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किसान

अधिक की धान 2.30 लाख क्विंटल से खरीदी *

09-Jan-2021

 00 किसानों के बारदानों पर धान खरीदी की अनुमति

सुकमा (शोर सन्देश) राज्य शासन ने प्रदेश में चल रही धान खरीदी को गति प्रदान करने के उद्देश्य से किसानों के बारदाने पर धान खरीदी करने के निर्देश जारी किये है। किसान धान विक्रय करने के लिए अपने स्वंय के जूट बारदानों का उपयोग कर सकते है। प्रति बारदाने 15 रूपये की दर से उन्हे दो किश्तों में सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि खरीफ वर्ष 2020-2021 के लिए पिछले वर्ष के बारदानों के माध्यम से खरीदी की जा रही है, अब इसमें कृषक स्वयं के बारदानों का उपयोग कर सकते हैं। इससे धान खरीदी का कार्य सुविधाजनक तरीके से चलेगा और किसानों को भी किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। जिले में अब तक किसानों से 9355 जूट बारदानों की खरीदी की जा चुकी है। सुकमा जिले में इस वर्ष 16 धान उपार्जन केन्द्रों के जरिए धान खरीदी की जा रही है। अब तक 230888.80 क्विंटल धान की खरीदी जिले में की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि धान खरीदी के लिए इस वर्ष जिले के कुल 12 हजार 479 कृषकों द्वारा पंजीयन कराया गया है। पंजीकृत किसानों से 03 लाख 35 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य अनुमानित है। जिले में इस वर्ष 32 हजार 479.7118 हेक्टेयर रकबे में धान की फसल कृषकों द्वारा ली गई है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य 31 जनवरी 2021 तक किया जाएगा।


अवैध रूप से धान का भंडारण करने वाले 04 लोगों पर कार्यवाही, 120 बोरा धान जप्त *

06-Jan-2021

महासमुन्द (शोर सन्देश) कलेक्टर के निर्देशानुसार आज राजस्व और खाद्य विभाग की टीम ने जिले में 04 प्रकरणों पर 120 बोरा धान अर्थात् (48 क्विंटल) धान जप्त किए गए। प्राप्त जानकारी अनुसार इनमें बागबाहरा तहसील के ग्राम पलसीपाली निवासी मुकेश कुमार चन्द्राकर से 16 बोरी धान, पिथौरा तहसील के ग्राम अंसुला निवासी गुलाब अग्रवाल से 30 बोरी धान, बसना तहसील के ग्राम बेलटुकरी निवासी बीरबल चौधरी से 50 बोरी धान और सरायपाली तहसील के ग्राम चिंवराकुटा निवासी तेजकुमार प्रधान से 24 बोरी धान जप्त कर उचित कार्यवाही किया गया। अब तक जिले में कुल 188 प्रकरण दर्ज किए गए है। जिनमें 9712 बोरा धान अर्थात् 3884.8 क्विंटल धान की जप्ती की गई है। इनमें 11 वाहन भी शामिल हैं। जिले में कलेक्टर डोमन सिंह के मार्गदर्शन में तहसीलदार, थाना प्रभारी, खाद्य निरीक्षक की संयुक्त उडऩदस्ता टीम का गठन कर अवैध धान परिवहन और अवैध धान भंडारण पर लगातार निगरानी की जा रही है।


मुख्यमंत्री को आदिवासी किसान ने दिया सौ रूपये ईनाम*

05-Jan-2021

00 ‘‘गोबर बेचकर कमाए 32 हजार रूपए‘‘
रायपुर (शोर सन्देश) मुख्यमंत्री आज कोरबा जिले के प्रवास के दौरान जब पाली तानाखार विधायक मोहित राम केरकेट्टा के ग्राम पोलमी पहुंचे, तो वहां एक आदिवासी किसान ने उनसे भेंटकर कहा ‘‘मैं हा गोबर बेच के 32 हजार रूपया कमाए हावंव। उई मं के सौ रूपया आप भेंट करना चाहथ हंव‘‘ उनके आग्रह पर अभिभूत हुए मुख्यमंत्री ने किसान की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी दी गई इस भेंट को बड़े ही स्नेह के साथ स्वीकारा और उन्हें धन्यवाद दिया।
कोरबा जिले के पाली विकासखंड के सुदूर बीहड़ में बसे ग्राम पुटा के किसान नारायण सिंह गोधन न्याय योजना के हितग्राही हैं। उन्होंने गोबर बेचकर अब तक 32 हजार रूपए कमाए हैं। नारायण सिंह ने गोधन न्याय योजना लागू करने के लिए मुख्यमंत्री श्री बघेल के प्रति आभार जताते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखी पाती भेंट की। इस आभार पत्र में कृषक नारायण सिंह ने प्रदेश के मुखिया पेश बघेल को लिखा है कि ‘‘आप मन कईसे हा, आप मन के राज मं हम हन अच्छा हवन। आप मन के राज मं हमर असन गरीब मनखे मन बर, गोधन न्याय योजना चालू करेहा, जेन मं हमर असन गरीब मनखे मन गोबर बेच के कुछ कमा लेत हन। मैं हा गोबर बेच के 32 हजार रूपया कमाए हावंव। उई मं के सौ रूपया आप भेंट करना चाहथ हंव। आप मन के राज मं गांव के मनखे हा राम राज जियत हे, अइसे लागत हे। गाड़ा-गाड़ा जोहार अउ राज मं खुशहाली करे बर शुभकामना‘‘
कृषक नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर बेचने के एवज में मिली राशि से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं। गोबर बेचने से होने वाली नियमित आमदनी का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब हमें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने उनसे कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है जिसने गोबर खरीद कर गरीब वर्ग को भी आय का साधन उपलब्ध कराया है। राज्य शासन का लक्ष्य है कि अंतिम व्यक्ति को समस्त योजनाओं का लाभ मिले और प्रत्येक नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त हो। 


जांजगीर के किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं*

05-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) मुख्यमंत्री ने आज जांजगीर के हाईस्कूल मैदान में आयोजित किसान सम्मेलन में जांजगीर-चांपा जिले के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की।
अगला मेडिकल कॉलेज जांजगीर-चाम्पा जिले में खुलेगा। विधानसभा चन्द्रपुर क्षेत्र की हसदेव परियोजना की तीन नहरों के संवर्धन और संधारण के कार्य कराए जाएंगे। गांव-गांव में किए जाएंगे डेयरी विकास के कार्य। राजीव गांधी किसान न्याय योजना निरंतर जारी रहेगी।


धान उपार्जन केन्द्रों का नोडल अधिकारी सतत् निरीक्षण करें: कलेक्टर*

05-Jan-2021

बालोद (शोर सन्देश) कलेक्टर ने कहा कि धान उपार्जन केन्द्रों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी धान उपार्जन केन्द्रों का सतत् निरीक्षण करें। धान उपार्जन कार्य व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो। कलेक्टर जनमेजय महोबे आज संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समय सीमा की बैठक में निर्देशित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपार्जित धान केप कव्हर से ढंका हुआ हो। आकस्मिक वर्षा आदि से नुकसान हो। उन्होंने नोडल अधिकारियों से कहा कि उपार्जन केन्द्रों में कोचियों, बिचैलियों से धान आए। उन्होंने जिले में अब तक धान उपार्जन, बारदाना की उपलब्धता और परिवहन आदि की जानकारी ली। कलेक्टर ने स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। शेष कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने हाथियों के विचरण से हुए फसल आदि नुकसान का आंकलन और प्रभावितों को मुआवजा राशि भुगतान की जानकारी ली। कलेक्टर ने समय सीमा के प्रकरणों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की और शेष प्रकरणों का शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास, राज्य सचिवालय, पीजीएन, कमिश्नर कार्यालय आदि से प्राप्त प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की और शेष प्रकरणों को समय सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर .के.बाजपेयी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीलोकेश कुमार चन्द्राकर, एस.डी.एम. बालोद आर.एस.ठाकुर, एस.डी.एम. डौण्डीलोहारा ऋषिकेश तिवारी, एस.डी.एम. गुण्डरदेही भूपेन्द्र अग्रवाल, एस.डी.एम. गुरूर अमित श्रीवास्तव, डिप्टी कलेक्टर सिल्ली थामस, प्रेमलता चंदेल, अभिषेक दीवान, सुब्रत प्रधान सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

 


राज्य के चावल का कोटा कम करना केंद्र का प्रतिशोधपूर्ण रवैया : डॉ. संकेत ठाकुर*

04-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) केंद्र सरकार ने सेंट्रल पूल से चावल खरीदने का कोटा 40 लाख मैट्रिक टन से घटाकर 24 लाख मैट्रिक टन कर दिया है। जबकि इसी साल मोदी सरकार ने 40 लाख मैट्रिक टन चावल सेंट्रल पूल से खरीदने की बात कही थी। मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर छत्तीसगढ़ में आक्रोश का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी सरकार का रवैया छत्तीसगढ़ से प्रतिशोध और राज्य सरकार को किसान हित में काम करने से रोकने वाला है। केंद्र किसान के उत्पादन और बाजार को ही खत्म कर देना चाहती हैं। केंद्र सरकार की यह दलित कृषि विरोधी दलील है। इस निर्णय पर कृषि वैज्ञानिक और किसान नेता डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार सरकारी धान खरीदी को हर तरह से ख़त्म करना चाहती है। छत्तीसगढ़ के साथ फिर से सौतेला व्यवहार कर रही है। मोदी सरकार का रवैया छत्तीसगढ़ के प्रति प्रतिशोध का है। यह एक बार फिर सामने गया है, जबकि पंजाब में ऐसा नहीं हुआ। राजीव गांधी किसान योजना को बोनस मान लिया, जबकि प्रधानमंत्री सम्मान निधि और राजीव गांधी किसान योजना दोनों एक है। क्योंकि दोनों जमीन के आधार पर दिए जा रहे हैं। धान की प्रति एकड़ के हिसाब से पैसा दिया जा रहा है। यदि यह बोनस है, तो वह भी बोनस है। यह केंद्र सरकार को स्वीकार करना होगा। अब यह विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। उन्होंने आगे कहा कि एक बार फिर छत्तीसगढ़ के किसान बीजेपी के द्वारा छले गए हैं। बीजेपी बोलती कुछ और है, करती कुछ और है। इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अब बीजेपी अपना विश्वास खो चुकी है। यह साबित हो रहा है कि केंद्र ने जो कृषि कानून लाया है, वो पूरी तरह से सरकार की धान खरीदी पर प्रतिबंध लगाने वाली कानून है। केंद्र सरकार यह नहीं चाहती कि कोई भी राज्य सरकार किसानों की मदद करें। वन नेशन का जो फार्मूला है, यह एक छत्र राज्य का फार्मूला है कि हम जो चाहेंगे वही होगा। वहीं चार दशक से प्रदेश में जल जंगल किसान और मज़दूरों के हक़ में लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गौतम बंधोपाध्याय कहते हैं कि केंद्र सरकार की रवैया तीनों कृषि बिल को टिकाए रखने की उनकी जो दलील है, उन दलील की प्रतिक्रिया है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि केंद्र सरकार नहीं चाहता कि किसान मजबूत बने। छत्तीसगढ़ सरकार का धान नहीं उठा रही और बारदाना भी नहीं दे रही। आगे चलकर केंद्र बोलेगी की समर्थन मूल्य पर धान खरीदना ही सही नहीं है। केंद्र किसान के उत्पादन और बाजार को ही खत्म कर देना चाहती हैं। केंद्र सरकार की यह दलित कृषि विरोधी दलील है।
उन्होंने कहा कि केंद्र चाहती है कि किसान धान का उत्पादन ही ना करें, वो किसी दूसरे फसल का उत्पादन करें, जिसे खरीदने के लिए व्यापारी बाजार में खड़ा है। इससे किसान और कर्ज में दब जाएगा. सरकार धीरे-धीरे किसान को अपने मकड़जाल में फंसा रही है। कांग्रेस सरकार किसानों को मजबूत करना चाहती है, लेकिन केंद्र संयोजक तरीके से राज्य को परेशान कर रही है। केंद्र और राज्य के रिश्ते हैं, उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार जो कर रही है, वो खुद की नहीं कारपोरेट परस्त केंद्र सरकार की नीति है। गौतम बंधोपाध्याय ने कहा कि केंद्र सरकार का सिर्फ चार ही एजेंडा है। केंद्र और राज्य सरकार के रिश्ते में दरार, कृषि व्यवस्था के लिए सर प्लस खत्म कर देना, केवल कॉर्पोरेट के इशारे पर कॉन्ट्रैक्ट खेती को बढ़ावा देना और राज्य सरकार को किसान हित में काम करने से रोकने के इरादे से केंद्र सरकार काम कर रही है।


किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने में कबीरधाम जिला टॉप वन पर*

03-Jan-2021

00 एक माह में 77 प्रतिशत किसानों से हुई धान की खरीदी

कवर्धा (शोर सन्देश) खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान करने पर कबीरधाम जिला पूरे प्रदेश में टॉप पर पहुंच गया है। कबीरधाम जिले में समर्थन मूल्य पर शुरू हुई धान खरीदी से लेकर अब तक एक माह में 77 हजार 454 पंजीकृत किसानो से कुल 25 लाख 90 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। जिसकी राशि 478 करोड 50 लाख रूपए है। इस प्रकार 77 प्रतिशत पंजीकृत किसानों के पंजीकृत धान के रकबे में से 65 प्रतिशत रकबा के विरुद्ध धान का विक्रय किया जा चुका है। कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा ने कहा कि जिले के सभी पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी। उन्होने किसानों से धान खरीदी के संबंध में फैलाई जा रही अफवाहों को ध्यान नहीं देने की अपील करते हुए कहा कि धान खरीदी केन्द्रों प्रतिदिन के धान क्षमता के आधार पर किसानों को टोकन जारी किया जा जा रहा है। धान खरीदी कार्य किसी भी प्रकार का प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे, इसके लिए सतत निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि जिले में अब तक जिस प्रकार धान खरीदी केन्द्रों में किसानों से निरंतर जिला प्रशासन को सहयोग मिल रहा है। आज उसी का परिणाम है कि जिले में सुगम और शांति पूर्ण ढंग से धान खरीदी हो रही है। कबीरधाम जिले में 94 धान खरीदी केन्द्र है। जिले में पंजीकृत किसानों की संख्या एक लाख सात सौ ग्यारह है। पंजीकृत धान का रकबा 108812 है। 2.5 एकड़ से कम भूमि धारित करने वाले पंजीकृत जिले में 64 हजार 90 किसानों है। जिसमें से 50 हजार 90 किसानों की धान का विक्रय कर चुके हैं अब तक कुल 9 लाख 52 हजार 390 क्विंटल धान का विक्रय किया जा चुका है जिसकी लागत 179 करोड़ है। जिले में 2.5 एकड़ से 5 एकड़ तक की भूमि धारित करने वाले पंजीकृत 24 हजार 8 सौ 78 किसानों में से 18 हजार 918 किसानों ने 9 लाख 22 हजार 888 क्विंटल धान का विक्रय किया गया है। जिसकी राशि 174 करोड रूपए है। इस प्रकार 78 प्रतिशत पंजीकृत सीमांत लघु किसानों ने धान का विक्रय किया गया है। धान खरीदी शुरू होने से लेकर अब तक पिछले एक महिने में कुल पंजीकृत एक लाख 711 किसानों में से 77 हजार 454 किसानों से कुल 25 लाख 90 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। जिसकी राशि 478 करोड 50 लाख रूपए है। इस प्रकार 77 प्रतिशत पंजीकृत किसानों ने पंजीकृत धान के रकबे में से 65 प्रतिशत रकबा के विरुद्ध धान का विक्रय किया जा चुका है।
00 जिले में अब तक 6 लाख 10 हजार क्विंटल धान का उठाव
जिले में अब तक किए गए धान में से 6 लाख 10 हजार क्विंटल धान का उठाव सोसाइटी से किया जा चुका है। मार्कफेड से वर्तमान में अधिकतम कैपेसिटी में धान का उठाव संग्रहण केंद्र के लिए किया जा रहा है। जिले में राइस मिलर की संख्या कम होने और अन्य जिलों के राइस मिलर ने धान उठाव नहीं होने के कारण प्रतिदिन खरीदी की जा रही है। धान के केवल 40 प्रतिशत धान का ही उठाव सोसाइटी से हो
पा रहा है। जिला प्रशासन ने सोसाइटी से धान के उठाव नहीं होने के कारण खरीदी व्यवस्था प्रभावित ना हो करके खरीदी केन्द्रों में वैकल्पिक धान खरीदी स्थान का भी चयन किया गया है। प्रतिदिन सोसायटीवार जिसका सतत निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि प्रतिदिन के लिए जिन किसानों को टोकन जारी किया गया है। उनका धान खरीदी उसी दिन सूर्यास्त के पहले सूर्यास्त के पहले कर ली जाए। कलेक्टर ने कहा कि अभी तक किसान साथियों, किसान बंधु और उनके प्रतिनिधियों का व्यवस्था में पूर्ण सहयोग जिला प्रशासन को प्राप्त हुआ है। साथ ही आगे भी सहयोग प्राप्त करने की अपील की अपेक्षा की गई।


किसानों को मौसम आधारित कृषि की सलाह*

02-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) रबी मौसम में होने वाली प्रमुख फसल गेहूं, अरहर, चना, सरसों, अलसी और सूरजमुखी फसलों में कीटों से बचाव, उचित देखभाल और भरपूर पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने समसामयिक सलाह दी है। कृषि संचालनालय रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार रबी मौसम में गेहूं फसल की बुआई के 20 से 25 दिन के बाद पहली सिंचाई करें। पहली सिंचाई के समय में नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा का टापड्रेसिंग करें। गेहूं फसल में दूसरी सिंचाई कल्ले निकलने की अवस्था में बुआई के लगभग 40 से 50 दिन के बाद करें और इस समय नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा का टाप ड्रेसिंग करें। अरहर में फल बनने की अवस्था में फलभेदक कीटों के नियंत्रण के लिए इंडोंक्साकार्ब दवाई 300 ग्राम 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। चना की फसल जब 15 से 20 सेंटिमीटर की ऊचाई होने पर खुटाई करें। चना फसल में बुआई के 40 से 45 दिन के बाद में पहला सिंचाई करें। फसल में यदि कालरराट रोग दिखाई दे तो सिचाई स्ंिप्रकलर से करने की सलाह दी गई है। सरसों की फसल में पहली सिचाई बुआई के 25 से 30 दिनों के बाद 4 से 6 पत्ती होने की अवस्था में करना चाहिए। पहली सिंचाई के समय नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा का पाटड्रेसिंग करना चाहिए। सरसों में दूसरी सिचंाई फूल आते समय करें। निचली पत्तियों पर रोक के लक्षण दिखाई देने पर मेटालेकिसल का छिड़काव करना चाहिए।
अलसी फसल में पहली सिंचाई फसल बोने के 30 से 40 दिन के बाद देना चाहिए एवं पहली सिंचाई के समय नत्रजन के शंेष मात्रा का छिड़काव करना चाहिए। सूरजमुखी फसल का भरपूर पैदावार के लिए उन्नत किस्म के बीज मॉडर्न यू. . एन. टीएस., 7-एफ.यू. बी., 1-एच.एस.बी. ज्वालामुखी, सूर्या आदि की बुआई करें। धब्बा रोग दिखने पर 3 ग्राम तामरयुक्त फफूदांनाशी प्रति लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


मनरेगा के तहत मिली रामू को मदद, डबरी निर्माण से हुई सिंचाई में सुविधा*

31-Dec-2020

नारायणपुर (शोर सन्देश) डबरी निर्माण होने से रामू कुमेटी को फसलों को पानी देने में अब दिक्कत नहीं होती है और फसल का अच्छा उत्पादन भी हो रहा है। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी। नारायणपुर जिले के ग्राम पालकी में शासन की मनरेगा योजना के तहत रामू कुमेटी ने डबरी निर्माण करवाया। रामू और उनके परिवार का आजीविका पूर्णतः कृषि पर निर्भर है। डबरी निर्माण के पहले रामू के पास सिंचाई सुविधा नहीं होने से वे सालों से वर्षा के पानी पर निर्भर थे, जिससे खेत में फसल का उत्पादन कम होता था। वर्तमान में डबरी का निर्माण होने से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से धान की फसल में वृद्धि हुई है। डबरी निर्माण होने के पहले कि स्थिति को बताते हुए रामू ने बताया कि डबरी निर्माण होने से पहले उनकी भूमि में वर्षा का पानी नहीं रूकता था, जिसके कारण अच्छी फसल नहीं होती थी। आज डबरी निर्माण होने के बाद वर्तमान में भूमि में फसल बढ़ी है। जिससे जल संरक्षण हुआ है और भूमि का जल स्तर बढ़ा है। 


किसानों के धान खरीदी मामले में छत्तीसगढ़ किसान संगठन ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन*

30-Dec-2020

कोरबा (शोर सन्देश) राज्य शासन किसानों का एक-एक दाना धान खरीदने का दावा करने वाली राज्य सरकार धान खरीदी के मामले में हर मोर्चे पर फेल होती दिखाई दे रही है। धान खरीदी के मामले में जिले में व्याप्त भारी अनियमितता पर रोष व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ किसान संगठन ने किसानों की ज्वलंत समस्याओं का तत्काल समाधान निकालने, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिला कलेक्टर कोरबा के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए मांग किया है। किसानों की ज्वलंत समस्याओं का तत्काल निराकरण करने, किसानों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक ध्यान में रखते हुए, धान उपार्जन केंद्रों में चल रही भारी अनियमितताओं पर अंकुश लगाते हुए, जिले में धान खरीदी प्रक्रिया को सुगम बनाने की मांग किया है। प्रतिनिधिमंडल में बीएल नेताम, रामजी शर्मा, भूपेंद्र गोंड, शिव कुमार यादव, डीकेश्वर प्रसाद देवांगन, गंगाधर गोंड, तस्वीर कुमार गोंड आदि उपस्थित थे। 




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