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केंद्रीय बजट 2026: रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित, राजनाथ सिंह ने जताया पीएम मोदी का आभार

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक संदेश में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश इस शानदार बजट के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है। साथ ही, यह बजट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त आधार देता है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं।”
उन्होंने कहा, “इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को सुदृढ़ किया है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस साल हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है। इसके लिए इस साल 1.85 लाख करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा, “भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुख स्थान मिला है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के संतुलन को मजबूत करता है।”



 

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का फोकस, रक्षा बजट में 15% की बढ़ोतरी; आवंटन 7.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। बजट में रक्षा बलों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यह रकम पूंजीगत खर्च का हिस्सा है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में दिए गए 1.80 लाख करोड़ रुपए से लगभग 21.8 प्रतिशत अधिक है।
रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। यह कदम सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा।
बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाता है।
इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है।
कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है। रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं।
सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं।
इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है।


 

पीएम मोदी ने एटा और कच्छ की वेटलैंड्स को रामसर मान्यता मिलने पर जताई प्रसन्नता

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह मान्यता जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना बर्ड सेंचुरी और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड का रामसर साइट बनना खुशी का विषय है। उन्होंने स्थानीय समुदाय और वेटलैंड संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सभी लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि ये वेटलैंड्स प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में आगे भी फलते-फूलते रहेंगे।
इससे पहले पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी थी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढांड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने यह घोषणा दो फरवरी को मनाए जाने वाले विश्व वेटलैंड्स दिवस से पहले की।
भूपेंद्र यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 साइट्स से बढ़कर अब 98 साइट्स तक पहुंच गया है। यह लगभग 276% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है, जो वेटलैंड संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
मंत्री ने बताया कि इन दोनों वेटलैंड्स में सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके साथ ही ये क्षेत्र चिंकारा, भेड़िया, कैरकल, रेगिस्तानी बिल्ली और रेगिस्तानी लोमड़ी जैसी प्रजातियों तथा कई लुप्तप्राय पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। 

 

अरुणाचल में सेना-आईटीबीपी का संयुक्त अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’, युद्ध तैयारियों को मिली नई धार

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अरुणाचल प्रदेश में चार दिवसीय संयुक्त फायरिंग अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ के दूसरे चरण (फेज-II) का सफल आयोजन किया है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों बलों के बीच समन्वय बढ़ाना और युद्धक तैयारियों को और अधिक मजबूत करना रहा।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने शुक्रवार को बताया कि ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का दूसरा चरण 25 से 28 जनवरी के बीच अरुणाचल प्रदेश के तेजू क्षेत्र में आयोजित किया गया। इस चरण का मुख्य उद्देश्य अंतर-बल युद्धक तालमेल और परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करना था।
चार दिन चले इस संयुक्त अभ्यास में स्पीयर कॉर्प्स के स्पीयरहेड गनर्स के साथ आर्टिलरी रेजिमेंट, इन्फैंट्री बटालियनों और आईटीबीपी के जवानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान लाइव आर्टिलरी फायरिंग के जरिए संयुक्त फायरपावर ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
अभ्यास का प्रमुख फोकस गैर-गनर कर्मियों को आर्टिलरी प्रक्रियाओं और विभिन्न फायरिंग मिशनों के संचालन से परिचित कराना रहा। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत के अनुसार, इन्फैंट्री और आईटीबीपी के जवानों को अनुभवी गनर्स की निगरानी में स्वतंत्र रूप से कई आर्टिलरी फायरिंग ड्रिल का प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने कहा कि यथार्थपरक युद्ध परिस्थितियों में किए गए इस प्रशिक्षण से भाग लेने वाले बलों के बीच आपसी विश्वास, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे युद्धक्षेत्र में फायरपावर के प्रभावी एकीकरण की समझ और क्षमता को मजबूती मिली है।
‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का दूसरा चरण भारतीय सेना की संयुक्तता (जॉइंटमैनशिप), अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) और यथार्थवादी प्रशिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अभ्यास उभरती परिचालन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर-एजेंसी सहयोग को लगातार सशक्त करने के संकल्प को भी रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि इससे पहले ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का पहला चरण (फेज-I) 19 से 24 जनवरी के बीच अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिगार क्षेत्र में आयोजित किया गया था। छह दिवसीय इस अभ्यास में भी भारतीय सेना और आईटीबीपी ने संयुक्त परिचालन एकीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की थी। 








 

 


पीएम मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति की फोन पर बातचीत, सहयोग बढ़ाने पर सहमति

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला गणराज्य की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज के बीच शुक्रवार को फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-वेनेजुएला संबंधों को और मजबूत करने तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तृत चर्चा की।
फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट कर बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से सकारात्मक और उपयोगी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देश सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत और विस्तारित करने पर सहमत हुए हैं तथा भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, बातचीत के दौरान व्यापार और निवेश, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और जन-जन संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में आपसी संभावनाओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।
पीएमओ ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भविष्य में भी संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचारों की समानता के कारण भारत और वेनेजुएला के बीच हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर भी सक्रिय सहयोग करते हैं। भारत और वेनेजुएला ने वर्ष 2023 में अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 64वीं वर्षगांठ मनाई थी। कराकास और नई दिल्ली में दोनों देशों के स्थायी दूतावास चार दशकों से अधिक समय से कार्यरत हैं।
वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनकर उभरा है। इसके अलावा आईटीईसी कार्यक्रम के तहत हर वर्ष वेनेजुएला के विशेषज्ञ भारत आते हैं। आईसीसीआर ने शैक्षणिक वर्ष 2017 से वेनेजुएला के छात्रों के लिए चार छात्रवृत्तियों को मंजूरी दी है। वर्तमान में वेनेजुएला में लगभग 50 अनिवासी भारतीय और करीब 30 व्यक्तिगत प्रवासी निवास करते हैं।









 

पंजाब के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा, पीएम मोदी करेंगे अहम उद्घाटन

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पंजाब का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोपहर करीब 3:45 बजे आदमपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां एयरपोर्ट का नया नाम ‘श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट, आदमपुर’ अनावरण करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री लुधियाना स्थित हलवारा एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन भी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण उस महान संत और समाज सुधारक के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिनकी समानता, करुणा और मानवीय गरिमा की शिक्षाएं आज भी भारत के सामाजिक मूल्यों को प्रेरित करती हैं।
पीएमओ के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हलवारा एयरपोर्ट पर जिस नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया जाएगा, वह पंजाब के लिए एक नया एविएशन गेटवे साबित होगा। इससे लुधियाना और आसपास के औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्रों की कनेक्टिविटी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि हलवारा लुधियाना जिले में स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारतीय वायुसेना स्टेशन भी है।
लुधियाना के पुराने एयरपोर्ट पर रनवे छोटा होने के कारण केवल छोटे विमानों का संचालन संभव था। कनेक्टिविटी में सुधार और बड़े विमानों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए हलवारा में एक नया सिविल एन्क्लेव विकसित किया गया है। यहां बना लंबा रनवे ए320 जैसे विमानों के संचालन में सक्षम है।
बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के सतत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास के विजन के अनुरूप इस टर्मिनल भवन में कई हरित और ऊर्जा-कुशल सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें एलईडी लाइटिंग, इंसुलेटेड छत, रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम, सीवेज और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तथा लैंडस्केपिंग के लिए रिसाइकल वाटर का उपयोग शामिल है।
टर्मिनल का आर्किटेक्चरल डिजाइन पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करता है, जिससे यात्रियों को एक विशिष्ट और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा यात्रा अनुभव मिलेगा।










 

रामसर मान्यता पर सीएम योगी की प्रतिक्रिया, बोले–पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को वैश्विक पहचान

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एटा की पटना बर्ड सेंचुरी को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को लगातार वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एटा की पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ में स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट्स में शामिल किया जाना नीति, सुरक्षा और संरक्षण की एक सतत यात्रा को दर्शाता है, जहां पारिस्थितिकी और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं।
सीएम योगी ने अपने संदेश में कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सतत संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की रक्षा के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करती है। उन्होंने एटा के नागरिकों और वेटलैंड संरक्षण से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स को बधाई दी।
इससे पहले पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी थी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढांड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने यह घोषणा दो फरवरी को मनाए जाने वाले विश्व वेटलैंड्स दिवस से पहले की थी।
भूपेंद्र यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि विश्व वेटलैंड दिवस नजदीक होने के कारण यह घोषणा करते हुए उन्हें खुशी हो रही है कि भारत के बढ़ते रामसर नेटवर्क में दो नए नाम जुड़े हैं। पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड अब प्रतिष्ठित रामसर साइट्स की सूची का हिस्सा बन गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि ये मान्यताएं जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों और वेटलैंड संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सभी लोगों को बधाई दी। 










 

भारत-ईयू एफटीए से निर्यात और नवाचार को नई गति, आईटी समेत कई क्षेत्रों में अवसर: वीर सागर

30-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला समझौता है। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर कई देशों के साथ इस तरह का करार हुआ है, जो भारत के एक्सपोर्ट, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। ये बातें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एक्सपोर्ट प्रमोशन से जुड़े संगठन ईएससी (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल) के चेयरमैन वीर सागर ने बताई।
वीर सागर ने कहा कि इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत और ईयू अब बराबरी के आधार पर साथ काम करेंगे। खासतौर पर आईटी सेक्टर के नजरिए से यह डील बेहद अहम है। अब भारत सिर्फ मैनपावर या सप्लाई देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनोवेशन, डिजाइनिंग, डेवलपमेंट, ऑटोमेशन और एआई जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा।
उन्होंने बताया कि पहले काम या पढ़ाई के लिए यूरोप जाने में काफी दिक्कतें आती थीं। जरूरी परमिशन और अप्रूवल की प्रक्रिया जटिल थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी। इससे लोगों का आना-जाना आसान होगा और भारत-ईयू के बीच वर्क और एजुकेशन कोलेबोरेशन को मजबूती मिलेगी।
वीर सागर के अनुसार, यह समझौता मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए भी अहम साबित होगा, लेकिन यह एकतरफा नहीं होगा। दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे। कुछ हिस्से यूरोप में बनेंगे, कुछ भारत में और फिर मिलकर फाइनल प्रोडक्ट तैयार किया जाएगा। इससे संयुक्त उत्पादन और साझा जिम्मेदारी का मॉडल मजबूत होगा।
ईएससी चेयरमैन ने आगे कहा कि पहले भारत को कई बार केवल काम सौंपा जाता था, जैसा कि अमेरिका जैसे बाजारों में होता रहा है। अब भारत खुद डिजाइन, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में बराबरी की भूमिका निभाएगा। यह बदलाव सिर्फ आईटी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल, फार्मा, एग्रीकल्चर, बैंकिंग समेत कई सेक्टरों में देखने को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील इसलिए भी संभव हो पाई, क्योंकि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बन चुका है। पहले भारत को ज्यादातर चीजें आयात करनी पड़ती थीं, लेकिन अब देश में ही बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। इसी वजह से यूरोपीय देश भारत को एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और ईयू की यह साझेदारी ज्ञान साझा करने, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देगी, जिससे न केवल भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि देश की वैश्विक पहचान एक इनोवेशन हब और मैन्युफैक्चरिंग पावर के रूप में और मजबूत होगी।


 

लेह में विमानन इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली मजबूती, आपदा राहत और सुरक्षा क्षमताओं में इज़ाफा

30-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) लेह के बेहद चुनौतीपूर्ण व ऊंचाई वाले क्षेत्र में रनवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पूरी की गई है। इससे ग्राउंड पर विमानों की जमीनी आवाजाही को आसान व सुरक्षित बनाया जा सकेगा। वहीं, लेह से नागरिक उड़ानों का प्रस्थान भी तेज होगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यहां अपग्रेड किए गए रनवे और हवाई अड्डा सुविधाओं से नागरिक उड्डयन सुविधाओं में इजाफा होगा। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि एयर फोर्स स्टेशन लेह में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य से एक परियोजना का उद्घाटन किया गया है। बेहद चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाले क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद बुनियादी ढांचे का रिकॉर्ड समय में उन्नयन किया गया है।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि विकसित किया गया बुनियादी ढांचा विमानों की जमीनी आवाजाही को आसान बनाने के साथ-साथ नागरिक उड़ानों के प्रस्थान को तेज करेगा। इन सुधारों से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और समय की बचत होगी। बेहतर वायु संपर्क लेह क्षेत्र में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक अवसरों का सृजन करेगा। यह स्थानीय आजीविका को बेहतर करने में भी मदद करेगा। साथ ही, बेहतर उपलब्ध कराई गईं सुविधाएं स्थानीय निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए अधिक विश्वसनीय हवाई सेवाएं सुनिश्चित करेंगी। लेह में इस विमानन बुनियादी ढांचे के विकसित होने के कारण मानवीय सहायता और आपदा राहत में भी मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही लद्दाख की बर्फ से ढकी खतरनाक चोटियों पर दो विदेशी नागरिकों के फंसने का एक गंभीर मामला सामने आया था। अक्टूबर महीने में यहां लद्दाख में दो कोरियाई नागरिक 17 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाली चोटी पर फंस गए थे। इस घटना का पता लगने पर बिना देरी किए रात के गुप अंधेरे में ही एक अत्यंत संवेदनशील व साहसिक ऑपरेशन चलाया गया। कड़ी मेहनत के बाद दोनों विदेशी नागरिकों को बचा लिया गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें तुरंत व आवश्यक उपचार मिल सका।
इसी तरह, भारतीय वायुसेना ने लद्दाख में गंभीर रूप से बीमार एक व्यक्ति को सही समय पर अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। बीमार व्यक्ति को अविलंब एयरलिफ्ट किया गया और चिकित्सा सहायता के लिए दिल्ली लाया गया। वायुसेना के इस मिशन का उद्देश्य एक 38 वर्षीय लद्दाखी नागरिक को, जो गंभीर स्थिति में था, लेह से दिल्ली पहुंचाकर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। अब ऐसी आपातकालीन आवश्यकताओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षेत्र की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। यह विकास लद्दाख के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि लद्दाख में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सभी एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

30-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राज्यसभा का 270वां सत्र प्रारंभ हो चुका है और इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी। यह संसद का बजट सत्र है। इस दौरान सदन में केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, अवकाश अवधि के दौरान विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की विस्तार से समीक्षा करेंगी। गुरुवार को उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने यह जानकारी दी।
इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा के सभी सांसदों से सदन और समितियों दोनों में सार्थक एवं प्रभावी योगदान देने का आह्वान किया और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। सदन की अगली बैठक 1 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे होगी।
इससे पहले, सभापति ने बताया कि बजटीय प्रस्तावों के साथ-साथ बजट सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा की अपेक्षा की गई है। सभापति का कहना है कि विधायी कार्यों की व्यापकता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करती है कि सदन के निर्धारित समय का अधिकतम और रचनात्मक उपयोग किया जाए। ऐसा करके जनता की आकांक्षाओं को साकार किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संसद के बजट सत्र के अंतर्गत राज्यसभा के 270वें सत्र में सभी सदस्यों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव के बीच संसद सदस्यों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्र की आर्थिक दिशा तय करने में संसद की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने राष्ट्रपति के संसद के दोनों सदनों को संबोधित भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसके अनुरूप राज्यसभा भी अपने विधायी और विचार-विमर्श संबंधी दायित्वों के माध्यम से योगदान देगी।
राधाकृष्णन ने जानकारी दी कि इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी। उन्होंने सभी सांसदों से सशक्त संसदीय निगरानी सुनिश्चित करने और उच्चतम संसदीय मर्यादा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र विभिन्न विचारों और जीवंत बहस से सुदृढ़ होता है, किंतु मतभेदों की अभिव्यक्ति सम्मानजनक और रचनात्मक होनी चाहिए। यह सत्र शालीनता, अनुशासन और गरिमापूर्ण आचरण का उदाहरण बने, उन्होंने ऐसी अपेक्षा व्यक्त की। महात्मा गांधी के विचारों का उद्धरण देते हुए उन्होंने आगे कहा कि अनुशासित और प्रबुद्ध लोकतंत्र संसार की सर्वोत्तम व्यवस्था है।” उन्होंने कहा कि सदन में सदस्यों का आचरण इसी अनुशासन और प्रबुद्धता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
 



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