ब्रेकिंग न्यूज

Dhamtari

धमतरी मॉडल बना मिसाल, BaLA कॉन्सेप्ट अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू

19-Feb-2026
धमतरी । ( शोर संदेश ) बाल शिक्षा और सर्वांगीण विकास की दिशा में धमतरी जिले की अभिनव पहल अब पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शक बन गई है। जिले में सफलतापूर्वक लागू किए गए “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट को अब संपूर्ण छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायतों मं  निर्मित एवं निर्माणाधीन सभी आंगनबाड़ी भवनों में BaLA कॉन्सेप्ट को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशानुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से आंगनबाड़ी भवनों को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि भवन स्वयं बच्चों के लिए शिक्षण-सहायक सामग्री का कार्य करे। BaLA कॉन्सेप्ट के अंतर्गत दीवारों पर वर्णमाला, अंक, आकृतियां, स्थानीय चित्रकथाएं, फर्श पर खेल-आधारित शिक्षण सामग्री, खिड़की-दरवाजों के माध्यम से आकार और माप की समझ जैसे नवाचारी तत्वों को शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में सीखने की जिज्ञासा, रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता का स्वाभाविक विकास होगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी ग्राम पंचायतें स्वीकृत तकनीकी डिज़ाइन एवं निर्धारित वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करें। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के समन्वय से इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही, प्रदेश में प्रचलित सभी आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ 15 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले में BaLA कॉन्सेप्ट के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से देखने को मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल भवन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित हुए हैं। बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि, सीखने की गति में सुधार तथा अभिभावकों की संतुष्टि इस पहल की सफलता को दर्शाती है।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही स्थानीय कलाकारों एवं समुदाय की सहभागिता से आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल बनाया जाए।
यह पहल न केवल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक अधोसंरचना के सृजनात्मक उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी। धमतरी का यह नवाचार अब पूरे प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत करेगा।

धमतरी में दहशत: खेत के पाइप कुपाले में घुसा विशाल अजगर, घंटों की मशक्कत

17-Jan-2026
धमतरी।  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के आमदी क्षेत्र अंतर्गत रांवा रोड पर उस समय हड़कंप मच गया, जब खेत में पानी डालने के लिए रखे गए मोटे पाइप के कुपाले (भूमिगत संरचना) में करीब 10 फीट लंबा और लगभग 18 किलो वजनी अजगर फंस गया। अजगर के फंसे होने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल वन विभाग और सर्पमित्र सूर्यकांत साहू को सूचना दी।
मौके पर पहुंचने पर सर्पमित्र ने देखा कि अजगर कुपाले के अंदर गहराई तक घुस चुका है, जिससे उसे बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया। कई प्रयासों के बाद स्थानीय जेसीबी की मदद से सावधानीपूर्वक खुदाई की गई। खुदाई के दौरान अजगर का एक हिस्सा दिखाई देने लगा। दो लोगों ने उसकी पूंछ पकड़कर खींचा, लेकिन अजगर भी पूरी ताकत से प्रतिरोध करता रहा। काफी मशक्कत और सतर्कता के बाद अजगर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अजगर का आकार और वजन देखकर ग्रामीण हैरान रह गए। सर्पमित्र सूर्यकांत साहू ने बताया कि यह अब तक का सबसे भारी अजगर है, जिसे उठाने में तीन लोगों की मदद लेनी पड़ी। अजगर को रातभर सुरक्षित रखा गया और शनिवार सुबह जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ने की तैयारी की गई। अजगर के सुरक्षित रेस्क्यू से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और सर्पमित्र व जेसीबी ऑपरेटर की सराहना की।











 

धान उपार्जन में पारदर्शिता के लिए राज्यभर में सघन कार्रवाई तेज

14-Jan-2026
  धमतरी।  ( शोर संदेश )  जिले में धान उपार्जन में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के आपरेटर एवं समिति प्रबंधक को सेवा से पृथक कर दिया गया है। प्रशासन की टीम द्वारा उक्त समिति में धान उपार्जन की व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान मिलावटयुक्त धान, टोकन का दुरुपयोग एवं अवैध रूप से धान बेचने का मामला पकड़ में आया था।
गौरतलब है कि राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान हितैषी बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, बिक्री, मिलिंग अनियमितताओं तथा बिचौलियों के विरुद्ध सतत एवं कठोर कार्रवाई की जा रही है। शासन की मंशा है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही प्राप्त हो और व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जाए। धमतरी जिले में मोहदी समिति के प्रबंधक एवं ऑपरेटर की बर्खास्तगी, धान उपार्जन की व्यवस्था में गड़बड़ी करने के परिणाम स्वरूप की गई है। 
आज 13 जनवरी 2026 को धमतरी सहित बलौदाबाजार-भाटापारा, सरगुजा, महासमुंद जिले में भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम बिलारी (सोनाखान) में अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन को जब्त कर पुलिस थाना सलीहा बिलाईगढ़ के सुपुर्द किया गया।
सरगुजा जिले में कलेक्टर के निर्देशन में राइस मिलों का सघन भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में राजेश राइस मिल खोडरी एवं सिद्धीविनायक राइस मिल दरिमा में धान की  कमी पाई गई। कस्टम मिलिंग आदेश 2016 के उल्लंघन तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत संबंधित मिलों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इसी तरह महासमुंद जिले में संयुक्त टीम द्वारा अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कुल 217 कट्टा धान एवं एक पिकअप वाहन जब्त किया गया। अवैध परिवहन एवं भंडारण के मामलों में मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।










 

50 वर्षों बाद धमतरी के आदिवासी अंचल में लौटी रबी खेती, रागी उत्पादन से बदली तस्वीर

13-Jan-2026
  धमतरी  ( शोर संदेश )   धमतरी जिले के वनाच्छादित एवं आदिवासी बहुल उच्चहन क्षेत्र में कृषि के इतिहास में एक नई इबारत जुड़ गई है। गंगरेल बांध के ऊपरी क्षेत्र में स्थित ग्राम डांगीमांचा और खिड़कीटोला में लगभग 50 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रबी सीजन में संगठित रूप से खेती की शुरुआत की गई है। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि सुधार एवं विस्तार कार्यक्रम “आत्मा” योजना के तहत इन दोनों गांवों में कुल 35 एकड़ रकबा में लघु धान्य फसल रागी (मिलेट) की खेती की जा रही है।
विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्चहन क्षेत्र में रागी की खेती की पहल को ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में पोषणयुक्त लघु धान्य फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आत्मा योजना के माध्यम से कृषकों को आधुनिक तकनीक, SMI (Systematic Millets Intensification) पद्धति और बीज उत्पादन की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में मिलेट आधारित खेती का विस्तार करते हुए किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किए जाने की योजना है।
विगत सप्ताह जिले में आयोजित मिलेट महोत्सव के बाद आज आत्मा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम स्तर पर कृषक पाठशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत तुमराबहार के सरपंच श्री दीपक राम ध्रुव, संबंधित विभागीय अधिकारी, 40 महिला कृषक एवं 32 पुरुष कृषक उपस्थित रहे।
कृषक पाठशाला में रागी फसल की उन्नत खेती से जुड़ी SMI पद्धति, बीज उत्पादन, फसल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण तथा उत्पादन लागत कम कर अधिक लाभ अर्जित करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही रागी के पोषण एवं स्वास्थ्य लाभ तथा इसकी बाजार संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान कृषकों को मिलेट आधारित आजीविका सुदृढ़ीकरण, जलवायु अनुकूल खेती और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित कृषकों ने क्षेत्र में रागी की खेती के सफल प्रयोग को भविष्य में और अधिक विस्तार देने की सहमति व्यक्त की।







 

धमतरी की ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने एनआईटी रायपुर को DSIR की STREE परियोजना स्वीकृत

06-Jan-2026
धमतरी ।  ( शोर संदेश ) ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण एवं  विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर को STREE (महिलाओं की आर्थिक वृद्धि को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों के माध्यम से कौशल विकास) परियोजना स्वीकृत की है। इस परियोजना की स्वीकृति का हस्ताक्षर समारोह 4 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह की गरिमामय उपस्थिति रही।
यह पहल एनआईटी रायपुर की कंपनी एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (NITRRFIE) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की A2K+ योजना के अंतर्गत महिलाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास एवं उपयोग कार्यक्रम (TDUPW) के तहत समर्थित इस परियोजना के लिए 36 माह की अवधि हेतु 90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिला कौशल उपग्रह केंद्रों की स्थापना करना है, जिसके माध्यम से तीन वर्षों में 300 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना को धमतरी जिला प्रशासन से अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, गजेंद्र सिंह ठाकुर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत, डॉ. शैलेंद्र सिंह, सहायक निदेशक, CSSDA एवं जिला अधिकारी, तथा श्री जय वर्मा, DPM, CGSRLM शामिल हैं, जो स्थानीय समन्वय एवं व्यापक जनपहुंच सुनिश्चित करेंगे।
एनआईटी रायपुर की ओर से इस परियोजना का मार्गदर्शन निदेशक डॉ. एन. वी. रामना राव द्वारा किया जा रहा है।परियोजना का नेतृत्व डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, सहायक प्राध्यापक एवं प्रधान अन्वेषक कर रहे हैं। उनके साथ पवन कटारिया, सहायक कुलसचिव एवं सह-प्रधान अन्वेषक एवं प्रभारी अधिकारी, NITRRFIE के रूप में जुड़े हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की ओर से डॉ. विपिन शुक्ला, वैज्ञानिक-जी एवं सलाहकार तथा A2K+ के प्रमुख, तथा डॉ. वंदना कालिया, वैज्ञानिक ‘एफ’ इस परियोजना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
समारोह में डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, सहायक प्राध्यापक, एनआईटी रायपुर एवं STREE परियोजना के प्रधान अन्वेषक उपस्थित थे, जो शिक्षा जगत, सरकार एवं जिला प्रशासन के बीच सुदृढ़ सहयोग का प्रतीक है।
STREE परियोजना ग्रामीण महिलाओं के समग्र कौशल विकास पर केंद्रित रहेगी। इसके अंतर्गत कोसा (कोकून) रेशम से फाइबर निष्कर्षण एवं प्रसंस्करण, आधुनिक बुनाई तकनीकें, उत्पाद डिजाइन एवं विकास, उद्यमिता विकास कार्यक्रम तथा बाजार संपर्क सहायता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल विशेष रूप से हाशिये पर बसे एवं कृषि-आधारित समुदायों को लक्षित करती है, जिसका उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों का सृजन और सतत आजीविका के नए अवसर प्रदान करना है।
एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि –
“केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की विशिष्ट उपस्थिति में STREE परियोजना की स्वीकृति का समारोह समावेशी नवाचार और महिला सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में एनआईटी रायपुर के लिए एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। STREE परियोजना ग्रामीण महिलाओं के लिए सतत और स्केलेबल समाधान बनाने हेतु अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को जमीनी स्तर के विकास के साथ एकीकृत करने की हमारी दृष्टि को साकार करती है।”
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि “STREE (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना का एनआईटी रायपुर को स्वीकृत होना छत्तीसगढ़, विशेषकर धमतरी जिले की ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। महिला कौशल उपग्रह केंद्रों की स्थापना तथा अगले तीन वर्षों में 300 ग्रामीण महिलाओं को कोसा रेशम फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता और बाजार संपर्क जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर यह पहल महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व में विकास और समावेशी प्रगति की हमारी दृष्टि के अनुरूप है।”


 

विशेष लेख :धमतरी जिला: वर्ष 2025 में विकास की सशक्त यात्रा

01-Jan-2026
धमतरी ।  ( शोर संदेश ) वर्ष 2025 धमतरी जिले के लिए समग्र, समावेशी एवं सतत विकास का स्वर्णिम अध्याय बनकर उभरा। दूरदर्शी जिला प्रशासन, संवेदनशील शासन व्यवस्था तथा राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी समन्वय से जिले ने अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, कृषि उन्नयन, सामाजिक सशक्तिकरण और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं। यह वर्ष विकास को केवल आँकड़ों तक सीमित न रखकर जन-जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक सिद्ध हुआ।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संपर्क सुदृढ़ करने हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राज्य मद एवं अन्य योजनाओं के अंतर्गत नई सड़कों का निर्माण तथा जर्जर सड़कों का उन्नयन किया गया। दूरस्थ ग्रामों को मुख्य मार्गों से जोड़ने से आवागमन सुगम हुआ, वहीं व्यापार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक आमजन की पहुँच सशक्त हुई। पुल-पुलियों के निर्माण से वर्षा ऋतु में भी निर्बाध यातायात सुनिश्चित हुआ।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुँचाने की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की गई। नवीन जलापूर्ति योजनाओं, पाइपलाइन विस्तार एवं पेयजल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण से शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इससे जलजनित रोगों में कमी आई और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
अमृत सरोवर योजना, तालाब गहरीकरण, चेकडैम, स्टॉपडैम तथा वर्षा जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इन प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार हुआ और कृषि, पशुपालन एवं पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति को दीर्घकालिक आधार मिला।
समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन को पारदर्शी, तकनीक-आधारित एवं सुचारू बनाते हुए रिकॉर्ड मात्रा में खरीदी की गई तथा किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया गया। नहरों की मरम्मत, जलाशयों के सुदृढ़ीकरण एवं सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के विस्तार से रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों को प्रोत्साहन मिला।
फसलचक्र परिवर्तन के अंतर्गत दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मखाना एवं औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा दिया गया, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ जल उपयोग दक्षता में भी सुधार हुआ।
फल एवं सब्जी उत्पादन, ड्रिप सिंचाई, पौधरोपण तथा कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उद्यानिकी को सशक्त किया गया। औषधीय पौधों एवं मखाना खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों को वैकल्पिक एवं टिकाऊ आय स्रोत उपलब्ध कराए गए।
PM JANMAN एवं अन्य विशेष योजनाओं के माध्यम से आदिवासी अंचलों में छात्रावास, आवास, पेयजल एवं शिक्षा सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया। दूरस्थ क्षेत्रों की बालिकाओं हेतु सुरक्षित छात्रावासों की स्वीकृति से शिक्षा में सहभागिता बढ़ी और सामाजिक सशक्तिकरण को ठोस आधार मिला।
विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, स्मार्ट क्लास, छात्रवृत्ति योजनाएँ एवं छात्रावास व्यवस्था से शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ हुआ। वीर बाल दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का विकास किया गया।
प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अधोसंरचना एवं चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान भारत योजना तथा नियमित स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हुईं।
पर्यटन स्थलों के विकास एवं सुविधाओं के विस्तार से जिले की पर्यटन क्षमता को नई पहचान मिली। को-वर्किंग स्पेस, स्टार्टअप मीटअप एवं नवाचार गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता एवं रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली।
वर्ष 2025 में जिले को प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी प्रशासन एवं नवाचार आधारित पहल के लिए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुए।
 जल संरक्षण हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार
 PM Excellence Award
PM JANMAN के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार
स्वस्थ पंचायत हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार-ग्राम पंचायत हरदीभाटा
इन सम्मानों ने धमतरी को एक सुशासित, नवाचारी एवं प्रगतिशील जिले के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
वर्ष 2025 धमतरी जिले के लिए संतुलित, समावेशी एवं दीर्घकालिक विकास का वर्ष सिद्ध हुआ। यह प्रगति केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, मानव संसाधन विकास एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर बनी। आने वाले वर्षों में ये उपलब्धियाँ धमतरी को समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं आदर्श जिला बनाने की सुदृढ़ नींव रखेंगी।
 

नगरी अंचल में हरित क्रांति की नींवः फुटहामुड़ा नहर से 22 गांवों को मिलेगी स्थायी सिंचाई

31-Dec-2025
 धमतरी । ( शोर संदेश ) जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज़ी से मूर्त रूप ले रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबी यह नहर परियोजना नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। परियोजना के पूर्ण होने से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा बढ़ेगा, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता और आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक स्तर पर भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गई हैं। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूरा हो चुका है, वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है। इन स्वीकृतियों के बाद निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख बाधाएं समाप्त हो गई हैं और कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है।
जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अनुसार, यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होने से कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
ज्ञात हो कि फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों को दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हो, ताकि यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा दे सके। उल्लेखनीय है कि हाल ही में उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति, तकनीकी पहलुओं और आवश्यक संसाधनों की समीक्षा की गई थी। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना को नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।



 

धान से आगे सोच: मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर

31-Dec-2025
धमतरी। ( शोर संदेश ) कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई। 
ख़ास कर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
इस अवसर पर शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।
बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।
उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।
आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

ऑनलाइन टोकन से ट्रैक्टर तक : पोटियाडीह के किसान तोरण पटेल की खुशहाल खेती

24-Dec-2025
धमतरी,। ( शोर संदेश )  धमतरी जिले के ग्राम पोटियाडीह में इन दिनों खेतों के साथ-साथ किसानों के चेहरों पर भी हरियाली साफ झलक रही है। वजह है-समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारु, पारदर्शी और किसान-हितैषी व्यवस्था। गांव के किसान तोरण पटेल आज राहत की सांस लेते हुए कहते हैं कि अब धान बेचने के लिए न लंबी कतारों का झंझट है, न अनिश्चितता की चिंता।
किसान तोरण पटेल के पास लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि है। इस खरीफ सीजन में वे 79 क्विंटल धान लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि शासन की ऑनलाइन टोकन व्यवस्था ने उनकी सबसे बड़ी परेशानी दूर कर दी है। समय पर टोकन मिलने से न केवल भीड़ से बचाव हुआ, बल्कि पूरा काम तय समय में आसानी से हो गया। “अब खेत का काम छोड़कर दिन-दिन भर लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती,” वे मुस्कराते हुए कहते हैं।
पिछले वर्ष की बात करें तो पटेल ने 168 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था। समय पर मिले भुगतान से उन्होंने एक बड़ा सपना पूरा किया-ट्रैक्टर की खरीदी। इससे खेती का काम आसान हुआ, लागत घटी और उत्पादकता बढ़ी। साथ ही, सहकारी समिति से खाद-बीज की व्यवस्था भी सहजता से हो गई, जिससे फसल की तैयारी समय पर संभव हो सकी।
दसवीं तक शिक्षा प्राप्त तोरण पटेल मानते हैं कि आज खेती केवल मेहनत नहीं, बल्कि योजना, तकनीक और सरकारी सहयोग का परिणाम है। वे कहते हैं कि शासन की योजनाओं से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और हर काम समय पर पूरा हो रहा है। उपार्जन केंद्रों में पेयजल, छाया, तौल, भुगतान और मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं से किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
पटेल ने इन सभी व्यवस्थाओं के लिए प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह साबित करती है कि जब नीति सही हो, व्यवस्था मजबूत हो और किसान को सम्मान मिले, तो खेती सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का रास्ता बन जाती है। यह सफलता की कहानी न केवल पोटियाडीह, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है।
 

धमतरी के किसान साहिल बैस बने ड्रेगन फ्रूट खेती के प्रेरणास्रोत

18-Dec-2025
धमतरी, ( शोर संदेश )। धमतरी जिले के ग्राम बगौद के प्रगतिशील किसान साहिल बैस आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने परंपरागत फसलों से आगे बढ़ते हुए अपने खेत में ड्रेगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती अपनाई है। वर्तमान में बैस ने लगभग दो एकड़ क्षेत्र में ड्रेगन फ्रूट का रोपण किया है, जो जिले में नवाचारी बागवानी का सशक्त उदाहरण है। यह कैक्टस परिवार का पौधा है|
किसान साहिल बैस बताते हैं कि ड्रेगन फ्रूट की खेती उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से शुरू की। एक एकड़ में लगभग 1600–1800 पौधे  कटिंग कर सीमेंट/लोहे के खंभों पर चढ़ाकर उगाया ।  प्रारंभिक वर्ष में संरचना निर्माण, पौध क्रय एवं देखरेख पर निवेश अधिक होने के कारण पिछले वर्ष “नो प्रॉफिट-नो लॉस” की स्थिति रही, किंतु पौधों के परिपक्व होने के साथ ही आने वाले वर्षों में अच्छा मुनाफा मिलने की पूरी संभावना है। 
पैदावार और मुनाफा: औसत उत्पादन: 8–10 टन प्रति एकड़ | बाजार भाव: ₹150 से ₹300 प्रति किलो (सीजन व गुणवत्ता पर निर्भर)लागत पहले वर्ष अधिक, बाद के वर्षों में मुनाफा बढ़ता है
उत्पादन कब शुरू होता है| रोपण के 12–18 महीने बाद फल आना शुरू  होता है । 20–25 साल तक उत्पादन देता है| एक पौधे से 3–5 किलो फल/वर्ष (अच्छी देखभाल में अधिक)
कृषक बैस ने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई है, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ पौधों को आवश्यकतानुसार नमी मिलती है। यह फसल जल संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है। सामान्यतः 7–10 दिन में हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है, जिससे सिंचाई लागत कम होती है।
ड्रेगन फ्रूट की खेती में अच्छी जल निकास वाली रेतीली-दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। यह फसल उष्ण एवं अर्ध-शुष्क जलवायु में अच्छी तरह पनपती है। रोपण के लगभग 12 से 18 माह बाद पौधों में फल आना शुरू हो जाता है, जबकि 3–4 वर्षों में पूर्ण उत्पादन क्षमता प्राप्त हो जाती है। एक पौधे से औसतन 3 से 5 किलोग्राम फल प्राप्त किया जा सकता है।
बाजार की बात करें तो ड्रेगन फ्रूट की शहरी एवं स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं में तेजी से मांग बढ़ रही है। यह फल पोषक तत्वों, फाइबर एवं एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण उच्च मूल्य पर बिकता है। वर्तमान में स्थानीय बाजारों के साथ-साथ थोक व्यापारियों से भी अच्छे दाम मिलने की संभावना रहती है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
रख-रखाव की दृष्टि से यह फसल अपेक्षाकृत कम रोग-कीट प्रभावित होती है। समय-समय पर छंटाई, सहारा व्यवस्था (पिलर सिस्टम) एवं जैविक खाद का उपयोग कर उत्पादन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
किसान साहिल बैस की यह पहल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सिद्ध करता है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, कम पानी वाली फसलें एवं बाजार मांग को ध्यान में रखकर खेती करें, तो कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। ड्रेगन फ्रूट जैसी उन्नत बागवानी फसलें भविष्य में किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती हैं।
बीते दिनों कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ड्रेगन फ्रूट की खेती देखी । किसान साहिल का उत्साहवर्धन किया। 
साहिल बैस की यह पहल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सिद्ध करता है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, कम पानी वाली फसलें एवं बाजार मांग को ध्यान में रखकर खेती करें, तो कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। ड्रेगन फ्रूट जैसी उन्नत बागवानी फसलें भविष्य में किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती हैं।
 


+ Load More

kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account