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मैनपाट की आदिवासी महिलाएं मधुमक्खीपालन को बना रही आय का साधन*

15-Jan-2021

अम्बिकापुर (शोर सन्देश) पारंपरिक खेती-बाड़ी और रोजी-मजदूरी कर जीवनयापन करने वाली मैनपाट के मांझी जनजाति की महिलाएं अब बेहतर आय के साधन के रूप में मधुमक्खीपालन के व्यवसाय को अपना रही है।  उर्मिला मांझी, राजवंती मांझी, सुकवारो मांझी सहित दस महिलाओं ने पहली बार 46 किलोग्राम शहद निकालकर 13 हजार रुपए की कमाई की है। कम समय मे अधिक आय मिलने से मधुमक्खीपालन के प्रति महिलाएं काफी उत्साहित हैं।
कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशानुसार जिले में मधुमक्खीपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग से गोठानो से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं के साथ ही व्यक्तिगत रूप से महिलाओं को नि:शुल्क हनी बॉक्स वितरित किया जा रहा है। इसी कड़ी में मैनपाट जनपद के आदर्श गोठान कुनिया से जुड़ी सितारा स्व सहायता समूह की महिलाओं को 5 और ग्राम कुनिया के मांझी जनजाति की 9 महिलाओं को 5-5 नग हनी बॉक्स बांटा गया। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने महिलाओं को मधुमक्खी पालन के संबंध में जानकारी के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। इस प्रकार कुल 50 हनी बॉक्स से पहली बार मे उत्तम गुणवत्ता के 46 किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ है। जिसे उद्यानिकी विभाग स्वयं 300 रुपए प्रति किलों की दर से खरीदा है। उप संचालक उद्यान के. एस. पैकरा ने बताया कि मैनपाट के आदर्श गोठान कुनिया के स्व सहायता समूह और ग्राम कुनिया के अन्य 9 महिलाओं को 5-5 नग मधुमक्खी बाक्स सहित एपिस मेलिफेरा प्रजाति के मधुमक्खी दिया गया है। बरसात के मौसम को छोड़कर एक महीने के अंतराल में मधुरस तैयार हो जाता है।  



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