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यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए पीएम मोदी के पास अच्छे सुझाव हैं : राष्ट्रपति पुतिन

02-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 23वें वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के मुख्य सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। पुतिन ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने का मुद्दा उठाते हैं। वे ऐसे सुझाव लेकर आते हैं, जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हैं। वे इस झगड़े को शांति से और जल्द सुलझाना चाहते हैं।
रूसी समाचार एजेंसी ‘TASS’ की र‍िपोर्ट के अनुसार, वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के 23वें सत्र में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा क‍ि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने कहा, “वह बहुत अच्छे सुझाव देते हैं, जिनका मकसद ऐसे समाधान तलाशना होता है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों, खास तौर पर ऐसे समाधान जिन पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें।”

न्‍यूज एजेंसी के अनुसार, पुति‍न ने कहा कि भारत सरकार के प्रमुख का रुख निष्पक्ष है, लेकिन उनकी कोशिश इस संघर्ष को खत्म कराने की दिशा में है। उन्होंने आगे कहा, “हम भारत के प्रधानमंत्री के आभारी हैं कि वह इस संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से और जितनी जल्दी हो सके, सुलझाना चाहते हैं।
तास के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता बेहद सराहनीय बताया। उन्होंने कहा क‍ि भारतीय संस्कृति में कुछ ऐसा है जो इसे बेहद खास बनाता है। यहां एक तरफ इतनी विविधता और अलग-अलग पहचान हैं, तो दूसरी तरफ एकता भी है। इस वजह से यह निश्चित रूप से एक मिसाल है और दूसरों के लिए उदाहरण बनने लायक है।

सत्र के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस भविष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए जोखिमों, मौकों और जरूरी लक्ष्यों का वास्तविकता के आधार पर आकलन करते हुए अपना रास्ता तय करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा क‍ि निश्चित रूप से रूस दूसरे देशों और वहां के लोगों के साथ मिलकर भी इस दिशा में काम करने के लिए तैयार है।
सत्र के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मौजूदा समस्याओं के बावजूद रूस का विकास जारी है और उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत और टिकाऊ बनी हुई है। उन्होंने कहा, “हमारे सामने कुछ मुश्किलें जरूर हैं, लेकिन हम उनका समाधान कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था से जुड़े बड़े आंकड़े दिखाते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है और हमारी वित्तीय व्यवस्था और आर्थिक संस्थाएं स्थिर तरीके से काम कर रही हैं।”
 

 


पीएम मोदी से फोन पर बात करते हुए भावुक हुए पायलट स्मित मच्छार, प्रधानमंत्री को बताया अपना सबसे बड़ा ‘आइडल’

02-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की है। उन्होंने स्मित मच्छार से उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी से बात करते हुए पायलट स्मित भावुक गए। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना सबसे बड़ा ‘आइडल’ बताया। स्मित मच्छार ने कहा, “आप मेरे सबसे बड़े ‘आइडल’ हैं। आप कॉल करके मेरी हौसला अफजाई कर रहे हैं, मुझे बहुत गर्व हो रहा है।” स्मित ने पीएम मोदी से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि आपसे मेरी बात होगी।”

स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने कहा, “आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया लोग आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रौशन किया है।”
वीडियो कॉल पर पर बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने स्मित से कहा कि पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है। महामृत्युंजय के जाप चल रहे हैं। आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने लोगों की जान बचाई है। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा, “आपके शरीर पर इतना बड़ा घाव हुआ और स्वयं जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे। उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। इसलिए मैं हृदय से गर्व अनुभव करता हूं।”

स्मित के परिजनों से बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे कल भूपेंद्र भाई और गीताबेन से बात करने का अवसर मिला। मैंने गीताबेन को बोला कि आपका नाम गीता है, लेकिन आपने कृष्ण की गीता को पूरी तरह बचा दिया। आपने साक्षात गीता के संस्कारों से स्मित का जीवन बनाया।”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा (आप सभी की जान न बचाते) न करते तो पता नहीं, पूरे देश और भारत के पायलटों पर क्या-क्या बीतती। सभी पायलटों को किस तरह से देखा जाता। आपने सभी को बचा लिया है।”
इस दौरान, पीएम मोदी ने सऊदी और यूएई सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने स्मित की बहुत देखभाल की। मैं उनका बहुत आभारी हूं।

 


वायुसेना की ‘तरंग शक्ति’ की रफ्तार, आसमान में दिखा साझेदारी का दम

02-Oct-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय वायुसेना द्वारा बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान में विभिन्न देशों की वायुसेनाओं की गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। राजस्थान के जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास में भारत के साथ कई देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य संयुक्त हवाई अभियानों के जरिए आपसी तालमेल, अनुभव साझा करने और एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर देना है।

इस बार अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी भी खास आकर्षण है। छह एफ-35 विमानों के साथ अमेरिकी वायुसेना अभ्यास में शामिल है। भारतीय वायुसेना के साथ एफ-35 की किसी अभ्यास में यह पहली भागीदारी है। यही कारण है कि एफ-35ए की भारत में इस अभ्यास के दौरान भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह विमान पहले भारत में एयरो शो के दौरान दिखाई दे चुका है, लेकिन ‘तरंग शक्ति’ में इसकी सैन्य अभ्यास के रूप में पहली भागीदारी हुई है।

यहां विभिन्न अभ्यास केवल विमानों की उड़ानों तक सीमित नहीं है। इसमें वायु दलों, अभियान योजनाकारों और जमीन पर काम करने वाले कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद भी हो रहा है। इसके अलावा संगोष्ठी, औद्योगिक भ्रमण, विरासत स्थलों का दौरा, योग और अन्य गतिविधियों के जरिए भाग लेने वाले देशों के कर्मियों को एक-दूसरे को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।

अभ्यास की खास तस्वीर जमीन और आसमान दोनों जगह दिखाई दे रही है। विभिन्न देशों के वायु योद्धा यहां आपस में संवाद व संपर्क कर रहे हैं। वायुसेना के अधिकारी अनुभव साझा करने के साथ ही पेशेवर संबंध भी मजबूत कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर भारतीय आसमान में अलग-अलग देशों के लड़ाकू विमान तेज गति से उड़ान भरते हुए संयुक्त प्रशिक्षण अभियानों में हिस्सा ले रहे हैं। ‘साझेदारी में शक्ति’ यानी पावर इन पार्टनरशिप इस अभ्यास की मुख्य भावना है।

भारतीय वायुसेना के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं अभ्यास में शामिल हैं। विभिन्न देशों के लड़ाकू, परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमान इसमें हिस्सा ले रहे हैं। 26 सितंबर से शुरू हुआ यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

इस दौरान ‘तरंग शक्ति 2026’ में अलग-अलग देशों के विमान एक साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन भी आसमान में तेज उड़ानों, संयुक्त अभियानों और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग की तस्वीर पेश करने वाले होंगे। तरंग शक्ति 2026 का संदेश साफ है, साझेदारी में ही शक्ति है। यानी जमीन पर दोस्ती, आसमान में उड़ान और हर मिशन में तालमेल। 
 

 


पीएम मोदी ने साझा किया गीता का श्लोक, कहा- स्वाभाविक कर्मों में तत्परता से मिलती है परम सिद्धि

30-Sep-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक सुभाषित संदेश शेयर किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 18 (मोक्षसंन्यासयोग) के श्लोक 45 का जिक्र किया और उसका अर्थ समझाया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर “स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।।” शेयर किया। उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए बताया, “जो मनुष्य अपने-अपने स्वाभाविक कर्मों में तत्पर रहते हैं, वे परम सिद्धि को प्राप्त करते हैं। इसलिए अपने कर्मों में लगे मनुष्यों को यह अवश्य सुनना और जानना चाहिए कि अपने कर्मों का पालन करते हुए परम सिद्धि किस प्रकार प्राप्त की जाती है।”

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विभिन्न ग्रंथों के श्लोकों और उनके जीवन में महत्व को साझा करते रहते हैं। उनका यह पोस्ट भी कर्मयोग के महत्व को रेखांकित करता है। इस श्लोक का संदेश बेहद व्यापक और जीवन के लिए प्रेरणादायक है। स्व-धर्म हमारे गुणों और हमारे जीवन की अवस्थाओं पर आधारित होते हैं। इन्हें सम्पन्न करना यह सिद्ध करता है कि हम अपने शरीर और मन की योग्यताओं का उपयोग रचनात्मक ढंग से करते हैं। यह आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है और समाज एवं आत्मा के लिए लाभदायक होता है। चूंकि हमारे कर्तव्य हमारे स्वभाव के अनुरूप होते हैं, इसलिए इनका निर्वहन करने में हम स्वयं को सहज अनुभव करते हैं।

गीता के इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि हर व्यक्ति का अपना स्वभाव और अपनी प्रकृति के अनुसार कर्म निर्धारित है। अगर व्यक्ति अपने उसी स्वाभाविक कर्म को पूरी निष्ठा और तत्परता से करता है, तो वही उसकी सिद्धि का मार्ग बन जाता है। उसे किसी दूसरे के कर्म की नकल करने की जरूरत नहीं है। उदाहरण के तौर पर एक शिक्षक का धर्म पढ़ाना है, एक सैनिक का धर्म देश की रक्षा करना है और एक किसान का धर्म खेती करना है। अगर सभी अपने-अपने कर्म को ईमानदारी से करें, तो समाज में संतुलन बना रहता है और व्यक्ति को भी आत्मिक संतुष्टि मिलती है। इस श्लोक में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है – जब हमारी क्षमता बढ़ती है तब स्व-धर्म भी परिवर्तित हो जाता है और हम अगली कक्षा में प्रवेश करते हैं। इस प्रकार से हम अपने उत्तरदायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

 


UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में भारत के 5 नए स्थल जोड़े गए, उदयगिरि गुफाओं को मिला स्थान

30-Sep-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत के पांच नए स्थल और श्रृंखला तथा अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इससे भारत के स्थलों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। नवनिर्मित स्थलों में बाघ गुफा चित्रों की बौद्ध भित्ति चित्रकारी, चंबल घाटी के मंदिर समूह, गुप्त काल की उदयगिरि गुफाएं और गिन्नोरगढ़ की जनजातीय विरासत शामिल हैं। इसमें सत्याग्रह स्थल भी शामिल है, जो भारत और दक्षिण अफ्रीका को जोड़ने वाला श्रृंखला श्रेणी का अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव है।

PIB Culture ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में इसे देश की विरासत के लिए एक “गौरवशाली उपलब्धि” बताया। इसमें कहा गया, “भारत की UNESCO की संभावित सूची में अब 78 साइट्स शामिल हैं, जिनमें 5 नई साइट्स जोड़ी गई हैं: बाघ गुफाओं की पेंटिंग, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह, उदयगिरि गुफाएं, गिनौरगढ़ और – का संयुक्त अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव – ‘सत्याग्रह स्थल’। भारत की समृद्ध विरासत के लिए एक गर्व का पल!”

एक सोशल मीडिया पोस्ट में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ये नए स्थल भारत की विरासत की असाधारण विविधता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रगति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत की सभ्यतागत विरासत को वैश्विक मंच पर संरक्षित, सुरक्षित और प्रदर्शित करने के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।

UNESCO की वेबसाइट के अनुसार, मध्य प्रदेश की उदयगिरि पहाड़ी पर चट्टानों को काटकर बनाए गए पवित्र स्थलों का एक समूह है, जिसे मुख्य रूप से चौथी सदी के आखिर और पांचवीं सदी की शुरुआत के बीच गुप्त शासकों के संरक्षण में विकसित किया गया था। भारत की ओर से इस नॉमिनेशन के बारे में वेबसाइट पर दिए गए विवरण के अनुसार, इस साइट में खुदाई करके बनाई गई बीस गुफाएं, मूर्तिकला वाले पैनल, शिलालेख, आने-जाने के रास्ते, शुरुआती निशान और शिलालेखों वाली चट्टानें, और उससे जुड़ी भौगोलिक और जल-संबंधी विशेषताएं शामिल हैं, ये सभी मिलकर एक एकीकृत धार्मिक स्थल का निर्माण करते हैं।

बाघ गुफ़ाएं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में बाघनी नदी के किनारे विंध्य पर्वतमाला की दक्षिणी ढलान पर स्थित नौ बौद्ध गुफ़ाओं का एक समूह हैं, जिन्हें चट्टानों को काटकर बनाया गया है। मध्य भारत में पुराने राज गोंड शासकों की मुख्य किलेबंद राजधानी ‘गिनोरगढ़ किला’ और मध्य प्रदेश में चंबल घाटी के मंदिरों का समूह—बटेश्वर, पदावली और ककरमठ—भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।

किसी स्थल को ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ का दर्जा मिलने पर विचार किए जाने से पहले, उसे सबसे पहले UNESCO की ‘टेंटेटिव लिस्ट’ (संभावित सूची) में शामिल किया जाता है। संभावित सूची में शामिल होने वाली पांचवीं चीज़ ‘सीरियल ट्रांसनेशनल प्रॉपर्टी’ का प्रस्ताव है। यह महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विचार के विकास को दर्शाती है—जिसकी शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में इसकी अवधारणा से हुई और भारत में इसके प्रयोग, मज़बूती और संस्थागत रूप लेने तक का सफ़र इसमें शामिल है।

UNESCO की वेबसाइट के अनुसार, इस संभावित प्रॉपर्टी में कुल नौ हिस्से शामिल करने का प्रस्ताव है—दो दक्षिण अफ़्रीका में (जहां गांधी ने 1893 से 1914 तक 21 साल बिताए) और सात भारत में (जहां गांधी ने अपना ज़्यादातर जीवन बिताया)। इसमें आगे कहा गया है कि इसके नौ हिस्से हैं: दक्षिण अफ्रीका में पीटरमैरित्ज़बर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट (Phoenix Settlement) और भारत में महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन कॉम्प्लेक्स, हरिजन सेवक संघ कॉम्प्लेक्स, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति आवास।

ये नौ हिस्से सत्याग्रह के विकास को दिखाते हैं—शुरुआत में नस्लीय भेदभाव (पीटरमैरित्ज़बर्ग स्टेशन) के विरोध के तौर पर फिर सत्य और अहिंसा के लिए समर्पित समुदायों के बनने के साथ एक खोजपूर्ण चरण (बाद के आश्रमों के लिए फीनिक्स सेटलमेंट एक मॉडल बना) और आखिर में भारत लौटने पर गांधीजी द्वारा इसे मज़बूत करना और बड़े पैमाने पर सविनय अवज्ञा आंदोलनों में इसका विकास (महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन)।

 


भारत-कतर आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर, निर्मला सीतारमण ने कारोबारियों से की अपील

30-Sep-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतरी बिजनेसमैन एसोसिएशन (क्यूबीए) से भारत में व्यापार और निवेश में साझेदारी की संभावनाओं को सक्रिय रूप से तलाशने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की अपील की। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। बातचीत के दौरान, वित्त मंत्री ने दोनों देशों में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की।

वित्त मंत्री ने दोहा में क्यूबीए की बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित के दौरान भारत की मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ की रफ्तार का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद निवेश में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, जापान क्रेडिट रेटिंग (जेसीआर) द्वारा भारत की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग को बीबीबी प्लस से बढ़ाकर ए माइन्स करना भी भारत में चल रहे स्ट्रक्चरल सुधारों में भरोसे का संकेत माना गया।

भारत ने वित्त वर्ष 26 में अब तक का सबसे ज्यादा सालाना ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो 94.53 अरब डॉलर दर्ज किया, जो पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा है। इससे पहले, वित्त मंत्री सीतारमण ने कतर के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन मोहम्मद अल-सईद से मुलाकात की।

डॉ. अल-सईद ने 2025 में अपनी भारत यात्रा को गर्मजोशी से याद किया और कहा कि भारत में कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर – जैसे पोर्ट, एयरपोर्ट, हाईवे और बिजली – में निवेश की काफी गुंजाइश है। साथ ही, भारतीय कंपनियों के लिए कतर में फूड सिक्योरिटी, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में निवेश के मौके हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत कतर के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने को बहुत महत्व देता है, और उन्होंने “फरवरी 2025 में कतर के अमीर की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक ले जाने” का भी जिक्र किया। उन्होंने रिश्तों को रणनीतिक आयाम देने के लिए व्यापार और निवेश को अहम आधार बताया।
सरकारी बयान के मुताबिक, वित्त मंत्री ने भारत और कतर तथा अन्य खाड़ी देशों के बीच सामान्य व्यापार को फिर से शुरू करने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के समुद्री आवाजाही और व्यापार शामिल है।
 

 


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जालंधर दौरे से पहले तैयारियां पूरी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

30-Sep-2026
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को पंजाब के जालंधर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर जालंधर पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
जालंधर के परागपुर रोड क्षेत्र में रैली स्थल पर विशाल पंडाल तैयार किया गया है। साथ ही, मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल की तैनाती की गई है। दोपहर लगभग दो बजे गृह मंत्री अमित शाह रैली स्थल पर पहुंचेंगे।

भाजपा नेताओं के अनुसार, रैली में लगभग दो लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी ने 50-55 एकड़ जमीन पर कार्यक्रम की व्यवस्था की है, जिसमें से लगभग 40 एकड़ मुख्य सभा के लिए और शेष क्षेत्र पार्किंग के लिए आरक्षित है। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लेकर लगभग 2,000 बसें इस कार्यक्रम के लिए जालंधर पहुंचने की उम्मीद है।
बता दें कि 18 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पठानकोट से ‘नशा मुक्त पंजाब’ की चार यात्राओं को हरी झंडी दिखाई थी। यह राज्यव्यापी अभियान नशाखोरी के खिलाफ चलाया गया है और इसने सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया है। चार एक साथ यात्राएं पंजाब भर में लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद बुधवार को जालंधर में रैली स्थल पर समाप्त होंगी। यहां अमित शाह कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे।

गृह मंत्री शाह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भाजपा ने पंजाब में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विधानसभा चुनावों से पहले मादक पदार्थों की समस्या को भाजपा ने अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक बना लिया है। भाजपा मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के तरीके को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साध रही है। 

 


संयुक्त राष्ट्र पहुंचते ही विदेश मंत्री की तेज रफ्तार कूटनीति, फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

22-Sep-2026
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले सोमवार को तेज रफ्तार कूटनीतिक बैठकों का दौर शुरू करते हुए फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो से मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा कि नियमित बैठकें और टेलीकॉन्फ्रेंस भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की गति बनाए रखने में मदद करती हैं।

उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र के संकट समेत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार सहित विभिन्न बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
इसके बाद उन्होंने इक्वाडोर के विदेश मंत्री रोबर्टो क्यूरी से मुलाकात की। इस दौरान ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, लोगों की आवाजाही, कौशल प्रशिक्षण, विकास साझेदारी और संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

भारत और फ्रांस ने फरवरी 2026 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्रों के संयुक्त बयान में कहा गया था कि यह साझेदारी आने वाले दशकों में दोनों देशों के द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शन करेगी। रक्षा सहयोग के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त विकास इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के साथ अपने जुड़ाव को आगे बढ़ाते हुए भारत ने दक्षिण अमेरिका के प्रशांत तट पर स्थित तेल समृद्ध देश इक्वाडोर के साथ भी संबंध मजबूत किए हैं। प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स दोनों देशों के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।
पिछले पांच वर्षों में भारत ने 223 इक्वाडोरियन पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया है। वहीं, इक्वाडोर के एक विश्वविद्यालय में भारत द्वारा स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से 813 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। भारत से इक्वाडोर को फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात भी दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 


उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज करेंगे इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक 2026 का उद्घाटन, जल सुरक्षा और जलवायु पर होगी चर्चा

22-Sep-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज (मंगलवार) पांच दिवसीय 9वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) 2026 का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए हितधारकों के बीच जल से जुड़ी चुनौतियों, समाधान और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की शुरुआत होगी।
एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के भारत मंडपम में 22 से 26 सितंबर तक आयोजित होने वाले आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026 में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ‘जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन’ विषय पर अपने अनुभव साझा करेंगे। पांच दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाएगा।

कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, वैश्विक जल क्षेत्र के नेताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों, उद्योग जगत, नागरिक समाज और युवा पेशेवरों की भागीदारी होगी। इसका उद्देश्य संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान, नवाचार और साझेदारी के जरिए जल क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान तलाशना और जल-सुरक्षित तथा जलवायु-अनुकूल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।

बयान के अनुसार, आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026 का आयोजन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग निकायों, विकास भागीदारों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के भागीदारों के सहयोग से किया जा रहा है।

इस आयोजन में नीदरलैंड और जर्मनी भागीदार देशों के रूप में शामिल होंगे। वहीं, 14 राज्य भागीदार राज्यों के रूप में हिस्सा लेंगे। छह केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को भी भागीदार मंत्रालयों के रूप में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

बयान में कहा गया है कि इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक भारत और दुनिया भर के विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने, अनुभव साझा करने, नवाचारों को प्रदर्शित करने और जल क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।

आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू-2026 में जल से जुड़े विमर्श के केंद्र में जलवायु-अनुकूलता रहेगी। कार्यक्रम में केवल बातचीत तक सीमित रहने के बजाय टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए व्यावहारिक, सहयोगात्मक और लागू किए जा सकने वाले समाधानों की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम में समावेशी और न्यायसंगत जल प्रशासन, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सहयोग, जल सुरक्षा के लिए तकनीक और समुदाय, जलवायु संबंधी जोखिमों में जल की भूमिका, जल बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, टिकाऊ जल संसाधन प्रबंधन तथा लोगों और पृथ्वी के लिए जल जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

22 से 25 सितंबर तक चलने वाली चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन के लिए नवीन तकनीकों, उत्पादों और समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी जल क्षेत्र में काम कर रहे संस्थानों और कंपनियों के लिए अपने नवाचारों को साझा करने का मंच उपलब्ध कराएगी।

पेयजल और स्वच्छता विभाग की ओर से 22 से 24 सितंबर तक दूसरा अंतरराष्ट्रीय डब्ल्यूएएसएच सम्मेलन 2026 आयोजित किया जाएगा। इसमें पेयजल तक पहुंच, स्वच्छता बुनियादी ढांचे, स्वच्छता व्यवहार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। सम्मेलन में बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले, किफायती और टिकाऊ समाधानों पर विशेष जोर रहेगा।

आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू-2026 का उद्देश्य जानकारी और बातचीत को व्यावहारिक सुझावों, साझेदारियों और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदलना है। इसके लिए नीति, वित्तपोषण, तकनीक और समुदाय की भागीदारी को एक साथ लाकर जल सुरक्षा और जलवायु के प्रति लचीलेपन को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

 


विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों के साथ भारत-ईयू सहयोग, खाड़ी क्षेत्र एवं यूक्रेन पर चर्चा की

22-Sep-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयार्क में यूरोपीय संघ (ईयू) के अपने समकक्षों के साथ भारत-ईयू सहयोग, बहुपक्षीय मुद्दों और खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन एवं हिंद-प्रशांत समेत प्रमुख वैश्विक घटनाक्रम पर चर्चा की।
जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उन्होंने स्थानीय समयानुसार कल सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज दोपहर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान यूरोपीय संघ के अपने सहयोगियों से मुलाकात अच्छी रही।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत-ईयू सहयोग, बहुपक्षीय मुद्दों और खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन एवं हिंद-प्रशांत समेत मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा की।’’ इससे पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा, ‘‘हम नाउरू के साथ मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग की सराहना करते हैं। भारत विकास में एक साझेदार के रूप में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 



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