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किसानों के लिए पीएम मोदी लॉन्च करेंगे 1 लाख करोड़ रुपए का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड*

09-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) देश में कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और उन्हें सस्ता कर्ज मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को लॉन्च करेंगे। पीएम सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस योजना की शुरुआत करेंगे। साथ ही पीएम किसान योजना के तहत 8.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 17,000 करोड़ के फंड की छठी किस्त भी जारी करेंगे। 00 आत्मनिर्भर भारत पैकेज में हुआ था ऐलानकेंद्र सरकार ने जुलाई में कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए रियायती लोन उपलब्ध करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के फंड के साथ एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसका शुभारंभ आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये करेंगे. किसानों की उपज के बेहतर रखरखाव के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना का ऐलान किया था। इसका ऐलान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर पैकेज के दौरान किया था।
00 किसानों को होगा फायदा :
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि एक लाख करोड़ रुपए का यह फंड फाइनेंसिंग सुविधा उत्पादित फसल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और फसलों के भंडारण से जुडे इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए दी जाएगी। इन केंद्रों में मुख्य एग्री कोऑपरेटिव सोसायटी, फार्मर प्रोड्यूसर ऑगेनाइजेशन, कंपनियां और स्टार्टअप शामिल हैं. इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोल्ड चेन, आधुनिक स्टोरेज फैसिलिटी, फसल को खेतों से सेंटर तक ले जाने के लिए बेहतर ट्रांसपोर्टेशन फैसिलिटी उपलब्ध कराना शामिल हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि इससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्यस प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
00 इस वित्तपोषण सुविधा के जरिये क्रेडिट गारंटी कवरेज भी मिलेगा :
कर्ज का वितरण 4 साल में किया जाएगा. चालू वित्तीय वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये और अगले तीन वित्तीय वर्ष में 30,000-30,000 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इस वित्तपोषण सुविधा के तहत सभी प्रकार के कर्ज में हर साल 2 करोड़ रुपये तक कर्ज के ब्याज में 3 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 7 वर्ष के लिए होगी। इसके अलावा 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज योजना के तहत इस वित्तपोषण सुविधा के जरिये क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध होगा। इस कवरेज के लिए सरकार की ओर से शुल्क का भुगतान किया जाएगा।
00 एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में मिलेगी मॉरेटोरियम की सुविधाइस वित्तपोषण सुविधा के तहत लिए कर्ज के पुनर्भुगतान (Repayment) के लिए मॉरेटोरियम की सुविधा भी दी जाएगी। जो कम से कम 6 महीने और अधिकतम 2 साल के लिए हो सकती है। कृषि और कृषि प्रसंस्करण आधारित गतिविधियों के लिए औपचारिक कर्ज सुविधा के जरिये इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि अवसंरचना कोष का प्रबंधन और निगरानी ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली प्लेटफॉर्म के जरिये किया जाएगा। मॉनिटरिंग और फीडबैक के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिलास्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। योजना की समयसीमा वित्त वर्ष 2020 से 2029 के लिए होगी। 


इस बार जुलाई में हुई सबसे कम बारिश, किसानों के माथे पर आने लगी चिंता की लकीर*

01-Aug-2020

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश) इस बार पांच सालों में पहली बार जुलाई के महीने में सबसे कम बारिश हुई है। आमतौर पर जून से सितंबर के बीच जुलाई का महीना सबसे नमी (बारिश) वाला होता है, लेकिन इस साल कम बारिश ने खरीफ की फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर से मध्यप्रदेश, गुजरात और ओडिशा के लिए।
यदि अगस्त में भी 97 प्रतिशत बारिश के अनुमान के विपरीत कम वर्षा होती है तो इसका प्रभाव तिलहन और दालों की फसल पर पड़ेगा जिन्हें ज्यादातर बारिश वाले इलाकों में उगाया जाता है। देश में जुलाई के दौरान 285.3 मिमी वर्षा के औसत से 90 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड ऑफ एवरेज (एलपीए) की बारिश हुई, जबकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 103 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। 
दक्षिणी राज्यों को छोड़कर देश के अन्य सभी क्षेत्रों में जून की तुलना में जुलाई में कम वर्षा हुई है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘अगस्त का महीना महत्वपूर्ण है क्योंकि आईएमडी ने शुक्रवार को जारी अपडेट में इस महीने के लिए अपनी भविष्यवाणी नहीं बदली है।मौसम ब्यूरो ने कहा कि अगस्त और सितंबर दोनों के लिए मानसून एलपीए 104 प्रतिशत होने की संभावना है।
आधिकारिक डाटा के अनुसार जून-जुलाई के बीच में मानसून सामान्य था। यह जून में 118 प्रतिशत एलपीए था। मानसून के शुरुआती आगमन और जून में सामान्य वर्षा की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक होने के कारण, इस वर्ष खरीफ की बुआई बहुत अच्छी हुई। कृषि मंत्रालय ने कहा कि कुल खरीफ की पैदावार इस सीजन के 106.64 मिलियन हेक्टेयर है, जो सामान्य क्षेत्र का 83 प्रतिशत है।
जहां तिलहन की बुआई सामान्य स्तर के करीब पहुंच चुकी है। वहीं कपास और गन्ना अपने सामान्य मानदंड स्तर को पार कर चुके हैं। धान की रोपाई ने अब तक 39.7 मिलियन हेक्टेयर के अपने सामान्य क्षेत्र का 67 प्रतिशत कवर किया है। यह आमतौर पर पश्चिम बंगाल में देर से बोया जाता है जोकि अन्य राज्यों की तुलना में देश का सबसे बड़ा उत्पादक है। राजस्थान, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर प्रमुख राज्यों में से हैं जहां मानसून की कमी है। 


हाथी ने किसान को कुचल कर मारा, मौत*

25-Jul-2020

पत्थलगांव (शोर सन्देश) पंडरीबहला गांव में शुक्रवार देर रात एक हाथी ने किसान को कुचल दिया है। हाथी के हमले में किसान की मौत हो गई है। वहीं किसान की पत्नी भी गंभीर रुप से घायल हुई है। हाथी ने किसान के घर पर जमकर उत्पात मचाया। पंडरीबहला गांव में देर रात हाथी के हमले में किसान का घर टूट गया है। वहीं खेत में खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई है। 


धान रोपाई के लिए किसान कर रहे पैडी ट्रांसप्लांटर का उपयोग*

24-Jul-2020

 कांकेर (शोर सन्देश) जिले में कृषि अभियांत्रिकी कृषि विज्ञान केन्द्र के मार्गदर्शन में किसानों की ओर से पैडी ट्रांसप्लांटर का उपयोग कर धान की रोपाई की जा रही है। नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मानिकपुर, रिसेवाड़ा और श्रीगुहान के कृषकों के खेत में गत दिवस पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान रोपाई का कार्य किया गया। ग्राम श्रीगुहान के कृषक बालमुकुंद के खेत में लगभग 2 एकड़ खेत में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान रोपाई का कार्य किया गया। मौके पर सहायक कृषि अभियंता एच.एल. देवांगन, यांत्रिक सहायक कल्पना सिंह, यांत्रिक कमल समद्दार, कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के कृषि वैज्ञानिक सुरेश मरकाम, सी.एल. ठाकुर और ग्राम के कृषकगण मौजूद थे।  कृषक बालमुकुंद ने बताया कि धान रोपाई की यह विधि बहुत ही आसान है, मैट टाईप नर्सरी तैयार करने में मात्र 2 मजदूर लगे और 18 दिन में नर्सरी तैयार हो गई जिसे खेत में मशीन से रोपाई किया गया। कृषि अभियांत्रिकी और कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मार्गदर्शन में सर्विस प्रोवाईडर ग्राम-अंजनी निवासी उजियार सिंह वट्टी के द्वारा 5 घंटे में धान रोपाई का कार्य पूर्ण किया गया, जिसमें मात्र 2 मजदूर लगे। इस प्रकार मशीन के उपयोग से समय और धन की बचत हुई। सहायक कृषि अभियंता एच.एल. देवांगन ने बताया कि नवीन फसल प्रदर्शन योजनांतर्गत पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से कांकेर जिले में 25 एकड़ में धान रोपाई प्रदर्शन किया गया है, जिसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 3 हजार रुपए अनुदान की पात्रता है। उन्होंने बताया कि मशीन द्वारा एक एकड़ की धान की रोपाई मात्र 2 से 3 घंटे में पूरा होता है और अपेक्षाकृत लागत भी कम आता है और उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत बढ़ोतरी भी होती है।


आधुनिक तकनीक से बुवाई कर खुलेंगे तरक्की के द्वार*

14-Jul-2020

बिलासपुर (शोर सन्देश) ग्राम मुरकुटा के किसानों के लिए अब तरक्की के द्वार खुल गए हैं। उन्होंने खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक से बुवाई करना शुरू कर दिया है। वहीं आधुनिक तकनीक से केवल परिश्रम की बचत हो रही है, अपितु मुनाफा भी दोगुना हो गया है। ग्राम के किसान अमित गोंड़, धनुष गोंड और शत्रुघन गोंड अपनी 50 डिसमील कृषि भूमि में पैडी सीड ड्रम से धान बुवाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि विभाग ने किसानों की हर संभव मदद की जा रही है। किसानों को नई-नई तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है ताकि खेती-किसानी मुनाफे का व्यवसाय बन जाए, किसानों का चहुमुंखी विकास हो सके।  इस तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पैडी ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है। दो लाईनों के बीच की दूरी 20 से.मी होनी चाहिए। एक बार में 8 लाईनों में धान बीज की बुवाई होगी। 50 डिसमिल के रकबे में बुवाई करने में 40 मिनट का समय लगेेगा। इतने रकबे में 8 किलो बीज लगेगा। अपने अनुभव के आधार पर अमित बताते हैं कि इस तकनीक में कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा जिससे मेरे जैसे ही अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल सके। एक ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है, लेकिन बीज की पूरी भराई नहीं करना है ताकि ड्रम का वजन ज्यादा हो और वह आसानी से खींचा जा सके। साथ ही ड्रम के अंदर घूमने के लिए जगह मिल पाए ताकि बीज छेद से आसानी से गिर सके। धान को अंकुरण के लिए 24 घ्ंाटा ही भीगाना चाहिए ताकि अंकुरण ज्यादा बड़ा हो और बीज छेद से आराम से गिर सके।  उन्होंने बताया कि पडलिंग कार्य एक दिन पहले करना चाहिए। ड्रम चलाने के पहले अतिरिक्त पानी निकाल लेना चाहिए। बहुत डीप पडलिंग करने से ड्रम को खींचने में ज्यादा ताकत लगेगी जिससे कार्यक्षमता घट सकती है। अमित कहते हैं कि इन सावधानियों के साथ बुवाई करने से निश्चित तौर पर बेहतर परिणाम आएंगे।
अन्य किसान भाईयों से भी इस तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देने की अपील अमित ने की। वे सरकार से किसानों के हित में किए जा रहे कार्यो की सराहना करते भी नहीं थकते हैं। वे कहते हैं कि सरकार के लिए गए निर्णयों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में किसानों की स्थिति बेहतर है। आर्थिक मंदी के दौर में भी सरकार किसानों के साथ खड़ी है।


सरगुजा जिले के किसानों ने किया 11 हजार 809 टन रासायनिक खाद का उठाव*

10-Jul-2020

अम्बिकापुर (शोर सन्देश) कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशानुसार खरीफ वर्ष 2020 हेतु किसानों को रासायिक खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का पर्याप्त भण्डारण किया गया है। इस वर्ष खाद भण्डारण का लक्ष्य 18 हजार 825 टन के विरूद्ध 14 हजार 549 टन भण्डारित किया गया है जो कुल भण्डारण का 77 प्रतिशत है। अब तक जिले के 27 समितियों के माध्यम से किसानों द्वारा 11 हजार 809 टन रासायनिक खाद का उठाव किया गया है। जिला सहकारी केन्द्री बैंक के नोडल अधिकारी पीएस परिहार ने बताया है कि खरीफ वर्ष 2020 हेतु सरगुजा जिले के लिए खाद भण्डारण का लक्ष्य 18 हजार 825 टन निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार खरीफ 2020 में बीज भण्डारण का लक्ष्य 14 हजार 300 क्विंटल है जिसके विरूद्ध 5 हजार 590 क्विंटल वितरित किया गया है।


किसान परेशान, ट्रांसफार्मर जलने से रुका सिंचाई का काम, विभाग की अनदेखी बदस्तूर जारी *

09-Jul-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राजधानी रायपुर से लगे भटगांव क्षेत्र के कांदुल गाँव के किसान इन दिनों बिजली विभाग की अनदेखी के चलते खासे परेशान है। कांदुल कसेहतर के एक किसान ने नाम छापने की शर्त पर बताया की हमलोगो ने इस बार केले की फसल उगाई है, पर हमारे खेतो ने बिजली नहीं होने से हम फसलों की सिंचाई नहीं क्र पा रहे है।
बीती पांच दिनों से कांदुल और आसपास के गाओं में ट्रांफॉर्मर जल जाने की वजह से सभी किसान अपनी फसलों की ख़राब हो जाने के दर से आशंकित है। किसानो का कहना है की अगर अभी सिंचाई नहीं हुई तो हमारी फसले ख़राब हो जाएगी और उसके बाद हम सभी लोगो को अगले साल तक इन्तजार करना पद सकता है।
किसानो ने बताया की बिजली विभाग के माना परिक्षेत्र में इस बाबत मौखिक शिकायत भी की उनके द्वारा की गयी थी पर बीते चार-पांच दिनों से सिर्फ ट्रांसफार्मर नहीं होने का हवाला देकर उनकी अनदेखी की जा रही है। वहीँ मन बिजली विभाग के अधिकारी विशाल बाजपाई ने बताया की ट्रांसफार्मर की अनुपलब्धता के चलते किसानो को बिजली मुहैय्या नहीं कराइ जा रही थी। विभाग का पास अभी ट्रांसफार्मर गए जिन्हे जल्द से जल्द से जले हुए ट्रांसफोर्मस को हटवा कर नए ट्रांसफार्मर अगले २४ घंटे में लगवा दिया जाएगा।


कोशिश है शुरुआत तो अच्छी हो*

08-Jul-2020

राज्य के मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के तहत किसानों से हरेली के दिन से गोबर खरीदी करने की घोषणा कर दी है।घोषणा के बाद से अधिकारी युद्धस्तर पर जुटे हैं कि इसकी शुरुआत तो अच्छी हो जाए। कोई भी योजना हो उसके लिए पैसा तो लगता ही है। योजना की शुरुआत करनी है तो इस के लिए फंड जुटाना ही पड़ेगा। यह योजना बजट के बाद बनाई गई है, इसलिए इसके लिए बजट में तो कोई प्रावधान नहीं होगा।कृषि विभाग के अधिकारियों का प्रारंभिक अनुमान है कि गोबर खरीदी के लिए कम से कम दो सौ ज्यादा से ज्यादा पांच सौ करोड़ रुपए की जरूरत होगी।इस योजना में गोबर की खरीदी,गोबर का संग्रहण गोबर से खाद बनाना तीन प्रक्रिया होगी। इसके लिए पूरी व्यवस्था करनी होगी,गोबर की खरीदी,गोबर के संग्रहण गोबर से खाद बनाने के लिए बहुत लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसकी व्यवस्था तत्काल व्यापक तौर पर नहीं की जा सकती। इसलिए शुरुआत में गोबर खरीदी उन गांवों में आसान होगी,जहां गौठान बन गए हैं तथा गोबर खरीदी,संग्रहण खाद का निर्माण हो रहा है यानी पूरी सही कुछ तो व्यवस्था है। सरकारी आंकड़ों के अऩुसार इस योजना के पहले चरण में 2240 गांवों में इस योजना की शुरुआत की जा सकती है। सरकार गोधन योजना को लेकर यह सावधानी बरत रही है कि यह योजना फ्लाप हो।सरकार की हंसी उड़े।विपक्ष तो ताक में रहेगा कि योजना फ्लाप हो तो वह सरकार को निशान पर ले।सरकार योजना को प्लाप होने देने के लिए ही पहले सीमित लोगों से गोबर खरीदी करेगी। बड़े किसानों डेयरी वालों से तो गोबर नहीं खरीदेगी। सरकार गोबर गांव के गरीबों से ही खरीदेगी। ताकि पैसा गरीबों के पास जाए। यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा कि योजना का लाभ सिर्फ गरीबों को ही मिले इसके लिए सरकार क्या व्यवस्था करने वाली है।कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने तो यह स्पष्ट कर दिया है कि यह योजना पूरी तरह गरीबों के लिए हैं।इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग अपने मवेशियों को खुला छोड़े।सरकार की ज्यादातर योजनाएं गरीब, किसान,आदिवासी की बेहतरी के लिए है, गोधन न्याय योजना ऐसी योजना है जिससे गरीबों, किसानों आदिवासियों तीनों को लाभ होगा। गरीब आदिवासी गोबर बेचकर दो पैसा कमाएंगे तो गोबर खाद का उपयोग कर किसान ज्यादा फसल ले सकेंगे। किसान न्याय योजना की तरह गोधन न्याय योजना का सही क्रियान्वयन हो सका तो इसका लाभ छत्तीसगढ की बड़ी आबादी को मिलेगा तो कांग्रेस काे इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री भपेश बघेल की छबि एक कांग्रेस नेता से ज्यादा एक किसान नेता की बनेेगी। इससे वह प्रदेश में अपनी पार्टी की स्थिति को और ज्यादा मजबूत कर सकेंगे।


खरपतवार नियंत्रण से धान की बेहतर पैदावार, निदानाशक का उचित इस्तेमाल जरूरी*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) धान फसल के उत्पादन में वृद्धि के लिए हानिकारक कीट की रोकथाम और खरपतवारों का समय पर नियंत्रण आवश्यक है। सही समय में नियंत्रण नहीं होने से फसल की उत्पादकता प्रभावित तो होती ही है, साथ ही किसानों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के किसानों को धान की खेती में होने वाले अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम के लिए कई उपयोगी सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खरीफ मौसम में धान का थरहा बोने के तीन से चार दिन के भीतर प्रति हेक्टेयर में थायोबेन्कार्प निदानाशक 1.5 किलोग्राम या आक्साडायर्जिल निदानाशक 70 से 80 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए। बोता विधि से धान बोने पर अंकुरण पूर्व खरपतवार प्रबंधन के लिए प्रेटिलाक्लोर 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन से पांच दिन के अंदर डालने पर खरपतवार नियंत्रण में फायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि आक्साडायर्जिल 32 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन दिन के अंदर और पायरोजोसल्युरान 10 ग्राम प्रति एकड़ के दर से बोआई के बाद दस से बारह दिन के अंदर डालना चाहिए। 


किसान मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग करें*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) कृषि विज्ञान केन्द्र ढोलिया बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ राज्य के मैदानी भाग में कृषि जलवायु क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी के संबंध मे सलाह दी है। इसके लिए भूमि की तैयारी खाद और बीजों का प्रबंध आवश्यक करें। मानसून सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में सक्रिय हैं। कीट व्याधियों के प्रतिरोध और सहनशील किस्में छत्तीसगढ़ राज्य और विकास निगम, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में उपलब्ध है। इन पर पौध रोगों और कीटों का असर कम होता है। किसान भाई मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही खाद उर्वरक का उपयोग करें। अनावश्यक रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से मृदा उर्वरक बुरी तरह से प्रभावित होती है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे मेघदूत एप पर रजिस्टर करें। मौसम और खेती संबंधी जानकारी प्राप्त करें। छत्तीसगढ़ के अधिकांश भागों में मानसून वर्षा प्रारंभ हो चुकी हैं। कृषक भाई आवश्यकतानुसार खेतों की जुताई कर खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि) की बोआई करें। बोआई कतारों में करें। बोआई के पूर्व बीजों को उपचारित करें। कतार बोनी में दानेदार उर्वरक सीड ड्रिल के लिए उपयोग में लाये। वर्षा की मात्रा पर्याप्त मात्रा में हो चुकी है, इसलिए किसान भाई कृषि कार्यो को प्राथमिकता दे।  विभिन्न धान पद्धतियों में समन्वित खरपतवार प्रबंधन:- धान की उपज पर खरपतवारों के प्रतिकूल प्रभाव को समाप्त करना और कम से कम करना ही खरपतवार नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य है। खरपतवार विरोधी वातावरण उत्पन्न करने के लिए परिस्थितियों के अनुसार एक से अधिक तरीकों जैसे दृयांत्रिक, सस्य क्रियाओं, जैविक रासायनिक विधियों का उपयोग लाभकारी पाया गया है (दवाओं की मात्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर में दी गई है )  नर्सरी :- यथासंभव नर्सरी की जमीन तैयार कर सिंचाई कर दें और जब खरपतवार उग आयें तो जुताई से नष्ट कर दें। तत्पश्चात भूमि तैयार कर थरहा डालने पर खरपतवारों का प्रकोप कम होता है। बतर स्थिति में थरहा डालने के 3-4 दिन के अंदर थायोबेन्कार्प 1-1.5 कि./हे. या आक्साडायर्जिल 70-80 ग्राम/हे. सक्रिय तत्व का छिडकाव करें। 




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