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किसान

शासन की योजनाओं से सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करता किसान*

19-Nov-2020

00 कर्जमाफी योजना से जिले के किसानों का हुआ 18 करोड़ हुआ
नारायणपुर (शोर सन्देश) खेती-किसानी छत्तीसगढ़ का आधार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में खेती को लाभ का व्यावसाय बनाने के प्रयास सरकार बनते ही प्रारंभ किये थे। सरकार बनते ही किसानों की कर्जमाफी, 2500 रुपया प्रति क्विंटल में धान खरीदी, सिंचाई कर माफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सिंचाई क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर खेती का सिंचित रकबा बढ़ाना, किसानों के लिए किये गये प्रयासों के बदौलत ही आज छत्तीसगढ़ का किसान सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और किसान इस सरकार को अपनी सरकार महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री की मंशा एवं कोशिश है कि उत्पादन लागत न्यूनतम हो और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों के विश्वास और खुशहाली का छत्तीसगढ़ है, जहां मुख्यमंत्री बघेल कृतसंकल्पित होकर किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं। कोरोनाकाल के बावजूद किसानों की समस्याओं को सुनने मुख्यमंत्री राज्य के किसी भी कोने में किसानों के बीच पहुँच जाते हैं। दरअसल हमारा छत्तीसगढ़ गांवों का प्रदेश है, यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है। मुख्यमंत्री स्वयं किसान परिवार से संबंध रखते हैं और किसानों की समस्याओं के निराकरण को लेकर वे हमेशा से बेहद संवेदनशील रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश के किसानों ने बीते कुछ वर्षों में सफलता के कीर्तिमान गढ़े हैं और अब किसान कल्याण और कृषि उत्पादन में प्रदेश का नाम देश के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जाने लगा है।
इस समय समूचा विश्व कोरोना की महामारी को झेल रहा है। इसका प्रभाव हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर भी पड़ा है और समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौती का समय होने के बाद भी किसानों के हितों पर कोई आँच आए, इसका ध्यान मुख्यमंत्री द्वारा बखूबी रखा जा रहा है। कोरोना काल के समय किसानों को किसी प्रकार की समस्या हो इसके लिए विभिन्न योजनाओं की राशि का ऑनलाइन अंतरण करते रहे हैं। वास्तव में किसानों के हितों की रक्षा के लिये मुख्यमंत्री सदैव संकल्पित रहे हैं और यह उनकी नीतियों में भी निरंतर प्रतिबिंबित होती है। उनकी सरकार की प्राथमिकता किसान का हित है और वे हर परिस्थिति में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
00 कर्जमाफी योजना से जिले के किसानों का करोड़ों रुपया हुआ माफ पूरे प्रदेश में किसानों के सहकारी एवं सार्वजनिक बैंकों के अल्पकालीन कृषि ऋण माफी करने के निर्णय से लाखों किसान लाभान्वित हुए। प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसानों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना पर अमल उपरांत जिले के 4102 किसानों के 18 करोड़ से अधिक का कर्ज माफ किया गया।
00 राजीव गांधी किसान न्याय योजनाः जिले के 3600 से ज्यादा किसानों के खातों में 8 करोड़ से अधिक राशि हुआ ट्रांसफर
राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि रकबे में वृद्धि करने के उद्देश्य से राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुवात पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर की गई। इस योजना के जरिये किसानों को आदान सहायता के रूप में राशि उपलब्ध कराई जाएगी। नारायणपुर जिले के 3600 से अधिक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से 3 किश्तों में 8 करोड़ से अधिक रूपये का भुगतान किया गया। न्याय योजना से किसानों में आई समृद्धि से वे अपने कृषि कार्य का विस्तार कर रहे हैं। किसानों के परिवारों मे खुशी का माहौल है। कोरोना संक्रमण काल में भी किसानों को किसी प्रकार की आर्थिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।
00 गोधन न्याय योजनाः 1538 पशुपालक हितग्राहियों को मिला 6 लाख से अधिक रुपये राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुराजी गांव योजना लागू की गई है। देश दुनियां में पहली बार गोबर की खरीदी के लिए गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ की सरकार ने शुरू की। सरकार के इस साहसिक कदम ने पशुपालकों को आर्थिक संबल दिया। गांवों में गौठान और रोका-छेका की व्यवस्था ने दूसरी और तीसरी फसल की राह खोल दी। गोधन न्याय योजना के माध्यम से जिले के गौठानों के माध्यम से गोबर खरीदी की जा रही है। जिले में अब तक 1538 पशुपालक हितग्राहियों से 3236.59 क्विंटल गोबर की खरीदी कर 6 लाख 47 हजार रूपये का भुगतान किया जा चुका है।
00 सिंचाई कर माफ कर किसानों को दिया तोहफाः  राज्य सरकार ने जिले के 1133 किसानों के 7 लाख 79 हजार रूपये का सिंचाई कर माफ कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती भी प्रदान की है। सरकार के इन फैसलों में यह साफ झलकता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सिर्फ किसानों की चिंता है बल्कि एक किसान परिवार से होने के कारण किसानों की इन तकलीफों को भी वे बेहतर तरीके से जानते हैं। वे एक किसान पुत्र होने के कारण किसानों की वास्तविक तकलीफों को श्री बघेल बेहतर तरीके से समझते हैं। सरकार के इस कदम ने किसानों के लिए आर्थिक मंदी के इस दौर में एक नया रास्ता खोल दिया है। किसान के लिए आज बाजार बड़ा और व्यापक होता दिख रहा है। 


कृषि विस्तार अधिकारी ने बताया खाद बनाने का तरीका*

28-Oct-2020

लवन (शोर सन्देश) ग्राम पंचायत तुरमा में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी प्रमुख योजन गो धन्य योजना के तहत गोबर से खाद बनाने के लिए आरियो खेमन सिंह कंडरा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) ने आज गौठान पहुच कर महिला समूह को वेस्ट डीकंपोसर का घोल बनाने का तरीका बताया। जिसमे 200 लीटर पानी मे 2 किलो गुड़,1 डीब्बा वेस्ट डी कंमपोजर का घोल बनाया गया और वेस्ट मटेरियल को अवघटित करने के तरीका बताया। इसे समूह के सदस्यों ने उपस्थित होकर सीखे। इस दौरान आरियो खेमन सिंह कंडरा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) नंदराम देवांगन (अध्यक्ष गौठान समिति ) रमला ध्रुव (सरपंच ग्राम पंचायत तुरमा) टीकम चंद टंडन,करण ध्रुव (सरपंच पति), मानकुमारी साहू, अनिता ध्रुव गोरी बाई निसाद, पलेसवारी, पूनम चंद, साहेब लाल उपस्थित थे। 


छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020, जाने विशेषता*

28-Oct-2020

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में आज छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। कृषि मंत्री ने चर्चा के दौरान इस संशोधन विधेयक के उद्देश्य और कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश में 80 प्रतिशत लघु एवं सीमांत कृषक हैं। लघु एवं सीमांत कृषकों की कृषि उपज भण्डारण तथा मोल-भाव की क्षमता नहीं होने से, बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव तथा भुगतान की जोखिम को दृष्टिगत रखते हुए, उनकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर सही कीमत, सही तौल तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने हेतु डीम्ड मंडी तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना किया जाना कृषक हित में आवश्यक हो गया है। 00 विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक, 2020 एक नजर में -
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 को और संशोधित करने हेतु विधेयक। भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो-
00 संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम 2020 कहलाएगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा।
(3) यह दिनांक 5 जून 2020 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त होगा।
00 धारा दो का संशोधन :
2. छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम 1972 (क्र.24 सन 1973) (जो इसमें इसके पश्चात मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 की उपधारा (1) में,-
(एक) खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
() ’कृषि उपजसे अभिप्रेत है कृषि, उद्यान कृषि, पशुपालन, मधुमक्खीपालन, मत्स्यपालन या वन संबंधी समस्त उत्पादन, चाहे वह प्रसंस्कृत या विनिर्मित हो या हो, जो कि अनुसूची में विनिर्दिष्ट है,‘
(दो) खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
() मण्डी/डीम्ड मंडी से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन स्थापित की गई मण्डी/डीम्ड मंडी,‘
00 धारा चार का संशोधन :
3. मूल अधिनियम की धारा 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए अर्थात,-
4. मण्डी/डीम्ड मंडी की स्थापना तथा उसमें अधिसूचित कृषि उपज के विपणन का विनियम- (1) धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि का अवसान होने के पश्चात और ऐसी आपत्तियों तथा सुझावों पर, जो ऐसे अवसान के पूर्व प्राप्त हुए हो, विचार करने के पश्चात तथा ऐसी जांच, यदि कोई हो, जो आवश्यक हो, करने के पश्चात, राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा धारा 3 के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए गए क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के संबंध में मण्डी स्थापित कर सकेगी और इस प्रकार स्थापित की गई मण्डी ऐसे नाम से जानी जाएगी, जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।
(2) राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के क्रय-विक्रय, प्रसंस्करण या विनिर्माण, कोल्ड स्टोरेज, साइलोज, भण्डागार, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग तथा लेन-देन प्लेटफार्म और ऐसे अन्य स्थान अथवा संरचनाओं को, डीम्ड मंडी घोषित/स्थापित कर सकेगी, जो कि उपधारा (1) के अधीन स्थापित मंडी की डीम्ड मंडी के नाम से जानी जाएगी। डीम्ड मंडी स्थापित किए जाने हेतु धारा 3 की उपधारा (1) एवं (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे
00 धारा 19 का संशोधन :
4. मूल अधिनियम की धारा 19 की उपधारा (1) के खण्ड (दो) के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
(तीन) अधिसूचित कृषि उपज, चाहे वे राज्य के भीतर से या राज्य के बाहर से किसी मंडी प्रांगण या उप मंडी प्रांगण या विशेष वस्तु मंडी प्रांगण या टर्मिनल मार्केट कॉम्प्लेक्स या डीम्ड मंडी में विक्रय के लिए लाई गई हो, के विक्रय या वितरण और प्रसंस्करण तथा विनिर्माण में उपयोग में लाए जाने पर या प्रसंस्करण तथा विनिर्माण के पश्चात विक्रय किए जाने पर
00 नवीन धारा 20- का अन्तःस्थापन :
5. मूल अधिनियम की धारा 20 के पश्चात निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात
‘20- कृषक/विक्रेता हित संरक्षण की दृष्टि से लेखे पेश करने हेतु आदेश देेने की शक्ति और प्रवेश, निरीक्षण तथा अभिग्रहण की शक्तियां-
(1) मण्डी समिति का सचिव या बोर्ड या मण्डी समिति का कोई भी अधिकारी या सेवक, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा सशक्त किया गया हो तथा इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी या सेवक, किसी ऐसे व्यक्ति से, जो किसी भी किस्म की अधिसूचित कृषि उपज का व्यापार करता हो, विक्रेता/कृषक से, क्रय कृषि उपज के संबंध में, यह अपेक्षा कर सकेगा कि अधिसूचित कृषि उपज के क्रय विक्रय से संबंधित लेखे, तथा अन्य दस्तावेज या प्रारूप, जैसा कि अधिसूचना द्वारा विहित किया जाए, संधारित करे और कोई ऐसी जानकारी दे, जो ऐसी कृषि उपज के क्रय, विक्रय तथा परिदान से संबंधित हो।
(2) किसी अधिसूचित कृषि उपज के व्यापार के संबंध में अधिसूचना के अनुसार संधारित समस्त लेखे तथा रजिस्टर और ऐसी कृषि उपज के क्रयों, विक्रयों तथा परिदानों से संबंधित दस्तावेज, प्रारूप, जो उसके कब्जे में हो, और ऐसे व्यक्ति के कार्यालय, व्यापार के स्थान, भण्डागार, स्थापना, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहनों का निरीक्षण, मण्डी समिति या बोर्ड के सचिव या मंडी समिति के किसी अधिकारी या सेवक तथा राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित अधिकारी या सेवक के द्वारा किया जा सकेगा।
(3) यदि किसी ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह संदेह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में लेखे एवं दस्तावेज प्रारूप संधारित नहीं करता या मिथ्या लेखे संधारित कर रहा है, तो वह कारणों को लेखबद्ध करते हुए, ऐसे व्यक्ति के ऐसे लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप तथा अधिसूचित कृषि उपज जैसा कि आवश्यक हो, अभिग्रहित कर सकेगा तथा उनके लिए एक रसीद देगा और उन्हें तब तक रखे रहेगा, जब तक कि वे उनकी परीक्षा के लिए या अभियोजन के लिए आवश्यक हो।
(4) उप धारा (2) या उपधारा (3) के प्रयोजनों के लिए ऐसा अधिकारी या सेवक किसी भी व्यापार के स्थान, भण्डागार, कार्यालय, स्थापना, गोदाम, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहन में, जिसके संबंध में ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उनमें ऐसा व्यक्ति अपने व्यापार के लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप या अपने व्यापार के संबंध में अधिसूचित कृषि उपज के स्टॉक रखता है या तत्समय रखा है, प्रवेश कर सकेगा या तलाशी ले सकेगा।
(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 100 के उपबन्ध, यथाशक्य उपधारा (4) के अधीन तलाशी के लिए लागू होंगे।
(6) जहां कोई लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप किसी स्थान से अभिग्रहित की जाए और उनमें ऐसी प्रविष्टयां हो जो विक्रेता/कृषक से क्रय अधिसूचित कृषि उपज के परिमाण (मात्रा), क्रय करार, दरों, तौल तथा भुगतान से संबंधित हों, वहां ऐसी लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप उन्हें साबित करने के लिए, साक्षी के उपसंजात हुए बिना ही, साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जाएगी और ऐसी प्रविष्टियां, उन मामलों में, संव्यवहारों तथा लेखाओं की, जिनका कि उनमें अभिलिखित होना तात्पर्यित हैं, प्रथम दृष्टया साक्ष्य होगी।
(7) अधिसूचित कृषि उपज के क्रय-विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप मिथ्या पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध तथा अभिग्रहित अधिसूचित कृषि उपज के लिए मंडी समिति के सचिव या राज्य सरकार या बोर्ड या मण्डी समिति के कोई भी अधिकारी या सेवक, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो, के द्वारा वाद दायर किया जा सकेगा।
00 धारा 36 का संशोधन :
6. मूल अधिनियम की धारा 36 के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
36-. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म - (1) राज्य सरकार, अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय में कृषक/विक्रेता को अपने उत्पाद को स्थानीय मंडी के साथ-साथ प्रदेश की अन्य मंडियों तथा अन्य राज्यों के व्यापारियों को गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से विक्रय कर बेहतर कीमत प्राप्त करने तथा समय पर आनलाईन भुगतान हेतु इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना कर सकेगी।
(2) इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म में अधिसूचित कृषि उपज के पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया तथा आनलाईन भुगतान राज्य सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
00 धारा 49 का संशोधन :
7. मूल अधिनियम की धारा 49 की उप धारा (4) के पश्चात निम्नलिखित जोड़ा जाए अर्थात,-
‘(4-) यदि कोई व्यक्ति, जिसे अधिसूचित कृषि उपज के क्रय एवं विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तिका या अन्य दस्तावेज, प्रारूप के संबंध में जानकारी देने के लिए धारा 20- के अधीन अपेक्षित किया जाए।
() कोई जानकारी देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या कोई जानकारी देने से इंकार करेगा या
() मिथ्या जानकारी या जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा, या 

() लेखा-पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप में संधारित मात्रा से अधिक या कम अधिसूचित कृषि उपज रखता हो, तो वह दोष सिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि 3 मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन की दशा में, कारावास से, जो 6 मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दस हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।‘ 


पांच आदिवासी किसानों ने बदली बंजर जमीन और खुद की किस्मत*

28-Oct-2020

0आम का ऐसा उत्पादन कि थोक व्यापारी खेत से ही खरीद लेते हैं फल
रायपुर (शोर सन्देश). सहकारिता की भावना के साथ एक सूत्र में बंधकर आगे बढ़ने की मिसाल है जशपुर जिले का सुरेशपुर गांव। वहां के पांच आदिवासी किसानों ने अपनी एक-दूसरे से लगती जमीन को मिलाकर करीब पांच हेक्टेयर के चक में कुछ साल पहले मनरेगा से आम का बगीचा तैयार किया था। इस बगीचे से पिछले तीन सालों में आठ लाख 70 हजार रूपए की आमदनी इन किसानों को हो चुकी है। आम बेचने के साथ सब्जियों की अंतरवर्ती खेती कर वे दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं। ये किसान अब गांव में फल उत्पादक किसान के रुप में भी पहचाने जाने लगे हैं। जशपुर जिला मुख्यालय से 96 किलोमीटर दूर सुरेशपुर एक आदिवासी बाहुल्य गांव है। पत्थलगांव विकासखण्ड के इस गांव के 45 वर्ष के आदिवासी किसान श्री मदनलाल को अपनी लगभग ढाई हेक्टेयर की पड़ती (बंजर) जमीन पर कुछ भी नहीं उगा पाने का काफी दुख था। रोजगार सहायक और ग्राम पंचायत की सलाह पर उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सहायता से सामुदायिक फलोद्यान लगाने एवं उनके बीच अंतरवर्ती खेती के रुप में सब्जियों के उत्पादन का निश्चय किया। मदनलाल ने पंचायत की सलाह पर तुरंत अपनी कृषि भूमि से लगते अन्य किसानों श्री बुधकुंवर, मोहन, मनबहाल और हेमलता से चर्चा कर सामुदायिक फलोद्यान से होने वाले फायदों के बारे में बताया।
चूंकि इन सभी किसानों की आधे से लेकर एक हेक्टेयर तक की कृषि भूमि मदनलाल की कृषि भूमि से लगती थी और भूमि पड़ती होने के कारण सभी के लिए लगभर अनुपयोगी थी। इसलिए सभी ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। आखिरकार मदनलाल की मेहनत रंग लाई और ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर नौ लाख 48 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ सामुदायिक फलोद्यान रोपण का मार्ग प्रशस्त हो गया। मनरेगा के अभिसरण से उद्यानिकी विभाग ने वर्ष 2013-14 में मदनलाल सहित पांचों किसानों की जमीन को मिलाकर 4.6 हेक्टेयर के एक चक पर आम के सामुदायिक फलोद्यान का रोपण कराया। करीब आठ लाख रूपए की लागत से आम की दशहरी प्रजाति के 1300 पौधे रोपे गए। इस काम को पांचों हितग्राही परिवारों के साथ गांव के 67 श्रमिकों ने मिलकर पूरा किया। मनरेगा के अंतर्गत सभी मजदूरों को कुल 3617 मानव दिवस रोजगार के एवज में पौने छह लाख रूपए से अधिक का मजदूरी भुगतान किया गया।  किसानों ने आम बेचकर कमाए 5.70 लाख, सब्जियों से 3 लाख की कमाई  उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आम के इस फलोद्यान से पांचों किसानों ने पिछले तीन सालों में आठ लाख 70 हजार रूपए कमाए हैं। आम की बिक्री से पांच लाख 70 हजार रूपए की आमदनी हुई है। वहीं अंतरवर्ती फसल के रूप में बरबट्टी, भिण्डी, करेला, मिर्च, टमाटर, प्याज और आलू की खेती से तीन लाख रूपए की अतिरिक्त कमाई हुई है। सामुदायिक फलोद्यान के फायदे साझा करते हुए इसे लगाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मदनलाल बताते हैं कि आम के इस बगीचे में उद्यानिकी विभाग ने हमारी बहुत मदद की है। विभाग ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, सब्जी क्षेत्र विस्तार, पैक हाउस, मल्चिंग शीट और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के रूप में विभागीय अनुदान सहायता उपलब्ध कराई है। हम पांचों किसानों की एकजुटता तथा मनरेगा और उद्यानिकी विभाग के तालमेल से विकसित इस फलोद्यान से तीन वर्षों में ही हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है। आमों की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण पत्थलगांव के फल व्यापारी सीधे खेतों में पहुंचकर हमसे थोक में खरीदी कर रहे हैं। 


बड़ी खबर : खरीफ सत्र में धान की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने तीन राज्यों के लिए जारी की राशि, जाने छत्तीसगढ़ को कितना मिला*

28-Sep-2020

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश) केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सर्वोच्च वित्तीय संगठन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने छत्तीसगढ़,हरियाणा और तेलंगाना राज्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रक्रिया के अंतर्गत खरीफ सत्र में धान की खरीद के लिए 19 हजार 444 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी दी। यह राशि इसलिए मंजूर की गई है ताकि राज्यों और राज्यों के मार्केटिंग महासंघों (फेडरेशनों) को अपने सहकारी संगठनों के जरिए समयबद्ध ढंग से धान की खरीद करने की प्रक्रिया में सहायता मिले। छत्तीसगढ़ के लिए सबसे अधिक यानी 9000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। हरियाणा के लिए 5444 करोड़ रुपये और तेलंगाना के लिए 5500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।  कोविड की महामारी के दौरान एनसीडीसी की ओर से पहले से उठा लिए गए इस कदम से इन तीनों रकज्यों के किसानों को बेहद जरूरी वित्तीय सहायता प्राप्त होगी देश में धान के कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत उपजाते हैं उचित समय पर उठाए गए इस कदम से राज्यों की एजेंसियां तत्काल खरीद प्रक्रिया को शुरू कर सकेंगी। इससे किसानों को सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना उत्पाद बेचने में जरूरी सहायता मिलेगी।  एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक, संदीप नाइक ने कहा कि एनसीडीसी माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुपालन में और ऐतिहासिक कृषि विधेयकों के प्रकाश में किसानों को उनके उत्पाद का अच्छे से अच्छा मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी प्रक्रिया को पूरा करने के वास्ते अन्य राज्यों को भी सहायता देने के लिए तैयार है। 


किसानों को सहज तरीके से दें नए सुधारों की जानकारी : मोदी*

25-Sep-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर के भाजपा कार्यकर्ताओं के संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के किसानों के लिए लाए गए विधेयक के तहत होने वाले सुधारों के बारे में विस्तार से बताया और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसानों के पास जाकर सहज तरीके से इस बारे में उन्हें समझाएं। प्रधानमंत्री को संबोधन के लिए स्वागत करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है और गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में एकात्म मानववाद और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास के विचार को जमीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन किया, रूप दिया। 


राज्य में यूरिया, खाद की कोई कमी नही : कांग्रेस

24-Aug-2020

00 पन्द्रह सालो से जड़ जमाये उर्वरक माफिया को फायदा पहुचाने भाजपाई कर रहे बयान बाजी
रायपुर (शोर सन्देश) प्रदेश में यूरिया की कमी की खबरों को कांग्रेस ने बेबुनियाद बताया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यूरिया की कमी की बाते एक भी किसान संगठन या किसान संघो ने नही कहा सिर्फ भाजपा नेता बयान दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रदेश में यूरिया और खाद की कमी का झूठा वातावरण तैयार करने बयान बाजी कर रहे पिछले पंद्रह सालो से राज्य में पनप चुके उर्वरक माफिया को फायदा पहुचाया जा सके ।भाजपा के पन्द्रह साल के राज में छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग खाद बीज उर्वरको की अफरातफरी में लगा हुआ था राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस उर्वरक माफिया की दुकानदारी बन्द हो गयी है इसी लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता यूरिया की कमी का बयान दे कर बनावटी संकट का माहौल बना रहे ताकि किसान हड़बड़ी में सोसायटियो से यूरिया ले कर भाजपाई माफिया से महंगे दाम में यूरिया खरीद लें। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार किसानों की हितैषी है इसलिये मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समय रहते प्रदेश की सभी जिलों की सोसायटियों में मांग के अनुरूप यूरिया और खाद की उपलब्धता करवा दी है ।देश के अनेक राज्यों में किसान यूरिया की कमी से जूझ रहे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र ,उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश हरियाणा में यूरिया की कमी को ले कर रोज बवाल हो रहा है । कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्यो को यूरिया देना केंद्र का काम है पूरे देश मे यूरिया की सप्लाई सही नही हो रही तो उसके पीछे मोदी सरकार जबाबदेह है। प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि उनकी सरकार आजादी की 75 वी वर्षगांठ 2022 तक देश मे यूरिया की कमी आधा करने की दिशा में काम कर रही है ।बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के केंद्र सरकार राज्यो में किसानी तक यूरिया की सप्लाई का कोटा अघोषित रूप से कम करना शुरू कर दिया है ताकि मोदी द्वारा घोषित यूरिया की खपत कम करने का लक्ष्य 2022 तक पूरा हो सके ।कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के किसानों से कहा कि वे फिक्र मत करे राज्य में किसान पुत्र भूपेश बघेल सत्ता में है उनके रहते छत्तीसगढ़ के किसानों का अहित नही हो सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य के सरगुजा सम्भाग में जहाँ पर यूरिया संकट का जादा झूठा हल्ला मचाया गया था वहाँ की सोसायटियो में मांग के अनुरूप 18825 एमटी यूरिया और 18204 एमटी खाद का स्टॉक एक महीने पहले से पहुच गया है कोविड के कारण सोशल डिस्टेंसिग का पालन होने सुनिश्चित करने लगवाई गयी कुछ दुकानों की कतारों को संकट बता कर भाजपाइयों ने भ्रम फैलाने की कुचेस्टा किया है। 


किसानों की उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता : नायडू*

19-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अभिनव उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआईआईए) 2020 की वर्चुअल घोषणा की। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, शिक्षा राज्य मंत्री संजय शामराव धोत्रे ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई। उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने अनुसंधानकर्ताओं और वैज्ञानिकों से कृषि पर अधिक ध्यान देने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए नवाचारों के साथ आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर श्री नायडू ने कहा कि नवप्रवर्तकों और अनुसंधानकर्ताओं का मुख्य ध्यान किसानों को विभिन्न मुद्दों के बारे में समय पर जानकारी प्रदान करने से लेकर कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं बनाने और नई प्रोद्योगिकी की आपूर्ति होना चाहिए। उन्होंने बिचौलियों द्वारा किसानों का शोषण रोकने और उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआईसीटीई, आईसीएआर, एनआईआरडी और कृषि विश्वविद्यालयों को किसानों के लिए नई नवाचार और प्रौद्योगिकी लाने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। इस अवसर पर, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, श्री पोखरियाल ने उल्लेख किया कि रैंकिंग हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर है। उनके नेतृत्व में, भारत ने नवाचार के क्षेत्र में अनेक छलांगें लगाईं। इसके अलावा, भारत को आत्?मनिर्भर बनाने के लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करते हुए, यह रैंकिंग उनकी आकांक्षाओं का एक सच्चा प्रतिबिंब है और राष्ट्र के लिए उनकी संकल्पना और सपनों को एक श्रद्धांजलि है। 


सफलता की कहानीःसामूहिक हल्दी की खेती से किसान हो रहे खुशहाल*

18-Aug-2020

रायपुर(शोर सन्देश)।राज्य सराकार प्रदेश के किसानों को संबल बनाने के लिए फसल परिवर्तन सहित अन्य अधिक आययुक्त खेती-किसनी पर जोर दे रही हैं। इसी कड़ी में कोरिया जिले के किसान हल्दी के औषधीय गुणों एवं आर्थिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की मदद से शासकीय भूमि को चिन्हाकित कर सामूहिक रूप से हल्दी की खेती कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी योजना- नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी के अंतर्गत बाड़ी विकास की संकल्पना को साकार करने के लिए जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में चयनित गौठान ग्राम सोरगा, जामपानी, कोडिमार छरछा, रोझी, कुशहा, उमझर, दुधनिया, बरबसपुर अमहर में गौठान समितियों के चयनित शासकीय भूमि और स्वयं की सामूहिक बाड़ियों में जिला पंचायत और कृषि विज्ञान केंद्र की एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अभिसरण से तकनीकी कार्ययोजना बनाकर लगभग 50 एकड़ में हल्दी की खेती की जा रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी ने बताया कि हल्दी की 10 महीने की फसल होती है। इसे अप्रैल-जून में लगाकर फरवरी-मार्च में इसे इस्तेमाल में ले सकते हैं। बीज के लिए अप्रैल तक रुक सकते है। हल्दी को मेड़ या फिर जमीन में उगा सकते है। हर पौधे के बीच 50 सेंटीमीटर और लाइन के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए। हल्दी उत्पादन से शुद्ध लाभ 90 हजार से एक लाख रूपये तक हो सकता है। एक हेक्टेयर भूमि में 5 से 6 क्विंटल बीज की जरूरत होती है, जिससे 50 से 60 क्विंटल फसल प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि हल्दी की पत्तियों से तेल निष्कासन भी किया जा सकता है। पत्तियों में 2.5 से 3 प्रतिशत तक इसेंसियल ऑइल होता है।  हल्दी में कुर्कमिन या करक्यूमिंन औषधीय तत्व पाया जाता है जिसकी वजह से हल्दी का रंग पीला होता है। हल्दी की राइजोम या गांठ का प्रयोग पाउडर में किया जाता है। वही इसकी पत्तियों में भी इरोलियल ऑइल मिलता है, जिसका उपयोग अरोमा और कास्मेटिक इंडस्ट्री में होता है। इसी महत्ता को देखते हुए जिले के अंतर्गत गौठान ग्रामों का चयन कर हल्दी उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही कृषकों को भी सामूहिक बाड़ियों में हल्दी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे कृषकों को अतिरिक्त आमदनी हो सके। 


राज्य में धान और मक्का की बुआई पूर्णता की ओर*

14-Aug-2020

00 दलहनी और तिलहनी फसलों की बुआई जारी
रायपुर (शोर सन्देश) चालू खरीफ सीजन में राज्य में धान और मक्का की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। वर्तमान में दलहनी फसलों के अंतर्गत अरहर की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है जबकि मूंग, उड़द एवं कुलथी आदि की बुआई किसान कर रहे हैं। तिलहनी फसलों के अंतर्गत मूंगफली की बुआई लगभग 87 फीसद हो चुकी है जबकि तिल, सोयाबीन, रामतिल, सूरजमुखी और अरण्डी आदि की बुआई जारी है।
राज्य में चालू खरीफ सीजन में 48 लाख 20 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 44 लाख 83 हजार 01 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 93 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य में बीते खरीफ सीजन में इसी अवधि तक 40 लाख 53 हजार 280 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी हुई थी। कृषि विभाग द्वारा राज्य में बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष धान के रकबे में एक लाख 76 हजार हेक्टेयर की कमी के साथ ही मोटे अनाज तथा दलहन और तिलहन के रकबे में दो लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा है। धान की बोनी निर्धारित लक्ष्य 37 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध अब तक 36 लाख 79 हजार 980 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो इस वर्ष के लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। इसी तरह मक्का की बोनी 2 लाख 27 हजार 500 तथा कोदो, कुटकी एवं अन्य फसलों की बोनी 57 हजार 710 हेक्टेयर में हो चुकी है जो कि इस वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का क्रमशः 96 प्रतिशत तथा 64 प्रतिशत है।
इसी तरह राज्य में दलहनी फसलों की बुआई दो लाख 48 हजार 930 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि इस वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य 3 लाख 62 हजार 920 हेक्टेयर की तुलना में 69 फीसद है। अरहर की बोनी एक लाख 30 हजार हेक्टेयर में किए जाने के विरूद्ध अब तक एक लाख 23 हजार 530 हेक्टेयर में अरहर की बोनी की जा चुकी है, जो लक्ष्य का 95 प्रतिशत है। इसी तरह तिलहनी फसलों की बुआई का क्रम जारी है। अब तक राज्य में एक लाख 54 हजार 650 हेक्टेयर में तिलहनी फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है, जो कि इस वर्ष के बुआई के लक्ष्य का 54 फीसद है।  




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