बेमेतरा (शोर सन्देश)। कृषि विज्ञान केन्द्र ढोलिया बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ राज्य के मैदानी भाग में कृषि जलवायु क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी के संबंध मे सलाह दी है। इसके लिए भूमि की तैयारी खाद और बीजों का प्रबंध आवश्यक करें। मानसून सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में सक्रिय हैं। कीट व्याधियों के प्रतिरोध और सहनशील किस्में छत्तीसगढ़ राज्य और विकास निगम, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में उपलब्ध है। इन पर पौध रोगों और कीटों का असर कम होता है। किसान भाई मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही खाद उर्वरक का उपयोग करें। अनावश्यक रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से मृदा उर्वरक बुरी तरह से प्रभावित होती है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे मेघदूत एप पर रजिस्टर करें। मौसम और खेती संबंधी जानकारी प्राप्त करें। छत्तीसगढ़ के अधिकांश भागों में मानसून वर्षा प्रारंभ हो चुकी हैं। कृषक भाई आवश्यकतानुसार खेतों की जुताई कर खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि) की बोआई करें। बोआई कतारों में करें। बोआई के पूर्व बीजों को उपचारित करें। कतार बोनी में दानेदार उर्वरक सीड ड्रिल के लिए उपयोग में लाये। वर्षा की मात्रा पर्याप्त मात्रा में हो चुकी है, इसलिए किसान भाई कृषि कार्यो को प्राथमिकता दे। विभिन्न धान पद्धतियों में समन्वित खरपतवार प्रबंधन:- धान की उपज पर खरपतवारों के प्रतिकूल प्रभाव को समाप्त करना और कम से कम करना ही खरपतवार नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य है। खरपतवार विरोधी वातावरण उत्पन्न करने के लिए परिस्थितियों के अनुसार एक से अधिक तरीकों जैसे दृयांत्रिक, सस्य क्रियाओं, जैविक व रासायनिक विधियों का उपयोग लाभकारी पाया गया है (दवाओं की मात्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर में दी गई है )। नर्सरी :- यथासंभव नर्सरी की जमीन तैयार कर सिंचाई कर दें और जब खरपतवार उग आयें तो जुताई से नष्ट कर दें। तत्पश्चात भूमि तैयार कर थरहा डालने पर खरपतवारों का प्रकोप कम होता है। बतर स्थिति में थरहा डालने के 3-4 दिन के अंदर थायोबेन्कार्प 1-1.5 कि./हे. या आक्साडायर्जिल 70-80 ग्राम/हे. सक्रिय तत्व का छिडकाव करें।