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किसान

कम लागत, दोगुना फायदा : जशपुर के किसान ने गेहूं की खेती से बढ़ाई आमदनी

03-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश)मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम सोगड़ा निवासी किसान कीना राम इस पहल का सफल उदाहरण हैं। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद उन्होंने खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं की खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है।
किसान कीना राम ने बताया कि कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने रबी फसल की खेती शुरू की। राष्ट्रीय खाद्य
सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के तहत उन्हें एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने खेत की अच्छी तैयारी कर पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद का उपयोग किया तथा समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन किया। इसका परिणाम यह रहा कि फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बहुत कम रहा और गेहूं का अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ।
कीना राम ने बताया कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे केवल खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे और रबी सीजन में खेत खाली छोड़ देते थे। इससे उन्हें गेहूं बाजार से खरीदना पड़ता था। अब रबी में गेहूं की खेती करने से परिवार के लिए गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उत्पादन बेचकर आय भी प्राप्त हो रही है।
उन्होंने बताया कि धान के बाद गेहूं की खेती से खाली समय और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है, खेती की लाभप्रदता बढ़ी है तथा रबी में पड़ती भूमि भी समाप्त हो गई है। इससे परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
किसान कीना राम ने अन्य किसानों से भी खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कम लागत और कम समय में बेहतर आमदनी प्राप्त करने के लिए रबी फसल एक बेहतर विकल्प है। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।









 

करेले की खेती बनी कमाई का जरिया, ओमनारायण ध्रुव ने बदली अपनी तकदीर

30-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) ।  बदलते दौर में खेती अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि बेहतर आय का भरोसेमंद जरिया भी बन रही है। इसका उदाहरण महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम जुनवानी खुर्द के प्रगतिशील किसान ओमनारायण ध्रुव हैं, जिन्होंने उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
करीब 2.32 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि के मालिक ओमनारायण ध्रुव वर्षभर विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती करते हैं। इससे उन्हें नियमित आय मिलती है और पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेते हुए एक हेक्टेयर में करेला की खेती की। इसके लिए उन्हें 24 हजार रुपये का अनुदान मिला, वहीं आधा हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम स्थापित करने के लिए 5 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की गई।
ओमनारायण ने खेती में ड्रिप सिंचाई और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर उत्पादन लागत पर नियंत्रण के साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी। आधुनिक तकनीकों का परिणाम यह रहा कि उन्हें प्रति एकड़ लगभग 12 टन करेला उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से फसल बेचने के बाद सभी लागतों को घटाकर उन्हें करीब 96 हजार रुपये प्रति एकड़ का शुद्ध लाभ मिला।
ओमनारायण ध्रुव अपनी इस सफलता का श्रेय राष्ट्रीय बागवानी मिशन, उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक खेती की तकनीकों को देते हैं। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी अब सब्जी एवं उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इससे क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ रहा है और किसानों की आय के नए रास्ते खुल रहे हैं। 













 

नैनो उर्वरक से बदल रही खेती की तस्वीर, छत्तीसगढ़ में कृषि की नई क्रांति

30-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।
नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।
छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। 
वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।















 

किसान सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े करीब 3 करोड़ किसान, डिजिटल कृषि परामर्श सेवाओं का उठा रहे लाभ

29-Jun-2026
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म के साथ 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जुलाई 2021 में शुरू किए गए इस एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार मंच पर अब तक 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है। इसके अलावा, किसानों के लिए 351 कृषि उत्पादों से संबंधित 21,900 कृषि सलाह भी जारी की गई हैं।
करीब 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाकर इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया। इनमें से 5.35 लाख किसान कॉल सेंटर के माध्यम से, 21,517 मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए, 2,416 वेब पोर्टल के माध्यम से और 39,193 कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए पंजीकरण हुए।
सरकार ने बताया कि किसान सारथी की सेवाएं देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और 6.63 लाख गांवों तक पहुंच चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) का उपयोग करता है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद संभव हो पाता है। साथ ही, कृषि अनुसंधान से जुड़ी जानकारी सीधे खेतों तक पहुंचाने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को समय पर, विश्वसनीय और कई भाषाओं में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, मौसम से जुड़े अपडेट और विशेषज्ञों से सीधे परामर्श की सुविधा भी मिलती है। यह प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने विकसित और लागू किया है।
सरकार का कहना है कि इन सभी संस्थानों के एक साथ जुड़ने से देश भर में कृषि सलाह का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार हुआ है, जिससे किसानों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार भरोसेमंद और उपयोगी सलाह मिल रही है।
यह प्लेटफॉर्म किसान कॉल सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, मायस्कीम और भाषिनी जैसी प्रमुख राष्ट्रीय सेवाओं से भी जुड़ा हुआ है, जिसके जरिए किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिनमें 102 योजनाएं केंद्र सरकार की हैं।
इस प्लेटफॉर्म पर सभी प्रमुख अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी फसलों, बागान फसलों और चारा फसलों से संबंधित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी भी किसानों को दी जाती है। किसान अपनी स्थानीय भाषा में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सवाल पूछ सकते हैं और उसी भाषा में सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
किसान सारथी प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से लाइव बातचीत की सुविधा भी देता है। साथ ही, किसानों के लिए एक ज्ञान भंडार भी उपलब्ध कराता है। इससे कृषि अनुसंधान संस्थानों की पहुंच बढ़ी है और वैज्ञानिक सलाह अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच रही है।
सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के साथ-साथ कृषि अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग को भी बढ़ावा दे रहा है।

 

किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रशासन सख्त, अवैध उर्वरक पर कार्रवाई

28-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (च्त्व्ड) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं।
महासमुंद जिले के कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
 

हरित खाद से मिट्टी होगी अधिक उपजाऊ, किसानों को किया जा रहा जागरूक

27-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा द्वारा हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के उपयोग के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देश तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को हरित खाद के वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40 से 45 दिन की अवस्था में खेत में पलटकर हरित खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। ये फसलें राइजोबियम जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर लगभग 50 से 55 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि में उपलब्ध कराती हैं, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। इससे फसल उत्पादन में सुधार होने के साथ भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता भी बनी रहती है। उन्होंने इसे कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रभावी तकनीक बताया।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खरीफ फसलों की बुवाई से पहले हरित खाद का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बनेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वैज्ञानिक पांडु राम पैकरा, डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य, लीलाधर साहू, विरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई

26-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश)  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार किसानों को निर्धारित दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सरगुजा जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अंबिकापुर के नेहरूनगर (डीगमा) स्थित एक उर्वरक विक्रय केंद्र पर औचक निरीक्षण कर 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए हैं तथा विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक कृषक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी कि नेहरूनगर (डीगमा) स्थित मेसर्स सरगुजा कृषि राय केंद्र द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरकों का विक्रय किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच प्रारंभ की।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता किसान के बयान एवं ऑनलाइन भुगतान से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय किए जाने की पुष्टि होने पर जिला स्तरीय टीम ने 25 जून को संबंधित प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया। 
निरीक्षण के दौरान परिसर में उपलब्ध 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए तथा संपूर्ण विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया। कृषि विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जिले के उर्वरक विक्रेताओं में स्पष्ट संदेश गया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के दौरान सहायक संचालक कृषि कुंवर साय पैंकरा, उर्वरक निरीक्षक जे. आलम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सीताराम भगत सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध आगे भी लगातार निरीक्षण एवं कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अनियमितता की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 अथवा कृषि विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

शेडनेट हाउस ने बदली किसान की तकदीर

24-Jun-2026
रायपुर: कभी परंपरागत खेती तक सीमित रहे बीजापुर जिले के ग्राम पोलेम के किसान कन्हैया आत्रम आज आधुनिक बागवानी तकनीक अपनाकर आर्थिक समृद्धि की नई मिसाल बन गए हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उद्यानिकी विभाग के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किया, जिससे उनकी खेती की तस्वीर ही बदल गई।
शेडनेट हाउस में कन्हैया आत्रम करेला, खीरा, तरोई और बरबटी जैसी सब्जियों की उन्नत खेती कर रहे हैं। इस खेती से उन्हें अब तक लगभग 2 लाख रुपये का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसमें सभी खर्च निकालने के बाद 1.80 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई। वहीं खुले खेत में लाल मिर्च की खेती से उन्होंने करीब 7 लाख रुपये का उत्पादन हासिल किया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत के बाद उन्हें 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
कन्हैया आत्रम का कहना है कि उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, अनुदान और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का आत्मविश्वास दिया। उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और यह साबित कर रही है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर कम क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित की जा सकती है।
 

नैनो उर्वरकों से बदली किसान दशरथ वर्मा की खेती, कम लागत में मिला बेहतर परिणाम

23-Jun-2026
कवर्धा, 23 जून 2026 कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत उसलापुर के किसान दशरथ वर्मा आज उन प्रगतिशील कृषकों में शामिल हैं, जिन्होंने बदलते समय के साथ खेती की नई तकनीकों को अपनाकर अपनी कृषि को अधिक लाभकारी और सुविधाजनक बनाया है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया और अब उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
लगभग 4.50 एकड़ भूमि पर धान और गन्ने की खेती करने वाले वर्मा बताते हैं कि पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों को खेत तक पहुंचाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी। दुकान से घर और फिर खेत तक 50 किलोग्राम की बोरियां ले जाना कठिन होने के साथ समय और श्रम दोनों की मांग करता था। इसके साथ भंडारण की समस्या भी बनी रहती थी। दशरथ वर्मा ने खेती में बदलाव की शुरुआत करते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया। उन्होंने बताया कि अब केवल 500 मिलीलीटर की एक बोतल को स्प्रेयर के माध्यम से फसल पर छिड़का जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे और प्रभावी तरीके से मिलते हैं। इससे उर्वरक की बर्बादी कम हुई और फसल की गुणवत्ता तथा उत्पादन में सकारात्मक सुधार दिखाई दिया।
दशरथ बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी खेती की लागत पहले की तुलना में कम हुई है और काम करने में भी सुविधा बढ़ी है। कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से समय, श्रम और संसाधनों की बचत हो रही है। वर्मा ने कहा कि खेती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है जो भविष्य के लिए टिकाऊ भी हों। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से भूमि और पर्यावरण पर दबाव कम पड़ता है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले प्रभावों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
 

’नैनो उर्वरकों से बदलेगी खेती की तस्वीर, किसानों को कम लागत में मिलेगा अधिक लाभ’

22-Jun-2026
कोरिया(शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ नैनो उर्वरकों जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब किसानों की खेती में दिखाई देने लगा है।
कोरिया जिले के ग्राम मनसुख निवासी किसान छत्रपाल साय भी आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। लगभग 17 एकड़ भूमि में धान की खेती करने वाले छत्रपाल साय ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में इस वर्ष अपनी फसल में नैनो यूरिया के उपयोग का निर्णय लिया है। उन्होंने सहकारी समिति से आवश्यक खाद एवं नैनो उर्वरक प्राप्त किए हैं और बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं।
छत्रपाल साय का मानना है कि नैनो उर्वरक खेती को अधिक वैज्ञानिक, किफायती और प्रभावी बनाते हैं। उनके अनुसार नैनो यूरिया फसलों को आवश्यक पोषक तत्वों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे पौधों की वृद्धि और विकास में सुधार होता है। कम मात्रा में उपयोग के बावजूद इसका प्रभाव अधिक होने से पारंपरिक उर्वरकों की आवश्यकता घटती है और किसानों की लागत में बचत होती है।
उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव आसान है तथा इनके उपयोग से पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। इससे फसलों को संतुलित पोषण मिलता है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, ये उर्वरक मृदा की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायक हैं।
छत्रपाल साय ने सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को अब कृषि आदान सामग्री प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
नैनो उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और कृषि आदान सामग्री की सुगम उपलब्धता से किसानों का भरोसा आधुनिक कृषि तकनीकों पर बढ़ रहा है। इससे खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम मिलने की उम्मीद है।



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