कोलकाता (शोर सन्देश)। किसान आंदोलन को लेकर जहां दिल्ली में गहमा-गहमी जारी है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। हालांकि इसे लेकर सदन में भारी हंगामा भी हुआ और बीजेपी विधायकों ने वॉक आउट भी किया। बता दें कि इस प्रस्ताव पर लेफ्ट और कांग्रेस का पश्चिम बंगाल सरकार को समर्थन है। मालूम हो कि सदन में आज `जय श्रीराम` के नारे भी लगे।आपको बता दें कि प्रस्ताव पारित होने से पहले ममता बनर्जी ने कहा कि हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वह तीनों ही कृषि कानूनों को वापस ले। भाजपा हमेशा ही आंदोलन को आतंकवादी गतिविधि करार देती रही है। भाजपा पूरे देश को `लंका कांड` की तरह जला रही है, ये तीनों ही कानून किसान विरोधी हैं और हम पूरी तरह से इन कानूनों का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों के साथ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों किसान आंदोलन कर रहे हैं, एक या दो छोटी घटनाएं हो सकती हैं, लोगों में गुस्सा है और भावनाएं अधिक चल रही है, लेकिन इन्हें `आतंकवादी` नहीं कहा जा सकता है। ममता ने कहा कि पुलिस दिल्ली में स्थिति को सही से संभाल नहीं सकी, अगर ये बंगाल में हुआ होता तो अमित भैया कहते, क्या हुआ। किसानों को `आतंकवादी` करार देने के भाजपा के प्रयासों को हम कतई स्वीकार नहीं करेंगे, भाजपा हर आवाज को दबाना जानती है बस लेकिन हम ऐसा कतई नहीं होने देंगे। मालूम हो कि कृषि कानून को लेकर जहां सड़कों पर किसान हैं वहीं दूसरी ओर संसद के अंदर विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में लगी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने बजट सत्र शुरू होने से पहले ही अपने तेवर साफ कर दिए हैं। आजाद ने कहा कि विपक्ष के 16 दल 29 जनवरी को होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे। आजाद ने कहा कि हम 16 दलों की ओर से बयान जारी करने जा रहे हैं कि शुक्रवार को होने वाले राष्ट्रपति के भाषण का हम बहिष्कार करेंगे, इसकी मुख्य वजह यह है कि कृषि बिलों को सदन में जबरन विपक्ष के बिना पास कराया गया है।