंदरगाह और समुद्री चरण शामिल थे। बंदरगाह चरण के दौरान दोनों नौसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का निरीक्षण, रक्षा विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और परिचालन समन्वय से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके अलावा, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला।

अभ्यास के समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं की इकाइयों ने समन्वित युद्धाभ्यास, एकीकृत संचार, हेलीकॉप्टर संचालन और चिकित्सा निकासी (मेडिकल इवैक्यूएशन) का अभ्यास किया। इन गतिविधियों के माध्यम से समुद्र में संयुक्त परिचालन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, संचार व्यवस्था को मजबूत करने और विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

अभ्यास के दौरान आयोजित खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भारतीय तथा रूसी नौसेना के कर्मियों के बीच आपसी भाईचारे और विश्वास को बढ़ावा दिया। इन गतिविधियों ने पेशेवर सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे नौसैनिक संबंधों को और मजबूत करने में योगदान दिया।
‘इंद्र 2026’ का सफल समापन भारत और रूस के बीच स्थायी रक्षा एवं समुद्री साझेदारी को दर्शाता है। इस अभ्यास ने आपसी समझ, निरंतर नौसैनिक सहयोग और परिचालन तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। दोनों नौसेनाओं का यह संयुक्त प्रयास सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण समुद्री वातावरण बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। 

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के 40 किमी लंबे पठानकोट-दयालाचक खंड के दिसंबर में खुलने की संभावना: जितेंद्र सिंह

22-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) जम्मू-कश्मीर का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र धीरे-धीरे कनेक्टिविटी के एक नए युग की ओर अग्रसर हो रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली से जम्मू-कश्मीर के कटरा को जोड़ने वाले दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे पर तेजी से कार्य जारी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि इस एक्सप्रेसवे का लगभग 40 किलोमीटर लंबा महत्वपूर्ण पठानकोट-दयालाचक खंड दिसंबर में खुल सकता है।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे अपडेट। इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी को एक बड़ा विस्तार। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का लगभग 40 किलोमीटर लंबा पठानकोट-दयालाचक खंड दिसंबर तक खुलने की उम्मीद है।”
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “इससे लखनपुर टोल प्लाजा से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा और यात्रा का समय 50-70 मिनट से घटकर सिर्फ 25-30 मिनट रह जाएगा। ‘यात्रा को आसान’ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नरेंद्र मोदी सरकार की एक प्रमुख विशेषता रही है।”
आपको बता दें कि दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे 667 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड राजमार्ग है, जो दिल्ली को अमृतसर और कटरा से जोड़ता है। इसे तेज सड़क संपर्क उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात का दबाव कम करने और माता वैष्णो देवी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच को सुगम बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
जुलाई 2026 में इस एक्सप्रेसवे के प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया गया, जो दिल्ली और कटरा के बीच संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिल्ली से अमृतसर और दिल्ली से कटरा की यात्रा में लगने वाले समय को आधा कर देगा। इसके पूर्ण हो चुके खंडों से दिल्ली से कटरा तक की यात्रा का समय लगभग 14 घंटे से घटकर करीब 6 घंटे होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर तीर्थयात्रियों के आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ मार्ग के आसपास औद्योगिक गतिविधियों और माल ढुलाई व लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा देगा।

काशी तमिल संगमम 5.0 का रजिस्ट्रेशन पोर्टल लॉन्च, 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक होगा आयोजन

22-Oct-2026
नई दिल्ली। काशी और तमिलनाडु के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काशी तमिल संगमम का पांचवां संस्करण आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर को इसके लिए पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम देश के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में चलेंगे। इसका आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत भाषाई विविधता और ज्ञान परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

इस बार आयोजन की मुख्य विषयवस्तु ‘तिरुक्कुरल पढ़ें और समझें’ रखी गई है। इसका उद्देश्य तमिल भाषा के प्राचीन ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ में समाहित नैतिक और जीवन मूल्यों को देश के युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। इसके लिए शैक्षणिक गतिविधियों, विभिन्न भाषाओं में अध्ययन सामग्री और जनभागीदारी का सहारा लिया जाएगा। प्रयास होगा कि इस ग्रंथ की शिक्षाएं केवल पढ़ने तक सीमित न रहें, बल्कि लोग उन्हें अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएं।

पंजीकरण पोर्टल के शुभारंभ पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक एकता की मजबूत परंपरा रही है। देश के उत्तर और दक्षिण के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं के तहत बड़ी संख्या में लोग काशी और रामेश्वरम की यात्रा करते रहे हैं। यह दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि काशी तमिल संगमम के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, पेशेवरों, किसानों, कलाकारों, महिलाओं और आध्यात्मिक विद्वानों को एक मंच पर लाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी इस आयोजन के उद्देश्यों को समझ सकें। शिक्षा मंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी आगे बढ़ाएगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, काशी तमिल संगमम 5.0 के तहत तमिलनाडु से करीब 1,400 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। इन्हें लगभग 200-200 लोगों के सात समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह आठ दिवसीय यात्रा करेगा। इसमें चार दिन यात्रा के लिए और चार दिन विभिन्न स्थानों के भ्रमण तथा निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रखे जाएंगे। इस यात्रा में वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या शामिल होंगे। यहां प्रतिभागियों के लिए सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विषय आधारित और आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

इस बार युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। इसके जरिए नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं से परिचित कराने और उनके मूल्यों को आधुनिक शिक्षा, पेशेवर जीवन तथा समाज में अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।

काशी तमिल संगमम 5.0 के तहत देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य अलग-अलग विषयों और भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के बीच तिरुक्कुरल की शिक्षाओं की समझ विकसित करना है। इन कार्यक्रमों में ग्रंथ का व्यवस्थित अध्ययन, शोध और शिक्षण संस्थानों में विभिन्न गतिविधियां शामिल होंगी।
 

उपराष्ट्रपति ने राज्यों से अप्रचलित कानून निरस्त करने का किया आग्रह, कहा- विधिक सुधार बदलते समय के अनुरूप हों

22-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारतीय विधि आयोग द्वारा आयोजित ‘सहकारी संघवाद और विधिक सुधार: राष्ट्रीय एवं राज्य परिप्रेक्ष्य’ विषयक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है और सहकारी संघवाद की वास्तविक शक्ति राज्यों की विशिष्टताओं का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में मिलकर काम करने में निहित है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान संघ की शक्तियों, राज्यों की जिम्मेदारियों और उनकी वैध स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक रूपरेखा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सशक्त राज्य सशक्त संघ का निर्माण करते हैं और सहकारी शासन संवैधानिक आदर्शों को वास्तविक जनकल्याण में बदलने का माध्यम है।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘टीम इंडिया’ की परिकल्पना केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय और साझा दायित्व की भावना को आगे बढ़ाती है। व्यापक जनहित में मिलकर काम करने के रास्ते में राजनीतिक मतभेदों को बाधा नहीं बनना चाहिए।
सी. पी. राधाकृष्णन ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में विधिक सुधारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास को मजबूत कानूनों, पारदर्शी संस्थाओं, कुशल प्रशासन और सभी नागरिकों के लिए न्याय का समर्थन मिलना आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने पिछले 12 वर्षों में औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों को प्रतिस्थापित करने और 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त किए जाने को भारत की विधिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने राज्यों के विधि आयोगों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों की पहचान करने तथा उन्हें संशोधित या निरस्त करने की सिफारिश करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे जीवनयापन में सुगमता और कुशल शासन को बढ़ावा मिलेगा।
विधिक सुधारों में सहकारी संघवाद के महत्व पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ हर मामले में एकरूपता स्थापित करना नहीं है। जहां केंद्र और राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियां एक-दूसरे से जुड़ती हैं, वहां दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। इसके साथ ही राज्यों की वैध स्वतंत्रताओं को भी संरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि वे अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित कर सकें।
उपराष्ट्रपति ने अंतरराज्यीय परामर्श, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और पुराने कानूनों की व्यवस्थित समीक्षा के माध्यम से भारतीय विधि आयोग, राज्य विधि आयोगों और राज्य विधि विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।
संसद में स्थापित सेंगोल का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने इसे धर्मसम्मत सत्ता और नैतिक शासन का प्रतीक बताया। उन्होंने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए सुशासन और विधि के शासन के पालन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल सत्ता का प्रयोग नहीं, बल्कि सुशासन ही स्थायी सफलता और समृद्धि का आधार है।
उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन से एक सुसंगत, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित विधिक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में ठोस और क्रियान्वयन योग्य सिफारिशें सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि विधिक सुधारों को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना जरूरी है और कानून का अंतिम उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए न्यायपूर्ण, सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना होना चाहिए।

 


पुलिस स्मृति दिवस पर पीएम मोदी ने शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, कहा- ‘उनका साहस और बलिदान हमेशा रहेगा याद’

21-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस स्मृति दिवस पर उन बहादुर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। पीएम मोदी ने कहा कि इन जवानों का साहस, अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान देश की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पुलिस स्मृति दिवस हमारे पुलिस कर्मियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराधों से लड़ने, आपातकालीन स्थितियों में मदद करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, उनका योगदान अमूल्य है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम उन बहादुर पुलिस कर्मियों को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका साहस, अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान हमारे देश की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस अवसर पर पुलिस बलों के शहीदों को नमन किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “पुलिस स्मृति दिवस पर, हमारे पुलिस बलों के उन शहीदों को नमन, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे पुलिसकर्मियों ने मातृभूमि की आन-बान और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देशभक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण पेश किया है। मैं राष्ट्र की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता और एकता के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर पुलिसकर्मियों का त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा सदैव राष्ट्र की स्मृतियों में अमिट रहेगा। उन्होंने सभी अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और देशभर में सेवारत पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञता जताई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “सेवा, समर्पण और साहस जैसे मूल्यों को धारण कर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद पुलिसकर्मियों के चरणों में पुलिस स्मृति दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। हमारे जांबाज सिपाहियों के वीरतापूर्ण व्यक्तित्व और बलिदान ने देश की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखा है। प्रत्येक भारतवासी को आप सभी पर सदैव गर्व रहेगा। जय हिंद।”
गौरतलब हो, पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।










 


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