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किसान

पांच आदिवासी किसानों ने बदली बंजर जमीन और खुद की किस्मत*

28-Oct-2020

0आम का ऐसा उत्पादन कि थोक व्यापारी खेत से ही खरीद लेते हैं फल
रायपुर (शोर सन्देश). सहकारिता की भावना के साथ एक सूत्र में बंधकर आगे बढ़ने की मिसाल है जशपुर जिले का सुरेशपुर गांव। वहां के पांच आदिवासी किसानों ने अपनी एक-दूसरे से लगती जमीन को मिलाकर करीब पांच हेक्टेयर के चक में कुछ साल पहले मनरेगा से आम का बगीचा तैयार किया था। इस बगीचे से पिछले तीन सालों में आठ लाख 70 हजार रूपए की आमदनी इन किसानों को हो चुकी है। आम बेचने के साथ सब्जियों की अंतरवर्ती खेती कर वे दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं। ये किसान अब गांव में फल उत्पादक किसान के रुप में भी पहचाने जाने लगे हैं। जशपुर जिला मुख्यालय से 96 किलोमीटर दूर सुरेशपुर एक आदिवासी बाहुल्य गांव है। पत्थलगांव विकासखण्ड के इस गांव के 45 वर्ष के आदिवासी किसान श्री मदनलाल को अपनी लगभग ढाई हेक्टेयर की पड़ती (बंजर) जमीन पर कुछ भी नहीं उगा पाने का काफी दुख था। रोजगार सहायक और ग्राम पंचायत की सलाह पर उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सहायता से सामुदायिक फलोद्यान लगाने एवं उनके बीच अंतरवर्ती खेती के रुप में सब्जियों के उत्पादन का निश्चय किया। मदनलाल ने पंचायत की सलाह पर तुरंत अपनी कृषि भूमि से लगते अन्य किसानों श्री बुधकुंवर, मोहन, मनबहाल और हेमलता से चर्चा कर सामुदायिक फलोद्यान से होने वाले फायदों के बारे में बताया।
चूंकि इन सभी किसानों की आधे से लेकर एक हेक्टेयर तक की कृषि भूमि मदनलाल की कृषि भूमि से लगती थी और भूमि पड़ती होने के कारण सभी के लिए लगभर अनुपयोगी थी। इसलिए सभी ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। आखिरकार मदनलाल की मेहनत रंग लाई और ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर नौ लाख 48 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ सामुदायिक फलोद्यान रोपण का मार्ग प्रशस्त हो गया। मनरेगा के अभिसरण से उद्यानिकी विभाग ने वर्ष 2013-14 में मदनलाल सहित पांचों किसानों की जमीन को मिलाकर 4.6 हेक्टेयर के एक चक पर आम के सामुदायिक फलोद्यान का रोपण कराया। करीब आठ लाख रूपए की लागत से आम की दशहरी प्रजाति के 1300 पौधे रोपे गए। इस काम को पांचों हितग्राही परिवारों के साथ गांव के 67 श्रमिकों ने मिलकर पूरा किया। मनरेगा के अंतर्गत सभी मजदूरों को कुल 3617 मानव दिवस रोजगार के एवज में पौने छह लाख रूपए से अधिक का मजदूरी भुगतान किया गया।  किसानों ने आम बेचकर कमाए 5.70 लाख, सब्जियों से 3 लाख की कमाई  उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आम के इस फलोद्यान से पांचों किसानों ने पिछले तीन सालों में आठ लाख 70 हजार रूपए कमाए हैं। आम की बिक्री से पांच लाख 70 हजार रूपए की आमदनी हुई है। वहीं अंतरवर्ती फसल के रूप में बरबट्टी, भिण्डी, करेला, मिर्च, टमाटर, प्याज और आलू की खेती से तीन लाख रूपए की अतिरिक्त कमाई हुई है। सामुदायिक फलोद्यान के फायदे साझा करते हुए इसे लगाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मदनलाल बताते हैं कि आम के इस बगीचे में उद्यानिकी विभाग ने हमारी बहुत मदद की है। विभाग ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, सब्जी क्षेत्र विस्तार, पैक हाउस, मल्चिंग शीट और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के रूप में विभागीय अनुदान सहायता उपलब्ध कराई है। हम पांचों किसानों की एकजुटता तथा मनरेगा और उद्यानिकी विभाग के तालमेल से विकसित इस फलोद्यान से तीन वर्षों में ही हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है। आमों की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण पत्थलगांव के फल व्यापारी सीधे खेतों में पहुंचकर हमसे थोक में खरीदी कर रहे हैं। 


बड़ी खबर : खरीफ सत्र में धान की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने तीन राज्यों के लिए जारी की राशि, जाने छत्तीसगढ़ को कितना मिला*

28-Sep-2020

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश) केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सर्वोच्च वित्तीय संगठन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने छत्तीसगढ़,हरियाणा और तेलंगाना राज्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रक्रिया के अंतर्गत खरीफ सत्र में धान की खरीद के लिए 19 हजार 444 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी दी। यह राशि इसलिए मंजूर की गई है ताकि राज्यों और राज्यों के मार्केटिंग महासंघों (फेडरेशनों) को अपने सहकारी संगठनों के जरिए समयबद्ध ढंग से धान की खरीद करने की प्रक्रिया में सहायता मिले। छत्तीसगढ़ के लिए सबसे अधिक यानी 9000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। हरियाणा के लिए 5444 करोड़ रुपये और तेलंगाना के लिए 5500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।  कोविड की महामारी के दौरान एनसीडीसी की ओर से पहले से उठा लिए गए इस कदम से इन तीनों रकज्यों के किसानों को बेहद जरूरी वित्तीय सहायता प्राप्त होगी देश में धान के कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत उपजाते हैं उचित समय पर उठाए गए इस कदम से राज्यों की एजेंसियां तत्काल खरीद प्रक्रिया को शुरू कर सकेंगी। इससे किसानों को सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना उत्पाद बेचने में जरूरी सहायता मिलेगी।  एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक, संदीप नाइक ने कहा कि एनसीडीसी माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुपालन में और ऐतिहासिक कृषि विधेयकों के प्रकाश में किसानों को उनके उत्पाद का अच्छे से अच्छा मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी प्रक्रिया को पूरा करने के वास्ते अन्य राज्यों को भी सहायता देने के लिए तैयार है। 


किसानों को सहज तरीके से दें नए सुधारों की जानकारी : मोदी*

25-Sep-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर के भाजपा कार्यकर्ताओं के संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के किसानों के लिए लाए गए विधेयक के तहत होने वाले सुधारों के बारे में विस्तार से बताया और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसानों के पास जाकर सहज तरीके से इस बारे में उन्हें समझाएं। प्रधानमंत्री को संबोधन के लिए स्वागत करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है और गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में एकात्म मानववाद और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास के विचार को जमीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन किया, रूप दिया। 


राज्य में यूरिया, खाद की कोई कमी नही : कांग्रेस

24-Aug-2020

00 पन्द्रह सालो से जड़ जमाये उर्वरक माफिया को फायदा पहुचाने भाजपाई कर रहे बयान बाजी
रायपुर (शोर सन्देश) प्रदेश में यूरिया की कमी की खबरों को कांग्रेस ने बेबुनियाद बताया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यूरिया की कमी की बाते एक भी किसान संगठन या किसान संघो ने नही कहा सिर्फ भाजपा नेता बयान दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रदेश में यूरिया और खाद की कमी का झूठा वातावरण तैयार करने बयान बाजी कर रहे पिछले पंद्रह सालो से राज्य में पनप चुके उर्वरक माफिया को फायदा पहुचाया जा सके ।भाजपा के पन्द्रह साल के राज में छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग खाद बीज उर्वरको की अफरातफरी में लगा हुआ था राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस उर्वरक माफिया की दुकानदारी बन्द हो गयी है इसी लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता यूरिया की कमी का बयान दे कर बनावटी संकट का माहौल बना रहे ताकि किसान हड़बड़ी में सोसायटियो से यूरिया ले कर भाजपाई माफिया से महंगे दाम में यूरिया खरीद लें। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार किसानों की हितैषी है इसलिये मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समय रहते प्रदेश की सभी जिलों की सोसायटियों में मांग के अनुरूप यूरिया और खाद की उपलब्धता करवा दी है ।देश के अनेक राज्यों में किसान यूरिया की कमी से जूझ रहे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र ,उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश हरियाणा में यूरिया की कमी को ले कर रोज बवाल हो रहा है । कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्यो को यूरिया देना केंद्र का काम है पूरे देश मे यूरिया की सप्लाई सही नही हो रही तो उसके पीछे मोदी सरकार जबाबदेह है। प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि उनकी सरकार आजादी की 75 वी वर्षगांठ 2022 तक देश मे यूरिया की कमी आधा करने की दिशा में काम कर रही है ।बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के केंद्र सरकार राज्यो में किसानी तक यूरिया की सप्लाई का कोटा अघोषित रूप से कम करना शुरू कर दिया है ताकि मोदी द्वारा घोषित यूरिया की खपत कम करने का लक्ष्य 2022 तक पूरा हो सके ।कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के किसानों से कहा कि वे फिक्र मत करे राज्य में किसान पुत्र भूपेश बघेल सत्ता में है उनके रहते छत्तीसगढ़ के किसानों का अहित नही हो सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य के सरगुजा सम्भाग में जहाँ पर यूरिया संकट का जादा झूठा हल्ला मचाया गया था वहाँ की सोसायटियो में मांग के अनुरूप 18825 एमटी यूरिया और 18204 एमटी खाद का स्टॉक एक महीने पहले से पहुच गया है कोविड के कारण सोशल डिस्टेंसिग का पालन होने सुनिश्चित करने लगवाई गयी कुछ दुकानों की कतारों को संकट बता कर भाजपाइयों ने भ्रम फैलाने की कुचेस्टा किया है। 


किसानों की उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता : नायडू*

19-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अभिनव उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआईआईए) 2020 की वर्चुअल घोषणा की। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, शिक्षा राज्य मंत्री संजय शामराव धोत्रे ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई। उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने अनुसंधानकर्ताओं और वैज्ञानिकों से कृषि पर अधिक ध्यान देने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए नवाचारों के साथ आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर श्री नायडू ने कहा कि नवप्रवर्तकों और अनुसंधानकर्ताओं का मुख्य ध्यान किसानों को विभिन्न मुद्दों के बारे में समय पर जानकारी प्रदान करने से लेकर कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं बनाने और नई प्रोद्योगिकी की आपूर्ति होना चाहिए। उन्होंने बिचौलियों द्वारा किसानों का शोषण रोकने और उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआईसीटीई, आईसीएआर, एनआईआरडी और कृषि विश्वविद्यालयों को किसानों के लिए नई नवाचार और प्रौद्योगिकी लाने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। इस अवसर पर, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, श्री पोखरियाल ने उल्लेख किया कि रैंकिंग हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर है। उनके नेतृत्व में, भारत ने नवाचार के क्षेत्र में अनेक छलांगें लगाईं। इसके अलावा, भारत को आत्?मनिर्भर बनाने के लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करते हुए, यह रैंकिंग उनकी आकांक्षाओं का एक सच्चा प्रतिबिंब है और राष्ट्र के लिए उनकी संकल्पना और सपनों को एक श्रद्धांजलि है। 


सफलता की कहानीःसामूहिक हल्दी की खेती से किसान हो रहे खुशहाल*

18-Aug-2020

रायपुर(शोर सन्देश)।राज्य सराकार प्रदेश के किसानों को संबल बनाने के लिए फसल परिवर्तन सहित अन्य अधिक आययुक्त खेती-किसनी पर जोर दे रही हैं। इसी कड़ी में कोरिया जिले के किसान हल्दी के औषधीय गुणों एवं आर्थिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की मदद से शासकीय भूमि को चिन्हाकित कर सामूहिक रूप से हल्दी की खेती कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी योजना- नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी के अंतर्गत बाड़ी विकास की संकल्पना को साकार करने के लिए जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में चयनित गौठान ग्राम सोरगा, जामपानी, कोडिमार छरछा, रोझी, कुशहा, उमझर, दुधनिया, बरबसपुर अमहर में गौठान समितियों के चयनित शासकीय भूमि और स्वयं की सामूहिक बाड़ियों में जिला पंचायत और कृषि विज्ञान केंद्र की एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अभिसरण से तकनीकी कार्ययोजना बनाकर लगभग 50 एकड़ में हल्दी की खेती की जा रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी ने बताया कि हल्दी की 10 महीने की फसल होती है। इसे अप्रैल-जून में लगाकर फरवरी-मार्च में इसे इस्तेमाल में ले सकते हैं। बीज के लिए अप्रैल तक रुक सकते है। हल्दी को मेड़ या फिर जमीन में उगा सकते है। हर पौधे के बीच 50 सेंटीमीटर और लाइन के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए। हल्दी उत्पादन से शुद्ध लाभ 90 हजार से एक लाख रूपये तक हो सकता है। एक हेक्टेयर भूमि में 5 से 6 क्विंटल बीज की जरूरत होती है, जिससे 50 से 60 क्विंटल फसल प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि हल्दी की पत्तियों से तेल निष्कासन भी किया जा सकता है। पत्तियों में 2.5 से 3 प्रतिशत तक इसेंसियल ऑइल होता है।  हल्दी में कुर्कमिन या करक्यूमिंन औषधीय तत्व पाया जाता है जिसकी वजह से हल्दी का रंग पीला होता है। हल्दी की राइजोम या गांठ का प्रयोग पाउडर में किया जाता है। वही इसकी पत्तियों में भी इरोलियल ऑइल मिलता है, जिसका उपयोग अरोमा और कास्मेटिक इंडस्ट्री में होता है। इसी महत्ता को देखते हुए जिले के अंतर्गत गौठान ग्रामों का चयन कर हल्दी उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही कृषकों को भी सामूहिक बाड़ियों में हल्दी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे कृषकों को अतिरिक्त आमदनी हो सके। 


राज्य में धान और मक्का की बुआई पूर्णता की ओर*

14-Aug-2020

00 दलहनी और तिलहनी फसलों की बुआई जारी
रायपुर (शोर सन्देश) चालू खरीफ सीजन में राज्य में धान और मक्का की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। वर्तमान में दलहनी फसलों के अंतर्गत अरहर की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है जबकि मूंग, उड़द एवं कुलथी आदि की बुआई किसान कर रहे हैं। तिलहनी फसलों के अंतर्गत मूंगफली की बुआई लगभग 87 फीसद हो चुकी है जबकि तिल, सोयाबीन, रामतिल, सूरजमुखी और अरण्डी आदि की बुआई जारी है।
राज्य में चालू खरीफ सीजन में 48 लाख 20 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 44 लाख 83 हजार 01 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 93 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य में बीते खरीफ सीजन में इसी अवधि तक 40 लाख 53 हजार 280 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी हुई थी। कृषि विभाग द्वारा राज्य में बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष धान के रकबे में एक लाख 76 हजार हेक्टेयर की कमी के साथ ही मोटे अनाज तथा दलहन और तिलहन के रकबे में दो लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा है। धान की बोनी निर्धारित लक्ष्य 37 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध अब तक 36 लाख 79 हजार 980 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो इस वर्ष के लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। इसी तरह मक्का की बोनी 2 लाख 27 हजार 500 तथा कोदो, कुटकी एवं अन्य फसलों की बोनी 57 हजार 710 हेक्टेयर में हो चुकी है जो कि इस वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का क्रमशः 96 प्रतिशत तथा 64 प्रतिशत है।
इसी तरह राज्य में दलहनी फसलों की बुआई दो लाख 48 हजार 930 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि इस वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य 3 लाख 62 हजार 920 हेक्टेयर की तुलना में 69 फीसद है। अरहर की बोनी एक लाख 30 हजार हेक्टेयर में किए जाने के विरूद्ध अब तक एक लाख 23 हजार 530 हेक्टेयर में अरहर की बोनी की जा चुकी है, जो लक्ष्य का 95 प्रतिशत है। इसी तरह तिलहनी फसलों की बुआई का क्रम जारी है। अब तक राज्य में एक लाख 54 हजार 650 हेक्टेयर में तिलहनी फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है, जो कि इस वर्ष के बुआई के लक्ष्य का 54 फीसद है।  


किसानों के लिए पीएम मोदी लॉन्च करेंगे 1 लाख करोड़ रुपए का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड*

09-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) देश में कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और उन्हें सस्ता कर्ज मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को लॉन्च करेंगे। पीएम सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस योजना की शुरुआत करेंगे। साथ ही पीएम किसान योजना के तहत 8.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 17,000 करोड़ के फंड की छठी किस्त भी जारी करेंगे। 00 आत्मनिर्भर भारत पैकेज में हुआ था ऐलानकेंद्र सरकार ने जुलाई में कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए रियायती लोन उपलब्ध करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के फंड के साथ एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसका शुभारंभ आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये करेंगे. किसानों की उपज के बेहतर रखरखाव के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना का ऐलान किया था। इसका ऐलान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर पैकेज के दौरान किया था।
00 किसानों को होगा फायदा :
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि एक लाख करोड़ रुपए का यह फंड फाइनेंसिंग सुविधा उत्पादित फसल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और फसलों के भंडारण से जुडे इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए दी जाएगी। इन केंद्रों में मुख्य एग्री कोऑपरेटिव सोसायटी, फार्मर प्रोड्यूसर ऑगेनाइजेशन, कंपनियां और स्टार्टअप शामिल हैं. इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोल्ड चेन, आधुनिक स्टोरेज फैसिलिटी, फसल को खेतों से सेंटर तक ले जाने के लिए बेहतर ट्रांसपोर्टेशन फैसिलिटी उपलब्ध कराना शामिल हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि इससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्यस प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
00 इस वित्तपोषण सुविधा के जरिये क्रेडिट गारंटी कवरेज भी मिलेगा :
कर्ज का वितरण 4 साल में किया जाएगा. चालू वित्तीय वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये और अगले तीन वित्तीय वर्ष में 30,000-30,000 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इस वित्तपोषण सुविधा के तहत सभी प्रकार के कर्ज में हर साल 2 करोड़ रुपये तक कर्ज के ब्याज में 3 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 7 वर्ष के लिए होगी। इसके अलावा 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज योजना के तहत इस वित्तपोषण सुविधा के जरिये क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध होगा। इस कवरेज के लिए सरकार की ओर से शुल्क का भुगतान किया जाएगा।
00 एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में मिलेगी मॉरेटोरियम की सुविधाइस वित्तपोषण सुविधा के तहत लिए कर्ज के पुनर्भुगतान (Repayment) के लिए मॉरेटोरियम की सुविधा भी दी जाएगी। जो कम से कम 6 महीने और अधिकतम 2 साल के लिए हो सकती है। कृषि और कृषि प्रसंस्करण आधारित गतिविधियों के लिए औपचारिक कर्ज सुविधा के जरिये इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि अवसंरचना कोष का प्रबंधन और निगरानी ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली प्लेटफॉर्म के जरिये किया जाएगा। मॉनिटरिंग और फीडबैक के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिलास्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। योजना की समयसीमा वित्त वर्ष 2020 से 2029 के लिए होगी। 


इस बार जुलाई में हुई सबसे कम बारिश, किसानों के माथे पर आने लगी चिंता की लकीर*

01-Aug-2020

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश) इस बार पांच सालों में पहली बार जुलाई के महीने में सबसे कम बारिश हुई है। आमतौर पर जून से सितंबर के बीच जुलाई का महीना सबसे नमी (बारिश) वाला होता है, लेकिन इस साल कम बारिश ने खरीफ की फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर से मध्यप्रदेश, गुजरात और ओडिशा के लिए।
यदि अगस्त में भी 97 प्रतिशत बारिश के अनुमान के विपरीत कम वर्षा होती है तो इसका प्रभाव तिलहन और दालों की फसल पर पड़ेगा जिन्हें ज्यादातर बारिश वाले इलाकों में उगाया जाता है। देश में जुलाई के दौरान 285.3 मिमी वर्षा के औसत से 90 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड ऑफ एवरेज (एलपीए) की बारिश हुई, जबकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 103 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। 
दक्षिणी राज्यों को छोड़कर देश के अन्य सभी क्षेत्रों में जून की तुलना में जुलाई में कम वर्षा हुई है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘अगस्त का महीना महत्वपूर्ण है क्योंकि आईएमडी ने शुक्रवार को जारी अपडेट में इस महीने के लिए अपनी भविष्यवाणी नहीं बदली है।मौसम ब्यूरो ने कहा कि अगस्त और सितंबर दोनों के लिए मानसून एलपीए 104 प्रतिशत होने की संभावना है।
आधिकारिक डाटा के अनुसार जून-जुलाई के बीच में मानसून सामान्य था। यह जून में 118 प्रतिशत एलपीए था। मानसून के शुरुआती आगमन और जून में सामान्य वर्षा की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक होने के कारण, इस वर्ष खरीफ की बुआई बहुत अच्छी हुई। कृषि मंत्रालय ने कहा कि कुल खरीफ की पैदावार इस सीजन के 106.64 मिलियन हेक्टेयर है, जो सामान्य क्षेत्र का 83 प्रतिशत है।
जहां तिलहन की बुआई सामान्य स्तर के करीब पहुंच चुकी है। वहीं कपास और गन्ना अपने सामान्य मानदंड स्तर को पार कर चुके हैं। धान की रोपाई ने अब तक 39.7 मिलियन हेक्टेयर के अपने सामान्य क्षेत्र का 67 प्रतिशत कवर किया है। यह आमतौर पर पश्चिम बंगाल में देर से बोया जाता है जोकि अन्य राज्यों की तुलना में देश का सबसे बड़ा उत्पादक है। राजस्थान, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर प्रमुख राज्यों में से हैं जहां मानसून की कमी है। 


हाथी ने किसान को कुचल कर मारा, मौत*

25-Jul-2020

पत्थलगांव (शोर सन्देश) पंडरीबहला गांव में शुक्रवार देर रात एक हाथी ने किसान को कुचल दिया है। हाथी के हमले में किसान की मौत हो गई है। वहीं किसान की पत्नी भी गंभीर रुप से घायल हुई है। हाथी ने किसान के घर पर जमकर उत्पात मचाया। पंडरीबहला गांव में देर रात हाथी के हमले में किसान का घर टूट गया है। वहीं खेत में खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई है। 




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