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कलेक्टोरेट में 16 सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान, कलेक्टर ने दी नई पारी की शुभकामनाएं

03-Nov-2026
जगदलपुर।( शोर संदेश ) जिला कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में सोमवार को अक्टूबर माह में शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए 16 अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए एक गरिमामय सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कलेक्टर आकाश छिकारा ने सभी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों को उनके उत्कृष्ट सेवाकाल के लिए शॉल एवं श्रीफल सहित पेंशन प्राधिकार पत्र भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना की।  
इस सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण 30 से 40 वर्ष पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ शासकीय सेवा को देना अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा में विभिन्न नियमों, प्रक्रियाओं और जनअपेक्षाओं के बीच रहकर दायित्व निर्वहन करना एक बड़ी उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ और विशेषकर बस्तर जिले के समग्र विकास में आप सभी शासकीय सेवकों का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।  
कलेक्टर ने सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे स्वयं को केवल ‘रिटायर्ड’ न समझें, बल्कि यह उनके जीवन की एक नई और ऊर्जावान ‘सेकंड इनिंग्स’ की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि शासकीय दायित्वों के दौरान परिवार और व्यक्तिगत रुचियों के लिए समय निकालना कठिन हो जाता है, ऐसे में अब समय है कि वे अपने परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल से अर्जित उनका ज्ञान और प्रशासनिक अनुभव समाज के लिए बेहद उपयोगी है, इसलिए वे अपने आसपास के नागरिकों और युवाओं को सही मार्गदर्शन देकर एक जागरूक नागरिक का दायित्व निभाते रहें।  
इस अवसर पर कलेक्टर ने जिला कोषालय की कार्यप्रणाली की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने बताया कि नियमित टीएल बैठकों में समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों के पेंशन, जीपीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य स्वत्वों के प्रकरण समय पर तैयार हों। बस्तर जिले में अब लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में सेवानिवृत्ति के दिन ही पीपीओ और संबंधित लाभ उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो शासकीय सेवकों के हित में एक सराहनीय पहल है।  
इस अवसर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी अपनी सेवा यात्रा के संस्मरण साझा किए। सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने अपने 39 वर्षों के सेवाकाल का उल्लेख करते हुए बस्तर में शिक्षा की गुणवत्ता, नवोदय विद्यालय चयन, एनएमएमएस छात्रवृत्ति और बोर्ड परीक्षाओं में आए सकारात्मक बदलावों में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के अवसर पर इस तरह का मान-सम्मान मिलना पूरे सेवाकाल की मेहनत को सार्थक बना देता है।  
इस गरिमामय कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अनिल कुमार पाठक सहित जिला कोषालय के अधिकारी-कर्मचारी, सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के परिजन और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।






















 

इंद्रावती के कछार से सहकारिता के शीर्ष तक, बस्तर के धनसिंह बघेल को मिलेगा राज्य का प्रतिष्ठित सम्मान

03-Nov-2026
जगदलपुर।( शोर संदेश ) राज्य शासन द्वारा बस्तर के चित्रकोट स्थित प्राथमिक कुडुक मछुआ एवं नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष धनसिंह बघेल को सहकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य के प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इंद्रावती नदी के तट पर बसे इस अंचल में कभी ग्रामीण केवल पारंपरिक मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और कृषि पर ही आश्रित थे। मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2009 में 42 सदस्यों को संगठित कर इस समिति की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर ग्राम पंचायत के रावन मुंडा और वर्ष 2014 से चित्रकोट सिंचाई जलाशय को पट्टे पर लेकर मत्स्यपालन की दिशा में एक नया मोड़ लिया।  
प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के पर्यटन महत्व को देखते हुए समिति ने सहकारिता विभाग के माध्यम से नौका विहार को भी अपनी गतिविधियों में शामिल किया। वर्तमान में 62 सदस्यों (41 पुरुष एवं 21 महिलाएं) की सहभागिता वाली यह समिति आजीविका और स्वावलंबन का एक सशक्त केंद्र बन चुकी है। जलाशय एवं नदी से प्रतिवर्ष क्रमशः 1,980 और 3,600 किलोग्राम मछली उत्पादन कर करीब  साढ़े 9 लाख रुपये की आय अर्जित की जा रही है, जबकि पर्यटकों को नौका विहार कराकर सालाना लगभग 8 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ 10 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जिसमें अकेले वर्ष 2024-25 में ही 8,32,985 रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज हुआ।  
वर्तमान में इस समिति के पास 250 लाइफ जैकेट, 7 नावें और आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। शासन की अनुदान और योजनाओं से मिली शुरुआती मदद के बाद अब यह समिति पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुकी है, जिसके दम पर इन्होंने अपने स्वयं के खर्चे से मछली अवतरण के लिए लैंडिंग सेंटर का निर्माण कराया है और परिवहन हेतु पिकअप वाहन भी खरीदा है। इस आर्थिक प्रगति से सभी 62 परिवारों के जीवनस्तर में व्यापक बदलाव आया हैय सदस्य अपने आवागमन के लिए मोटरसाइकिल खरीद रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में सक्षम हुए हैं। धनसिंह बघेल के नेतृत्व में इस समिति ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों, सहकारिता और पर्यटन के सुनियोजित मेल से वनांचल के लोगों की तकदीर बदली जा सकती है।


























 

बीजापुर से रायपुर जा रही बस पलटी, 5 लोगों की हालत गंभीर

01-Nov-2026
जगदलपुर।( शोर संदेश ) बीजापुर जिले में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। बीजापुर से रायपुर-दुर्ग जा रही मनीष बस भैरमगढ़ के पास बांगापाल में अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल नेलसनार अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी घायलों के उपचार के लिए आवश्यक तैयारियां की गई है। पूरा मामला नेलसनार थाना क्षेत्र का है।
भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर एवं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर रमेश तिग्गा ने बताया कि फिलहाल घायलों को नेलसनार अस्पताल ले जाया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी पूरी तैयारियां कर ली गई है। जैसे ही कोई मरीज यहां पहुंचता है, उसका तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। दुर्घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर आर हेमंत कुमार ने जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल में प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर

30-Oct-2026
जगदलपुर: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर जनजातीय कल्याण आर. हेमंत कुमार बस्तर जिले के भ्रमण के दौरान एकलव्य मॉडल स्कूल तोकापाल सहित प्रयास विद्यालय जगदलपुर का निरीक्षण कर बच्चों के शैक्षणिक एवं समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और इन बच्चों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की पुस्तकें भी उपलब्ध करवाने कहा। वहीं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का निरीक्षण में युवाओं के कौशल विकास प्रशिक्षण संबंधी जानकारी ली और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने वाले ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान करने पर बल दिया। उन्होंने कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में आयोजित जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक के दौरान जिले में अनुसूचित जनजाति और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के अधिकारों, संवैधानिक संरक्षण तथा धरातल पर संचालित विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने कहा। बैठक में सीईओ जिला पंचायत तन्मय खन्ना, डीएफओ दीपेश कपिल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मानिटर जनजातीय कल्याण आर हेमंत कुमार ने जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में लक्षित माताओं एवं बच्चों को समेकित बाल विकास सेवाओं यथा स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पौष्टिक आहार की उपलब्धता सहित किशोरी बालिकाओं में एनीमिया की रोकथाम एवं फूड सप्लीमेंट के जरिये आयरन की उपलब्धता, आश्रम-छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों के बच्चों का रोस्टर के आधार पर स्वास्थ्य परीक्षण करने सहित स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फूड सप्लीमेंट के माध्यम से आयरन फोलिक एसिड कंटेनेंट की उपलब्धता के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाने पर जोर दिया। साथ ही इस संबंध में समुदाय की जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने आजीविका गतिविधियों के लिए कृषि तथा कृषि के आनुषांगिक पशुपालन, उद्यानिकी व मत्स्यपालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं बताई और इन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने कहा और विशेष तौर पर कड़कनाथ कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं लघु वनोपज के संग्रहण व मूल्य संवर्धन करने सहित उत्पादों के विपणन के लिए सकारात्मक पहल किए जाने पर बल देते हुए बेहतर मार्केटिंग प्लान बनाने कहा। वनोपज आधारित उत्पाद बनाने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने सहित आजीविका गतिविधियों तथा खेती- किसानी व आनुषांगिक गतिविधियों के लिए अधिकाधिक बैंक लिंकेज सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता निरूपित की और सहकारी बैंकों को इस दिशा में निर्धन परिवारों को सशक्त बनाने के हेतु सार्थक प्रयास करने कहा। उन्होंने भूमि स्वामियों के अभिलेखों का समुचित संधारण एवं उन्हें भूमि संबंधी दस्तावेज प्रदाय करने सहित उनकी समस्याओं का निस्तारण के लिए निरंतर प्रयास किए जाने पर जोर दिया।
 
बैठक में सीईओ जिला पंचायत तन्मय खन्ना ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर आर हेमंत कुमार के द्वारा दिए गए सुझावों एवं साझा किए गए अनुभवों को जिले के सभी विभागों के जरिये समन्वित रूप से क्रियान्वित करने का भरोसा दिलाया और उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

 


बस्तर के लालबाग में वनोपज से सजी 20,700 वर्गफीट की भव्य रंगोली ने रचा विश्व रिकॉर्ड, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन

25-Oct-2026
बस्तर ।( शोर संदेश ) बस्तर जिले के जिला मुख्यालय जगदलपुर का लालबाग का मैदान शुक्रवार की सुबह एक अलग ही रंग ले चुका था। यहाँ मैदान का एक बड़ा हिस्सा कैनवास बन चुका था और उसमें वनोपज व अनाज रंग बन चुके थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर दशहरा के मौके पर बस्तर आगमन पर यह अनोखी और अद्वितीय कलाकृति वन विभाग की ओर से तैयार कराई गई थी। 15 से अधिक वनोपज व अनाज का इस्तेमाल करते हुए 20,700 वर्गफीट क्षेत्रफल में सुंदर आकृतियां उकेरी गई थीं। इसका अवलोकन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं अन्य अतिथियों ने किया। वनोपज से रंगोली की विशिष्टता को देखते हुए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से इस अद्भुत रंगोली को प्रमाणित भी किया गया।

गौरतलब है कि बस्तर दशहरा के दौरान पहली बार देश के प्रथम नागरिक का आगमन माई दंतेश्वरी की धरा पर हुआ। दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुँचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 23 अक्टूबर को जगदलपुर आगमन हुआ। यहाँ माई दंतेश्वरी से आशीर्वाद लेने के बाद वे मुरिया दरबार में शामिल हुईं, फिर लालबाग मैदान में सभा को सम्बोधित करने पहुँचीं। उनके इस प्रवास को लेकर बस्तर में उत्साह दिखा। इसी बीच वन विभाग ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदलते बस्तर की तस्वीर को रंगोली के माध्यम से राष्ट्रपति के समक्ष रखा। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, प्राकृतिक संपदा तथा क्षेत्र की विकास यात्रा को रंगोली के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इस रंगोली की खासियत वनवासियों द्वारा एकत्र किए गए वनोपज रहे, जिनका इस्तेमाल रंगोली में रंगों के रूप में किया गया था। इस कलात्मक अभिव्यक्ति में बस्तर के वन, वनवासी जीवन, जनजातीय संस्कृति तथा माननीय राष्ट्रपति जी के सम्मानित स्वरूप को उकेरा गया है।

यह विशाल रंगोली बस्तर की प्राकृतिक संपदा, स्थानीय समुदायों की सृजनशीलता और परंपरागत ज्ञान का प्रतीक है। वनोपज बस्तर के जनजातीय एवं वनवासी समुदायों की आजीविका, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है। वनोपज आधारित आजीविका के संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण तथा स्थानीय संसाधनों के सतत् उपयोग के माध्यम से क्षेत्र के समावेशी विकास की संभावनाओं को भी इस प्रस्तुति के माध्यम से रेखांकित किया गया।

बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं, जनजातीय आस्थाओं और सामुदायिक सहभागिता के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। इस पावन सांस्कृतिक अवसर पर आयोजित यह प्रस्तुति बस्तर की परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण तथा विकास की आकांक्षाओं के मध्य समन्वय को अभिव्यक्त करती है। राष्ट्रपति के इस प्रवास कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 


जिले की सभी सहकारी समितियों में ’कृषक उन्नति योजना’ के लिए पंजीयन जारीः फसल विविधीकरण से किसानों की आय में होगा इजाफा

25-Oct-2026
अम्बिकापुर : राज्य शासन की महत्वाकांक्षी 'कृषक उन्नति योजना' का लाभ जिले के प्रत्येक किसान तक पहुंचाने के लिए वर्तमान में जिले की सभी सहकारी समितियों (सोसाइटी) में किसानों के पंजीयन का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। शासन की इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देकर किसानों को आर्थिक रूप से अधिक सुदृढ़ बनाना है।
योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण दरिमा तहसील के ग्राम लिबरा निवासी युवा किसान अभिषेक सिंह ने प्रस्तुत किया है। अभिषेक सिंह, जिनके पिता का नाम मदन सिंह है, पूर्व में अपनी कृषि भूमि पर मुख्य रूप से धान की खेती किया करते थे। परंतु शासन की योजनाओं से प्रेरित होकर इस वर्ष उन्होंने नवाचार किया है और अपनी लगभग आधा एकड़ जमीन में धान के स्थान पर अदरक की फसल लगाई है।
किसान अभिषेक सिंह का स्पष्ट मानना है कि धान की तुलना में अदरक की खेती से उन्हें ज्यादा पैदावार और कहीं अधिक आर्थिक फायदा प्राप्त होगा। हालांकि, उनका कहना है कि इस फसल से होने वाले वास्तविक मुनाफे का सटीक पता बाजार में फसल बिकने के बाद ही चल सकेगा।
सरकारी योजना का पारदर्शी तरीके से लाभ उठाने के लिए अभिषेक सिंह दरिमा स्थित सहकारी समिति में अपना विधिवत पंजीयन करवाने पहुंचे। उन्होंने जानकारी दी कि वे अपनी उस जमीन पर अदरक की फसल का पंजीयन करवा रहे हैं, जहाँ उन्होंने पहले धान की खेती की थी। अभिषेक के अनुसार, 'कृषक उन्नति योजना' के अंतर्गत यह पंजीयन पूर्ण हो जाने पर, उन्हें शासन की ओर से प्रति एकड़ पंद्रह हज़ार रुपये तक का सीधा लाभ प्राप्त होगा।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी कृषक बंधुओं से यह अपील की जाती है कि वे अभिषेक सिंह की भांति ही शासन की जन हितैषी योजनाओं के प्रति जागरूक बनें। जो भी किसान 'कृषक उन्नति योजना' के तहत धान के बदले अथवा धान के अतिरिक्त ले रहे अपने फसलों का पंजीयन नजदीकी सहकारी समिति में संपर्क कर सुनिश्चित कराएं।

 


समय-सीमा में कार्य पूर्ण करें नहीं तो होगी कार्रवाई-प्रमुख अभियंता केके कटारे

20-Oct-2026
जगदलपुर।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-1 के अंतर्गत शेष रह गए अपूर्ण कार्यों को गति देने और निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के उद्देश्य से बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, रायपुर के प्रमुख अभियंता केके कटारे ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्य तय समय में पूरे किए जाएं, अन्यथा संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  
भारत सरकार द्वारा पीएमजीएसवाई फेज-1 के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण करने हेतु मार्च 2027 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसी अनुक्रम में बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर जिलों में प्रगतिरत कार्यों की सड़कवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान प्रमुख अभियंता ने संभाग के कुल 125 अपूर्ण कार्यों जिसमें 83 पूर्व अनुबंधित और 42 नवीन अनुबंधित कार्य शामिल हैं। इन सभी कार्यों के लिए माहवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए मार्च 2027 तक समस्त निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।  
इस बैठक में अधीक्षण अभियंता द्वारिका प्रसाद भुआर्य, कार्यपालन अभियंता रवींद्र ताती, वैभव देवांगन, रूपेन्द्र भुआर्य, अनिल बरेठ सहित संबंधित ठेकेदार उपस्थित रहे। प्रमुख अभियंता ने सभी अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्माण में तेजी लाने के निर्देश जारी किए।
 

सहकारिता से समृद्धि की नई राह, बस्तर में जुटे देशभर के विशेषज्ञ

08-Oct-2026
जगदलपुर। ( शोर संदेश )  मां दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर के जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशाॅप का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सुझाव और मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां सम्मेलन ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य ध्येय सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के सबसे दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक समृद्धि और विकास का लाभ पहुंचाना है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने रेखांकित किया कि सहकारिता की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे। असम में शांति बहाली के बाद आई विकास की गति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ठीक वैसा ही सकारात्मक और अभूतपूर्व बदलाव आज बस्तर की धरती पर भी महसूस किया जा रहा है। प्राथमिक कृषि साख समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बताते हुए उन्होंने देश भर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स की स्थापना, उनके पूर्ण डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में रूपांतरण और विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही उन्होंने नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के विविधीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के पारदर्शी व सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन पर विशेष बल दिया।

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ते हुए सहकारिता को केवल पारंपरिक खाद व ऋण वितरण तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन का सशक्त माध्यम बनाने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन हो चुका है और डेयरी, मत्स्य पालन तथा लघु वनोपज के क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर तेजी से काम जारी है। इन समितियों को डिजिटल करने के साथ-साथ माइक्रो-एटीएम और सीएससी सुविधाओं से लैस किया गया है, जिससे ग्रामीण आबादी को नागरिक सेवाएं मिलने के साथ समितियों की आय भी बढ़ी है। औद्योगिक विस्तार की चर्चा करते हुए उन्होंने कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों का उल्लेख किया और कहा कि गुजरात व महाराष्ट्र के सफल मॉडलों की तरह इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल हासिल करने के लिए नेफेड, एनसीसीएफ और बीबीएसएसएल जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।
सम्मेलन में अन्य राज्यों के अनुभवों को साझा करते हुए तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने बताया कि उनके राज्य ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट तथा विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उन्हें जमीन पर उतारा है। तमिलनाडु का सहकारी तंत्र राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिक समितियों के उत्पादों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध करा रहा है।
सत्र के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर के जीवट और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रभावशाली खाका खींचा। उन्होंने साझा किया कि मात्र पंद्रह दिन पहले ही यह पूरा क्षेत्र भारी जलभराव से जूझ रहा था और सम्मेलन का सभागार भी कई दिनों तक पानी में डूबा रहा, लेकिन प्रशासन और पूरी टीम ने इस प्राकृतिक आपदा को चुनौती मानकर बहुत कम समय में परिसर का कायाकल्प कर इसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार कर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि अतीत के संघर्षों को पीछे छोड़कर बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है और यहां सहकारिता के क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाएं स्थानीय आजीविका को नई ऊंचाई देंगी। सम्मेलन के शुरूआत में देश में सहकारिता की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को लघु फिल्म के द्वारा प्रदर्शित किया गया। साथ ही सम्मेलन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों एवं संस्थाओं द्वारा अपने उत्पादों से संबंधित स्टाॅल लगाया गया है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारियों द्वारा अपने अनुभव साझा करने सहित सहकारिता के क्षेत्र में नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में अवगत कराया जाएगा।
बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिवों और पंजीयकों तथा विभिन्न सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह दो दिवसीय मंथन देश भर में सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति और दिशा देने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित









 

 


बस्तर के बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए आगे आए सामाजिक संगठन और सहकारी बैंक परिवार

07-Oct-2026
बस्तर (शोर संदेश)। बस्तर जिले में विगत दिनों हुई भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए विभिन्न संस्थाएं और संगठन आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी-कर्मचारियों और बंगाली समाज मैत्री संघ, जगदलपुर ने मानवीय संवेदना और सामाजिक दायित्व का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में कुल 2 लाख 22 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों ने स्वेच्छा से 2 लाख 1 हजार रुपए की राशि एकत्रित की। इस सहायता राशि का चेक बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप और उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को सौंपा। इस अवसर पर बैंक के सीईओ के.एस. ध्रुव, अतिरिक्त सीईओ एस.ए. रजा, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आर.के. सूर्यवंशी, सचिव आशीष बराल सहित बैंक के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
इसी तरह जगदलपुर की बंगाली समाज की संस्था मैत्री संघ ने भी बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए 21 हजार रुपए का योगदान दिया। संस्था के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री सहायता कोष के नाम सहायता राशि का चेक कलेक्टर आकाश छिकारा को सौंपा। इस दौरान मैत्री संघ के अध्यक्ष पक घोष, महासचिव सुनील साहा, कोषाध्यक्ष देवाशीष चौधरी, संयुक्त सचिव देवव्रत बराल और वरिष्ठ सदस्य अशोक रंजन मुखर्जी उपस्थित थे। महासचिव सुनील साहा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होकर उन्हें सहायता उपलब्ध कराना सामाजिक और नैतिक दायित्व है। संस्था जनहित और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों में सदैव तत्पर रही है।


 

 


बाकेल में फलोद्यान का लोकार्पण, वन मंत्री कश्यप ने 89.23 लाख के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

04-Oct-2026
बस्तर (शोर संदेश)।वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर जिले के वन परिक्षेत्र भानपुरी अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकेल में विकसित फलोद्यान का लोकार्पण किया। उन्होंने क्षेत्र में 89.23 लाख रुपये की लागत के चार विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। वन विभाग द्वारा 13 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित फलोद्यान में उच्च गुणवत्ता की ग्राफ्टेड एवं हाइब्रिड किस्मों के 7,800 फलदार पौधे रोपित किए गए हैं। 

वन मंत्री कश्यप ने 2 से 8 अक्टूबर तक मनाए जा रहे वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर नागरिकों से वन्यप्राणियों के प्रति संवेदनशील रहने और उनके संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने बस्तर के जंगलों में वन्यप्राणियों की बढ़ती संख्या और उनकी गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए मानव और वन्यजीवों के बीच सहअस्तित्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ का संदेश भी साझा किया गया।

वन मंत्री कश्यप ने ग्राम पंचायत गुनपुर में मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना के अंतर्गत 27.88 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क सह नाली निर्माण, ग्राम पंचायत घोटिया में 30 लाख रुपये की लागत से महतारी सदन निर्माण, ग्राम पंचायत भानपुरी के फरसागुड़ा नेताजी पारा में 24.35 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण तथा ग्राम पंचायत तारागांव में मुख्य मार्ग से तालाब पहुंच मार्ग पर 7 लाख रुपये की लागत से 2 मीटर पुलिया निर्माण का भूमिपूजन किया।
इस अवसर पर पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, इंद्रावती विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शरद अवस्थी, जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान, मुख्य वन संरक्षक स्टायलो मंडावी, डीएफओ  दीपेश कपिल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

 



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