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राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से बदली किसानों की तक़दीर, जैविक खेती से बढ़ी आय

03-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )  राज्य में रसायन मुक्त एवं जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों से कृषकों को न केवल प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला के कृषक दंपती मनभौतिन बाई निषाद एवं माखन निषाद ने सफलता की नई मिसाल पेश की है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत वर्ष 2025 में राजनांदगांव विकासखंड के 150 हेक्टेयर क्षेत्र में कलस्टर विकसित कर किसानों को जैविक एवं रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी क्रम में ग्राम मोखला स्थित प्रगति महिला स्वसहायता समूह के  कृषकों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क सहित अन्य प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण एवं फसल की अवस्था अनुसार उनके उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण में ग्राम मोखला निवासी 68 वर्षीय कृषक मनभौतिन बाई निषाद एवं उनके 72 वर्षीय पति माखन निषाद ने भाग लिया। शिवनाथ नदी किनारे स्थित मोखला के निवासी इस कृषक दंपती के पास कुल 2.34 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से 1.17 एकड़ स्वयं की तथा 1.17 एकड़ लीज पर ली गई भूमि है। पूर्व में वे धान एवं उद्यानिकी फसलों की खेती कर लगभग 50 से 60 हजार रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे थे। श्रीमती मनभौतिन बाई निषाद ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया। प्रारंभ में जानकारी के अभाव और उत्पादन कम होने की आशंका के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रासायनिक खेती पर निर्भरता समाप्त हो गई।
उन्होंने बताया कि जहां रासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20 से 22 हजार रुपये तक की लागत आती थी, वहीं प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घनजीवामृत एवं नीमास्त्र जैसे उत्पाद घरेलू सामग्री से कम लागत में तैयार हो जाते हैं। देशी गाय का गोबर, गौमूत्र, मिट्टी एवं स्थानीय पत्तियों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और जैविक कृषि उत्पाद का बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। व्यापारी अब सीधे खेत से उपज खरीद रहे हैं, जिससे कृषक दंपती की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। वर्ष 2025-26 रबी सीजन में वे सब्जियों के साथ तिवड़ा, मसूर एवं सरसों की खेती प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं।
 

किसान शीतल दास-मेहनत, विश्वास और सरकारी सहयोग से बदली जिंदगी

02-Jan-2026
रायपुर( शोर संदेश )। कोरबा जिले के करतला विकासखंड के ग्राम बैगापाली के किसान शीतल दास के पास लगभग 14 एकड़ कृषि भूमि है। पिछले कई वर्षों से वे धान की खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में भी उन्होंने धान की उत्तम फसल ली। शीतल दास ने गत वर्ष 280 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र कनकी में बेचा था और इस वर्ष भी उन्होंने 280 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र कनकी में विक्रय के लिए पहुंचाया।
किसान शीतल दास बताते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उपार्जन केंद्रों में किसानों के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी सीमा और धान का 3100 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य किसानों के लिए बड़ा सहारा बना है। वे बताते हैं कि अब उपार्जन केंद्रों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। पहले के समय में किसानों को टोकन के लिए लंबी कतारें लगानी पड़ती थीं, अक्सर टोकन नहीं मिलता था और पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था। लेकिन अब सरकार द्वारा ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू करने से किसान अपनी सुविधा अनुसार टोकन प्राप्त कर धान बेच सकते हैं।
शीतल दास के अनुसार उनकी खेती ही उनके जीवन-यापन का मुख्य आधार है। पिछले वर्ष धान बेचने के बाद प्राप्त राशि से उन्होंने अपने घर के निर्माण के साथ अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। उनका कहना है कि समय पर मिलने वाला समर्थन मूल्य और सुधारित उपार्जन व्यवस्था ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है।










 

रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर 2.58 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

02-Jan-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )। रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं किसान-केंद्रित तरीके से निरंतर जारी है। जिले के 105 उपार्जन केंद्रों में अब तक 42 हजार से अधिक किसानों से कुल 2 लाख 58 हजार 683.88 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। उपार्जन केंद्रों से 1 लाख 37 हजार 143.90 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है। 
रायगढ़ जिले में ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसान निर्धारित तिथि एवं समय पर टोकन प्राप्त कर धान विक्रय कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा धान खरीदी प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। कोचियों एवं बिचौलियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने उपार्जन केन्द्रों के प्रभारियों को वास्तविक किसानों का ही धान क्रय करने के कड़े निर्देश दिए हैं। 

जल बचत से बढ़ी खुशहालीः रबी फसलों ने बदली धमतरी के किसानों की तस्वीर

01-Jan-2026
रायपुर( शोर संदेश )।जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसान आय वृद्धि के क्षेत्र मंय उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के सुनियोजित प्रयासों से परंपरागत फसल चक्र से आगे बढ़ते हुए कम जल उपयोग वाली एवं अधिक लाभकारी रबी फसलों को बढ़ावा दिया गया, जिसके उत्साहजनक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
रबी वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले में ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अत्यधिक जल उपयोग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024-25 में 24,200 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही खेती को रबी वर्ष 2025-26 में घटाकर 15,000 हेक्टेयर तक लाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई। इससे न केवल भू-जल संरक्षण को बल मिला, बल्कि किसानों को वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर भी प्रेरणा मिली।
फसल चक्र परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव मूंगफली उत्पादन में विशेष रूप से देखने को मिला है। जहां गत वर्ष मात्र 10 एकड़ क्षेत्र में मूंगफली की खेती होती थी, वहीं इस वर्ष विकासखंड मगरलोड के बुढ़ेनी क्लस्टर में 275 एकड़ में मूंगफली की खेती की जा रही है। यह परिवर्तन किसानों की सोच में आए भरोसेमंद बदलाव को दर्शाता है।
इसी तरह मक्का उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। गत वर्ष 430 हेक्टेयर में मक्का की खेती के मुकाबले इस वर्ष 699 एकड़ क्षेत्र में मक्का बोया गया है। विकासखंड नगरी के गट्टासिल्ली, बोराई और उमरगांव क्लस्टर मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
चना उत्पादन में भी जिले ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। पिछले वर्ष 15,830 हेक्टेयर में बोए गए चना का रकबा इस वर्ष बढ़कर 16,189 हेक्टेयर हो गया है। विकासखंड कुरूद और धमतरी में 600 से 1200 हेक्टेयर के बड़े चना कलस्टरों के विकास से उत्पादन के साथ-साथ विपणन की संभावनाएं भी सुदृढ़ हुई हैं।
दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने के तहत सरसों का रकबा 2,590 हेक्टेयर से बढ़कर 4,660 हेक्टेयर तथा मसूर का क्षेत्र 50 हेक्टेयर से बढ़कर 211 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं लघु धान्य फसलों में रागी का रकबा 10 हेक्टेयर से बढ़कर 150 हेक्टेयर होना जिले की दूरदर्शी कृषि नीति का प्रमाण है।
समग्र रूप से रबी वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले ने संतुलित खेती, जल संरक्षण और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है, जो आने वाले वर्षों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।

डिजिटल व्यवस्था और धान के सर्वाधिक मूल्य से किसान हो रहे समृद्ध

31-Dec-2025
रायपुर। ( शोर संदेश )  प्रदेश में धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशहाली लेकर आया है। राज्य सरकार द्वारा धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य तथा पारदर्शी और तकनीक आधारित खरीदी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। धान उपार्जन केन्द्रों में लागू डिजिटल टोकन प्रणाली एवं सरल प्रक्रियाओं ने धान विक्रय को सुगम, सरल और आसान बना दिया है।
सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत मेंड्राकला धान उपार्जन केन्द्र में धान विक्रय के लिए पहुंचे ग्राम पंचायत भिट्ठी कला के रहने वाले लघु किसान श्याम लाल ने बताया कि उनके पास कुल 111.80 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने धान उपार्जन समिति के माध्यम से टोकन कटवाया था, जहां किसानों की अधिक भीड़ के कारण समय अधिक लगा। इसके बाद उन्होंने किसान तुहंर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे ही 22.80 क्विंटल का अपना टोकन काटा लिया।
किसान श्याम लाल ने बताया कि डिजिटल टोकन सुविधा से टोकन काटना बेहद आसान हो गया है। अब समिति केन्द्र के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे समय, श्रम और खर्च की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था किसानों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही नमी परीक्षण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं त्वरित रूप से पूर्ण की गईं तथा समय पर बारदाना उपलब्ध कराया गया। तौल की प्रक्रिया भी पूरी तरह सुव्यवस्थित रही और धान विक्रय में किसी प्रकार की समस्या नहीं आई।
कृषक श्याम लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने खेत में बोर कराया, जिससे सिंचाई की साधन उपलब्ध हुआ। वर्तमान में वे खेती का विस्तार करते हुए गेहूं, दलहन, तिलहन एवं सब्जी की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
कृषक श्याम लाल ने धान खरीदी की पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था की सराहना करते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने किसानों के लिए धान विक्रय करना आसान बनाया है।

 

धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था से किसान को मिल पूरा मूल्य

31-Dec-2025
रायपुर, । ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ शासन समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था किसानों को उनकी मेहनत और उपज का वाजिब मूल्य मिल रहा है, जिसके कारण किसानों के लिए खेती लाभदायक हो गई है।  इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। कोरबा विकासखंड के ग्राम गोंढ़ी निवासी किसान  रंजीत डहरिया ने  शासन की इस किसान-हितैषी व्यवस्था का लाभ उठाते हुए धान बेचकर अपनी मेहनत का पूरा मूल्य हासिल किया है। डहरिया लगभग 6 एकड़ कृषि भूमि पर धान की खेती करते हैं। खरीफ विपणन वर्ष के दौरान उन्होंने सहकारी समिति नकटीखार में 102 क्विंटल धान का विक्रय किया। धान विक्रय के समय समिति में तौल, पंजीयन एवं भुगतान की समस्त प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध रही, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
शासन द्वारा घोषित मूल्य पर धान विक्रय तथा राशि का समय पर सीधे बैंक खाते में भुगतान होने से डहरिया की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपनी बहन के विवाह में किया, जिससे परिवार की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बिना किसी ऋण के पूरी हो सकी। रंजीत डहरिया के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी एवं त्वरित धान खरीदी नीति किसानों को न केवल उनकी फसल का उचित मूल्य दिला रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानजनक एवं खुशहाल जीवन की ओर अग्रसर भी कर रही है।














 

डिजिटल टोकन से बदली धान खरीदी की तस्वीर

30-Dec-2025
रायपुर  ।( शोर संदेश )   छत्तीसगढ़ में धान खरीदी तिहार किसानों के लिए समृद्धि का माध्यम बनता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा घोषित धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था से किसानों को सीधा और त्वरित लाभ मिल रहा है। धान उपार्जन केंद्रों में लागू डिजिटल टोकन प्रणाली ने खरीदी प्रक्रिया को सरल, सुगम और पूरी तरह परेशानी मुक्त बना दिया है।
अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत रामपुर धान उपार्जन केंद्र में धान विक्रय के लिए पहुंचे ग्राम पंचायत इंदरपुर निवासी लघु किसान महेंद्र यादव ने डिजिटल व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि उनके पास कुल 120 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने किसान तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे ही 60 क्विंटल धान का डिजिटल टोकन कटवाया। यादव ने कहा कि अब टोकन के लिए समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे समय, श्रम और अतिरिक्त खर्च की बचत हो रही है।
उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्र पहुंचते ही नमी परीक्षण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्रता से पूरी की गईं तथा समय पर बारदाना भी उपलब्ध कराया गया। तौल प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित रही और धान विक्रय के दौरान किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
कृषक महेंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से किसानों को बड़ा आर्थिक संबल मिला है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी थी। वर्तमान में वे खेती-बाड़ी का विस्तार करते हुए गेहूं, दलहन, तिलहन एवं सब्जी की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
कृषक यादव ने धान खरीदी की सुचारु, पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार जताया।
 

कलेक्टर एस. जयवर्धन ने धान खरीदी केंद्रों का किया निरीक्षण

30-Dec-2025
सूरजपुर, ।( शोर संदेश )   कलेक्टर एस. जयवर्धन द्वारा आज जिले के बतरा, सलका, करौटी ‘ब’ एवं चंद्रमेढ़ा स्थित धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खरीदी केंद्रों पर उपस्थित किसानों से सीधे संवाद कर धान खरीदी की व्यवस्था, सुविधा एवं प्रक्रिया की जानकारी ली।
कलेक्टर ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सभी धान खरीदी केंद्रों में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं, सुव्यवस्थित  एवं पारदर्शी खरीदी व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन द्वारा किसानों के हित में धान खरीदी कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु लगातार निगरानी एवं निरीक्षण किया जा रहा है।




 

धान उपार्जन केंद्रों की पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को राहत, डिजिटल टोकन प्रणाली से धान विक्रय हुआ आसान

28-Dec-2025
रायपुर, । ( शोर संदेश )  प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों पर लागू पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध व्यवस्था से किसानों को बड़ी राहत मिल रही है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली, त्वरित भुगतान और बेहतर प्रबंधन के कारण धान विक्रय की प्रक्रिया अब पूरी तरह सरल, सुगम और किसान-हितैषी बन गई है।
सरगुजा जिले सहित राज्य के विभिन्न जिलों में किसान ‘किसान तुंहर टोकन’ ऐप के माध्यम से घर बैठे टोकन प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उन्हें उपार्जन केंद्रों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत भिट्ठी कला के किसान गुलाब राम राजवाड़े ने बताया कि इस वर्ष धान की उपज अच्छी हुई है और उनके पास कुल 109 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने डिजिटल माध्यम से 90.60 क्विंटल धान का पहला टोकन ऑनलाइन कटवाया।
किसान गुलाब राम राजवाड़े ने बताया कि धान विक्रय के मात्र 48 घंटे के भीतर समर्थन मूल्य की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो गई, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली। उन्होंने बताया कि दूसरा टोकन भी 16 क्विंटल धान का मोबाइल के माध्यम से आसानी से कट गया और टोकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी या अन्य परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था के चलते समय, श्रम और व्यय की बचत हो रही है। टोकन के अनुसार जब वे उपार्जन केंद्र पहुंचे तो गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की गई तथा तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। धान विक्रय के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, बैठने और छांव जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।
कृषक गुलाब राम राजवाड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों को धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है, जिससे किसानों को व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्राप्त राशि का उपयोग वे कृषि उपकरण खरीदने, गेहूं, सब्जी एवं अन्य फसलों की खेती में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
अंत में किसान गुलाब राम राजवाड़े ने धान खरीदी की वर्तमान व्यवस्था को अत्यंत सराहनीय बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से किसान वर्ग में संतोष और उत्साह का माहौल है।




 

महासमुंद जिले में तीन राइस मिलों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, हजारों बोरा जब्त

28-Dec-2025
महासमुंद। ( शोर संदेश ) जिले में धान के अवैध भंडारण, परिवहन और स्टॉक में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। तीन अलग-अलग मामलों में राइस मिलों से हजारों बोरा धान और चावल जब्त किए गए हैं। 
सरायपाली में जांच टीम ने साईं राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया। जांच में स्टॉक में गंभीर कमी सामने आई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए मिल से 6,000 बोरा धान और 15,470 बोरा चावल जब्त कर लिया गया। इसी तरह बसना में टीम ने दो राइस मिलों पर दबिश दी। इस दौरान शिव शंकर राइस मिल से 287 बोरा और कामद राइस मिल से 407 बोरा अवैध धान जब्त किया गया। प्रशासन का कहना है कि जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जांच-पड़ताल का यह अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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