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तकनीक और पारदर्शिता से बदली धान खरीदी व्यवस्था, किसान को मिली राहत

22-Jan-2026
अंबिकापुर, । ( शोर संदेश ) जिले में धान उपार्जन की सुव्यवस्थित व्यवस्था से किसानों को सुविधा मिल रही है। शासन द्वारा अपनाई गई डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया से किसानों का भरोसा बढ़ा है और धान विक्रय की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज हो गई है। ग्राम पंचायत कृष्णापुर के रहने वाले किसान स्माइल पैकरा ने नई व्यवस्था को किसान हित में एक बड़ा बदलाव बताया है।
किसान स्माइल पैकरा ने बताया कि उनके पास लगभग 150 क्विंटल धान का रकबा है। पहले धान बेचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर समय से पहले पहुंचना पड़ता था और भीड़ के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता था। लेकिन इस वर्ष किसान तुंहर टोकन ऐप के माध्यम से उन्होंने घर बैठे ही मोबाइल से टोकन प्राप्त कर लिया। इससे न केवल भीड़ से राहत मिली, बल्कि धान विक्रय की पूरी योजना पहले से तय हो गई।
उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप के जरिए टोकन काटने की सुविधा ने किसानों को समय का बेहतर उपयोग करने का अवसर दिया है। अब समिति के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे खेती के अन्य कार्यों पर ध्यान देना आसान हो गया है। यह व्यवस्था खासकर दूर-दराज के ग्रामीण किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
कृषक स्माइल पैकरा ने बताया कि मेंड्राकला धान उपार्जन केंद्र में पहुंचने पर सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित मिली। केंद्र पर नमी परीक्षण, गेट पास जारी करने और बारदाना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तुरंत पूरी कर दी गई। उन्होंने कहा कि धान विक्रय के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और समिति कर्मचारियों ने पूरे समय सहयोग किया।
किसान ने बताया कि धान से होने वाली आय के साथ-साथ वे अब मक्का, गेहूं और अरहर जैसी अन्य फसलों की खेती भी कर रहे हैं। धान का उचित मूल्य मिलने से खेती में निवेश की क्षमता बढ़ी है और आय के नए स्रोत तैयार हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी समर्थन मूल्य मिल रहा है और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक की खरीदी से किसानों को आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
किसान स्माइल पैकरा ने कहा कि पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और तकनीक के उपयोग से किसानों को सम्मान और आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने किसान हितैषी नीतियों के लिए शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा धान खरीदी व्यस्थाओं से किसान अब आर्थिक रूप से सशक्त और समृद्ध मजबूत बन रहे हैं।

 

उद्यानिकी खेती से बदली किसान की आर्थिक तस्वीर

21-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )  जिले में शासन की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब किसान केवल धान पर निर्भर न रहकर अधिक लाभ देने वाली  फसलों को अपना रहे हैं। किसान लाल बहादुर सिंह बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।
सरगुजा जिले के भगवानपुरखुर्द निवासी किसान लाल बहादुर सिंह ने भी इसी सोच के साथ खेती में नवाचार अपनाया और आज वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं उन्नत किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
कृषक लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वर्षों से धान की खेती करने के बाद भी अपेक्षाकृत सीमित लाभ ही मिल पाता था। लागत बढ़ने और मौसम पर निर्भरता के कारण मुनाफा कम हो जाता था। इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी और इसके फायदे समझाए। इससे उन्हें अपनी खेती में बदलाव करने की प्रेरणा मिली।
उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत उन्होंने मात्र 50 डिसमिल क्षेत्र से की थी। लाभ मिलने पर अगले वर्ष एक एकड़ में खेती की और फिर तीसरे व चौथे वर्ष इसे बढ़ाकर ढाई एकड़ तक कर दिया। वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।
कृषक सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। लागत निकालने के बाद लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि यही ढाई एकड़ यदि धान की खेती में लगाया जाता, तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता, जिससे शासकीय उपार्जन केन्द्र में बेचने पर करीब 3 लाख रुपये की आमदनी होती। धान की खेती में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने के बाद शुद्ध लाभ मात्र 2 लाख रुपये के आसपास ही रहता।
किसान लाल बहादुर सिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की इस योजना के अंतर्गत पौध, खाद और बीज की राशि डीबीटी के माध्यम से वापस कर दी जाती है। उन्हें लगभग 80 से 85 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त होगी। विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे खेती और अधिक सफल हो रही है।
लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वे पौधे स्वयं मंगवाते हैं और उद्यानिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है।
सिंह ने कहा कि शासन की उद्यानिकी योजना से अन्य किसान भी लाभ ले सकते हैं। धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज वे स्वयं उद्यानिकी खेती से सशक्त और आत्मनिर्भर बने हैं तथा अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं।
किसान लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से प्रदेश का किसान आज सशक्त, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषक बन रहा है।
 

जिले के किसान संतोष रात्रे ने सहजता से बेचा धान, बढ़ी आमदनी : सहज धान खरीदी व्यवस्था से किसान हुए निश्चिंत, समय पर मिल रहा पैसा

21-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )  कबीरधाम जिले में इस वर्ष धान खरीदी का काम आसान और व्यवस्थित तरीके से चल रहा है। इसका फायदा सीधे किसानों को मिल रहा है। जिले के ग्राम लिमो निवासी किसान संतोष कुमार रात्रे ने कवर्धा स्थित धान खरीदी केंद्र में बिना किसी परेशानी के अपना धान बेचा।
संतोष रात्रे के पास लगभग 3.80 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें उन्होंने इस साल धान की खेती की थी। वे बताते हैं कि इस बार समय पर खाद और बीज मिलने से खेती अच्छी हुई और फसल भी बेहतर निकली। उनका कहना है कि अब धान की खेती पहले की तुलना में ज्यादा लाभकारी हो गई है, क्योंकि जरूरी सामग्री आसानी से मिल जाती है। इस वर्ष संतोष रात्रे ने 78.20 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र में बेचा। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में टोकन की व्यवस्था बहुत आसान है। उन्होंने ऑफलाइन यानी सीधे खरीदी केंद्र में जाकर टोकन लिया और तय समय पर अपना धान बेच दिया।
खरीदी केंद्र में अब सभी सुविधाएं मिल रही हैं। बारदाना, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, बैठने की व्यवस्था, टोकन और माइक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं से धान बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती। धान बेचते ही समय पर भुगतान हो रहा है और पैसा सीधे बैंक खाते में पहुँच रहा है, जिससे काफी राहत मिलती है। छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। धान खरीदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है। वर्तमान में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी में सीधा फायदा हुआ है।


 

तकनीक ने बदली धान खरीदी व्यवस्था : छत्तीसगढ़ में किसान अब घर बैठे काट रहे टोकन

20-Jan-2026
रायपुर ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन प्रक्रिया में अपनाए गए तकनीकी नवाचार किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के अनुभव को पूरी तरह सकारात्मक बना दिया है। राज्य भर में कृषक अब स्मार्टफोन से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन काट रहे हैं और उपार्जन केन्द्रों पर भीड़ और परेशानी से बच रहे हैं।
सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करजी के किसान  उमाशंकर कुशवाहा ने बताया कि नई व्यवस्था ने धान विक्रय को सरल, तेज और सम्मानजनक बना दिया है। आठ एकड़ धान की खेती करने वाले कुशवाहा इस वर्ष 150 क्विंटल धान बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले टोकन कटवाने के लिए समिति केन्द्र जाना पड़ता था, जहां घंटों कतार और प्रतीक्षा से किसान परेशान होते थे। लेकिन अब किसान तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से 24×7 घर बैठे टोकन कटने लगे हैं, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को निर्णय लेने में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता देती है। अपनी सुविधा के अनुसार टोकन काटकर वे सीधे उपार्जन केन्द्र पहुंचते हैं, जिससे अव्यवस्था कम हुई है और खरीदी व्यवस्था सुगम हुई है।
करजी उपार्जन केन्द्र की प्रशंसा करते हुए कुशवाहा ने बताया कि केंद्र पहुंचते ही गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना समय पर उपलब्ध कराया गया। पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी होने से किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने समिति कर्मचारियों को सहयोगी और किसान-सेवा के प्रति तत्पर बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वोच्च समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का लाभ मिल रहा है। यह किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बना है।
कुशवाहा ने यह भी कहा कि बेहतर आय मिलने से किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे खेती में स्थिर आय के साथ नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ का किसान आत्मविश्वासी, सशक्त और खुशहाल है। तकनीकी सुधारों ने धान खरीदी को किसान हितैषी बनाया है।
 

छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों से किसानों के सशक्तिकरण की नई मिसाल

20-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में कोरबा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य सुव्यवस्थित, सुचारू एवं पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संचालित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों में किसानों की सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए तौल, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुदृढ़ की गई हैं। 
शासन की प्रभावी नीतियों, प्रशासनिक सतर्कता तथा सतत निगरानी का सकारात्मक प्रभाव उपार्जन केंद्रों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। वर्तमान में धान खरीदी की व्यवस्था को लेकर किसानों के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास और संतोष का वातावरण निर्मित हुआ है। कोरबा जिले के ग्राम सोनपुरी निवासी लघु कृषक हेमलाल पटेल ने उपार्जन केंद्र कनकी में इस वर्ष 10 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी धान विक्रय के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। उपार्जन केंद्र में अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया गया। पटेल ने बताया कि टोकन प्राप्ति से लेकर धान की तौल एवं विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया क्रमबद्ध, सरल और पारदर्शी रही। उपार्जन केंद्रों में माइक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं की उपलब्धता से लेन-देन में भी सुविधा हुई, जिससे समय और संसाधनों की बचत हुई है।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा सम्मानजनक मूल्य मिलने से भविष्य को लेकर उनकी चिंताएं कम हुई हैं। समितियों के माध्यम से एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होने से किसानों को बड़ा सहारा मिला है। पटेल ने छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि शासन की संवेदनशील सोच से ही आज किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सका है।

किसान तुंहर टोकन ऐप से बदली धान विक्रय की तस्वीर, करजी के किसान को मिली सहज और पारदर्शी सुविधा

19-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )  जिले में धान उपार्जन केन्द्रों की पारदर्शी एवं डिजिटल व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय में सुविधा मिल रही  है। ग्राम पंचायत करजी के किसान देवेश्वर प्रसाद कुशवाहा ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि शासन द्वारा लागू किसान तुंहर टोकन ऐप ने धान बेचने की प्रक्रिया को सरल, सुगम और समय बचाने वाला बना दिया है।
किसान देवेश्वर प्रसाद ने बताया कि उनके पास 72 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने कहा कि अब घर बैठे मोबाइल के माध्यम से टोकन काटने की सुविधा मिल रही है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली से समिति में बार-बार आने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से टोकन कटते ही किसान निश्चित तिथि पर उपार्जन केन्द्र पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि करजी धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण किया गया तथा तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित होने के कारण धान विक्रय में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। उपार्जन केन्द्र में किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा समिति के कर्मचारी सहयोगात्मक भूमिका निभा रहे हैं।
किसान देवेश्वर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, साथ ही प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की जा रही है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे गेहूं, तिलहन एवं सब्जी की खेती में कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में निरंतर वृद्धि हो रही है।
किसान ने धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि किसान हितैषी नीतियों के कारण अब प्रदेश का किसान आत्मनिर्भर और सशक्त बन रहा है।
 

शेडनेट तकनीक से शिवराम वेक ने बढ़ाई सब्जी की पैदावार, आय में हुआ इजाफा

17-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश ) उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक तकनीक अपनाकर दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड के ग्राम मड़से के प्रगतिशील कृषक शिवराम वेक ने अपनी खेती को नई दिशा दी है। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने वर्ष 2024-25 में 1000 वर्ग मीटर का शेडनेट हाउस स्थापित किया। इसमें उन्होंने बरबट्टी की उन्नत किस्मों का उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अपेक्षा से अधिक उपज मिली।
शेड नेट हाउसएक कृषि संरचना है जिसमें जालीदार नेट का उपयोग करके एक ढाँचा बनाया जाता है, जो पौधों को तेज़ धूप, कीटों, और अत्यधिक मौसम से बचाता है, साथ ही ज़रूरी नमी, हवा और सूरज की रोशनी को अंदर आने देता है, जिससे फसलों के लिए अनुकूल सूक्ष्म वातावरण बनता है, विशेषकर फूल, सब्जियां और नर्सरी पौधों के लिए यह फायदेमंद है, इसे नेट हाउस या छाया घर भी कहते हैं और यह कम लागत में बेहतर उत्पादन और पानी की बचत करता है।
शेडनेट निर्माण से तापमान नियंत्रित हुआ, फसल को कीटों से सुरक्षा मिली और मिट्टी में नमी भी बनी रही। ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करने से पानी की बचत हुई और पौधों को लगातार उचित नमी मिलती रही। इन नियंत्रित परिस्थितियों के कारण उत्पादन खुले खेत की तुलना में 35-40 प्रतिशत तक बढ़ गया। शेडनेट में तैयार हरी बरबट्टी स्थानीय बाजार में अच्छी कीमत पर बिकी, जिससे शिवराम वेक को नियमित नकद आय मिलने लगी।
शेडनेट में सफलता मिलने के बाद शिवराम ने 0.20 हेक्टेयर खुले क्षेत्र में सेम की खेती शुरू की। गुणवत्ता वाले पौध, जैविक खाद, ट्रेलिस (मचान) विधि और मौसम अनुसार सिंचाई ने फसल को मजबूत बनाया। इसके परिणामस्वरूप सेम की फलन क्षमता बढ़ी और बाजार में अच्छी मांग मिलने से प्रति चक्र उन्हें 15,000 से 20,000 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
नई तकनीक अपनाने की उनकी इच्छाशक्ति और मेहनत ने उनकी खेती को लाभकारी बना दिया। अब वे अपनी सब्जियों को सीधे स्थानीय हाट-बाजार और थोक विक्रेताओं तक पहुँचाते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई। शेडनेट और सब्जी उत्पादन से उनकी मासिक आय में लगभग 8-12 हजार रुपये की लगातार वृद्धि दर्ज की गई। आज शिवराम वेक गांव के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं। शासकीय योजनाओं और उद्यानिकी विभाग की तकनीकी सहायता से उन्होंने सिद्ध किया है कि आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं।

 

धान खरीदी में गड़बड़ी पर सरकार सख्त, 31 निलंबन समेत एफआईआर दर्ज

16-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर की जा रही धान खरीदी में अनियमितता बरतने के फलस्वरूप समिति प्रबंधकों तथा धान खरीदी से जुड़े 38 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 31 कर्मचारियों के विरूद्ध निलंबन तथा निलंबित, एक की सेवा समाप्ति, दो को सेवा से पृथक, एक को कार्य से पृथक और तीन कर्मचारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है। ये कार्रवाईयां प्रदेश के 12 जिलों दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद तथा बलौदाबाजार-भाटापारा में की गई हैं। 
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार धान खरीदी कार्य के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण में स्कंध में कमी के 5 मामले, स्कंध अधिक एवं अव्यवस्थित स्टेकिंग के 3 मामले, नीति विपरीत कार्य-निर्देशों का उल्लंघन के 4 मामले, अमानक धान खरीदी के 5 मामले, धान खरीदी में अनियमितता के 11 मामले, अवकाश के दिन धान खरीदी के 3 मामले सहित फर्जी खरीदी, अनियमितता, टोकन अनियमितता, बिना आवक पर्ची, अवैध वसूली, अव्यवस्था के एक-एक तथा बारदाना वितरण में अनियमितता के 2-2 मामलों पर कार्रवाई की गई है। 
दुर्ग जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य के भौतिक सत्यापन में स्कंध गड़बड़ी पाए जाने के फलस्वरूप झीट धान उपार्जन केन्द्र के समिति प्रबंधक सौरभ यादव तथा  गोढ़ी के समिति प्रबंधक शेखर सिंह कश्यप, खिलोराकला के समिति प्रभारी देवदत पटेल, कन्हारपुर के समिति प्रभारी सेवाराम पटेल, ठेंगाभाट के समिति प्रभारी ईश्वर कुमार साहू, मुरमुंदा के समिति प्रभारी टिकेन्द्र कुर्रे को निलंबित किया गया है। इसी प्रकार सेलूद के सहायक समिति प्रबंधक रोमनदास वैष्णव और भृत्य हरिशंकर साहू को नीति के विपरित कार्य व उल्लंघन के मामले में निलंबित किया गया है। 
बेमेतरा जिले में अमानक धान खरीदी के मामले में धान उपार्जन केन्द्र बोरतरा के प्रभारी सहायक प्रबंधक टिकेश्वर निषाद, फड प्रभारी (लिपिक) किशन जंघेल, गाडाडी धान उपार्जन केन्द्र के प्रभारी समिति प्रबंधक भुनेश्वर वर्मा तथा फड प्रभारी गेंदलाल वर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं मऊ के सहायक समिति प्रबंधक  उमेश कुमार साहू के विरूद्ध फर्जी धान खरीदी के मामले में निलंबित तथा एफआईआर की कार्रवाई की गई है। कबीरधाम जिले में धान उपार्जन केन्द्र कुकदूर के समिति प्रबंधक  अनिल बाजपेयी के विरूद्ध भौतिक सत्यापन स्कंध में कमी पाए जाने के कारण निलंबन के साथ-साथ एफआईआर दर्ज किया गया है। बारदाना वितरण में अनियमितता के कारण चपोरा उपार्जन केन्द्र प्रभारी नरेश यादव को निलंबित किया गया है।
बिलासपुर जिले के धान उपार्जन केन्द्र पीपरतराई के प्रभारी  तेजुराम को खराब धान खरीदी के मामले में निलंबित किया गया है। वहीं धान खरीदी केन्द्र एरमसाही के प्रभारी कामीराम खुंटे के विरूद्ध 920 बोरों की कमी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराया गया है। जांजगीर-चांपा जिले में धान खरीदी केन्द्र बोड़सरा के भृत्य हरिहर यादव, कम्प्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार तिवारी, चौकीदार निरंजन साहू को छुट्टी के दिन आवक लेने के फलस्वरूप निलंबित कर दिया गया  है। धान उपार्जन केन्द्र कोसमंदा के कम्प्यूटर ऑपरेटर छविलाल मन्नेवार को टोकन में अनियमितता के कारण निलंबित किया गया है।  
रायगढ़ जिले में धान खरीदी में अनियमितता के फलस्वरूप मुकडेगा के सहायक समिति प्रबंधक तेलूराम सिदार, कोडसिया के सहायक समिति प्रबंधक प्रहलाद बेहरा, छाल के सहायक समिति प्रबंधक ठंडाराम बेहरा और जमरगीडीह के सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया को निलंबित किया गया है। सक्ती जिले के धान उपार्जन केन्द्र कांसा के प्रभारी एकलव्य चंद्राकर को बिना आवक पर्ची धान खरीदी के मामले में सेवा से पृथक कर दिया गया है। जगदलपुर जिले में कोलचूर प्रभारी समिति प्रबंधक गौतम तिवारी और रेटावण्ड के प्रभारी समिति प्रबंधक दीनबंधु पाणीग्रही को धान खरीदी में अनियमितता के फलस्वरूप निलंबित किया गया है। रायपुर जिले में नरदहरा के लिपिक-ऑपरेटर राकेश जांगड़े को किसानों से अवैध वसूली के मामले में सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है। 
गरियाबंद जिले में धान खरीदी में लापरवाही एवं अनियमितता के लिए लोहरसी के कर्मचारी श्री संतोष कुमार साहू, मैनपुर के गोपी राम मरकाम को निलंबित तथा शोभा के भीखम मरकाम को कार्य से पृथक किया गया है। महासमुंद जिले में धान खरीदी में अनियमितता के मामले में पिरदा के उपार्जन केन्द्र प्रभारी रोहित पटेल और सिंगबहाल के उपार्जन केन्द्र प्रभारी बुध्दिवंत प्रधान के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है। साथ ही धान खरीदी में अव्यवस्था के कारण तोषगांव के उपार्जन केन्द्र प्रभारी नकुल साहू को निलंबित किया गया है।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में धान खरीदी केन्द्र सकरी के प्रभारी समिति प्रबंधक सतीष कुमार महिलांग द्वारा नीति के विपरित कार्य करने के फलस्वरूप निलंबित किया गया है तथा बारदाना प्रभारी कुमारी थानेश्वरी साहू को नीति के विपरीत कार्य करने के फलस्वरूप सेवा से पृथक किया गया है। करमदा के प्रभारी समिति प्रबंधक राजकमल साहू को धान स्कंध में कमी पाए जाने के फलस्वरूप निलंबित किया गया है।
 

मेहनत, तकनीक और भरोसेमंद व्यवस्था ने बदली किसान की तक़दीर

16-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) धमतरी जिले के ग्राम परखंदा के प्रगतिशील किसान साहिल साहू ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती को सही योजना, आधुनिक तकनीक और सरकारी व्यवस्थाओं के सहयोग से किया जाए, तो यह लाभ का सशक्त माध्यम बन सकती है। साहिल साहू ने इस खरीफ सीजन में अपने 11 एकड़ खेत में उत्पादित धान को गाड़ाडीह उपार्जन केंद्र में समर्थन मूल्य पर बेचते हुए कुल 231 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक उपार्जन किया।
कई वर्षों से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय कर रहे साहिल साहू बताते हैं कि इस वर्ष की धान खरीदी व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-हितैषी रही। उपार्जन केंद्र में समयबद्ध तौल, व्यवस्थित लाइन प्रणाली, सहयोगी कर्मचारियों की मौजूदगी और त्वरित प्रक्रिया के चलते किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। इससे किसानों का समय बचा और व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
अपनी सफलता के पीछे के अनुभव साझा करते हुए साहिल साहू कहते हैं कि उन्नत किस्म के बीजों का चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और कृषि कार्यों का समय पर निष्पादन उनकी खेती की प्रमुख विशेषता है। कृषि विभाग से प्राप्त मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है, जिससे बाजार में उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है।
धान विक्रय से मिली आय का उपयोग साहिल साहू बेहतर खेती के विस्तार, पुराने कृषि ऋणों के भुगतान और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रहे हैं। उनका मानना है कि आर्थिक स्थिरता किसान को आत्मनिर्भर बनाती है और परिवार को सुरक्षित भविष्य देने में सहायक होती है।
परखंदा के साहिल साहू की यह सफलता कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि सही रणनीति, सतत परिश्रम और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से खेती को समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
 

डिजिटल टोकन व्यवस्था से सशक्त हो रहे किसान

16-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधारों का व्यापक लाभ किसानों को मिल रहा है। किसान तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सुविधा ने धान विक्रय प्रक्रिया को आसान, समयबद्ध और व्यवस्थित बना दिया है।
अंबिकापुर के ग्राम पंचायत करजी के लघु सीमांत किसान धर्मसाय ने बताया कि उनके पास कुल 84 क्विंटल धान का रकबा है और उन्होंने ऐप के माध्यम से घर बैठे 64 क्विंटल धान के लिए टोकन प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुविधा ने समिति कार्यालय की भीड़ और अनावश्यक भागदौड़ समाप्त कर दी है, जिससे किसानों का समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
निर्धारित तिथि पर धान उपार्जन केन्द्र पहुंचने पर धर्मसाय को गेट पास, धान की नमी जांच और बारदाना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष व्यवस्था पूरी तरह सुव्यवस्थित है और धान विक्रय में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आई। उपार्जन केन्द्रों पर पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था तथा समिति कर्मचारियों द्वारा सहयोग जैसे प्रबंध किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य ₹3100 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। इस कदम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। साथ ही किसान धान के साथ गेहूं, तिलहन और सब्जी उत्पादन की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं, जिससे आय के स्रोत विविध हो रहे हैं।
धर्मसाय ने धान खरीदी व्यवस्था को किसान हितैषी बताते हुए राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल पारदर्शिता, बेहतर मूल्य और सुविधाजनक खरीदी व्यवस्था के कारण किसान आत्मविश्वास से भर रहे हैं और प्रदेश का ग्रामीण कृषि तंत्र मजबूत हो रहा है।
 



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