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किसान

पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों को मिल रहा लाभ

09-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )   सरगुजा जिले में धान उपार्जन केन्द्रों की पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय में बड़ी राहत मिल रही है। धान उपार्जन की प्रक्रिया सरल,  और सुविधाजनक होने से किसान संतोष व्यक्त कर रहे हैं। इसी क्रम में बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ललाती के लघु  किसान निर्मल भगत ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना की है।
निर्मल भगत ने बताया कि इस वर्ष अच्छी वर्षा होने से धान की उपज बेहतर रही। उन्होंने लगभग साढ़े 4 एकड़ भूमि में धान की खेती की है, जिसमें कुल 82.80 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ। उन्होंने बताया कि समिति के माध्यम से समय पर टोकन कट गया और टोकन कटाने की प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि बोदा धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण कर तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया, जिससे धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि समिति केन्द्र में किसानों के लिए पेयजल एवं छाया में बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है तथा समिति के कर्मचारी किसानों को पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
भगत ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से गेहूं, तिलहन एवं सब्जी सहित अन्य फसलों की खेती कर अच्छी आमदनी हुई है।
निर्मल भगत ने धान खरीदी व्यवस्था को सराहनीय बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि धान का बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।









 

 


दंतेवाड़ा में पारदर्शी और सुचारू धान खरीदी से किसानों में संतोष

08-Jan-2026
रायपुर, 08 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही सरकार के सुशासन का सकारात्मक प्रभाव अब दूरस्थ अंचलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। दंतेवाड़ा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी की व्यवस्था पारदर्शी, सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित की जा रही है।
शासन के निर्देशानुसार सभी धान खरीदी केंद्रों पर प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 84,618.80 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 29,950 क्विंटल धान का उठाव कर मिलिंग कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। नियमित उठाव के कारण खरीदी केंद्रों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है और बिना किसी बाधा के धान खरीदी जारी है।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार धान खरीदी से संबंधित भुगतान की प्रक्रिया भी समय पर और सुचारू रूप से की जा रही है। इससे किसानों में संतोष और भरोसा बना है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सीधे और समय पर मिले, जो दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक लागू हो रहा है।
धान खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए बारदाना, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और हमालों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष किसानों की भागीदारी में वृद्धि हुई है और वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज का विक्रय कर पा रहे हैं।
बालूद धान खरीदी केंद्र में 12 गांवों के कुल 1,200 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 379 किसानों द्वारा अब तक 12,810 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है।
चितालंका गांव से धान बेचने पहुंचे किसान मनकू राम ने बताया कि विष्णु देव साय सरकार की नीतियों से उन्हें अपनी मेहनत की फसल सुरक्षित होने का भरोसा मिला है। वहीं, आवराभाटा गांव से आए किसान शंकर सिंह ठाकुर ने टोकन ऐप की सराहना करते हुए कहा कि इससे धान विक्रय की प्रक्रिया आसान हो गई है।
दंतेवाड़ा जिले के धान खरीदी केंद्रों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि सुशासन का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में धान खरीदी और भुगतान के आंकड़ों में और वृद्धि होने की संभावना है, जिससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
 

 


प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना : स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई से किसानों को बहुआयामी लाभ

07-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि उत्पादन एवं रकबा बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास किया जा रहा है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के प्रयासों से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत राज्य के 19306 किसानों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली का लाभ दिलाते हुए उनके 16154 हेक्टेयर खेती भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। इस योजना के तहत लघु सीमांत कृषकों को 55 प्रतिशत तथा दीर्घ किसानों के लिए 45 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। जिससे किसान कम लागत में आधुनिक सिंचाई तकनीक का लाभ उठा सकें।
छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली के उपयोग से फसलों को आवश्यकतानुसार एवं सामान रूप से पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे जल की 30 से 40 प्रतिशत तक बचत हो रही है। साथ ही खेतों में जल अपव्यय पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। सीमित जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से खेती अधिक लाभकारी बन रही है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली विशेष रूप से सब्जी, फल, बागवानी एवं नकदी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जबकि स्प्रिंकलर प्रणाली से दलहन, तिलहन एवं अनाज फसलों की उत्पादकता में वृद्धि दर्ज की जा रही है। किसानों के अनुसार इन प्रणालियों के उपयोग से उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि तथा उर्वरक एवं श्रम लागत में कमी आई है।
इस योजना के अंतर्गत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, डिज़ाइन अनुमोदन एवं स्थापना में सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। इससे किसानों में आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और वे वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। सूखा एवं अल्प वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम पानी में अधिक उत्पादन होने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ हो रही है और उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025-26 में अब तक स्प्रिंकलर के सेट 15 हजार 757 कृषकों के खेतों में 12 हजार 212 हेक्टेयर एवं ड्रिप सिस्टम के 3 हजार 549 कृषकों के खेतों में 3 हजार 942 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापना हुई।
















 

समय पर भुगतान, मजबूत भविष्य: किसान दुर्गाप्रसाद के चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष की मुस्कान

05-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 किसानों के लिए केवल धान विक्रय का दौर नहीं रहा, बल्कि यह भरोसे, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव बनकर सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी, तकनीक-संपन्न और किसान-केंद्रित धान खरीदी व्यवस्था ने वर्षों से किसानों के मन में जमी अनिश्चितता को दूर कर दिया है। अब किसान पूरे विश्वास के साथ अपनी फसल उपार्जन केंद्र तक लाता है, क्योंकि उसे यह भरोसा है कि उसकी मेहनत का पूरा मूल्य समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुँचेगा।
इसी बदले हुए विश्वास की सजीव मिसाल हैं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम बरमपुर निवासी किसान दुर्गाप्रसाद पिता कंचनराम। वर्षों से खेती से जुड़े दुर्गाप्रसाद ने मौसम की मार, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती से अपना नाता कभी कमजोर नहीं होने दिया। इस वर्ष प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने उनके मन में स्थिरता और सुरक्षा का नया संबल भर दिया। यह केवल आर्थिक लाभ नहीं था, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक था, जिसमें किसान ने यह महसूस किया कि सरकार उसकी मेहनत को समझती है और उसके साथ मजबूती से खड़ी है।
तुंहर टोकन 24×7 व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित तिथि पर टोकन प्राप्त कर जब दुर्गाप्रसाद खड़गवां उपार्जन केंद्र पहुँचे, तो उन्हें धान खरीदी की पूरी तरह बदली हुई तस्वीर देखने को मिली। सुव्यवस्थित परिसर, बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और कर्मचारियों का सहयोगी व्यवहार यह दर्शाता है कि अब धान खरीदी प्रक्रिया में किसान की सुविधा और सम्मान को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। न भीड़, न अफरा-तफरी और न ही अनावश्यक प्रतीक्षा, जिससे पूरी प्रक्रिया सहज, सुचारु और संतोषजनक रही।
धान खरीदी के दौरान डिजिटल तौल कांटे, फोटो आधारित सत्यापन और रियल टाइम डेटा एंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों ने पूरी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बना दिया। प्रत्येक चरण किसान की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं रही। तकनीक के प्रभावी उपयोग से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि किसानों का व्यवस्था के प्रति विश्वास और भी गहरा हुआ।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान दुर्गाप्रसाद ने कुल 20.80 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। पूरी खरीदी प्रक्रिया समयबद्ध और व्यवस्थित रही। जब उनकी मेहनत की फसल सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से बिकी और भुगतान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में समय पर जमा हुई, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ झलक उठा। समय पर भुगतान मिलने से अब वे बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक आवश्यकताओं और आगामी कृषि सत्र की तैयारी को लेकर पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे की योजना बना पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान हितैषी नीतियों के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए दुर्गाप्रसाद कहते हैं कि बदली हुई धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के मनोबल को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। अब खेती केवल संघर्ष का प्रतीक नहीं रही, बल्कि यह एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आजीविका का भरोसेमंद माध्यम बनती जा रही है। किसान दुर्गाप्रसाद की यह सफलता की कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों किसानों की भावना को प्रतिबिंबित करती है, जो नई धान खरीदी व्यवस्था से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ा रहे हैं।

 


किसान धन्नू सिंह ने ऑफलाइन टोकन से बेचा 54.80 क्विंटल धान

05-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश )  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सरकार की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को न केवल उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, बल्कि समय पर भुगतान और सम्मानजनक प्रक्रिया का अनुभव भी हो रहा है। ग्राम पेनारी निवासी किसान धन्नू सिंह की कहानी इसी व्यवस्था की एक प्रेरक उपलब्धि है।
धन्नू सिंह एक साधारण कृषक हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। इस वर्ष उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ऑफलाइन टोकन के माध्यम से कोड़ा उपार्जन केंद्र में 54.80 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उपार्जन केंद्र पर सुव्यवस्थित व्यवस्था, डिजिटल तौल कांटा, पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया और सहयोगात्मक स्टाफ ने धान खरीदी को सरल एवं सुगम बनाया।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की व्यवस्था ने किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य सुनिश्चित किया। धन्नू सिंह को धान विक्रय की राशि सीधे उनके बैंक खाते में समय पर प्राप्त हुई, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं को लेकर आत्मविश्वास मिला। धन्नू सिंह बताते हैं कि पूर्व में धान विक्रय के दौरान तौल और भुगतान को लेकर अनिश्चितता रहती थी, लेकिन वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, भरोसेमंद और किसान-अनुकूल है। समय पर भुगतान से अब अपने बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं और रबी फसल की तैयारी बिना किसी चिंता के कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई इस धान खरीदी व्यवस्था से किसानों का विश्वास सरकार के प्रति और मजबूत हुआ है। धन्नू सिंह की यह कहानी केवल एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों किसानों के सशक्तिकरण की प्रतीक है, जो सरकार की पारदर्शी नीतियों से लाभान्वित होकर सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।




 

वैज्ञानिक खेती से बदली किस्मत, किसान गंगाराम कौशिक ने दोगुना किया धान उत्पादन

03-Jan-2026
रायपुर,( शोर संदेश ) मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया अंतर्गत ग्राम रामबोड़ के प्रगतिशील कृषक  गंगाराम कौशिक ने वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर धान उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। परंपरागत खेती में जहां उत्पादन सीमित रहता था, वहीं कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्नत तकनीकों को अपनाने से उन्हें प्रति एकड़ 22-25 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हुआ, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुना है। कौशिक के पास कुल 0.848 हेक्टेयर कृषि भूमि है। अधिक उत्पादन और आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गेंदलाल पात्रे तथा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एल. के. कोशले से तकनीकी सलाह ली। 
अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, बोनी से पूर्व बीज का ट्रायकोडर्मा से उपचार, रोपाई के दौरान हर 12 फीट पर 20 सेमी की पट्टी छोड़ना, तथा हर 15 दिन में नीमेड का छिड़काव जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया। इसके साथ ही उन्होंने प्रमाणित बीज, कल्चर का उपयोग, तथा गभोट अवस्था में प्रति एकड़ 02 किलो बोरान और नैनो यूरिया का छिड़काव किया। इन सभी उपायों का सकारात्मक प्रभाव फसल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। किसान कौशिक ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर न केवल उत्पादन लक्ष्य प्राप्त हुआ, बल्कि लागत के अनुपात में बेहतर लाभ भी मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और यह साबित करती है कि सही तकनीक और मार्गदर्शन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से बदली किसानों की तक़दीर, जैविक खेती से बढ़ी आय

03-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  राज्य में रसायन मुक्त एवं जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों से कृषकों को न केवल प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला के कृषक दंपती मनभौतिन बाई निषाद एवं माखन निषाद ने सफलता की नई मिसाल पेश की है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत वर्ष 2025 में राजनांदगांव विकासखंड के 150 हेक्टेयर क्षेत्र में कलस्टर विकसित कर किसानों को जैविक एवं रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी क्रम में ग्राम मोखला स्थित प्रगति महिला स्वसहायता समूह के  कृषकों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क सहित अन्य प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण एवं फसल की अवस्था अनुसार उनके उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण में ग्राम मोखला निवासी 68 वर्षीय कृषक मनभौतिन बाई निषाद एवं उनके 72 वर्षीय पति माखन निषाद ने भाग लिया। शिवनाथ नदी किनारे स्थित मोखला के निवासी इस कृषक दंपती के पास कुल 2.34 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से 1.17 एकड़ स्वयं की तथा 1.17 एकड़ लीज पर ली गई भूमि है। पूर्व में वे धान एवं उद्यानिकी फसलों की खेती कर लगभग 50 से 60 हजार रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे थे। श्रीमती मनभौतिन बाई निषाद ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया। प्रारंभ में जानकारी के अभाव और उत्पादन कम होने की आशंका के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रासायनिक खेती पर निर्भरता समाप्त हो गई।
उन्होंने बताया कि जहां रासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20 से 22 हजार रुपये तक की लागत आती थी, वहीं प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घनजीवामृत एवं नीमास्त्र जैसे उत्पाद घरेलू सामग्री से कम लागत में तैयार हो जाते हैं। देशी गाय का गोबर, गौमूत्र, मिट्टी एवं स्थानीय पत्तियों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और जैविक कृषि उत्पाद का बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। व्यापारी अब सीधे खेत से उपज खरीद रहे हैं, जिससे कृषक दंपती की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। वर्ष 2025-26 रबी सीजन में वे सब्जियों के साथ तिवड़ा, मसूर एवं सरसों की खेती प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं।
 

किसान शीतल दास-मेहनत, विश्वास और सरकारी सहयोग से बदली जिंदगी

02-Jan-2026
रायपुर( शोर संदेश )। कोरबा जिले के करतला विकासखंड के ग्राम बैगापाली के किसान शीतल दास के पास लगभग 14 एकड़ कृषि भूमि है। पिछले कई वर्षों से वे धान की खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में भी उन्होंने धान की उत्तम फसल ली। शीतल दास ने गत वर्ष 280 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र कनकी में बेचा था और इस वर्ष भी उन्होंने 280 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र कनकी में विक्रय के लिए पहुंचाया।
किसान शीतल दास बताते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उपार्जन केंद्रों में किसानों के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी सीमा और धान का 3100 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य किसानों के लिए बड़ा सहारा बना है। वे बताते हैं कि अब उपार्जन केंद्रों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। पहले के समय में किसानों को टोकन के लिए लंबी कतारें लगानी पड़ती थीं, अक्सर टोकन नहीं मिलता था और पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था। लेकिन अब सरकार द्वारा ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू करने से किसान अपनी सुविधा अनुसार टोकन प्राप्त कर धान बेच सकते हैं।
शीतल दास के अनुसार उनकी खेती ही उनके जीवन-यापन का मुख्य आधार है। पिछले वर्ष धान बेचने के बाद प्राप्त राशि से उन्होंने अपने घर के निर्माण के साथ अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। उनका कहना है कि समय पर मिलने वाला समर्थन मूल्य और सुधारित उपार्जन व्यवस्था ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है।










 

रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर 2.58 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

02-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )। रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं किसान-केंद्रित तरीके से निरंतर जारी है। जिले के 105 उपार्जन केंद्रों में अब तक 42 हजार से अधिक किसानों से कुल 2 लाख 58 हजार 683.88 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। उपार्जन केंद्रों से 1 लाख 37 हजार 143.90 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है। 
रायगढ़ जिले में ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसान निर्धारित तिथि एवं समय पर टोकन प्राप्त कर धान विक्रय कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा धान खरीदी प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। कोचियों एवं बिचौलियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने उपार्जन केन्द्रों के प्रभारियों को वास्तविक किसानों का ही धान क्रय करने के कड़े निर्देश दिए हैं। 

जल बचत से बढ़ी खुशहालीः रबी फसलों ने बदली धमतरी के किसानों की तस्वीर

01-Jan-2026
रायपुर( शोर संदेश )।जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसान आय वृद्धि के क्षेत्र मंय उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के सुनियोजित प्रयासों से परंपरागत फसल चक्र से आगे बढ़ते हुए कम जल उपयोग वाली एवं अधिक लाभकारी रबी फसलों को बढ़ावा दिया गया, जिसके उत्साहजनक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
रबी वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले में ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अत्यधिक जल उपयोग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024-25 में 24,200 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही खेती को रबी वर्ष 2025-26 में घटाकर 15,000 हेक्टेयर तक लाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई। इससे न केवल भू-जल संरक्षण को बल मिला, बल्कि किसानों को वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर भी प्रेरणा मिली।
फसल चक्र परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव मूंगफली उत्पादन में विशेष रूप से देखने को मिला है। जहां गत वर्ष मात्र 10 एकड़ क्षेत्र में मूंगफली की खेती होती थी, वहीं इस वर्ष विकासखंड मगरलोड के बुढ़ेनी क्लस्टर में 275 एकड़ में मूंगफली की खेती की जा रही है। यह परिवर्तन किसानों की सोच में आए भरोसेमंद बदलाव को दर्शाता है।
इसी तरह मक्का उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। गत वर्ष 430 हेक्टेयर में मक्का की खेती के मुकाबले इस वर्ष 699 एकड़ क्षेत्र में मक्का बोया गया है। विकासखंड नगरी के गट्टासिल्ली, बोराई और उमरगांव क्लस्टर मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
चना उत्पादन में भी जिले ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। पिछले वर्ष 15,830 हेक्टेयर में बोए गए चना का रकबा इस वर्ष बढ़कर 16,189 हेक्टेयर हो गया है। विकासखंड कुरूद और धमतरी में 600 से 1200 हेक्टेयर के बड़े चना कलस्टरों के विकास से उत्पादन के साथ-साथ विपणन की संभावनाएं भी सुदृढ़ हुई हैं।
दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने के तहत सरसों का रकबा 2,590 हेक्टेयर से बढ़कर 4,660 हेक्टेयर तथा मसूर का क्षेत्र 50 हेक्टेयर से बढ़कर 211 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं लघु धान्य फसलों में रागी का रकबा 10 हेक्टेयर से बढ़कर 150 हेक्टेयर होना जिले की दूरदर्शी कृषि नीति का प्रमाण है।
समग्र रूप से रबी वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले ने संतुलित खेती, जल संरक्षण और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है, जो आने वाले वर्षों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।



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