
भिलाई(chhatishgarh) नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में कोरोना वायरस एवं पीलिया के रोकथाम हेतु निगम प्रशासन हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सभी वार्डों में निगम कर्मी घर घर जाकर क्लोरीन टैबलेट बांट रहे है तथा आमजन को शुद्ध या उबला हुआ पानी पीने की सलाह दे रहे है। जोन कं. 01, 02 एवं 04 के जोन आयुक्त ने अपने अपने क्षेत्र के मितानीनों की बैठक लेकर पीलिया बीमारी से आमजन को बचाने योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर चर्चा किए इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। निगम के स्वास्थ्य विभाग व अभियंताओं के साथ मितानीनों का वाटसअप ग्रुप बनाया जा रहा है ताकि पेयजल में दिक्कत होने या किसी व्यक्ति को पीलिया संक्रमण लक्षण होने होने पर तत्काल विस्तृत जानकारी दी जा सके। निगम पाइपलाइन का संधारण, बोरिंग, पावर पंप, पेयजल की जांच, क्लोरीन टैबलेट का वितरण करने के कार्य में लगातार जुटा हुआ है। सभी मितानीनों की बैठक आयोजित की गई जिसमें जलजनित बीमारी पीलिया से बचाव के कार्य में मितानीन भी अपनी भूमिका निभांएगें मितानीनों को पीलिया के लक्षण से संबंधित जानकारी दी गई। मितानीनों को वाटसअप ग्रुप बनाया जा रहा है जिसमें वे कहीं भी पेयजल से संबंधित जानकारी व किसी व्यक्ति को पीलिया संक्रमित लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विस्तृत जानकारी ग्रुप के माध्यम से भेजेंगे ताकि शीघ्रता से अग्रिम कार्यवाही की जा सके। भिलाई निगम क्षेत्र में विगत माह से क्लोरीन टैबलेट घर-घर बांटे जा रहे है जिसका मितानीनें जानकारी एकत्रित करेंगी और वितरण में छूटे हुए घरों में तत्काल क्लोरीन टेबलेट वितरण करेंगी इसके लिए इन्हें क्लोरीन टेबलेट प्रदान किया गया। भिलाई निगम क्षेत्रांतर्गत अब तक 308384 नग क्लोरीन टेबलेट का वितरण किया जा चुका है इसके साथ ही प्रतिदिन पानी की शुद्धता की जांच की जा रही है। विभिन्न जल स्रोत जैसे कुआं, बोर, टंकी, हस्त पंप आदि के पानी का सैंपल जोन द्वारा लेकर 77 एमएलडी जल शोधन संयंत्र के लैब में भेजकर परीक्षण किया जा रहा है। क्लोरीन टेबलेट के उपयोग की जानकारी बांटे जाने वाले सभी घरों में देने मितानिनो को कहा गया। पीलिया के संभावित मरीज पाए जाने पर तत्काल निकटम स्वास्थ्य केन्द्र से उपचार करवाने के लिए प्रेरित करने कहा गया। बता दें कि क्षेत्रों में मितानिन सक्रियता से कार्य करती है और घर-घर से इनका अच्छा संपर्क होता है।

दंतेवाड़ा (chhatishgarh)। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कटेकल्याण के लिए प्रदत्त नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने उक्त एम्बुलेंस में उपलब्ध सुविधा तथा उपकरणों के बारे में जानकारी ली और कहा कि इस नई एम्बुलेंस के माध्यम से जिले के सर्वाधिक दूरस्थ कटेकल्याण इलाके के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा शीघ्रता से उपलब्ध होगी। कलेक्टर श्री वर्मा ने उक्त एम्बुलेंस का समुचित संचालन सहित रखरखाव सुनिश्चित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया।इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत सच्चिदानंद आलोक, अपर जिला दण्डाधिकारी अभिषेक अग्रवाल, सीएमएचओ डॉ एसपी शाण्डिल्य, सिविल सर्जन जिला अस्पताल डॉ एमके नायक और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में पांच में चार कामकाजी लोग असुरक्षित कामकाजी प्रथा के माहौल में हैं और वे इसके कारण घायल हो रहे हैं, बीमार हो रहे हैं या फिर काम पर दर्दनाक स्थितियों के कारण दोनों से पीड़ित हो जा रहे हैं. एक सर्वेक्षण से यह खुलासा हुआ है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट में कहा गया कि \'वर्क शुडन्ड हर्ट\' नाम के इस सर्वेक्षण को ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एसीटीयू) ने सोमवार को जारी किया, जिसमें 26,000 कामगारों का सर्वेक्षण किया गया. इस सर्वेक्षण से खुलासा होता है कि करीब 80 फीसदी कामकाजी लोग अपने काम के कारण घायल, बीमार या दोनों हैं,
जबकि 16 फीसदी किसी ऐसे आदमी को जानते थे, जिसकी काम के दौरान मौत हो गई, या फिर काम से जुड़ी बीमारियों के कारण मौत हो गई. इसमें यह भी पाया गया कि 47 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि पिछले 12 महीनों में उन्हें काम के दौरान संकटपूर्ण या दर्दनाक स्थितियों का सामना करना पड़ा और 31 फीसदी ने कहा कि उन्हें सहकर्मियों, क्लाइंट्स या ग्राहकों द्वारा गाली दी गई, धमकी दी गई या मारपीट की गई.
पांच में से तीन कामगारों ने कहा कि पिछले 12 महीनों से वे खराब मानसिक स्वास्थ्य का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनका नियोक्ता असुरक्षित कामकाजी स्थितियों को सुधारने में असफल है. एसीटीयू के सहायक सचिव लियाम ओब्रायन ने फेयरफैक्स मीडिया को सोमवार को बताया कि चोट लगने या मानसिक स्वास्थ्य खराब होने की घटनाओं से \'पूरी तरह से बचा जा सकता\' था.
उन्होंने कहा, "काम पर किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए - चाहे वह मानसिक रूप से हो या शारीरिक रूप से हो." उन्होंने आगे कहा, "वर्क शुडन्ट हर्ट सर्वेक्षण से पता चलता है कि बहुत सारे कामकाजी लोग काम पर हिंसा, प्रताड़ना और खराब कामकाजी स्थितियों का सामना कर रहे हैं जबकि इसमें से ज्यादातर को रोका जा सकता है."

गर आपको बार-बार पेटदर्द की शिकायत हो रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर में भी सामान्य तौर पर पेट दर्द की ही शिकायत होती है.
नई दिल्लीः सामान्य तौर पर जब भी किसी को पेट दर्द की शिकायत होती है तो वह मेडिकल स्टोर में जाकर पेट दर्द की दवाई ले लेता है या फिर घरेलू नुस्खों से ही पेटदर्द से छुटकारा पाने में लग जाता है, लेकिन इसी पेटदर्द की अनदेखी कई बार आपको गंभीर बीमारियों का लक्षण हो सकता है. ऐसे में कोशिश करें कि कभी भी पेटदर्द और अपच को आप इग्नोर न करें. अगर आपको बार-बार पेटदर्द की शिकायत हो रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर में भी सामान्य तौर पर पेट दर्द की ही शिकायत होती है. बता दें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (पेट की आंतों या पेट के कैंसर) भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है. पिछले साल जीआई कैंसर के 57,394 मामले सामने आए.
क्या है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर
दरअसल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर पेट की आंतों का या फिर कहें, पेट का कैंसर होता है. जो धीरे-धीर बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरु कर देता है. यह कैंसर शरीर के अंदर आंतों, गुर्दे, पित्ताशय, पैनक्रियाज और पाचन ग्रंथि को चपेट में लेने लगता है और इन्हें निष्क्रिय बना देता है. इसलिए कभी भी पेट दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए और जरूरत पड़े तो बार-बार पेट दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए.