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पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में उत्साह और भरोसा

16-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ शासन की सुव्यवस्थित धान खरीदी नीति किसानों के जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, ऑनलाइन टोकन व्यवस्था, गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच और दो दिनों के भीतर भुगतान ने किसानों का भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जिले के सभी 17 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता और सुचारु ढंग से संचालित हो रहा है, जिसे किसान आज एक उत्सव के रूप में अनुभव कर रहे हैं।
नारायणपुर विकासखंड के ग्राम बिंजली निवासी किसान  श्यामसिंह दुग्गा ने बताया कि उन्होंने अपनी 3 एकड़ भूमि में उत्पादित 30 क्विंटल धान का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया। ऑनलाइन टोकन के माध्यम से निर्धारित तिथि पर धान विक्रय करने के बाद मात्र दो दिनों में राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो गई। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में पीने के पानी, बारदाने और मॉइश्चर मशीन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं, जिससे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
समय पर भुगतान से उत्साहित दुग्गा ने कहा कि अब वे आगामी फसल के लिए उन्नत बीज, खाद और आधुनिक कृषि कार्यों में निवेश कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने प्रभावी धान खरीदी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसी तरह ग्राम पालकी के किसान मेहता उसेण्डी ने अपनी 3 एकड़ भूमि से 50 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने भी ऑनलाइन टोकन व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि धान विक्रय के दो दिनों के भीतर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है। उन्होंने किसान हितैषी नीतियों के लिए शासन और जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा धान उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि किसानों को सरल, सुरक्षित और संतोषजनक वातावरण में अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह व्यवस्था न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है।



 

सरायपाली में राइस मिल पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई

15-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश ) धान खरीदी एवं भंडारण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन महासमुंद द्वारा राइस मिलों का सतत भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। भौतिक सत्यापन के इसी क्रम में सरायपाली विकासखंड अंतर्गत बालोदिया राइस मिल में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। भौतिक सत्यापन में 61,203 बोरा धान की कमी पाए जाने पर राइस मिल में उपलब्ध संपूर्ण धान एवं चावल के स्टॉक को जब्त किया गया है।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सरायपाली के नेतृत्व में खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान राइस मिल परिसर में 2328 क्विंटल चावल (4656 बोरा) तथा 37,759.6 क्विंटल धान (94,399 बोरा) भौतिक रूप से उपलब्ध पाया गया, जबकि अभिलेखों के अनुसार बड़ी मात्रा में धान की कमी पाई गई, जिसके कारण वहां उपलब्ध धान एवं चावल के संपूर्ण स्टॉक को जब्त कर लिया गया है। जब्ती की यह कार्रवाई आगामी कानूनी प्रक्रिया एवं विस्तृत जांच के अधीन रखी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में धान खरीदी, भंडारण एवं परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए इस प्रकार की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उल्लंघन करने वाले राइस मिल संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


 

जैविक खेती ने बदली तस्वीर: मूलचंद बंजारे बने किसानों के लिए प्रेरणा

15-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  राज्य शासन द्वारा किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित योजनाएं अब ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगी हैं। मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया के ग्राम मोहदी निवासी कृषक मूलचंद बंजारे ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती अपनाकर अपनी खेती की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं। राज्य पोषित जैविक खेती मिशन योजना उनके लिए लाभकारी साबित हुई है।
मूलचंद बंजारे पूर्व में वे परंपरागत रासायनिक खेती करते थे, जिसके कारण फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बना रहता था। अधिक लागत के बावजूद अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पा रहा था। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के तकनीकी मार्गदर्शन में बंजारे ने राज्य पोषित जैविक खेती मिशन के अंतर्गत हरी खाद सनई बीज की बोनी कर उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की शुरुआत की। खेती के दौरान प्रमाणित बीजों का उपयोग, बीज उपचार, ट्रायकोडर्मा से बीज शोधन, पी.एस.बी. कल्चर का प्रयोग तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाया गया। इसके साथ ही खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, समय पर जिंक सल्फेट का उपयोग तथा गभोट अवस्था में प्रति एकड़ 2 किलोग्राम बोरान का छिड़काव किया गया।
इन वैज्ञानिक एवं जैविक उपायों के परिणामस्वरूप फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप उल्लेखनीय रूप से कम हुआ, उत्पादन लागत में कमी आई और धान की फसल से निर्धारित उत्पादन लक्ष्य प्राप्त हुआ। बेहतर उपज और गुणवत्ता के कारण बंजारे की आय में वृद्धि हुई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है। मूलचंद बंजारे का कहना है कि जैविक एवं वैज्ञानिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों के लिए दीर्घकालीन रूप से अधिक लाभकारी भी सिद्ध हो रही है। उन्होंने अन्य किसानों से भी कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की अपील की है। 







 

 


डिजिटल व्यवस्था से बदली किस्मत, किसान धनेश्वर ने बेचा 150 क्विंटल धान : पारदर्शी धान खरीदी से बढ़ा आत्मविश्वास, किसान धनेश्वर हुए लाभान्वित

14-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लागू की गई पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के जीवन में भरोसे का नया अध्याय जोड़ दिया है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम कोटेया के किसान धनेश्वर की सफलता इस बदली हुई व्यवस्था की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है। धनेश्वर ने रतनपुर उपार्जन केंद्र में अपनी मेहनत की फसल के कुल 150 क्विंटल धान की सफल बिक्री की। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी की नीति के अंतर्गत उन्हें उनकी पूरी उपज का वाजिब और लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ, जिससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया। धनेश्वर का टोकन ऑफलाइन जारी हुआ था, फिर भी वे निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचे और बिना किसी बाधा के धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया पूर्ण हो गई। उपार्जन केंद्र में बैठने की व्यवस्था, पेयजल, छाया एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध थीं। डिजिटल तौल काटा उनकी उपज की सटीक तौल का आधार बना, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास कायम रहा।
किसान धनेश्वर बताते हैं कि पहले धान बेचने में लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता बनी रहती थी, लेकिन इस वर्ष डिजिटल और सुव्यवस्थित व्यवस्था के कारण न तो देरी हुई और न ही किसी प्रकार की परेशानी। समर्थन मूल्य की राशि मिलने के बाद अब वे निश्चित होकर रबी फसल की तैयारी, बच्चों की शिक्षा तथा घर की अन्य आवश्यकताओं के लिए योजनाएं बना पा रहे हैं। ग्राम कोटेया के किसान धनेश्वर की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था न केवल धान खरीदी को आसान बना रही है, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है और उनके जीवन में स्थिरता तथा समृद्धि के नए अवसर खोल रही है।


 

20 हजार 406 क्विंटल अवैध धान एवं 83 वाहन जब्त

14-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश )  राज्य शासन के निर्देश के अनुसार बलरामपुर जिले में पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा अवैध धान भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर के मार्गदर्शन जिले की अंतरराज्यीय सीमाओं तथा सभी प्रमुख चेक पोस्टों पर निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, जहां 24 घंटे सतत निगरानी की जा रही है।
प्रशासन द्वारा संदिग्ध वाहनों एवं परिवहन गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। जांच-पड़ताल के लिए गठित संयुक्त दल नियमित रूप से औचक निरीक्षण कर रहे हैं।  बलरामपुर जिले में अब तक जिले में 129 प्रकरणों में कुल 20,426 क्विंटल अवैध धान जब्त किया गया है। कार्रवाई के दौरान अवैध परिवहन में संलिप्त 73 चारपहिया एवं 10 दोपहिया सहित कुल 83 वाहनों को भी जब्त किया गया है।
जिले के अंतरराज्यीय एवं आंतरिक चेक पोस्टों पर विशेष दलों की तैनाती की गई है। साथ ही प्रत्येक अनुविभाग स्तर पर गठित निगरानी दलों द्वारा रात्रिकालीन गश्त के साथ-साथ वाहनों की सघन जांच की जा रही है। मंडी अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। कलेक्टर का कहना है कि अवैध धान भंडारण एवं परिवहन पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
बलरामपुर जिले के चांदो धान उपार्जन केंद्र में अवैध रूप से धान बेचने का एक मामला आज पकड़ में आया। वहां इस मामले में 65 बोरी धान जब्त किया गया। चांदो धान उपार्जन केंद्र में ग्राम कुरडीह निवासी रामकिशुन द्वारा एक पिकअप वाहन में अवैध धान लाकर विक्रय का प्रयास किया जा रहा था। नायब तहसीलदार द्वारा मौके पर कार्रवाई करते हुए पिकअप वाहन सहित धान को जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
 

: परशुरामपुर जलाशय से चार गांवों के किसानों को मिल रहा सिंचाई का लाभ

13-Jan-2026
सूरजपुर ( शोर संदेश )  जिले के परशुरामपुर जलाशय योजना से स्थानीय किसानों को खेती में भरपूर लाभ मिल रहा है। वर्ष 2006 में निर्मित इस जलाशय से चार गांवों के सैकड़ों किसान सिंचाई सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
अक्षांश 23.06‘40‘‘ तथा देशांतर 82.48‘15‘‘ पर स्थित इस बांध की कुल लंबाई 12.60 मीटर और अधिकतम ऊंचाई 20.70 मीटर है। बांध की ऊपरी चौड़ाई 6 मीटर है, जबकि इसकी कुल जल भराव क्षमता 9.452 मिलियन क्यूबिक मीटर है।
 बांध की रूपांकित सिंचाई क्षमता खरीफ में 809 हेक्टेयर और रबी में 441 हेक्टेयर यानी कुल 1250 हेक्टेयर है। मुख्य नहर की लंबाई 5 किलोमीटर है, जबकि 5 शाखा नहरों की कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है।
किसानों को मिल रहा व्यापक लाभः-
परशुरामपुर, जगन्नाथपुर, सुरता तथा अक्षयपुर गांवों के किसान इस जलाशय से सिंचाई का लाभ ले रहे हैं। वर्तमान में बांध में 5.75 मिलियन क्यूबिक मीटर जल उपलब्ध है।
वर्ष 2025 में खरीफ की वास्तविक सिंचाई 630 हेक्टेयर में की गई, जबकि रबी फसल का कुल लक्ष्य 170 हेक्टेयर रखा गया था। रबी सीजन में कुल 131 किसानों ने खेती की है, जिसमें ग्राम परशुरामपुर के 50, सुरता के 35, अक्षयपुर के 30 तथा जगन्नाथपुर के 16 किसान शामिल हैं।
बीज वितरण से मिली मददः-
कृषि विभाग द्वारा बीज ग्राम योजना के तहत इस वर्ष किसानों को 29 क्विंटल गेहूं तथा 1 क्विंटल सरसों के बीज वितरित किए गए हैं।
वर्तमान में ग्राम परशुरामपुर में 35 हेक्टेयर में विभिन्न फसलें उगाई जा रही हैं, जिसमें गेहूं 20 हेक्टेयर, सरसों 2 हेक्टेयर, चना 1 हेक्टेयर तथा मटर की खेती शामिल है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि जलाशय योजना से उन्हें समय पर सिंचाई की सुविधा मिल रही है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। यह योजना क्षेत्र के कृषि विकास में मील का पत्थर साबित हो रही है।

ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा: अतिरिक्त अनुदान से किसानों की आय बढ़ाने की पहल

12-Jan-2026
रायपुर, । ( शोर संदेश )  खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने तथा किसानों की आय में दीर्घकालीन और स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र सरकार के अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में टॉप-अप अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक संबल मिल सके। 
सहायक संचालक उद्यानिकी मुंगेली ने बताया कि ऑयल पाम की खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होने तथा 03 से 04 वर्षों की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा देय न्यूनतम 1.30 लाख प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन किसानों को टॉप-अप अनुदान प्रदान कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक कृषक इस फसल की ओर आकर्षित हों।
ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम वाली और उच्च उत्पादकता वाली फसल है। इसमें रोग प्रकोप की संभावना अत्यंत कम होती है। एक बार रोपण के पश्चात चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और यह फसल 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज देती है। पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में ऑयल पाम प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे किसानों को स्थायी एवं सुनिश्चित आय का लाभ प्राप्त होता है।
राज्य शासन द्वारा ऑयल पाम रोपण करने वाले पात्र किसानों को निम्नानुसार अतिरिक्त अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, इनमें रखरखाव मद में पूर्व निर्धारित 05 हजार 250 प्रति हेक्टेयर की 01 हजार 500 रूपए की वृद्धि कर कुल 06 हजार 750 रूपए प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसलों हेतु वृद्धि के साथ कुल 10 हजार 250 रूपए प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाले किसानों को 08 हजार 635 रूपए की अतिरिक्त सहायता सहित कुल 22 हजार 765 रूपए प्रति हेक्टेयर, रोपित पौधों एवं अंतरवर्तीय फसलों को जानवरों से बचाने हेतु फेंसिंग के लिए 54 हजार 485 रूपए प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार राज्य शासन द्वारा रखरखाव, फेंसिंग, अंतरवर्तीय फसल एवं ड्रिप सिंचाई मद में कुल 69 हजार 620 रूपए तक का अतिरिक्त अनुदान ऑयल पाम रोपण करने वाले किसानों को प्रदान किया जा रहा है।
यह अनुदान केवल उन्हीं कृषकों को देय होगा, जो योजना के अंतर्गत ऑयल पाम का रोपण करेंगे। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों अथवा अधिकृत प्रतिनिधि कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं। ऑयल पाम की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएगी, बल्कि देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगी।

 


मुख्यमंत्री के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित : किसान मोहम्मद अजीज ने पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार

12-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पारदर्शिता के साथ धान खरीदी सुव्यवस्थित तरीके से चल रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी धान खरीदी पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों में निरंतर धान की आवक हो रही है। 
जिले के धान उपार्जन केंद्र महुआ टोली, कुनकुरी में अपनी उपज विक्रय करने पहुंचे ग्राम लोधमा के कृषक मोहम्मद अजीज ने बताया कि केंद्र में धान विक्रय की प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सुविधाजनक रही। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर टोकन प्राप्त हुआ। पर्ची कटने से लेकर तौल प्रक्रिया तक सभी कार्य सुचारू एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। केंद्र पर स्वच्छ एवं पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया गया तथा वजन कार्य पूर्णतः पारदर्शी तरीके से किया गया।
कृषक अजीज ने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को अब काफी सहूलियत मिल रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और अनावश्यक प्रतीक्षा से भी राहत मिली है। उन्होंने शासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा भी मिला है।
 

धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शी प्रक्रिया से संतुष्ट किसान, डिजिटल सुविधा से धान विक्रय हुआ आसान

11-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  धान उपार्जन केन्द्रों पर लागू पारदर्शी एवं डिजिटल व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय में सुविधा मिल रही है। शासन द्वारा की गई व्यवस्था से अब धान विक्रय प्रक्रिया सरल, सुगम और आसान हो गई है। अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घंघरी  के किसान लाल सांडिल ने बताया कि उनके दादा झेमल राम सांडिल के नाम से इस वर्ष कुल 19.60 क्विंटल धान का रकबा दर्ज है। उन्होंने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से समय की बचत हुई और उपार्जन केन्द्र में भीड़ की समस्या भी नहीं रही।
सांडिल ने बताया कि नमना कलां धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही गेट के पास, नमी परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई और तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। इससे धान विक्रय में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि समिति केन्द्र में किसानों की सुविधा के लिए पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था की गई है तथा समिति कर्मचारियों द्वारा हर स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार में धान का 3100 रुपए प्रति क्विंटल का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।
किसान सांडिल ने कहा कि धान विक्रय से प्राप्त राशि से गेहूं, तिलहन एवं सब्जी जैसी अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं, जिससे आमदनी बढ़ी हुई और आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। उन्होंने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि उपज का सही दाम मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए गए कार्यों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया और कहा कि वर्तमान में धान खरीदी व्यवस्था से किसान बेहद संतुष्ट और खुश हैं।




 

मोहन खेती में निवेश कर बढ़ा रहे उत्पादन

11-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  शासन की धान खरीदी नीति ने किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। समर्थन मूल्य पर समयबद्ध भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था के कारण किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। बलरामपुर.रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम कोटपाली के किसान मोहन यादव भी इसी का लाभ ले रहे हैं।
मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र महाराजगंज में इस वर्ष 165 क्विंटल धान का विक्रय  किया। वे बताते हैं कि धान विक्रय करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। ऑनलाइन माध्यम से टोकन कटवाने के बाद निर्धारित तिथि पर केंद्र पहुँचकर सुगम तरीके से धान विक्रय किया। वे कहते हैं कि शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदने की सीमा तय किए जाने से किसानों की चिंता दूर हुई है। अब किसानों को अपनी पूरी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और भुगतान भी सीधे खाते में समय पर प्राप्त हो रहा है।
मोहन यादव  बताते है कि समय पर भुगतान मिलने से नई फसल के लिए उन्नत बीज, खाद और कृषि कार्यों में बेहतर निवेश कर पा रहे हैं, जिससे उनकी खेती की उत्पादकता में निरंतर वृद्धि हो रही है। श्री मोहन यादव कहते हैं कि सरकार की धान खरीदी नीति से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि भरोसा भी बढ़ा है। उन्होंने किसान हितैषी नीतियों के लिए शासन प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।



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