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किसान

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन: कर्ज के बोझ से मुक्त होकर आत्मनिर्भर बनी सुष्मिता जाटवर

10-Jan-2026
रायपुर ।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की एक प्रेरक मिसाल मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरदुली से सामने आई है। सतकार महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुष्मिता जाटवर ने संघर्ष से सफलता तक का जो सफर तय किया है, वह ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। समूह से जुड़ने से पूर्व सुष्मिता जाटवर की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की आय सीमित थी और आजीविका के लिए उन्हें छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर ऋण लेना मजबूरी बन गई थी, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था।
एनआरएलएम के अंतर्गत सत्कार महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रूप्ए की रिवॉल्विंग फंड सहायता तथा बैंक लिंकेज के तहत 50 हजार रूपए का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने खेत के साथ-साथ अन्य किसानों की भूमि किराये पर लेकर कृषि कार्य में निवेश करने के लिए किया। इसके साथ ही उन्होंने छोटे व्यवसाय की भी शुरुआत की। वर्तमान में सुष्मिता जाटवर भिंडी, करेला, लौकी एवं टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं, जिसे स्थानीय मंडी में विक्रय किया जा रहा है। इस पहल से उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां उनकी आय लगभग 03 हजार रूपए प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 50 हजार रूपए प्रतिमाह तक पहुंच गई है।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है। उन्होंने साहूकारों से लिया गया ऋण भी चुका दिया है और आज वह आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं। भविष्य की योजनाओं के तहत सुष्मिता जाटवर अपने व्यवसाय का विस्तार करने के साथ-साथ बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।











 

पारदर्शी धान उपार्जन व्यवस्था से किसानों को बड़ी राहत

10-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) प्रदेश में लागू पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित धान उपार्जन व्यवस्था किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। टोकन प्रणाली, त्वरित नाप-तौल, नमी परीक्षण एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते किसानों को धान विक्रय में अब किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि किसानों का भरोसा भी शासन-प्रशासन पर लगातार मजबूत हो रहा है।
बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नवाबांध के लघु किसान धर्मसाय राजवाड़े ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि इस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण उनकी फसल बेहतर हुई। उन्होंने लगभग साढ़े चार एकड़ में धान की खेती की, जिससे 98 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। समिति के माध्यम से उनका पहला टोकन 55.20 क्विंटल के लिए मिला और पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई।
राजवाड़े ने बताया कि शिवपुर धान उपार्जन केंद्र में गेट पास, नमी परीक्षण तथा बारदाना तुरंत उपलब्ध कराया गया। केंद्र में पेयजल एवं बैठने की समुचित व्यवस्था है तथा समिति के कर्मचारियों द्वारा पूरा सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में प्रदेश में धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की जा रही है। इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। राजवाड़े ने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया है।

धान विक्रय की राशि से होगी घर की मरम्मत

10-Jan-2026
रायपुर ( शोर संदेश )   छत्तीसगढ़ शासन की पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित धान उपार्जन व्यवस्था किसानों के लिए संबल बन रही है। दुर्ग जिले के ग्राम अछोटी निवासी किसान नुलम साहू ने इस वर्ष अपने 2 एकड़ 30 डिसमिल कृषि भूमि में धान की फसल ली। धान कटाई के उपरांत उन्होंने उपार्जन के तहत 40 क्विंटल धान का विक्रय किया है तथा वर्तमान में रबी फसल की तैयारी में जुटे हुए हैं।
किसान नुलम साहू अपनी पत्नी के साथ धान उपार्जन केंद्र कुथरेल पहुंचे, जहां   किसानों की सुविधा हेतु शेड, स्वच्छ पेयजल, शौचालय सहित अन्य आवश्यक इंतजाम को देखकर प्रसन्नता जताई। केंद्र पर धान की गुणवत्ता जांच के पश्चात समिति के मजदूरों द्वारा धान भराई, सिलाई एवं तौलाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है तथा तौलाई के पश्चात किसानों को तत्काल रसीद प्रदान की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी हुई है।
किसान नुलम साहू ने धान खरीदी की सुचारु व्यवस्था के लिए विष्णुदेव सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उत्पादन अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद शासन की उपार्जन व्यवस्था से उन्हें आर्थिक राहत मिली है। धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने घर की मरम्मत में करेंगे। उल्लेखनीय है कि धान खरीदी का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है तथा केंद्रों पर सतत निगरानी के लिए अधिकारी तैनात हैं।
 
 

वनांचल के मेहनतकश वनवासी चेहरों पर आई आर्थिक लाभ की मुस्कान

09-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश )   वर्षों से वनभूमि पर कठिन जीवन यापन कर रहे परंपरागत आदिवासी किसानों के लिए अब उनकी ही भूमि आर्थिक उन्नति का सशक्त माध्यम बन गई है। वनाधिकार पत्रक के अंतर्गत प्राप्त बंजर एवं असमतल भूमि को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के सहयोग से उपजाऊ खेतों में परिवर्तित किया गया है।
कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत सोनहत की ग्राम पंचायत नटवाही एवं इसके आश्रित गांव चुलादर एवं कुर्थी में कुल 17 वनवासी परिवारों को दो वर्ष पूर्व शासन की वनाधिकार पत्रक योजना के तहत भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था। परंतु भूमि असमतल एवं पथरीली होने के कारण खेती योग्य नहीं थी, जिससे किसानों को कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था।
वनाधिकार भूमि को उपयोगी बनाने हेतु ग्राम पंचायत द्वारा भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान कार्य को ग्राम पंचायत विकास कार्ययोजना में शामिल किया गया। तकनीकी परीक्षण उपरांत प्रत्येक किसान के लिए पृथक-पृथक प्रस्ताव तैयार किए गए। कुल 11.06 हेक्टेयर भूमि के सुधार हेतु मनरेगा अंतर्गत 19 लाख 51 हजार 346 रुपये की राशि स्वीकृत की गई। ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाते हुए 6,744 मानव दिवस का सृजन कर यह कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कराया गया।
भूमि सुधार कार्य पूर्ण होने के पश्चात इन किसानों ने खरीफ मौसम में धान को मुख्य फसल के रूप में अपनाया। साथ ही गेहूं, मक्का एवं मटर जैसी फसलों की खेती भी प्रारंभ की गई। अनुकूल वर्षा के फलस्वरूप इस वर्ष इन 17 किसानों द्वारा 300 क्विंटल से अधिक धान एवं मक्का का उत्पादन किया गया।
कुल हितग्राही की संख्या 17 है, कुल भूमि सुधार का रकबा 11.06 हेक्टेयर, कुल उत्पादन 319 क्विंटल, स्वीकृत राशि 19,51,346 तथा सृजित मानव दिवस 6,744  है। यह उत्पादन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षित भविष्य की नई उम्मीद भी जगा रहा है।आज इन वनवासी परिवारों के खातों में परिश्रम की कमाई और चेहरों पर आत्मनिर्भरता की संतोषजनक मुस्कान दिखाई दे रही है।





 

पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों को मिल रहा लाभ

09-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )   सरगुजा जिले में धान उपार्जन केन्द्रों की पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय में बड़ी राहत मिल रही है। धान उपार्जन की प्रक्रिया सरल,  और सुविधाजनक होने से किसान संतोष व्यक्त कर रहे हैं। इसी क्रम में बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ललाती के लघु  किसान निर्मल भगत ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना की है।
निर्मल भगत ने बताया कि इस वर्ष अच्छी वर्षा होने से धान की उपज बेहतर रही। उन्होंने लगभग साढ़े 4 एकड़ भूमि में धान की खेती की है, जिसमें कुल 82.80 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ। उन्होंने बताया कि समिति के माध्यम से समय पर टोकन कट गया और टोकन कटाने की प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि बोदा धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण कर तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया, जिससे धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि समिति केन्द्र में किसानों के लिए पेयजल एवं छाया में बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है तथा समिति के कर्मचारी किसानों को पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
भगत ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से गेहूं, तिलहन एवं सब्जी सहित अन्य फसलों की खेती कर अच्छी आमदनी हुई है।
निर्मल भगत ने धान खरीदी व्यवस्था को सराहनीय बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि धान का बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।









 

 


दंतेवाड़ा में पारदर्शी और सुचारू धान खरीदी से किसानों में संतोष

08-Jan-2026
रायपुर, 08 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही सरकार के सुशासन का सकारात्मक प्रभाव अब दूरस्थ अंचलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। दंतेवाड़ा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी की व्यवस्था पारदर्शी, सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित की जा रही है।
शासन के निर्देशानुसार सभी धान खरीदी केंद्रों पर प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 84,618.80 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 29,950 क्विंटल धान का उठाव कर मिलिंग कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। नियमित उठाव के कारण खरीदी केंद्रों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है और बिना किसी बाधा के धान खरीदी जारी है।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार धान खरीदी से संबंधित भुगतान की प्रक्रिया भी समय पर और सुचारू रूप से की जा रही है। इससे किसानों में संतोष और भरोसा बना है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सीधे और समय पर मिले, जो दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक लागू हो रहा है।
धान खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए बारदाना, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और हमालों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष किसानों की भागीदारी में वृद्धि हुई है और वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज का विक्रय कर पा रहे हैं।
बालूद धान खरीदी केंद्र में 12 गांवों के कुल 1,200 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 379 किसानों द्वारा अब तक 12,810 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है।
चितालंका गांव से धान बेचने पहुंचे किसान मनकू राम ने बताया कि विष्णु देव साय सरकार की नीतियों से उन्हें अपनी मेहनत की फसल सुरक्षित होने का भरोसा मिला है। वहीं, आवराभाटा गांव से आए किसान शंकर सिंह ठाकुर ने टोकन ऐप की सराहना करते हुए कहा कि इससे धान विक्रय की प्रक्रिया आसान हो गई है।
दंतेवाड़ा जिले के धान खरीदी केंद्रों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि सुशासन का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में धान खरीदी और भुगतान के आंकड़ों में और वृद्धि होने की संभावना है, जिससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
 

 


प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना : स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई से किसानों को बहुआयामी लाभ

07-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि उत्पादन एवं रकबा बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास किया जा रहा है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के प्रयासों से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत राज्य के 19306 किसानों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली का लाभ दिलाते हुए उनके 16154 हेक्टेयर खेती भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। इस योजना के तहत लघु सीमांत कृषकों को 55 प्रतिशत तथा दीर्घ किसानों के लिए 45 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। जिससे किसान कम लागत में आधुनिक सिंचाई तकनीक का लाभ उठा सकें।
छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई प्रणाली के उपयोग से फसलों को आवश्यकतानुसार एवं सामान रूप से पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे जल की 30 से 40 प्रतिशत तक बचत हो रही है। साथ ही खेतों में जल अपव्यय पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। सीमित जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से खेती अधिक लाभकारी बन रही है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली विशेष रूप से सब्जी, फल, बागवानी एवं नकदी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जबकि स्प्रिंकलर प्रणाली से दलहन, तिलहन एवं अनाज फसलों की उत्पादकता में वृद्धि दर्ज की जा रही है। किसानों के अनुसार इन प्रणालियों के उपयोग से उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि तथा उर्वरक एवं श्रम लागत में कमी आई है।
इस योजना के अंतर्गत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, डिज़ाइन अनुमोदन एवं स्थापना में सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। इससे किसानों में आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और वे वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। सूखा एवं अल्प वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम पानी में अधिक उत्पादन होने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ हो रही है और उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025-26 में अब तक स्प्रिंकलर के सेट 15 हजार 757 कृषकों के खेतों में 12 हजार 212 हेक्टेयर एवं ड्रिप सिस्टम के 3 हजार 549 कृषकों के खेतों में 3 हजार 942 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापना हुई।
















 

समय पर भुगतान, मजबूत भविष्य: किसान दुर्गाप्रसाद के चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष की मुस्कान

05-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 किसानों के लिए केवल धान विक्रय का दौर नहीं रहा, बल्कि यह भरोसे, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव बनकर सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी, तकनीक-संपन्न और किसान-केंद्रित धान खरीदी व्यवस्था ने वर्षों से किसानों के मन में जमी अनिश्चितता को दूर कर दिया है। अब किसान पूरे विश्वास के साथ अपनी फसल उपार्जन केंद्र तक लाता है, क्योंकि उसे यह भरोसा है कि उसकी मेहनत का पूरा मूल्य समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुँचेगा।
इसी बदले हुए विश्वास की सजीव मिसाल हैं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम बरमपुर निवासी किसान दुर्गाप्रसाद पिता कंचनराम। वर्षों से खेती से जुड़े दुर्गाप्रसाद ने मौसम की मार, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती से अपना नाता कभी कमजोर नहीं होने दिया। इस वर्ष प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने उनके मन में स्थिरता और सुरक्षा का नया संबल भर दिया। यह केवल आर्थिक लाभ नहीं था, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक था, जिसमें किसान ने यह महसूस किया कि सरकार उसकी मेहनत को समझती है और उसके साथ मजबूती से खड़ी है।
तुंहर टोकन 24×7 व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित तिथि पर टोकन प्राप्त कर जब दुर्गाप्रसाद खड़गवां उपार्जन केंद्र पहुँचे, तो उन्हें धान खरीदी की पूरी तरह बदली हुई तस्वीर देखने को मिली। सुव्यवस्थित परिसर, बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और कर्मचारियों का सहयोगी व्यवहार यह दर्शाता है कि अब धान खरीदी प्रक्रिया में किसान की सुविधा और सम्मान को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। न भीड़, न अफरा-तफरी और न ही अनावश्यक प्रतीक्षा, जिससे पूरी प्रक्रिया सहज, सुचारु और संतोषजनक रही।
धान खरीदी के दौरान डिजिटल तौल कांटे, फोटो आधारित सत्यापन और रियल टाइम डेटा एंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों ने पूरी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बना दिया। प्रत्येक चरण किसान की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं रही। तकनीक के प्रभावी उपयोग से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि किसानों का व्यवस्था के प्रति विश्वास और भी गहरा हुआ।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान दुर्गाप्रसाद ने कुल 20.80 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। पूरी खरीदी प्रक्रिया समयबद्ध और व्यवस्थित रही। जब उनकी मेहनत की फसल सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से बिकी और भुगतान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में समय पर जमा हुई, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ झलक उठा। समय पर भुगतान मिलने से अब वे बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक आवश्यकताओं और आगामी कृषि सत्र की तैयारी को लेकर पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे की योजना बना पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान हितैषी नीतियों के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए दुर्गाप्रसाद कहते हैं कि बदली हुई धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के मनोबल को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। अब खेती केवल संघर्ष का प्रतीक नहीं रही, बल्कि यह एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आजीविका का भरोसेमंद माध्यम बनती जा रही है। किसान दुर्गाप्रसाद की यह सफलता की कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों किसानों की भावना को प्रतिबिंबित करती है, जो नई धान खरीदी व्यवस्था से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ा रहे हैं।

 


किसान धन्नू सिंह ने ऑफलाइन टोकन से बेचा 54.80 क्विंटल धान

05-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश )  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सरकार की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को न केवल उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, बल्कि समय पर भुगतान और सम्मानजनक प्रक्रिया का अनुभव भी हो रहा है। ग्राम पेनारी निवासी किसान धन्नू सिंह की कहानी इसी व्यवस्था की एक प्रेरक उपलब्धि है।
धन्नू सिंह एक साधारण कृषक हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। इस वर्ष उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ऑफलाइन टोकन के माध्यम से कोड़ा उपार्जन केंद्र में 54.80 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उपार्जन केंद्र पर सुव्यवस्थित व्यवस्था, डिजिटल तौल कांटा, पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया और सहयोगात्मक स्टाफ ने धान खरीदी को सरल एवं सुगम बनाया।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की व्यवस्था ने किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य सुनिश्चित किया। धन्नू सिंह को धान विक्रय की राशि सीधे उनके बैंक खाते में समय पर प्राप्त हुई, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं को लेकर आत्मविश्वास मिला। धन्नू सिंह बताते हैं कि पूर्व में धान विक्रय के दौरान तौल और भुगतान को लेकर अनिश्चितता रहती थी, लेकिन वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, भरोसेमंद और किसान-अनुकूल है। समय पर भुगतान से अब अपने बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं और रबी फसल की तैयारी बिना किसी चिंता के कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई इस धान खरीदी व्यवस्था से किसानों का विश्वास सरकार के प्रति और मजबूत हुआ है। धन्नू सिंह की यह कहानी केवल एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों किसानों के सशक्तिकरण की प्रतीक है, जो सरकार की पारदर्शी नीतियों से लाभान्वित होकर सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।




 

वैज्ञानिक खेती से बदली किस्मत, किसान गंगाराम कौशिक ने दोगुना किया धान उत्पादन

03-Jan-2026
रायपुर,( शोर संदेश ) मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया अंतर्गत ग्राम रामबोड़ के प्रगतिशील कृषक  गंगाराम कौशिक ने वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर धान उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। परंपरागत खेती में जहां उत्पादन सीमित रहता था, वहीं कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्नत तकनीकों को अपनाने से उन्हें प्रति एकड़ 22-25 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हुआ, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुना है। कौशिक के पास कुल 0.848 हेक्टेयर कृषि भूमि है। अधिक उत्पादन और आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गेंदलाल पात्रे तथा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एल. के. कोशले से तकनीकी सलाह ली। 
अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, बोनी से पूर्व बीज का ट्रायकोडर्मा से उपचार, रोपाई के दौरान हर 12 फीट पर 20 सेमी की पट्टी छोड़ना, तथा हर 15 दिन में नीमेड का छिड़काव जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया। इसके साथ ही उन्होंने प्रमाणित बीज, कल्चर का उपयोग, तथा गभोट अवस्था में प्रति एकड़ 02 किलो बोरान और नैनो यूरिया का छिड़काव किया। इन सभी उपायों का सकारात्मक प्रभाव फसल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। किसान कौशिक ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर न केवल उत्पादन लक्ष्य प्राप्त हुआ, बल्कि लागत के अनुपात में बेहतर लाभ भी मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और यह साबित करती है कि सही तकनीक और मार्गदर्शन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।



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