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बालोद जिला चिकित्सालय में जांघ की हड्डी का सफल ऑपरेशन, बुजुर्ग मरीज को राहत

01-Mar-2026
बालोद ( शोर संदेश )। जिला चिकित्सालय बालोद के अस्थि रोग विशेषज्ञों द्वारा अस्पताल में भर्ती बालोद विकासखण्ड के ग्राम खपरी निवासी 56 वर्षीय मरीज  रामकली बाई के जांघ की हड्डी का शुक्रवार 27 फरवरी को सफलतापूर्वक आपरेशन किया गया। उल्लेखनीय है कि मरीज श्रीमती रामकली बाई की जांघ की दांया हड्डी टूट जाने के कारण उनके परिजनों ने 23 फरवरी को जिला चिकित्सालय बालोद में भर्ती किया था। मुख्य अस्पताल अधीक्षक  आरके श्रीमाली के निर्देशानुसार अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञों के द्वारा गहन जांच के उपरांत 27 फरवरी को रामकली बाई के दांए जाघ की हड्डी का सफलतापूर्वक आॅपरेशन किया गया। जिला चिकित्सालय बालोद के चिकित्सकों के द्वारा समय पर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराकर सफलतापूर्वक आपरेशन किए जाने से मरीज रामकली को तत्काल राहत मिला है। विदित हो कि मुख्य अस्पताल अधीक्षक  आरके श्रीमाली के निर्देशानुसार जिला चिकित्सालय बालोद के अस्थि रोग विशेषज्ञ डाॅ. पंकज सोरी, सर्जरी विशेष डाॅ. एनके साहू एवं निश्चिेतता विशेषज्ञ डा. अविनाश मण्डावी द्वारा बुजुर्ग मरीज रामकली बाई का सफलतापूर्वक आपरेशन किया गया। रामकली बाई के आपरेशन के कार्य में ओटी स्टाफ एस देवदास, एसनेताम, शिरिन, कुमारी पूर्णिमा,पिंकी,  चैतराम, भगवती, कोमल आदि कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 


स्वास्थ्य केंद्रों के समय पालन और इलाज में लापरवाही पर सख्त निर्देश

28-Feb-2026
कोरबा ( शोर संदेश ) । कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर  कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, मलेरिया, कुष्ठ, सिकलसेल स्क्रीनिंग, आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी, एचआरपी (उच्च जोखिम गर्भवती), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण, एनसीडी, एनक्यूएएस, आरबीएसके, एनआरसी तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की जांच और उपचार समय पर सुनिश्चित हों, अस्पताल समय पर खुलें तथा सभी चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज हो।
टीबी नियंत्रण की समीक्षा के दौरान कलेक्टर  दुदावत ने ने संदिग्ध मरीजों की जांच और उपचार में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जांच किट की कमी होने पर शासन को तत्काल पत्र भेजने के लिए सीएमएचओ को निर्देशित किया। सैंपल लेकर समय पर नोटिफिकेशन जारी करने तथा डीबीटी भुगतान के मामलों में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। एक्स-रे जांच की संख्या कम होने पर कलेक्टर ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए वनरेबल आबादी की शत-प्रतिशत एक्स-रे जांच सुनिश्चित करने और अप्रैल माह के अंत तक एक्स-रे जांच में 20 प्रतिशत वृद्धि करने के निर्देश दिए।
आभा आईडी और आयुष्मान कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मितानिन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर वंचित परिवारों की आभा आईडी बनाएं, ताकि मार्च माह तक 90 प्रतिशत परिवारों का लक्ष्य पूरा किया जा सके। मातृ स्वास्थ्य समीक्षा में एएनसी में पंजीकरण के बाद संस्थागत प्रसव में अंतर तथा एचआई एमएस पोर्टल में एंट्री कम होने पर कलेक्टर ने नाराज़गी व्यक्त की और तुरंत सुधार करने के निर्देश दिए। नियमित टीकाकरण की समीक्षा में यू-विन पोर्टल में कम एंट्री पर कलेक्टर ने संबंधित बीएमओ और बीपीएम को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
एनआरसी की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि एनआरसी में शत-प्रतिशत ऑक्यूपेंसी सुनिश्चित हो तथा भर्ती हितग्राहियों को समय पर भुगतान दिया जाए। मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित उपचार सुनिश्चित करे, ताकि ऐसे मामलों पर पूर्णतः रोक लगाई जा सके। मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम (डेंटल) के अंतर्गत सर्जरी की संख्या में वृद्धि के निर्देश भी दिए गए। एनसीडी कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग को शिविर आयोजित कर व्यापक जांच कराने के निर्देश प्रदान किए गए। कलेक्टर ने मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने, संबंधित कर्मचारियों का प्रशिक्षण कराने तथा प्रभावित परिवारों को परामर्श उपलब्ध कराने पर भी बल दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्री-बर्थ वेटिंग रूम स्थापित करने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उनके मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने को कहा। प्रधानमंत्री राहत दुर्घटना सहायता राशि और नए भवनों को एनक्यूएएस प्रमाणन के लिए तैयार करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।
कलेक्टर ने भवनविहीन स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भवन निर्माण, जर्जर भवनों की मरम्मत, सीपेज की समस्या वाले भवनों की छत सुधार, बाउंड्रीवॉल, बोरवेल, बड़े परिसर वाले स्वास्थ्य संस्थानों में हाई-मास्ट लाइट की स्थापना, आवश्यक उपकरण, मैनपावर और अन्य अधोसंरचना संबंधी प्रस्तावों को तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि परीक्षण उपरांत स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला टीबी एवं कुष्ठ अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, आरएमएनसीएचए, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक, समस्त नोडल अधिकारी, सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
 

पीएम जनमन योजना से पीवीटीजी बस्तियों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

28-Feb-2026
बलरामपुर । ( शोर संदेश ) दूरस्थ वनांचल और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बसे विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।
बलरामपुर रामानुजगंज जिले में विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चार मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित की जा रही हैं। इन यूनिटों के माध्यम से विकासखण्ड बलरामपुर, राजपुर, कुसमी और शंकरगढ़ के सुदूर पहाड़ी कोरवा बाहुल्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सीधे गांव और बसाहटों तक पहुंचाई जा रही हैं। अब ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए कई किलोमीटर दूर स्वास्थ्य केंद्रों की ओर नहीं जाना पड़ता, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं स्वयं उनके घर के समीप पहुंच रही हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन जैसे आवश्यक लैब टेस्ट किए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर भी किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण तथा बुजुर्गों की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 235 बसाहटों में 87 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में कुल 3,678 हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित किया गया है। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। पहले जहां ग्रामीण सामान्य बुखार या संक्रमण को नजरअंदाज कर देते थे या बैगा गुनिया का सहारा लेते थे, लेकिन अब वे नियमित जांच और परामर्श के महत्व को समझने लगे हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने से विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
गौरतलब है कि जिले में कलेक्टर राजेन्द्र कटारा के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में मोबाइल मेडिकल यूनिट का सुव्यवस्थित संचालन किया जा रहा है। नियमित मॉनिटरिंग, तय रूट चार्ट और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बसाहटों में स्वास्थ्य सेवायें सुनिश्चित की जा रही है। पीएम जनमन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार निश्चित ही विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर में दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में सशक्त प्रयास सिद्ध हो रहा है।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई अत्याधुनिक घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी सुविधा

20-Feb-2026
रायपुर ।  ( शोर संदेश )  रायगढ़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय के अस्थि रोग विभाग में अब घुटना प्रत्यारोपण एवं कूल्हा प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी की सुविधा सफलतापूर्वक शुरू कर दी गई है। अब तक जिन मरीजों को ऐसे ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था और लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे, उन्हें अपने ही जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित उपचार मिल रहा है।
इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है।
अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार मिंज के नेतृत्व में यह नई सुविधा प्रारंभ की गई है, जिससे जिलेवासियों को उच्चस्तरीय उपचार अपने ही शहर में उपलब्ध हो रहा है। अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि निजी अस्पतालों में प्रति जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत निःशुल्क एवं उच्चस्तरीय उपचार मिल रहा है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि जिले के लोगों को अपने ही शहर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ भी मिल रहा है।
28 वर्षीय मरीज छविराज कुमार ने बताया कि उन्हें लंबे समय से पैर में गंभीर दिक्कत थी, जिसके कारण चलने-फिरने में काफी परेशानी होती थी। उन्होंने पहले निजी अस्पताल में परामर्श लिया था, जहां सर्जरी के लिए लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक रूप से यह उनके लिए काफी कठिन था।
उन्होंने कहा कि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत सर्जरी की सुविधा शुरू होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने यहां उपचार कराया। सफल ऑपरेशन के बाद अब उनके पैर में कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही वे चलने लगे थे और अब वे पूरी तरह सहज और आत्मविश्वास के साथ चल-फिर पा रहे हैं। छविराज ने चिकित्सकों की टीम और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें निःशुल्क और उच्चस्तरीय उपचार मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण जांगड़े ने बताया कि गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, दुर्घटना के बाद जोड़ों की क्षति अथवा लंबे समय से घुटने और कूल्हे के असहनीय दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अत्यंत प्रभावी उपचार है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीजों के दर्द में उल्लेखनीय कमी आती है और वे तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं। चलने-फिरने की क्षमता में सुधार होने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। डॉ. जांगड़े ने आमजन से अपील की है कि घुटने या कूल्हे की पुरानी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय रहते अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. मिंज ने बताया कि अस्पताल में घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण की सुविधा अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उपलब्ध है। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण जांगड़े एवं एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. लकड़ा की विशेषज्ञ टीम द्वारा इन सर्जरी को पूर्ण सुरक्षा और दक्षता के साथ किया जा रहा है। विगत कुछ दिनों में लगभग 10 मरीजों की सफलतापूर्वक सर्जरी की गई है, जिसमें 5 कूल्हा और 5 घुटना प्रत्यारोपण शामिल हैं।
 

निरंतर डायलिसिस सेवाओं से किडनी मरीजों को राहत, निःशुल्क योजना बनी संबल

20-Feb-2026
रायपुर,।( शोर संदेश )प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब ग्रामीण अंचलों में भी दिखाई देने लगे हैं। विशेष रूप से किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए संचालित निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपचार का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को नियमित उपचार उपलब्ध हो पा रहा है और उन्हें बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में किडनी रोग लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता और शासन की पहल से उपचार व्यवस्था अधिक संगठित और सुलभ हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवभोग में डायलिसिस सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के मरीजों को मिल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 10 दिनों में यहां कुल 95 डायलिसिस सत्र आयोजित किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि औसतन प्रतिदिन लगभग 10 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निरंतर उपचार व्यवस्था से मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल रही है और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से कराना आवश्यक होता है। इस संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य तंत्र की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए उपचार की राह काफी आसान हुई है।
प्रदेश स्तर पर भी डायलिसिस सेवाओं के विस्तार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा चिकित्सा दल की सक्रियता के कारण उपचार व्यवस्था अधिक प्रभावी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग अब केवल उपचार तक सीमित न रहकर मरीजों की समय पर पहचान, नियमित जांच और सतत उपचार व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।
देवभोग में 10 दिनों के भीतर किए गए 95 डायलिसिस सत्र इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी हैं। निःशुल्क डायलिसिस योजना न केवल मरीजों के लिए राहत का माध्यम बनी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है।
डायलिसिस सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, उपकरणों के नियमित रखरखाव और मरीजों की सतत निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, लोगों को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और किडनी रोग के प्रति जागरूक रहने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि गंभीर स्थितियों से समय रहते बचाव किया जा सके।

भारत माता वाहिनी योजना से मजबूत हुआ नशामुक्ति जनआंदोलन

18-Feb-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )   प्रदेश में नशामुक्ति के प्रति व्यापक जनजागरण एवं सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित भारत माता वाहिनी योजना के तहत प्रभावी पहल की जा रही है। राज्य के प्रत्येक विकासखण्ड में 8-सदस्यीय संरचना के साथ कुल 3154 भारत माता वाहिनी समूहों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव में नशामुक्ति के संदेश का प्रसार कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा नशामुक्ति के समर्थन में रैली, प्रभात फेरी, जनजागरूकता अभियान, नशा छोड़ने का संकल्प एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक सामाजिक वातावरण निर्मित हुआ है तथा युवाओं में नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
राज्य के 25 जिलों में स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से 26 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में अब तक 4379 नशा पीड़ित व्यक्तियों को उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से लाभान्वित किया गया है। केंद्रों में चिकित्सकीय परामर्श, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, योग एवं अनुशासित दिनचर्या के माध्यम से प्रभावित व्यक्तियों को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
जिला बलरामपुर इस अभियान का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। यहां सक्रिय भारत माता वाहिनी समूहों द्वारा सतत जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही जिले में संचालित नशामुक्ति केंद्र के माध्यम से अब तक लगभग 478 नशा पीड़ित व्यक्तियों को उपचार एवं पुनर्वास का लाभ प्रदान किया गया है, जिससे वे पुनः समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जुड़ सके हैं।
उल्लेखनीय है कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज को भी प्रभावित करता है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन द्वारा जनभागीदारी आधारित मॉडल को अपनाकर नशामुक्ति अभियान को सशक्त रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। भारत माता वाहिनी योजना के माध्यम से प्रदेश को नशामुक्त, स्वस्थ एवं जागरूक समाज की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।







 

चिकित्सकों की सतर्कता से टली बड़ी अनहोनी, पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट से प्रसूता की जान बची

17-Feb-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) स्व. लखीराम अगव्राल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ के चिकित्सकों की तत्परता, उच्चस्तरीय चिकित्सा प्रबंधन और समन्वित टीमवर्क के चलते एक 23 वर्षीय प्रथम गर्भ प्रसूता को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति से सफलतापूर्वक बचा लिया गया।
मरीज 23 वर्षीय महिला जो पहली बार गर्भवती थीं, को प्री-एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप) की शिकायत थी। जो अत्यधिक गंभीर स्थिति में निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग में 02 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे अत्यधिक उच्च रक्तचाप और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के साथ लाया गया । चिकित्सक द्वारा जांच में पल्मोनरी एडीमा (फेफड़ों में पानी भरना) की पुष्टि हुई, जो जानलेवा स्थिति होती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सिजेरियन सेक्शन (LSCS) का निर्णय  लिया गया। ईलाज के दौरान मरीज को अचानक पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) हो गया ।
डॉ . ए.एम. लकड़ा (विभागाध्यक्ष एनेस्थीसिया ) ने बताया कि हमारी चिकित्सकीय टीम ने तुरंत स्थिति की पहचान कर उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर (High Quality CPR) प्रारंभ की। त्वरित और समन्वित प्रयासों से मरीज की हृदयगति पुनः स्थापित की गई। इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में रखा गया, जहां गहन निगरानी एवं व्यवस्थित पोस्ट-कार्डियक अरेस्ट केयर प्रदान की गई।
लगभग तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में धीरे-धीरे वेंटिलेटर हटाया गया और अंततः 12 फरवरी 2026 को मरीज को आईसीयू से वार्ड में शिफ़्ट किया गया ।आज मरीज को सफलतापूर्वक ईलाज कर डिस्चार्ज किया गया ।
इस जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया का संचालन एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मसीह लकड़ा के साथ स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. टी.के. साहू   एवम डॉ. चंद्रभानु पैंकरा, डॉ. अशोक सिंह सिदार, डा. लेश पटेल , डॉ. अनीश ,डॉ. लक्ष्मी यादव, डॉ. अमित भोई, डॉ. सुभाष राज तथा ऑपरेशन थिएटर (OT) स्टाफ ने इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उत्कृष्ट सहयोग रहा ।
अस्पताल अधीक्षक डॉ एम.के. मिंज ने कहा कि यह सफलता समय पर पहचान (Early Recognition), उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर, त्वरित निर्णय, और बहु-विषयक समन्वित टीम के प्रयासों का परिणाम है।यह घटना दर्शाती है कि यदि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध हो, तो अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है।
 

मनेंद्रगढ़ में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को बड़ी राहत

07-Feb-2026
रायपुर,।   ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है। 
डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

राज्य में आवश्यक दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

04-Feb-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल हुए। बैठक में राज्य में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना से संबंधित विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देशित किया कि राज्य में किसी भी स्थिति में अतिआवश्यक दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए तथा दवाइयों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लोक महत्व से जुड़े इस विषय में यह आवश्यक है कि आम नागरिकों को समय पर एवं गुणवत्तायुक्त दवाइयां उपलब्ध हों।
स्वास्थ्य मंत्री ने दवा आपूर्ति प्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, स्टॉक एवं एक्सपायरी की रीयल टाइम जानकारी प्राप्त करने हेतु एक लाइव ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मांग एवं आपूर्ति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया।
बैठक में दवाइयों एवं मेडिकल उपकरणों के गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित सभी मापदंडों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही अस्पतालों के लिए आवश्यक कंज्युमेबल सामग्री की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि जिन जिलों द्वारा दवाइयों की मांग भेजे जाने के बावजूद उनका उठाव नहीं किया जा रहा है, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक सभी अत्यावश्यक मेडिकल उपकरणों की खरीदी पूर्ण करने तथा प्रयोगशालाओं के लिए रिएजेंट की उपलब्धता शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य अधोसंरचना के संबंध में मंत्री ने महासमुंद, कांकेर एवं कोरबा मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य में 12 नवीन नर्सिंग कॉलेज एवं 6 नवीन फिजियोथेरेपी कॉलेजों के निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक की समाप्ति पर सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के ने स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति में बैठक अत्यंत उपयोगी एवं सार्थक रही। उन्होंने बताया कि बैठक में दिए गए निर्देशों की शीघ्र समीक्षा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।



 

केंद्रीय बजट 2026: एक लाख नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार होंगे, योगा और आयुष को मिलेगा वैश्विक विस्तार

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट भाषण के दौरान युवाओं के लिए नए अवसर और योगा व डिजाइन उद्योग के विकास को लेकर कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के लिए कुशल करियर के नए रास्ते बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर फोकस किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (एएचपी) के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थान खोले जाएंगे। यह योजना 10 चयनित विषयों को कवर करेगी, जिनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं। अगले पांच वर्षों में इस पहल के तहत एक लाख नए एएचपी तैयार किए जाएंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “प्राचीन भारतीय योग, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ही सम्मान मिलता है, उसे तब बड़े पैमाने पर ग्लोबल पहचान मिली जब प्रधानमंत्री इसे यूएन ले गए। बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए, कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम के उच्च मानकों के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा और अधिक कुशल कर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा। पारंपरिक चिकित्सा के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड किया जाएगा।”
डिजाइन सेक्टर को लेकर भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय डिजाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश में कुशल डिजाइनरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन स्थापित किया जाएगा, जिससे डिजाइन शिक्षा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह बजट निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट है। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बजट पेश करने के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच गई हैं। देसाई ने 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बजट पेश किए हैं। 


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