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पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक नए वीडियो में अपने दोस्तों के साथ बिताए पलों को साझा किया, बोले- ‘ये मेरी दैनिक दिनचर्या’

16-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार दोपहर को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में वे अपने सरकारी आवास पर मोरों और पुंगनूर गायों के साथ नज़र आए। उन्हें 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर रखी देसी और छोटे आकार की गायों को खाना खिलाते और प्यार से सहलाते हुए देखा गया। वीडियो में वह अपने हाथों से मोरों को दाने खिलाते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की सुबह के उन खास पलों को शेयर किया है, जब वह अपने आवास पर गायों को चारा और मोर को दाना खिलाने के बाद लालकिले के लिए निकले थे। उन्होंने बताया कि गायों और मोरों को शायद यह एहसास हो गया था कि वे लाल किले पर होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए जल्दी निकलेंगे। इसलिए, राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए रवाना होने से पहले ही वे उनसे मिलने आ गए।
पीएम ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “हर सुबह अपने ‘दोस्तों’ को खाना खिलाना मेरी दैनिक दिनचर्या है। कल सुबह (15 अगस्त को), उन्हें किसी तरह एहसास हो गया कि मैं जल्दी निकल रहा हूं, इसलिए जब मैं लाल किले के लिए निकल रहा था, तो वे मुझसे मिलने आ गए। हमेशा की तरह यह खास रहा।”
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री को उनके आवास के लॉन में सुबह की सैर और व्यायाम के दौरान अक्सर मोरों के साथ देखा जाता रहा है। प्रधानमंत्री आवास में दुर्लभ, देसी और छोटे आकार की ‘पुंगनूर’ नस्ल की गायें हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई इन मुलाकातों ने पहले भी लोगों का काफी ध्यान खींचा है।
पीएम मोदी के साथ इन मुलाकातों में जिस नस्ल का जिक्र हुआ है, उनमें आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की छोटे आकार की गायें शामिल हैं। इस नस्ल को दुनिया की सबसे छोटी गायों की नस्लों में से एक माना जाता है। इन गायों की ऊंचाई सिर्फ 70 से 90 सेंटीमीटर के आसपास होती है।








 

इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप से 51 की मौत, 14 दिन का आपातकाल लगाया गया

16-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत की सरकार ने फ्लोरेस द्वीप में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद 14 दिनों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया की स्थिति घोषित कर दी है। यह अवधि 15 से 28 अगस्त तक लागू रहेगी।
पूर्वी इंडोनेशिया में शनिवार को आए भूकंप में मृतकों की संख्या रविवार को चार और शव बरामद होने के बाद बढ़कर 51 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भूकंप के कारण हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
अमेरिका भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, शक्तिशाली भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे पूर्वी इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में आया। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अमेरिका भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि सुनामी की चेतावनी जारी होने के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए हालांकि बाद में यह चेतावनी वापस ले ली गई।
इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप के बाद कम से कम 235 झटके महसूस किए गए।
वहीं, रविवार को बचावकर्मी भूकंप के कारण हुए भूस्खलन के मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे रहे। यह अभियान फ्लोरेस के छह क्षेत्रों में चलाया गया। फ्लोरेस मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाला द्वीप है और मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया का हिस्सा है।
बचावकर्मियों ने उन तीन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया, जहां भूकंप के बाद अब भी पहुंचना संभव नहीं हो पाया था। इनमें सबसे अधिक प्रभावित मंगराई, पूर्वी मंगराई और नागेकेओ जिले शामिल हैं।
सिक्का की राजधानी मौमेरे में खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख फतहुर रहमान ने बताया, “हमने भूस्खलनों के कारण फैले ज्यादातर मलबे को हटा दिया है और पहले से अलग-थलग पड़े गांवों के लिए सड़कें फिर से खोल दी हैं। हालांकि, संचार व्यवस्था बाधित होने और बिजली कटौती के कारण तलाश अभियान में अब भी दिक्कतें आ रही हैं।”
राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी के अनुसार, 101 लोग घायल हुए हैं, 900 से अधिक मकान पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि 450 अन्य मकानों को नुकसान पहुंचा है। एजेंसी ने बताया कि भूकंप के कारण करीब 5,000 लोगों को अस्थायी आश्रय स्थलों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 












 

युद्ध के मैदान से खेल के मैदान तक अजेय है भारतीय सेना : राजनाथ सिंह

14-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) ग्लासगो की धरती पर भारतीय सेना के 20 खिलाड़ियों ने पांच अलग-अलग खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन खिलाड़ियों ने 8 गोल्ड, 7 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 पदक जीतकर भारत के कुल पदकों में 41% और कुल स्वर्ण पदकों में 62% का योगदान दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय सेना के इन खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत की और उनके प्रदर्शन, अनुभवों तथा खेलों के प्रति समर्पण की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के जवानों और खिलाड़ियों के अनुशासन, कड़ी मेहनत तथा देश के लिए गौरव हासिल करने के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना के जवान खेलों के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भारतीय सेना के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा, “मुझे यह देखकर भी बड़ी खुशी हुई कि हमारे जो चैंपियन हैं, उनमें ठीक-ठाक संख्या बेटियों की भी है। एक दिलचस्प चीज मुझे यह भी दिखी कि हमारी ज्यादातर बच्चियां बॉक्सिंग में पदक ला रही हैं।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अपने आप में सुखद संकेत है कि भारत की नारी शक्ति किसी भी मामले में किसी से कम नहीं है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि ग्लासगो की ऐतिहासिक सफलता उनके लिए गौरव का विषय है, लेकिन इससे भी बड़ी चुनौतियां आगे उनका इंतजार कर रही हैं। एशियन गेम्स और ओलंपिक में अपेक्षाएं अधिक होंगी, दबाव ज्यादा होगा और चुनौतियां भी बड़ी होंगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस अनुशासन, हिम्मत और अथक लगन ने खिलाड़ियों को ग्लासगो की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, वही गुण उन्हें आने वाली हर ऊंचाई तक ले जाएंगे। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी जज्बे के साथ तैयारी जारी रखने का संदेश दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वह दौर अब इतिहास की बात हो चुका है, जब खेल किसी विशेष वर्ग, क्षेत्र या सुविधा-संपन्न परिवारों तक सीमित हुआ करते थे। आज खेलों का जनतंत्रीकरण हो चुका है और खेल किसी एक वर्ग का विशेषाधिकार नहीं रह गया है। अब देश के कोने-कोने से चैंपियन सामने आ रहे हैं। दूरदराज के गांवों, छोटे कस्बों और आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज खेल ने अपना विस्तृत और भव्य रूप धारण कर लिया है। आनंद और मनोरंजन खेलों का हिस्सा तो आज भी हैं, लेकिन अब खेल समाज के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन चुका है। खेल अपने आप में सफलता का एक मानक बन गया है और आज इसे सम्मानित क्षेत्र के तौर पर देखा जाता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना के खिलाड़ी इस नए युग के अग्रदूत हैं।
राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों से कहा कि वे इसी तरह कठिन परिश्रम करते रहें, स्वयं को निरंतर चुनौती दें और हर प्रतियोगिता से कुछ न कुछ सीखते रहें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी उस भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो युद्ध के मैदान में भी अजेय है और खेल के मैदान में भी। रक्षा मंत्री ने ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को एक बार फिर बधाई दी। 






























 

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सुबह 4 बजे से शुरू होंगी

14-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वह मेट्रो से यात्रा वक्त लेकर करें, क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से चेकिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया से यात्रियों को गुजरना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया 16 अगस्त तक होने वाली है।
शनिवार, 15 अगस्त 2026 को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले खास मेहमानों, आमंत्रित लोगों और आम जनता की आवाजाही को आसान बनाने के लिए, दिल्ली मेट्रो अपने पूरे नेटवर्क के सभी टर्मिनल स्टेशनों से सुबह 4:00 बजे मेट्रो सेवाएं शुरू करेगा। वहीं, दूसरी मेट्रो हर 30 मिनट में मिलेगी। दिल्ली मेट्रो की नियमित सेवा शुरू होने तक मेट्रो ट्रेन के बीच 30 मिनट का गैप होगा।
इस बीच, दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने लाल किले में स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले विशेष अतिथियों और आम जनता की आवाजाही के लिए विस्तारित मेट्रो सेवाओं की घोषणा की है। यात्री लाल किला, जामा मस्जिद और दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशनों पर उतरकर लाल किले तक पहुंच सकते हैं। विस्तारित मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू होगी।
दिल्ली मेट्रो ने यह बताया कि उसने स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले अधिकृत आमंत्रित व्यक्तियों और विशेष अतिथियों की सुगम यात्रा के लिए रक्षा मंत्रालय को एक लाख 30 हजार विशेष क्यूआर टिकट उपलब्ध कराए हैं। विशेष अतिथि अपने वैध प्रवेश पत्र के साथ निर्धारित मेट्रो स्टेशनों पर इन क्यूआर टिकटों का लाभ उठा सकते हैं।
इसके अलावा, स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए दिल्ली यातायात पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के आसपास आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यातायात संबंधी परामर्श जारी किया है। यह सुबह 4 बजे से दिन के 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। यात्रियों को सलाह गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, अतिरिक्त समय लेकर चलें, प्रतिबंधित सड़कों से बचें और यातायात पुलिस कर्मियों के निर्देशों का पालन करते हुए निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।













 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को दी शुभकामनाएं, विकसित भारत के निर्माण का आह्वान

14-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी पर जोर दिया। राष्ट्र के नाम अपने संदेश में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया और कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, श्रमिकों, खिलाड़ियों, सुरक्षाबलों और समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान की सराहना करते हुए देशवासियों से संविधान के मूल्यों और मूल कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।
राष्ट्रपति ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुआ और देशवासियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की सार्थकता इसी में है कि भारत के लोग अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग करें और देश को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें।
द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों, किसानों, खिलाड़ियों, शिल्पकारों, कलाकारों, जनप्रतिनिधियों, न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों, सिविल सेवकों, निवेशकों, समाजसेवियों और सफाई-मित्रों समेत राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे सभी नागरिकों की सराहना की। उन्होंने तीनों सेनाओं के जवानों, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा की विशेष रूप से प्रशंसा की।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत स्वाधीनता की शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ रहा है। अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए देश आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वेद वाक्य ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के प्रति सदैव जागरूक रहने का संदेश दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए विभाजन के दौरान मारे गए और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले लाखों लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश के सामने विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत से जोड़ने की चुनौती भी थी। सरदार वल्लभभाई पटेल ने इन रियासतों का भारतीय लोकतंत्र में विलय कराया। राष्ट्रपति ने आधुनिक भारत की एकता के शिल्पकार और लौहपुरुष सरदार पटेल की स्मृति को नमन किया।
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत का संविधान ‘भारत के लोगों’ द्वारा निर्मित है और लोकतंत्र की जननी भारतभूमि में जनभागीदारी की भावना सदैव रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जाना लोकतंत्र की प्रेरक उपलब्धि है।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्श हैं। आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अपने-अपने उत्तरदायित्व हैं। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें, जबकि कार्यपालिका जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को लागू करे। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे और विशेषकर वंचित वर्गों को समानता तथा सम्मान के साथ समय पर न्याय मिले।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत ने तेज गति से समावेशी विकास किया है। विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी गई है तथा विकास में बाधक दशकों पुराने कई अवरोधों को दूर किया गया है।
उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में योगदान को याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बना है। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि करीब 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खेती, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को भी समर्थन मिला है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सांस्कृतिक आत्मबल पर आधारित विकास गतिमान और स्थायी होता है। भारत की ज्ञान-विज्ञान, कला-संस्कृति, अध्यात्म और सदाचार की समृद्ध विरासत देश को आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत विरासत और विकास के समन्वय के साथ आगे बढ़ रहा है।
द्रौपदी मुर्मु ने डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों की छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी तक डिजिटल भुगतान पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि विश्व में होने वाले रियल टाइम डिजिटल लेनदेन में भारत की हिस्सेदारी आधे से अधिक है। तकनीक के जरिए जनकल्याणकारी सुविधाओं को पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिली है।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में हाईवे, वाटरवे, रेलवे और एयरवे के रूप में आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इससे नए उद्यमों के अवसर बढ़े हैं, रोजगार का सृजन हुआ है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है।
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर योगदान दे रहा है। सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े कुछ लक्ष्यों को देश ने समय से पहले हासिल किया है और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को भी पिछले वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है।
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति देशहित पर आधारित है। शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ हैं। आर्थिक सहयोग बढ़ाने और संबंध मजबूत करने के लिए कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं। भारत ग्लोबल साउथ में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक संपदाओं पर भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना वर्तमान पीढ़ी का है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आज के कार्यों से आने वाली पीढ़ियों के अधिकार प्रभावित न हों। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (LiFE) जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर वायु सेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने तक महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने ग्लासगो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के 13 स्वर्ण पदकों में 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और अब देश नई 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुद्रा योजना के तहत सहायता पाने वाले उद्यमियों में करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं।
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ विभिन्न क्षेत्रों में उनका नेतृत्व भी बढ़ रहा है। मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने गणतंत्र की विशेष सफलता बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया है। इसके लक्ष्य को हासिल करने से लोकतंत्र और अधिक समावेशी बनेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश की कुल आबादी में 65% लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। युवा आबादी भारत की सबसे मूल्यवान संपदा है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाशाली, प्रतिबद्ध और कुशल हैं। उन्होंने हाल में केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम द्वारा रॉकेट के सफल प्रक्षेपण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अंतरिक्ष अन्वेषण के नए चरण का शुभारंभ हुआ है।
उन्होंने कहा कि अनेक युवा स्वरोजगार के रास्ते पर चलते हुए रोजगार देने की संस्कृति को अपना रहे हैं। युवा उद्यमियों की भागीदारी से मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हुआ है। विश्व की बड़ी कंपनियां भारतीय युवाओं की प्रतिभा और लगन से प्रभावित हैं और उन्हें नेतृत्व की भूमिकाएं दे रही हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों को भारत का भविष्य निर्माता बताते हुए सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है, ताकि अनुचित साधनों पर अंकुश लगे और परीक्षाएं पारदर्शी, सुरक्षित तथा भरोसेमंद बनें।
राष्ट्रपति ने युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को देश के भविष्य का आधार बताया। उन्होंने कहा कि खेलों को युवाओं के विकास और राष्ट्र निर्माण के माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। खेलो इंडिया के जरिए स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक खेल इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है और सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए निवेश कर रही है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत में युवा आबादी के साथ वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी बढ़ रही है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के आत्मसम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए पूरे समाज से संवेदनशील रहने की अपील की।
द्रौपदी मुर्मु ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारतीय सेनाओं के पराक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं की क्षमता का प्रमाण है और आतंकियों तथा उनके समर्थकों को कड़ा संदेश दिया गया है। उन्होंने आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को किसानों के हित में निर्णायक कदम बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती रहा, लेकिन भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब उत्साह का वातावरण है और विकास की धारा पहुंच रही है। बस्तर ओलिंपिक्स और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में लोगों की बड़ी भागीदारी इसका प्रमाण है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि राष्ट्र-गौरव और मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 दुर्गों को पिछले वर्ष यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि देश की विरासत में आध्यात्मिक स्मारकों के साथ आत्मसम्मान तथा गौरवशाली परंपराओं की रक्षा की सैन्य क्षमता के प्रतीक भी मौजूद हैं।
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सभी भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है। उन्होंने तेलुगू साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश केवल मिट्टी नहीं, बल्कि समस्त जनसमुदाय है।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव, नगर-नगर और भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे। उन्होंने देशवासियों से देश प्रेम की सर्वसमावेशी भावना के साथ स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया।

पीएम मोदी 12 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन करेंगे

11-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन करेंगे। इसका शीर्षक “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ़, माई स्ट्रगल्स” है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। पीएम मोदी इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को भी संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री की ओर से कोविंद की आत्मकथा का विमोचन भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे जाने-माने व्यक्तित्वों में से एक के जीवन और योगदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
आत्मकथा में गहराई से राम नाथ कोविंद की शानदार जीवन यात्रा का व्यक्तिगत विवरण मिलेगा, जिसमें प्रारंभिक वर्षों से लेकर उनके विशिष्ट सार्वजनिक जीवन और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनकी सेवा तक के अनुभव, संघर्षों और सफलताओं का उल्लेख शामिल हैं।
यह पुस्तक उन मूल्यों, अनुभवों और परिस्थितियों के बारे में बताती है जिन्होंने उनकी जीवन यात्रा और लोक सेवा को आकार दिया।











 

स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर, पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ाई निगरानी

11-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) भारत की सुरक्षा एजेंसियां 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोहों से पहले पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमाओं पर निगरानी काफी बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित तत्व इस मौके का फायदा उठाकर कोई बड़ी नापाक हरकत कर सकते हैं।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, आईएसआई को लगता है कि सुरक्षा बलों का पूरा ध्यान दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में 15 अगस्त के कार्यक्रमों पर केंद्रित रहेगा। इसी स्थिति का फायदा उठाकर स्वतंत्रता दिवस से पहले या उसी दिन कोई बड़ा हमला रचा जा सकता है। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश हो सकती है।
बांग्लादेश सीमा के रास्ते भी आतंकियों को भारत में घुसाने के प्रयास किए जा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई की नजर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 शहरों पर भी ध्यान है, जहां सुरक्षा व्यवस्था मेट्रो शहरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सख्त होती है।
सीमा पार से मिले कुछ इंटरसेप्ट संकेत देते हैं कि आईएसआई पर इस समय काफी दबाव है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और बलूचिस्तान में चल रही अशांति के कारण पाकिस्तानी व्यवस्था दबाव में है। ऐसे में वह किसी बड़े मुद्दे से ध्यान भटकाने का रास्ता तलाश रहा है। 
पश्चिमी सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने 10 अगस्त से ‘ऑपरेशन अलर्ट’ शुरू कर दिया है। यह अभियान 17 अगस्त तक चलेगा। इसमें बीएसएफ के सभी वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल हैं। यह कदम आईएसआई की संभावित गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद उठाया गया है।
एक अन्य अधिकारी ने आगाह किया कि आईएसआई एजेंसियों का ध्यान भटकाने के लिए झूठी चेतावनियां भी फैला सकती है। कई इंटरसेप्ट्स में दिल्ली या कश्मीर में बड़े हमले की योजना का जिक्र है, लेकिन कई बार ऐसी जानकारियां ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा होती हैं। वास्तविक हमला कहीं और भी हो सकता है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पंजाब, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली पर विशेष नजर रखे हुए हैं। इन क्षेत्रों में सख्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण हमला करना आसान नहीं होगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए एजेंसियां कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। 















 

राष्ट्रपति मुर्मु ने वंदे मातरम् के अपमान को अपराध बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दी

11-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 कानून बन गया है।
लोकसभा में 30 जुलाई 2026 को यह विधेयक पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्राप्त है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम् गाया जाएगा। इससे पहले, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे गायन में शामिल किसी सभा में व्यवधान डालना प्रतिबंधित था।
इन अपराधों के लिए 3 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। वहीं, दूसरी ओर उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल की सजा का प्रावधान था। हालांकि, पुराने कानून में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को इसी तरह का कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। 




















 

स्वतंत्रता दिवस समारोह से पूर्व कश्मीर घाटी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

11-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) कश्मीर घाटी में स्वतंत्रता दिवस समारोहों के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए बहुस्तरीय मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। घाटी के पुलिस प्रमुख वी के बिरदी ने मंगलवार को यहां यह जानकारी दी।
यहां ‘बलिदान स्तंभ’ पर तैयारियों का जायजा लेने के बाद कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) बिरदी ने पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा के सभी इंतजाम कर लिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर पुलिस न सिर्फ श्रीनगर में, बल्कि घाटी के विभिन्न जिलों में भी हमेशा मज़बूत सुरक्षा प्रबंध बनाये रखती है। न सिर्फ खास आयोजन स्थलों पर , बल्कि शहर के आस-पास के इलाकों में भी कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की गई है।’’
वहीं, अनंतनाग और पुलवामा में हाल में हुए हमलों की जांच के बारे में पूछे जाने पर आईजीपी ने कहा, ‘‘जांच चल रही है, इसलिए अभी इस बारे में कुछ बताना सही नहीं होगा। जब भी हमारे पास आपके साथ साझा करने के लिए कोई स्पष्ट जानकारी या ब्योरा होगा, तो हम सही समय पर उसे आपके साथ साझा करेंगे।’’
उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता दिवस समारोहों में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की। आईजीपी ने कहा, ‘‘ यह एक सार्वजनिक कार्यक्रम है। इसमें पुलिस केवल सहायक या आयोजक की भूमिका निभाती है। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में भाग लें और इन्हें सफल बनाएं।’’
उन्होंने घाटी के सभी जिलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह और अन्य कार्यक्रमों के लिए सुरक्षा एवं अन्य इंतजामों का जायज़ा लेने के लिए यहां एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक, अतिरिक्त आयुक्त (एसबी श्रीनगर) और संबद्ध सुरक्षा एजेंसियों के अन्य अधिकारी शामिल हुए।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बिरदी को सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में बताया। जिला पुलिस प्रमुखों ने भी स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए अपने-अपने ज़िलों में की जा रही तैयारियों और सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में उन्हें जानकारी दी। बैठक के दौरान पुलिस महानिरीक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खास तौर पर संवेदनशील और जोखिम वाले इलाकों में नियंत्रण और गश्त बढ़ाएं।
उन्होंने श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए सुरक्षा इंतज़ामों का भी जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी तैयारियां समय से पहले पूरी कर लें। पुलिस महानिरीक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संवेदनशील जगहों और शहर में आने-जाने के रास्तों एवं सुरक्षा चौकियों को और मज़बूत करें। सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के तहत, पुलिस ने लाल चौक और शहर के अन्य इलाकों में अचानक चेकिंग और तलाशी ली।
























 

विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा में केरल का नाम बदलने वाला बिल पास, अब ‘केरलम’ नाम से जाना जाएगा

11-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) लोकसभा में विपक्ष के सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच आज मंगलवार को ‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ को ध्वनि मत से पास कर दिया गया। इस बिल में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में यह बिल पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि, हंगामा जारी रहा। नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने वाले बिल पर चर्चा न करने के लिए विपक्ष की आलोचना की।
रिजिजू ने कहा, “यह दुखद है कि केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इस बिल पर नहीं बोलेंगे।” जब हंगामा नहीं थमा, तो बिना चर्चा के ही ध्वनि मत से बिल पास कर दिया गया। इससे पहले इस साल फरवरी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्‍ताव में कहा गया,”मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम ‘केरलम’ है।”
पास प्रस्‍ताव में कहा गया था,”1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया था। 1 नवंबर को ‘केरल पिरवी दिवस’ भी मनाया जाता है। देश की आजादी की लड़ाई के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए ‘संयुक्त केरल’ के गठन की जोरदार मांग रही है। हालांकि, संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। केरल विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से अपील करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए तत्काल कदम उठाए।”
इसके बाद, केरल सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
 


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