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हेल्दी समझकर खा रहे हैं ड्राई फ्रूट्स? दिल और किडनी पर पड़ सकता है भारी असर

03-Sep-2025
शोर संदेश )  ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन किसी भी चीज़ का अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, और यह बात ड्राई फ्रूट्स पर भी लागू होती है। कुछ ड्राई फ्रूट्स ऐसे होते हैं जिनका ज़्यादा सेवन हार्ट से लेकर किडनी की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इन ड्राई फ्रूट्स का ज़्यादा सेवन है खतरनाक:
अखरोट: अखरोट दिल और दिमाग के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन इसमें कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है। इसके ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ता है। ज़्यादा अखरोट खाने से कुछ लोगों को पेट फूलना, गैस या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को अखरोट से एलर्जी हो सकती है, जिससे सूजन या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
पिस्ता: पिस्ता भी प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं। लेकिन अखरोट की तरह, पिस्ता में भी कैलोरी ज़्यादा होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। इसमें ऑक्सालेट होते हैं, जो किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ाते हैं। नमकीन पिस्ता खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है, जो हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए हानिकारक है।
काजू: काजू में हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन और मिनिरल्स होते हैं। लेकिन इनके ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है जो हार्ट की हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है। पिस्ता की तरह, काजू में भी ऑक्सालेट होते हैं जो किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ाते हैं। जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या रह चुकी है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
चिलगोजा: चिलगोजा में कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है। एक छोटी मुट्ठी भी काफी कैलोरी दे सकती है, इसलिए इसेक ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है। फैट से भरपूर होने के कारण ज़्यादा चिलगोजा खाने से कुछ लोगों को अपच या पेट खराब हो सकता है।
एक दिन में कितना ड्राइफ्रूट्स खाएं?
किसी भी ड्राई फ्रूट का सेवन संयमित मात्रा में ही करना चाहिए। आमतौर पर, एक दिन में एक छोटी मुट्ठी (लगभग 20-30 ग्राम) मिश्रित ड्राई फ्रूट्स का सेवन पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है। अपनी डाइट में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।

 

 


लोहे के बर्तनों में भूलकर भी न पकाएँ ये चीजें, हो सकता है सेहत को नुकसान

03-Sep-2025
 शोर संदेश )  अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो मिट्टी के बर्तनों और लोहे के बर्तनों में खाना पकाएँ और खाएँ, क्योंकि आजकल खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के बर्तन, जैसे एल्युमीनियम, स्टील, नॉन-स्टिक कुकवेयर जानलेवा हो सकते हैं। नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाने से कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
आजकल लोग बीमारियों के प्रति ज़्यादा जागरूक हो गए हैं। यही वजह है कि जो लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहते हैं, वे मिट्टी और लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल तेज़ी से कर रहे हैं। लेकिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद ज़रूरी हो गया है। खासकर, कुछ तरह के खाद्य पदार्थों को लोहे के बर्तनों में नहीं पकाना चाहिए।
खट्टे और अम्लीय खाद्य पदार्थ: नींबू, टमाटर, सिरका, दही और खट्टी कढ़ी जैसे अम्लीय चीजें लोहे के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं। इससे न केवल व्यंजन में धातु जैसा स्वाद आ सकता है, बल्कि कुछ मामलों में एलर्जी भी हो सकती है। यदि आप इन व्यंजनों को लोहे के बर्तन में पकाने से बचें।
डेयरी उत्पाद: पनीर, दही और अन्य डेयरी उत्पादों को लोहे के बर्तनों में नहीं पकाना चाहिए। लोहे के साथ मिलने पर इनका स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। इसके अलावा, जब डेयरी उत्पादों को लोहे के बर्तनों में पकाया जाता है, तो उनका रंग खराब हो जाता है और वे देखने में भी अच्छे नहीं लगते।
मछली: मछली परतदार और चिपचिपी बनावट के कारण लोहे के तवे पर चिपक सकते हैं। तेल या मक्खन का इस्तेमाल करने के बावजूद भी यह समस्या आ सकती है, जिससे मछली का स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है। धीमी आंच पर लोहे की कढ़ाई में मछली पकाने से बचना ही बेहतर है।
मिठाइयाँ: भले ही भारतीय मिठाइयाँ कढ़ाई में बनती हों, लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल कम ही होता है। लोहे के बर्तन में पहले से पके हुए खाने की गंध रह सकती है, जिससे मिठाइयों का स्वाद और खुशबू बदल सकती है।
लोहे की कड़ाही में पका हुआ खाना तुरंत किसी दूसरे कांच या एनामेल के बर्तन में रख दें। कढ़ाई को तेज़ स्क्रबर या बहुत हल्के स्पंज से न रगड़ें। लोहे के बर्तन धोने के लिए हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें। धोने के तुरंत बाद लोहे के बर्तनों को कपड़े से पोंछ लें। लोहे के बर्तनों को रखने से पहले उन पर सरसों के तेल की एक पतली परत लगाएँ। पके हुए खाने को लोहे के बर्तनों में घंटों तक न रखें, क्योंकि इससे धातु जैसा स्वाद या गंध आ सकती है। बर्तन को जंग लगने से बचाने और उसकी गंध को दूर करने के लिए हमेशा उपयोग के बाद गर्म रहते ही साफ कर लें।
 

 


अमरूद के पत्तों में छिपे आयुर्वेदिक फायदे

29-Aug-2025
 शोर संदेश ) अमरूद का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं अमरुद के पत्तों भी आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होते हैं। अमरुद के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनिरल्स होते हैं जो समग्र स्वास्थ्य का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं अमरुद का सेवन करने से सेहत को कौन से फायदे होते हैं और इसका इस्तेमाल कैसे करें?
अमरुद के पत्तों से मिलते हैं ये फायदे:
पाचन होता है बेहतर: अमरूद के पत्ते एसिडिटी को कम करके और पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण को बढ़ावा देकर दस्त और सूजन जैसी पाचन समस्याओं में मदद कर सकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है मजबूत: अमरूद के पत्तों में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट के उच्च स्तर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं।स्किन से जुड़ी परेशानियां होती हैं दूर: अमरूद के पत्तों का उपयोग उनके विरोधी भड़काऊ और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण मुँहासे, काले धब्बे और उम्र बढ़ने के संकेतों सहित विभिन्न त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है।
दांतों के लिए फायदेमंद: अमरूद के पत्तों को चबाने से दांत दर्द और मसूड़ों की समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद जीवाणुरोधी गुण मसूड़ों की बीमारी, दांत दर्द और सांसों की बदबू को रोकने में मदद करते हैं।
हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी: अमरूद के पत्ते खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके और संभावित रूप से रक्तचाप विनियमन का समर्थन करके हृदय स्वास्थ्य में योगदान दे सकते हैं।
रक्त शर्करा नियंत्रण: अमरूद के पत्ते रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, संभावित रूप से मधुमेह वाले व्यक्तियों या जोखिम वाले लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
पीरियड्स के दर्द में फायदेमंद: अमरूद के पत्ते मासिक धर्म में ऐंठन के लिए भी लाभ प्रदान कर सकते हैं, संभावित रूप से दर्द की तीव्रता को कम करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी सहायता कर सकते हैं।
कैसे करें अमरुद के पत्तों का इस्तेमाल?
ताजे या सूखे अमरूद के पत्तों को 5-10 मिनट तक पानी में उबालें फिर उसे छानकर पिएं। आप स्वाद के लिए शहद या नींबू मिला सकते हैं। अमरूद के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा होने दें। शैम्पू करने के बाद ठंडे पानी से बालों को धोएँ, इससे बाल मज़बूत होंगे और बालों का झड़ना कम होगा। आराम और सुगंधित स्नान के लिए अपने नहाने के पानी में अमरूद के पत्ते डालें।













 

गरियाबंद में रक्तदान शिविर: युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

23-Aug-2025
गरियाबंद । ( शोर संदेश ) शासकीय जिला अस्पताल में आज प्रजापति ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय एवं गरियाबंद ब्लड डोनर ग्रुप द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर  बी. एस. उइके ने शिविर का निरीक्षण कर समस्त व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और रक्तदाताओं से भेंटकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कलेक्टर उइके ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान एक महान मानवीय सेवा है। प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान कर समाज में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्त की उपलब्धता से गंभीर रूप से बीमार मरीजों, प्रसवकालीन जटिलताओं से गुजर रही महिलाओं तथा दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाया जा सकता है।
उन्होंने प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन एवं बल्ड डोनर ग्रुप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सेवा एवं सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि रक्तदान शिविर में आने वाले सभी दाताओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर रक्त दान की प्रक्रिया पूर्ण करे। उन्होंने कहा कि रक्त संग्रहण एवं भंडारण की प्रक्रिया पूर्णत: सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से करे, ताकि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ समय पर मिल सके।
जिला अस्पताल में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर समाज सेवा का संकल्प लिया। शिविर में जिला अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही। इस अवसर पर प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर उइके को संस्था की गतिविधियों और सामाजिक योगदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था समय-समय पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित करती है। शिविर के दौरान वातावरण में उत्साह और सेवा भाव का संचार दिखाई दिया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए और उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। इस कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ. यू एस नवरत्न, सिविल सर्जन डॉ. वाय के ध्रुव, चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीश चौहान सहित जिला अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी, प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन के पदाधिकारी, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।


















 

कवर्धा जिला अस्पताल में सीटी स्कैन सुविधा शुरू, एक माह में 145 मरीजों को मिला लाभ

23-Aug-2025
रायपुर,। शोर संदेश ) प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल के निर्देश पर कबीरधाम जिले को एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। जिला बनने के बाद पहली बार कबीरधाम जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा प्रारंभ की गई है। 25 जुलाई 2025 को इस सुविधा का शुभारंभ हुआ और महज एक माह से भी कम समय में लगभग 145 मरीजों को इसका लाभ मिल चुका है।
अब तक कबीरधाम जिले के लोगों को सीटी स्कैन जैसी जांच के लिए रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इसमें समय और धन दोनों की दिक्कत होती थी। लेकिन अब यह सुविधा शासकीय जिला अस्पताल में उपलब्ध होने से जरूरतमंद मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ केशव ध्रुव ने बताया कि महज एक माह से भी कम समय में लगभग 145 मरीजों को इसका लाभ मिल चुका है। अब तक सीटी स्कैन जांच का लाभ विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों ने उठाया है जिसमें पंडरिया ब्लॉक से  22 मरीज,बोडला से 35 मरीज, सहसपुर लोहारा से  25 मरीज, कवर्धा शहरी और ग्रामीण क्षेत्र से 50 मरीज अन्य जिलों से  13 मरीज । इनमें से 14 मरीजों का स्कैन आपातकालीन स्थिति में किया गया, जो मरीजों के उपचार में बेहद सहायक साबित हुआ।







 

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने लिया जिला चिकित्सालय बालोद का जायजा

22-Aug-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश ) प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गुरुवार को बालोद जिले के प्रवास के दौरान जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर अस्पताल के व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद के सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के स्वास्थ्य सुविधाओं का पड़ताल किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आम जनता को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद में निश्चेतना विशेषज्ञ, नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ एवं रेडियोलॉजिस्ट सहित 03 विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा जिले के अनुसूचित क्षेत्रों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से बालोद जिले के लिए 04 मोबाईल मेडिकल यूनिट शीघ्र प्रदान करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद में भर्ती मरीजों के परिजनों के विश्राम हेतु जिला चिकित्सालय परिसर में अतिरिक्त भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये प्रदान करने की भी घोषणा की। 
इसके अलावा उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकतानुसार शव गृहोें के निर्माण के साथ-साथ वहाँ पर फ्रीजर आदि सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने जरूरी मदद उपलब्ध कराने की बात कही। इस मौके पर संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा, डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनिला भेड़िया, गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर,  सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएल उइके, मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके श्रीमाली सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के निरीक्षण के दौरान पंजीयन कक्ष में पहुँचकर अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की औसतन संख्या के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय के ओपीडी कक्ष, आपात चिकित्सा कक्ष के अलावा अस्पताल के विभिन्न कक्षों का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पहुँचकर मरीजों का हाल-चाल जाना। उन्होंने अस्पताल मेें भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य का हालचाल के अलावा उनका इलाज, दवाइयों की समुचित उपलब्धता, समय पर भोजन, नाश्ता आदि सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल के वार्डों एवं स्नानागार की स्थिति एवं समय पर चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पुरूष मेडिकल वार्ड में भर्ती दल्लीराजहरा के मरीज रामप्रसाद एवं बालोद निवासी चेतन प्रकाश से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने मौके पर उपस्थित चिकित्सकों को तलब कर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए निर्देशित भी किया। स्वास्थ्य मंत्री ने महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती ग्राम संबलपुर निवासी बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम पुछा। उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को बुजुर्ग महिला की बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल में नर्सिंग के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना।
जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के सभाकक्ष में जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के साथ चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के चिकित्सा व्यवस्था का पड़ताल किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को जिला चिकित्सालय में प्रतिमाह होने वाले प्रसव की संख्या एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं चिकित्सा अधिकारियों के कुल स्वीकृत पद के विरूद्ध वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों की संख्या इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में एक्सरे एवं सोनोग्राफी मशीन तथा अन्य चिकित्सीय सुविधा एवं मानवीय संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने तथा अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में अपने कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं ईच्छा शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सीय पेशा को बहुत ही पावन, पुनीत कार्य बताते हुए चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को पूरी निष्ठा, लगन, मनोयोग तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के निर्देश भी दिए। 
मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के अलावा जिले के अन्य चिकित्सालयों में भी उपलब्ध संसाधनों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कलेक्टर को सूचित कर आवश्यकतानुसार जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा। इसके अलावा बड़े स्तर पर संसाधन एवं सुविधा उलपब्ध कराने के लिए उन्हें सूचित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में  जायसवाल ने मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जिले में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी दिया। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों के मांग पर जिले के दुर्घटनाजन्य पुरूर क्षेत्र में 108  एवं मंगचुवा क्षेत्र में 102 एम्बुलेंस सेवा शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से आम जनता के हित में बालोद जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित की जाएंगी।





 

झड़ते बालों का आयुर्वेदिक समाधान: शहनाज़ हुसैन ने बताया मुलेठी का जादुई नुस्खा

20-Aug-2025
लंबे, घने और चमकदार बालों की चाहत हर किसी को होती है, लेकिन बालों का झड़ना आज आम समस्या बन चुकी है। लोग महंगे उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी स्थायी समाधान नहीं मिलता। ऐसे में आयुर्वेदिक नुस्खे मददगार साबित हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ एवं हर्बल क्वीन शहनाज़ हुसैन के अनुसार मुलेठी पाउडर बालों के झड़ने, डैंड्रफ और गंजेपन जैसी समस्याओं का रामबाण इलाज है।
उनका कहना है कि मुलेठी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण खोपड़ी को स्वस्थ रखते हैं। अगर डैंड्रफ की समस्या है तो नींबू, शहद और मुलेठी पाउडर का स्क्रब सप्ताह में दो बार लगाने से लाभ होगा। वहीं हेयर फॉल और गंजेपन से निजात पाने के लिए मुलेठी पाउडर, केसर और दूध से बना मिश्रण रातभर बालों पर लगाने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा मुलेठी, दही और जैतून तेल से बना पेस्ट बालों को मजबूत करता है। केला, मेहंदी और मुलेठी पाउडर से तैयार हेयर मास्क बालों को पोषण देता है। असमय सफेद हो रहे बालों के लिए दही और मुलेठी का पेस्ट कारगर उपाय माना गया है।
शहनाज़ हुसैन कहती हैं कि मुलेठी को तेल या मास्क के रूप में नियमित रूप से प्रयोग करने से बाल झड़ने की समस्या कम होने के साथ-साथ बाल घने, काले और आकर्षक बनते हैं। 
















 

छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

19-Aug-2025
रायपुर, शोर संदेश स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ के औषधि निरीक्षकों की टीम द्वारा प्रदेश स्तर पर प्रावधानों के उल्लंघन करने वाले व्यापारियों तथा नशीली दवाइयों के अवैध व्यापार में संलिप्त नशे के सौदागरों के विरुद्ध सघन छापा मार कार्यवाही की गयी है।
विभाग द्वारा नशे के व्यापार में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध लगातार कार्यवाहियां की जा रही है। इसी कड़ी में  पटना पुलिस जिला कोरिया एवं खाद्य एवं औषधि प्रशासन जिला कोरिया की संयुक्त टीम के द्वारा मुखबिर सूचना के आधार पर मांजा मोड़ कुडेली के पास घेराबंदी कर  एक आरोपी के कब्जे से 15 स्ट्रिप कुल 120 नग स्पासमों प्रोक्सीवोन पल्स कैप्सूल बरामद किया गया। आरोपी पर एन डी पी एस एक्ट 1985 की धारा 22 के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।
राज्य के आमजनों को उच्च गुणवत्तायुक्त औषधियां उपलब्ध हो सके इस हेतु राज्य के औषधि निरीक्षकों के द्वारा प्रदेश के औषधि प्रतिष्ठानों में लगातार निरीक्षण किया जा रहा है और प्रावधानों के उल्लंघन पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाहियां की जा रही है।
इसी कड़ी में विभाग द्वारा पिछले एक हफ्ते में कुल 163 औषधि प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया जिसमे से 06 फर्मों श्री राम मेडिकल स्टोर्स कांकेर, यदु मेडिकल स्टोर्स नरहरपुर, साहू मेडिकल स्टोर्स चारामा, जैस्मिन मेडिकल पलारी, चंद्राकर मेडिकल सोते खैरागढ़, सद्‌गुरु मेडिकल स्टोर्स  खैरागढ़ में अनियमितता पाए जाने पर प्रशासनिक कार्यवाही हेतु अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्रेषित किया गया है। उक्त निरीक्षण किये गए फर्मों में से कुल 19 फर्मों में CCTV कैमरा इंस्टॉल नहीं पाया गया, जिन्हे 7 दिवस के भीतर कैमरा इंस्टॉल करवाने हेतु निर्देशित किया गया।
राज्य में औषधियों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने हेतु विभाग के औषधि निरीक्षको के द्वारा जाँच हेतु नियमित नमूना संग्रहण किया जा रहा है। इसी कड़ी में पिछले एक हफ्ते में कुल 35 औषधियों का विधिक नमूना संकलन किया गया एवं जाँच हेतु राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया। राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर के द्वारा कुल 19 औषधि नमूनों का जाँच किया गया। उक्त समस्त औषधि को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला कालीबाड़ी रायपुर के द्वारा मानक स्तर का घोषित किया गया है।
इसी तरह विभाग द्वारा कुल 03 ब्लड सेंटर्स और 01 निर्माण इकाई का निरीक्षण किया गया। सृष्टि ब्लड सेण्टर रायपुर एवं बिलासा ब्लड सेण्टर कोरबा का मुंबई से आये सीडीएससीओ के अधिकारियो के साथ नवीनीकरण हेतु निरीक्षण किया गया तथा सराईपाली में नवीन लाइसेंस जारी करने हेतु शुभा ब्लड सेण्टर का निरीक्षण किया गया। इसी कड़ी में चाम्पा स्थित ऑक्सीजन निर्माता फर्म साकेत ऑक्सीजन का निरिक्षण किया गया एवं आगामी कार्यवाही हेतु रिपोर्ट मुख्यालय प्रेषित किया गया।
राज्य के युवा पीढ़ी को तम्बाखू एवं अन्य पान मसाला के नशे से बचाने हेतु कोटपा एक्ट के तहत विभाग द्वारा राज्य में निरंतर सघन अभियान चलाया जा रहा है, इसी कड़ी में इस हफ्ते कुल 132 चालानी कार्यवाही करते हुए कुल 14 हजार 480 रुपए वसूल किये गए।
राज्य में आमजनों को जीवन रक्षक औषधियां सरकार द्वारा तय दाम में उपलब्ध हो सके इस उद्देश्य से विभाग के अंतर्गत संचालित पीएमआरयू यूनिट के द्वारा राज्य के औषधि प्रतिष्ठानों में नियमित निरीक्षण किया जाता है और तय दाम से अधिक में विक्रय हो रहे औषधियों के नमूना संकलन कर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। इसी कड़ी मे पीएमआरयू युनिट के द्वारा कुल 10 फर्मों में निरीक्षण कर कुल 04 औषधियों इटरारेंज टेबलेट बैच नंबर C4017A निर्माता सैमसन लैबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड सोलन (हिमाचल प्रदेश), इटरारेंज टेबलेट बैच नंबर C40155 निर्माता सैमसन लैबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड सोलन (हिमाचल प्रदेश), वेरजिम 50 टेबलेट बैच नंबर 1B1-413 टिकोमा फार्मासिया जिला मोहाली (पंजाब), इट्राहील 200 टेबलेट बैच नंबर SPC-1261 शीन फार्मास्यूटिकल जालन्धर (पंजाब) को तय दाम से अधिक मूल्य में विकय होते हुये पाया गया जिसमे प्रकरण तैयार कर नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी नई दिल्ली को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है। यह औषधियां फंगस और बैक्टीरिया जनित रोगो के इलाज में उपयोग किया जाता है।

रायगढ़ में रोशनी की क्रांति 11 लाख से अधिक लोगों का नेत्र सर्वेक्षण

14-Aug-2025
रायपुर, शोर संदेश )14अगस्त 2025 राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी संचालन से कभी धुंधलेपन और अंधेरे में घिरा जीवन, अब चमकती रोशनी और नई उम्मीदों से भरा हुआ है। यह बदलाव कलेक्टर रायगढ़ के मार्गदर्शन में जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 29 नेत्र सहायक अधिकारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के सहयोग से राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सत्र 2025-26 में जिले के 11 लाख 56 हजार 970 लोगों का सर्वेक्षण किया गया। इस व्यापक अभियान में 3925 मोतियाबिंद के मरीजों की पहचान हुई, जिनमें 314 दोनों आंखों से, 3604 एक आंख से और 7 बच्चे जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए। जुलाई 2025 तक 1002 मरीजों के सफल ऑपरेशन हुए, जिनमें 183 दोनों आंखों के, 815 एक आंख के और 4 जन्मजात मोतियाबिंद के बच्चे शामिल रहे। प्रत्येक ऑपरेशन ने किसी न किसी के जीवन में फिर से उजाला भर दिया।
दूरस्थ अंचलों के बच्चों की दृष्टि के लिए विशेष प्रयासः-
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए यूनिक आईडी कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु विशेष शिविर आयोजित किए गए, इसमें बाकारूमा और घरघोड़ा के बच्चों के माता-पिता को ऑपरेशन के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया, जिसके सफल इलाज के बाद उनकी आंखों की ज्योति लौट आई। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत माह जुलाई तक 136 शासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 6586 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण किया गया, इनमें 318 बच्चे दृष्टिदोष से पीड़ित पाए गए और उन्हें आवश्यकता अनुसार निःशुल्क चश्में प्रदान किए गए। कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से दूरस्थ विकासखंडों और जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्र के बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया। इनमें धरमजयगढ़ के ग्राम सूपकोना के 13 वर्षीय अनूप प्रकाश राठिया, रैरूमाखुर्द की 6 वर्षीय पूर्णिमा राठिया, घरघोड़ा के ग्राम बटूराकछार के 11 वर्षीय परदेशी यादव और रायगढ़ के कबीर चौक की 13 वर्षीय कुमारी दृष्टि राय का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ। अब ये बच्चे पहले की तरह साफ-साफ देख पा रहे हैं और पढ़ाई में अपना भविष्य संवार रहे हैं। 
माता-पिता ने कहा-यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि हमारे बच्चों को नया जीवन दियाः-
रायगढ़ की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब संवेदनशील नेतृत्व, संगठित टीमवर्क और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता मिलती है, तो हजारों जीवन में उजाला फैलाया जा सकता है। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि दृष्टि, विश्वास और भविष्य लौटाने की कहानी है। इस मुहिम में जिला नोडल अधिकारी डॉ. मीना पटेल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैकरा, डॉ. आर. एम. मेश्राम, डॉ. पी. एल. पटेल, डॉ. उषा किरण भगत, निजी नेत्र रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जन्मजात मोतियाबिंद के बच्चों के माता-पिता ने कहा-यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि हमारे बच्चों को नया जीवन देने जैसा है। उन्होंने शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2024-25 में मोतियाबिंद ऑपरेशन के क्षेत्र में शासकीय जिला चिकित्सालय रायगढ़ ने राज्य ने प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया और रायगढ़ को राज्य के 11 मोतियाबिंद फ्री जिलों में शामिल किया गया।
 

गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए प्रदेश में विशेष आयुष अभियान

14-Aug-2025
रायपुर,  शोर संदेश  14अगस्त 2025 प्रदेश के 28 जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सकों के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा भी राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम का हो रहा है संचालन राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS) के प्रभावी संचालन के लिए प्रदेश में विशेष पहल की जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, स्ट्रोक जैसे गंभीर गैर-संचारी रोगों की शीघ्र पहचान, रोकथाम और नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
प्रदेश के 28 जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सकों के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा भी राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 5 जिला अस्पतालों में आयुर्वेद-आधारित लाइफस्टाइल क्लिनिक स्थापित किए गए हैं।
राज्य के 400 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 32 योगा और वेलनेस सेंटर्स में योग, ध्यान, आहार एवं औषधियों के माध्यम से रोगों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं, स्क्रीनिंग शिविरों के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर की समय पर जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें समुदाय में स्वास्थ्य शिक्षा और रोग-निरोधी सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम बनाया गया है। इस पहल से जनस्वास्थ्य में सुधार, रोगों का बोझ कम करने और आयुर्वेद पद्धति के प्रति जन-विश्वास में वृद्धि हो रही है।
 



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