राज्य के मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के तहत किसानों से हरेली के दिन से गोबर खरीदी करने की घोषणा कर दी है।घोषणा के बाद से अधिकारी युद्धस्तर पर जुटे हैं कि इसकी शुरुआत तो अच्छी हो जाए। कोई भी योजना हो उसके लिए पैसा तो लगता ही है। योजना की शुरुआत करनी है तो इस के लिए फंड जुटाना ही पड़ेगा। यह योजना बजट के बाद बनाई गई है, इसलिए इसके लिए बजट में तो कोई प्रावधान नहीं होगा।कृषि विभाग के अधिकारियों का प्रारंभिक अनुमान है कि गोबर खरीदी के लिए कम से कम दो सौ व ज्यादा से ज्यादा पांच सौ करोड़ रुपए की जरूरत होगी।इस योजना में गोबर की खरीदी,गोबर का संग्रहण व गोबर से खाद बनाना तीन प्रक्रिया होगी। इसके लिए पूरी व्यवस्था करनी होगी,गोबर की खरीदी,गोबर के संग्रहण व गोबर से खाद बनाने के लिए बहुत लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसकी व्यवस्था तत्काल व्यापक तौर पर नहीं की जा सकती। इसलिए शुरुआत में गोबर खरीदी उन गांवों में आसान होगी,जहां गौठान बन गए हैं तथा गोबर खरीदी,संग्रहण व खाद का निर्माण हो रहा है यानी पूरी न सही कुछ तो व्यवस्था है। सरकारी आंकड़ों के अऩुसार इस योजना के पहले चरण में 2240 गांवों में इस योजना की शुरुआत की जा सकती है। सरकार गोधन योजना को लेकर यह सावधानी बरत रही है कि यह योजना फ्लाप न हो।सरकार की हंसी न उड़े।विपक्ष तो ताक में रहेगा कि योजना फ्लाप हो तो वह सरकार को निशान पर ले।सरकार योजना को प्लाप न होने देने के लिए ही पहले सीमित लोगों से गोबर खरीदी करेगी। बड़े किसानों व डेयरी वालों से तो गोबर नहीं खरीदेगी। सरकार गोबर गांव के गरीबों से ही खरीदेगी। ताकि पैसा गरीबों के पास जाए। यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा कि योजना का लाभ सिर्फ गरीबों को ही मिले इसके लिए सरकार क्या व्यवस्था करने वाली है।कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने तो यह स्पष्ट कर दिया है कि यह योजना पूरी तरह गरीबों के लिए हैं।इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग अपने मवेशियों को खुला न छोड़े।सरकार की ज्यादातर योजनाएं गरीब, किसान,आदिवासी की बेहतरी के लिए है, गोधन न्याय योजना ऐसी योजना है जिससे गरीबों, किसानों व आदिवासियों तीनों को लाभ होगा। गरीब व आदिवासी गोबर बेचकर दो पैसा कमाएंगे तो गोबर खाद का उपयोग कर किसान ज्यादा फसल ले सकेंगे। किसान न्याय योजना की तरह गोधन न्याय योजना का सही क्रियान्वयन हो सका तो इसका लाभ छत्तीसगढ की बड़ी आबादी को मिलेगा तो कांग्रेस काे इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री भपेश बघेल की छबि एक कांग्रेस नेता से ज्यादा एक किसान नेता की बनेेगी। इससे वह प्रदेश में अपनी व पार्टी की स्थिति को और ज्यादा मजबूत कर सकेंगे।