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किसान

जिले में धान खरीदी को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध*

21-Dec-2020

 

00 जिले में 13.50 लाख बारदाना सभी उपार्जन केंद्रों में उपलब्ध कराये जा रहे
महासमुंद (शोर सन्देश) महासमुंद जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2020 21 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है तथा आवश्यकता अनुसार रविवार को 6 लाख 50 हजार नये एचडीपीई बारदाना उपार्जन क्रेंदों में उपलब्ध कराये जा रहे है। इसके साथ ही 3 लाख बरदाने मिलर्स के माध्यम और 3 लाख बारदान उपभोक्तान दुकानों में शेष बचें उन्हें प्राप्त कर इस तरह पहले और नए मिला कर कुल 13.50 लाख बारदानों जिले के सभी उपार्जन केंद्रों में पहुंचाया जाना रविवार से शुरू हो गया हैं। जिले में पर्याप्त मात्रा में नये उपलब्ध एचडीपीई बारदानो की उपलब्धता की संबंध में जिला विपणन अधिकारी अनिल जोशी ने जानकारी दी। कोविड 19 के कारण नये जुट बारदाने की फैक्टरियां बंद हो जाने से जूट बारदाना के कमी को देखते हुये नए एचडीपी बारदाने के साथ साथ पीडीएस बारदाने और मिलर्स से बारदानों के उपार्जन के लिए खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, नोडल अधिकारी बैक और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की बैठक अपर कलेक्टर महासमुंद जोगेंद्र नायक की ओर से ली गयी तथा सभी संबंधितों को नियमित रूप से तालमेल और समन्वय बना कर बारदाना की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए निर्देशित किया गया है। वर्तमान में आगामी दिनों में धान खरीदी को देखते हुए जिले में पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है।
जिला खाद्य अधिकारी नितिन त्रिवेदी ने जानकारी दी की मिलर्स के माध्यम से भी जिले में 3 लाख बारदाने उपलब्ध कराये जा रहे है। मिलर्स की ओर से दिये जा रहे बारदाने की गुणवत्ता का सत्यापन करा लिया गया है और मिलर्स को भी सख्त निर्देश दिये गये है, कि कटेफटे निम्न गुणवत्ता वाले बारदाने उपार्जन केंद्रो में ना भेजें। साथ ही उपार्जन केंद्रो को भी यह निर्देश जारी किये गये है, कि मिलर्स की ओर से प्रदाय किये जा रहे बारदाने यदि कटे फटे और गुणवत्ता विहीन है तो उपार्जन केंद्र उसे स्वीकार ना करें। इसके लिए तहसील स्तर पर सभी खाद्य निरीक्षकों को भी मोनिटरिंग हेतु निर्देशित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत दुकानो से भी जिले में 17 लाख बारदाना प्राप्त कर धान खरीदी में उपयोग किया जा चुका है। जिले के नोडल अधिकारी श्री डी एल नायक ने बताया कि पीडीएस उपभोक्ता के बारदानो के उपयोग धान खरीदी में करने का नीतिगत निर्णय राज्य शाशन की ओर से लिए जाने के कारण, शासन से जिले में 20 लाख बारदानों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसमें से 17 लाख बारदाने उपायोग किये जा चुके है। तीन लाख उपभोक्ता बारदाने भी उपभोक्तान दुकानों में शेष बचे है। जिन्हें प्राप्त कर उपयोग करने के लिए उर्पाजन केंद्रो को निर्देशित किया गया है। विगत वर्षो में उपभोक्ता दुकानों के बारदानों को खूले बाजार में बेचने की प्रथा रही है, जिसे इस वर्ष प्रारंभ से ही लगाम लगा कर रखा गया है, जिसके कारण ही इतनी संख्या में पी डी एस बारदानो का उचित उपयोग कर धान खरीदी बेहतर और सुचारू व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग मिला। 


नये धान खरीदी केन्द्र हिरमी में खरीदी शुरू*

01-Dec-2020

रायपुर (शोर सन्देश) बलौदाबाजार जिले के नये धान खरीदी केन्द्र हिरमी में मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी की उपस्थिति में और पूर्व विधायक जनक राम वर्मा की अध्यक्षता में धान खरीदी की शुरूआत हुई। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री राम गिडलानी, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री सीमा वर्मा सहित अनेक नेतागण उपस्थित थे। 


धान के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों से किसानों की आमदनी में हो रही है इजाफा*

24-Nov-2020

बीजापुर (शोर सन्देश) जिले के पापनपाल निवासी कृषक पागे सम्मा पूरी तन्मयता के साथ कृषि कार्य में लगा हुआ है। इसकी मेहनत और लगन के साथ-साथ शासन की विभिन्न योजनाएं इन्हे सफल कृषक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जिससे कृषक पागे सम्मा अपनी आमदनी में बढ़ोत्तरी करने के साथ एक बेहतर जीवन जी रहा है। कृषक पागे बताते हैं कि उनके पास 5 एकड़ कृषि भूमि है। जिस पर धान की खेती करता है। उसके अतिरिक्त एक एकड़ कृषि भूमि पर उद्यानिकी फसल लेता है। इस एक एकड़ भूमि पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेते हुए अपनी आजीविका को बढ़ाया है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन पर उन्नत कृषि कर रहा है। पागे ने बताया कि सबसे पहले तो मुझे आत्मा योजनातंर्गत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान भ्रमण भी कराया गया। जिससे मैं उद्यानिकी फसल लेने के लिए प्रोत्साहित हुआ फिर मेरे खेत में एक एकड़ कृषि भूमि को शासकीय योजनाओं के तहत् तार फेंसिंग किया गया। जिससे मेरा खेत जानवरों की चराई से सुरक्षित है। उद्यानिकी विभाग ने मेरे खेत में बोर कराया गया। इसके बाद मुझे कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्नत बीज प्रदान किया, और अभी हाल ही मेरे कृषि कार्य को देखते हुए बेहतर सिंचाई स्प्रिंकलर भी प्रदान किया है। इस तरह प्रशासन द्वारा कृषि को बढ़ावा देने और मुझे प्रोत्साहित करने विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। जिससे आजीविका को बढ़ाया हॅू और अपने जीवन स्तर में काफी सुधार किया हूॅ। मैंने उद्यानिकी फसलों की कमाई से बाजारों में सब्जी लाने ले जाने के लिए दो पहिया वाहन भी खरीदा इस तरह मैं सही समय पर आसानी से बाजार पहुंच जाता हूॅ। सब्जी बेचने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है।  मैंने सब्जी की कमाई से ही पिछले महीने मिनी राईस मिल भी खरीदा है जिससे मेरी छोटी-छोटी जरूरतों की पूर्ति मिनी राईस मिल की कमाई से हो रही है। उम्मीद है कि इससे मैं आगे भी अपने कुछ खर्चो की पूर्ति कर पाऊंगा। बचे हुये 4 एकड़ कृषि भूमि पर धान की खेती करता हूं। 


अपेक्स बैंक के अध्यक्ष ने की धान खरीदी की तैयारी की समीक्षा*

23-Nov-2020

 

महासमुंद (शोर सन्देश) राज्य शासन के निर्देशानुसार खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की खरीदी आगामी 1 दिसम्बर से प्रारम्भ की जाएगी। जिले की सहकारी समितियों द्वारा पंजीकृत कृषकों से समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन किया जाना है। इस संबंध में आज जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में जिले में आगामी धान खरीदी की व्यवस्था को लेकर रायपुर अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैद्यनाथ चन्द्राकर, जिला सहकारी बैंक रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.के. जोशी, अतिरिक्त प्रबंधक एस.पी. चन्द्राकर ने कहा कि सहकारी समितियों द्वारा पंजीकृत कृषकों से समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन किया जाए। उपार्जन केन्द्रों में धान के सुरक्षित रख-रखाव, आवागमन, मूलभूत व्यवस्थाएं, किसानों को ऋण वितरण एवं समिति को धान उपार्जन में होने वाली समस्याएं के बारें में जानकारी लेते हुए उनके सुझाव बताएं। इसके अलावा उपार्जन केन्द्रों में कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए धान उपार्जन करने के संबंध में निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक महासमुंद के नोडल अधिकारी डी.एल. नायक एवं सहकारी संस्थाएं के उप पंजीयक डी.एस. शर्मा एवं जिले के सभी सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। 


धान की कटी फसल गीली पड़ी, सुखाने में छूट रहे दुर्ग के किसानो के पसीने*

23-Nov-2020

दुर्ग (शोर सन्देश) हाल ही में हुई बारिश ने एक तरफ लोगों को उमस से राहत दिलाई वही दूसरी ओर किसानों की मुश्किल इतनी ज्यादा बढ़ा दी कि उन्हें दोगुनी मेहनत करके अपनी फसल बचानी पड़ रही हैं। दुर्ग जिले में तकरीबन 10 फीसदी किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है। जिले में 1 लाख 29 हजार किसान हैं। दरअसल कई किसानों ने अपनी फसल काट ली थी। जिनकी कटी हुई फसल खेत में पड़ी थी, वो बारिश में भीग गई। इतना ही नहीं, खेत में पानी भर जाने के कारण उनके सड़ने का खतरा भी था। लेकिन किसान बारिश के बाद से ही अपनी फसल को धूप में सुखाने में जुट गए हैं। दुर्ग के नगपुरा के किसान पुकेश्वर साहू ने बताया कि उसने 10 एकड़ में धान की फसल ली थी। खेत में 450 कट्टा धान रखा था। धान काटने के एक घंटे बाद ही पानी गिरा और मेहनत दोगुनी हो गई। ये कम से कम चार लाख का धान है। झबेंद्र वैष्णव का कहना है कि दुर्ग में बहुत बारिश हुई है। खलिहान में बिखरा हुआ अनाज सुखाना पड़ेगा। इसमें बहुत मेहनत लगेगी। राहत की बात

सूरज की रोशनी किसानों के भीतर उमीद जगाए रखी हैं। धूप निकलता रहा तो ठीक है, नहीं तो बहुत नुकसान होने की असंका जाते जा सकती है। ये तो तय है कि इसकी गुणवत्ता में फर्क जाएगा। ज्यादा काला हुआ तो सोसायटी भी धान नहीं खरीदेगी। सरकार ने तो कह दिया है कि ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन परेशानी कितनी बढ़ गई है, इसका अंदाजा क्या सरकार को है


किसान रबी फसलों का बीमा 15 दिसम्बर तक करा सकेंगे*

23-Nov-2020

 बेमेतरा (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना रबी में रबी फसलों को प्रतिकूल मौसम जैसे - सूखा, बाढ़, कीट व्याधि, ओलावृष्टि, प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए कृषकगण 15 दिसम्बर तक बीमा करा सकते है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत ऋणी और अऋणी किसान जो भू-धारक बटाईदार हो सम्मिलित हो सकते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऋणी किसान ऐच्छिक आधार पर फसल बीमा करा सकते हैं। किसान को निर्धारित प्रपत्र में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा की अंतिम तिथि 15 दिसम्बर के 7 दिवस पूर्व संबंधित बैंक में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। किसान से निर्धारित प्रपत्र में घोषणा पत्र जमा नहीं करने पर संबंधित बैंक संबंधित मौसम के लिए स्वीकृत या नवीनीकृत की गई अल्पकालीन कृषि ऋण का अनिवार्य रूप से बीमा किया जाना है।
कृषि विभाग बेमेतरा के अधिकारियों ने बताया कि अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी गैर ऋणी किसान, जो योजना में सम्मिलित होने के इच्छुक हो। वे बुआई पुष्टि प्रमाण पत्र क्षेत्रीय पटवारी या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सत्यापित कराकर और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर योजना में सम्मिलित हो सकते है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत कृषक प्रीमियम राशि निर्धारित है। जिसके तहत कृषक को प्रति हेक्टेयर चना फसल के लिए 555 रूपए और सिंचित गेहूं की प्रति हेक्टेयर फसल के लिए 450 रूपए प्रीमियम देना होगा। गेहूं असिंचित के लिए फसल के लिए 330 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से प्रीमियम देय होगा।  बीमा योजना अंतर्गत ऋणी किसानों का बीमा संबंधित बैंक, सहकारी समिति द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा। उन्हें केवल घोषणा एवं बुवाई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अऋणी किसानों को बैंक, सहकारी समिति और लोक सेवा केन्द्र में बीमा प्रस्ताव फार्म, नवीनतम आधारकार्ड, बैंक पासबुक, भू-स्वामित्व साक्ष्य बी-1 पांचसाला, किरायदार, साझेदार किसान का दस्तावेज, बुवाई प्रमाण पत्र और घोषणा पत्र देकर बीमा करा सकते हैं।


समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें संभागायुक्त*

20-Nov-2020

कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत अधिकारियों को वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग लेकर दिए दिशा-निर्देश
जगदलपुर (शोर सन्देश) संभागायुक्त जीआर चुरेन्द्र ने खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के कार्य को सफलता पूर्वक संपन्न करने हेतु सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश जिला कलेक्टरों एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। श्री चुरेन्द्र ने कहा कि केवल वास्तविक किसानों की वास्तविक धान की खरीदी हो सके इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। नव पदस्थ संभागायुक्त चुरेन्द्र ने गुरूवार 19 नवम्बर को कलेक्टोरेट जगदलपुर के स्वान कक्ष से संभाग के सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों की वीडयों कांफ्रेसिंग लेकर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के अलावा, नरवा, गुरूवा, घुरूवा एवं बाड़ी योजना, गोधन न्याय योजना, मनरेगा आदि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इन्द्रजीत चन्द्रवाल, वनमण्डलाधिकारी सुश्री स्टायलो मण्ड़ावी एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। संभागायुक्त चुरेन्द्र ने कलेक्टरों एवं अधिकारियों को धान की अवैध बिक्री की रोकथाम हेतु पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा। इसके लिए उन्होंने निगरानी दल गठित कर छोटे दुकादारों एवं कोचियों के दुकानों में जाकर अनिवार्य रूप से सत्यापन करने को कहा। गोधन न्याय योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा कि खरीदे गए गोबर किसी भी स्थिति में सुख पाए। जिससे की जैविक खाद बनाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत उपस्थित हो। राजस्व विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य राजस्व अधिकारियों के मुख्यालय में अनिवार्य रूप से निवास सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अग्रिम दौरा कार्यक्रम बनाने को कहा। इसके अलावा उन्होंने राजस्व अधिकारियों को चलित न्यायालय भी शुरू करने को कहा। उन्होंने अतिक्रमण रोकने के कार्य को भी प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। इसकेे अलावा पटवारियों का बस्ता जांच हेतु 15 दिनों के भीतर निर्देश जारी करने के भी निर्देश भी दिए। श्री चुरेन्द्र ने अधिकारी-कर्मचारियों के कार्य क्षमता के विकास हेतु प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण सह कार्यशाला भी आयोजित करने को कहा। श्री चुरेन्द्र अधिकारियों को ग्राम सभा को प्रभावी बनाने के उपाय सुनिश्चित करने तथा इसके लिए प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश भी दिए। नरेगा के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस कार्य को स्वंय कार्य समझकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा करने को कहा। उन्होंने तीन सप्ताह के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों में 10 एकड़ से अधिक की जमीन की सर्वे कर उस जमीन को ग्राम उपवन के रूप में तब्दील करने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। श्री चुरेन्द्र ने इस जमीन को अभिसरण के माध्यम से उपवन के रूप में विकसित करने को कहा। इस दौरान उन्होंने वनाधिकार मान्यता प्रमाण पत्र, कानून व्यवस्था आदि विभिन्न विषयों की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 


शासन की योजनाओं से सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करता किसान*

19-Nov-2020

00 कर्जमाफी योजना से जिले के किसानों का हुआ 18 करोड़ हुआ
नारायणपुर (शोर सन्देश) खेती-किसानी छत्तीसगढ़ का आधार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में खेती को लाभ का व्यावसाय बनाने के प्रयास सरकार बनते ही प्रारंभ किये थे। सरकार बनते ही किसानों की कर्जमाफी, 2500 रुपया प्रति क्विंटल में धान खरीदी, सिंचाई कर माफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सिंचाई क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर खेती का सिंचित रकबा बढ़ाना, किसानों के लिए किये गये प्रयासों के बदौलत ही आज छत्तीसगढ़ का किसान सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और किसान इस सरकार को अपनी सरकार महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री की मंशा एवं कोशिश है कि उत्पादन लागत न्यूनतम हो और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों के विश्वास और खुशहाली का छत्तीसगढ़ है, जहां मुख्यमंत्री बघेल कृतसंकल्पित होकर किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं। कोरोनाकाल के बावजूद किसानों की समस्याओं को सुनने मुख्यमंत्री राज्य के किसी भी कोने में किसानों के बीच पहुँच जाते हैं। दरअसल हमारा छत्तीसगढ़ गांवों का प्रदेश है, यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है। मुख्यमंत्री स्वयं किसान परिवार से संबंध रखते हैं और किसानों की समस्याओं के निराकरण को लेकर वे हमेशा से बेहद संवेदनशील रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश के किसानों ने बीते कुछ वर्षों में सफलता के कीर्तिमान गढ़े हैं और अब किसान कल्याण और कृषि उत्पादन में प्रदेश का नाम देश के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जाने लगा है।
इस समय समूचा विश्व कोरोना की महामारी को झेल रहा है। इसका प्रभाव हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर भी पड़ा है और समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौती का समय होने के बाद भी किसानों के हितों पर कोई आँच आए, इसका ध्यान मुख्यमंत्री द्वारा बखूबी रखा जा रहा है। कोरोना काल के समय किसानों को किसी प्रकार की समस्या हो इसके लिए विभिन्न योजनाओं की राशि का ऑनलाइन अंतरण करते रहे हैं। वास्तव में किसानों के हितों की रक्षा के लिये मुख्यमंत्री सदैव संकल्पित रहे हैं और यह उनकी नीतियों में भी निरंतर प्रतिबिंबित होती है। उनकी सरकार की प्राथमिकता किसान का हित है और वे हर परिस्थिति में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
00 कर्जमाफी योजना से जिले के किसानों का करोड़ों रुपया हुआ माफ पूरे प्रदेश में किसानों के सहकारी एवं सार्वजनिक बैंकों के अल्पकालीन कृषि ऋण माफी करने के निर्णय से लाखों किसान लाभान्वित हुए। प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसानों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना पर अमल उपरांत जिले के 4102 किसानों के 18 करोड़ से अधिक का कर्ज माफ किया गया।
00 राजीव गांधी किसान न्याय योजनाः जिले के 3600 से ज्यादा किसानों के खातों में 8 करोड़ से अधिक राशि हुआ ट्रांसफर
राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि रकबे में वृद्धि करने के उद्देश्य से राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुवात पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर की गई। इस योजना के जरिये किसानों को आदान सहायता के रूप में राशि उपलब्ध कराई जाएगी। नारायणपुर जिले के 3600 से अधिक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से 3 किश्तों में 8 करोड़ से अधिक रूपये का भुगतान किया गया। न्याय योजना से किसानों में आई समृद्धि से वे अपने कृषि कार्य का विस्तार कर रहे हैं। किसानों के परिवारों मे खुशी का माहौल है। कोरोना संक्रमण काल में भी किसानों को किसी प्रकार की आर्थिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।
00 गोधन न्याय योजनाः 1538 पशुपालक हितग्राहियों को मिला 6 लाख से अधिक रुपये राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुराजी गांव योजना लागू की गई है। देश दुनियां में पहली बार गोबर की खरीदी के लिए गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ की सरकार ने शुरू की। सरकार के इस साहसिक कदम ने पशुपालकों को आर्थिक संबल दिया। गांवों में गौठान और रोका-छेका की व्यवस्था ने दूसरी और तीसरी फसल की राह खोल दी। गोधन न्याय योजना के माध्यम से जिले के गौठानों के माध्यम से गोबर खरीदी की जा रही है। जिले में अब तक 1538 पशुपालक हितग्राहियों से 3236.59 क्विंटल गोबर की खरीदी कर 6 लाख 47 हजार रूपये का भुगतान किया जा चुका है।
00 सिंचाई कर माफ कर किसानों को दिया तोहफाः  राज्य सरकार ने जिले के 1133 किसानों के 7 लाख 79 हजार रूपये का सिंचाई कर माफ कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती भी प्रदान की है। सरकार के इन फैसलों में यह साफ झलकता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सिर्फ किसानों की चिंता है बल्कि एक किसान परिवार से होने के कारण किसानों की इन तकलीफों को भी वे बेहतर तरीके से जानते हैं। वे एक किसान पुत्र होने के कारण किसानों की वास्तविक तकलीफों को श्री बघेल बेहतर तरीके से समझते हैं। सरकार के इस कदम ने किसानों के लिए आर्थिक मंदी के इस दौर में एक नया रास्ता खोल दिया है। किसान के लिए आज बाजार बड़ा और व्यापक होता दिख रहा है। 


कृषि विस्तार अधिकारी ने बताया खाद बनाने का तरीका*

28-Oct-2020

लवन (शोर सन्देश) ग्राम पंचायत तुरमा में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी प्रमुख योजन गो धन्य योजना के तहत गोबर से खाद बनाने के लिए आरियो खेमन सिंह कंडरा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) ने आज गौठान पहुच कर महिला समूह को वेस्ट डीकंपोसर का घोल बनाने का तरीका बताया। जिसमे 200 लीटर पानी मे 2 किलो गुड़,1 डीब्बा वेस्ट डी कंमपोजर का घोल बनाया गया और वेस्ट मटेरियल को अवघटित करने के तरीका बताया। इसे समूह के सदस्यों ने उपस्थित होकर सीखे। इस दौरान आरियो खेमन सिंह कंडरा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) नंदराम देवांगन (अध्यक्ष गौठान समिति ) रमला ध्रुव (सरपंच ग्राम पंचायत तुरमा) टीकम चंद टंडन,करण ध्रुव (सरपंच पति), मानकुमारी साहू, अनिता ध्रुव गोरी बाई निसाद, पलेसवारी, पूनम चंद, साहेब लाल उपस्थित थे। 


छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020, जाने विशेषता*

28-Oct-2020

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में आज छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। कृषि मंत्री ने चर्चा के दौरान इस संशोधन विधेयक के उद्देश्य और कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश में 80 प्रतिशत लघु एवं सीमांत कृषक हैं। लघु एवं सीमांत कृषकों की कृषि उपज भण्डारण तथा मोल-भाव की क्षमता नहीं होने से, बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव तथा भुगतान की जोखिम को दृष्टिगत रखते हुए, उनकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर सही कीमत, सही तौल तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने हेतु डीम्ड मंडी तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना किया जाना कृषक हित में आवश्यक हो गया है। 00 विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक, 2020 एक नजर में -
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 को और संशोधित करने हेतु विधेयक। भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो-
00 संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम 2020 कहलाएगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा।
(3) यह दिनांक 5 जून 2020 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त होगा।
00 धारा दो का संशोधन :
2. छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम 1972 (क्र.24 सन 1973) (जो इसमें इसके पश्चात मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 की उपधारा (1) में,-
(एक) खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
() ’कृषि उपजसे अभिप्रेत है कृषि, उद्यान कृषि, पशुपालन, मधुमक्खीपालन, मत्स्यपालन या वन संबंधी समस्त उत्पादन, चाहे वह प्रसंस्कृत या विनिर्मित हो या हो, जो कि अनुसूची में विनिर्दिष्ट है,‘
(दो) खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
() मण्डी/डीम्ड मंडी से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन स्थापित की गई मण्डी/डीम्ड मंडी,‘
00 धारा चार का संशोधन :
3. मूल अधिनियम की धारा 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
4. मण्डी/डीम्ड मंडी की स्थापना तथा उसमें अधिसूचित कृषि उपज के विपणन का विनियम- (1) धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि का अवसान होने के पश्चात और ऐसी आपत्तियों तथा सुझावों पर, जो ऐसे अवसान के पूर्व प्राप्त हुए हो, विचार करने के पश्चात तथा ऐसी जांच, यदि कोई हो, जो आवश्यक हो, करने के पश्चात, राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा धारा 3 के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए गए क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के संबंध में मण्डी स्थापित कर सकेगी और इस प्रकार स्थापित की गई मण्डी ऐसे नाम से जानी जाएगी, जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।
(2) राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के क्रय-विक्रय, प्रसंस्करण या विनिर्माण, कोल्ड स्टोरेज, साइलोज, भण्डागार, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग तथा लेन-देन प्लेटफार्म और ऐसे अन्य स्थान अथवा संरचनाओं को, डीम्ड मंडी घोषित/स्थापित कर सकेगी, जो कि उपधारा (1) के अधीन स्थापित मंडी की डीम्ड मंडी के नाम से जानी जाएगी। डीम्ड मंडी स्थापित किए जाने हेतु धारा 3 की उपधारा (1) एवं (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे
00 धारा 19 का संशोधन :
4. मूल अधिनियम की धारा 19 की उपधारा (1) के खण्ड (दो) के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
(तीन) अधिसूचित कृषि उपज, चाहे वे राज्य के भीतर से या राज्य के बाहर से किसी मंडी प्रांगण या उप मंडी प्रांगण या विशेष वस्तु मंडी प्रांगण या टर्मिनल मार्केट कॉम्प्लेक्स या डीम्ड मंडी में विक्रय के लिए लाई गई हो, के विक्रय या वितरण और प्रसंस्करण तथा विनिर्माण में उपयोग में लाए जाने पर या प्रसंस्करण तथा विनिर्माण के पश्चात विक्रय किए जाने पर
00 नवीन धारा 20- का अन्तःस्थापन :
5. मूल अधिनियम की धारा 20 के पश्चात निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात
‘20- कृषक/विक्रेता हित संरक्षण की दृष्टि से लेखे पेश करने हेतु आदेश देेने की शक्ति और प्रवेश, निरीक्षण तथा अभिग्रहण की शक्तियां-
(1) मण्डी समिति का सचिव या बोर्ड या मण्डी समिति का कोई भी अधिकारी या सेवक, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा सशक्त किया गया हो तथा इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी या सेवक, किसी ऐसे व्यक्ति से, जो किसी भी किस्म की अधिसूचित कृषि उपज का व्यापार करता हो, विक्रेता/कृषक से, क्रय कृषि उपज के संबंध में, यह अपेक्षा कर सकेगा कि अधिसूचित कृषि उपज के क्रय विक्रय से संबंधित लेखे, तथा अन्य दस्तावेज या प्रारूप, जैसा कि अधिसूचना द्वारा विहित किया जाए, संधारित करे और कोई ऐसी जानकारी दे, जो ऐसी कृषि उपज के क्रय, विक्रय तथा परिदान से संबंधित हो।
(2) किसी अधिसूचित कृषि उपज के व्यापार के संबंध में अधिसूचना के अनुसार संधारित समस्त लेखे तथा रजिस्टर और ऐसी कृषि उपज के क्रयों, विक्रयों तथा परिदानों से संबंधित दस्तावेज, प्रारूप, जो उसके कब्जे में हो, और ऐसे व्यक्ति के कार्यालय, व्यापार के स्थान, भण्डागार, स्थापना, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहनों का निरीक्षण, मण्डी समिति या बोर्ड के सचिव या मंडी समिति के किसी अधिकारी या सेवक तथा राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित अधिकारी या सेवक के द्वारा किया जा सकेगा।
(3) यदि किसी ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह संदेह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में लेखे एवं दस्तावेज प्रारूप संधारित नहीं करता या मिथ्या लेखे संधारित कर रहा है, तो वह कारणों को लेखबद्ध करते हुए, ऐसे व्यक्ति के ऐसे लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप तथा अधिसूचित कृषि उपज जैसा कि आवश्यक हो, अभिग्रहित कर सकेगा तथा उनके लिए एक रसीद देगा और उन्हें तब तक रखे रहेगा, जब तक कि वे उनकी परीक्षा के लिए या अभियोजन के लिए आवश्यक हो।
(4) उप धारा (2) या उपधारा (3) के प्रयोजनों के लिए ऐसा अधिकारी या सेवक किसी भी व्यापार के स्थान, भण्डागार, कार्यालय, स्थापना, गोदाम, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहन में, जिसके संबंध में ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उनमें ऐसा व्यक्ति अपने व्यापार के लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप या अपने व्यापार के संबंध में अधिसूचित कृषि उपज के स्टॉक रखता है या तत्समय रखा है, प्रवेश कर सकेगा या तलाशी ले सकेगा।
(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 100 के उपबन्ध, यथाशक्य उपधारा (4) के अधीन तलाशी के लिए लागू होंगे।
(6) जहां कोई लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप किसी स्थान से अभिग्रहित की जाए और उनमें ऐसी प्रविष्टयां हो जो विक्रेता/कृषक से क्रय अधिसूचित कृषि उपज के परिमाण (मात्रा), क्रय करार, दरों, तौल तथा भुगतान से संबंधित हों, वहां ऐसी लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप उन्हें साबित करने के लिए, साक्षी के उपसंजात हुए बिना ही, साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जाएगी और ऐसी प्रविष्टियां, उन मामलों में, संव्यवहारों तथा लेखाओं की, जिनका कि उनमें अभिलिखित होना तात्पर्यित हैं, प्रथम दृष्टया साक्ष्य होगी।
(7) अधिसूचित कृषि उपज के क्रय-विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप मिथ्या पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध तथा अभिग्रहित अधिसूचित कृषि उपज के लिए मंडी समिति के सचिव या राज्य सरकार या बोर्ड या मण्डी समिति के कोई भी अधिकारी या सेवक, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो, के द्वारा वाद दायर किया जा सकेगा।
00 धारा 36 का संशोधन :
6. मूल अधिनियम की धारा 36 के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
36-. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म - (1) राज्य सरकार, अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय में कृषक/विक्रेता को अपने उत्पाद को स्थानीय मंडी के साथ-साथ प्रदेश की अन्य मंडियों तथा अन्य राज्यों के व्यापारियों को गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से विक्रय कर बेहतर कीमत प्राप्त करने तथा समय पर आनलाईन भुगतान हेतु इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना कर सकेगी।
(2) इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म में अधिसूचित कृषि उपज के पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया तथा आनलाईन भुगतान राज्य सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
00 धारा 49 का संशोधन :
7. मूल अधिनियम की धारा 49 की उप धारा (4) के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
‘(4-) यदि कोई व्यक्ति, जिसे अधिसूचित कृषि उपज के क्रय एवं विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तिका या अन्य दस्तावेज, प्रारूप के संबंध में जानकारी देने के लिए धारा 20- के अधीन अपेक्षित किया जाए।
() कोई जानकारी देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या कोई जानकारी देने से इंकार करेगा या
() मिथ्या जानकारी या जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा, या 

() लेखा-पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप में संधारित मात्रा से अधिक या कम अधिसूचित कृषि उपज रखता हो, तो वह दोष सिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि 3 मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन की दशा में, कारावास से, जो 6 मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दस हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।‘ 




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