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बोड़ला में निःशुल्क सोनोग्राफी व रक्तदान शिविर, 91 गर्भवती महिलाओं की जांच

29-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )   उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के निर्देशानुसार कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क सोनोग्राफी एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर विशेष रूप से वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित रहती है। 
शिविर के दौरान कुल 91 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी जांच की गई, जिससे हाई रिस्क गर्भावस्था की समय रहते पहचान हो सकी। चिकित्सकों द्वारा प्रसव पूर्व देखभाल, पोषण, एनीमिया की रोकथाम एवं संस्थागत प्रसव के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। बोड़ला, चिल्फी, रेंगाखार, तरेगांव, झलमला सहित वन क्षेत्रों की महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
इस शिविर में 146 ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच भी की गई। जिसमें उन्हें निःशुल्क दवाइयाँ, परामर्श एवं आवश्यक उपचार सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। वहीं रक्तदान शिविर में 6 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान से दुर्घटना, प्रसव एवं शल्य चिकित्सा के दौरान जीवन रक्षा संभव होती है तथा गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को सहारा मिलता है। इस शिविर से बोड़ला सेक्टर के मंडलटोला, खरिया, बैरक, बोड़ला; पोड़ी सेक्टर के रामहेपुर, सारंगपुरकला, कुसुमघटा, पोड़ी; बैजलपुर सेक्टर के खंडसरा, भलपरी, मढ़ाडाबरी, मड़मढ़ा, बैजलपुर आदि ग्रामों के ग्रामीण लाभान्वित हुए।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचें। ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और अधिक मजबूत किया जा सके। समग्र रूप से यह शिविर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी रहा। ग्रामीणों ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया।          
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र तूरे ने बताया कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश और कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में इस प्रकार के शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे है। जिससे अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच सुनिश्चित हो सके। वहीं बीएमओ डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत ने कहा कि सोनोग्राफी द्वारा हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान जल्दी हो जाती है, जो वनांचल क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
 

बलौदाबाजार जिला चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट बनी किडनी मरीजों की संजीवनी

28-Nov-2025
रायपुर ( शोर संदेश )   जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में स्थापित डायलीसिस यूनिट किडनी के मरीजों के लिये वरदान साबित हो रहा है। इस यूनिट से अब तक 169 मरीज लाभान्वित हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में डायलिसिस की सुविधा  15 अगस्त 2022 से प्रारंभ की गई है। डायलिलिस यूनिट में कुल 6 डायलिसिस मशीन उपलब्ध है। अब तक कुल 169 मरीज डायलिसिस सुविधा का लाभ ले चुके हैं। प्रारंभ से अभी तक लगभग 10305 डायलिसिस सेशन हो चुके है। प्रतिमाह लगभग 300 बार डायलिसिस किया जा रहा है। वर्तमान में 27  एक्टिव मरीज हैं।
जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा प्रारंभ होने से मरीजों को बाहर जाना नही पडता है। जिले में ही उपचार उपलब्ध है एवं आपातकालीन स्थिति में डायलिसिस की सुविधा मिलने से जीवन रक्षक उपचार समय पर मिल पा रहा है। साथ ही मरीजों को आर्थिक बोझ कम हो गया है।

अम्बेडकर अस्पताल में चमत्कारिक सर्जरी: हृदय के दाएँ वेंट्रिकल में धँसी गोली को ओपन हार्ट ऑपरेशन से निकाला गया

27-Nov-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश ) पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट की हार्ट सर्जरी टीम ने एक अत्यंत जोखिमपूर्ण और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक कर नई उपलब्धि हासिल की है। महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र का 40 वर्षीय मरीज बंदूक की गोली लगने से गंभीर अवस्था में अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में लाया गया था। हार्ट सर्जरी विभाग में डॉ. कृष्णकांत साहू एवं टीम ने राइट एट्रियम के जरिए ट्राइकस्पिड वाल्व पार करते हुए राइट वेंट्रिकल में धँसी गोली को निकाला और जटिल केस में मरीज की जान बचाते हुए एक और उपलब्धि अपने नाम दर्ज की।
एक 40 वर्षीय मरीज जो कि महाराष्ट्र बॉर्डर के पास का रहने वाला है, को गंभीर अवस्था में अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में भर्ती कराया गया। मरीज जब अस्पताल पहुंचा तो उसका ब्लड प्रेशर काफी कम 70/40 mmHg हो गया था। ट्रॉमा विभाग में प्रारंभिक उपचार से मरीज के हीमोडायनेमिक्स में सुधार हुआ। उसके पश्चात तुरंत सीटी स्कैन के लिए भेजा गया जिससे पता चला की बुलेट पीठ से होते हुए पसलियों में छेद करके फेफड़ों को चीरते हुए हार्ट (heart) में छेद करके दाएं वेंट्रीकल में जा घुसी है। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी एवं हार्ट में छेद होने के कारण खून हार्ट के चारों तरफ अत्यधिक दबाव बना रही थी जिसके कारण मरीज का हृदय रक्त को ठीक से पंप नहीं कर पा रहा था जिसके कारण मरीज का ब्लड, ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद भी नहीं बढ़ पा रहा था। इस अवस्था को कार्डियक टैम्पोनेड (cardiac tamponade) कहते हैं। इस स्थिति का एक ही उपचार होता है :- वह है तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी करके हार्ट के ऊपर बनने वाले दबाव को कम करना।
सीटी स्कैन के बाद मरीज के परिजनों को हाई रिस्क एवं डी. ओ. टी. (डेथ ऑन टेबल) कन्सेंट लेकर तुरंत कार्डियक सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया क्योंकि सीटी स्कैन में पता चल चुका था कि गोली (बुलेट) हार्ट के चेंबर राइट वेंट्रीकल में धँसी हुई है। 
हार्ट लंग मशीन की सहायता से दिल की धड़कन को रोका गया एवं हार्ट के राइट एट्रियम को काटकर ट्राईकस्पीड वाल्व को क्रॉस करके दाएं वेंट्रीकल में धँसी हुई गोली को निकाला गया। 
ऑपरेशन टेबल पर बुलेट की सटीक स्थिति का पता लगाना बहुत ही चुनौती पूर्ण था क्योंकि 8mmx4mm की गोली हृदय की मांसपेशी में कहां धंसी हुई है इसके लिए ट्रांसएसोफेजियल इकोकार्डियोग्राफी (Transesophageal Echocardiography - TEE) का प्रयोग किया गया परंतु इससे बुलेट का सही अनुमान नहीं लग पाया फिर डिजिटल एक्सरे मशीन से कई बार एक्सरे किया गया, तब जाकर हृदय के मांसपेशी के अंदर धँसी बुलेट की सटीक की स्थिति का पता लगाया जा सका। डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार मूवेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन इस ऑपरेशन में वरदान के समान साबित हुई। यह डिजिटल एक्स-रे डिजिटल कैमरा की तरह तुरंत स्क्रीन में फोटो भेज देता है एवं यह वायरलेस सिस्टम ब्लूटूथ से कनेक्ट होता है। इस ऑपरेशन में फेफड़े के छेद एवं मुख्य पल्मोनरी धमनी एवं हृदय को सटीकता से रिपेयर किया गया। 
इस ऑपरेशन में लगभग 4 घंटे का समय लगा एवं लगभग 7 यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ी। इस मरीज के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है एक-दो दिनों बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
 

सुप्रजा’ कार्यक्रम से मातृ-शिशु स्वास्थ्य में छत्तीसगढ़ ने दर्ज की उल्लेखनीय प्रगति

27-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत वर्ष 2023-25 में संचालनालय आयुष छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित ‘सुप्रजा’ कार्यक्रम मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की समग्र देखभाल, पोषण, सुरक्षा और स्वास्थ्य संवर्धन को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।
राज्य के विभिन्न जिलों की कुल 40 आयुष स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप प्रशिक्षण देते हुए नियमित सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की प्रतिमाह जांच, नवजात शिशुओं के विकास परीक्षण, तथा गर्भवती महिलाओं को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने हेतु आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सुप्रजा कार्यक्रम के तहत उत्तम एवं स्वस्थ संतान प्राप्ति के उद्देश्य से गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित गर्भसंस्कार सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ माहवार आहार-विहार सलाह प्रदान कर रहे हैं, वहीं योग प्रशिक्षक और आयुर्वेद चिकित्सक गर्भावस्था में उपयोगी योगासन भी सिखा रहे हैं। अधिक से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए सभी आयुष संस्थानों में नियमित योग सत्र संचालित हो रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेद आधारित औषधियां निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं में कमी दर्ज की गई है। वहीं प्रसव उपरांत जननी और नवजात शिशु का छह माह तक चिकित्सकीय फॉलो-अप किया जा रहा है तथा माताओं को स्तनपान के महत्व के बारे में परामर्श दिया जा रहा है।
अब तक सुप्रजा कार्यक्रम से जुड़ी 40 संस्थाओं में लगभग 7,781 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन किया गया है तथा 9,890 गर्भसंस्कार सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। यह आंकड़े कार्यक्रम की सफलता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार में इसकी प्रभावी भूमिका को दर्शाते हैं।
 

सिम्स में हाइडेटिड सिस्ट का पांचवाँ सफल दूरबीन ऑपरेशन

26-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी दर्ज की है। सर्जरी विभाग की टीम ने दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) तकनीक का उपयोग करते हुए लिवर में मौजूद 10 सेंटीमीटर के हाइडेटिड सिस्ट को सुरक्षित रूप से निकाल दिया। यह सिम्स में इस तरह की पाँचवीं सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी है।
मुंगेली की 20 वर्षीय तीजन नेताम पेट में भारीपन, भूख कम लगना और असहजता की शिकायत के साथ सिम्स पहुंची। सोनोग्राफी और सीटी स्कैन में लिवर के दाहिने हिस्से में बड़ा हाइडेटिड सिस्ट पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिम्स प्रशासन के मार्गदर्शन में इसे दूरबीन पद्धति से ऑपरेट करने का फैसला लिया गया।
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओ.पी. राज के नेतृत्व में डॉ. रघुराज सिंह, डॉ. बी.डी. तिवारी और डॉ. प्रियंका माहेश्वर की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना रायजादा, डॉ. मिल्टन, डॉ. मयंक आगरे व पीजी रेजिडेंट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने सटीक रिपोर्टिंग कर सर्जरी में अहम सहयोग दिया। ओटी स्टाफ सिस्टर योगेश्वरी, संतोष पांडे और अश्वनी मिश्रा का काम भी सराहनीय रहा। लैप्रोस्कोपिक तकनीक की वजह से बहुत कम चीरा लगा, रक्तस्राव लगभग नगण्य रहा मरीज जल्द ही सामान्य दिनचर्या में लौट सकती है
यह एक परजीवी संक्रमण है, जो इकाईनोकोकस ग्रेन्यूलोसस (कुत्ता फीता कृमि) के कारण होता है। यह आमतौर पर लिवर और फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमण अक्सर दूषित पानी, संक्रमित भोजन, और कुत्तों-भेड़ों के संपर्क से फैलता है। इसके मुख्य लक्षण - पेट दर्द, भारीपन, भूख कम लगना, जल्दी पेट भरने का एहसास इसके मुख्य लक्षण है। गहरे और बड़े सिस्ट लीवर की कार्यप्रणाली पर असर डालते हैं और फटने पर ऐनाफाइलैक्सिस जैसी जानलेवा स्थिति भी बन सकती है। स्वच्छ पानी, साफ भोजन और राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत क्रीमनाशक दवाओं का सेवन कर इस रोग से बचाव किया जा सकता है।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में डेढ़ दशक से गले की बढ़ती गांठ से परेशान महिला का सफल ऑपरेशन

15-Nov-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  स्व.लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ लगातार अपनी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हुए मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान कर रही है। इस कड़ी में कान, नाक, गला विभाग द्वारा अधिष्ठाता  डॉ. विनीत जैन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ.मनोज कुमार मिंज के मार्गदर्शन में  डेढ़ दशक से गले की बढ़ती गांठ से परेशान महिला का सफल ऑपरेशन किया गया।
महिला पिछले १५ साल से गले की  बढ़ती गांठ से परेशान थी ,कई जगह इलाज कराया लेकिन कोई राहत नहीं मिली ,कई  बार उसे ऑपरेशन की सलाह दी गई लेकिन डर के कारण उसने इलाज नहीं कराया और इस मध्य उसकी बीमारी बढ़ती रही और अब महिला  का गले के ट्यूमर के आकार  ने विशाल-रूप ले लिया था ।और महिला इस जटिल स्थिति में पहुँच गई कि उसकी सांस नली , खाद्य नली को दबाने लगी । 
कई जगह दिखाने पर ऑपरेशन में आवाज परिवर्तन होने की संभावना एवम् खाद्य नाली में चोट लगने की आशंका बताई गई जिसे सुन वह ऑपरेशन कराने में कोताही करती रही । वह कई जगह के ईलाज से निराश होकर अंततः वह मेडिकल कॉलेज रायगढ़ पहुंची |
ई .एन .टी विभाग की  विशेषज्ञ डॉ नीलम नायक ने प्राथमिक जांच की और उसका उपचार बताया, कान नाक गला रोग के विशेषज्ञों  ने उसके मन की सभी तरह की शंका को दूर किया और तब पश्चात वह सर्जरी के लिए राजी हो गई । ई .एन .टी विभाग की विशेषज्ञ डॉक्टरो की टीम द्वारा ऑपरेशन कर आवाज एवम खाद्य नली को पूर्ण रूप से बचाते हुए ट्यूमर को निकाल कर सफलता पूर्वक इलाज किया गया I महिला के गले का ट्यूमर 12  सेंटीमीटर  आकार था |
ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक रोगी को आईसीयू में डॉक्टर के निगरानी में रखा गया जहाँ निश्चेतना विभाग , डाइटीशिअन और नर्सेज़ का सहयोग रहा ।अंततः रोगी पूर्णतः स्वस्थ हैं उन्हें डिस्चार्ज किया गया । 
इस बीमारी में गॉयटर (गलगंड) थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना है। यह गर्दन में सूजन के रूप में दिखाई देता है। आयोडीन की कमी इसका एक मुख्य कारण है। लक्षणों में गर्दन में दिखाई देने वाली सूजन, निगलने में कठिनाई, या सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है। उपचार आयोडीन की कमी को दूर करने, थायरॉयड हार्मोन थेरेपी, या अत्याधिक जटिलता में सर्जरी पर आधारित होता है।
 

 


इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को मिली राष्ट्रीय मान्यता, अब फसलों-मिट्टी-पानी में कीटनाशक अवशेषों की होगी निगरानी

15-Nov-2025
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को एक और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई है। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित फाइटोसैनिटरी लैब अब छत्तीसगढ़ में विभिन्न खाद्यान्न फसलों, फलों, सब्जियों, आदि के साथ ही मिट्टी, पानी जैसे पर्यावरणीय घटको में भी कीटनाशक अवशेषों की निगरानी करेगी। भारत सरकार के कृषि एवं किसान मंत्रालय द्वारा कृषि विश्वविद्यालय के आण्विक जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला को राष्ट्रीय कीटनाशक अवशेष निगरानी योजना के तहत अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान केन्द्र के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। कृषि विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी लैब यह उपलब्धि प्राप्त करने वाली छत्तीसगढ़ की एकमात्र तथा देश की 36वीं प्रयोगशाला है जिसे इस राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। 
गौरतलब है कि भारत सरकार की इस योजना का उद्धेश्य खाद्य पदार्था, मिट्टी एवं जल जैसे पर्यावरणीय नमूनों में कीटनाशक अवशेषों की नियमित निगरानी कर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, जल गुणवत्ता का मूल्यांकन करना तथा एकीकृत कीट प्रबंधन एवं उत्तम कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देना है। प्रयोगशाला को मान्यता मिलने से प्रदेश के किसानों की फसलों के साथ-साथ यहां की मिट्टी-पानी में भी कीटनाशक अवशेषों की निगरानी हो सकेगी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रयोगशाला से संबंधित वैज्ञानिकों एवं उनके सहयोगियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि यह उपलब्धि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक उत्कृष्टता तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं किसान कल्याण के प्रति विश्वविद्यालय की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 
उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला की स्थापना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त वित्तीय सहायता से हुई है। इस प्रयोगशाला के संचालन के लिए भी केन्द्र और राज्य सरकार से नियमित सहायता प्राप्त हो रही है। प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों, हेवी मेटल्स, सूक्ष्मजीवों आदि की जांच की जाती है जिससे इनके निर्यात हेतु मदद मिलती है।



 

मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: CGMSC ने तीन दवाओं को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया

12-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने दवाओं की गुणवत्ता में कमी पर सख्त रुख अपनाते हुए तीन दवाओं को अमानक पाए जाने के बाद आगामी तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई कॉरपोरेशन की “शून्य सहनशीलता नीति (Zero Tolerance Policy)” के तहत की गई है।
कॉरपोरेशन के अनुसार, संबंधित आपूर्तिकर्ता अब ब्लैकलिस्टिंग अवधि समाप्त होने तक किसी भी नई निविदा में भाग लेने के लिए अयोग्य रहेंगे।
ये दवाएं पाई गईं अमानक
मेसर्स एजी पैरेंटेरल्स, विलेज गुग्गरवाला, बद्दी (हिमाचल प्रदेश) द्वारा आपूर्ति की गई —
कैल्शियम (एलिमेंटल) विद विटामिन D3 टैबलेट्स, ऑर्निडाजोल टैबलेट्स 
ये सभी NABL मान्यता प्राप्त एवं सरकारी परीक्षण प्रयोगशालाओं में “अमानक (Not of Standard Quality - NSQ)” पाए गए।
इसी तरह, मेसर्स डिवाइन लेबोरेट्रीज प्रा. लि., वडोदरा (गुजरात) द्वारा आपूर्ति की गई
हेपारिन सोडियम 1000 IU/ml इंजेक्शन IP  भी NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं एवं सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेट्री (CDL), कोलकाता में परीक्षण के दौरान अमानक पाए गए।
इन तीनों उत्पादों को निविदा शर्तों के अनुरूप तत्काल प्रभाव से तीन वर्षों की अवधि तक ब्लैकलिस्ट किया गया है।
गुणवत्ता पर समझौता नहीं
CGMSC ने कहा है कि उसकी गुणवत्ता आश्वासन एवं नियंत्रण नीति के अंतर्गत निरंतर मॉनिटरिंग, बैच-वार परीक्षण, पुनः परीक्षण और गुणवत्ता विचलन पर तत्काल कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाती है।
कॉरपोरेशन द्वारा सभी कार्रवाई CDSCO, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 एवं नियम 1945 के प्रावधानों के अनुसार की जाती है ताकि केवल गुणवत्तायुक्त दवाएं ही मरीजों तक पहुँचें।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस पर किसी भी स्तर पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी दवा गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी चूक पर कार्रवाई जारी रहेगी।

 


सुकमा जिले के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर स्वास्थ्य सर्वे

08-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )।  सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियद नेल्लानार योजना के तहत माओवाद प्रभावित कोंटा विकासखंड के 125 गांवों में घर-घर स्वास्थ्य सर्वे अभियान चलाया गया। दुर्गम और पहुंचविहीन क्षेत्रों में संचालित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके द्वार पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सीएमएचओ डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि सर्वे के दौरान संपूर्ण नेत्र सुरक्षा कार्यक्रम पर विशेष ध्यान दिया गया। बीएमओ कोंटा ने जानकारी दी कि सर्वे में 624 मोतियाबिंद मरीजों का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें 132 एक आंख में और 492 दोनों आंखों में मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। इन सभी मरीजों के लिए जिला अस्पताल में शीघ्र ही विशेष निःशुल्क मोतियाबिंद शिविर आयोजित किए जाएंगे। मरीजों के लाने-ले जाने, भोजन एवं आवास की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी।








 

जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में डिलीवरी का रिकॉर्ड स्तर,माह अक्टूबर में 456 प्रसव

07-Nov-2025
रायपुर,( शोर संदेश )   जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में अक्टूबर माह के दौरान संस्थागत प्रसव का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पूरे महीने में कुल 456 प्रसव दर्ज किए गए जिनमें से 155 प्रसव सी-सेक्शन (शल्य प्रसव) के माध्यम से कराए गए। बढ़ती प्रसव संख्या इस बात की ओर इंगित करता है कि जिला अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। 
मुख्य चिकत्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने बताया कि जिले में लगभग 1400 गर्भवती महिलाओं की एएनसी (प्रसव पूर्व जांच) की गई जो यह दर्शाती है कि नियमित जांच एवं सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है।बढ़ते प्रसव मामलों के कारण जिला चिकित्सालय पर कार्यभार भी तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार,अधिक संख्या में प्रसव होने से अस्पताल की मातृ एवं शिशु वार्ड पर दबाव बढ़ गया है, जिसके लिए अतिरिक्त संसाधन, मानवबल और व्यवस्थाओं की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। जिसकी व्यवस्था की जा रही है ।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि बेहतर सुविधाएं, सुरक्षित प्रसव, निशुल्क दवाइयां, 24×7 उपलब्ध स्वास्थ्य स्टाफ तथा सरकार की जनहितैषी योजनाओं के कारण अधिकाधिक प्रसूताएं जिला चिकित्सालय की ओर रुख कर रही हैं। इस प्रकार से जिले मे मातृ और शिशु मृत्यु  कम करने में अपेक्षित सफलता मिलने की संभावना है।


 



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