
00 किसान ने लाॅकडाउन विपदा के समय मदद मिलने पर मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद
00 किसान ने की ,अंतरित राशि से प्रति क्विंटल 50 रुपए का सहयोग राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में देने की घोषणा
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ शासन की राजीव गांधी किसान न्याय योजना लाॅकडाउन के विपदा के समय किसानों को आर्थिक संबल दे रही है। धरसींवा विकासखंड के ग्राम मंगसा के किसान अजय वर्मा को इस योजना के तहत 21 मई को उनके बैंक खाते में 48 हजार 909 रुपए की राशि सीधे प्राप्त हुई
है। वर्ष 2019-20 में सिलयारी धान खरीदी केन्द्र में उन्होंने अपना धान सहकारी समिति के माध्यम से बेचा था। न्यूनतम समर्थन मूल्य की यह अंतरण राशि प्राप्त हुई है।
किसान अजय वर्मा ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि लाॅकडाउन के इस विपदा वाले घड़ी में राज्य शासन ने कठिन समय पर किसानों को पैसे दिए हैं। उन्होंने बताया कि 272 क्विंटल धान बेचा है। उन्होंने कहा कि इस बेचे गए धान की अंतरित राशि का 50 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से वे मुख्यमंत्री सहायता कोष में दान करेंगे । उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक वे इस कोष में 16 हज़ार रुपए से अधिक की राशि दान कर चुके है। उनका मानना है कि सरकार द्वारा अभी दी जा रही इस अंतरित राशि से किसानों को खेती - बाड़ी का काम शुरू करने में आसानी होगी। किसानों को खेती बाड़ी के लिए खाद-बीज की आवश्यकता होती है ऐसे समय में पैसे आने से अपने खेतों के लिए हाईब्रीड बीज एवं खाद खरीद सकेंग। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को समझा और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् लाॅकडाउन के कठिन दौर से में उनको आर्थिक मदद दी।

रायपुर (छत्तीसगढ़)। खेती-किसानी को बढ़ावा देने एवं किसानों में उत्साह वर्धन के लिए शुरू किए राजीव गांधी किसान न्याय योजना का असर अब दिखने लगा है। किसानों से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार यह राशि न केवल उनका मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि आगामी खरीफ फसल में भी यह मददगार साबित होगी।
जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा के प्रतिष्ठित किसान राणा दिनेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण छोटे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में राजीव गांधी किसान योजना किसानों के लिए मददगार साबित होगी। आगामी खरीफ फसल के लिए किसान खाद, बीज और खेती से सबंधित अन्य जरूरत का समान खरीद सकेंगे। इससे किसानों का उत्साह बढ़ा है।
दिनेश सिंह ने बताया कि उन्हें राजीव गांधी किसान योजना के तहत कुल एक लाख 76 हजार 456 राशि मिलनी है। प्रथम किश्त के रूप में 64 हजार 300 रूपए उनके खाते में जमा हो गए हैं। उन्होंने समर्थन मूल्य पर 257 क्विंटल धान बेचा था।
दिनेश सिंह ने कोरोना पीड़ित परिवारों की मदद के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्राप्त हुई प्रथम किश्त की राशि में से मुख्यमंत्री राहत कोष में 5100 रुपए जमा करवाए हैं। इसी प्रकार जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड अकलतरा के ग्राम कोटगढ़ के किसान परदेशी साहू ने बताया कि योजना के तहत प्रथम किश्त के रूप में मिली राशि का उपयोग खरीफ फसल की तैयारी करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार के इस निर्णय को किसान हितैषी बताते हुए आभार व्यक्त किया है।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना से लाभान्वित इसी विकासखण्ड के ग्राम कोटगढ़ निवासी अलखराम ने बताया कि उनके शामिलात खाते में साढ़े चार एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने करीब 70 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था। राज्य सरकार ने वादे के अनुसार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत अंतर की राशि का भुगतान किया है। पहली किस्त मिल जाने से आगे खरीफ फसल की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने कोरोना संक्रमण के कारण उत्पन्न विपरित आर्थिक स्थिति में किसानों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण भयावह बेरोजगारी की स्थिति निर्मित हो गई है। न्याय योजना से युवा वर्ग भी खेती किसानी के लिए रुचि लेने प्रेरित हो रहे हैं। किसानों के हित में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के क्रियान्वयन और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने के लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार माना।

00 लॉकडाउन में मदद करने के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार को दिया धन्यवाद
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ शासन की राजीव गांधी किसान न्याय योजना लॉकडाउन के समय में जशपुर जिले के आदिवासी किसानों को आर्थिक संबल दे रही है। जशपुरनगर के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम खुटसेरा के किसान अनूप कुमार पैकरा के बैंक खाते में इस योजना के तहत् 21 मई को प्रथम किश्त के रूप में 17 हजार रुपए की राशि जमा हुई है। वर्ष 2019-20 में कोनपारा धान खरीदी केन्द्र में उन्होंने अपना धान बेचा था। जिसके तहत् उन्हें अंतरण राशि प्राप्त हुई है। इससे श्री पैकरा को बीज और धान खरीदकर उन्नत खेती करने में मदद हो सकेगी।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि लॉकडाउन के इस विपदा की घड़ी में शासन ने सही समय पर खाते में पैसे दिए हैं। जून-जुलाई में खेती बाड़ी का काम शुरू हो जाता है और किसानों को खेती बाड़ी के लिए खाद-बीज की आवश्यकता होती है ऐसे समय में पैसे आने से उनकों अपने खेतों के लिए हाईब्रीड बीज एवं खाद खरीदने में आसानी होगी ताकि वे उन्नत खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को समझा और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् लॉकडाउन के कठिन दौर से गुजर रहे किसानों के खातों में बोनस राशि अंतरित की गई । इससे उनकों आर्थिक रूप से मदद मिली है।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए खरीफ की तैयारियों की समीक्षा की
रायपुर (छत्तीसगढ़)। कृषि उत्पादन आयुक्त ने खरीफ सीजन के मद्देनजर राज्य के सभी सहकारी समितियों ने अनिवार्य रूप से 30 मई तक खाद एवं बीज का भण्डारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आज यहां वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि, सहकारिता, बीज विकास निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा की। कृषि उत्पादन आयुक्त ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे के निर्देश का पालन सुनिश्चित करने हेतु राज्य में बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ के किसान स्वावलंबी बने इसके लिए खरीफ सीजन में विशेष अभियान संचालित किया जाना है। उन्होंने सुराजी गांव योजना के गांवों एवं शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में भी बीज उत्पादन का कार्यक्रम प्राथमिकता से लिए जाने के निर्देश दिए।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों को राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती के लिए किसानों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अरहर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 10 जिलों का विशेष रूप से चिंहाकन किया गया है, जिसमें बालोद, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, धमतरी, बलौदाबाजार, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ शामिल हैं। इन जिलों के सभी गांवों में अरहर की खेती के लिए किसानों को हर संभव मार्गदर्शन एवं मदद दी जानी चाहिए। अधिकारियों को खाद-बीज की गुणवत्ता एवं वितरण कार्य पर सतत् निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि राज्य में इस साल खरीफ की विभिन्न फसलों के लिए 9 लाख 7 हजार 800 क्विंटल बीज की आवश्यकता है। सहकारी समितियों में अब तक 4 लाख 58 हजार 131 क्विंटल बीज का भण्डारण कराया गया है, जो मांग का 50 फीसद है। इसी तरह समितियों में 11 लाख 30 हजार मैट्रिक टन खाद भण्डारण के लक्ष्य के लिए अब तक 5 लाख 26 हजार 359 मैट्रिक टन खाद का भण्डारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि किसानों द्वारा खरीफ के लिए खाद-बीज का निरंतर उठाव किया जा रहा है। अब तक एक लाख 96 हजार 912 क्विंटल प्रमाणित बीज तथा 2 लाख 15 हजार 675 मैट्रिक टन खाद का उठाव हो चुका है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन के लिए ग्रामवार किसानों का चयन कर उन्हें इसके लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत हाईब्रिड धान बीज को बढ़ावा देने के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम अधिकतम या 50 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। जिले में 100 क्विंटल हायब्रिड धान बीज का वितरण का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 630 हेक्टर क्षेत्र में धान फसल के प्रदर्शन का लक्ष्य है। हाईब्रिड धान बीज के अलावा सूक्ष्म पोषक तत्व पर 500 रुपये, पौध संरक्षण औषधि पर 500 और नींदानाशक औषधि पर 500 रुपये का अनुदान जिले में उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार कृषकों को प्रदान किया जायेगा। एक कृषक को अधिकतम 2 हेक्टर के लिये एक हजार रुपये अनुदान दिया जायेगा। पंजीयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा और कृषकों ने देयक प्रस्तुत के पश्चात् उनके खाते में राशि सीधे हस्तांतरित की जायेगी। जिससे कृषकों को कृषि कार्य के लिये आर्थिक मदद मिलेगी। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिये 07752-426644 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति सहयोग एवं समर्थन का संकल्प दोहराया
आंचलिक किसानों ने `किसान न्याय योजना` के लिए मुख्यमंत्री से मिलकर जताया आभार
कोरोना संकट में मानवता की सेवा के लिए किसानों ने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री सहायता कोष में दी राशि
रायपुर (शोर सन्देश)। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए राज्य के विभिन्न अंचलों के किसान प्रतिनिधि एवं कृषणगण आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों ने इस मौके पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना की सराहना की और कहा कि इस योजना को शुरू कर प्रदेश सरकार ने न सिर्फ किसानों के हितों की रक्षा की है, बल्कि प्रदेश सरकार ने किसानों से किए अपने वायदे को निभाया है।
किसानों ने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की बेहतरी हेतु लिए गए फैसले और राज्य में खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। किसानों ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार को सदैव सहयोग एवं अपना समर्थन का संकल्प दोहराया। इस मौके पर किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों ने कोरोना संकट के काल में छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा में जुटे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का साथ देने के लिए अपनी ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए दान राशि का चेक भेंट किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न अचंलों से आए किसान प्रतिनिधियों एवं किसानों का आभार जताते हुए कहा कि राज्य के किसानों, गरीबों एवं मजदूरों की बेहतरी के काम में किसी भी तरह की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट का मामला हो या किसानों और गरीबों की मदद का सरकार पूरी तत्परता एवं पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के शुरूआती चरण में राज्य में धान, मक्का और गन्ना उत्पादक कृषकों को 5750 करोड़ रूपए की राशि मिलेगी। इसमें अगले चरण में भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा। आगामी वर्ष से इस योजना में दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसानों को भी लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना के कारण आर्थिक संकट के बावजूद भी इस योजना के प्रथम किस्त की राशि किसानों को इसलिए दी गई ताकि किसान भाईयों को खरीफ की खेती के लिए मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने गरीबों और किसानों की बेहतरी के लिए न्याय योजना की अवधारणा को अमल में लाने की बात कही थी। छत्तीसगढ़ राज्य देश का पहला राज्य है, जिसने न्याय योजना को मूर्त रूप दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार और देश की अन्य राज्य सरकारें कोरोना संकट के चलते कई कामों एवं वेतन में कटौती कर रहीं हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के हितों पर आंच नहीं आने दी है, हमने अपने कर्मचारियों के वेतन में किसी भी तरह की कटौती नहीं की है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में छत्तीसगढ़ राज्य में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए हर गांव में बड़े पैमाने पर रोजगारमूलक कार्य संचालित किए जा रहे है, जिसके जरिए गांवों में 23 लाख लोगों को रोजाना काम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में 90 प्रतिशत लघु वनोपज की वाजिब मूल्य पर खरीदी कर संग्राहकों के हितों का संरक्षण किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के 13 लाख संग्राहक परिवारों को तेंदूपत्ता एवं लघु वनोपज संग्रहण के जरिए 2500 करोड़ रूपए मिलेगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय में सरकार समाज के सभी वर्ग के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर कोरोना संक्रमण और उसके चलते लॉकडाउन तथा प्रवासी मजदूरों की स्थिति का भी विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग सवा लाख श्रमिकों की वापसी हुई है। उन्होंने इस मौके पर गांवों में कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए की गई व्यवस्था को बनाए रखने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी से हमें गांव और शहर को बचाना है। सर्तकता और सुरक्षा से ही इसका बचाव संभव है।
इस अवसर पर उपस्थित विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों की हितैषी सरकार है। उन्होंने कहा कि किसानों और गरीबों की मदद और उनकी बेहतरी के कामों को लेकर प्रदेश सरकार देश में रोल मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने वायदे को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था किसानों पर आधारित है। प्रदेश सरकार किसानों और गरीबों को मदद पहुंचाकर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी नीतियों के चलते ही आज प्रदेश में खेती-किसानी की ओर लोगों का रूझान बढ़ा है। किसानों की पंजीयन संख्या में 2 लाख की बढ़ोत्तरी इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण जहां अन्य सरकारें कटौती कर रही हैं वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार किसानों की मदद कर रहे हैं। पूर्व विधायक बैजनाथ चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. खूबचंद बघेल और स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर की परिकल्पना को साकार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते आज लोग खेती-किसानी में रूचि लेने लगे हैं। उन्होंने न्याय योजना के लिए बिलासपुर के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री का आभार जताया।
बलौदाबाजार के कृषक रामविलास साहू, राजनांदगांव के मुरली वर्मा, रायपुर के प्रमोद अग्रवाल, राजनांदगांव के कृषक कमलू निषाद, कवर्धा के महेश चंद्रवंशी, खरोरा के कृषक डॉ. महेन्द्र देवांगन, कुरूद के कृषक शिरीष साहू, महासमुंद के महेन्द्र चन्द्राकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के दुख दर्द को समझती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट की कठिन परिस्थिति में किसानों की मदद की है। उन्होंने अपनी ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष में सहायता राशि का चेक भी मुख्यमंत्री को भेंट किया। इस मौके पर तुलसी साहू ने विभिन्न संगठनों एवं दानदाताओं की ओर से संकलित 5 लाख 56 हजार 400 रूपए, खरोरा के कृषक महेन्द्र देवांगन ने 25 हजार रूपए, प्रमोद अग्रवाल ने 21 हजार रूपए, बलराम नशीने ने 3100 रूपए, हरीश चंद वर्मा, अजय वर्मा, इसराइल खान, शेषनारायण बघेल ने 5100-5100 रूपए, वीरनारायण देवांगन ने एक हजार रूपए, होमदत्त वर्मा, मुरलीराम वर्मा एवं कृषक बाबूलाल वर्मा ने 11-11 हजार रूपए का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए प्रदान किया। कबीरधाम जिले के सहकारी समिति सांरगपुरकला एवं मड़मड़ा के किसानों ने प्रति क्विंटल धान के मान से 50 रूपए की सहायता राशि का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए प्रदान किया।

कांकेर(शोर सन्देश)। जिले के कृषकों से अपील करते हुए बीज प्रक्रिया केन्द्र कांकेर के प्रभारी माधुरी बाला ने बताया है कि बीज निगम कांकेर में खरीफ 2020 एवं आगामी रबी फसल 2020-21 के लिए प्रमाणित बीज एवं प्रचलित किस्मों का बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत किसान सीधे लाभ ले सकते हैं। कृषकों द्वारा उत्पादित बीजों को कृषि विभाग के मांग अनुसार सहकारी समितियों एवं योजनाओं के माध्यम से वितरण किया जाएगा।
पंजीकृत इच्छुक कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर निःशुल्क प्रशिक्षण देकर बीज उत्पादन कार्यक्रम में बरती जाने वाली सावधानियां एवं अधिक उपज से लाभ की जानकारी देगा। पंजीयन के लिए खरीफ फसल के लिए बोनी के 20 दिनों के अन्दर या 31 अगस्त तक और रबी फसल के लिए बोनी के 20 दिनों के अन्दर या 21 दिसम्बर तक करा सकते हैं। पंजीयन किये जाने वाली खरीफ फसलें-धान के किस्में इस प्रकार हैः-एमटीयू-1010, एमटीयू-1001, आईआर-64, पीकेव्ही (एचएमटी) इत्यादि धान की किस्में हैं। इसी प्रकार दलहन तिलहन की फसलों में कोदो, रागी, उड़द, मूंग, अरहर, कुल्थी, तिल और रामतिल का पंजीयन करा सकते हैं। रबी फसल में गेहॅू, चना, मटर, मसूर, तिवड़ा, कुसुम, सरसों, तोरिया और अलसी और ग्रीष्म में बोये जाने वाले दलहन-तिलहन के लिए पंजीयन शुल्क एवं दस्तावेज बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने वाले कृषकों को छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम, कृषि महाविद्यालय एवं मान्यता प्राप्त संस्थान के वितरण केन्द्र से बीज उत्पादन हेतु आधार एवं प्रमाणित श्रेणी 01 का बीज क्रय किया जा सकता है एवं प्रमाणीकरण संस्था से निर्धारित शुल्क पर प्राप्त कर सकते हैं।
कृषकों को सामान्य फसल उत्पादन की अपेक्षा बीज उत्पादन के लिए राज्य शासन द्वारा धान के समर्थन मूल्य पर मोटा धान सहकारी समिति में प्रति क्विंटल 1815 रूपये और बीज निगम के मानक बीजों पर प्रति क्विंटल 2390 रूपये एवं पतला धान सहकारी समिति में प्रति क्विंटल 1835 रूपये और बीज निगम के मानक बीजों पर प्रति क्विंटल 2410 रूपये लाभ ले सकते हैं।

जशपुरनगर(छत्तीसगढ़ )।छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजनांतर्गत जिले के किसान लाॅकडाउन के दौरान अपने खेत में साग-सब्जी उगाकर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे है। उद्यान विभाग के सहायक संचालक श्री रामअवध सिंह भदौरिया के सहयोग से उन्हें उन्नत तकनीकी के माध्मय से खेती बाड़ी करने की विधि बताई जा रही है। जशपुर विकासखंड के ग्राम पोरतेंगा के किसान श्री खुनाईर ने बाड़ी विकास से जुड़कर अपने निजी भूमि पर आलू की खेती की अच्छी पैदावार होने से लाॅकडाउन के दौरार घर चलाने में आर्थिक मदद मिल गई। आस-पास के गांव और साप्ताहिक बाजार में आलू बेचकर किसान खुनाईर ने माह में लगभग 18000 रुपए का आर्थिक आमदनी प्राप्त हुई। उन्होंने शासन की योजना की सराहना करते हुए कहा है कि बाड़ी विकास योजना किसानों के लिए अंत्यंत लाभकारी है। इससे जुड़कर किसान अपने खेतों में उन्नत तकनीकी से खेती करके आमदनी में बढोतरी कर रहे हैं।

कांकेर(छत्तीसगढ़ )। कलेक्टर के.एल. चौहान ने आज कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ सीजन के लिए खाद एवं बीज के भण्डारण की समीक्षा किया। कृषि विभाग के उप संचालक एन. के. नागेश ने बताया कि जिले के सहकारी समितियों में अब तक 18 हजार 115 किलोमीटर धान बीज का भण्डारण किया गया है, जिसमें से 797 क्विंटल धान बीज का वितरण भी किया जा चुका है। जिले के सहकारी समितियों में 10 हजार 518 मेट्रिक टन उर्वरक का भण्डारण किया गया है, जिसमें से किसानों को 2448 मेट्रिक टन उर्वरक का वितरण भी किया जा चुका है। समितियों में 4186 मेट्रिक टन यूरिया का भण्डारण एवं 853 मेट्रिक टन यूरिया का वितरण, डी.ए.पी 3097 मेट्रिक टन भण्डारण एवं 913 मेट्रिक टन का वितरण, एस.एस.पी. 1541 मेट्रिक टन का भण्डारण तथा 364 मेट्रिक टन का वितरण, एम.ओपी. 1499 मेट्रिक टन का भरण्डारण और 299 मेट्रिक टन का वितरण, एन.पी.के. 195 मेट्रिक टन का भण्डारण एवं 19 मेट्रिक टन का वितरण जिले के किसानों को किया गया है। कलेक्टर श्री चौहान ने जिले के किसानों से अपील किया है कि खरीफ सीजन के लिए खाद एवं बीज का अग्रिम उठाव कर लेवे, अभी खाद, बीज का उठाव करने से ब्याज की राशि से बचा जा सकता है। उन्होंने कृषि विभाग के उप संचालक को भी निर्देशित किया है कि खाद, बीज का अग्रीम उठाव करने से होने वाले फायदों की जानकारी किसानों को दिया जाय एवं गांवों में मुनादी कराई जाए।

धमतरी (छत्तीसगढ़) । छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के अध्यक्ष आरएन ध्रुव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर किसानों की तैयार फसल की बिक्री के लिए व्यवस्था करने बाबत निवेदन किया है।
ज्ञात हो सन्ना क्षेत्र बगीचा ब्लॉक छत्तीसगढ़ में किसानों की कुल आबादी दो से तीन लाख है। इसी क्षेत्र से पूरे भारत में सब्जी, टमाटर और हरी मिर्ची की वृहद सप्लाई होती है। इन दिनों किसानों के पास खेत में पूरी फसल पककर तैयार है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्ट पूर्णत: बंद है। चूंकि बड़े-बड़े शहरों में रेलवे लाइन होने की वजह से आवश्यक सामग्री जैसे दूध, सब्जी और दैनिक जीवन का उपयोग हेतु सामग्री रेलवे द्वारा सप्लाई हो रही है। लेकिन इस क्षेत्र में ट्रेन रूट नहीं होने की वजह से एक मात्र साधन छोटे ट्रक या छोटे-छोटे मालवाहक चारपहिया वाहन है। जिसके माध्यम से सड़क मार्ग द्वारा सप्लाई करना होता है। वह भी पूर्णता बंद हो जाने से किसानों का पका पकाया कच्चा माल पूरा बर्बाद हो रहा है। किसानों के साल भर की मेहनत बर्बाद हो रही है। छोटे-छोटे किसानों की एक से दो लाख की पूंजी डूब रही है। किसान मरने के कगार पर आ गए हैं। आरएन ध्रुव ने अनुरोध किया कि आप हमारे प्रदेश के मुखिया के अलावा जमीन से जुड़े हुए एवं गांव के किसान भी हैं। इसलिए आप इन किसानों की पीड़ा को भलीभांति समझ सकते हैं। इसलिए किसानों की तैयार फसल की सप्लाई बड़े शहरों में करने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था अतिशीघ्र जारी करें। जिससे सन्ना-बगीचा ब्लॉक के सब्जी, टमाटर और हरी मिर्च देश के सभी बड़े शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायपुर, ओडिशा, नागपुर, मुंबई और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में सप्लाई हो सके।