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दूरस्थ बस्तर तक पहुंचीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, डब्ल्यूएचओ ने सराहा अभियान

14-Jul-2026
रायपुर  (शोर संदेश)बीजापुर जिले के अति-संवेदनशील डोडीतुमनार (तुमनार) क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदूरवर्ती ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से शिविर आयोजित किए जाते हैं। बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे पूर्व के नक्सल-प्रभावित बस्तर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए दिल्ली और राज्य स्तरीय अधिकारी समय-समय पर दौरा करते है। इन क्षेत्रों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की जाती है ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और कुपोषण जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान (एमएसबीए) के तहत बीजापुर जिले के विकासखंड बीजापुर स्थित दूरस्थ ग्राम डोडीतुमनार में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण राज्य स्तरीय दल और दिल्ली से आई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम ने किया। टीम ने शिविर में दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का अवलोकन करते हुए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की।
निरीक्षण के दौरान डब्ल्यूएचओ टीम ने ग्राम डोडीतुमनार के निवासी सोमलू मड़ियाम और उनके परिवार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत हुई स्क्रीनिंग में उनके बच्चे में नेफ्रोटिक सिंड्रोम की समय रहते पहचान हुई थी। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख, नियमित उपचार और फॉलो-अप से बच्चे के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आया। टीम ने इसे समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
स्वास्थ्य शिविर में 116 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया गया। शिविर में मलेरिया जांच, बुखार, सर्दी-खांसी, दर्द, खुजली, उल्टी-दस्त जैसी सामान्य बीमारियों का उपचार किया गया। इसके साथ ही बच्चों का नियमित टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों का वितरण, स्वास्थ्य परामर्श और अन्य चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
डब्ल्यूएचओ टीम ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में समय पर बीमारी की पहचान, उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह अभियान ग्रामीणों को उनके गांव के पास ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहा है।
स्वास्थ्य शिविर के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला टीकाकरण अधिकारी, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक, ब्लॉक विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम, मितानिन तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


 

 


गादीरास मेगा मेडिकल कैंप में 447 ग्रामीणों को मिली विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं

13-Jul-2026
रायपुर (शोर संदेश)।ग्रामीण और सुदूर इलाकों में आयोजित होने वाले निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप (Mega Medical Camps) आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के मरीजों के लिए एक वरदान साबित होते हैं l  ये शिविर गाँव के दरवाजे तक उच्च-स्तरीय चिकित्सा, विशेषज्ञ परामर्श, मुफ्त दवाइयाँ और गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक जाँच सीधे पहुँचाकर ग्रामीणों को बड़ी राहत देते हैं l
सुदूर वनांचल के सुकमा जिले के दूरस्थ ग्राम पंचायत गादीरास में जिला प्रशासन की पहल से आयोजित निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में कलेक्टर अमित कुमार की विशेष पहल पर आयोजित इस शिविर में 447 ग्रामीणों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच का लाभ मिला।
शिविर में आंध्र प्रदेश के ग्रेट ईस्टर्न मेडिकल स्कूल एंड हॉस्पिटल, रागोलू-श्रीकाकुलम के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर मरीजों की जांच और उपचार किया। मेडिसिन, जनरल सर्जरी, बाल रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञों ने प्रत्येक मरीज का परीक्षण कर आवश्यक सलाह दी।
मेडिकल कैंप में सभी मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी और 2डी-ईको जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी बिना किसी शुल्क के की गईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज के साथ आर्थिक राहत भी मिली।
जांच के दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया। इनमें 12 अस्थि रोग, 10 शिशु रोग और 27 जनरल सर्जरी के मरीज शामिल हैं। जिला प्रशासन ने इन मरीजों के आवागमन के लिए निःशुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध कराई, ताकि इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
शिविर के दौरान पात्र हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया गया। कुल 62 आयुष्मान कार्ड और 10 वय वंदन कार्ड वितरित किए गए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
गादीरास में आयोजित यह निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप इस बात का उदाहरण है कि जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, निःशुल्क जांच, दवाइयां, रेफरल सुविधा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलने से ग्रामीणों में खुशी और विश्वास दोनों बढ़े हैं। यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
 

घर-घर स्वास्थ्य जांच, मलेरिया और डेंगू पर प्रहार, बस्तर में तेज हुआ अभियान

10-Jul-2026
रायपुर।  (शोर संदेश) मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग के सभी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर गांवों तक पहुंचाने के लिए शुरू किया गया एक व्यापक मेगा हेल्थ ड्राइव है। इस अभियान के तहत गांव-गांव और घर-घर जाकर हर नागरिक की मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की नीति के अनुरूप बस्तर जिले में "स्वच्छ एवं स्वस्थ बस्तर अभियान" के तहत मलेरिया मुक्त बस्तर के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू तथा अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं।
अभियान के तहत स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान कर उनकी जांच कर रहा है। आवश्यकतानुसार मलेरिया और डेंगू की स्क्रीनिंग के साथ त्वरित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में लार्वा सर्वे, मच्छरों के प्रजनन स्थलों का नष्टिकरण, फॉगिंग तथा दवाओं के छिड़काव जैसे प्रभावी उपाय लगातार किए जा रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनजागरूकता को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी का जमाव रोकने, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने तथा बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से व्यापक स्वच्छता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत बनाएं, घरों एवं आसपास पानी जमा न होने दें तथा किसी भी प्रकार के बुखार या संदिग्ध लक्षण होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराएं। प्रशासन का विश्वास है कि जनसहभागिता और सतत जागरूकता के माध्यम से मलेरिया मुक्त, स्वच्छ और स्वस्थ बस्तर के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकेगा।

जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे माता-पिता, डॉक्टरों ने 50 दिन की जंग लड़कर बचाई मासूम की जिंदगी

26-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों ने एक बार फिर सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की है। रायगढ़ मेडिकल कालेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की टीम ने जूटमिल, रायगढ़ निवासी ललित एवं सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों के सफल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके माता-पिता को सौंपा। 
गर्भावस्था के 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु मात्र 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म लेते ही शिशु को गंभीर श्वसन संबंधी समस्या हुई और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण सेप्सिस एवं निमोनिया जैसी जटिलताएं पाई गईं। शिशु की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। 
उपचार के दौरान शिशु को कई बार रक्त एवं प्लाज्मा चढ़ाया गया। व्यापक एंटीबायोटिक एवं एंटीफंगल दवाओं से संक्रमण पर काबू पाया गया। स्थिति में सुधार होने पर वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन NIV पर लाया गया। भर्ती के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफल उपचार किया गया।
डॉ.एल .के.सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय शिशु की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि माता-पिता उम्मीद छोड़कर अस्पताल आना बंद कर चुके थे। इसके बावजूद NICU टीम ने हार नहीं मानी और शिशु का उपचार निरंतर जारी रखा। टीम के प्रयासों से शिशु ने धीरे-धीरे दूध लेना शुरू किया, वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित हुईं।छुट्टी के समय शिशु पूरी तरह स्थिर था, दौरे-मुक्त ,सामान्य वातावरण में पर्याप्त ऑक्सीजन स्तर बनाए हुए था । 
डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ,विभागाध्यक्ष बाल्य एवं शिशु रोग के नेतृत्व में डॉ. गौरव क्लॉडियस सहायक प्राध्यापक , वरिष्ठ रेसिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी एवं समस्त नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ ने 23दिन वेंटिलेटर  और 17दिन ऑक्सीजन सपोर्ट में रहे शिशु को पूरे 50 दिनों तक दिन-रात निगरानी कर उपचार किया और एक नन्ही जिंदगी को बचाया ।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने कहा कि यह सफलता हमारे चिकित्सकों ,नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के समर्पण का परिणाम है। मरीज की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। कठिन से कठिन केस में भी हम पूरी निष्ठा से उपचार करते हैं। इस उपचार में लगे रक्त, प्लाज्मा और अन्य सुविधाओं का पूरा खर्च अस्पताल प्रबंधन ने वहन किया l वही निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च 6-7लाख रुपए आता हैं । जो हमारे यहाँ पूर्णतः निःशुल्क इलाज हुआ।
इस सफलता पर अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने NICU टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकों के समर्पण, सतत निगरानी, उत्कृष्ट चिकित्सकीय कौशल एवं उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है l जिसने एक नन्हे जीवन को नई शुरुआत दी है l
 

 


देश में दवाओं की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी, मई में 159 दवा नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे

23-Jun-2026
नई दिल्ली।   (शोर संदेश) देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ लगातार निगरानी अभियान चला रहा है। इसी क्रम में मई 2026 के लिए जारी मासिक गुणवत्ता जांच रिपोर्ट में कुल 159 दवा नमूनों को “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” यानी मानक गुणवत्ता से कम पाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 46 दवा नमूनों को और विभिन्न राज्यों की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 दवा नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया।
किसी दवा को एनएसक्यू घोषित किए जाने का अर्थ यह है कि परीक्षण के दौरान वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के एक या अधिक मानकों पर खरी नहीं उतरी। हालांकि, सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि यह निष्कर्ष केवल जांच किए गए विशेष बैचों तक सीमित है। इससे बाजार में उपलब्ध उसी दवा के अन्य बैचों या उत्पादों की गुणवत्ता पर कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
मई 2026 की रिपोर्ट में असम से एक नकली यानी स्प्यूरियस दवा का मामला भी सामने आया है। जांच में पाया गया कि एक अनधिकृत निर्माता ने किसी अन्य कंपनी के स्वामित्व वाले ब्रांड नाम का उपयोग कर इस दवा का निर्माण किया था। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सीडीएससीओ ने कहा है कि राज्य औषधि नियामकों के सहयोग से ऐसी दवाओं की नियमित पहचान की जाती है, ताकि उन्हें बाजार से हटाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित तथा गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
 

विशेष आलेख : ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में 'PM-USHA' की महा-क्रांति

22-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश)।  छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच केंद्र सरकार से मिली प्रमुख स्वीकृतियों और सौगातों की शृंखला में 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) राज्य के लिए वरदान साबित हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की नैशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ग्रेडिंग में सुधार, और अनुसंधान (Research) के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारी-भरकम वित्तीय अनुदान की स्वीकृति दी गई है। यह योजना पूर्ववर्ती राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का ही एक परिष्कृत और अधिक उन्नत रूप है।
इस योजना के तहत देश भर के लिए कुल 12,926.10 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस विशाल बजट का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ के हिस्से आया है। ​योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चयनित पात्र शासकीय विश्वविद्यालयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ (MERU) के अंतर्गत प्रति संस्थान 20 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपए तक का भारी-भरकम अनुदान मिल रहा है। वहीं, चिन्हित शासकीय महाविद्यालयों को बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण (Grants to Strengthen Colleges) के लिए 5 करोड़ रुपए तक का प्रोजेक्ट-बेस्ड अनुदान स्वीकृत किया जा रहा है। इस वित्तीय भार का वहन केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात (60% केंद्रांश और 40% राज्यांश) में किया जा रहा है।
​छत्तीसगढ़ में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर तेजी से प्रगति कर रही है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) निष्पादित किया जा चुका है। वर्तमान में, चयनित कॉलेजों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इसके साथ ही, राज्य के शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक लैब, और कंप्यूटर सेंटर जैसे अत्याधुनिक अधोसंरचना निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
PM-USHA योजना का सबसे खूबसूरत पहलू इसका समावेशी होना है। इस परियोजना का लाभ छत्तीसगढ़ के समस्त 33 जिलों को मिल रहा है। योजना के तहत विशेष रूप से राज्य के ​आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों जैसे बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग,​कम सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले क्षेत्रों,​आकांक्षी जिलों जैसे धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद आदि के शासकीय कॉलेजों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है, ताकि विकास की दौड़ में पीछे छूटे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाया जा सके।
​इस दूरदर्शी परियोजना से राज्य के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत लगभग 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और महिला वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है। अब छत्तीसगढ़ के वनांचलों और दूरदराज के गांवों के युवाओं को भी वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं अपने ही राज्य में सुलभ हो रही हैं, जो उनके सुनहरे भविष्य की मजबूत नींव रख रही हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला, 16 एफडीसी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक

21-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मंत्रालय ने इस संबंध में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसमें देश में उपलब्ध फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं की समीक्षा करने को कहा गया था। इन निर्देशों के अनुपालन में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति का उद्देश्य विभिन्न एफडीसी दवाओं की जांच कर ऐसी दवाओं की पहचान करना था, जो अवैज्ञानिक, चिकित्सकीय रूप से अनुचित या मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिक मूल्यांकन और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर 16 एफडीसी दवाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच में इन दवाओं का चिकित्सीय औचित्य नहीं पाया गया और यह निष्कर्ष निकला कि संभावित जोखिमों की तुलना में इनके उपयोग से मिलने वाला लाभ पर्याप्त नहीं है।
प्रतिबंधित एफडीसी दवाएं विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित हैं। इनमें कुछ त्वचा रोगों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, दर्द निवारक एवं ऐंठनरोधी दवाएं तथा एंटीबायोटिक आधारित दवाएं शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य जनता को केवल सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाएं उपलब्ध कराना है। इससे पहले भी विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। यह मरीजों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बयान में कहा गया कि 16 एफडीसी दवाओं के निर्माण (बिक्री के लिए), बिक्री, वितरण और आपूर्ति पर पूरे देश में तत्काल प्रभाव से रोक लागू रहेगी। सभी राज्य औषधि नियंत्रकों, नियामक प्राधिकरणों और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिसूचना का सख्ती से पालन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्रालय ने दवा निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और अन्य हितधारकों को भी कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है।
 

नीट रिजल्ट के तनाव से जूझ रहे छात्रों को राहत, सिम्स ने शुरू की 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा

19-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) नीट यूजी 2026 परीक्षा परिणाम एवं प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने अभ्यर्थियों के लिए 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार सिम्स के मनोरोग विभाग के माध्यम से यह विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे विद्यार्थियों को समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग मिल सके।
सिम्स अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मोबाइल नंबर 9425502353 को 18 जून 2026 से आगामी दो सप्ताह तक हेल्पलाइन नंबर के रूप में संचालित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम, काउंसिलिंग, प्रवेश प्रक्रिया एवं भविष्य को लेकर होने वाली चिंता, तनाव, घबराहट अथवा अन्य मानसिक समस्याओं के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सकों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका शैक्षणिक प्रदर्शन। नीट जैसी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के दौरान अनेक विद्यार्थी मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे समय में उचित परामर्श एवं सकारात्मक संवाद उन्हें तनाव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन सेवा का अधिकतम उपयोग करने की अपील की। मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत नायक ने  बताया कि परीक्षा परिणाम अथवा प्रवेश प्रक्रिया के दौरान तनाव, चिंता, निराशा और असफलता का भय जैसी स्थितियां सामान्य हैं, लेकिन समय पर परामर्श मिलने से इन समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है। हेल्पलाइन सेवा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखना है।



 

धड़कते दिल को मिला छत्तीसगढ़ का दुलार, 5 साल की अनुष्का को मिला नया जीवन

19-Jun-2026
​रायपुर  (शोर संदेश)  प्रोजेक्ट धड़कन' और 'चिरायु' छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य, विशेष रूप से जन्मजात हृदय रोगों और अन्य गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच और उपचार के लिए चलाई जा रही प्रमुख स्वास्थ्य योजनाएं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ उठाने से बचाना है।
अबूझमाड़ के जंगलों से घिरे नारायणपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक किसान परिवार के लिए उनकी 5 साल की बेटी की धड़कनें ही उनका संसार थीं। लेकिन जब पता चला कि उस मासूम के दिल में जन्मजात बीमारी है, तो मानो उस परिवार की दुनिया ही थम गई। इलाज का भारी-भरकम खर्च और संसाधनों की कमी के बीच जहां उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, वहां राज्य सरकार की योजनाओं ने फरिश्ते की तरह कदम रखा।
​ज़िला प्रशासन नारायणपुर के प्रोजेक्ट धड़कन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के साझा प्रयासों से ओरछा विकासखंड के कुरूषनार गांव की 5 वर्षीय अनुष्का मंडावी का सफल और पूर्णतः निःशुल्क ऑपरेशन किया गया है। यह सफलता की कहानी स्वास्थ्य विभाग के समर्पण और सरकारी योजनाओं की सार्थकता की एक जीती-जागती मिसाल है।
अनुष्का के पिता अर्जुन मंडावी पेशे से किसान हैं और माता प्रमिला मंडावी गृहिणी हैं। सीमित आय के कारण अपनी लाडली के महंगे इलाज की व्यवस्था करना उनके लिए नामुमकिन सा था। इस बीच, चिरायु दल जब नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा, तो उनकी नज़र अनुष्का पर पड़ी। ​चिकित्सकीय जांच में बच्ची के दिल की बीमारी का खुलासा हुआ। चिरायु दल ने बिना वक्त गंवाए परिवार को ढांढस बंधाया और योजना के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज की पूरी जानकारी दी।
इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए चिरायु दल के सदस्य डॉ. सतीश उसेंडी, डॉ. सिलवंती सिंह, फार्मासिस्ट मदन शोरी, लैब टेक्नीशियन दिलीप उसेंडी और एएनएम जसमती कचलाम ने कागजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा कराया।
मामला सामने आते ही जिला प्रशासन तुरंत एक्टिव मोड में आ गया। जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक  के सीधे मार्गदर्शन में अनुष्का को तत्काल श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल भेजा गया। वहां देश के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 12 जून 2026 को मासूम अनुष्का के दिल का सफल और पूरी तरह से निःशुल्क ऑपरेशन किया।
​अब अनुष्का के दिल की धड़कनें पूरी तरह सामान्य हैं और वह तेजी से रिकवर कर रही है। अपनी बेटी को हंसता-खेलता देख माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताते हुए कहा कि अगर चिरायु योजना और प्रोजेक्ट धड़कन का साथ न मिलता, तो हम अपनी बेटी का इलाज कभी नहीं करा पाते। इस योजना ने हमारी बच्ची को एक नया जीवन और हमारे परिवार को नई खुशियां दी हैं।
इस सफल ऑपरेशन के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जरूर कराएं। श्चिरायु योजनाश् के तहत बच्चों की गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में ही करके उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जा सकता है, ताकि कोई भी बचपन संसाधनों की कमी के कारण मुरझाने न पाए।





 

कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए लगा विशेष शिविर, दर्जनों मरीजों की जांच

18-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) कैंसर से बचाव और शुरुआती पहचान के लिए भारत में अक्सर विभिन्न अस्पतालों, सरकारी योजनाओं और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा निःशुल्क जांच शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों के माध्यम से आमजनों को जागरूक किया जाता है। आमतौर पर शिविरों के माध्यम से मुंह, स्तन और सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह) कैंसर जैसी सामान्य बीमारियों की मुफ्त जांच की जाती है।
राष्ट्रीय गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जिला स्वास्थ्य समिति जगदलपुर और बालको मेडिकल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को धरमपुरा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में एक दिवसीय निःशुल्क कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की विशेषज्ञ जांच और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना था, जिसमें कैंसर रोगियों और संभावित मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गईं।
शिविर में अपनी सेवाएं देने के लिए बालको मेडिकल सेंटर से दो कैंसर रोग विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) सहित आठ सदस्यीय विशेष टीम जगदलपुर पहुंची थी। यह टीम अपने साथ एक अत्याधुनिक चलित कैंसर स्क्रीनिंग वैन लेकर आई थी, जिसमें मैमोग्राफी मशीन की विशेष सुविधा उपलब्ध थी। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिविर में पहुंचे मरीजों की बेहद उच्च स्तरीय और सघन जांच मौके पर ही सुनिश्चित की गई। 
दिनभर चले इस शिविर के दौरान कुल 62 मरीजों की मैमोग्राफी, पेप स्मीयर और ब्रश साइटोलॉजी जैसी जटिल जांचें की गईं। इन सघन जांच में स्तन कैंसर के दो मरीज, मुख कैंसर का एक मरीज, ब्लड कैंसर का एक मरीज तथा दो अन्य मरीज मिले। इसके अतिरिक्त प्रारंभिक जांच के आधार पर डॉक्टरों ने कुछ मरीजों में कैंसर के संभावित लक्षण भी पाए, जिन्हें विशेषज्ञ द्वारा संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। इन संदिग्ध मामलों में पेट कैंसर का एक और सर्वाइकल कैंसर के आठ मरीज शामिल हैं।
शिविर के दौरान केवल बीमारियों की पहचान ही नहीं की गई, बल्कि चिन्हित और संदिग्ध पाए गए सभी मरीजों की विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विशेष काउंसलिंग भी की गई। डॉक्टरों ने मरीजों को बीमारी से न घबराने की समझाइश देते हुए आगे के उन्नत इलाज के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही शिविर में आए अन्य आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सामान्य जांच के तहत बीपी, शुगर और बीएमआई भी मापा गया।
शिविर में बस्तर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को अगर शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, तो इसका सफल इलाज पूरी तरह संभव है। आज के शिविर का मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों को उनके क्षेत्र में ही विशेषज्ञ जांच मिल सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आज जो भी मरीज चिन्हित या संदिग्ध पाए गए हैं, उन्हें आगे के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग शासन की योजनाओं के माध्यम से उनका निःशुल्क और उत्तम उपचार सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बालको मेडिकल सेंटर की अत्याधुनिक मोबाइल वैन के सहयोग से की गई सघन स्क्रीनिंग के बाद, जिला एनसीडी सेल द्वारा इन सभी मरीजों की निरंतर ट्रैकिंग और फॉलो-अप किया जाएगा ताकि उन्हें त्वरित और समुचित इलाज मिल सके। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और इसके बेहतर प्रबंधन में शहरी कार्यक्रम प्रबंधक पीडी बस्तियां, गैर संचारी रोग के जिला सलाहकार हनी गॉटलिब सहित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ, मितानिनों और अन्य चिकित्सा अधिकारियों ने अपनी सक्रिय और बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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