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भारत की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों की प्रमाणिक कहानियां दिखाने लिए सरकार और नेटफ्लिक्स के बीच समझौता

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को अतुल्य भारत पोर्टल पर ‘ऐज सीन ऑन नेटफ्लिक्स’ सेक्शन का शुभारंभ किया। इसे पर्यटन मंत्रालय और नेटफ्लिक्स इंडिया के बीच चल रहे सहयोग के तहत विकसित किया गया है। इस पहल का मकसद दुनिया भर के दर्शकों को नेटफ्लिक्स इंडिया की फिल्मों और सीरीज में दिखाई गई वास्तविक स्थलों, सांस्कृतिक परंपराओं और असल अनुभवों को जानने का मौका देना है, जिससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सके।
भारत में नेटफ्लिक्स के दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में स्थित नैशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इसका शुभारंभ किया गया। नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारंडोस ने केंद्रीय मंत्री के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में कहानी कहने (स्टोरीटेलिंग) की अहम भूमिका पर बातचीत की।
इस अवसर पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की कहानियों ने हजारों वर्षों से दुनिया को प्रेरित किया है और प्रौद्योगिकी अब इन कहानियों को दुनिया के हर कोने तक ले जाने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था भारत की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए रोजगार के अवसर सृजित करके विकास के एक शक्तिशाली वाहक के रूप में उभर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने ऐसी साझेदारियों का स्वागत किया जो भारतीय प्रतिभा को सशक्त बनाती हैं, देश की विविधता का उत्सव मनाती हैं और उसकी सभ्यतागत विरासत को असल रूप में दुनिया के सामने लाती हैं। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति केवल भारत की विरासत नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है और हर ऐतिहासिक महत्व का स्थान, त्योहार, भाषा और लोक-परंपरा में ऐसी कहानियां छिपी हैं जो दुनिया भर के लोगों तक पहुंचने लायक हैं।
कार्यक्रम में नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सारंडोस ने कहा कि एक भारत नहीं बल्कि कई भारत हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अनूठी कहानियां और परंपराएं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कहानियों ने दुनिया भर के दर्शकों को प्रभावित किया है और लोगों को भारत की जगहों और संस्कृतियों का खुद अनुभव करने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने भारत की कहानियों और स्थलों को वैश्विक दर्शकों तक ले जाने के लिए संस्कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के साथ अपनी साझेदारी जारी रखने के लिए नेटफ्लिक्स की प्रतिबद्धता जताई। वहीं, केंद्रीय मंत्री और सारंडोस ने देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था (क्रिएटिव इकॉनमी) को मजबूत करते हुए और भारत के वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाते हुए भारत की विविध संस्कृतियों, परिवेश और परंपराओं पर आधारित सच्ची कहानियों को बढ़ावा देने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।


 

संसद में हंगामा, सभापति बोले- वेल में आने और प्लेकार्ड दिखाने पर होगी कार्रवाई

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)राज्यसभा व लोकसभा दोनों ही सदनों में बुधवार को भी हंगामा जारी रहा। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ ही देर बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
वहीं, राज्यसभा में भारी हंगामे व नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। लेकिन कुछ ही देर बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
12 बजे राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा, ”मैं सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे सहयोग करें। मेरी आप सभी से दो विनम्र प्रार्थनाएं हैं। पहली, सदन के वेल में कभी न आएं। दूसरी, तख्तियां (प्लेकार्ड) कभी न दिखाएं। इन दोनों बातों का सभी सदस्यों को पालन करना होगा। यदि कोई सदस्य इन दोनों निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो मैं उसकी बात नहीं सुनूंगा। मैं उसे बोलने का अवसर नहीं दे पाऊंगा और मुझे उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ेगा। इसलिए इन दोनों बातों से परहेज करें। यह मेरा आप सभी से अनुरोध है।”
हालांकि सभापति के इस निर्देश के बावजूद सदन में लगातार नारेबाजी होती रही। राज्यसभा में दिन की शुरुआती कार्यवाही शुरू होने पर भी सदन में गतिरोध दिखाई दिया। 11 बजे सबसे पहले राज्यसभा की कार्यवाही की शुरुआत में विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित आवश्यक विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। इसके उपरांत शून्यकाल की कार्यवाही प्रारंभ हुई। अभी कुछ ही सांसदों ने अपने वक्तव्य शून्यकाल के दौरान सदन में रखे थे, लेकिन जल्द ही हंगामा बढ़ गया और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी।
विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर आगे गए और नारेबाजी करने लगे। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को अपनी सीटों पर वापस जाने के लिए कहा, लेकिन नारेबाजी जारी रही। कई विपक्षी सांसद हाथों में नारे लिखे हुए प्लेकार्ड लेकर सदन में आए। इस पर सभापति ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सही नहीं है और नियम के खिलाफ है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इससे सदन में शून्यकाल की कार्यवाही बाधित हुई। शून्यकाल में केवल कुछ ही सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। यही स्थिति प्रश्नकाल में भी बनी रही। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में संसद के दोनों सदन, लोकसभा और राज्यसभा में यही स्थिति बनी हुई है। सदन में शून्यकाल के साथ-साथ प्रश्नकाल की कार्यवाही भी लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रही है।
 

370 हटने के 7 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा- श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नया अध्याय

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा कि इन वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रगति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएम मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “सात साल पहले इसी दिन (5 अगस्त को) अनुच्छेद 370 और 35(A) इतिहास बन गए, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नया अध्याय शुरू हुआ। तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता व खेल जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़े हैं। चाहे महिलाएं हों या हाशिए पर रहने वाले समुदाय, जिन्हें दशकों तक उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया था, उन्हें भारत के संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन के कारण सशक्त बनाया गया है।”
पीएम मोदी ने कहा कि इस साल 5 अगस्त का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वर्ष हमारा देश श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है। राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है। दशकों पहले उन्होंने जो सपना देखा था, वह 5 अगस्त 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार हुआ। सप्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक को बड़े सपने देखने, उन्हें हासिल करने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने का अवसर मिले।”
बता दें कि 5 अगस्त 2019 को संसद ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने को मंजूरी दी थी। नोटिफिकेशन जारी करते ही 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश में पुनगठित कर दिया गया। तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘ऐतिहासिक भूल को ठीक करने वाला ऐतिहासिक कदम’ कहा था। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए। जम्मू-कश्मीर के 334 कानूनों में से 164 कानूनों को निरस्त किया गया, 167 कानूनों को भारतीय संविधान के अनुरूप अनुकूलित किया गया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने असम में बाढ़ प्रभावित इलाकों और राहत शिविरों का दौरा किया

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर प्रभावित लोगों से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए राज्य को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए किसी भी तरह के संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित बिहुबोर और नेपाली खुती क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों से बातचीत की और जमीनी हालात का जायजा लिया।
प्रभावित लोगों को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार असम के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा, “भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मैं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम के सभी लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि राहत कार्यों के लिए धन या संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। केंद्र सरकार राज्य को पूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।”
नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार की टीमें पहले से ही बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं, ताकि पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया में पूरी तरह सक्रिय है।
शिवसागर जिले के बिहुबोर और नेपाली खुती क्षेत्रों में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और बड़ी संख्या में लोगों का पशुधन भी नष्ट हुआ है। बाढ़ के कारण सड़कें और अन्य सार्वजनिक ढांचा भी प्रभावित हुआ, जिससे कई परिवारों को राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों से मुलाकात की तथा उनके घर, घरेलू सामान, फसल और आजीविका को हुए नुकसान की जानकारी ली। दोनों नेताओं ने अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
गौरतलब है कि असम सरकार बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत कार्यों और नुकसान के आकलन का अभियान चला रही है। राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और आजीविका के नुकसान के लिए मुआवजा एवं वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही क्षतिग्रस्त सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम भी जारी है।
केंद्र सरकार के इस आश्वासन से राज्य में चल रहे पुनर्वास कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है, ताकि बाढ़ प्रभावित हजारों परिवारों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके। 





 

फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो, मानसून पर असर कई कारकों पर निर्भर: जितेंद्र सिंह

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) के नवीनतम आकलन के अनुसार मई 2026 में विकसित अल नीनो की स्थिति जून 2026 से फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है। स्वदेशी एआई/एमएल आधारित पूर्वानुमान प्रणाली के मुताबिक इसकी संभावना 70 से 90 प्रतिशत के बीच है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अल नीनो को भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून में कम बारिश से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन यह मानसून का एकमात्र निर्धारक नहीं है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आईएनसीओआईएस ने पूर्वानुमान और अनिश्चितता के आकलन के साथ स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली वैश्विक महासागर डेटा प्रणाली के साथ मिलकर अल नीनो जैसी समुद्री-वायुमंडलीय स्थितियों की निगरानी और पूर्वानुमान में मदद कर रही है।
उन्होंने कहा कि अल नीनो के इतिहास को देखते हुए इसे देश के कुछ हिस्सों में भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की कम वर्षा से जोड़ा गया है, लेकिन मानसून कई परस्पर क्रिया करने वाले जलवायु कारकों से प्रभावित होता है। इनमें हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी), मैडेन-जूलियन दोलन (एमजेओ) और क्षेत्रीय महासागर-वायुमंडल अंतःक्रियाएं प्रमुख हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा पूर्वानुमान अल नीनो के बने रहने की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन भारतीय मानसून पर इसका अंतिम प्रभाव मानसून के दौरान विकसित होने वाली महासागर-वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। हिंद महासागर द्विध्रुव और प्रचलित पवन पैटर्न भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियों के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
उन्होंने बताया कि विकसित हो रहा अल नीनो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकता है। इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान से समुद्री लू की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे बदलाव महासागरीय मिश्रण, पोषक तत्वों की उपलब्धता और जैविक उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मछलियों के वितरण और तटीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
मंत्री ने कहा कि लहरों और ज्वार की स्थितियों में बदलाव से नौवहन, अपतटीय संचालन और अन्य तटीय गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इन संभावित जोखिमों को देखते हुए महासागरीय स्थिति की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि आईएनसीओआईएस ने तूफान, ऊंची लहरों, समुद्री जलप्रपात और तेज समुद्री धाराओं के लिए उच्च-विभेदन पूर्वानुमान मॉडल विकसित किए हैं। उन्नत डेटा एसिमिलेशन प्रणालियों के साथ एकीकृत महासागरीय ग्लाइडर, लंगरयुक्त तैरते हुए प्लैटफॉर्म, आर्गो फ्लोट, ज्वार गेज और उपग्रह प्रेक्षणों के जरिए महासागरीय अवलोकन नेटवर्क को भी विस्तार दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने तटीय समुदायों की तैयारी और आपदा-रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए हितधारक प्रशिक्षण कार्यक्रम, मॉक अभ्यास और जागरूकता अभियान चलाए हैं। चौबीसों घंटे परिचालन निगरानी, विभिन्न प्लेटफॉर्म के जरिए सलाह का प्रसार और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि दीप महासागर मिशन के तहत चालू वित्त वर्ष में समुद्री संसाधनों के मानचित्रण के लिए 145.06 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में समुद्री पर्वतों के जैव विविधता सर्वेक्षणों का विस्तार किया जा रहा है। जलतापीय उद्गम स्थलों, खनिज समृद्ध क्षेत्रों और समुद्री संसाधनों की खोज के लिए स्वायत्त जलमग्न वाहन (एयूवी) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी) भी तैनात किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सहित तटीय राज्यों के लिए आईएनसीओआईएस 10 दिन पहले तक लहरों, हवाओं, ज्वार-भाटे, समुद्री धाराओं और समुद्र की सतह के तापमान से संबंधित महासागरीय स्थिति पूर्वानुमान सेवाएं उपलब्ध कराता है। राज्य अधिकारियों को आपदा तैयारी और समुद्री सुरक्षा के लिए ऊंची लहरों, ज्वार-भाटे और तेज धाराओं से संबंधित नियमित सलाह जारी की जाती है।
केंद्र ने राज्य सरकारों के सहयोग से ज्वार-भाटा मापने वाले स्टेशन, तटीय लहर चालक बुआ और सुनामी तैयारी कार्यक्रम भी स्थापित किए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार स्वदेशी पूर्वानुमान तकनीकों, उन्नत महासागरीय अवलोकन और वैज्ञानिक निर्णय-सहायता प्रणालियों में निवेश जारी रखे हुए है, ताकि सरकारों, तटीय समुदायों, मछुआरों और अन्य हितधारकों को समय पर सटीक सलाह दी जा सके और जलवायु परिवर्तनशीलता के बीच भारत की लचीलापन क्षमता मजबूत हो। 

 

भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कंटेंट से मुक्त रखना सरकार की प्राथमिकता: एल. मुरुगन

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कंटेंट से मुक्त रखते हुए महिलाओं, बच्चों समेत सभी यूजर्स के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के जरिए डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि आईटी नियमावली, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समेत सभी मध्यस्थों की जिम्मेदारी है कि उनके कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाला या लिंग के आधार पर अपमानजनक एवं उत्पीड़नकारी कंटेंट होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित, प्रसारित या साझा न करें।
उन्होंने कहा कि आईटी नियमावली, 2021 के कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने पर मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत थर्ड पार्टी सूचना के लिए मिली छूट खो सकते हैं। इसके अलावा वे लागू कानूनों के तहत परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
राज्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को सरकार ने कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (एसजीआई) से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए आईटी नियमों में संशोधन कर नियामक ढांचे को मजबूत किया। इसमें डीपफेक और एआई से तैयार कंटेंट भी शामिल है।
संशोधित नियमों के तहत मध्यस्थों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को अवैध एआई से तैयार कंटेंट के निर्माण और प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे। इसमें अश्लील, भ्रामक, किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण करने वाला या बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट शामिल है। प्लेटफॉर्मों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के तहत आने वाले संबंधित अपराधों की सूचना सक्षम अधिकारियों को देनी होगी।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शुरू किया गया है। इसके जरिए आम नागरिक सभी तरह के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की कुछ श्रेणियों में गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि एनसीआरपी के ‘रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट’ मॉड्यूल के जरिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सऐप नंबर या टेलीग्राम हैंडल, फोन नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर या नंबर, डीपफेक और सोशल मीडिया यूआरएल की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे नागरिकों को संदिग्ध डिजिटल संस्थाओं और डीपफेक से संबंधित गतिविधियों को चिह्नित करने में मदद मिलती है।
राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम’ (सीसीपीडब्ल्यूसी) योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इसका इस्तेमाल साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने, जूनियर साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों तथा न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच और फोरेंसिक समेत विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि गृह मंत्रालय के आई4सी ने देशभर में दो लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस के छात्रों को साइबर स्वच्छता का प्रशिक्षण दिया है। इसका उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना है।
आई 4 सी ने छात्रों को साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में जागरूक करने के लिए ‘किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक’ जारी की है। महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ भी जारी की गई है।
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने और आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता तथा साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता’ (आईएसईए) परियोजना लागू कर रही है।
डॉ. एल. मुरुगन ने यह जानकारी आज लोकसभा में श्री प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का पूर्वोत्तर दौरा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की करेंगे समीक्षा

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 4 से 6 अगस्त तक पूर्वोत्तर भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लेंगे।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा 4 अगस्त को नई दिल्ली से असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेंगे और रात वहीं प्रवास करेंगे। दौरे के दूसरे दिन, 5 अगस्त को वे असम के चराइदेव जिले का दौरा करेंगे, जो हाल की बाढ़ के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां वे स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत कार्यों और प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे नागालैंड के मोन जिले के लिए रवाना होंगे, जहां विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लेंगे।
नागालैंड के दौरे के बाद नड्डा उसी दिन डिब्रूगढ़ लौटेंगे। यहां वे असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा ढांचे की बहाली, राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाओं तथा संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्थानीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे और रात डिब्रूगढ़ में ही ठहरेंगे।
दौरे के अंतिम दिन 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्री अरुणाचल प्रदेश के केयी पैन्योर जिले के याज़ाली जाएंगे। वहां वे स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करेंगे, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा करेंगे तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाने और आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा मुख्य रूप से बाढ़ और भूस्खलन के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का आकलन करने पर केंद्रित है। हाल की प्राकृतिक आपदाओं से कई क्षेत्रों में चिकित्सा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि जलजनित और वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी प्रणाली, मेडिकल राहत कार्यों, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता की समीक्षा करेंगे।
हालिया आपदा के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के रूप में नड्डा का यह दौरा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा प्रभावित लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान उनकी समीक्षा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना है।
 

भारत में बारिश की कमी घटकर हुई 12%, अगस्त में अल-नीनो का खतरा

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) डोलैट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हालांकि जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ने के साथ-साथ, निकट भविष्य में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अल नीनो का जोखिम अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह बारिश के दायरे में सुधार हुआ है, लेकिन बारिश के वितरण में श्रेणियों के हिसाब से बदलाव देखने को मिला।
कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक सप्ताह पहले के 40 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया, जबकि बहुत कम बारिश वाले इलाकों की संख्या शून्य रही। वहीं, अधिक बारिश वाले इलाकों का हिस्सा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सामान्य बारिश वाले इलाकों का हिस्सा 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत रह गया। डोलैट कैपिटल के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अधिक बारिश वाले इलाकों की वजह से हुआ, न कि कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य स्थिति में आने से। इससे स्पष्ट होता है कि देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, न कि बारिश के वितरण में व्यापक सुधार हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है, “आगे देखें तो, आईएमडी का निकट-अवधि का अनुमान मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत देता है, हालांकि मजबूत होते अल-नीनो और लगभग न्यूट्रल आईओडी के कारण अगस्त में भी मौसमी जोखिम बना हुआ है।”
इस बीच सप्ताह के दौरान खरीफ की बुवाई में और प्रगति हुई। 31 जुलाई तक कुल बुवाई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 920.7 लाख हेक्टेयर था। पिछले साल की तुलना में बुवाई के अंतर में कमी आई, हालांकि फसल-वार रुझान मिले-जुले रहे। तिलहन के मामले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीजन के अधिकांश समय पीछे रहने के बाद अब यह पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त की स्थिति में आ गया है। बुवाई 172.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 171.1 लाख हेक्टेयर थी। 
इस तरह, पिछले सप्ताह 3.4 लाख हेक्टेयर की कमी से स्थिति बदलकर 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त में बदल गई।मोटे अनाज ने भी अपने अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेजी के संकेत मिलने के बावजूद धान की बुआई पिछले साल की रफ्तार से थोड़ी और पिछड़ गई। दालों की बुआई में मामूली सुधार हुआ, जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ।





 

 


महाराष्ट्र के शिक्षाविद और पूर्व गवर्नर डी.वाई. पाटिल का निधन, पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर तथा डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक डॉ. यशवंतराव (डीवाई) पाटिल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। पाटिल का मंगलवार को कोल्हापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 90 साल के थे। नेताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और जनसेवा के क्षेत्रों में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और उनके निधन को देश के लिए बड़ी क्षति बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर डॉ. पाटिल को उनके परोपकारी कार्यों और वंचितों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए याद किया। उन्होंने लिखा, “श्री डीवाई पाटिल जी परोपकार और विशेष रूप से शिक्षा के माध्यम से समाज की सेवा करने में सबसे आगे थे। उन्होंने हमेशा दूसरों, खासकर गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया। उनके निधन से दुखी हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं। ओम शांति।”
https://x.com/narendramodi/status/2084567837902021034?s=20
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जाने-माने शिक्षाविद और बिहार व पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर डॉ. डीवाई पाटिल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके जीवन भर के समर्पण और समाज सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। राजनाथ सिंह ने कहा, “जाने-माने शिक्षाविद और बिहार व पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर डॉ. डीवाई पाटिल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा को आगे बढ़ाने और अटूट प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करने में समर्पित कर दिया। उनकी शानदार जनसेवा और राष्ट्र-निर्माण में उनके स्थायी योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, प्रियजनों और चाहने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!”
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने शासन और राष्ट्र-निर्माण में डॉ. पाटिल के शानदार करियर को याद करते हुए एक्स पर लिखा, “बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर और डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक डॉ. डीवाई पाटिल के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। जनसेवा के प्रति उनका लंबा और शानदार समर्पण, साथ ही शिक्षा, शासन और राष्ट्र-निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने डॉ. पाटिल के साधारण शुरुआत से ऊंचे संवैधानिक पदों तक पहुंचने के सफर को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर और डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक पद्म डॉ. डीवाई पाटिल जी के निधन की खबर बेहद दुखद है। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विभिन्न संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने तक का उनका सफर, और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका बेमिसाल योगदान हमेशा याद रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार व उनके शुभचिंतकों को इस दुख को सहने की शक्ति दें। ओम शांति।”





 

भारत में जुलाई में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग मजबूत रही, यात्री वाहनों की बिक्री 34 प्रतिशत बढ़ी

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र जुलाई में अच्छी घरेलू मांग के चलते मजबूत रहा है। इस दौरान यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 34 प्रतिशत और रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़ी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। एचएसबीसी इंडिया की ओर से जारी किए गए विश्लेषण में कहा गया कि भारत में यात्री वाहनों के साथ दोपहिया और ट्रैक्टर्स की मांग ऐसे समय पर मजबूती रही है, जब दुनिया में वैश्विक अस्थिरता के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पैसेंजर गाड़ियों की मांग में यूटिलिटी गाड़ियों की जबरदस्त बिक्री का अहम योगदान रहा, जबकि ग्राहकों की लगातार दिलचस्पी और बेहतर सप्लाई चेन से भी कार बनाने वाली कंपनियों को फायदा हुआ। टू-व्हीलर सेगमेंट में, सालाना आधार पर होलसेल वॉल्यूम में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुल रिटेल बिक्री 34 प्रतिशत बढ़ी।
इसी तरह, कमर्शियल गाड़ियों (सीवी) की मांग को ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा से पहले की गई रिप्लेसमेंट खरीदारी से सहारा मिला। बड़ी कंपनियों की कुल सीवी (कमर्शियल व्हीकल) बिक्री में साल-दर-साल लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कमोडिटी की ऊंची कीमतें मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल के लिए कमोडिटी कॉस्ट इंडेक्स में लगभग 10-12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कमर्शियल व्हीकल और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के इंडेक्स में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में कई वाहन निर्माताओं द्वारा कम मुनाफा दर्ज किए जाने के बाद सितंबर तिमाही में भी मार्जिन पर कुछ दबाव बने रहने की उम्मीद है।
इस बीच, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का चलन मजबूत बना रहा है। जुलाई में कुल टू-व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत रही, जबकि ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर की पैठ 8 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालांकि हाल के हफ्तों में बारिश में सुधार हुआ है, लेकिन जलाशयों का जलस्तर अभी भी लंबे समय के औसत से नीचे बना हुआ है। साथ ही, 2026 में अल-नीनो की घटना की संभावना आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग और ट्रैक्टर की बिक्री के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकती है।












 


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