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जकार्ता पहुंचे पीएम मोदी, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने गर्मजोशी से किया स्वागत

06-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने गर्मजोशी से स्वागत किया। 
लैंडिंग से पहले इंडोनेशियाई वायुसेना के फाइटर जेट्स ने पीएम मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया। यह विशेष राजकीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
https://x.com/narendramodi/status/2074088889166536851?s=20
पीएम मोदी के विमान को हवाई क्षेत्र में एस्कॉर्ट किया जाना पहली बार नहीं है। कई बार मेजबान देश की वायुसेना के लड़ाकू विमान उनके विमान को एस्कॉर्ट करते हैं। बताना चाहेंगे इससे पहले मई 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा के दौरान यूएई वायुसेना के F-16 लड़ाकू जेट्स और स्वीडन दौरे पर ग्रिपेन फाइटर जेट्स ने भी उनका स्वागत किया था।
प्रधानमंत्री मोदी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 6 दिवसीय दौरे पर हैं। इंडोनेशिया के बाद वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाएंगे। यह दौरा भारत-इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।
दौरे पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर मैं 6-8 जुलाई तक इंडोनेशिया जाऊंगा। 2018 में इंडोनेशिया के मेरे पहले दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने आपसी संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था। हमारे आपसी संबंधों के बढ़ने के बाद यह मेरा पहला द्विपक्षीय दौरा होगा और राष्ट्रपति प्रबोवो के राजकीय दौरे के बाद होगा, जो 26 जनवरी, 2025 को हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।”
उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जनसंपर्क बहुत मजबूत हैं। इस दौरे के दौरान वे भारतीय प्रवासियों से मुलाकात करेंगे और राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता में प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह यात्रा आर्थिक, रणनीतिक सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर केंद्रित है।

 

प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे से व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

06-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से इंडोनेशिया की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचेंगे। 6 से 8 जुलाई तक प्रस्तावित इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और मजबूत करना है। मई 2018 में भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली द्विपक्षीय इंडोनेशिया यात्रा होगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2005-06 में जहां द्विपक्षीय व्यापार 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर था, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 38.84 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत ने इंडोनेशिया को 5.38 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जबकि इंडोनेशिया से 22.78 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भारत इंडोनेशिया से कोयला खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि इंडोनेशियाई कच्चे पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया से खनिज, रबर, पल्प एवं पेपर तथा हाइड्रोकार्बन का भी आयात करता है। वहीं भारत इंडोनेशिया को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, वाणिज्यिक वाहन, दूरसंचार उपकरण, कृषि उत्पाद, गोवंशीय मांस, इस्पात उत्पाद और प्लास्टिक का निर्यात करता है।
वाणिज्य विभाग के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार 2020-21 में 17.49 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2021-22 में बढ़कर 26.17 अरब अमेरिकी डॉलर और 2022-23 में 38.84 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इसके बाद 2023-24 में यह 29.40 अरब अमेरिकी डॉलर और 2024-25 में 28.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वहीं अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान ही दोनों देशों के बीच व्यापार 22.72 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में 7,292 परियोजनाओं के जरिए 1.56 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। वहीं उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार, जनवरी 2000 से सितंबर 2025 तक भारत में इंडोनेशिया का संचयी निवेश 668.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
वर्तमान में इंडोनेशिया में लगभग 100 भारतीय कंपनियां और संयुक्त उद्यम विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
दोनों देशों के बीच पर्यटन और हवाई संपर्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ती मांग को देखते हुए एयर इंडिया ने दिल्ली-बाली मार्ग पर अपनी उड़ानों की संख्या सप्ताह में सात से बढ़ाकर 10 कर दी है। फिलहाल भारत और इंडोनेशिया के बीच चार सीधी हवाई सेवाएं संचालित हैं, जिनमें जकार्ता-मुंबई, बाली-बेंगलुरु, बाली-मुंबई और बाली-दिल्ली मार्ग शामिल हैं। हालांकि, जकार्ता और दिल्ली के बीच अभी तक कोई सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं है।
वर्ष 2023 में ऑस्ट्रेलिया के बाद बाली आने वाले पर्यटकों में भारत दूसरा सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। वहीं 2024 में 7.1 लाख भारतीय पर्यटकों के साथ भारत इंडोनेशिया आने वाले विदेशी पर्यटकों का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। इस सूची में मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और चीन भारत से आगे रहे।


 

 


कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भव्य आयोजन, अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

06-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  संस्कृति मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से सोमवार, 6 जुलाई 2026 को कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में ‘भारत केसरी’ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर एक विशेष स्मृति कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम उनकी 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी आधिकारिक समारोह का हिस्सा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत अमित शाह और अन्य अतिथियों द्वारा भवानीपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पर पुष्पांजलि अर्पित करने से होगी। इसके बाद इको पार्क में डॉ. मुखर्जी की प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा का भूमि पूजन और शिलान्यास किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह पहल राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से की जा रही है।
मिलन मेला प्रांगण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया जाएगा। दुर्लभ तस्वीरों, अभिलेखीय दस्तावेजों और मल्टीमीडिया प्रस्तुति के माध्यम से उनके जीवन, वैचारिक दृष्टिकोण, शैक्षिक सुधारों तथा भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और औद्योगिक विकास में उनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।
स्मृति समारोह की शुरुआत सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गायन से होगी। इसके बाद सीसीआरटी की ओर से ‘सुर, संस्कृति एवं राष्ट्र’ विषय पर संगीतमय श्रद्धांजलि प्रस्तुत की जाएगी। इस प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय, लोक और पारंपरिक संगीत की विभिन्न विधाओं से जुड़े 57 कलाकार हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का निर्देशन पद्मश्री तरुण भट्टाचार्य ने किया है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही उनकी प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा के शिलान्यास पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया जाएगा।
संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2025 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी समारोह की घोषणा की थी। मंत्रालय के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य उनके राष्ट्रवाद, जनसेवा, शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना और भारत की एकता के प्रति योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनकी विरासत को संरक्षित करना है।







 

 


सरकार ने प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की वृद्धि की, प्याज किसानों को मिलेगा बेहतर मुनाफा मिलेगा

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए प्याज की खरीद मूल्य में 13 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। संशोधित खरीद मूल्य 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं। उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, सरकार के मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज की खरीद जारी है। संशोधित खरीद मूल्य से प्याज किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा और साथ ही बफर खरीद प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।
वहीं, प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) होने का अनुमान है, जो वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। उत्पादन अनुमानों को देखते हुए, फिलहाल प्याज की कुल उपलब्धता चिंता का विषय नहीं है, हालांकि कीमतों में सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव के अनुरूप मामूली वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का भंडार पर्याप्त है। फिलहाल, भंडारित प्याज की कमी के कोई संकेत नहीं हैं। अखिल भारतीय स्तर पर दैनिक मंडी आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है, जबकि महाराष्ट्र में यह आवक 30,000 मीट्रिक टन से अधिक है, और औसत खुदरा मूल्य लगभग 18 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेहतर गुणवत्ता वाला स्टॉक भंडार में बना हुआ है और मंदी के दौर में इसके जारी होने की उम्मीद है। अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 31 रुपये प्रति किलोग्राम है।
मानसून के आगमन में देरी और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा के कारण व्यापारियों के एक वर्ग द्वारा सट्टेबाजी के आधार पर खरीदारी की जा रही है, हालांकि प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों में मौजूदा कीमतों पर कोई खास मांग नहीं है। उपभोक्ता बाजारों में सकारात्मक माहौल के बावजूद, नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों जैसे उत्पादन केंद्रों में सट्टेबाजी की गतिविधियां देखी जा रही हैं, जो मजबूत वास्तविक मांग के बजाय भविष्य में बाजार में सुधार की उम्मीदों पर आधारित हैं।
उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, प्याज का निर्यात सामान्य है, जून 2026 के दौरान लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ। हालांकि, व्यापारियों को उम्मीद है कि प्याज के निर्यात की गति थोड़े समय के लिए धीमी हो सकती है, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि पाकिस्तान और चीन से ताजा फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व जैसे प्रमुख निर्यात स्थलों में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हैं।
जहां महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ की बुवाई में लगभग 15 दिन की देरी दर्ज की गई है, वहीं कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे क्षेत्रों में बुवाई की प्रगति सामान्य स्तर से लगभग 60 प्रतिशत होने का अनुमान है।

पीएम मोदी ने गुजरात के चिप संयंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सराहा, कहा-‘हमारी युवा शक्ति पर गर्व’

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर उद्योग में युवा कार्यबल, विशेषकर दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाली महिला कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित किया।
पीएम मोदी की यह टिप्पणी उन्होंने गुजरात के सानंद में एक दिन पहले सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा का उद्घाटन करने के बाद आई है ।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात के सानंद में नव उद्घाटित सेमीकंडक्टर संयंत्र में कर्मचारियों के साथ उनकी बातचीत इस दौरे के “सबसे विशेष क्षणों में से एक” रही।
उन्होंने कहा कि इस संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं का है, जिनमें कई आदिवासी समुदायों से हैं। इन सभी ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “वे भारत के दूरस्थ क्षेत्रों से आती हैं और उनमें से कई आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं लेकिन उनके अद्भुत जज्बे ने उन्हें सेमीकंडक्टर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षण लिया और आज वे भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई ताकत दे रही हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “हमारी युवा शक्ति पर गर्व!”
आपको बता दें कि कल शनिवार को सानंद स्थित संयंत्र में कर्मचारियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक युवा महिला कर्मचारी से पूछा कि वहां बिताए गए एक वर्ष में उन्हें सबसे अधिक खुशी किस बात से मिली।
महिला कर्मचारी ने बताया कि उनके गांव में परिवार आमतौर पर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर नहीं भेजते, लेकिन सेमीकंडक्टर संयंत्र में नौकरी मिलने के बाद लोगों की सोच बदल गई है।
उन्होंने कहा, “मेरे गांव में कोई भी परिवार अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेजता लेकिन अब जब मैं गांव लौटती हूं तो सभी हैरान रह जाते हैं। वे पूछते हैं कि मैं कहां रहती हूं और क्या पढ़ाई करती हूं। मैं उन्हें बताती हूं कि मैं सीजी सेमी में काम करती हूं और यह मेरे लिए बहुत बड़ा अवसर है। लोग इस बात से बेहद खुश हैं कि मैं आत्मनिर्भर बन गई हूं। मेरी सहेलियां भी पूछती हैं कि क्या उन्हें भी यहां आने का मौका मिल सकता है, तो मैं कहती हूं कि हां, आओ और यहां काम करो।”
प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के कर्मचारी कौशल कुमार से भी बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या यह उनकी गुजरात की पहली यात्रा है और साथ ही राज्य की भीषण गर्मी का भी जिक्र किया। इस पर कौशल कुमार ने बताया कि यह उनका गुजरात का पहला दौरा है।
झारखंड के गिरिडीह जिले की एक अन्य महिला कर्मचारी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने बिरनी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का कोर्स किया और फिर सीजी सेमी में उनका चयन हुआ। उन्होंने बताया कि इस नौकरी के कारण उन्हें विदेश यात्रा का अवसर भी मिला।
वहीं, जब प्रधानमंत्री मोदी ने पूछा कि क्या लोग अक्सर आईटीआई की पढ़ाई को कमतर आंकते हैं, तो महिला कर्मचारी ने कहा कि उनके गांव के लोग शुरुआत में मानते थे कि वह जीवन में कुछ खास नहीं कर पाएंगी।
उन्होंने कहा, “पहले लोग सोचते थे कि मैं सिर्फ गांव की एक लड़की हूं, जो पढ़ाई के लिए बाहर चली गई है और कुछ नहीं कर पाएगी। जब मैं रांची में थी, तब लोग कहते थे कि मैं बस समय बिता रही हूं। लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि मैं वास्तव में कुछ सार्थक कर रही हूं।”
ये बातचीत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सीजी सेमी की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा के उद्घाटन के बाद हुई। इस संयंत्र में अब व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
करीब 7,500 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह परियोजना ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत उत्पादन शुरू करने वाली भारत की तीसरी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई है।
इस संयंत्र में ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की पैकेजिंग और परीक्षण किया जाएगा, जिससे देश के घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवा कर्मचारियों के आत्मविश्वास ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों से उन्होंने मुलाकात की, वे सभी “आत्मविश्वास से भरपूर” थे।
उन्होंने कहा, “देश का लक्ष्य चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग को समाहित करते हुए एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है। यह उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

 

विकसित भारत–जी राम जी के लिए राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रविवार को सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] के क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा राज्यों को योजना के संचालन के लिए ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी की।
इस दौरान, चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प था कि 1 जुलाई, 2026 से विकसित भारत–जी राम जी पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू हो। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि योजना पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है तथा मनरेगा से विकसित भारत–जी राम जी में ट्रांजीशन पूरी तरह सहज और सुचारु रहा है। अब तक किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर भाई-बहनों की सेवा ही भगवान की सेवा है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण श्रमिकों की आय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
चौहान ने आगे कहा कि आज जारी की गई ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त का उद्देश्य राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे भी अपनी हिस्सेदारी की राशि समय पर जारी करें, जिससे मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित भारत–जी राम जी के प्रभावी क्रियान्वयन में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पहली किस्त राज्यों की मांग के आधार पर जारी की गई है और भविष्य में भी आवश्यकता के अनुसार धन उपलब्ध कराया जाएगा। चौहान ने कहा कि ग्राम सभाएं और ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन करें ताकि गांवों का समग्र और सहभागी विकास सुनिश्चित हो सके।

 

तीजन बाई के निधन से देशभर में शोक, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री समेत दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

05-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके निधन को कला जगत और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रसार करने में उनका अमूल्य योगदान स्मरणीय रहेगा। मैं उनके प्रियजनों और प्रशंसकों के प्रति गहन संवेदनाएं व्यक्त करती हूं।”
डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई का निधन कला और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकाकुल परिवार और उनके लाखों प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय प्रतिभा और समर्पण से उन्होंने पंडवानी लोककला को विशिष्ट पहचान दिलाई। छत्तीसगढ़ की इस लोककला के संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व उनके प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने रायपुर एम्स पहुंचकर तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राज्य सरकार की ओर से उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट किया, “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और ‘पद्म विभूषण’ तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा ‘पंडवानी’ को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारतीय लोककला व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। मां दंतेश्वरी से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व उनके प्रशंसकों को यह अथाह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने लिखा, “आज पंडवानी का एक सुर सदा के लिए शांत हो गया है। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सशक्त प्रतीक, पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से अलंकृत, विश्वविख्यात पंडवानी की अप्रतिम साधिका तीजन बाई का देहांत छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए अनगिनत कलाकारों को प्रेरणा प्रदान की। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीधाम में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति दें।”
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश में कला और संस्कृति की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी विधा को सजीव रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। हम सब आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों व प्रशंसकों को संबल दे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन, संशोधित ‘उड़ान’ योजना लॉन्च

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।
यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।
योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।







 

केंद्र सरकार ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया, अमित शाह बोले- हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 23 और व्यक्तियों को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘आतंकवादी’ घोषित किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घोषित किए गए 23 आतंकवादियों में 17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) से भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया है। ये आतंकवादी भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार घुसपैठ, आतंकी संगठनों की मदद, फंड जुटाने और आतंकवादियों की भर्ती जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। मोदी सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।”
गृह मंत्रालय के अनुसार, इन व्यक्तियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और आतंकवाद समर्थित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी होगा। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वित कानूनी, जांच और निवारक कार्रवाई को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद पहली बार व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान लागू किया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस ताजा कार्रवाई के बाद अब तक अधिनियम की धारा 35 के तहत कुल 57 व्यक्तियों को यूएपीए की चौथी अनुसूची में ‘आतंकवादी’ के रूप में सूचीबद्ध किया जा चुका है।
गृह मंत्रालय द्वारा घोषित 23 आतंकवादियों में अधिकांश का संबंध जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जमात-उद-दावा (जेयूडी), हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (एचयूएम), पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल), अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से है। इन पर सीमा पार घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने, आतंकी फंडिंग, युवाओं की भर्ती, प्रशिक्षण शिविर संचालित करने और भारत में कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने या उन्हें अंजाम देने के आरोप हैं।
गृह मंत्रालय ने जिन 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है, उनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी, फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वालीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ ताईबी, ओवैस फारूज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, वसीम नूर जाट और मोहम्मद शहीद फैसल शामिल हैं।

 


ऊर्जा संकट के बीच भारत ने दिखाई क्षमता, विपक्ष अफवाह फैलाने में व्यस्त था: पीएम मोदी

04-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुए संकट के बावजूद भारत ने दूरदर्शिता, प्रभावी रणनीति और कूटनीतिक प्रयासों के दम पर स्थिति का सफलतापूर्वक सामना किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, लेकिन 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और भारत के प्रयास भारी पड़े हैं।” उन्होंने कहा कि भारत ने समय रहते संकट का आकलन किया, सही फैसले लिए, संसाधनों का संतुलित उपयोग किया और कूटनीतिक शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल कर इस चुनौती से पार पाया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने बिना किसी दल का नाम लिए विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ ताकतें सार्वजनिक रूप से अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं। उन्होंने कहा, “उस समय किस स्तर पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वह मेहनत, प्रयास, धैर्य और नीतिगत व कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए संवेदनशील कदम इतिहास में दर्ज होंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी करीब 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से लगभग 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होर्मुज मार्ग के जरिए होती थी। युद्ध के कारण यह आपूर्ति लगभग बाधित हो गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट शुरू होते ही रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया और औद्योगिक गैस बनाने वाली रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन के लिए तैयार किया। इसके परिणामस्वरूप सात दिनों के भीतर एलपीजी उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन रिफाइनरियों ने पहले कभी एलपीजी का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें भी इसके लिए तैयार किया गया। साथ ही रसोई गैस पर दबाव कम करने के लिए बड़े पैमाने पर पीएनजी कनेक्शन दिए गए और कम समय में 11 लाख से अधिक घरों को पीएनजी नेटवर्क से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि संकट के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हालात ऐसे थे कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपए तक पहुंच सकती थी और कई विशेषज्ञ भी यही अनुमान लगा रहे थे। लेकिन सरकार के प्रयासों से घरेलू एलपीजी सिलेंडर अभी भी 950 रुपए से कम में उपलब्ध है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को यह 650 रुपए से भी कम कीमत पर मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दो दिन पहले सरकार ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी कटौती की है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इनमें पेट्रोकेमिकल्स, शहरी परिवहन, रेलवे, सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी और बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। 



 


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