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ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार, उपभोग-आय दोनों में बढ़ोतरी: नाबार्ड सर्वे

11-Dec-2025
नई दिल्ली( शोर संदेश )।  नाबार्ड के आठवें ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं मत सर्वेक्षण (आरईसीएसएस) ने संकेत दिया है कि पिछले एक वर्ष में ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुई है। उपभोग बढ़ा है, आय में वृद्धि दर्ज हुई है और ग्रामीण परिवारों का आशावाद पिछले सभी चरणों की तुलना में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
यह द्विमासिक सर्वेक्षण सितंबर 2024 से किया जा रहा है और अब एक विस्तृत वर्षभर का डेटासेट उपलब्ध कराता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के यथार्थ आकलन में मदद मिल रही है।
सर्वे के अनुसार ग्रामीण परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति में बढ़ोतरी हुई है-
लगभग 80% परिवारों ने लगातार अधिक उपभोग दर्ज किया।
मासिक आय का 67.3% हिस्सा उपभोग पर खर्च हो रहा है,यह सर्वेक्षण शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा स्तर है।
यह संकेत देता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग मजबूत और व्यापक है, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
ग्रामीण परिवारों में से 42.2 प्रतिशत ने अपनी आय में वृद्धि दर्ज की जो अब तक के सभी सर्वेक्षणों में सबसे बेहतर प्रदर्शन है।
केवल 15.7 प्रतिशत लोगों ने किसी भी प्रकार की आय में कमी का उल्लेख किया है जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है।
भविष्य की संभावनाएं काफी मजबूत नजर आ रही हैं: 75.9 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि उनकी आय अगले वर्ष बढ़ेगी जो सितंबर 2024 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर का आशावाद है। 
निवेश गतिविधियों में तेजी
पिछले वर्ष की तुलना में 29.3 प्रतिशत परिवारों में पूंजी निवेश में वृद्धि देखी गई है जो पिछले किसी भी चरण में अधिक है जो कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में संपत्ति सृजन में नई तेजी को दर्शाता है।
निवेश में यह तेजी मजबूत उपभोग और आय में वृद्धि के कारण है, न कि ऋण संकट के कारण।
58.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने केवल औपचारिक ऋण स्रोतों का ही उपयोग किया है जो कि अब तक के सभी सर्वेक्षणों में अब तक का सबसे उच्च स्तर है। सितंबर 2024 में यह 48.7 प्रतिशत था।
हालांकि अनौपचारिक ऋण का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है जो यह दर्शाता है कि औपचारिक ऋण की पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
सरकारी योजनाओं से स्थिर हुई ग्रामीण मांग 
सर्वेक्षण के अनुसार सरकारी कल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण उपभोग को सहारा देती हैं, लेकिन निर्भरता नहीं बढ़ातीं। 
औसत ग्रामीण परिवार की आय का 10% हिस्सा सब्सिडी या सरकारी अंतरणों से पूरा होता है।
कुछ परिवारों में यह हिस्सा 20% तक पहुंच जाता है, जो आवश्यक उपभोग को स्थिर करता है।
ग्रामीण परिवारों की औसत महंगाई संबंधी धारणा घटकर 3.77% पर आ गई है। सर्वेक्षण शुरू होने के बाद पहली बार 4% से नीचे। 84.2% परिवारों का मानना है कि महंगाई 5% से नीचे रहेगी। कम महंगाई ने वास्तविक आय और क्रय शक्ति को बढ़ावा दिया है।
कम महंगाई और ब्याज दरों में नरमी के साथ, ऋण चुकाने के लिए आवंटित आय का हिस्सा पहले के दौर की तुलना में कम हो गया है।
29.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में पिछले वर्ष के दौरान पूंजी निवेश में वृद्धि हुई है जो सभी सर्वेक्षणों में उच्चतम है।







 

प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम

11-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) प्रदेशभर में धान उपार्जन केंद्रों की पारदर्शी और किसान-मित्र व्यवस्था का प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहा है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत खाला के किसान  बैजनाथ सिंह ने धान खरीदी प्रक्रिया को पहले से अधिक सहज, सुगम और भरोसेमंद बताया है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 160 क्विंटल रकबे के धान के विक्रय के लिए पहला 80 क्विंटल का टोकन उपार्जन समिति से आसानी से कटवाया गया। पूरी 
प्रक्रिया में कहीं भी कोई कठिनाई नहीं हुई। उपार्जन केंद्र करजी पहुंचने पर कर्मचारियों ने सहयोगात्मक व्यवहार किया। धान का नमी परीक्षण तुरंत किया गया और बारदाना भी समय पर उपलब्ध कराया गया। तौल प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ सम्पन्न किया गया, जिससे किसानों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
किसान बैजनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जो किसानों के लिए बड़ी राहत और प्रोत्साहन है। उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि का उपयोग वे खेती का दायरा बढ़ाने और अपने बच्चों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में कर रहे हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा उपार्जन केंद्रों में की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष की व्यवस्था पूरी तरह संतोषजनक है और इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। प्रदेश में धान उपार्जन प्रक्रिया के सुधारों का लाभ अब सीधे किसानों तक पहुंच रहा है।
 

उद्यानिकी से समृद्धि की नई पहचान: दुर्ग जिले के किसान बने आत्मनिर्भर

11-Dec-2025
दुर्ग  ( शोर संदेश )  दुर्ग जिले में किसानों का रुझान तेजी से उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त अनुदान एवं तकनीकी मार्गदर्शन से कृषक बेहतर पैदावार लेकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जिले में ऑयल पाम, फलदार पौधे, सब्जियों एवं पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है।
नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 47 कृषकों के 95.04 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम पौधरोपण किया गया है। पिछले वर्ष 74.61 हेक्टेयर में 37 कृषकों को लाभान्वित किया गया था। धमधा विकासखंड के ग्राम टेमरी के कृषक योगेश साहू ने विभागीय अनुदान से 8 एकड़ में ऑयल पाम पौधरोपण कर हर डेढ़ से दो माह में फसल की कटाई पूर्ण कर 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति कटाई सीजन की आय अर्जित की है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर जिले के अन्य किसान भी इस फसल की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत जिले में 152 हेक्टेयर क्षेत्र में केला, पपीता एवं ड्रैगन फ्रूट के विस्तार से 99 कृषक लाभान्वित हो रहे हैं। इसी योजना में 64 हेक्टेयर रकबा में टमाटर, बैंगन एवं प्याज जैसी सब्जियों के विस्तार से 58 किसानों को बेहतर आय का अवसर मिला है। जिले में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 71 कृषक गेंदे के फूल की खेती कर उल्लेखनीय पैदावार प्राप्त कर रहे हैं। ग्राम मलपुरीकला के कृषक श्री अरुण कुमार ने 2 हेक्टेयर रकबे में गेंदा उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित की है। 
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत चयनित 46 किसान ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर की खेती कर लाभान्वित हुए हैं। ग्राम टेमरी के कृषक श्री हितेश टॉक ने उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर 9 एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती की। उन्हें प्रति एकड़ 40 टन उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे लगभग 48 लाख रुपये की आय अर्जित की गई।
राज्य पोषित समेकित उद्यानिकी विकास योजना के अंतर्गत किसान अपनी खाली भूमि में नींबू, अमरूद, कटहल, आम एवं आंवला जैसे फलदार पौधों का रोपण कर रहे हैं, जिससे भविष्य में उनकी आय के नए स्रोत विकसित होंगे। दुर्ग जिले में उद्यानिकी आधारित खेती न केवल किसानों की आजीविका को सशक्त कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रही है। 















 

 


पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में बढ़ा विश्वास

09-Dec-2025
रायपुर ( शोर संदेश )। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के धान उपार्जन केंद्रों में पारदर्शी और सुगम धान खरीदी व्यवस्था के कारण किसानों में उत्साह एवं विश्वास बढ़ा है। अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मानिक प्रकाशपुर के किसान मनु तिर्की ने धान खरीदी प्रक्रिया को सरल, समयबद्ध और भरोसेमंद बताते हुए अपना अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि उनके पास कुल 161 क्विंटल धान का रकबा है। इस सीजन में खैरबार उपार्जन केंद्र से 60 क्विंटल के प्रथम टोकन पर उन्होंने बिना किसी कठिनाई के धान विक्रय किया। केंद्र पहुंचते ही नमी परीक्षण किया गया तथा तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। समिति द्वारा तौल प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न की गई, जिससे किसानों में भरोसा और बढ़ा है। तिर्की ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की किसान हितैषी नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य मिलने से किसानों को वास्तविक लाभ मिला है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की शिक्षा में भी सहयोग मिला है।











 

पिता-पुत्र साथ में समिति में बेचा 30.80 क्विंटल धान

09-Dec-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अभियान के तहत आज कोरिया जिले के ग्राम कंचनपुर निवासी 55 वर्षीय किसान  रामलखन (पिता - स्व. भोलाराम) ने अपने पुत्र सुरेश यादव के साथ सहकारी समिति, जामपारा में पहुंचकर धान विक्रय किया। उन्होंने समिति के माध्यम से टोकन प्राप्त किया था।
किसान कन्हैयालाल ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 0.6070 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती की थी। खरीदी केंद्र में उन्होंने 30.80 क्विंटल धान की बिक्री की। 01 क्विंटल धान की राषि समर्पण भी किया है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 2369 प्रति क्विंटल की समर्थन मूल्य दर के अनुसार उन्हें 72,8965.2 रुपए की राशि प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि धान बिक्री से मिली राशि का उपयोग वे अपने आगामी खेती, खाद-बीज के साथ दैनिक जरूरतों में व्यय करेंगे।



 

मृणाल मंडल को धान का सही मूल्य, ऑनलाइन टोकन से खरीदी हुई आसान

07-Dec-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश ) ऑनलाइन टोकन प्रणाली ने धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया है l किसान स्वयं ऑनलाइन टोकन के माध्यम से  घर बैठे ही टोकन प्राप्त कर सकते हैं।  समिति में पहुंचते ही  उन्हें बिना किसी परेशानी के धान बेचना आसानी हुआ ।
जिला बलरामपुर- रामानुजगंज के बलरामपुर विकासखंड के धान उपार्जन केंद्र बरदर में ग्राम रामनगरकला रहने वाले किसान मृणाल मंडल ने अपनी मेहनत से उपजे लगभग 166 बोरी धान का विक्रय किया। समिति में मिली बेहतर व्यवस्था,सहज प्रक्रिया और त्वरित खरीदी ने उन्हें संतुष्ट किया,मृणाल मंडल बताते हैं कि धान का सर्वाधिक मूल्य ने उनकी मेहनत को सही मूल्य दिलाया है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी का प्रावधान किसानों के लिए  बड़ी राहत साबित हो रहा है।
मंडल ने बताया कि समय पर समिति पहुंचना और तुरंत धान की खरीदी होना उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभव रहा। बिना लंबी प्रतीक्षा और बिना किसी भागदौड़ और सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था से धान विक्रय हो गया। उन्होंने बताया की इस बार की उपज के मिले राशि से परिवार की जरूरत, अगली फसल की तैयारी में उपयोग करेंगे। मंडल ने धान खरीदी व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त भी किया।
 

आधुनिक खेती से नई पहचान: किसान उदयराम साहू अब दो ट्रैक्टरों के मालिक

05-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ शासन की कृषि हितैषी नीतियों और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने का परिणाम आज ग्रामीण अंचलों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। किसान आर्थिक समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसी ही सफलता की प्रेरक कहानी है ग्राम कौडुटोला के किसान उदयराम साहू की, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और आज वे दो ट्रैक्टरों के स्वामी बन चुके हैं।
कभी बैलों और किराए के साधनों पर निर्भर रहने वाले साहू के खेतों में अब ट्रैक्टर से कम समय में अधिक कार्य हो रहा है। ट्रैक्टर आने से न केवल उनका श्रम और समय बचा, बल्कि उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ी। इससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हुई है और खेती अब उनके लिए मात्र आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन चुकी है।
साहू ने बताया कि इस वर्ष धान विक्रय प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सरल एवं पारदर्शी है। उन्होंने टोकन प्राप्त कर आसानी से अपना धान चौकी धान उपार्जन केंद्र में विक्रय किया। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में किसानों के हित में अनेक प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। धान का मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से खेती लाभदायक हो गई है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी के प्रावधान के लिए शासन आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के सरकार के फैसले से किसानों का रूझान खेती-किसानी की ओर बढ़ा है। 

जिले में किसानों से पारदर्शिता के साथ सुगमतापूर्वक हो रही धान खरीदी

05-Dec-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )  विष्णु के सुशासन में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसानों से पारदर्शिता के साथ सुगमतापूर्वक धान खरीदी की जा रही है। कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा जिले के 66 सहकारी समितियों के 105 धान उपार्जन केंद्रों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उपार्जन केंद्रों में उपलब्ध कराई गई सुविधाओं से किसानों को धान विक्रय करने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हो रही है और उनका धान आसानी से विक्रय हो रहा है।
पथरिया विकासखण्ड के कपुवा उपार्जन केंद्र में धान विक्रय करने पहुंचे किसान रतिराम चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88.80 क्विंटल धान का विक्रय किया है। उन्होंने कहा कि इस बार केंद्रों में व्यवस्था और भी सरल, सुविधाजनक एवं पारदर्शी है। इलेक्ट्रॉनिक तौल, बारदाना की व्यवस्था, टोकन तुहर हाथ ऐप से टोकन की सुविधा, पेयजल, छाया सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की सुविधा तथा 3100 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य का लाभ मिलने से किसानों को आर्थिक मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि किसान-हितैषी नीतियों एवं बेहतर व्यवस्थाओं से किसानों का प्रशासन पर भरोसा और भी मजबूत हुआ है। चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन को किसानों के हित में उत्कृष्ट व्यवस्था उपलब्ध कराने हेतु धन्यवाद दिया।
गौरतलब है कि शासन के निर्देशानुसार पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 31 सौ रुपए के हिसाब से प्रति क्विंटल धान की राशि दी जा रही है। इससे न केवल किसानों के फसलों का उचित दाम मिल रहा है, बल्कि किसानों का मान भी बढ़ा है। आसान भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए समितियों में माइक्रो एटीएम की सुविधा एवं किसानों को एटीएम कार्ड एवं चेक प्रदान किया गया है, इससे किसानों की जरूरी आवश्यकताएं पूरी होने के साथ ही उनके हक का पैसा उन्हें मिल रहा है। किसान आर्थिक रूप से समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।







 

 


किसान जल्द करवा लें फसल बीमा, 31 दिसंबर को अंतिम तिथि

04-Dec-2025
रायपुर। ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ शासन ने रबी मौसम 2025-26 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पोर्टल चालू कर दिया है। यह योजना किसानों को प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट-व्याधि और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करती है। पिछले वर्ष रबी सीजन में फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर जिले के 28,037 किसानों को 48 करोड़ 62 लाख रुपये की दावा राशि का भुगतान किया गया था। इस वर्ष जिले के 420 से अधिक अधिसूचित ग्रामों के किसान अपनी रबी फसलों का बीमा करवा सकते हैं। बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई है। इस बार गेहूं सिंचित, गेहूं असिंचित, चना, अलसी और सरसों जैसी अधिसूचित फसलों का बीमा किया जा सकेगा। योजना में ऋणी, अऋणी, भू-धारक और बटाईदार सभी प्रकार के किसान शामिल हो सकते हैं।
अधिसूचित ग्रामों में अधिसूचित फसल बोने वाला हर इच्छुक किसान इस योजना का लाभ उठा सकता है। प्रीमियम दरों के अनुसार किसानों को प्रति हेक्टेयर गेहूं सिंचित के लिए 690 रुपये, गेहूं असिंचित के लिए 405 रुपये, चना के लिए 645 रुपये, अलसी के लिए 315 रुपये और सरसों के लिए 375 रुपये जमा करने होंगे।
किसान अपने निकटतम बैंक शाखा, ग्रामीण बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, सेवा सहकारी समिति, लोक सेवा केंद्र या भारत सरकार के बीमा पोर्टल के माध्यम से फसल बीमा करा सकते हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि अंतिम तिथि से पूर्व अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सके। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि, राजस्व, बैंक या बीमा कंपनी के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
 

धान की खरीद में पारदर्शिता और बढ़ी सुविधा-भागीरथी साहू

04-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )   तकनीक.आधारित सुशासन का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है, जिससे धान जैसी फसलों की खरीद में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है। श्तुंहर टोकन, ऐप जैसी पहलों से घर बैठे टोकन मिल रहा है, जिससे समितियों के चक्कर लगाने और समय बर्बाद होने की समस्या खत्म हो गई है। धमतरी जिले के भटगांव के किसान भागीरथी साहू इसका जीवंत उदाहरण हैं। पहले जहाँ धान विक्रय के दौरान घंटों लंबी कतारों में लगना पड़ता था, वहीं इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए “टोकन तुहर हाथ” मोबाइल एप ने पूरी प्रक्रिया ही बदल दी है।
साहू ने अपने घर से ही कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन टोकन प्राप्त किया। न भीड़ का तनाव, न इंतज़ार, सिर्फ मोबाइल पर कुछ क्लिक और टोकन तुरंत उपलब्ध। वे बताते हैं “व्यवस्था पूरी तरह सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक है। टोकन भी आसानी से कट गया और धान बेचने में बिल्कुल भी परेशानी नहीं हुई।”  इस वर्ष उन्होंने सहकारी समिति केंद्र सोरम में 20 क्विंटल 60 किलो धान विक्रय किया। वे बताते हैं कि पिछले वर्ष भी उन्होंने लगभग इतनी ही मात्रा में धान बेचा था। प्राप्त धनराशि का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं और खेती-किसानी को बेहतर बनाने में करते हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य तकनीक की मदद से किसानों के समय, ऊर्जा और संसाधनों की बचत सुनिश्चित करना है। ऐप के माध्यम से टोकन लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, किसान स्वयं अपनी सुविधा के अनुसार तारीख और समय चुन सकते हैं। इससे केन्द्रों में होने वाली अनावश्यक भीड़ पूरी तरह खत्म हो गई है।
साहू जैसे किसान न केवल इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि गाँव के अन्य किसानों को भी ऐप का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रशासन का यह समन्वय ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। सरकारी नवाचारों की ऐसी सफल पहल यह सिद्ध करती है कि सही दिशा में उठाया गया एक कदम, किसान की पूरी व्यवस्था को अधिक सरल, सुरक्षित और सुगम बना सकता है।
 



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