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रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपए के पार, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभावों से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहले कार्यकाल में अभाव दूर करने, दूसरे कार्यकाल में आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलने और तीसरे कार्यकाल में ‘सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन’ की नीति के जरिए विकसित भारत की मजबूत नींव रखी जा रही है।
नई दिल्ली में एक मीडिया संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान ने सफलता के नए मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में परिवर्तनकारी बदलाव आया है और आज दुनिया अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश ने पिछले वर्ष अपने सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन भी शुरू किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में तीन गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है, जो 2013-14 के 686 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 57 गुना अधिक है। उन्होंने इसे मेक-इन-इंडिया पर दुनिया के बढ़ते भरोसे का प्रमाण बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि मोबाइल विनिर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, स्वदेशी लोकोमोटिव उत्पादन और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में यूपीआई के जरिए 22.35 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29 लाख करोड़ रुपए रहा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी 5जी तकनीक का तेजी से विस्तार हो रहा है और 6जी तकनीक के विकास पर भी काम जारी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), जनधन, आधार और मोबाइल की ‘जैम’ त्रिमूर्ति के जरिए 51 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। इससे लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपए के गबन को रोका जा सका। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने सहकारी संघवाद को भी मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई सरकार के दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में स्टार्टअप की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, जबकि यूनिकॉर्न की संख्या 4 से बढ़कर 125 हो गई है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान रूप से काम कर रही है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना समेत कई पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सूचना के इस दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पत्रकारिता को तेज और अधिक सटीक बना सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की असली ताकत समाज को सही दिशा दिखाने, लोकतंत्र को मजबूत करने और सत्य को सामने लाने में है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि गलत सूचना समाज और सुरक्षा बलों के मनोबल पर गंभीर असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले खबर देने से ज्यादा महत्वपूर्ण सही खबर देना है। विशेष रूप से रक्षा बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों से जुड़े मामलों में मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखनी चाहिए। 







 

उपभोक्ता शिकायत प्रक्रिया को डिजिटल बना रही है ई-जागृति: प्रधानमंत्री मोदी

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा लिखे गए ई-जागृति पर एक लेख को साझा किया। उन्होंने कहा कि ई-जागृति उपभोक्ता शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर कई चुनौतियों का समाधान कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने लेख में विस्तार से बताया है कि ई-जागृति किस तरह उपभोक्ता शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज करके उसे अधिक प्रभावी बना रही है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ई-जागृति में सुधार किए गए हैं। इन सुधारों के माध्यम से उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को उन क्षेत्रों से जोड़ा गया है, जहां संरचनात्मक डिजिटल सुधार किए जा रहे हैं। 











 

पीएम मोदी के स्वागत को तैयार ऑस्ट्रेलिया, 8 जुलाई से होगी वार्षिक लीडर्स समिट

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 से 10 जुलाई के ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक लीडर्स समिट के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने पर गर्व होगा। इस दौरे के दौरान दोनों नेता मेलबर्न में वार्षिक लीडर्स समिट में हिस्सा लेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा करेंगे।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
बयान में कहा गया कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा ऑस्ट्रेलिया के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं, जिन्हें मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का समर्थन प्राप्त है। व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिल रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा, “मुझे अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी का ऑस्ट्रेलिया में वार्षिक लीडर्स समिट के लिए स्वागत करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।” उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत की साझेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देती है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा भी जताई।
प्रधानमंत्री अल्बनीज और प्रधानमंत्री मोदी की पिछली मुलाकात नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। अब दोनों नेता वार्षिक लीडर्स समिट में एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर न्यूजीलैंड के राजकीय दौरे पर जाएंगे। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला राजकीय न्यूजीलैंड दौरा होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जाएगी। प्रधानमंत्री बिजनेस और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे तथा भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

नरेंद्र मोदी का मेगा दौरा: राजस्थान-गुजरात को 1.06 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात

03-Jul-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान और गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह दोनों राज्यों को करीब 1.06 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इन परियोजनाओं में पेट्रोकेमिकल, शहरी परिवहन, रेलवे, सड़क, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली ट्रांसमिशन, विमानन और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं।
प्रधानमंत्री शनिवार सुबह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे। इसके बाद दोपहर को बालोतरा में करीब 1.06 लाख करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इस मौके पर वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी शाम को गुजरात के अहमदाबाद जिले के साणंद पहुंचेंगे, जहां वे आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्लांट का उद्घाटन करेंगे और लोगों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री जोधपुर से संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे। अगले 10 वर्षों के लिए 28,840 करोड़ रुपए के बजट वाली यह योजना क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई गति देगी और ‘उड़े देश का आम नागरिक’ के विजन को आगे बढ़ाएगी।
योजना के तहत 100 नए एयरोड्रोम विकसित किए जाएंगे, जिन पर 12,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होगा। क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती संचालन को मजबूत बनाने के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक का संचालन एवं रखरखाव समर्थन दिया जाएगा। दूरदराज और कठिन इलाकों में बेहतर संपर्क के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसके अलावा एयरलाइंस को क्षेत्रीय उड़ानों के संचालन के लिए 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) दी जाएगी। योजना में एचएएल ध्रुव और डोर्नियर जैसे स्वदेशी विमान और हेलीकॉप्टरों की खरीद को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री 480 करोड़ रुपए की लागत से बने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन करेंगे। 23,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह टर्मिनल हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसकी वास्तुकला राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित है, जिसमें मेहराब, झरोखे और आधुनिक डिजाइन का सुंदर मेल देखने को मिलता है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसे ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप बनाया गया है तथा इसे 5-स्टार गृह रेटिंग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री बालोतरा के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स राष्ट्र को समर्पित करेंगे। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित इस 9 एमएमटीपीए क्षमता वाले कॉम्प्लेक्स पर 79,450 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है।
इस अत्याधुनिक परियोजना में रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन एकीकृत है। इसकी पेट्रोकेमिकल क्षमता 2.4 एमएमटीपीएम है। रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप माना जाता है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के विकास के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। इसके तहत 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित होगा, जिसमें 36 स्टेशन होंगे। यह प्रह्लादपुरा से टोड़ी मोड़ तक सीतापुरा, वीकेआई, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, एसएमएस स्टेडियम, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ेगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री चूरू-सादुलपुर (58 किमी) और चूरू-रतनगढ़ (46 किमी) रेल दोहरीकरण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। करीब 900 करोड़ रुपए की लागत से बनी ये परियोजनाएं उत्तर-पश्चिम राजस्थान में रेल संपर्क और माल ढुलाई को मजबूत करेंगी। वह 740 करोड़ रुपए की लागत से बने एनएच-125ए जोधपुर रिंग रोड सेक्शन-2 का भी उद्घाटन करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में प्रधानमंत्री 5,500 करोड़ रुपए की लागत वाली एसजेवीएन की 1,000 मेगावाट बीकानेर सोलर परियोजना और एनएचपीसी की 300 मेगावाट कर्णीसर बीकानेर सोलर परियोजना राष्ट्र को समर्पित करेंगे। साथ ही 1,900 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन और 530 किलोमीटर लंबी नई ट्रांसमिशन प्रणाली की आधारशिला रखेंगे। इसी कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती हुए करीब 54,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे।
गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री सीजी सेमी ओएसएटी सुविधा का उद्घाटन करेंगे। 7,500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत स्वीकृत पहली चार परियोजनाओं में शामिल है और भारत में वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर यह संयंत्र हर साल 5 अरब (5 बिलियन) सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगा। यह प्लांट ऑटोमोबाइल, औद्योगिक, दूरसंचार, 5जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेगा।
यहां वेफर सॉर्टिंग, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेज डिजाइन, फेल्योर एनालिसिस, टेस्ट प्रोग्राम डेवलपमेंट, प्रोडक्ट कैरेक्टराइजेशन और लॉजिस्टिक्स जैसी एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर सेवाएं उपलब्ध होंगी।

 


रायपुर मंडल के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को मंजूरी

02-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारतीय रेल ने सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर मंडल के दुर्ग-तारोकी खंड के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना से ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगा।
परियोजना के तहत 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदला जाएगा। जिन स्टेशनों को इस परियोजना में शामिल किया गया है, उनमें मारौडा (एमएक्सए), रिसमा (आरएसए), गुंडार्देही (जीडीजेड), लाटाबोर (एलबीओ), बलोद (बीएक्सए), कुसुमकासा (केवाईएस), दल्ली राजहरा (डीआरजेड), गुडम (जीयूडीएम), भानुप्रतापुर (बीपीटीपी), केवटी (केईटीआई), अंतागढ़ (एएजीएच), तारोकी (टीडीओके) और रायपुर स्टोर डिपो (आरएसडी) शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है, जो रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित बनाती है। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, सिग्नलिंग में आने वाली तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और किसी भी व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को जल्दी बहाल किया जा सकेगा।
इस परियोजना से ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने के साथ समयपालन में भी सुधार होगा। साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के बेहतर संचालन के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होगा।
भारतीय रेल ने कहा कि यह मंजूरी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में उन्नत तकनीक के माध्यम से सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल परिचालन सुनिश्चित करना है।



 

टीबी मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी से दें नई गति, डेंगू से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी करें: जे.पी. नड्डा

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली सरकार के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान और डेंगू की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि अभियान से जुड़ा प्रत्येक संदेश सरल और आम लोगों की समझ में आने वाली भाषा में प्रसारित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को जमीनी स्तर पर नई गति मिलेगी और लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए प्रत्येक वार्ड की जिम्मेदारी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रगति (PRAGATI) बैठक में दिए गए सुझावों का उल्लेख करते हुए माई भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
टीबी की शीघ्र पहचान के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से युक्त अधिक संख्या में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराने में केंद्र सरकार सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि इससे शुरुआती चरण में टीबी की पहचान आसान होगी और मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि टीबी मुक्त भारत अभियान और डेंगू की रोकथाम, दोनों में आरडब्ल्यूए की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी को और मजबूत बनाया जा सके।
समीक्षा बैठक में दिल्ली सरकार की डेंगू से निपटने की तैयारियों का भी विस्तृत आकलन किया गया। इस दौरान समन्वित कार्रवाई, प्रभावी निगरानी व्यवस्था, जनजागरूकता अभियान तथा समय रहते रोकथाम संबंधी उपायों को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

 

खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं को मिलेगा रोजगार : चिराग पासवान

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी) में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से स्थापित उन्नत कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर (सीआईसी) का उद्घाटन किया। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, उद्यमिता और किसान सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह हॉल में संवाद एवं मार्गदर्शन सत्र का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार में सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास तथा लोक निर्माण (सार्वजनिक उपक्रम) राज्य मंत्री एवं परभणी की पालक मंत्री मेघना ताई बोरदिकर, कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि, राज्यसभा सदस्य रामराव वाडकुटे, लोकसभा सदस्य संजय जाधव, कृषि प्रसंस्करण योजना निदेशक विनयकुमार अवाटे, कार्यवाहक जिला कलेक्टर एवं जिला परिषद प्रमुख नतिशा माथुर, पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत और शिक्षा निदेशक डॉ. भगवान असेवार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में चिराग पासवान ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की आय बढ़ाने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ कई देशों को निर्यात भी कर रहा है, लेकिन अब कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन कर उन्हें अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है और पर्याप्त भंडारण सुविधाओं के अभाव में उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। ऐसे में किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि खाद्य अपशिष्ट को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका भी खाद्य प्रसंस्करण है।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय उत्पादन से लेकर विपणन तक सभी हितधारकों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रहा है। इस क्षेत्र के विस्तार में राज्य सरकारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है।
चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण (पीएमएफएमई) योजना के क्रियान्वयन में महाराष्ट्र ने देश में अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्कृत उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए उत्पाद की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। अल्पकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता से समझौता करने से वर्षों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ लेबल वाला हर उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना चाहिए और भारत के किसानों में दुनिया का खाद्य भंडार बनने की क्षमता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और कृषि विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थानों से इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए कृषि क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करने का आह्वान किया। 
 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फ्रांस दौरा, आर्थिक और निवेश संबंधों को नई मजबूती देने पर रहेगा फोकस

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को फ्रांस के आधिकारिक दौरे की शुरुआत की, जहां वह भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, आर्थिक सहयोग को गहरा करने और निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी।
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम फ्रांस के ऐक्स-एन-प्रोवेंस में आयोजित होने वाला भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) होगा। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, औद्योगिक ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर करेंगे। इस संवाद के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों की तलाश करेंगे और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे।
फ्रांस प्रवास के दौरान वित्त मंत्री कई वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह शीर्ष उद्योगपतियों के साथ एक गोलमेज चर्चा (राउंडटेबल) में भी हिस्सा लेंगी। इन बैठकों में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार, बढ़ते निवेश अवसरों और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘नई मध्यम वर्गीय आबादी के विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए’ विषय पर आयोजित एक विशेष पैनल चर्चा में भी भाग लेंगी। यह चर्चा लेस रेनकॉन्ट्रेंस इकोनॉमिक्स डी’ऐक्स-एन-प्रोवेंस के तहत आयोजित होगी, जिसे यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक आर्थिक और सार्वजनिक नीति मंचों में से एक माना जाता है।
इस सम्मेलन का आयोजन ले सर्कल डेस इकोनॉमिस्ट्स द्वारा किया जाता है, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योगपति, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं। अपने दौरे के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री कैडाराचे स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का भी दौरा करेंगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश साझेदार हैं।
इसके अलावा, वह कैम्पस साइबर का भी दौरा करेंगी, जिसे फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र माना जाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार बढ़ाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर चर्चा होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (पीएसीए) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड मुसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।



 

दिल्ली सरकार ने अधिसूचित की नई ईवी नीति, 2030 तक स्वच्छ, आधुनिक और हरित परिवहन व्यवस्था बनाने का लक्ष्य

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) दिल्ली सरकार ने राजधानी में स्वच्छ, आधुनिक और प्रदूषण मुक्त परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह नीति 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गई है और 31 मार्च, 2030 तक लागू रहेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ वायु गुणवत्ता में सुधार करना, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना, चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना का व्यापक विस्तार करना तथा इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (ईको-सिस्टम) विकसित करना है। नीति के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन, डिजिटल पारदर्शिता, संस्थागत निगरानी तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को समान महत्व दिया गया है।
नीति में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की नवीनतम रिपोर्ट का विशेष उल्लेख किया गया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में विशेषकर शीतकाल के दौरान वायु प्रदूषण में लगभग 23 प्रतिशत योगदान वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का है, जो सभी स्रोतों में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कुल वाहनों में लगभग 67 प्रतिशत दोपहिया वाहन हैं, इसलिए इनके तीव्र विद्युतीकरण को वायु प्रदूषण कम करने के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है। इसके अतिरिक्त तिपहिया वाहन, वाणिज्यिक कारें तथा एन-1 श्रेणी के मालवाहक वाहन प्रतिदिन अधिक दूरी तय करते हैं और शहरी प्रदूषण में इनका योगदान भी अपेक्षाकृत अधिक है। इसी कारण नीति में इन श्रेणियों के वाहनों के प्राथमिकता आधारित विद्युतीकरण पर विशेष बल दिया गया है।
मुख्यमंत्री गुप्ता के अनुसार यह नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी स्वैपिंग, बैटरी रीसाइक्लिंग, ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल सेवा वितरण तथा पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत करते हुए दीर्घकालिक स्वच्छ परिवहन व्यवस्था स्थापित करने का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था भी बनाई गई है। परिवहन विभाग इस नीति का नोडल विभाग होगा तथा इसके अंतर्गत एक समर्पित ईवी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल नीति के संचालन, स्पष्टीकरण, दिशा-निर्देश जारी करने तथा समन्वय संबंधी कार्यों का दायित्व निभाएगा। इसके साथ एक समर्पित परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (पीएमसी) भी नियुक्त किया जाएगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इलेक्ट्रिक वाहन मॉडलों को प्रोत्साहन व सब्सिडी के लिए पात्र घोषित करने के लिए परिवहन विभाग के अधीन मॉडल अनुमोदन समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति निर्धारित तकनीकी मानकों, पात्रता शर्तों और परिचालन दिशा-निर्देशों के आधार पर विभिन्न ईवी मॉडलों का परीक्षण एवं अनुमोदन करेगी। केवल समिति द्वारा अनुमोदित मॉडल ही सरकारी प्रोत्साहनों के लिए पात्र होंगे। चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना के विस्तार के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। डीटीएल राजधानी में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की योजना, समन्वय, तकनीकी मानक निर्धारण, डिजिटल पोर्टल संचालन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से सार्वजनिक और सामुदायिक चार्जिंग नेटवर्क का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा तथा सिंगल विंडो व्यवस्था के जरिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को भी सरल बनाया जाएगा।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और उच्चस्तरीय निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार समिति गठित की जाएगी। इस समिति में परिवहन, ऊर्जा, योजना, पर्यावरण, वित्त विभाग, डीटीएल, डिस्कॉम तथा आवश्यकता अनुसार अन्य विभागों व एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति नीति के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईवी नीति के प्रभावी संचालन के लिए दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन शीर्ष समिति कार्य करेगी। यह समिति नीति के कार्यान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने, आवश्यक संशोधनों की अनुशंसा करने तथा भविष्य में यदि हाइड्रोजन अथवा अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित नई प्रौद्योगिकियां उपलब्ध होती हैं तो उनके संबंध में सरकार को सुझाव देगी। उच्चाधिकार समिति की संरचना एवं कार्यादेश तथा दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन शीर्ष समिति की संरचना एवं कार्यसूची मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद अलग से अधिसूचित की जाएगी।
नई ईवी नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को भी विशेष महत्व दिया गया है। पर्यावरण विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी वाहन निर्माता और संबंधित संस्थाएं बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करें। वहीं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत बैटरी संग्रह केंद्र विकसित करेगी तथा सुरक्षित संग्रह, भंडारण, परिवहन और अधिकृत रीसाइक्लरों तक बैटरियों के हस्तांतरण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं अधिसूचित करेगी। नीति के तहत शिक्षा विभाग को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। विभाग स्कूल बसों के चरणबद्ध विद्युतीकरण की निगरानी करेगा तथा विद्यालयों में वायु प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ परिवहन के प्रति जागरूकता अभियान संचालित करेगा। वहीं राजस्व विभाग चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि की पहचान और उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
सीएम गुप्ता का स्पष्ट कहना है कि नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति स्वच्छ वायु, आधुनिक परिवहन, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। वित्तीय प्रोत्साहनों, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क, संस्थागत निगरानी, डिजिटल पारदर्शिता तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के माध्यम से यह नीति राजधानी को देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, इससे प्रदूषण में कमी, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा और नागरिकों के लिए अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। 
 

राष्ट्रपति मुर्मु ने आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लिया

01-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के समर्पण, दृढ़ निश्चय और कड़े परिश्रम की सुखद परिणति है। अनेक सपने संजोए हुए उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया था। आज वे ज्ञान एवं आत्मविश्वास से युक्त होकर वह डिग्री यहाँ से लेकर जा रहे हैं जो उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि विद्यार्थियों को सफलता उनके स्वयं के कड़े परिश्रम से मिलती है, किंतु इस सफलता में उनके माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का भी योगदान होता है। इसलिए, उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे वे रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, उनकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही बहुआयामी प्रगति से प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। तेज़ी से बदलती ऐसी दुनिया में, सीखने का काम सिर्फ़ डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। अपने आप को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप निरंतर ढालते चलने की प्रवृत्ति ही विद्यार्थियों का मजबूत संबल बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे नए विचारों को आजमाने और नवीन ज्ञान अर्जित करने का साहस विकसित करें।
उन्होंने कहा कि सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले युवा हमारे देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। इस तरह वे अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने आचरण में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने से उन्हें बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति से प्रेम केवल ऊंचे नैतिक आदर्श ही नहीं हैं, बल्कि ये समग्र विकास के आधार भी हैं। इन गुणों से उनका जीवन तो बेहतर बनेगा ही, वे समाज व देश के लिए उपयोगी योगदान भी कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की संकल्पना हमारे युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही साकार होगी। वे जीवन में चाहे जिस भी मार्ग को चुनें, उस पर उन्हें पूरी लगन और ईमानदारी के साथ चलते हुए उत्कृष्टता की मंजिल हासिल करनी है।











 


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