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छत्तीसगढ़ के किसानों ने ओडिशा में देखी ऑयल पाम की खेती

17-Feb-2026
रायपुर ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के किसान ओडिशा में ऑयल पाम की खेती का अवलोकन किया। ओडिशा के किसानों द्वारा ऑयल पाम की खेती से प्राप्त आमदनी से काफी प्रभावित हुए। गौरतलब है कि सूरजपुर जिले में ऑयल पाम खेती के विस्तार एवं किसानों की आय वृद्धि के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग द्वारा 25 कृषकों का प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम नुआपाड़ा जिला के खरियार रोड स्थित बेलटुकरी ग्राम में प्रगतिशील कृषक लक्ष्मी चंद्राकर के प्रक्षेत्र पर आयोजित कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ऑयल पाम उत्पादन की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना तथा आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को ऑयल पाम की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक पौधरोपण विधि, संतुलित पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्रक्षेत्र में व्यवहारिक प्रदर्शन कर उत्पादन बढ़ाने की प्रभावी तकनीकों का मार्गदर्शन प्रदान किया। किसानों ने रोपण के 4 वर्ष से 10 वर्ष तक के पौधों से प्राप्त सफल उत्पादन को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।
ओडिशा के कृषकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रति एकड़ 1.5 से 2 लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। दीर्घकालीन 25 से 30 वर्षों तक सतत उत्पादन, अंतरवर्ती फसलों से अतिरिक्त आमदनी तथा कम लागत में अधिक लाभ की संभावनाओं ने प्रतिभागी किसानों को अत्यंत प्रभावित किया।
कार्यक्रम में प्री यूनिक एशिया लिमिटेड कंपनी की ओर से संजीव ज्ञान जी ने ऑयल पाम की खेती, विपणन व्यवस्था तथा शासन द्वारा प्रदाय अनुदान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में कम लागत के साथ दीर्घकाल में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
उद्यानिकी तकनीकी अधिकारी अरुणा कुजूर एवं वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी द्वारा “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना” के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान की जानकारी दी गई। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर रखरखाव हेतु 6,750 रूपए (केंद्र सरकार द्वारा 5,250 एवं राज्य की ओर से 1,500 रूपए प्रदान किया जाता है), इसी तरह अंतरवर्ती फसल हेतु 10,250 (केंद्र द्वारा 5,250 एवं राज्य द्वारा 5000 रूपए ), ड्रिप सिंचाई प्रणाली हेतु 22,765 रूपए (केंद्र द्वारा 14,130 एवं राज्य द्वारा 8,635 रूपए) का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त फेंसिंग (घेराबंदी) के लिए राज्य शासन द्वारा 54,485 रूपए की पूर्ण सहायता दी जा रही है, जिससे फसल को जंगली एवं घरेलू पशुओं से सुरक्षा मिल सके।
 

फसल विविधीकरण की ओर कदम, राजनांदगांव में धनिया की खेती का सफल प्रयोग

14-Feb-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )।  फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेसर के किसान दौलतराम साहू ने 2.5 एकड़ कृषि भूमि में धनिया की फसल लगाकर नवाचार की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है।
साहू ने बताया कि उन्हें उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन एवं 20 किलोग्राम धनिया बीज उपलब्ध कराया गया। फसल चक्र परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया, जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता में वृद्धि के साथ उत्पादन लागत में कमी संभव हो सके। उन्होंने बताया कि धनिया की खेती में धान की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है, रोगों का प्रकोप कम होता है तथा लागत अपेक्षाकृत कम आती है। मार्च-अप्रैल माह में फल धनिया से आय प्राप्त होने की संभावना है, जिससे अतिरिक्त लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है। धान की परंपरागत खेती की तुलना में अन्य फसलों से बेहतर आय प्राप्त हो रही है। शासन द्वारा चना, सरसों एवं अन्य फसलों की खरीदी की घोषणा से भी किसानों को लाभ मिलेगा और वे वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित होंगे।
साहू ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा मंत्रीपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान होली पर्व से पूर्व किया जाएगा। उन्होंने इसे किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तथा आयवृद्धि को ध्यान में रखते हुए किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थायी एवं संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।

 


सौर सुजला योजना से किसान की आय में बढ़ोतरी, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

14-Feb-2026
रायपुर ( शोर संदेश )। छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी योजनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सौर सुजला योजना के माध्यम से सक्ती जिले के विकासखंड डभरा अंतर्गत ग्राम सकराली के किसान अवध राम (पिता साधु) के जीवन में सुखद परिवर्तन आया है।
क्रेडा विभाग के माध्यम से उनके खेत में 3 एच.पी. क्षमता का सोलर सिंचाई पंप स्थापित किया गया। सोलर पंप की स्थापना से पूर्व वे डीजल पंप से सिंचाई करते थे, जिससे एक एकड़ भूमि की सिंचाई पर लगभग 10 हजार रुपये तक का व्यय होता था। डीजल की बढ़ती कीमत और पंप की अनियमितता के कारण वे वर्ष में केवल एक ही फसल ले पाते थे, जिससे आय सीमित रहती थी।
योजना के अंतर्गत मात्र 10 हजार रुपये के अंशदान पर सोलर पंप स्थापित होने से डीजल पर होने वाला खर्च पूर्णतः समाप्त हो गया तथा सिंचाई की सुविधा नियमित और सुगम हो गई। परिणामस्वरूप अब वे वर्ष में दो फसल लेने में सक्षम हो गए हैं। वर्तमान में अवध राम एक एकड़ भूमि में आलू एवं गेहूं तथा 40 डिसमिल भूमि में परवल की खेती कर रहे हैं, जिससे लगभग 90 हजार रुपये का लाभ होने की संभावना है। आगामी धान फसल से भी 60 से 70 हजार रुपये तक के मुनाफे का अनुमान है। इस प्रकार 1.4 एकड़ भूमि से उनकी वार्षिक आय लगभग 1.5 लाख रुपये तक पहुँचने की संभावना है।
 सोलर पंप की स्थापना से न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति एवं जीवन स्तर में भी सुधार आया है। अवध राम अब आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर होते हुए अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। शासन की यह पहल किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें समृद्धि की ओर अग्रसर करने में प्रभावी सिद्ध हो रही है।


 

अंतर-राज्यीय कृषि सहयोग की मिसाल: झारखंड के किसानों का छत्तीसगढ़ अध्ययन भ्रमण

14-Feb-2026
रायपुर ( शोर संदेश )। कृषि क्षेत्र में नवाचारों के आदान-प्रदान एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झारखंड राज्य के रांची जिले के कृषकों के एक दल ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का अंतर-राज्यीय अध्ययन भ्रमण किया। यह पहल राज्यों के मध्य तकनीकी सहयोग एवं अनुभव साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भ्रमण के दौरान कृषक दल ने पाटन विकासखंड के ग्राम करगा का दौरा कर बिना जुताई (जीरो टिलेज) पद्धति से गेहूं उत्पादन एवं अधिक तापमान सहनशील उन्नत किस्म ‘कनिष्का’ के प्रदर्शन का अवलोकन किया। साथ ही असिंचित क्षेत्रों में धान कटाई उपरांत खेत की नमी का उपयोग करते हुए उतेरा पद्धति से तिवड़ा की खेती तथा मेड़ पर कम अवधि वाली ‘राजेश्वरी फूले’ अरहर की खेती की तकनीक का निरीक्षण किया। स्थानीय प्रगतिशील कृषकों से संवाद कर दल ने कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
कृषक दल ने कृषि विज्ञान केंद्र, पाहंदा (अ) का भी भ्रमण किया, जहाँ वैज्ञानिकों द्वारा धनिया, तिवड़ा, चना, सरसों एवं हल्दी की वैज्ञानिक खेती, कम लागत आधारित वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा उद्यानिकी नर्सरी प्रबंधन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। किसानों ने जैविक एवं संसाधन-संरक्षण आधारित तकनीकों में विशेष रुचि व्यक्त की।
भ्रमण कार्यक्रम में झारखंड कृषि विभाग से विकास कुमार उपस्थित रहे। तकनीकी मार्गदर्शन हेतु कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय जैन, डॉ. कमल नारायण वर्मा, डॉ. ललिता रामटेके, डॉ. आरती टिकरिहा,सृष्टि तिवारी एवं कु. हर्षना चंद्राकर ने किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की।
झारखंड के कृषकों ने इस अध्ययन भ्रमण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्राप्त तकनीकों को अपने क्षेत्रों में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह पहल राज्यों के मध्य ज्ञान एवं नवाचार के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित कर कृषि क्षेत्र को अधिक सुदृढ़ एवं लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।






 

उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीक से मूंगफली उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी

05-Feb-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )। कृषि विभाग की केन्द्र प्रवर्तित नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल सीड योजना मुंगेली जिले के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। योजना के अंतर्गत प्रदाय उन्नत बीज एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर मुंगेली विकासखंड के ग्राम बरईदहरा निवासी कृषक नागेश्वर सिंह परिहार ने खरीफ मौसम में मूंगफली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त करते हुए 1.18 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
59 वर्षीय कृषक परिहार स्नातक (बी.ए.) शिक्षित हैं और पारंपरिक कृषि अनुभव के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने में अग्रसर रहते हैं। उनके पास कुल 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें से 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में उन्होंने उक्त योजना के अंतर्गत मूंगफली फसल का उत्पादन किया। कृषि विभाग द्वारा उन्हें 1.5 हेक्टेयर के लिए 150 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता युक्त मूंगफली बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
योजना के तहत विभागीय अमले एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा उन्हें कतार बोनी, बीजोपचार, जैविक आदानों के उपयोग, गुणवत्तायुक्त बीज चयन तथा समुचित फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, योजनांतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मूंगफली फसल की संपूर्ण शस्य क्रियाएँ, फसल की क्रांतिक अवस्थाएँ, खाद एवं उर्वरक का समन्वित उपयोग तथा बीज उत्पादन के मापदण्डों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक सलाहों को अपनाकर श्री परिहार ने फसल प्रबंधन को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मूंगफली फसल का उत्पादन पूर्व वर्षों की तुलना में अधिक रहा। निःशुल्क बीज उपलब्ध होने से बीज क्रय पर होने वाला व्यय भी बचा, जिससे उनकी आय में प्रत्यक्ष वृद्धि हुई। कृषक  परिहार ने योजना को अत्यंत उपयोगी बताते हुए अन्य कृषकों से भी शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की अपील की है।

किसानों को बड़ी राहत: मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर धान खरीदी के लिए दो दिन की अतिरिक्त मोहलत

04-Feb-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए धान खरीदी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियों के किसानों को धान विक्रय हेतु अतिरिक्त दो दिवस  05 एवं 06 फरवरी 2026 तक खरीदी की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के  निर्देशानुसार तीन प्रकार के किसान इस अतिरिक्त अवधि में धान विक्रय कर सकेंगे - ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात टोकन हेतु आवेदन किया गया, किंतु सत्यापन नहीं हो पाया है। ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात आवेदन किया गया तथा सत्यापन उपरांत उनके पास धान पाया गया है। ऐसे किसान, जिन्हें दिनांक 28 जनवरी 2026, 29 जनवरी 2026 एवं 30 जनवरी 2026 को टोकन प्राप्त हुआ था, परंतु किसी कारणवश वे निर्धारित तिथि पर धान विक्रय नहीं कर पाए थे।
किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए  बारदाना एवं हमालों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।
राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी उपज के सुरक्षित एवं सुचारु विक्रय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।








 

सरल व्यवस्था और सुचारु प्रबंधन से किसान को मिला लाभ, सफल धान खरीदी

31-Jan-2026
सक्ती, ( शोर संदेश ) राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लागू की गई सरल, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित धान खरीदी व्यवस्था से किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। प्रशासनिक निगरानी एवं उपार्जन केंद्रों पर की गई बेहतर व्यवस्थाओं के कारण धान विक्रय की प्रक्रिया किसानों के लिए आसान और परेशानी-मुक्त बन गई है।
इसी कड़ी में विकासखण्ड सक्ती के ग्राम रायपुरा निवासी किसान अमृत लाल देवांगन ने रायपुरा धान खरीदी केंद्र में 200 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में गुणवत्ता परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक तौल, पर्याप्त बारदाना एवं त्वरित प्रक्रिया जैसी सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से उपलब्ध थीं, जिससे बिना किसी कठिनाई के धान खरीदी संपन्न हुई। देवांगन ने बताया कि धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे घरेलू आवश्यक कार्यों में करेंगे, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने शासन-प्रशासन द्वारा किसानों के हित में की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पारदर्शी और सुचारु प्रणाली से किसानों का भरोसा बढ़ा है और खेती को एक स्थिर एवं लाभकारी व्यवसाय का आधार मिला है। उन्होंने किसान हितैषी नीति के लिए शासन प्रशासन को आभार व्यक्त किया।


 

सब्जी उत्पादन से 50 हजार मासिक आय, बिहान योजना ने बनाया सशक्त

29-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश )  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया अंतर्गत ग्राम बरछा निवासी द्रौपती बांधे ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना के अंतर्गत जय लक्ष्मी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। समूह के ध्यम से उन्हें ऋण सुविधा प्राप्त हुई। प्राप्त ऋण राशि का सही उपयोग करते हुए द्रौपदी बांधे ने सब्ज़ी उत्पादन और विक्रय का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने न केवल फसल उगाई, बल्कि उसे बाज़ार में बेचकर नियमित आय अर्जित करना भी शुरू किया। 
द्रौपती बांधे ने बताया कि पहले उनकी मासिक आय, जो पहले लगभग 20 हजार रूपए थी, अब बढ़कर 50 हजार रूपए तक पहुँच गई। जिससे वे समय पर ऋण चुकाने में सक्षम हुईं और साहूकारों पर निर्भरता समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले द्रौपदी बांधे की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की आय के साधन सीमित थे और रोज़मर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करना भी कठिन हो जाता था। छोटी-मोटी मजदूरी और अस्थायी कार्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें गाँव के साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे उनकी स्थिति और अधिक दयनीय हो जाती थी। परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं, लेकिन अब वे पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। उन्होंने योजना के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार जताया। 
 

डिजिटल नवाचार का असर: घर बैठे टोकन, बिना कतार के धान विक्रय

29-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धान खरीदी हेतु लागू की गई पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल नवाचार किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत भगवानपुर खुर्द के प्रगतिशील किसान लालबहादुर सिंह के लिए इस वर्ष की धान खरीदी व्यवस्था को सराहा है। 
सिंह ने बताया कि इस साल उन्होंने 73 क्विंटल धान उपजाया। शासन द्वारा शुरू किए गए ‘टोकन तुंहर हाथ’ ऐप के माध्यम से उन्होंने घर बैठे अपने मोबाइल से बिना किसी तकनीकी समस्या के ऑनलाइन टोकन काटा। इससे उन्हें समिति के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिली। उन्होंने नमनाकला उपार्जन केंद्र की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना वितरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध रही। समिति कर्मचारियों के सहयोगात्मक व्यवहार से धान विक्रय बिना किसी बाधा के पूर्ण हुआ।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी के फैसले को किसान हितैषी बताते हुए कहा कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। धान विक्रय से प्राप्त राशि से वे गेहूं, तिलहन एवं सब्जी की उन्नत खेती कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।






 

डिजिटल तकनीक से धान विक्रय हुआ आसान, किसान ज्योति प्रकाश ने घर बैठे काटा टोकन

28-Jan-2026
रायपुर  ( शोर संदेश )। सरगुजा जिले में धान उपार्जन की व्यवस्थित प्रणाली से किसान न केवल सशक्त हो रहे हैं, बल्कि खेती-किसानी के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा है। धान उपार्जन केंद्रों पर की गई पारदर्शी व्यवस्था ने धान विक्रय की प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बना दिया है। इसी कड़ी में ग्राम केराकछार के किसान ज्योति प्रकाश ने शासन की व्यवस्थाओं की सराहना की।
किसान ज्योति प्रकाश ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिता गोसई के नाम पर 32 क्विंटल धान का रकबा दर्ज है। उन्होंने बताया कि पहले समिति जाकर टोकन कटाने में काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन शासन के ‘किसान तुहंर टोकन’ मोबाइल ऐप ने इस समस्या का समाधान कर दिया है। ज्योति प्रकाश ने बताया कि उन्होंने घर बैठे ही मोबाइल के जरिए 32 क्विंटल धान विक्रय के लिए ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर लिया, जिसमें उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
धान विक्रय के लिए मेंड्रा कला उपार्जन केंद्र पहुंचे ज्योति प्रकाश ने बताया कि केंद्र में प्रवेश करते ही गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की गई। उन्होंने समिति के कर्मचारियों के सहयोग और उपार्जन केन्द्रों में किसानों के लिए उपलब्ध पेयजल व अन्य सुविधाओं की भी प्रशंसा की।
किसान बिहारी लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा निर्धारित किए जाने से किसान उत्साहित हैं। ज्योति प्रकाश ने बताया कि धान का सर्वाधिक दाम मिलने से किसानों को आर्थिक लाभ हो रहा है। उन्होंने बताया कि धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे गेहूं, तिलहन और सब्जी की खेती के विस्तार में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।
प्रदेश के किसानों को सशक्त बनाने वाली शासन की नीतियों के लिए ज्योति प्रकाश ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज किसान खुशहाल हैं और अपनी उपज का सही मूल्य पाकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

 



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