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पीएम मोदी आज से पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर, 7 अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे

18-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी शनिवार से दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल में रहेंगे। पीएम मोदी आज दोपहर लगभग 12:45 बजे मालदा का दौरा करेंगे और मालदा टाउन रेलवे स्टेशन पर हावड़ा और गुवाहाटी के बीच चलने वाली भारत की पहली स्लीपर ट्रेन वंदे भारत (कामाख्या) को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 1:45 बजे, प्रधानमंत्री मालदा में एक सार्वजनिक समारोह में 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे।
वहीं 18 जनवरी को दोपहर लगभग 3 बजे, प्रधानमंत्री हुगली जिले के सिंगूर में लगभग 830 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, आधारशिला रखने और हरी झंडी दिखाने का कार्य करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी मालदा का दौरा करेंगे और कई परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से 3,250 करोड़ रुपये की लागत वाली कई रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
वह मालदा टाउन रेलवे स्टेशन का दौरा करेंगे, जहां वे हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलने वाली भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। वे गुवाहाटी (कामाख्या)-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को वर्चुअल रूप से भी हरी झंडी दिखाएंगे। आधुनिक भारत की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई, पूरी तरह से वातानुकूलित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को किफायती किराए पर हवाई यात्रा जैसा अनुभव प्रदान करेगी। यह लंबी दूरी की यात्राओं को तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक बनाएगी। हावड़ा-गुवाहाटी (कामाख्या) मार्ग पर यात्रा के समय को लगभग 2.5 घंटे तक कम करके, यह ट्रेन धार्मिक यात्रा और पर्यटन को भी काफी बढ़ावा देगी।
प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में चार प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनमें बलुरघाट और हिली के बीच नई रेल लाइन, न्यू जलपाईगुड़ी में अगली पीढ़ी की माल ढुलाई रखरखाव सुविधाएं, सिलीगुड़ी लोको शेड का उन्नयन और जलपाईगुड़ी जिले में वंदे भारत ट्रेन रखरखाव सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल है। इन परियोजनाओं से यात्री और माल ढुलाई परिचालन मजबूत होगा, उत्तरी बंगाल में रसद दक्षता में सुधार होगा और क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।
प्रधानमंत्री न्यू कूचबिहार-बमनहाट और न्यू कूचबिहार-बॉक्सिरहाट के बीच रेल लाइनों के विद्युतीकरण को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे तेज, स्वच्छ और अधिक ऊर्जा-कुशल ट्रेन संचालन संभव हो सकेगा।
प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों-नई जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस; नई जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे किफायती और विश्वसनीय लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। ये सेवाएं आम नागरिकों, छात्रों, प्रवासी श्रमिकों और व्यापारियों की आवागमन संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगी और साथ ही अंतर-राज्यीय आर्थिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करेंगी।
प्रधानमंत्री एलएचबी कोचों से सुसज्जित दो नई ट्रेन सेवाओं- राधिकापुर-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस और बालुरघाट-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस- को भी हरी झंडी दिखाएंगे। ये ट्रेनें क्षेत्र के युवाओं, छात्रों और आईटी पेशेवरों को बेंगलुरु जैसे प्रमुख आईटी और रोजगार केंद्रों तक सीधी, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-31डी के धूपगुड़ी-फलाकाटा खंड के पुनर्निर्माण और चार लेन के निर्माण के लिए आधारशिला रखेंगे। यह एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है जो क्षेत्रीय सड़क संपर्क में सुधार लाएगी और उत्तरी बंगाल में यात्रियों और माल की सुगम आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगी।
प्रधानमंत्री हुगली जिले के सिंगूर में 830 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, आधारशिला रखने और हरी झंडी दिखाने का कार्य करेंगे।
इसके अलावा पीएम मोदी बालागढ़ में विस्तारित बंदरगाह द्वार प्रणाली की आधारशिला रखेंगे, जिसमें अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) टर्मिनल और एक ओवरब्रिज शामिल होगा।
पीएम मोदी कोलकाता में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कैटामरान का भी शुभारंभ करेंगे। यह कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित 6 इलेक्ट्रिक कैटामरानों में से एक है। उन्नत इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियों और लिथियम-टाइटेनेट बैटरी तकनीक से लैस 50 यात्रियों की क्षमता वाला यह हाइब्रिड इलेक्ट्रिक एल्युमिनियम कैटामरान पूर्णतः इलेक्ट्रिक मोड में शून्य-उत्सर्जन के साथ-साथ लंबी दूरी के लिए हाइब्रिड मोड में भी चलने में सक्षम है। यह पोत हुगली नदी पर शहरी नदी परिवहन, पर्यावरण-पर्यटन और अंतिम-मील यात्री कनेक्टिविटी में सहयोग प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री जयरामबती-बरोगोपीनाथपुर-मयनापुर नई रेल लाइन का भी उद्घाटन करेंगे। यह लाइन तारकेश्वर-बिष्णुपुर नई रेल लाइन परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नई रेल लाइन के साथ-साथ मयनापुर और जयरामबती के बीच बरोगोपीनाथपुर में ठहराव वाली एक नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर शुरू किया जाएगा। इससे बांकुरा जिले के निवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे दैनिक यात्रियों, छात्रों और तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा अधिक किफायती और सुविधाजनक हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों कोलकाता (हावड़ा)- आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस; कोलकाता (सियालदह)- बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस; कोलकाता (संतरागाछी)- ताम्बरम अमृत भारत एक्सप्रेसको हरी झंडी दिखाएंगे।

 

 

दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल के दौरान इन रास्तों पर जाने से बचें, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी

18-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने गणतंत्र दिवस परेड की तैयारी के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। 17, 19, 20 और 21 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर रिहर्सल के दौरान सुबह 10:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कुछ प्रमुख सड़कों और चौराहों पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इस दौरान कर्तव्य पथ पर रफी मार्ग, जनपथ, मानसिंह रोड और सी-हेक्सागन के क्रॉसिंग बंद रहेंगे। साथ ही विजय चौक से इंडिया गेट तक कर्तव्य पथ की पूरी सड़क आम लोगों के लिए बंद रहेगी। इससे आसपास की सड़कों पर जाम की स्थिति बन सकती है। दिल्ली पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, धैर्य रखें और मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
उत्तर से दक्षिण या दक्षिण से उत्तर जाने वाले वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग सुझाए गए हैं। यात्री सराय काले खां से आईपी फ्लाईओवर होते हुए राजघाट की ओर जाने के लिए रिंग रोड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, लाजपत राय मार्ग से मथुरा रोड, भैरों रोड और रिंग रोड के रास्ते भी जा सकते हैं।
अन्य विकल्पों में अरबिंदो मार्ग से सफदरजंग रोड, कमल अतातुर्क मार्ग, कौटिल्य मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, आरएमएल और बाबा खड़क सिंह मार्ग शामिल हैं। पृथ्वी राज रोड से राजेश पायलट मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, मथुरा रोड और भैरों रोड के जरिए भी रिंग रोड तक पहुंचा जा सकता है। उत्तरी इलाकों से आने वाले लोग बर्फखाना से आजाद मार्केट, रानी झांसी फ्लाईओवर, पंचकुइयां रोड, हनुमान मूर्ति, वंदे मातरम मार्ग और धौला कुआं के रास्ते जा सकते हैं।
पूर्व से पश्चिम या इसके उलट दिशा में जाने वालों के लिए भी कई वैकल्पिक रास्ते बताए गए हैं। रिंग रोड से भैरों रोड, मथुरा रोड, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, राजेश पायलट मार्ग, पृथ्वी राज रोड, सफदरजंग रोड, कमल अतातुर्क मार्ग और पंचशील मार्ग जैसे रास्तों का उपयोग किया जा सकता है।
वहीं अन्य विकल्पों में रिंग रोड से आईएसबीटी, चंदगी राम अखाड़ा, मॉल रोड और आजादपुर या लोधी रोड से अरबिंदो मार्ग होते हुए तीन मूर्ति मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट और पार्क स्ट्रीट तक जाना शामिल है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है ताकि रिहर्सल सुचारू रूप से हो सके और शहर में यातायात व्यवस्था बनी रहे। यात्रा से पहले नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक ट्रैफिक पुलिस चैनलों की जांच करें।





 

देश को मिली पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात, पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी

18-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक ट्रेन हावड़ा और गुवाहाटी के बीच चलेगी और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस सेवा से न केवल यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर मिलेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन में कुल 16 कोच लगाए गए हैं, जिनमें 823 यात्रियों के एक साथ यात्रा करने की क्षमता है। ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि यह लगभग 958 से 968 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 14 घंटे में तय करेगी, जो मौजूदा ट्रेनों के मुकाबले करीब 2.5 से 3 घंटे कम समय है। इसकी अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जिससे भविष्य में इसे और तेज बनाया जा सकेगा।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम, ऑटोमैटिक दरवाजे और बेहतर बर्थ की व्यवस्था की गई है। खास बात यह भी है कि सफर के दौरान यात्रियों को क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद मिलेगा, जिसमें बंगाली और असमिया खान-पान शामिल होगा। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी।
कोचों की बात करें तो इस स्लीपर वंदे भारत में 11 एसी थ्री टियर, 4 एसी टू टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रेन में आरएसी यानी वेटिंग सीट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है, ताकि यात्रियों को पूरी तरह आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।
किराए को लेकर भी सरकार ने मिडिल क्लास को ध्यान में रखा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, हावड़ा-गुवाहाटी के बीच हवाई यात्रा का किराया जहां लगभग 6 से 8 हजार रुपए तक होता है, वहीं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में थर्ड एसी का किराया भोजन सहित करीब 2,300 रुपए, सेकंड एसी का लगभग 3,000 रुपए और फर्स्ट एसी का करीब 3,600 रुपए तय किया गया है। 









 

कोई भूखा न रहे’ के संकल्प के साथ दिल्ली में लागू होंगे नए खाद्य सुरक्षा नियम: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

18-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) दिल्ली में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और गरीब-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। अब 1.20 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों को राशन कार्ड का अधिकार मिलेगा, जो पहले एक लाख तक सीमित था। यह निर्णय हाल में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। उनका स्पष्ट कहना है कि खाद्य सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि गरीबों का अधिकार है। हमारी सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति केवल व्यवस्था की खामियों के कारण भूखा न रहे। सरकारी जानकारी के अनुसार वर्षों से स्पष्ट नियमों के अभाव में दिल्ली में 3 लाख 89 हजार 883 से अधिक आवेदन लंबित हैं और 11 लाख 65 हजार 965 से ज्यादा लोग आज भी खाद्य सुरक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिन्हें अब पारदर्शी और जरूरत-आधारित प्रणाली के तहत शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नए नियमों के तहत प्राथमिकता परिवारों की पहचान के लिए आय सीमा को व्यावहारिक बनाया गया है। अब 1.20 लाख रुपये तक की सालाना पारिवारिक आय वाले परिवार खाद्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे। पहले यह आय सीमा एक लाख रुपये थी। इसके लिए राजस्व विभाग की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है, जिससे स्व-प्रमाणन (सेल्फ वेरिफिकेशन) की व्यवस्था समाप्त होगी। नए नियमों के अनुसार ऐसे परिवार जिनके पास दिल्ली में ए से ई श्रेणी की कॉलोनियों में संपत्ति है, जो आयकर देते हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है (रोजी-रोटी के लिए इस्तेमाल होने वाला एक कमर्शियल वाहन इसमें शामिल नहीं है), जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है या जिनके घर में 2 किलोवाट से अधिक का बिजली कनेक्शन है, इस योजना के पात्र नहीं होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की व्यवस्था समाप्त कर जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से आवेदनों की जांच, स्वीकृति और क्रमबद्ध प्राथमिकता तय की जाएगी। इससे सबसे अधिक जरूरतमंद परिवारों को सूची में आगे स्थान मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला स्तरीय समिति को प्राथमिकता निर्धारण की केंद्रीय इकाई बनाया गया है। इसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) करेंगे। समिति में स्थानीय विधायक और संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति आवेदनों की जांच कर उन्हें क्रमबद्ध करेगी ताकि सबसे जरूरतमंद परिवारों को पहले लाभ मिले। साथ ही, 20 प्रतिशत की वेटिंग लिस्ट भी बनाई जाएगी, जिससे रिक्तियों को समय पर भरा जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्षों से स्पष्ट नियमों के अभाव में भारी बैकलॉग बना हुआ था। सरकार ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली डेटा की जांच की। इसमें कई गड़बड़ियां पाई गईं। इसके आधार पर उन लोगों को सूची से हटाया है जो वास्तव में इसके हकदार नहीं थे। डेटा वेरिफिकेशन से पता चला कि लगभग 6 लाख 46 हजार 123 ऐसे लाभार्थी सामने आए जिनकी आय जानकारी नियमों से मेल नहीं खाती थी। 95 हजार 682 ऐसे लोग थे जो लंबे समय से सिस्टम में थे लेकिन लाभ नहीं ले रहे थे। लगभग 23 हजार 394 नाम दोहराव में पाए गए। 6,185 मामलों में लाभ मृत लोगों के नाम पर दर्ज था। लगभग 56 हजार 372 लोगों ने खुद ही सिस्टम से बाहर होने का अनुरोध किया।
इन सभी कारणों से कुल मिलाकर 8 लाख 27 हजार 756 से अधिक रिक्त स्थान बने। यह भी पता चला कि वर्तमान में 3 लाख 89 हजार 883 से अधिक आवेदन लंबित हैं और 11 लाख 65 हजार 965 से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं। अब इन खाली जगहों पर वर्षों से राशन कार्ड या खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे लोगों को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह केवल नियमों का दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली के सबसे कमजोर वर्गों के लिए सम्मान, पारदर्शिता और भरोसे की गारंटी है। हमारी सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद भूखा न रहे और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत पर काम करे। मुख्यमंत्री के अनुसार यह निर्णय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रभावी और न्यायसंगत क्रियान्वयन की दिशा में लिया गया है। नए नियमों के माध्यम से तकनीक आधारित, न्यायसंगत और पारदर्शी सार्वजनिक वितरण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचेगा।

भारतीय नौसेना का पहला ट्रेनिंग स्क्वाड्रन सिंगापुर पहुंचा, भारत के हाई कमिश्नर ने ट्रेनी से मुलाकात की

18-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय नौसेना का पहला ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (आईटीएस) सिंगापुर के चांगी नेवल बेस पहुंच गया है। इस स्क्वाड्रन में आईएनएस तिर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और इंडियन कोस्ट गार्ड शिप सारथी शामिल हैं। यह दक्षिण पूर्व एशिया में लंबी दूरी की ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट का हिस्सा है, जो दक्षिण पूर्व हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही है।
यह दौरा खास इसलिए है, क्योंकि वर्ष 2026 को भारत और आसियान ने ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस दौरान भारत और सिंगापुर की नौसेनाएं क्षमता बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने के लिए कई गतिविधियां कर रही हैं। दोनों पक्षों के ट्रेनी अधिकारियों के बीच स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग एक्सचेंज, जॉइंट योगा सेशन और खेल मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इंडियन नेवल बैंड सिंगापुर की प्रमुख जगहों पर परफॉर्मेंस देगा। जहाजों पर स्कूली बच्चों के लिए दौरा भी रखा गया है, ताकि वे नौसेना की जिंदगी देख सकें। स्क्वाड्रन के पहुंचने पर भारत के हाई कमिश्नर डॉ. शिल्पक अंबुले ने ट्रेनी से मुलाकात की और मैरीटाइम ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के कमांडर से बातचीत की। इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर की टीम ने भी प्रोफेशनल अनुभव साझा किए।
दूसरे दिन कम्युनिटी कार्यक्रम, सिंगापुर नेवी के साथ बातचीत, इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर और आरएसएन म्यूजियम का दौरा, खेल मुकाबले और नारायण ओल्ड एज एंड नर्सिंग होम में आउटरीच गतिविधियां हुईं। यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूत करता है और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ समुद्री साझेदारी बढ़ाता है।
साथ ही यह इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) में भारत की लीडरशिप और महासागर विजन के मुताबिक समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है। स्क्वाड्रन आगे इंडोनेशिया और थाईलैंड भी जाएगा।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में आज शीतलहर जारी रहने की संभावना : आईएमडी

16-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि गुरुवार को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में शीतलहर की स्थिति जारी रहने की बहुत संभावना है और उसके बाद इसमें कमी आएगी।
आईएमडी ने बुधवार को एक बयान जारी कर देश के विभिन्न भागों के मौसम के बारे में जानकारी दी हैं, जिसके अनुसार, अगले 5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है। वहीं आज गुरुवार को पंजाब और हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में शीत दिवस की स्थिति रहने की बहुत संभावना है।
वहीं, अगले 2 दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और कराईकल, केरल और माहे तथा तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के आस-पास के इलाकों में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश बंद होने के लिए स्थितियां अनुकूल हो रही हैं।
16 तारीख तक उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के अलग-अलग/कुछ हिस्सों में सुबह/रात के घंटों में घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है और 19 जनवरी 2026 तक अलग-अलग इलाकों में घना कोहरा रहेगा।
19 जनवरी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग कुछ हिस्सों में सुबह रात के घंटों में घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है और 21 जनवरी 2026 तक अलग-अलग इलाकों में घना कोहरा रहेगा।
16-19 जनवरी के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग/कुछ हिस्सों में सुबह/रात के घंटों में घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है; 15, 20 और 21 जनवरी 2026 को अलग-अलग इलाकों में घना कोहरा रहेगा।
इसके अलावा, जम्मू डिवीजन, हिमाचल प्रदेश में 16 तारीख तकः पश्चिमी राजस्थान में 15 तारीख तकः उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 15-19 जनवरी के दौरान; बिहार में 21 तारीख तक, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 16-19 जनवरी के दौरान; असम और मेघालय में 18 जनवरी तक सुबह रात के घंटों में अलग-अलग इलाकों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
आईएमडी के अनुसार, आज गुरुवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलग-अलग इलाकों में शीत दिवस की स्थिति रहेगी। इसके अतिरिक्त, हरियाणा, चंडीगढ़ के कुछ कई हिस्सों में शील लहर से लेकर गंभीर शीत लहर की स्थिति रहने की बहुत संभावना है और 16 जनवरी को अलग-अलग इलाकों में शीत लहर की स्थिति रहेगी।
मौसम विभाग ने कहा कि 15 और 16 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड के अलग-अलग इलाकों में, 15 जनवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में; 15-17 जनवरी के दौरान ओडिशा में शीत लहर की स्थिति रहने की बहुत संभावना है।
आपको बता दें, 16 से 20 जनवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर-लद्दाख गिलगित-बाल्टिस्तान-मुज़फ़्फ़राबाद, हिमाचल प्रदेश में हल्की एवं मध्यम छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश बर्फबारी होने की संभावना है और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर बारिश बर्फबारी हो सकती है। साथ ही, 18 से 20 जनवरी के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में और 19 और 20 जनवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर बारिश होने की संभावना है। 

काशी-तमिल संगम से मजबूत हुई ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना, पोंगल के खास मौके पर पीएम मोदी का संदेश

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि काशी-तमिल संगम जैसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक एकता को और गहरा करते हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाते हैं। पोंगल के विशेष अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए पीएम मोदी ने हाल ही में सोमनाथ यात्रा, काशी-तमिल संगम की उपलब्धियों और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए बताया कि कुछ दिन पहले वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने के लिए पवित्र सोमनाथ भूमि पर गए थे। यह आयोजन वर्ष 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण की हजारवीं बरसी के उपलक्ष्य में हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के कोने-कोने से लोग आए और इतिहास, संस्कृति तथा भारत की अटूट चेतना के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की मुलाकात ऐसे लोगों से हुई, जो पहले सौराष्ट्र-तमिल संगम और काशी-तमिल संगम में भी भाग ले चुके थे। इन लोगों ने ऐसे मंचों की सराहना की, जिससे प्रधानमंत्री ने इस विषय पर अपने विचार साझा करने का निर्णय लिया।
ब्लॉग पोस्ट में पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तमिल भाषा न सीख पाने का उन्हें जीवनभर अफसोस रहेगा।
पीएम ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि बीते कुछ वर्षों में सरकार को तमिल संस्कृति को देशभर में लोकप्रिय बनाने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने के कई अवसर मिले हैं। काशी-तमिल संगम इसका प्रमुख उदाहरण है। भारतीय परंपरा में ‘संगम’ यानी संगम स्थल का विशेष महत्व रहा है और इसी दृष्टि से काशी-तमिल संगम एक अनोखी पहल है, जो भारत की विविध परंपराओं की जीवंत एकता को सम्मान देती है।
प्रधानमंत्री ने ब्लॉग पोस्ट में यह भी कहा कि काशी से बेहतर इस संगम के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। काशी हजारों वर्षों से ज्ञान, अर्थ और मोक्ष की खोज का केंद्र रही है। काशी और तमिल संस्कृति का रिश्ता बेहद गहरा है। काशी में बाबा विश्वनाथ विराजमान हैं, वहीं तमिलनाडु में रामेश्वरम है। तमिलनाडु का तेनकासी ‘दक्षिण काशी’ के नाम से जाना जाता है। संत कुमारगुरुपर स्वामीगल ने अपनी साधना और विद्वता से काशी और तमिलनाडु के बीच स्थायी सेतु बनाया। महाकवि सुब्रमण्यम भारती ने काशी में बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति पाई, जहां उनका राष्ट्रवाद और काव्य और प्रखर हुआ।
पीएम मोदी ने बताया कि काशी-तमिल संगम का पहला संस्करण 2022 में हुआ था, जिसमें वे उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसमें तमिलनाडु से विद्वान, कारीगर, छात्र, किसान, लेखक और पेशेवर लोग काशी, प्रयागराज और अयोध्या पहुंचे थे। काशी-तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जिसकी थीम थी ‘तमिल कर्कलाम: लर्न तमिल’। इसके जरिए काशी और अन्य क्षेत्रों के लोगों को तमिल भाषा सीखने का अनूठा अवसर मिला। तमिलनाडु से शिक्षक आए और काशी के छात्रों के लिए यह अनुभव यादगार रहा।
इस संस्करण में कई विशेष आयोजन हुए। प्राचीन तमिल ग्रंथ ‘तोल्काप्पियम’ का चार भारतीय और छह विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया। ‘सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन’ तेनकासी से काशी तक निकाली गई, जिसके दौरान नेत्र जांच शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता और डिजिटल साक्षरता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान में पांड्य शासक आदि वीर पराक्रम पांडियन को भी श्रद्धांजलि दी गई। नमो घाट पर प्रदर्शनियां, बीएचयू में अकादमिक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों युवाओं की भागीदारी उन्हें सबसे अधिक खुशी देती है, क्योंकि यह युवाशक्ति के अपनी जड़ों से जुड़ने की चाह को दर्शाती है। यात्रा को यादगार बनाने के लिए भारतीय रेल ने विशेष ट्रेनें चलाईं, जिनमें संगीत और संवाद का माहौल रहा। उन्होंने काशी और उत्तर प्रदेश के लोगों की गर्मजोशी और प्रशासन की व्यवस्था की सराहना की।
समापन समारोह रामेश्वरम में हुआ, जिसमें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल हुए और राष्ट्रीय एकता पर प्रेरक संबोधन दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी-तमिल संगम ने सांस्कृतिक समझ, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जन-संपर्क को मजबूत किया है। अंत में उन्होंने संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल और माघ बिहू जैसे पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करने का आह्वान किया। 

उत्तराखंड में चमोली प्रशासन हाई अलर्ट पर, नंदा देवी वन में लगी आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात

16-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा नदियों के बीच स्थित पथरीले इलाके में जंगल में आग लगने के बाद जिला प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है।
अधिकारी के अनुसार, “नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा नदियों के बीच चट्टानी क्षेत्र में लगी जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। क्षेत्र की दुर्गमता को देखते हुए, हेलीकॉप्टर का उपयोग करके हवाई टोही और अग्निशमन के लिए एक योजना तैयार की गई है।”
जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार की पहल पर हेलीकॉप्टर से सर्वेक्षण की अनुमति दे दी गई है। सर्वेक्षण के बाद, डीएफओ सर्वेश दुबे ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित हैं। उत्तराखंड सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) के अनुसार, जमीनी टीमें हेलीकॉप्टर और ड्रोन की निगरानी की मदद से आग बुझाने का काम कर रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा गया कि चमोली जिले के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में लगी जंगल की आग को बुझाने के प्रयास जारी हैं। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र की निगरानी और सर्वेक्षण के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे पहले आज गुरुवार सुबह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने उत्तराखंड के नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में लगी जंगल की आग से निपटने के लिए कार्रवाई की। केंद्रीय वायु कमान (सीएसी) के अनुसार, राज्य सरकार के अनुरोध पर जोशीमठ में अग्निशमन कार्य के लिए भारतीय वायु सेना का एक Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर तैनात किया गया था। इस प्रतिक्रिया में, सीएसी ने रक्षा और आपदा राहत में भारतीय वायु सेना की दोहरी भूमिका पर प्रकाश डाला।
भारतीय वायु सेना की सीएसी की आधिकारिक एक्स पोस्ट में कहा गया है, “उत्तराखंड के नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में लगी जंगल की आग से निपटने के लिए @IAF_MCC ने तेजी से प्रतिक्रिया दी, जिससे एक बार फिर भारतीय वायु सेना की परिचालन तत्परता का प्रदर्शन हुआ।” दरअसल, राज्य सरकार की मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय वायु कमान से भारतीय वायु सेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर को जोशीमठ में आग बुझाने के लिए तैनात किया गया था। इस प्रतिक्रिया ने एक बार फिर रक्षा और आपदा राहत में भारतीय वायु सेना की दोहरी भूमिका को उजागर किया।
उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, “नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व, जिसे नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है, हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में स्थित एक शानदार वन्य क्षेत्र है।” नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व और फूलों की घाटी, दोनों ही प्रतिष्ठित यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। नंदा देवी शिखर की देखरेख में स्थित यह ऊबड़-खाबड़ और मनोरम अभ्यारण्य उत्तराखंड के तीन जिलों, अर्थात् चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में फैला हुआ है।
आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि दो प्रमुख क्षेत्र हैं- यहां दो प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनका नाम नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान है। इन पार्कों की सुंदरता को और भी बढ़ाती हैं- अलकनंदा नदी और उसकी सहायक नदियां, जिनमें ऋषि गंगा, धौली गंगा, पुष्पावती और खीरो गंगा शामिल हैं, जो इस क्षेत्र को पार करती हैं। नंदा देवी के अलावा, इस अभ्यारण्य में त्रिशूल, दुनागिरी, कलंका और नंदा घुंटी सहित कई चोटियां भी स्थित हैं।
असाधारण जैव विविधता के साथ, यह अभ्यारण्य विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों की महत्वपूर्ण आबादी का समर्थन करता है, जिनमें हिम तेंदुआ, हिमालयी कस्तूरी मृग और कई प्रकार की वनस्पतियां शामिल हैं। यह एशियाई काले भालू, हिमालयी भूरे भालू, भरल और हिमालयी तहर का भी घर है। यह एक प्रमुख पक्षी-दर्शन क्षेत्र भी है।
इन पार्कों के छोटे-छोटे हिस्सों में सामुदायिक पर्यावरण पर्यटन को छोड़कर, यह क्षेत्र रखरखाव के लिए एक नियंत्रण स्थल के रूप में कार्य करता है। 

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत बना स्टार्टअप हब, फाउंडर्स ने गिनाई उपलब्धियां

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि पीएम मोदी ने न केवल स्टार्टअप्स को समर्थन दिया, बल्कि जेएएम ट्रिनिटी (जन धन, आधार और मोबाइल) और यूपीआई जैसे मजबूत पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए व्यापार को आसान और सुलभ बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
हेल्थकेयर स्टार्टअप 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में वे सभी सुविधाएं मौजूद हैं, जिनकी एक उद्यमी को जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान मिली, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो सका।
प्रशांत टंडन ने कहा कि आज केवल कारोबारी ही नहीं, बल्कि कॉरपोरेट्स, सरकारें और आम नागरिक भी स्टार्टअप्स को समझ रहे हैं और उनका महत्व स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को न केवल सपोर्ट किया, बल्कि उसे आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
टंडन के अनुसार, भारत के स्टार्टअप सफर में जेएएम ट्रिनिटी (जन धन, आधार और मोबाइल) और यूपीआई जैसे पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन पहलों से उद्यमिता को बढ़ावा मिला और कारोबारियों को ऐसे समाधान विकसित करने का अवसर मिला, जिनकी देश को वास्तविक जरूरत थी।
अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अभिराज सिंह बहल ने कहा कि जब उन्होंने अर्बन कंपनी की शुरुआत की थी, तब देश में केवल एक-दो यूनिकॉर्न थे। पिछले आठ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आया है और अब 110 यूनिकॉर्न के साथ हजारों स्टार्टअप्स विभिन्न सेक्टर्स में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक हरसिमरबीर सिंह ने कहा कि 2015 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने भारत लौटने और यहां स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।
हरसिमरबीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी में एक स्टार्टअप सीईओ जैसी सभी खूबियां हैं। जब वे किसी समस्या को देखते हैं, तो उसके समाधान पर तुरंत काम शुरू कर देते हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर इसका बड़ा उदाहरण है। वैश्विक संकट के समय भारत ने इस क्षेत्र में कदम रखा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में 20-30 अरब डॉलर का निवेश हुआ।
रेज कॉफी के संस्थापक भरत सेठी ने कहा कि वर्ष 2016 में विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्टार्टअप इंडिया मिशन का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि उस समय बहुत कम लोग समझ पाए थे कि यह पहल भविष्य में कितना बड़ा बदलाव लाएगी।
भरत सेठी के अनुसार, भारत की मौजूदा स्टार्टअप ग्रोथ की नींव स्टार्टअप इंडिया मिशन पर टिकी है। इस पहल ने न केवल उद्यमियों को आत्मविश्वास दिया, बल्कि देश को परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कराने में भी अहम भूमिका निभाई।
 

शिक्षा मात्र आजीविका नहीं, समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान करेंगे, जबकि कई अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपना भविष्य बनाएंगे। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरित और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो। 
 



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