

चंडीगढ़ (शोर संदेश)। हरियाणा में अब कुंवारों को भी पेंशन मिलेगी। चंडीगढ़ में एक पत्रकारवार्ता में सीएम मनोहर लाल ने 45-60 आयु वर्ग तक के कुंवारे महिला-पुरुष के लिए 2750 रुपये की पेंशन शुरू करने की घोषणा की। इसका लाभ 180000 से कम वार्षिक आय वाले लोग उठा सकेंगे। इसके अलावा 40-60 आयुवर्ग तक के तीन लाख वार्षिक आय तक के विधुर को भी अब हरियाणा सरकार पेंशन देगी। कुंवारों को पेंशन देने वाला हरियाणा पहला राज्य बन गया है।
ऑनलाइन होगा जमीन का इंतकाल
इसके अलावा प्रदेश में जमीन के इंतकाल की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। सीएम ने कहा कि हमारे मेनिफेस्टो में समयबद्ध तरीके से करने का वादा किया गया था। रजिस्ट्री के 10 दिन बाद तक पोर्टल पर सबको आपत्ति के लिए दिखेगा, अगर कोई आपत्ति नहीं होती तो उसका इंतकाल हो जाएगा।
SDM-DRO को रजिस्ट्री की पावर
इसके अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एसडीएम और डीआरओ को भी जमीनों की रजिस्ट्री की शक्तियां दी हैं। कोई भी व्यक्ति इन अधिकारियों के पास जमीन की रजिस्ट्री करा सकता है।

चंडीगढ़ (शोर संदेश)। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के काफिले को शनिवार शाम को एक ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। काफिले में शामिल दो गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी को चोट नहीं आई। जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री अनिल विज का काफिला रोहतक से गुरुग्राम जा रहा था। मुंडाखेड़ा गांव के पास केएमपी पर एक ट्रक की गृह मंत्री अनिल विज के काफिले में पीछे चल रही एस्कॉर्ट गाड़ी में टक्कर लग गई। टक्कर लगने के बाद एस्कॉर्ट गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया और वह आगे चल रही गृहमंत्री की गाड़ी में पीछे से टकरा गई। दुर्घटना में किसी को चोट नहीं आई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि घटना के कुछ मिनट बाद ही गृहमंत्री का काफिला वहां से निकल गया। मौके पर जिला पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम पहुंचे और आवश्यक कार्रवाई की गई। गृह मंत्री अनिल विज ने हादसे के जानकारी देते हुए बताया कि ट्रक को एक कम उम्र का युवक चला रहा था। जिसने केएमपी रोड पर खड़े कारवां को पीछे से आकर टक्कर दे मारी। उसके कानों में हेडफोन लगे थे। फिलहाल वह और उनके सभी सुरक्षाकर्मी सुरक्षित हैं और अब वह वापस अंबाला अपने निवास स्थान की तरफ जा रहे हैं।

चंडीगढ़ (शोर संदेश) - पंजाब में मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। हरपाल चीमा को वित्त विभाग दिया गया है। वहीं गृह और आबकारी मंत्रालय सीएम भगवंत मान के पास ही रहेगा। 19 मार्च को पंजाब में 10 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी।जंडियाला के विधायक हरभजन सिंह ईटीओ को बिजली विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। गुरमीत सिंह मीत हेयर को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। हरजोत सिंह बैंस को पर्यटन विभाग सौंपा गया है। डॉ. बलजीत कौर महिला एवं बाल विकास विभाग की बागडोर संभालेंगी। लालचंद कटारूचक्क को खाद्य आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। लालजीत भुल्लर को परिवहन मंत्री बनाया गया है। ब्रह्म शंकर जिंपा को जल आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं डॉ. विजय सिंगला को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है।पंजाब में अभी सात नए मंत्री बनने हैं। कई बड़े चेहरे अभी मंत्री पद से दूर हैं। इनमें अमृतसर से कुंवर विजय प्रताप, अमन अरोड़ा, सर्वजीत कौर माणुके, जय सिंह रोढ़ी, डॉ. रवजोत ग्रेवाल और प्रो. बलजिंदर कौर का नाम शामिल है।पंजाब से राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी ने क्रिकेटर हरभजन सिंह, पंजाब के आप सह प्रभारी राघव चड्ढा, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर संदीप पाठक, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल और कृष्णा प्राण ब्रेस्ट कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक संजीव अरोड़ा के नाम का एलान किया है।


चंडीगढ़ (शोर संदेश) पंजाब विधानसभा चुनाव की गिनती शुरू हो गई है। फिलहाल डाक मतपत्रों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझान में आम आदमी पार्टी 48 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस 37 सीटों पर आगे चल रही है और भाजपा गठबंधन 6 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं दूसरी ओर अकाली दल 17 सीटों पर आगे चल रहा है। अन्य दलों का अभी खाता भी नहीं खुला है।चुनाव आयोग ने बताया कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भी हर जिले में मतगणना 8 बजे शुरू हो चुकी है। सबसे पहले डाक मतपत्रों की काउंटिंग हो रही है और उसके बाद ईवीएम की काउंटिंग शुरू होगी।गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटों के लिए मतदान हुआ था और यहां सरकार के गठन के लिए 59 सीटों की जरूरत होगी। पंजाब में इस बार बहुकोणीय मुकाबला था। हालांकि एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है, वहीं दूसरी और कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नई पार्टी भी जीत का दावा कर रही है।

चंडीगढ़ (शोर संदेश)। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी संघर्ष के दौरान पंजाब में किसानों पर दर्ज सभी केस रद्द किए जाएंगे। यह एलान बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 32 किसान संगठनों के साथ बैठक के बाद किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों व मजदूरों के परिजनों को सरकारी नौकरी व तय मुआवजा देने के लिए संयुक्त मोर्चा से सूची मांग ली है।मुख्यमंत्री ने यह भी एलान किया कि पंजाब के सरकारी दफ्तरों में केवल पंजाबियों को ही नौकरी देने के लिए राज्य सरकार एक हफ्ते में नया कानून ला रही है। पंजाब भवन में संयुक्त मोर्चा के साथ बैठक के बाद प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने किसानों के हित में कई अन्य बड़े एलान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की पूर्ण कर्जमाफी की मांग पर किसान यूनियनों के साथ बैठकर में विचार-विमर्श किया जाएगा और उसके आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि यूनियनों की बाकी 17 मांगों को मान लिया गया है। इसके तहत, राज्य में पराली जलाने को लेकर अब तक किसानों पर जितने भी केस दर्ज किए गए हैं, उन सभी को रद्द करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही किसानों से भविष्य में पराली न जलाने की अपील भी की।बठिंडा क्षेत्र में गुलाबी सूंडी के कारण खराब हुई कपास की फसल के लिए 12000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि को बढ़ाकर 17000 रुपये करने की घोषणा की। जिन कपास किसानों की 75 फीसदी फसल खराब हुई है, उन्हें अब बाकी पांच हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि कपास की चुगाई करने वाले मजदूरों को भी 10 फीसदी मुआवजा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गन्ने का दाम 310 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 360 रुपये कर दिया है। इस तरह बढ़ाए गए 50 रुपये में से 35 रुपये सरकार और 15 रुपये चीनी मिलें अदा करेंगी। बढ़ी हुई राशि की किसानों को काउंटर पेमेंट की जाएगी। वहीं, राज्य में एपी स्कीम के तहत सब्जी उगाने वाले किसानों द्वारा किए 500 बिजली के मीटर भी सरकार ने फ्री कर दिए हैं और खेतों को पानी देने में आने वाला बिजली का बिल भी माफ कर दिया है।
तीनों काले कानूनों की बुनियाद अकालियों के लाए कानून थे
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2013 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने तीनों कृषि कानूनों से मिलता-जुलता कानून पास किया था। तीनों काले कानूनों की बुनियाद भी अकालियों द्वारा लाया कानून ही है, इसलिए कांग्रेस सरकार ने उस कानून को रद्द कर दिया है, जो किसानों को कांट्रैक्ट खेती के नाम पर बड़े घरानों की कठपुतली बना रहा था।
धान की सारी फसल चार दिन में खरीद लेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल धान की बहुत अच्छी पैदावार हुई है और सरकार पूरी फसल अगले 3-4 दिन में खरीद लेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 सालों में यह पहला अवसर है जब किसानों को मंडियों में धान खरीद में कोई कठिनाई नहीं हुई और उन्हें समय पर भुगतान भी हुआ।
पंजाब में लागू नहीं हो सकेंगे तीनों कृषि कानून
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली विधानसभा में किसान यूनियनों द्वारा सरकार से मांग की गई थी कि तीन काले कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाए, उसे स्वीकार करते हुए सरकार ने प्रस्ताव ही पारित नहीं किया बल्कि उसमें दो लाइनें यह जोड़ दी हैं कि पूरा सदन और सारे विधायक सर्वसम्मति से सरकार को हिदायत करते हैं कि यह कानून पंजाब में लागू न किए जाएं। इसके चलते अब पंजाब में यह कानून लागू नहीं हो सकेंगे।

चंडीगढ़ (शोर संदेश)। लगभग दो दशक से पंजाब में कांग्रेस का पर्याय बने कैप्टन अमरिंदर सिंह अब नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर अपने तीखे तेवर से सभी को अवगत तो करवा ही दिया है। प्रदेश में कांग्रेस के नाराज वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा गुट है। कैप्टन उन्हीं को साधकर हाईकमान और पंजाब कांग्रेस को जमीन पर लाना चाहते हैं। पंजाब की अफसरशाही में कैप्टन की खासी पकड़ रही है, वहीं सरकार के साथ-साथ उन्होंने संगठन पर भी अपना कब्जा हमेशा बरकरार रखा। कैप्टन के निकटवर्ती अब उन वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जिनको दरकिनार किया जा रहा है।
डांवाडोल पार्टी में फूंकी थी जान
राजिंदर कौर भट्ठल के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जब कांग्रेस की कमान संभाली थी तो पार्टी की स्थिति डांवाडोल थी। 1997 में तो कांग्रेस के सिर्फ 14 विधायक ही जीते थे और भाजपा-अकाली दल का पूरा वर्चस्व था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी में जान फूंकी और 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी को सत्ता में ले आए और 14 से सीधे 61 विधायक कांग्रेस के जीते। कैप्टन ने सबसे अधिक झटका भाजपा को दिया, जिनके सिर्फ तीन विधायक रह गए। 2007 में कांग्रेस का प्रदर्शन भी निराशाजनक नहीं रहा, कैप्टन के नेतृत्व में 44 विधायक कांग्रेस के जीते थे। इसके बाद कांग्रेस की कमान मोहिंदर सिंह केपी को मिली और बाद में प्रताप बाजवा को लेकिन दोनों कांग्रेस को सत्ता तक नहीं ला सके। 2012 में कांग्रेस के 46 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे लेकिन सत्ता नहीं मिली।
हाईकमान ने दोबारा कैप्टन को कांग्रेस का प्रधान बनाया और 2017 में कैप्टन दोबारा कांग्रेस को सत्ता में ले आए और 77 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता संभाली तो प्रदेश की प्रधानगी सुनील जाखड़ को मिली। संगठन और सरकार के बीच लगातार तालमेल रहा। हालांकि प्रताप बाजवा, अश्वनी सेखड़ी, सांसद शमशेर सिंह दूलो समेत कई नेता कैप्टन विरोधी रहे लेकिन सरकार व संगठन के बीच संतुलन बना रहा।
अफसरशाही पर है मजबूत पकड़
कैप्टन की अफसरशाही में पकड़ बेशक उनको मजबूत बनाती रही लेकिन आम कार्यकर्ताओं व नेताओं से उनकी दूरी बढ़ती चली गई। अब स्थिति बिल्कुल उलट है। सिद्धू प्रदेश प्रधान बनने के बाद सुनील जाखड़, प्रताप सिंह बाजवा, शमशेर सिंह दूलो, अश्वनी सेखड़ी समेत कई नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सिद्धू व चन्नी की ताजपोशी के बाद जिस तेजी से वरिष्ठ नेताओं को किनारे किया गया है, उसको पूरी तरह से कैप्टन भुनाने की तैयारी में है।
हर नाराज नेता के संपर्क में हैं कैप्टन
सूत्रों के अनुसार कैप्टन की टीम ने सभी से संपर्क साध रखा है और कैप्टन कांग्रेस को छोड़ने के बाद अपना अलग खेमा तैयार करने जा रहा है। जाहिर है कि चुनावों में नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन के कई निकटवर्ती नेताओं को किनारे लगाकर उनकी टिकटों की कांट छांट कर सकते हैं, ऐसे में कैप्टन उन नेताओं व साथियों को अपनी टीम में शामिल करेंगे। कई नेता कैप्टन के चुनावी जहाज में सवार हो सकते हैं। कैप्टन के कई निकटवर्ती मंत्रियों की छुट्टी की गई है, जिसमें गुरप्रीत सिंह कांगड़, सुंदर शाम अरोड़ा, साधू सिंह धर्मसोत, बलवीर सिंह सिद्धू शामिल हैं। यह सभी सिद्धू से खासे नाराज चल रहे हैं। लिहाजा, कैप्टन ने नाराज नेताओं को अपना प्लेटफार्म देने की तैयारी शुरू कर दी है।

चंडीगढ़ (शोर संदेश)। कांग्रेस के लिए पंजाब में आने वाले दिन काफी कड़े हो सकते हैं। खबर मिल रही है कि पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह आज दिल्ली आ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वह भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं।सूत्रों ने बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह आज दोपहर बाद दिल्ली के लिए रवाना होंगे और आज शाम को जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात कर सकते है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस के कई विधयक कैप्टन के संपर्क में हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि वह कांग्रेस पार्टी को तोड़कर बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले ही कांग्रेस ने अपने सीएम उम्मीदवार को बदल दिया है, जिससे पार्टी में बड़ी टूट का खतरा मंडरा गया है। प्रदेश में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली अकाली दल ने इस बार बसपा के साथ गठबंधन किया है। अकाली ने तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए बीजेपी के साथ अपने रिश्तों को खत्म कर दिया है।वहीं आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में अपने ताकत झोंक दी है। दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजन अरविंद केजरीवाल भी दो दिन के पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं। केलरीवाल कल लुधियाना जाएंगे और पंजाब के ट्रेड्स और व्यापारियों से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही वह 30 सितंबर को प्रेस कांफ्रेंस करेंगे, जिसमें वह बड़ी घोषणा कर सकते हैं।ऐसे में प्रदेश में होने वाले आगामी चुनाव काफी रोचक हो सकते हैं, क्योंकि प्रदेश में बीजेपी अकेले की चुनाव मैदान में उतरेगी। हालांकि तीन कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में ही हो रहा है, जिसको इतना आगे ले जाने का श्रय भी कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही जाता है।
पंजाब में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा
कैप्टन के हटने के बाद पंजाब के सीएम बनाए गए चरणजीत सिंह चन्नी ने आज मंत्रियों को मंत्रालय सौंप दिए हैं। जानकारी के अनुसार, मनप्रीत बादल को फाइनस, डॉ राज कुमार वेरका को मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, काका रणदीप सिंह खेतीबाड़ी, राणा गुरजीत टेक्निकल एजुकेशन एंड रिसर्च, गुरकीरत कोटली को उद्योग, विजय इंदर सिंगला पीडब्ल्यूडी, परगट सिंह शिक्षा, सुखजिंदर रंधवा गृह मंत्री, राजा वरिंग ट्रांसपोर्ट, संगत सिंह गिल्जिया फारेस्ट, सुखबिंदर सरकारिया अर्बन डिवलोपमेंट और भारत भूषण आशु को फ़ूड सप्लाई मंत्रालय दिया गया है।


चंडीगढ़ (शोर संदेश)। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्दू ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस इस्तीफी के बाद एक बार फिर पंजाब की राजनीती गरमा गई है। नवजोत सिंह ने अपना इस्तीफा कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी को भेज दिया है। इसके कुछ ही देर बाद अब मुख्यमंत्री चन्नी पत्रकारों से चर्चा भी करेंगे।
