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मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान : 13 किलोमीटर पैदल चलकर स्वास्थ्य टीम पहुंची बड़ेपल्ली, 227 ग्रामीणों की जांच

31-May-2026
रायपुर, ( शोर संदेश  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को 'आयुष्मान भारत योजना' की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।







 

108 संजीवनी एक्सप्रेस कर्मियों की सूझबूझ से एम्बुलेंस में हुआ सुरक्षित प्रसव

28-May-2026
रायपुर  ( शोर संदेश  108 संजीवनी एक्सप्रेस कर्मियों की सूझबूझ से एम्बुलेंस में हुआ सुरक्षित प्रसवआपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 संजीवनी एक्सप्रेस एक गर्भवती महिला के लिए जीवनदायिनी साबित हुई। 108 एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता, सूझबूझ एवं संवेदनशीलता से एक गर्भवती महिला का एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार बेमेतरा जिले के ग्राम आनंदगांव निवासी श्रीमती मानसी, पति दीपक, उम्र 24 वर्ष को गर्भावस्था संबंधी जटिलता होने पर जिला चिकित्सालय बेमेतरा में भर्ती कराया गया था। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर रेफर किया। इसके बाद 108 संजीवनी एक्सप्रेस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस के पायलट नीलमणि एवं ईएमटी कलावती गायकवाड़ तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचे और गर्भवती महिला को एम्बुलेंस में शिफ्ट कर रायपुर के लिए रवाना हुए।
रायपुर पहुंचने से पहले धरसीवां के आसपास महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईएमटी कलावती गायकवाड़ ने परिजनों की सहमति एवं पायलट नीलमणि के सहयोग से एम्बुलेंस में ही प्रसव कराने का निर्णय लिया। ईएमटी द्वारा सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं एवं सावधानियों का पालन करते हुए सुरक्षित प्रसव कराया गया। कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा एवं नवजात शिशु को बेहतर देखभाल हेतु मेकाहारा रायपुर में भर्ती कराया गया, जहां दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। परिजनों ने विपरीत परिस्थितियों में तत्परता एवं मानवता का परिचय देते हुए सुरक्षित प्रसव कराने पर 108 संजीवनी एक्सप्रेस टीम, ईएमटी कलावती गायकवाड़ एवं पायलट नीलमणि का आभार व्यक्त किया।
 

आयुष विभाग की पहल: आयुर्वेद पद्धति से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

27-May-2026
रायपुर(शोर संदेश) आयुष विभाग द्वारा चार प्रमुख राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली बच्चों, गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं, असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों एवं जोड़ों व मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों को आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा एवं देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम ‘आयुर्विद्या‘ के तहत स्कूली बच्चों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता उत्पन्न करते हुए उनकी जीवनशैली में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच, योग के प्रति प्रशिक्षण एवं आयुर्वेद विषयक जागरूकता व्याख्यान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों को औषधीय उद्यान एवं आयुर्वेद चिकित्सालयों के भ्रमण की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे उनमें आयुष पद्धति के प्रति रुचि उत्पन्न हो सके। 
इसी प्रकार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम सुप्रजा के अंतर्गत गर्भवती माताओं की देखभाल, उचित गर्भिणीचर्या, नवजात एवं शिशु की देखभाल के साथ-साथ ए.एन.सी., पी.एन.सी. एवं गर्भ संस्कार के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।  इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदिक पद्धति से माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना है, जिससे एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण हो सके।
राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘‘कारूण्य-पैलिएटिव केयर‘‘ (प्रशामक देखभाल) एक ऐसा संवेदनशील दृष्टिकोण है, जो जीवन-घातक बीमारियों से जूझ रहे रोगियों एवं उनके परिजनों की शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। इस कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की टीम द्वारा घर-घर जाकर असाध्य रोगियों का उपचार एवं देखभाल की जा रही है। यह कार्यक्रम मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील एवं समाजोपयोगी सिद्ध हो रहा है तथा रोगियों के परिजनों के लिए भी एक बड़ा संबल बना है।
वहीं ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम जोड़ों एवं मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों के लिए संचालित एक विशेष पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उन्हें जोड़ों व मांसपेशियों की समस्याओं के प्रभावी प्रबंधन में सहायता प्रदान करना है। उल्लेखनीय है कि आयुष विभाग द्वारा निरंतर शिविरों, जन-जागरूकता अभियानों एवं घर-घर पहुंच सेवाओं के माध्यम से इन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
 

भीषण गर्मी से लोगों का हाल-बेहाल, WHO ने बताए गर्मी से बचाव के उपाय

22-May-2026
नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। हीटवेव, उमस और तेज तपिश से लोगों का हाल-बेहाल हो रहा है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारें लगातार स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी जारी कर रही हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO) ने गर्मी से संबंधित बीमारियों के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी है।

गर्मी से होने वाली बीमारियों से सतर्क रहने की सलाह

डब्ल्यूएचओ ने लोगों को गर्मी से होने वाली बीमारियों से सतर्क रहने की सलाह दी है। हीटवेव के दौरान अगर तबीयत खराब महसूस हो तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए। गर्मी से होने वाली बीमारियों के मुख्य लक्षण दिखें तो तुरंत मदद लेनी चाहिए जैसे चक्कर आना, कमजोरी और थकान महसूस होना, घबराहट या बेचैनी होना, तेज प्यास लगना और सिर के साथ पेट दर्द होना। ये लक्षण शरीर में गर्मी बढ़ने और डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए बार-बार पानी पीते रहें

डब्ल्यूएचओ ने बचाव के सरल उपाय बताए हैं – जैसे ही इन लक्षणों का अनुभव हो, तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर चले जाएं। शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए बार-बार पानी पीते रहें। बाहर निकलते समय हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें। खास तौर पर सूती कपड़ा पहनें। दोपहर के सबसे तेज गर्मी वाले समय यानी 12 बजे से 4 बजे तक हो सके तो बाहर न निकलें।

सरकार की लोगों से अपील-खुद को और अपने परिवार को गर्मी से बचाएं

सरकार भी लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे खुद को और अपने परिवार को गर्मी से बचाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर सावधानी बरतने से गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों जैसे हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है। देश के कई हिस्सों में दिन का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे कामकाजी लोगों, किसानों और छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। 

अबूझमाड़ के रेकावाया समाधान शिविर में प्राप्त 407 में से 197 आवेदनों का मौके पर निपटारा

17-May-2026
​रायपुर,(शोर संदेश)।  शासन द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए चलाए जा रहे व्यापक जनसमस्या निवारण अभियान “सुशासन तिहार 2026” के तहत नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास की नई किरण दिखाई दे रही है। जनपद पंचायत ओरछा के ग्राम रेकावाया में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का भारी जनसैलाब उमड़ा, जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों से संबंधित 407 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 197 संवेदनशील मामलों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत प्रदान की गई। बाकी बचे 210 आवेदनों को समय-सीमा के भीतर निराकृत करने के लिए प्रक्रियाधीन रखा गया है।
​इस समाधान शिविर की सबसे खास और अनुकरणीय बात यह रही कि जिला प्रशासन के समन्वय से पहली बार सभी जिला स्तरीय अधिकारी अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों के काफिले के बजाय, एक ही बस में सवार होकर शिविर स्थल तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की 'ईंधन संरक्षण और संसाधनों के संयमित उपयोग' की अपील को अमलीजामा पहनाते हुए अधिकारियों ने सामूहिक रूप से यात्रा की। प्रशासन की इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
​कलेक्टर ने शिविर की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र के नागरिकों तक शासकीय सेवाएं पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित ऐसे शिविरों से ग्रामीणों की समस्याओं का तेजी से निराकरण हो रहा है तथा लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सहज रूप से उनके घर के पास उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिविर में ​स्वास्थ्य विभाग के प्राप्त सर्वाधिक सभी 150 आवेदन  का त्वरित निराकरण और स्वास्थ्य जांच किया गया। इसी तरह ​पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 100,​राशन कार्ड संबंधी 44,​पीएम किसान योजना के 40,​पहचान पत्र / शासकीय दस्तावेज संबंधी 24 और ​श्रम विभाग के 23 आवेदन प्राप्त हुए।
​शिविर सिर्फ आवेदनों के निपटारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक उत्सव का रूप दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शिविर स्थल पर पारंपरिक रूप से अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने शिविर में आए मरीजों की न केवल जांच की, बल्कि उन्हें मौके पर ही दवाइयां और त्वरित उपचार भी उपलब्ध कराए गए।​
​शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीणों को राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और श्रम कार्ड बनवाने की प्रक्रियाओं से अवगत कराया और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने की अपील की। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने एक ही स्थान पर सारे विभागों को मौजूद पाकर बेहद खुशी और संतोष व्यक्त किया। पूरे प्रदेश में 1 मई से 10 जून 2026 तक संचालित सुशासन तिहार का सीधा लाभ वनांचल और सुदूर क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है।








 

5 साल के माइग्रेन दर्द से मिली राहत, सीमा सिंह की मुस्कान लौटी

17-May-2026
रायपुर, (शोर संदेश)।  बीते पांच साल सुकमा निवासी 39 वर्षीय सीमा सिंह के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थे। माइग्रेन के दर्द से तड़पती सीमा ने राहत की चाह में दूर-दूर के बड़े शहरों के चक्कर काटे, एलोपैथी की ढेरों दवाइयां खाईं, लेकिन बीमारी जस की तस रही। निराशा के इन बादलों के बीच उम्मीद की एक किरण तब जागी, जब वे बीते 4 मई को 'आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक सुकमा' पहुँचीं। यहाँ अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में लगभग एक सप्ताह तक चले आयुर्वेदिक इलाज, सटीक दवाइयों और पंचकर्म की 'शिरोधारा' पद्धति के जादू ने कमाल कर दिया। वर्षों पुराना वह दर्द गायब हो गया जिसने उनकी रातों की नींद छीन रखी थी। दर्द से इस मुफ्ती ने सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, जिसके लिए उन्होंने दिल से शासन-प्रशासन का आभार जताया है।
सीमा सिंह की यह मुस्कान सुकमा जिला प्रशासन के उन संजीदा प्रयासों का नतीजा है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए किए जा रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार के पदभार संभालते ही जिला आयुष चिकित्सालय की तस्वीर बदलने के प्रयास तेज कर दिए गए। अस्पताल में न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया गया, बल्कि पारंपरिक और बेहद असरदार 'पंचकर्म' चिकित्सा की भी शुरुआत की गई। प्रशासन की इसी विशेष पहल का असर है कि आज यह अस्पताल रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, जहाँ हर दिन औसतन 14 से 15 मरीज डॉ. पात्रो की देखरेख में नया और स्वस्थ जीवन पा रहे हैं।
कलेक्टर अमित कुमार की यह मुहिम सिर्फ मरीजों को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण भी छिपा है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सुकमा के युवाओं के पुनर्वास की भी एक अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया और उन्हें इसी आयुष चिकित्सालय में 'कलेक्टर दर' पर सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया गया। कभी गुमराह रहे इन युवाओं के हाथों को रोजगार देकर प्रशासन ने न सिर्फ उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है, बल्कि जिले में शांति और विकास का एक नया अध्याय भी लिखा है।
सुकमा का आयुष चिकित्सालय आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद और पुनर्वास का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहाँ असाध्य बीमारियों से जूझ रहे आम नागरिकों को सुकमा की वादियों में ही विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटके हुए युवाओं को रोजगार देकर देश की मुख्यधारा में वापस लाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्रांति और सामाजिक सुधार के इस बेजोड़ संगम ने साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो नक्सल प्रभावित माने जाने वाले सुकमा जैसे दूरस्थ अंचलों में भी संवेदनशीलता और सुशासन की नई इबारत लिखी जा सकती है।


 

10 साल से खाँसी में खून की समस्या झेल रहे युवक को अम्बेडकर अस्पताल में मिली नई जिंदगी

14-May-2026
रायपुर, (शोर संदेश)। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।
अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग 10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी। प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा।
मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है।
सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था। इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा जाता है, जिसमें फेफड़े के संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।
परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया।
डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।
 पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।

 


सुशासन शिविर में मेडिकल मोबाइल यूनिट की तैनाती से ग्रामीणों को मिली निःशुल्क जांच व ईलाज

12-May-2026
रायपुर,(शोर संदेश)।बलौदाबाजार के विशेष पिछडी जनजाति कमार बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार एवं औराई में प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत एवं नग मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देशानुसार इस एमएमयू को विकासखंड कसडोल अंतर्गत आयोजित प्रथम समाधान शिविर मोहतरा (क )में तैनात किया गया। शिविर में आये बड़ी संख्या में लोगों ने एमएमयू में निःशुल्क जांच, ईलाज व दवाई प्राप्त क़ी।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने मोहतररा शिविर के पास ही लगाए गए एमएमयू  कैम्प का जायजा लिया। उन्होंने तैनात चिकित्सक एवं स्टॉफ से पूछताछ कर ओपीडी की संख्या, जांच सुविधा, दवाई की उपलब्धता की जानकारी ली।
इस दौरान जांच कराने पहुंचे ग्रामीणों से बातचीत की। ग्राम चांटीडीह की करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला रामबाई  ने बताया कि इस वाहन में फ्री में जांच, ईलाज व दवाई मिल रही है। कलेक्टर ने हाथ में रखे दवाई संभाल रही रामबाई से पूछा कि यह सब दवाई इसी वाहन से मिला हैं, किसी प्रकार कि समस्या तो नहीं हैं। रामबाई ने कहा कि इसमें सब सुविधा हैं, फ्री में ईलाज हो रहा हैं, बस एक सुविधा हो जाता तो ठीक था। यहां से मिलने वाली दवाई को लिफाफा या पैकेट में देने की व्यवस्था हो, हाथ में रखने से कहीं गिर न जाए। इस पर कलेक्टर ने सीएमएचओ  को निर्देशित किया कि अब से दवाई को पैकेट में देने कि व्यवस्था किया जाए।उन्होंने इलाज़ के लिये वाहन में चढने के लिये एक छोटी सीढ़ी की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिये।
















 

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान बना जीवन रक्षक संजीवनी

11-May-2026
रायपुर, । (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और उपचार कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के जरूरतमंद नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में कोंटा विकासखंड के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्र के अरलमपल्ली, पोलमपल्ली, दोरनापाल, बगड़ेगुड़ा, रंगाईगुड़ा, कोलईगुड़ा एवं पेंटापाड़ जैसे गांवों से कुल 39 मरीजों को जिला चिकित्सालय सुकमा लाकर जांच एवं उपचार कराया गया।
जिला चिकित्सालय में इन मरीजों का समुचित परीक्षण कर उपचार सुनिश्चित किया गया, जिसमें 16 लोगों को प्रेसबायोपिक चश्मा प्रदान किया गया तथा 8 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। वहीं नियद नेल्लानार के गोगुंडा पहाड़ी क्षेत्र से 5 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित लाकर जांच कराई गई और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के साथ वापस भेजा गया। इसके अतिरिक्त कोसागुड़ा से 6 मरीजों को अल्ट्रासाउंड एवं रक्त चढ़ाने हेतु भेजा गया था, जबकि 4 मरीज हाथ-पैर सूजन की समस्या से पीडि़त थे, जिनका भी उपचार कर राहत प्रदान की गई।
जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य 2,93,386 निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,54,157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान कुल 4990 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से चिन्हांकित कर प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। 
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद नागरिक इलाज से वंचित न रहे। अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित मरीजों को समय पर जिला चिकित्सालय लाकर जांच, उपचार, ऑपरेशन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  
मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए सभी मरीजों का इलाज पूर्ण कराने के बाद उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने की व्यवस्था भी की गई। सुबह 6 बजे जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस लगाकर मरीजों को नाश्ता कराया गया और फिर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाया गया। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि शासन-प्रशासन दूरस्थ अंचलों के लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ इलाज उपलब्ध करा रहा है।

सुदूर बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार : अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझते शिशु को बचाया

01-May-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।
ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।



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