ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म: समाधान आधारित शासन की पहचान बनी मोदी सरकार

29-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) संसद का बजट सत्र गुरुवार से शुरू हो गया है। यह सत्र कई मायनों में खास रहने वाला है। इन सब के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में पत्रकारों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ को सरकार की नीति बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2026 के प्रारंभ में ही राष्ट्रपति ने संसद के सदस्यों के सामने जो अपेक्षाएं रखी हैं, वे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी सांसदों ने उन अपेक्षाओं को गंभीरता से लिया होगा और उसी भावना से आगामी कार्यवाही में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कई मार्गदर्शन वाली बातें हम सभी के सामने रखी थीं। सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति ने सांसदों से अपेक्षाएं व्यक्त की हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी सांसदों ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया होगा। यह सत्र अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण सत्र होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मविश्वास भरा भारत आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है और आकर्षण का केंद्र भी बना है। भारत और यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता दिखाता है कि आने वाले वक्त में भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत के उत्पादक इस अवसर का इस्तेमाल अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। मैं सभी तरह के प्रोड्यूसर्स से अपील करूंगा कि अब जब भारत-यूरोपियन यूनियन का मार्केट खुल गया है तो एक बहुत बड़ा मार्केट उपलब्ध है और हमारा सामान वहां कॉम्पिटिटिव कीमतों पर पहुंच सकता है। उन्हें सिर्फ हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि हमें गुणवत्ता पर बल देना है। आज बाजार खुल गया है, तो हमें उत्तम से उत्तम गुणवत्ता वाला सामान लेकर बाजार में जाना है। 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता हमारे देश के मछुआरों, किसानों, युवाओं और जो लोग सर्विस सेक्टर में जाने के लिए उत्सुक हैं, उनके लिए बड़े अवसर लेकर आ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश का ध्यान बजट की तरफ होना स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की पहचान रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म रही है। हमने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर तेजी से शुरुआत की है। मैं इस रिफॉर्म एक्सप्रेस को गति देने में उनके सकारात्मक योगदान के लिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं। नतीजतन, ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ गति पकड़ रही है।
उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है, आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान का रोना रोने की नहीं है। आज भूमिका समाधान ढूंढने और उन्हें जमीन पर उतारने की है। उन्होंने आगे कहा कि कोई हमारी कितनी भी आलोचना करे, लेकिन एक बात हर कोई कहता है कि सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजना को फाइल तक नहीं, लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। इसी परंपरा को हम रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्सट जेनरेशन के रिफॉर्म में आगे बढ़ाने वाले हैं।
 

बजट सत्र से पहले पीएम मोदी ने किया संबोधित, कहा- विकसित भारत 2047 की ओर नई गति का संकेत

29-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि संसद का बजट सत्र विकसित भारत 2047 के संकल्प को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और केंद्र ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और लंबित मुद्दों के लिए लंबे समय के समाधान की ओर बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर प्रगति के साथ सत्र की शुरुआत एक “महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत” की भावना को दर्शाती है।
दरअसल, बजट सत्र की शुरुआत में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जिक्र किया और कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और उनकी आकांक्षाओं को दर्शाता है। उन्होंने राष्ट्र प्रमुख के तौर पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए बहुत ही सरल शब्दों में सांसदों से अपनी उम्मीदें भी व्यक्त कीं। मुझे विश्वास है कि सभी सांसद इन्हें गंभीरता से लेंगे।
यह बताते हुए कि 21वीं सदी का एक-चौथाई हिस्सा पहले ही बीत चुका है, पीएम मोदी ने कहा कि देश अब विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए एक महत्वपूर्ण 25 साल की यात्रा पर निकल पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह अवधि भारत की भविष्य की दिशा और वैश्विक व्यवस्था में उसकी भूमिका को परिभाषित करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह देश की पहली वित्त मंत्री हैं जिन्होंने लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश किया है। यह अपने आप में भारत के संसदीय इतिहास में एक गौरवशाली क्षण के रूप में दर्ज हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की इस तिमाही में, भारत आशा की किरण और दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर वैश्विक ध्यान देश की आर्थिक और लोकतांत्रिक ताकत में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि इस तिमाही की शुरुआत में, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता इस बात की झलक देता है कि भारत और उसके युवाओं के लिए भविष्य कितना उज्ज्वल है। यह महत्वाकांक्षी भारत, आत्मविश्वासी युवाओं और आत्मनिर्भर भारत के लिए मुक्त व्यापार है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारतीय निर्माता इस समझौते से मिले अवसर का लाभ उठाकर विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति का विस्तार और मजबूत करेंगे। उन्होंने बाजारों के और खुलने के साथ गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार के कामकाज के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां देश का ध्यान स्वाभाविक रूप से बजट पर है, वहीं सरकार का मूल मंत्र “सुधार, प्रदर्शन और बदलाव” बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने तेजी से ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ में सवार हो गए हैं। मैं इस ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को तेज करने में उनके रचनात्मक योगदान के लिए सभी सांसदों को धन्यवाद देता हूं। नतीजतन, रिफॉर्म एक्सप्रेस अब गति पकड़ रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार लंबे समय से अटके मुद्दों से हटकर लंबे समय के समाधान लागू करने की दिशा में बढ़ रही है और ऐसे समाधान अनुमान लगाने की क्षमता लाते हैं और अंतरराष्ट्रीय विश्वास को मज़बूत करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया हर फैसला प्रगति और विकास के लिए है, साथ ही यह इंसान-केंद्रित भी है। उन्होंने आगे कहा कि हम टेक्नोलॉजी अपनाएंगे, उसे समझेंगे और उसकी क्षमता का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन हम इंसान-केंद्रित दृष्टिकोण से समझौता नहीं करेंगे। संवैधानिक मूल्यों के महत्व को पहचानते हुए, हम टेक्नोलॉजी के सोच-समझकर इंटीग्रेशन के साथ आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना और अलग-अलग विचार स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह बात बड़े पैमाने पर मानी जाती है कि सरकार ने आखिरी छोर तक डिलीवरी को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ फाइलों के आगे बढ़ने की बात नहीं है, बल्कि लोगों की ज़िंदगी तक पहुंचने की बात है। यह परंपरा जारी रहेगी क्योंकि हम रिफॉर्म एक्सप्रेस के ज़रिए अगली पीढ़ी के सुधारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत की वैश्विक प्रासंगिकता पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत का लोकतंत्र और जनसंख्या दुनिया को बड़ी उम्मीद देते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में हमारे पास वैश्विक समुदाय को अपनी क्षमताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के ज़रिए लिए गए फैसलों की विश्वसनीयता बताने का मौका है। दुनिया इसे पहचानती है और इसका स्वागत करती है।
 

बीटिंग रिट्रीट में आज देश की समृद्ध सैन्य विरासत का प्रदर्शन होगाः पीएम मोदी

29-Jan-2026

 नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज गुरुवार शाम आयोजित होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह गणतंत्र दिवस समारोहों के समापन का प्रतीक होगा। यह भव्य आयोजन भारत की समृद्ध सैन्य विरासत, परंपरा और अनुशासन की शक्ति को प्रदर्शित करेगा।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को एक्स पोस्ट में देश की सुरक्षा में समर्पित सशस्त्र बलों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत अपने वीर जवानों की निष्ठा और बलिदान को सदैव नमन करता है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक मंत्र का उल्लेख करते हुए लिखा , “एको बहूनामसि मन्य ईडिता विशं विशं युद्धाय सं शिशाधि। अकृत्तरुक्त्वया युजा वयं द्युमन्तं घोषं विजयाय कृण्मसि॥”
इस मंत्र के माध्यम से उन्होंने एकता, शौर्य और विजय के संकल्प को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीटिंग रिट्रीट समारोह में सैन्य बैंड की मधुर धुनें, पारंपरिक ध्वज अवरोहण और ऐतिहासिक सैन्य परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। यह आयोजन न केवल गणतंत्र दिवस उत्सव का औपचारिक समापन करता है, बल्कि देश की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है। 
 

गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं में नेवी का मार्चिंग दल सर्वश्रेष्ठ, राज्यों में महाराष्ट्र की झांकी अव्वल

29-Jan-2026

 नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) गणतंत्र दिवस परेड 2026 में भाग लेने वाली तीनों सेनाओं, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों व अन्य सहायक बलों में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ियों का चयन कर लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार तीनों सेनाओं में भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल को सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी चुना गया है। वहीं महाराष्ट्र की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी चुना गया है।

राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों की और झांकियों के परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं। राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की शीर्ष तीन झांकियां में प्रथम स्थान पर महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र की झांकी में ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ दर्शाया गया था। दूसरे नंबर पर जम्मू एवं कश्मीर की झांकी रही। इस झांकी में ‘जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोकनृत्य’ को दिखाया गया था। तीसरे स्थान पर केरल की झांकी चुनी गई है। केरल की झांकी में ‘वॉटर मेट्रो और 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता: आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल’ की झलक थी।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इनका चयन परेड के दौरान प्रदर्शन के आकलन हेतु गठित तीन स्वतंत्र निर्णायक मंडलों द्वारा किया गया। आधिकारिक निर्णायक मंडल के अनुसार तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी भारतीय नौसेना की रही। वहीं सीएपीएफ व अन्य सहायक बलों में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी दिल्ली पुलिस की रही। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की सर्वश्रेष्ठ झांकी भी चुनी गई है। इस श्रेणी में संस्कृति मंत्रालय की झांकी अव्वल रही। इस झांकी का शीर्षक, ‘वंदे मातरम्: एक राष्ट्र की आत्म-ध्वनि’ था। इनके अतिरिक्त विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की झांकी, ‘वंदे मातरम्: 150 वर्षों का स्मरणोत्सव’ व नृत्य समूह की ‘वंदे मातरम्: भारत की शाश्वत गूंज’ को यह पुरस्कार मिला है।
गणतंत्र पर ‘पॉपुलर चॉइस’ श्रेणी भी रखी गई थी। इस के चयन प्रक्रिया की बात करें तो मायगव पोर्टल पर आयोजित ऑनलाइन मतदान के आधार पर नागरिकों की पसंद के अनुसार यह परिणाम सामने आए हैं। इसके मुताबिक तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी के लिए असम रेजिमेंट को चुना गया है। सीएपीएफ व अन्य सहायक बलों में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी के तौर पर सीआरपीएफ के दल को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला माना गया है।
जनमत के मुताबिक राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की शीर्ष तीन झांकियां भी चुनी गई हैं। इनमें सबसे अधिक गुजरात – ‘स्वदेशी–आत्मनिर्भरता–स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ को पसंद किया गया। दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश की झांकी ‘बुंदेलखंड की संस्कृति’ रही। तीसरे स्थान पर राजस्थान की झांकी ‘रेगिस्तान की स्वर्णिम छटा: बीकानेर गोल्ड आर्ट (उस्ता कला)’ को चुना गया है।
लोगों की राय यानी जनमत के आधार पर केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की सर्वश्रेष्ठ झांकी भी चुनी गई है। यहां स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की झांकी, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर भारतीय स्कूली शिक्षा’ को सबसे अधिक पसंद किया गया। इन परिणामों के साथ गणतंत्र दिवस परेड 2026 ने सांस्कृतिक विविधता, आत्मनिर्भरता, नवाचार और राष्ट्रीय एकता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।




 

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार आज, बारामती में जनसैलाब

29-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख अजित पवार का आज गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बारामती में बुधवार को विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले 66 वर्षीय अजित पवार का पार्थिव शरीर बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में सुबह 11 बजे पंचतत्व में विलीन हो जाएगा। 
महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए बारामती में आम लोगों और कार्यकर्ताओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अजित पवार की अंतिम यात्रा विद्या प्रतिष्ठान परिसर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए विद्या प्रतिष्ठान मैदान में अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचेगी। इस समय विद्या प्रतिष्ठान मैदान में उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। 
उनका पार्थिव शरीर पहले विद्या प्रतिष्ठान और फिर उनके पैतृक गांव कोटेवाड़ी में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। अंतिम संस्कार में राज्य सरकार के सभी मंत्री शामिल होंगे। पवार परिवार के सदस्य बारामती पहुंच चुके हैं। 
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अनुसार, सभी दलों के वरिष्ठ नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे। बारामती के साथ समूचे राज्य से बड़ी संख्या में लोग और पार्टी कार्यकर्ता दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए बारामती पहुंच चुके हैं। महाराष्ट्र सामान्य प्रशासन विभाग (प्रोटोकॉल) के अनुसार, उप मुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। तीन दिन के शोक की अवधि के दौरान महाराष्ट्र की सभी इमारतों पर जहां नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, उसे आधा झुका दिया गया है। इस अवधि के दौरान कोई भी सरकारी मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।








 

कर्तव्य पथ पर फाइटर जेट्स का फ्लाई पास्ट, विमानों की गर्जना ने किया लोगों को रोमांचित

26-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना का फ्लाई पास्ट इस बार बेहद महत्वपूर्ण रहा। वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलटों ने कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाया। यह फॉर्मेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को समर्पित था। फ्लाई-पास्ट गणतंत्र दिवस परेड के सबसे ज्यादा इंतजार वाले कार्यक्रमों में से एक है। इस वर्ष फ्लाई-पास्ट में कुल 29 विमान शामिल हुए। फ्लाई-पास्ट करने वाले विमानों में 16 फाइटर विमान भी शामिल थे। वहीं वायुसेना के चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलीकॉप्टर भी इस शानदार फ्लाई-पास्ट में शामिल हुए।
गणतंत्र दिवस समारोह में किए गए फ्लाई-पास्ट में वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जगुआर विमान शामिल रहे। साथ ही रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण सी-130 और आधुनिक सी-295 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान भी इसका हिस्सा बने। आसमान में इन विमानों की गर्जना ने यहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। वायुसेना के विमानों ने फ्लाई-पास्ट के दौरान अर्जन फॉर्मेशन, वज्रांग फॉर्मेशन, वरुण फॉर्मेशन और विजय फॉर्मेशन भी बनाया।
वहीं ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग 29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर विमान नजर आए।
बताते चलें कि भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बीते साल पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने वाले ये भारतीय लड़ाकू विमान अब इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर उड़ान भरते हुए दिखाई दिए।
गौरतलब हो, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत इन भारतीय लड़ाकू विमानों ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फ्लाई पास्ट में भारतीय वायुसेना के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में नजर आए। ये हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज, आर्मी, नेवी और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहराते हुए नजर आए। अपने इस बेहतरीन प्रदर्शन के जरिए भारतीय वायुसेना ने गणतंत्र दिवस समारोह में अनुशासन, नेतृत्व और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लेकर कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड तक, वायुसेना के अधिकारी एवं बैंड महत्वपूर्ण भूमिकाओं में उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि समारोह में स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कन्यार गार्ड ऑफ ऑनर के कमांडर रहे। मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने कर्तव्य पथ पर ध्वजारोहण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
गणतंत्र दिवस 2026 ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली 150 वर्षों को समर्पित रहा। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की स्पष्ट व प्रभावी छाप दिखाई दी। वायुसेना के बैंड ने इससे जुड़ी धुनें बजाईं। परेड में विभिन्न सर्विसिस की कुल 18 मार्चिंग टुकड़ियां और 13 बैंड शामिल हुईं। परेड के तुरंत बाद वायुसेना के राफेल, सुखोई-30, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, एमआई-17 जैसे विमान व हेलीकॉप्टर फ्लाईपास्ट करते हुए दिखाई दिए। गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं के स्वदेशी उपकरण एवं हथियार भी प्रदर्शित किए गए। 





 

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनीं उर्सुला वॉन डेर लेयेन, बोलीं- यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान

26-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 77वें गणतंत्र दिवस के आयोजन समारोह में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उर्सुला ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट बनना जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर, खुशहाल और सुरक्षित बनाता है और हम सभी को फायदा होता है।”
बता दें, ईयू के दोनों बड़े नेता भारत पहुंचे हुए हैं, जहां 27 जनवरी को 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसकी मेजबानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस मौके पर दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते का ऐलान भी हो सकता है।
यूरोपीय देश परंपरागत तौर पर अमेरिका के करीब रहे हैं। ईयू-यूएस मिलकर वैश्विक आर्थिक उत्पादन के 40 फीसदी से ज्यादा और विश्व व्यापार के लगभग एक तिहाई हिस्से के साझेदार हैं। हालांकि, अमेरिकी सत्ता में राष्ट्रपति ट्रंप की वापसी के बाद से ‘टैरिफ बम’ ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है। आज यूरोप यूएस से इतर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के लिए उत्साहित है और वह एक स्थिर साझेदार के रूप में भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रहा है।
दिल्ली में रविवार को दोनों ईयू नेताओं को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके अलावा सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने से पहले उर्सुला और कोस्टा ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, “ईयू काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और ईयू कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। 77वें रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के लिए उन्हें चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है। मुझे यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आने वाली बातचीत भारत-यूरोपियन यूनियन के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी।”
बता दें, इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत-ईयू: भरोसे और भरोसे की साझेदारी। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा का भारत के राजकीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचने पर दिल से स्वागत है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया।
 








 

अटल पेंशन योजना को विस्तार, सिडबी को इक्विटी मदद से एमएसएमई को मिलेगी मजबूती

22-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई सेक्टर से जुड़े दो अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी, वहीं स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने का भी निर्णय लिया।
कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने के साथ इसके प्रचार, जागरूकता और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग सपोर्ट बढ़ाने को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा योजना को दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए जरूरी गैप फंडिंग जारी रखने का भी फैसला किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कम आय वाले वर्गों तक योजना की पहुंच और बढ़ेगी, जिससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत होगा।
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 से 5,000 रुपए तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है, जो व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है।
19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है। सरकार के अनुसार, योजना का विस्तार ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी मजबूती देगा और पेंशन आधारित समाज की दिशा में मददगार होगा।
कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी—वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपए, जबकि 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपए।
इस इक्विटी निवेश से सिडबी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वह एमएसएमई सेक्टर को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा सकेगा। सरकार के मुताबिक, इससे सिडबी की मदद से वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है।
सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा और इससे लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा हो सकते हैं, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई करीब चार लोगों को रोजगार देता है।
सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में सिडबी की जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ने वाली हैं, क्योंकि बैंक डिजिटल, बिना गारंटी वाले कर्ज, स्टार्टअप्स को वेंचर डेट और एमएसएमई को अधिक फाइनेंस उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार जरूरी है, ताकि सिडबी की कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेश्यो (सीआरएआर) और क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित बनी रहे।
अटल पेंशन योजना के विस्तार से करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, जबकि सिडबी को दी गई इक्विटी सहायता से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज, रोजगार और विकास की नई गति मिलेगी। सरकार के अनुसार, ये दोनों फैसले देश की अर्थव्यवस्था को समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। 
 

ड्राफ्ट एनईपी 2026 सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी, 2047 तक सस्ती बिजली का लक्ष्य

22-Jan-2026
नई दिल्ली।( शोर संदेश )  सरकार ने बिजली क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (एनईपी) 2026’ को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण के अनुकूल और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था प्रदान करना है। सरकार ने कहा कि इस मसौदे पर सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
यह ड्राफ्ट नीति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके तहत सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटे) और 2047 तक 4,000 यूनिट से ज्यादा करना है।
ड्राफ्ट एनईपी 2026 भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिसमें कहा गया है कि 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम किया जाएगा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इसके लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी बताया गया है।
विद्युत मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह नई नीति 2005 में बनी मौजूदा एनईपी की जगह लेगी। ‘ड्राफ्ट नीति 2026’ के मुताबिक, बिजली की जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।
नीति में यह भी कहा गया है कि बिजली दरों यानी टैरिफ को एक उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर साल अपने आप उसमें संशोधन हो सके, और यह तब लागू होगा जब राज्य आयोग द्वारा कोई शुल्क आदेश पारित नहीं किया जाता है।
इसके अलावा सुझाव दिया गया है कि फिक्स्ड लागत की भरपाई चरणबद्ध तरीके से डिमांड चार्ज के माध्यम से की जाए, ताकि विभिन्न उपभोक्ताओं पर सब्सिडी का बोझ संतुलित रूप से कम किया जा सके।ड्राफ्ट एनईपी 2026 में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट देने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।
नीति में यह भी सुझाव दिया गया है कि जिन उपभोक्ताओं का बिजली लोड 1 मेगावाट या उससे ज्यादा है, उनके लिए कुछ मामलों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट दी जा सकती है। ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो। नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित तरीकों और कैप्टिव पावर प्लांट्स के जरिए नई क्षमता जोड़ने का सुझाव दिया गया है। छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज की सुविधा डिस्कॉम के जरिए देने की बात कही गई है, जिससे लागत कम होगी।
नीति में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ता डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (डीआरई) से बची हुई बिजली का व्यापार कर सकेंगे और 2030 तक रिन्यूएबल और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा।शांति अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार, इसमें एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर, छोटे परमाणु रिएक्टर और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की भी सिफारिश की गई है।
गौरतलब है कि पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति फरवरी 2005 में लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य बिजली की कमी, सीमित पहुंच और कमजोर ढांचे जैसी समस्याओं को दूर करना था। इसके बाद से भारत के विद्युत क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि ड्राफ्ट एनईपी 2026 एक ऐसा पूरा खाका है, जिससे देश के लोगों को सस्ती, भरोसेमंद और अच्छी गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी।

चरैवेति चरैवेति” के मंत्र के साथ पीएम मोदी का संदेश

22-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारतीय दर्शन और कर्मयोग की भावना को रेखांकित करते हुए प्राचीन संस्कृत श्लोक “चरैवेति चरैवेति” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, परिश्रम और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा ही व्यक्ति और राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति। सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥” प्रधानमंत्री ने इसका भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो निरंतर चलता रहता है, वही सफलता का मधु प्राप्त करता है। सूर्य के समान कर्मशील व्यक्ति न तो थकता है और न ही समय से पराजित होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के समय में यह विचार विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और विकास के नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे चुनौतियों से घबराने के बजाय निरंतर सीखते हुए और परिश्रम करते हुए ।



kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account