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सेशेस्ल राष्ट्रीय सभा की अध्यक्ष अर्नेस्टा की उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन से मुलाकात, साझेदारी मजबूत करने पर दिया जोर

04-Sep-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)   सेशेल्स की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष एचई अजरेल अर्नेस्टा ने भारत दौरे के तीसरे दिन गुरुवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने कई क्षेत्रों में भारत-सेशेल्स साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के अकाउंट से दी गई जानकारी में कहा गया, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज पार्लियामेंट हाउस में सेशेल्स के संसदीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेशेल्स की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष एचई अजरेल अर्नेस्टा कर रही थीं।”
दोंनों पक्षों के बीच हुई इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री भोजन के सहयोग और कैपेसिटी बिल्डिंग में भारत-सेशेल्स साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। एक्स पर साझा जानकारी में कहा गया, “उपराष्ट्रपति (सीपी राधाकृष्णन) ने कहा कि भारत, सेशेल्स के साथ पार्लियामेंट्री कामकाज के लिए अपनी एआई विशेषज्ञता साझा करने के लिए तैयार है। इसमें ट्रांसलेशन और डिजिटल आर्काइव शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित भारत-सेशेल्स की गहरी दोस्ती को फिर से सुनिश्चित किया और करीबी संसदीय जुड़ाव का स्वागत किया।”
बता दें, इससे पहले अर्नेस्टा ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मुलाकात की। उन्होंने संसदीय आदान-प्रदान को बढ़ाने तथा क्षमता निर्माण, डिजिटल संसद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा में सहयोग पर चर्चा की। ओम बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और सेशेल्स के बीच निरंतर संसदीय संवाद द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा और घनिष्ठ संबंधों को मजबूत करेगा।
बैठक के बाद ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जिक्र किया, “सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा की अध्यक्ष अजारेल अर्नेस्टा और भारत की संसद में आए विशिष्ट संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय रहा। हमारी चर्चाओं ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित भारत-सेशेल्स की अटूट मित्रता को और मजबूत किया। साथ ही, संसदीय आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण, डिजिटल संसद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ावा दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ और राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मनाते हुए हमने वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के विजन ‘महासागर’ को आगे बढ़ाने में सेशेल्स एक महत्वपूर्ण भागीदार बना हुआ है। मुझे विश्वास है कि निरंतर संसदीय सहभागिता हमारी साझेदारी को नई गति प्रदान करेगी और हमारे घनिष्ठ एवं स्थायी संबंधों को और मजबूत करेगी।”
 

11 सितंबर को दिल्ली में केंद्र सरकार के कार्यालय बंद, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर लिया गया फैसला

04-Sep-2026
नई दिल्ली  (शोर संदेश)  । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र सरकार के सभी कार्यालय 11 सितंबर को बंद रहेंगे। बृहस्पतिवार को जारी एक सरकारी आदेश में यह कहा गया। आदेश के अनुसार, ब्रिक्स व्यापार मंच और 18वां ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक यहां भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।
कार्मिक मंत्रालय के आदेश के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के लगभग तीस सदस्य और सहयोगी देशों के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और भारत सहित ब्रिक्स देशों के कारोबारी प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसमें कहा गया है, “इस कार्यक्रम की व्यापकता और इसके लिए जरूरी बड़े रसद इंतजामों को देखते हुए और आम जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए यह फैसला किया गया है कि दिल्ली/नयी दिल्ली में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालय शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रहेंगे (12 और 13 सितंबर 2026 को क्रमशः शनिवार और रविवार है)।”
 

 


‘जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं’, पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित

02-Sep-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बुधवार को सुभाषित शेयर किया गया। उन्होंने एक्स पर संस्कृत श्लोक, अभयस्यैव यो दाता तस्यैव सुमहत्फलम् । न हि प्राणसमं दानं त्रिषु लोकेषु विद्यते ॥ साझा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जो व्यक्ति लोगों के भय को दूर करता है, वह विशेष पुण्य प्राप्त करता है। तीनों लोकों में जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं।”
इसके पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया था, “यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥” साझा किया है, जिसका हिंदी अर्थ है कि जिस व्यक्ति के कार्यों, योजनाओं, गोपनीय विचारों और रणनीतियों का ज्ञान दूसरों को तब तक नहीं होता, जब तक कि वे सफलतापूर्वक पूर्ण न हो जाएं, ऐसे संयमी, विवेकी और गंभीर व्यक्ति को ही वास्तव में बुद्धिमान कहा जाता है।
बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए लिखा गया था, “यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः।।” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य जिस विषय या वस्तु के बारे में बार-बार सोचता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी ओर आकर्षित होने लगता है। इसलिए हमें हमेशा अच्छे, शुभ और कल्याणकारी विचारों का ही चिंतन करना चाहिए।
इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से 28 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर किया गया था। तब पीएम ने ‘एक्स’ पर “एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥” संस्कृत श्लोक लिखा था, जिसका हिंदी अर्थ है कि रक्षा सूत्र के प्रभावों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि यह जय, सुख, संतति, आरोग्य एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है।
27 अगस्त को पीएम ने संस्कृत श्लोक शेयर करते हुए लिखा था, “मनुष्य को अपनी परम्पराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उसे बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में अपनाकर निरन्तर विचारशील रहना चाहिए और दिव्य गुणों से सम्पन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।” 

नेपाल में बाढ़ के बीच पांच और भारतीय सुरक्षित निकाले गए, बचाव अभियान जारी

02-Sep-2026
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच सोमवार के बाद पांच और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके साथ ही अब तक बचाए गए भारतीयों की कुल संख्या बढ़कर 163 हो गई है। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि मंगलवार को 151 भारतीय नागरिक चीन से रवाना हुए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चिलिमे क्षेत्र स्थित जलविद्युत परियोजना की सुरंगों तक पहुंच बनाने के बाद भारतीय सुरंग बचाव दल को कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें बेहद सीमित जगह, भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष उपकरणों के उपयोग में दिक्कत और सुरंग के भीतर दलदली फर्श जैसी स्थितियां शामिल थीं। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय टीम ने नवाचारपूर्ण तरीकों और अस्थायी तैरने वाले उपकरणों (फ्लोट्स) का उपयोग कर सुरंग के और अंदर तक पहुंचने में सफलता हासिल की। टीम बुधवार को भी अपना अभियान जारी रखेगी और सुरंग में फंसे लोगों को बचाने का प्रयास करेगी।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत की फॉरेंसिक टीम ने भी मंगलवार को नेपाल के विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपने कार्यों का विस्तार किया। टीम डीएनए नमूनों की जांच और विश्लेषण जैसे कार्य कर रही है, जिससे नेपाल में डीएनए सैंपलों की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलेगी। नेपाल में पिछले सप्ताह आई भीषण बाढ़ के बाद अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। विभिन्न जिलों में नदियों के किनारों पर लगातार शव मिलने का सिलसिला जारी है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मंगलवार तक 1,003 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 321 शव चितवन जिले से मिले हैं, जबकि 216 शव नवलपरासी पूर्व जिले से बरामद किए गए हैं। प्राधिकरण के मुताबिक, 583 विदेशी नागरिकों सहित 3,916 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
इसके अलावा, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में स्थित विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 639 कर्मचारी पिछले सप्ताह आई आपदा के बाद से अब तक संपर्क में नहीं हैं। नेपाल सरकार ने कहा है कि प्रभावित जिलों में खोज, बचाव और राहत अभियान लगातार जारी हैं।
 

भारत के विकास मॉडल से अन्य देशों को मिल सकती है सीख: अजय बंगा

02-Sep-2026
नई दिल्ली। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने कहा है कि भारत विकास के ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और तकनीक आधारित कृषि सहित उसके विकास के अनुभवों को अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है।
जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से इतर आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में बंगा ने कहा कि विश्व बैंक भारत के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ा रहा है, क्योंकि देश 2047 तक अपने विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बंगा ने कहा, “मेरा मानना है कि भारत विकास के ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां उसके अनुभवों से अन्य देश सीख सकते हैं।”
उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि आधार से लेकर बैंक खातों तक डिजिटल सेवाओं के विस्तार से अन्य देशों को सीख मिल सकती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को भी ऐसा क्षेत्र बताया, जिससे अन्य देश लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने कहा, “भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को देखें, जो आधार से लेकर बैंक खातों तक फैला हुआ है। कृषि के क्षेत्र में जो काम किया जा रहा है, उससे भी अन्य देश सीख सकते हैं।”
2047 के लक्ष्य में भारत की वैश्विक भूमिका भी महत्वपूर्ण
बंगा ने कहा कि 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा केवल घरेलू अर्थव्यवस्था के आकार या उसकी वृद्धि दर पर निर्भर नहीं होगी। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मामलों में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा, “2047 तक विकसित भारत बनने के लिए अर्थव्यवस्था का आकार केवल घरेलू वृद्धि से तय नहीं होगा, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में भारत की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।”
उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में भारत के विकास की दिशा में ये दोनों पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल
विश्व बैंक प्रमुख ने कहा कि संस्था भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है और भारत के विकास अनुभवों से मिले ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने छोटे किसानों की सहायता के लिए तकनीक और साझेदारी के जरिए चल रही कृषि परियोजनाओं का उदाहरण दिया। उत्तर प्रदेश की अपनी पिछली यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां उन्होंने सहकारी समितियों को गूगल और विश्व बैंक के साथ मिलकर काम करते देखा।
उन्होंने कहा, “जब मैं पिछली बार भारत में था, तो उत्तर प्रदेश गया था। वहां मैंने देखा कि सहकारी समितियां गूगल और हमारे साथ तकनीक के माध्यम से काम कर रही हैं, ताकि छोटे किसानों को बड़े स्तर पर जरूरी कृषि इनपुट और अन्य सहायता मिल सके।”
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं को तकनीक से जोड़ने का यह तरीका अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकता है।
बंगा ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए विकेंद्रीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डॉक्टरों और क्षेत्रीय अस्पतालों से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “इसके बाद आप इसे तकनीक और डिजिटलीकरण के माध्यम से क्षेत्रीय अस्पतालों और डॉक्टरों से जोड़ सकते हैं।”

पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को दी जन्मदिन की बधाई

02-Sep-2026
नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के पावर स्टार, जन सेना पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “पवन कल्याण को जन्मदिन की बधाई। वे लोगों के बीच बहुत सम्मानित हैं और आंध्र प्रदेश में एनडीए के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। समाज की सेवा करते हुए उन्हें लंबी और स्वस्थ आयु मिले, यही कामना है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। राज्य के विकास और लोगों के कल्याण के लिए एनडीए के विज़न को साकार करने की दिशा में आपके समर्पित प्रयास सराहनीय हैं। नागरिकों की निरंतर सेवा के लिए आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पोस्ट में कहा, “पवन कल्याण को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे आंध्र प्रदेश के लोगों की सेवा करने और राज्य के विकास में योगदान देने के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। लोगों की सेवा में उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
केंद्रीय मंत्री और यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने एक्स पर लिखा, “आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। यह विशेष दिन आपके जीवन में अपार खुशियां लाए और आने वाला वर्ष उत्तम स्वास्थ्य, सफलता, समृद्धि और नई उपलब्धियों से भरा हो। आपके लंबे और सुखद जीवन के लिए मेरी शुभकामनाएं।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। यह अवसर खुशियां लेकर आए और आने वाला साल अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि से भरा हो।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर पोस्ट किया, “आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु प्रदान करें। लोगों की सेवा में आपको निरंतर शक्ति और सफलता मिले, यही कामना है।”
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक्स पर लिखा, “जन सेना पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। मैं दिल से कामना करता हूं कि ‘पावर स्टार’ के तौर पर फैंस के दिलों में हमेशा बसे रहने वाले पवन कल्याण गारू स्वस्थ और ऊर्जावान रहते हुए सौ साल का जीवन जिएं। पंचायती राज विभाग में कई सुधारों और विकास कार्यक्रमों के ज़रिए वे बड़े बदलाव ला रहे हैं। सड़क निर्माण से लेकर हरियाली को बढ़ावा देने और आदिवासी लोगों की मुश्किलें कम करने तक, उनके उठाए गए कदमों के शानदार नतीजे मिल रहे हैं। वे बदलाव की नई शुरुआत कर रहे हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि राज्य के पुनर्निर्माण को लेकर गठबंधन द्वारा जनता से किए गए वादे को पूरा करने के लिए अथक प्रयास करने वाले पवन कल्याण गारू ऐसे और भी कई जन्मदिन मनाएं।”

आंध्र प्रदेश विधान सभा उपाध्यक्ष के. रघु राम कृष्ण राजू एक्स पोस्ट में कहा, “आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और पवन कल्याण को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। फिल्म इंडस्ट्री में ‘पावर स्टार’ के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ने और लाखों प्रशंसकों का प्यार पाने के बाद पवन कल्याण ने राजनीति में कदम रखा और जन-मुद्दों के लिए संघर्ष करते हुए एक जन-नेता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उपमुख्यमंत्री के तौर पर वे आंध्र प्रदेश के विकास और वहां के लोगों की भलाई के लिए पूरी निष्ठा और अथक परिश्रम के साथ काम कर रहे हैं। तिरुमाला श्री वारी के आशीर्वाद से मेरी हार्दिक कामना है कि वे उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के साथ पूरे सौ वर्षों का जीवन जिएं और राजनीति, सिनेमा तथा जन-सेवा के क्षेत्रों में और भी बड़ी सफलताएं हासिल करें।।”

नारियल भारत में सिर्फ फल नहीं, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है: शिवराज सिंह चौहान

02-Sep-2026
नई दिल्ली। हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। भारत में नारियल केवल एक फल नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आधार है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर सभी नारियल उत्पादक किसान भाई-बहनों को हार्दिक बधाई दी है।
शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कहा, “भारतीय संस्कृति में नारियल का विशेष महत्व है। इसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक उत्सवों, पूजा-पाठ एवं विभिन्न शुभ कार्यों व मांगलिक अवसरों में नारियल समर्पित किया जाता है। नारियल भारत में सबसे पसंदीदा फलों में से एक है। मिठाइयों, विभिन्न व्यंजनों और अन्य उत्पादों में नारियल का उपयोग होता है। देश में हमारे किसानों की अथक मेहनत व प्रयास से नारियल का उत्पादन, निर्यात और व्यापार निरंतर बढ़ रहा है।”
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने भी विश्व नारियल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नारियल प्रकृति का अनूठा वरदान है, जो न केवल पूजा-पाठ, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद उपयोगी है। भाजपा विधायक अजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “विश्व नारियल दिवस… नारियल के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अहमियत उजागर करना तथा इस फसल की ओर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।”
भाजपा नेता गोपाल चतुर्वेदी ने किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “नारियल ऐसा फल है जो हमारे जीवन से बहुत गहराई से जुड़ा है। धार्मिक रीति-रिवाजों के अलावा अब ये रोजगार का भी बड़ा साधन है। ऐसे अद्भुत फल को पोषित कीजिए और बढ़ाइए। इसे श्रीफल भी कहा जाता है, इसलिए कि ये ‘श्री’ बढ़ाता है।”निश्चित तौर पर नारियल किसानों की समृद्धि का आधार है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में लाखों किसान इसकी खेती पर निर्भर हैं। नारियल से तेल, दूध, पानी, खोपरा और कॉयर जैसे कई उत्पाद बनते हैं, जो देश-विदेश में हाई डिमांड में हैं।
 

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए भारतीय भाषाओं का उपयोग महत्वपूर्ण: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

02-Sep-2026
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने मंगलवार को स्वास्थ्य क्षेत्र में हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के अधिक से अधिक उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि लोगों से उनकी भाषा में संवाद करने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उन्हें आम जनता तक पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है।
दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्रालय की ‘हिंदी सलाहकार समिति’ की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय  मंत्री नड्डा ने कहा कि देश पश्चिमी दुनिया के औपनिवेशिक प्रभाव से निकलकर भारतीय भाषाओं के अधिक उपयोग की ओर बढ़ रहा है और भाषा “भारतीयता” को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
केंद्रीय  मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में अपने विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं तथा भारतीयता को मजबूत करने पर बल दिया है।”
बैठक में मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा के रूप में हिंदी के उपयोग की समीक्षा की गई, साथ ही इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
उन्होंने ने मंत्रालय के तहत ‘राजभाषा’ के पदों की समीक्षा करने और समयबद्ध तरीके से रिक्त पदों को भरने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे रिक्त पदों की सूची तैयार कर जल्द से जल्द सौंपने को कहा, ताकि इस मामले को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाया जा सके। अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूरे सप्ताह की गतिविधियों के स्पष्ट कार्यक्रम के साथ एक सप्ताह का संक्षिप्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम या कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रालय की पत्रिकाओं में प्रकाशित कम से कम आधे लेख हिंदी में होने चाहिए और बुलेटिनों में भी हिंदी का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। भोपाल मेडिकल कॉलेज में हिंदी में मेडिकल शिक्षा प्रदान करने के उपयोग का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि इस पहल का अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि इसे अन्य संस्थानों में कैसे दोहराया जा सकता है।
समिति की पिछली बैठक 22 अगस्त 2025 को नयी दिल्ली में आयोजित की गई थी।

भारत की प्रगति के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग जरूरी: उपराष्ट्रपति

30-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को पेरुंदुरई, इरोड में कोंगू वेल्लालर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केवीआईटी) ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह और ‘अरिवुकुडम’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की निरंतर प्रगति के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से बुनियादी शिक्षा तक सीमित न रहने और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए खुद को तैयार करने को कहा।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को केवल बुनियादी शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्रों के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास में योगदान देगा।
उपराष्ट्रपति ने केवीआईटी ट्रस्ट के 41 संस्थापकों की दूरदृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि केवीआईटी से जुड़े संस्थानों के माध्यम से करीब एक लाख लोगों ने शिक्षा हासिल की है। उन्होंने कोंगू क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार में संस्थानों के योगदान की प्रशंसा की और जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस तथा जापान समेत विभिन्न देशों के साथ उनके वैश्विक संबंधों का भी उल्लेख किया।
सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार उन्नत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को बुनियादी शिक्षा से आगे बढ़कर अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा अपनानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और पेटेंट के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने की अपील की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और युवाओं के सामने नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने उनसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ‘परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर चीज है।’ युवाओं को अपनी क्षमताओं और खूबियों को पहचानकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सीपी राधाकृष्णन ने मानसिक शांति और बुद्धि को तेज करने में योग तथा ध्यान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन, “आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं”, का उल्लेख करते हुए युवाओं से सकारात्मक सोच और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्रगति के लिए उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। उन्होंने कोंगू इंजीनियरिंग कॉलेज के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां नवोन्मेषी परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में एंकर इंडस्ट्रीज और ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान पार्क के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इससे उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग को और मजबूत करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
उपराष्ट्रपति ने कॉलेज और ट्रस्ट से जुड़े विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान पार्क, फार्मेसी कॉलेज, कोंगू नेचुरोपैथी और योग मेडिकल कॉलेज तथा केवीआईटीटी के क्लाउड किचन की आधारशिला रखने के उपलक्ष्य में पट्टिकाओं का अनावरण भी किया।
 

मां को जागरूक बनाने से बच्चों में दिव्यांगता की शुरुआती पहचान संभव: डॉ. जितेंद्र सिंह

30-Aug-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा है कि माताओं को जागरूक और सशक्त बनाकर बच्चों में कई विकासात्मक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान जागरूकता, नियमित प्रसव पूर्व जांच और अनुशंसित स्क्रीनिंग से कुछ स्थितियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे चिकित्सीय सलाह और आवश्यक हस्तक्षेप जल्द शुरू करने में मदद मिलती है। डॉ. जितेंद्र सिंह सक्षम (SAKSHAM) की ओर से आयोजित प्रबुद्ध ‘मातृ शक्ति सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे, जिसमें रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर जोर दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि माताएं अक्सर बच्चे के विकास या स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को सबसे पहले पहचानती हैं। इसलिए महिलाओं को सही जानकारी और जागरूकता से लैस करना दिव्यांगता की शुरुआती पहचान और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मां की जागरूकता से समस्या की पहचान, उचित रेफरल और उपलब्ध चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाओं तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम का प्रयास बच्चे के जन्म के बाद ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान ही शुरू हो जाना चाहिए। मातृ स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्रसव पूर्व देखभाल, संक्रमण से बचाव, दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकों से समय पर परामर्श के प्रति जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान किसी स्थिति की पहचान होने पर समय पर चिकित्सा सहायता और उचित देखरेख से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों का अनुभव बताता है कि स्वास्थ्य और सहायता से जुड़ी जागरूकता को परिवार और समुदाय के स्तर तक ले जाना बेहद जरूरी है। महिलाओं की इसमें विशेष भूमिका है। उन्होंने कहा कि जागरूक मां बच्चे की जरूरतों को जल्दी समझ सकती है और आवश्यकता होने पर परिवार को उचित चिकित्सा या सहायता व्यवस्था तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि जागरूकता का दायरा केवल दिव्यांगता की रोकथाम तक सीमित नहीं होना चाहिए। दिव्यांगजनों को शिक्षा, पुनर्वास, सहायक उपकरण, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों तक समय पर पहुंच दिलाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की मजबूत संवाहक बन सकती हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांग बच्चों के लिए शुरुआती सहायता व्यवस्था को मजबूत कर रही है। शिशुओं और बच्चों में शुरुआती स्तर पर दिव्यांगता की पहचान और सहायता के लिए देशभर में क्रॉस-डिसएबिलिटी अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान के बाद उचित उपचार, पुनर्वास और सहायता मिलने से बच्चों को अपनी विकासात्मक क्षमताओं को बेहतर ढंग से हासिल करने में मदद मिल सकती है।
जितेंद्र सिंह ने दिव्यांगजनों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट कोचिंग और व्यवस्थित प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए भारत का पहला हाई-टेक खेल प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलता है। इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में भारत के 29 पदकों के रिकॉर्ड प्रदर्शन का भी जिक्र किया।
केंद्रीय मंत्री ने दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध विभिन्न सहायता उपायों का भी उल्लेख किया। इनमें रोटेशनल ट्रांसफर से छूट, 22 वर्ष की उम्र तक बच्चों के लिए एजुकेशन अलाउंस, चिकित्सा सुविधाओं के नजदीक पोस्टिंग पर विचार और संबंधित सरकारी नियमों के तहत दो साल की पेड चाइल्ड केयर लीव जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक प्रभावी सहायता व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो गर्भावस्था और शुरुआती बचपन से लेकर शिक्षा, उपचार, पुनर्वास, कौशल विकास और अंततः आत्मनिर्भरता तक की पूरी यात्रा को कवर करे। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं संस्थागत सहायता देती हैं, लेकिन परिवारों और माताओं में लगातार जागरूकता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है कि बच्चों को सही समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्रबुद्ध ‘मातृ शक्ति सम्मेलन’ का उद्देश्य केवल मौजूदा दिव्यांगजनों की सहायता करना नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक जागरूक और समावेशी समाज की नींव तैयार करना है। उन्होंने कहा कि सशक्त माताएं और जागरूक परिवार शुरुआती रोकथाम, शुरुआती पहचान और व्यापक समावेशन की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि हर मां जागरूक हो, हर परिवार सशक्त बने और हर बच्चे को जीवन की बेहतर शुरुआत मिले। उन्होंने कहा कि समाज में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी बच्चा या दिव्यांग व्यक्ति अवसरों से पीछे न छूटे।
 

 



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