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पीएम मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश: प्रयास और अडिग संकल्प बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी

27-May-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रेरणादायी ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि अटूट धैर्य, निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प के बल पर बड़े से बड़े लक्ष्यों को भी सिद्ध किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।”
‘सुभाषितम’ संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर और क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेता है। श्लोक इस प्रकार है :
इस श्लोक का अर्थ है, “जो व्यक्ति जिस लक्ष्य की इच्छा करता है और उसे पाने के लिए निरंतर क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वह बीच में हार मानकर अपने मार्ग से पीछे न हटे।”
इससे पहले, मंगलवार को ‘सुभाषितम’ संदेश में पीएम मोदी ने कहा था कि सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें।
इस श्लोक का अर्थ है, “आत्मा स्वभाव से सदा शुद्ध, नित्य, सुखस्वरूप और स्वयं प्रकाशमान है। किन्तु अज्ञान के कारण वह मलिन प्रतीत होती है और ज्ञान से वही पुनः अपने शुद्ध स्वरूप में प्रकट हो जाती है।”






 

वी.डी. सतीशन ने पीएम मोदी और निर्मला सीतारमण से की मुलाकात, केरलम के विकास और वित्तीय मुद्दों पर हुई चर्चा

27-May-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस दौरान मुख्य रूप से राज्य की वित्तीय स्थिति, लंबित परियोजनाओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ सहयोग को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के दौरान वी.डी. सतीशन ने केरलम की प्राथमिकताओं, विकास परियोजनाओं और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण योजनाओं पर केंद्र से सहयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की भूमिका पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने बाद में बताया कि केंद्र सरकार को ‘नए केरलम’ के विजन से अवगत कराया गया है और राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में केरलम की वित्तीय स्थिति, राजस्व प्रबंधन और विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को अपनी योजनाओं के लिए अधिक वित्तीय लचीलापन और केंद्र से समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने राज्यों द्वारा लिए जाने वाले ऋण को लेकर भी चर्चा की और वित्तीय ढांचे में अधिक लचीलापन देने का अनुरोध किया।
वी.डी. सतीशन ने केंद्र सरकार से केरलम की विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगामी बजट में शामिल करने के बाद केंद्र के समक्ष विस्तृत प्रस्ताव रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से ही केरलम के विकास लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार को राज्य की वित्तीय जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं से अवगत कराने को इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की बैठकों के माध्यम से केंद्र के साथ निरंतर संवाद जारी रहेगा, ताकि राज्य की विकास योजनाओं को समय पर गति मिल सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सभी विभागों को केंद्र से मिलने वाली बकाया राशि और अब तक प्राप्त धन के उपयोग की समीक्षा करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी बैठकों में विशेष परियोजनाओं और वित्तीय प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

नितिन नबीन का तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा, संगठन पर रहेगा फोकस

27-May-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नबीन 28 मई से उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे संगठन से जुड़ी कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे और वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे। यह दौरा 28 मई से 30 मई तक चलेगा, जिसमें संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी रणनीति पर विशेष फोकस रहेगा।
नितिन नबीन 28 मई को शाम लगभग 4:35 बजे देहरादून स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। यहां से वे सीधे राज्य भाजपा कार्यालय जाएंगे, जहां शाम 6:15 बजे कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद वे पार्टी के मंत्रियों के साथ अलग से संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
दौरे के दूसरे दिन की शुरुआत उनकी मुख्यमंत्री से शिष्टाचार मुलाकात के साथ होगी। इसके बाद वे पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बी.सी. खंडूरी के आवास पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और उनके परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह के सत्र में निर्धारित है।
इसके बाद वे राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान सांसदों और विधायकों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही राज्य पदाधिकारियों, मोर्चा अध्यक्षों, महासचिवों, जिला प्रभारियों और जिला अध्यक्षों के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति और आगामी योजनाओं पर विचार-विमर्श होगा।
दिन के दौरान नितिन नबीन स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों जैसे महापौर, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों से भी संवाद करेंगे। इसके अलावा वे पार्टी के मीडिया, सोशल मीडिया, आईटी सेल और प्रवक्ताओं के साथ बैठक कर संचार रणनीति की समीक्षा करेंगे।
दौरे के अंतिम दिन नितिन नबीन टपकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता के घर नाश्ते के लिए जाएंगे और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। वे बूथ समिति की बैठक में भी हिस्सा लेंगे और संगठन की जमीनी मजबूती पर चर्चा करेंगे।
इसके बाद वे शिवालिक कॉलेज, सिंहनीवाला में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित करेंगे। दिन के अंत में वे मुख्यमंत्री आवास ‘मुख्य सेवक सदन’ में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे। 30 मई को शाम लगभग 4:35 बजे वे जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। 





 

निर्वाचन आयोग QR code-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल करेगा शुरू, मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश पर लगेगी रोक

30-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India, ECI) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।
यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।
मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।
अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।
सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। 

 

नया भारत आतंकवाद और उसका समर्थन करने वालों में कोई भेद नहीं करता : राजनाथ सिंह

30-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत के सैन्य-औद्योगिक परिसर ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह न केवल शांति काल की जरूरतों को पूरा करने के लिए, बल्कि युद्धकाल में तीव्र आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की मांगों को पूरा करने के लिए भी तत्पर है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने छल या परमाणु हमले की धमकी के आगे घुटने नहीं टेके और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया। उन्होंने कहा, “यह ‘नई विश्व व्यवस्था’ है; इस नए वैश्विक युग का ‘नया भारत’ है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसका समर्थन करने वालों में कोई भेद नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत को बदल दिया है।”
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि हालांकि यह ऑपरेशन मात्र 72 घंटों में पूरा हो गया, लेकिन इससे पहले की तैयारियां व्यापक और लंबी थीं। उन्होंने बताया कि भारत की आपातकालीन क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता, ये सभी प्रतिरोध की रणनीति के अभिन्न अंग बन गए हैं।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के प्रत्यक्ष परिणाम स्वरूप स्वदेशी हथियारों और रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति वैश्विक धारणा और सकारात्मक दृष्टिकोण में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, “कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि है। हम इन मानकों को पार करने के अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
जर्मनी की अपनी हालिया यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यूरोप भर की प्रमुख कंपनियां हमारी निजी रक्षा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति न केवल उसकी सैन्य शक्ति से, बल्कि प्रतिरोध स्थापित करने की क्षमता से भी मजबूत हुई है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी अभिन्न अंग बन गए हैं, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इस प्रतिमान परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई को हर जगह अत्यंत प्रभावी ढंग से तैनात किया गया है। इसने हमारी सटीकता और आक्रमण क्षमताओं को बढ़ाया है। हालांकि प्रमुख अभियानों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, लेकिन अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं हैं जो खतरों को उनके वास्तविक रूप लेने से पहले ही बेअसर करने के लिए सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अनुप्रयोग की व्यावहारिकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक जवाब देने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। उन्होंने कहा, “एआई का अर्थ ‘संवर्धित पैदल सेना’ भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा रही है। आधुनिक युद्ध की मांगों को ध्यान में रखते हुए, हम अपनी सेना को प्रौद्योगिकी-संचालित और एकीकृत युद्धक मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए, सेना ने ‘रुद्र’ ब्रिगेड, ‘भैरव’ बटालियन, ‘शक्तिबान’ तोपखाना रेजिमेंट और ‘दिव्यास्त्र’ बैटरी जैसी चुस्त और आत्मनिर्भर लड़ाकू इकाइयां स्थापित की हैं, जो आधुनिक हाइब्रिड खतरों का तत्काल और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।”
राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल आशावादी नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नई और गंभीर चुनौतियां पेश करती हैं।
 

भारत-इटली रक्षा संबंधों को नई दिशा, सैन्य सहयोग योजना पर सहमति

30-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)भारत और इटली के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। इस बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो के साथ यह वार्ता नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ केंद्र में आयोजित की गई। दोनों देशों ने शांति, स्थिरता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों के आधार पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। खासतौर पर पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने और नई संभावनाओं को विकसित करने पर सहमति बनी।
दोनों देशों के बीच वर्ष 2026-27 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का आदान-प्रदान किया गया। इस योजना के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दोनों सेनाओं के बीच तालमेल और दक्षता में वृद्धि होगी।
भारत और इटली ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी समान दृष्टिकोण व्यक्त किया। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में सूचना साझाकरण को मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।
बैठक से पहले इटली के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। यह दौरा भारत-इटली संबंधों में बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
यह बैठक 2023 में रोम में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों का अगला कदम है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और इटली आधुनिक रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 

समग्र विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा के विजन को साकार करने का सशक्त संकल्प

29-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) नई दिल्ली में आदि विद्या फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्रथम ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन स्पिरिचुअलिटी इन स्कूल्स’ के अवसर पर भारत के पहले ‘स्पिरिचुअल साइंस करिकुलम’ का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उनके आंतरिक विकास तथा स्पिरिचुअल क्वोशेंट (SQ) को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 समग्र विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के विजन को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का सशक्त प्रयास है।फाउंडेशन के संस्थापक शांतनु प्रकाश ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अंकों, रैंक और प्रतिशत पर अत्यधिक केंद्रित हो गई है, जबकि छात्रों की भावनात्मक स्थिति, मानसिक संतुलन और असफलताओं से जूझने की क्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि SQ को IQ और EQ के समान महत्व दिया जाए।”
सम्मेलन में इस्कॉन के गौरांग प्रभु दास जी, पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज और स्वामिनी प्रमानंदी जी (अम्मा जी) सहित अनेक आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षाविदों और नीति-निर्धारकों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य विषय यह रहा कि आध्यात्मिकता को धर्म के संकीर्ण दायरे में न देखकर आत्म-जागरूकता, नैतिक मूल्यों और भावनात्मक दृढ़ता के वैज्ञानिक ढांचे के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
गौरांग प्रभु दास जी ने कहा कि आज हम बच्चों को FILE संभालना तो सिखा रहे हैं, लेकिन LIFE संभालना नहीं सिखा पा रहे हैं। उनके अनुसार वास्तविक सफलता विनय, विवेक, वैराग्य और विश्वास से प्राप्त होती है। वहीं, पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि आधुनिक शिक्षा मस्तिष्क और शरीर को तो विकसित करती है, लेकिन आत्म-चेतना को अनदेखा कर देती है, जिससे नई पीढ़ी बाहरी रूप से सक्षम होते हुए भी भीतर से दिशाहीन महसूस करती है।
आदि विद्या फाउंडेशन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय आंतरिक विज्ञान को एक संरचित, वैज्ञानिक और अकादमिक स्वरूप में विद्यालयों तक पहुंचाना है। यह केवल एक नया विषय जोड़ने की पहल नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करने का संकल्प है जो करियर में सफल होने के साथ-साथ मानसिक रूप से सुदृढ़, संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हो। अंततः यह सम्मेलन भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां परा विद्या (सांसारिक ज्ञान) और अपरा विद्या (आत्मिक ज्ञान) का समन्वय हो। ऐसी शिक्षा छात्रों को चुनौतियों के बीच भी निराशा से दूर रखेगी और उन्हें संतुलित, सक्षम तथा आत्मविश्वासी नागरिक बनाएगी।

 


ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत की सबसे बड़ी जरूरत: सागर अदानी

29-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने के संभावित असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन ऐसे समय में भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूती हासिल करना होना चाहिए। यह बात सागर अदानी ने कही।
The Economist Impact Resilient Futures Summit के दौरान मीडिया से बातचीत में सागर अडानी ने कहा कि आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा कि यूएई का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर करेगा या स्थिरता लाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, जिससे भारत के दृष्टिकोण से यह स्थिति सकारात्मक साबित हो सकती है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए “एनर्जी रेजिलिएंस” यानी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना ही सबसे बड़ा समाधान है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बाधाओं के संदर्भ में उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत ने इस संकट का प्रभावी तरीके से प्रबंधन किया है और आम लोगों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ने दिया है।
सागर अडानी ने बताया कि दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भारत को अपने ऊर्जा ढांचे को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि अडानी समूह देश में ऊर्जा परिवर्तन के लिए 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और थर्मल पावर जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी नीतियों के समर्थन से देश में 50 गीगावाट से अधिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी गई है, जबकि भारत ने पहली बार 55 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार किया है।
कंपनी की परियोजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि Adani Green Energy गुजरात के खावड़ा में दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-लोकेशन रिन्यूएबल एनर्जी परियोजना विकसित कर रही है। यह परियोजना 30,000 मेगावाट क्षमता की होगी और लगभग 580 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली होगी।
उन्होंने बताया कि कंपनी की मौजूदा ग्रीन एनर्जी क्षमता करीब 20,000 मेगावाट है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 50 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। अंत में उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच मजबूत भूमिका निभाई है और मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाल रहा है।
 

भारत के MEI सेक्टर में नौकरियों की रफ्तार तेज, भर्ती में 6.6% की मजबूत बढ़ोतरी

28-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर (एमईआई) सेक्टर में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में रोजगार में 6.6 प्रतिशत की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 5.5 प्रतिशत से ज्यादा है। मंगलवार को जारी टीमलीज सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इससे पता चलता है कि इस सेक्टर में भर्ती का रुझान काफी मजबूत हुआ है और यह देश के शीर्ष तीन सेक्टरों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा भर्ती की जा रही है।
टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए. ने कहा कि एमईआई सेक्टर अब रिकवरी फेज से आगे निकल चुका है और रोजगार में यह बढ़ोतरी सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ते निवेश का नतीजा है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में सेमीकंडक्टर निवेश से 2026-28 के बीच लगभग 10 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इनमें फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग, पैकेजिंग (एटीएमपी), चिप डिजाइन और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन, क्लीन टेक मैन्युफैक्चरिंग और पीएलआई योजनाओं के जरिए पूरे सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। कंपनी ने बताया कि इंडस्ट्री 4.0 के बढ़ते उपयोग से अब ज्यादा डिजिटल और उच्च कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है, खासकर प्लांट ऑपरेशन और इंजीनियरिंग डिजाइन में। प्लांट इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन इंजीनियरिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, एटीएमपी ऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग रोल्स में सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है।
23 उद्योगों के 1,268 नियोक्ताओं के सर्वे के आधार पर, रिपोर्ट में कहा गया कि इंजीनियरिंग सेक्टर में 33 प्रतिशत कंपनियां भर्ती बढ़ाने की योजना बना रही हैं, जबकि 46 प्रतिशत कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या स्थिर रखेंगी। शहरों में चेन्नई सबसे आगे है, जहां 24 प्रतिशत तक भर्ती बढ़ने की संभावना है। इसके बाद पुणे (20 प्रतिशत) और बेंगलुरु (18 प्रतिशत) का स्थान है। पुणे में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च सेंटर होने के कारण भर्ती तेजी से बढ़ रही है।
तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए रोजगार बढ़ाने में आगे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में एमईआई सेक्टर में सैलरी में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जो आईटी (8.9 प्रतिशत), बैंकिंग (8.8 प्रतिशत) और इंश्योरेंस (8.7 प्रतिशत) से ज्यादा है। चेन्नई और पुणे में सैलरी बढ़ोतरी सबसे ज्यादा 9.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
 


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