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किसान

धान रोपाई के लिए किसान कर रहे पैडी ट्रांसप्लांटर का उपयोग*

24-Jul-2020

 कांकेर (शोर सन्देश) जिले में कृषि अभियांत्रिकी कृषि विज्ञान केन्द्र के मार्गदर्शन में किसानों की ओर से पैडी ट्रांसप्लांटर का उपयोग कर धान की रोपाई की जा रही है। नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मानिकपुर, रिसेवाड़ा और श्रीगुहान के कृषकों के खेत में गत दिवस पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान रोपाई का कार्य किया गया। ग्राम श्रीगुहान के कृषक बालमुकुंद के खेत में लगभग 2 एकड़ खेत में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान रोपाई का कार्य किया गया। मौके पर सहायक कृषि अभियंता एच.एल. देवांगन, यांत्रिक सहायक कल्पना सिंह, यांत्रिक कमल समद्दार, कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के कृषि वैज्ञानिक सुरेश मरकाम, सी.एल. ठाकुर और ग्राम के कृषकगण मौजूद थे।  कृषक बालमुकुंद ने बताया कि धान रोपाई की यह विधि बहुत ही आसान है, मैट टाईप नर्सरी तैयार करने में मात्र 2 मजदूर लगे और 18 दिन में नर्सरी तैयार हो गई जिसे खेत में मशीन से रोपाई किया गया। कृषि अभियांत्रिकी और कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मार्गदर्शन में सर्विस प्रोवाईडर ग्राम-अंजनी निवासी उजियार सिंह वट्टी के द्वारा 5 घंटे में धान रोपाई का कार्य पूर्ण किया गया, जिसमें मात्र 2 मजदूर लगे। इस प्रकार मशीन के उपयोग से समय और धन की बचत हुई। सहायक कृषि अभियंता एच.एल. देवांगन ने बताया कि नवीन फसल प्रदर्शन योजनांतर्गत पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से कांकेर जिले में 25 एकड़ में धान रोपाई प्रदर्शन किया गया है, जिसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 3 हजार रुपए अनुदान की पात्रता है। उन्होंने बताया कि मशीन द्वारा एक एकड़ की धान की रोपाई मात्र 2 से 3 घंटे में पूरा होता है और अपेक्षाकृत लागत भी कम आता है और उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत बढ़ोतरी भी होती है।


आधुनिक तकनीक से बुवाई कर खुलेंगे तरक्की के द्वार*

14-Jul-2020

बिलासपुर (शोर सन्देश) ग्राम मुरकुटा के किसानों के लिए अब तरक्की के द्वार खुल गए हैं। उन्होंने खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक से बुवाई करना शुरू कर दिया है। वहीं आधुनिक तकनीक से केवल परिश्रम की बचत हो रही है, अपितु मुनाफा भी दोगुना हो गया है। ग्राम के किसान अमित गोंड़, धनुष गोंड और शत्रुघन गोंड अपनी 50 डिसमील कृषि भूमि में पैडी सीड ड्रम से धान बुवाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि विभाग ने किसानों की हर संभव मदद की जा रही है। किसानों को नई-नई तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है ताकि खेती-किसानी मुनाफे का व्यवसाय बन जाए, किसानों का चहुमुंखी विकास हो सके।  इस तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पैडी ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है। दो लाईनों के बीच की दूरी 20 से.मी होनी चाहिए। एक बार में 8 लाईनों में धान बीज की बुवाई होगी। 50 डिसमिल के रकबे में बुवाई करने में 40 मिनट का समय लगेेगा। इतने रकबे में 8 किलो बीज लगेगा। अपने अनुभव के आधार पर अमित बताते हैं कि इस तकनीक में कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा जिससे मेरे जैसे ही अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल सके। एक ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है, लेकिन बीज की पूरी भराई नहीं करना है ताकि ड्रम का वजन ज्यादा हो और वह आसानी से खींचा जा सके। साथ ही ड्रम के अंदर घूमने के लिए जगह मिल पाए ताकि बीज छेद से आसानी से गिर सके। धान को अंकुरण के लिए 24 घ्ंाटा ही भीगाना चाहिए ताकि अंकुरण ज्यादा बड़ा हो और बीज छेद से आराम से गिर सके।  उन्होंने बताया कि पडलिंग कार्य एक दिन पहले करना चाहिए। ड्रम चलाने के पहले अतिरिक्त पानी निकाल लेना चाहिए। बहुत डीप पडलिंग करने से ड्रम को खींचने में ज्यादा ताकत लगेगी जिससे कार्यक्षमता घट सकती है। अमित कहते हैं कि इन सावधानियों के साथ बुवाई करने से निश्चित तौर पर बेहतर परिणाम आएंगे।
अन्य किसान भाईयों से भी इस तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देने की अपील अमित ने की। वे सरकार से किसानों के हित में किए जा रहे कार्यो की सराहना करते भी नहीं थकते हैं। वे कहते हैं कि सरकार के लिए गए निर्णयों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में किसानों की स्थिति बेहतर है। आर्थिक मंदी के दौर में भी सरकार किसानों के साथ खड़ी है।


सरगुजा जिले के किसानों ने किया 11 हजार 809 टन रासायनिक खाद का उठाव*

10-Jul-2020

अम्बिकापुर (शोर सन्देश) कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशानुसार खरीफ वर्ष 2020 हेतु किसानों को रासायिक खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का पर्याप्त भण्डारण किया गया है। इस वर्ष खाद भण्डारण का लक्ष्य 18 हजार 825 टन के विरूद्ध 14 हजार 549 टन भण्डारित किया गया है जो कुल भण्डारण का 77 प्रतिशत है। अब तक जिले के 27 समितियों के माध्यम से किसानों द्वारा 11 हजार 809 टन रासायनिक खाद का उठाव किया गया है। जिला सहकारी केन्द्री बैंक के नोडल अधिकारी पीएस परिहार ने बताया है कि खरीफ वर्ष 2020 हेतु सरगुजा जिले के लिए खाद भण्डारण का लक्ष्य 18 हजार 825 टन निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार खरीफ 2020 में बीज भण्डारण का लक्ष्य 14 हजार 300 क्विंटल है जिसके विरूद्ध 5 हजार 590 क्विंटल वितरित किया गया है।


किसान परेशान, ट्रांसफार्मर जलने से रुका सिंचाई का काम, विभाग की अनदेखी बदस्तूर जारी *

09-Jul-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राजधानी रायपुर से लगे भटगांव क्षेत्र के कांदुल गाँव के किसान इन दिनों बिजली विभाग की अनदेखी के चलते खासे परेशान है। कांदुल कसेहतर के एक किसान ने नाम छापने की शर्त पर बताया की हमलोगो ने इस बार केले की फसल उगाई है, पर हमारे खेतो ने बिजली नहीं होने से हम फसलों की सिंचाई नहीं क्र पा रहे है।
बीती पांच दिनों से कांदुल और आसपास के गाओं में ट्रांफॉर्मर जल जाने की वजह से सभी किसान अपनी फसलों की ख़राब हो जाने के दर से आशंकित है। किसानो का कहना है की अगर अभी सिंचाई नहीं हुई तो हमारी फसले ख़राब हो जाएगी और उसके बाद हम सभी लोगो को अगले साल तक इन्तजार करना पद सकता है।
किसानो ने बताया की बिजली विभाग के माना परिक्षेत्र में इस बाबत मौखिक शिकायत भी की उनके द्वारा की गयी थी पर बीते चार-पांच दिनों से सिर्फ ट्रांसफार्मर नहीं होने का हवाला देकर उनकी अनदेखी की जा रही है। वहीँ मन बिजली विभाग के अधिकारी विशाल बाजपाई ने बताया की ट्रांसफार्मर की अनुपलब्धता के चलते किसानो को बिजली मुहैय्या नहीं कराइ जा रही थी। विभाग का पास अभी ट्रांसफार्मर गए जिन्हे जल्द से जल्द से जले हुए ट्रांसफोर्मस को हटवा कर नए ट्रांसफार्मर अगले २४ घंटे में लगवा दिया जाएगा।


कोशिश है शुरुआत तो अच्छी हो*

08-Jul-2020

राज्य के मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के तहत किसानों से हरेली के दिन से गोबर खरीदी करने की घोषणा कर दी है।घोषणा के बाद से अधिकारी युद्धस्तर पर जुटे हैं कि इसकी शुरुआत तो अच्छी हो जाए। कोई भी योजना हो उसके लिए पैसा तो लगता ही है। योजना की शुरुआत करनी है तो इस के लिए फंड जुटाना ही पड़ेगा। यह योजना बजट के बाद बनाई गई है, इसलिए इसके लिए बजट में तो कोई प्रावधान नहीं होगा।कृषि विभाग के अधिकारियों का प्रारंभिक अनुमान है कि गोबर खरीदी के लिए कम से कम दो सौ ज्यादा से ज्यादा पांच सौ करोड़ रुपए की जरूरत होगी।इस योजना में गोबर की खरीदी,गोबर का संग्रहण गोबर से खाद बनाना तीन प्रक्रिया होगी। इसके लिए पूरी व्यवस्था करनी होगी,गोबर की खरीदी,गोबर के संग्रहण गोबर से खाद बनाने के लिए बहुत लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसकी व्यवस्था तत्काल व्यापक तौर पर नहीं की जा सकती। इसलिए शुरुआत में गोबर खरीदी उन गांवों में आसान होगी,जहां गौठान बन गए हैं तथा गोबर खरीदी,संग्रहण खाद का निर्माण हो रहा है यानी पूरी सही कुछ तो व्यवस्था है। सरकारी आंकड़ों के अऩुसार इस योजना के पहले चरण में 2240 गांवों में इस योजना की शुरुआत की जा सकती है। सरकार गोधन योजना को लेकर यह सावधानी बरत रही है कि यह योजना फ्लाप हो।सरकार की हंसी उड़े।विपक्ष तो ताक में रहेगा कि योजना फ्लाप हो तो वह सरकार को निशान पर ले।सरकार योजना को प्लाप होने देने के लिए ही पहले सीमित लोगों से गोबर खरीदी करेगी। बड़े किसानों डेयरी वालों से तो गोबर नहीं खरीदेगी। सरकार गोबर गांव के गरीबों से ही खरीदेगी। ताकि पैसा गरीबों के पास जाए। यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा कि योजना का लाभ सिर्फ गरीबों को ही मिले इसके लिए सरकार क्या व्यवस्था करने वाली है।कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने तो यह स्पष्ट कर दिया है कि यह योजना पूरी तरह गरीबों के लिए हैं।इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग अपने मवेशियों को खुला छोड़े।सरकार की ज्यादातर योजनाएं गरीब, किसान,आदिवासी की बेहतरी के लिए है, गोधन न्याय योजना ऐसी योजना है जिससे गरीबों, किसानों आदिवासियों तीनों को लाभ होगा। गरीब आदिवासी गोबर बेचकर दो पैसा कमाएंगे तो गोबर खाद का उपयोग कर किसान ज्यादा फसल ले सकेंगे। किसान न्याय योजना की तरह गोधन न्याय योजना का सही क्रियान्वयन हो सका तो इसका लाभ छत्तीसगढ की बड़ी आबादी को मिलेगा तो कांग्रेस काे इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री भपेश बघेल की छबि एक कांग्रेस नेता से ज्यादा एक किसान नेता की बनेेगी। इससे वह प्रदेश में अपनी पार्टी की स्थिति को और ज्यादा मजबूत कर सकेंगे।


खरपतवार नियंत्रण से धान की बेहतर पैदावार, निदानाशक का उचित इस्तेमाल जरूरी*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) धान फसल के उत्पादन में वृद्धि के लिए हानिकारक कीट की रोकथाम और खरपतवारों का समय पर नियंत्रण आवश्यक है। सही समय में नियंत्रण नहीं होने से फसल की उत्पादकता प्रभावित तो होती ही है, साथ ही किसानों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के किसानों को धान की खेती में होने वाले अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम के लिए कई उपयोगी सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खरीफ मौसम में धान का थरहा बोने के तीन से चार दिन के भीतर प्रति हेक्टेयर में थायोबेन्कार्प निदानाशक 1.5 किलोग्राम या आक्साडायर्जिल निदानाशक 70 से 80 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए। बोता विधि से धान बोने पर अंकुरण पूर्व खरपतवार प्रबंधन के लिए प्रेटिलाक्लोर 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन से पांच दिन के अंदर डालने पर खरपतवार नियंत्रण में फायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि आक्साडायर्जिल 32 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन दिन के अंदर और पायरोजोसल्युरान 10 ग्राम प्रति एकड़ के दर से बोआई के बाद दस से बारह दिन के अंदर डालना चाहिए। 


किसान मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग करें*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) कृषि विज्ञान केन्द्र ढोलिया बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ राज्य के मैदानी भाग में कृषि जलवायु क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी के संबंध मे सलाह दी है। इसके लिए भूमि की तैयारी खाद और बीजों का प्रबंध आवश्यक करें। मानसून सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में सक्रिय हैं। कीट व्याधियों के प्रतिरोध और सहनशील किस्में छत्तीसगढ़ राज्य और विकास निगम, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में उपलब्ध है। इन पर पौध रोगों और कीटों का असर कम होता है। किसान भाई मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही खाद उर्वरक का उपयोग करें। अनावश्यक रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से मृदा उर्वरक बुरी तरह से प्रभावित होती है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे मेघदूत एप पर रजिस्टर करें। मौसम और खेती संबंधी जानकारी प्राप्त करें। छत्तीसगढ़ के अधिकांश भागों में मानसून वर्षा प्रारंभ हो चुकी हैं। कृषक भाई आवश्यकतानुसार खेतों की जुताई कर खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि) की बोआई करें। बोआई कतारों में करें। बोआई के पूर्व बीजों को उपचारित करें। कतार बोनी में दानेदार उर्वरक सीड ड्रिल के लिए उपयोग में लाये। वर्षा की मात्रा पर्याप्त मात्रा में हो चुकी है, इसलिए किसान भाई कृषि कार्यो को प्राथमिकता दे।  विभिन्न धान पद्धतियों में समन्वित खरपतवार प्रबंधन:- धान की उपज पर खरपतवारों के प्रतिकूल प्रभाव को समाप्त करना और कम से कम करना ही खरपतवार नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य है। खरपतवार विरोधी वातावरण उत्पन्न करने के लिए परिस्थितियों के अनुसार एक से अधिक तरीकों जैसे दृयांत्रिक, सस्य क्रियाओं, जैविक रासायनिक विधियों का उपयोग लाभकारी पाया गया है (दवाओं की मात्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर में दी गई है )  नर्सरी :- यथासंभव नर्सरी की जमीन तैयार कर सिंचाई कर दें और जब खरपतवार उग आयें तो जुताई से नष्ट कर दें। तत्पश्चात भूमि तैयार कर थरहा डालने पर खरपतवारों का प्रकोप कम होता है। बतर स्थिति में थरहा डालने के 3-4 दिन के अंदर थायोबेन्कार्प 1-1.5 कि./हे. या आक्साडायर्जिल 70-80 ग्राम/हे. सक्रिय तत्व का छिडकाव करें। 


खाली जमीन पर आज झूम रहे अमरूद, सीताफल, करौंदा और नीम के पेड़*

05-Jul-2020

    गाँव वालों को पौधरोपण की मजदूरी 4.32 लाख रुपए का हुआ भुगतान                                                                                                      दुर्ग (शोर सन्देश)।युवा चाहे तो पत्थर पिघला दे, युवा चाहे तो नदी की धारा मोड़ दे और अगर युवा चाहे तो बंजर धरती को उपवन में बदल दे। अपने भगीरथ प्रयास से ऐसा ही बड़ा कारनामा कर दिखाया है दुर्ग से 7 किलोमीटर दूर मरमरा गांव के युवाओं ने। पेड़ पौधे लगाओं जीवन बचाओ का नारा लेकर महमरा गांव के युवाओं ने 2017 में जो मुहिम शुरू की थी वो आज आंखों को सुकून देने वाली एक खूबसूरत जगह में तब्दील हो गई है।  युवाओं ने की पहल मिला सरपंच का साथ और रोजगार सहायक का मार्गदर्शन  यहां के युवाओं को एहसास हुआ कि शहरीकरण तथा औद्योगिकरण से विकास तो हुआ मगर पेड़-पौधे कम होने लगे। लहलहाते खेतों की जगह आसमान छूती इमारतें बनने लगीं। पेड़ों को बड़ी निर्दयता से काटा जा रहा था ये चिंता लेकर कर महमरा के युवा श्री गंगा प्रसाद रोजगार सहायक के पास पहुंचे। फिर सरपंच खेमेश्वरी निषाद और अन्य पंचों और ग्रामीणों का भी साथ मिला। अतिक्रमित जमीन को कब्जा मुक्त कर वहाँ पौधरोपण करने के लिए का ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया।  गांव के लोगों ने पेड़ पौधे लगाकर पुण्य भी कमाया और घर चलाने रुपया भी  जब युवाओं ने पौधरोपण की ठानी तो उनके इस प्रयास को शासन-प्रशासन का भी साथ मिला। पौधरोपण कार्य के लिए मनरेगा मद से 4 लाख 32 हजार रुपए मंजूर किए गए। जिससे श्रमिकों को मजदूरी भुगतान किया गया। जुलाई 2017 में काम शुरू हुआ और 0.30 हेक्टेयर में मिश्रित प्रजाति के 300 पौधे रोपे गए। सप्ताह में एक बार कीटनाशक का छिडकाव भी करवाया गया। मनरेगा के माध्यम से फैन्सिग और पंचायत का पम्प मिला पौधों को पानी देने के लिए। गांव के युवाओं को काम भी मिल गया। बीरबल निषाद जो यहां काम करते हैं उन्होंने बताया कि उनको मनरेगा के माध्यम यह काम मिला। पेड़ पौधे लगाकर पुण्य भी कमाया और घर चलाने के लिए रुपए भी कमाए। बीरबल ने इस पूरे दिल से पौधों की देखभाल की काम किया। बीरबल का कहना है काम करते-करते उनको इन पौधों से लगाव सा हो गया है ये अपने लगते हैं। रोजगार सहायक गंगा प्रसाद भी जी जान से लगे हैं इन पेड़ पौधों की रक्षा में। यहाँ पर सीताफल, अमरूद, करौंदा, नीम, गुलमोहर के भी पौधे लगाए गए हैं। आज ये जगह इतनी खूबसूरत हो गई है कि अब पथिक दो क्षण रुककर ये नजारा देखने रुक जाते हैं और अपनी थकान भी मिटा लेते हैं। जल्द ये पेड़ बड़े होंगे और गांव वालों को उनके फलों का स्वाद भी मिलेगा।  गांव के पुनि ठाकुर, कुलेश्वरी निषाद, बिमला ठाकुर, धर्मेंद्र निषाद और नर्मदा निषाद बताते हैं सड़क के पास होने से पहले धूल प्रदूषण था अब वो भी कम होने लगा है।  मरमरा के ग्रामीण भी 6 जुलाई को शामिल होंगे वन होम वन ट्री अभियान में  ग्रामीणों ने अब पेड़ पौधों का महत्व समझ लिया है। इसलिए वो अब नहीं रुकेंगे। वो जानते हैं कि जीवन के लिए वृक्ष कितने जरूरी हैं। इसलिए सबने शपथ ली है कि वे 6 जुलाई को पौधा जरूर लगाएंगे। प्रगति और पर्यावरण का संतुलन जरूरी है।


टमाटर, बैगन, अमरूद, केला, पपीता, मिर्च, अदरक की फसलों का भी होगा बीमा *

30-Jun-2020

 15 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित, पांच प्रतिशत देना होगा प्रीमियम

कोरबा (शोर सन्देश) चालू खरीफ मौसम में जिले के सब्जी और फल उत्पादक किसानों की फसलों का भी बीमा कराया जाएगा। मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई किसानों को हो सकेगी। जिले में चालू खरीफ मौसम में टमाटर, अमरूद, बैगन, केला, पपीता, मिर्च और अदरक की फसलों का बीमा होगा। किसानों को फसलों के बीमा के लिए निर्धारित ऋणमान का पांच प्रतिशत प्रीमियम के रूप में देना होगा। जिले के ऋणी और अऋणी किसान अपनी उद्यानिकी फसलों का बीमा कराने के लिए 15 जुलाई तक उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते है। जिले में पदस्थ उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि सब्जी और फलों की फसल लेने वाले किसान अपने-अपने क्षेत्र में शासकीय नर्सरियों में जाकर फसलों का बीमा कराने के लिए उद्यानिकी विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर सकते है। सहायक संचालक ने बताया कि चालू खरीफ मौसम में बीमित उद्यानिकी फसलों में प्रतिकूल मौसम जैसे अधिक वर्षा, कम वर्षा, बेमौसम वर्षा, ओलावृष्टि, अधिक तापमान, कम तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, तेज हवा, कीट और व्याधि प्रकोप से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति मिलेगी। उन्होंने बताया कि बीमा संबंधी जानकारी के लिए किसान शासकीय नर्सरी पताढ़ी, शासकीय नर्सरी पटियापाली, शासकीय नर्सरी पंडरीपानी, शासकीय नर्सरी नगोई और शासकीय नर्सरी पोंड़ीलाफा में संपर्क कर सकते है।


खरीफ फसल 7.65 लाख किसानों को मिला ब्याज मुक्ति

27-Jun-2020

रायपुर (शोर सन्देश)  राज्य सरकार ने प्रदेश में खेती किसानी को बढ़ावा देने और किसानों को समय पर खाद, बीज सहित अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से ब्याज मुक्त कृषि ऋण मुहैया कराया जा रहा है। खरीफ के लिए राज्य के किसानों को 4 हजार 600 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीफ फसल के लिए अब तक 7.65 लाख किसानों को 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित किया गया है, जबकि गतवर्ष इसी अवधि तक 1 हजार 538 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया गया था। इस प्रकार किसानों को इस खरीफ में अब तक 1183 करोड़ रुपए का अधिक ऋण वितरण हो चुका है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर किसानों को ऋण और खाद-बीज के वितरण के लिए सहकारी समितियों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। खरीफ फसलों के लिए सहकारिता के माध्यम से कुल 6.35 मीट्रिक टन रासायनिक खाद के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। 26 जून तक सहकारी समितियों में 5.77 लाख मी. टन खाद का भंडारण किया जा चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का 90.81 प्रतिशत है। सहकारी समितियों की ओर से 4.53 लाख टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जोकि लक्ष्य का 71 प्रतिशत है। जबकि पिछले साल इसी समय तक सहकारी समितियों ने 2.43 लाख मी.टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया था। गत वर्ष की तुलना में इस साल 2.10 लाख टन अधिक खाद का वितरण सहकारी समितियों ने किया। खरीफ फसल के लिए बीज निगम ने सहकारी समितियों के माध्यम से 5.88 लाख क्ंिवटल उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज का भंडारण कराया गया है। 26 जून की स्थिति में कुल 4.52 लाख क्ंिवटल का उठाव किसानों ने कर लिया है। गत वर्ष इसी अवधि में सहकारी समितियों में 4.98 लाख क्ंिवटल प्रमाणित बीज का भंडारण और 2.88 लाख क्ंिवटल का वितरण किसानों को किया गया था। इसी अवधि की तुलना में गत वर्ष से 1.64 लाख क्ंिवटल का प्रमाणित बीज अधिक वितरित किया गया है। इस वर्ष राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भी छत्तीसगढ़ राज्य को अब तक 1150 करोड़ रुपए की विशेष और अतिरिक्त साख सीमा स्वीकृत कंी गई है। जिसके विरूद्ध अब तक 740 करोड़ रुपए का आहरण राज्य सहकारी बैंकों से कर लिया गया है। राज्य सरकार की किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 18.35 लाख किसानों के खाते में 1492 करोड़ रुपए जमा किए जाने से खेती के प्रति किसानों में रूझान और भी बढ़ा है।




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