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जगन्नाथ रथयात्रा पर नेताओं ने दी शुभकामनाएं, ओम बिरला से लेकर जेपी नड्डा तक ने किया महाप्रभु को नमन

16-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक श्लोक “नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः।।” साझा किया। उन्होंने आगे लिखा, “श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। महाप्रभु भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा भारतीय संस्कृति की उस शाश्वत चेतना का दिव्य उत्सव है, जहाँ आस्था, अध्यात्म और लोकमंगल का अनुपम संगम साकार होता है।”
ओम बिरला ने लिखा, “यह केवल श्रद्धा और भक्ति का महापर्व ही नहीं, बल्कि हमारी सनातन सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है, जो युगों से जन-जन में विश्वास, समरसता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता आया है। भगवान श्री जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र एवं माता सुभद्रा की यह पावन यात्रा केवल देवविग्रहों का नगर-भ्रमण नहीं, बल्कि लोक-आस्था की गहराइयों से निकलकर राष्ट्र की आत्मा को स्पर्श करने वाला दिव्य लोकमंगल अभियान है।”
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे लिखा, “यह महान परंपरा हमें स्मरण कराती है कि जीवन का सार निरंतर गतिशील रहते हुए धर्म, कर्तव्य, विनम्रता और समर्पण के पथ पर आगे बढ़ने में निहित है तथा समाज और राष्ट्र के व्यापक कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करना ही सच्ची साधना है। इस शुभ अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ के श्रीचरणों में नमन करते हुए राष्ट्र की समृद्धि, समाज की सद्भावपूर्ण एकता तथा प्रत्येक नागरिक के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करता हूं। जय जगन्नाथ!”
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा महोत्सव के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की प्रतीक यह पावन रथयात्रा सेवा, समर्पण और एकता का संदेश लेकर आती है। आस्था, श्रद्धा और भक्ति से भरी यह यात्रा देशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आरोग्य लेकर आये, महाप्रभु से यही प्रार्थना है। जय जगन्नाथ!”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ जी की पावन रथ यात्रा के शुभारंभ की सभी देशवासियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी, भगवान बलभद्र और देवी मां सुभद्रा की कृपा सभी पर अनवरत बरसती रहे, हर घर-आंगन धन-धान्य से भरा रहे, सबके जीवन में अपार सुख, समृद्धि और आनंद हो, सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो; यही प्रार्थना है। जय जगन्नाथ।”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिव्य उत्सव हमारी सनातन आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा से सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करता हूं।”
 

 


विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स में अहम बैठकें, भारत और यूरोपीय संघ ने भविष्य की साझेदारी पर की चर्चा

16-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) की स्टार्टअप्स, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना जहारिएवा से मुलाकात की। इस बैठक में स्वच्छ और हरित ऊर्जा तकनीकों में रिसर्च, इनोवेशन हब, स्टार्टअप्स और ‘होरिजोन यूरोप’ से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा हुई।
बैठक में बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत प्रणय वर्मा और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, “आज यूरोपीय संघ की स्टार्टअप्स, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना जहारिएवा के साथ अच्छी बैठक हुई। हमने स्वच्छ और हरित ऊर्जा तकनीकों में रिसर्च, इनोवेशन हब, स्टार्टअप्स और होराइजन यूरोप से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा की।”
जहारिएवा ने भी ‘एक्‍स’ पर इस मुलाकात के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “ब्रसेल्स में डॉ. एस. जयशंकर और प्रोफेसर सूद का स्वागत करना मेरे लिए सम्मान की बात है। जब यूरोप और भारत मिलकर इनोवेशन करते हैं, तो हम सिर्फ नई तकनीकें विकसित नहीं करते, बल्कि भविष्य को आकार देते हैं।” उन्होंने लिखा, “भारत को होराइजन यूरोप के और करीब लाकर और करीब पांच लाख स्टार्टअप्स को जोड़कर, हम ऐसी साझेदारी बना रहे हैं जो साझा लक्ष्यों को दुनिया भर में असर पैदा करने में मदद करेगी।”
इससे पहले दिन में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ के इंटरनेशनल पार्टनरशिप कमिश्नर जोजेफ सिकेला से भी मुलाकात की। इस दौरान कनेक्टिविटी, त्रिपक्षीय साझेदारी, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) और ग्रीन शिपिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “आज सुबह यूरोपीय संघ के इंटरनेशनल पार्टनरशिप कमिश्नर जोजेफ सिका से मिलकर खुशी हुई। हमने कनेक्टिविटी, त्रिपक्षीय साझेदारी, आईएमईसी और ग्रीन शिपिंग में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।”
विदेश नंत्री ने ब्रसेल्स में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं उन्हें दीं। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कोस्टा के मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच की सराहना की।
राष्ट्रपति कोस्टा से मुलाकात के बाद जयशंकर ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात करके खुशी हुई। इस दौरान मेरे साथ वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद भी मौजूद थे। मैंने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं दीं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस साल की शुरुआत में हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के बाद साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को सभी ने मिलकर पहचाना। उन्होंने व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कोस्टा के मार्गदर्शन और सकारात्मक भावनाओं की सराहना की। इससे पहले मंगलवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास से भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक बातचीत की थी।
 

रथ यात्रा 2026: भगवान जगन्नाथ का भक्तों से मिलन, आस्था का महासागर

16-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ओडिशा की पवित्र तीर्थनगरी पुरी में दिव्य घटना घटती है। इस दिन यहां भगवान जगन्नाथ का भक्तों से मिलन का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सहित  अपने रत्न सिंहासन से बाहर निकलकर विशाल रथों पर सवार हो भक्तों के बीच आते हैं। लाखों श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान बनाते हुए इन रथों को अपनी भक्ति की शक्ति से खींचते हैं। इसलिए इस दिव्य दिन को आस्था का महासागर भी कहा जाता है।  
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि ईश्वर और मनुष्य के बीच प्रेम का जीवंत प्रतीक है— जहां भक्त भगवान के द्वार पर नहीं, बल्कि भगवान खुद रथ पर सवार होकर भक्तों के पास आते हैं। इस बार यह रथ यात्रा आज गुरुवार 16 जुलाई को शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी। इन नौ दिनों में ओडिशा का पुरी आध्यात्मिकता, भक्ति और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र बन जाएगा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पवित्र रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी अभिव्यक्ति है। रथयात्रा से जुड़ी परंपराओं ने भारत और दुनिया भर में कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। ये परंपराएं विनम्रता, सामूहिक भागीदारी और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं।”
https://x.com/narendramodi/status/2077575746567172462?s=20
रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे प्राचीन, सबसे बड़े और सबसे भावपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसका इतिहास एक हजार वर्ष से भी पुराना है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और वे मंदिर की चार दीवारियों में कैद नहीं रहते। भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का रूप), बलभद्र और सुभद्रा साल में एक बार अपने भक्तों से सीधे मिलने के लिए गुंडिचा मंदिर (अपनी मौसी के घर) की यात्रा करते हैं।इस यात्रा का सबसे गहरा संदेश समता और समावेश का है। इसलिए इस रथ यात्रा को सनातन परंपरा का अभिन्न अंग भी कहा जाता है। इस यात्रा के दौरान सभी वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के भगवान के दर्शन करते हैं। यह उत्सव समता का संदेश देता है — राजा से लेकर आम भक्त तक सब रथ खींचने में समान रूप से भाग लेते हैं। रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) तक ले जाना है, जहां वे सात दिन रहकर वापस लौटते हैं।
1. गुंडिचा मंदिर की कहानी (मौसी का घर) : सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, देवी सुभद्रा ने अपनी बुआ (गुंडिचा) के घर जाने की इच्छा प्रकट की। भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रथ यात्रा की। यह कथा स्कंद पुराण और स्थानीय परंपराओं में वर्णित है। यही प्रतीकात्मक यात्रा हर साल दोहराई जाती है। देवता सात दिन तक गुंडिचा मंदिर में रहकर फिर बहुड़ा यात्रा के रूप में वापस लौटते हैं।
2. वृंदावन और कृष्ण की याद: एक अन्य मान्यता गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़ी है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा और ISKCON के अनुसार, यह यात्रा भगवान कृष्ण की वृंदावन लीला और गोपियों के प्रेम से प्रेरित मानी जाती है। कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में गोपियों ने कृष्ण को शाही रूप में नहीं, बल्कि वृंदावन के सांवले घनश्याम के रूप में वापस लाना चाहा। भक्तों की असीम प्रेम-भक्ति ने रथ को खींचा और कृष्ण को उनके प्रेम-धाम की ओर ले गई। रथ यात्रा उसी दिव्य प्रेम और विरह-मिलन की कहानी को जीवंत करती है।
3. भक्त सालबेगा की कथा: 17वीं शताब्दी के भक्त कवि सालबेगा (मुस्लिम पिता और हिंदू मां की संतान) जगन्नाथ भक्ति के प्रतीक हैं। उनकी गहरी भक्ति के कारण रथ उनकी समाधि के पास रुकता है। यह घटना धार्मिक सद्भाव का उदाहरण है और श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपरा में सम्मिलित है।
4. मानवीय स्पर्श वाली कथा: एक कथा यह भी प्रचलित है कि देवा स्नान पूर्णिमा के बाद देवता “बीमार” पड़ जाते हैं। कुछ दिनों तक वे आराम करते हैं, उनकी सेवा ठीक उसी तरह की जाती है जैसे परिवार के सदस्य की की जाती है। फिर वे मौसी के घर जाते हैं। यह कथा ईश्वर को इतना निकट और मानवीय बना देती है कि भक्त उन्हें अपना ही समझने लगते हैं।
प्रमुख रस्में
– पहांडी बिजे: देवताओं को मंदिर से बाहर लाने की भावपूर्ण रस्म, जिसमें घंटे, शंख और मंत्रों की धुन के साथ वे झूमते हुए आगे बढ़ते हैं।
– चेरा पहरा: पुरी के गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान के सामने राजा भी सेवक है।
– गुंडिचा यात्रा: देवताओं का मौसी के घर जाना।बहुड़ा यात्रा: वापसी यात्रा।सुना बेषा: स्वर्ण आभूषणों से सजावट।
– नीलाद्रि बिजे: मंदिर वापसी की अंतिम रस्म।
रथों का निर्माण और विशेषताएं
जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं। अक्षय तृतीया से शुरू होकर दो महीने तक काम चलता है। लकड़ी दासपल्ला क्षेत्र के विशेष वृक्षों (फस्सी, धौसा इत्यादि) से ली जाती है। बढ़ई (दरुण) परिवारों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह कार्य किया जाता है।
– नंदीघोष — भगवान जगन्नाथ का रथ (लगभग 45 फीट ऊंचा, 16 पहिए, लाल-पीला रंग)।
– तालध्वज — भगवान बलभद्र का रथ (लगभग 44 फीट ऊंचा, 14 पहिए, लाल-हरा रंग)।
– दर्पदलन — देवी सुभद्रा का रथ (लगभग 43 फीट ऊंचा, 12 पहिए, लाल-काला रंग)।
रथों पर लकड़ी के घोड़े लगाए जाते हैं और पारंपरिक सजावट की जाती है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम
रथ यात्रा ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर ले जाती है। इसमें महाप्रसाद, पारंपरिक संगीत, भजन और कला (जैसे पट्टचित्र, अप्लिक वर्क) सम्मिलित होते हैं। यह उत्सव भक्ति को लोकतंत्र से जोड़ता है और सभी को समान अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष 2026 की रथ यात्रा में भी यही परंपराएं निभाई जाएंगी। इस यात्रा का गहरा आध्यात्मिक महत्व है और कई लोगों का मानना ​​है कि रथों या उन्हें खींचने वाली रस्सियों को छूने मात्र से ही ईश्वरीय कृपा मिलती है और उनके जीवन के कष्ट मिट जाते हैं।
 

भारत-ब्रिटेन एफटीए के बाद ब्रिटिश एयरवेज का बड़ा फैसला, भारत के लिए बढ़ाएगी उड़ानें

15-Jul-2026
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए ब्रिटिश एयरवेज ने भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार करने की घोषणा की है।
ब्रिटिश एयरवेज के महाप्रबंधक डेविड राइट ने कहा कि एयरलाइन इस वर्ष शीतकालीन समय-सारिणी से भारत के लिए अपनी साप्ताहिक उड़ानों की संख्या 63 से बढ़ाकर 70 करेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत और ब्रिटेन के मजबूत होते आर्थिक संबंधों में कंपनी के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक समझौता बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापारिक अवसरों को नई गति मिलेगी।
डेविड राइट ने कहा कि भारत, ब्रिटिश एयरवेज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है और कंपनी भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए उत्सुक है।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश एयरवेज का मुख्य उद्देश्य भारत के यात्रियों, कारोबार और समुदायों को ब्रिटेन तथा अपने वैश्विक नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ना है। साथ ही, मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले व्यापार और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देना है।
राइट ने कहा कि इस समझौते का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी संपर्क को भी नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ब्रिटिश एयरवेज पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से भारत में सेवाएं दे रही है और इस दौरान दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की साक्षी रही है।
उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र व्यापार, निवेश, पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।



 

पीएम मोदी ने शेयर किया ‘भारत टेक्स 2026’ पर लेख, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए ‘विजन 2030’ का बताया रोडमैप

15-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा (@PmargheritaBJP) द्वारा लिखे गए एक लेख को शेयर किया। इस लेख में ‘भारत टेक्स 2026’ (Bharat Tex 2026) को भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की व्यापक क्षमता और भविष्य की दिशा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“केंद्रीय राज्य मंत्री @PmargheritaBJP लिखते हैं कि @Bharat_tex 2026 भारत की पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन को एक ही छत के नीचे लाता है, जो देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, समृद्ध टेक्सटाइल विरासत और बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाता है। यह टेक्सटाइल सेक्टर के लिए भारत के ‘विजन 2030’ रोडमैप को भी दर्शाता है।”
‘भारत टेक्स 2026’ की खासियतें
लेख के अनुसार, भारत टेक्स 2026 देश की संपूर्ण टेक्सटाइल वैल्यू चेन को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर रखता है। इसमें शामिल हैं:
– विनिर्माण क्षमता 
– प्राचीन और समृद्ध टेक्सटाइल विरासत
– बढ़ती वैश्विक मांग में भारत की मजबूत भागीदारी
शेयर किए गए लेख में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘5F विज़न’ – फार्म (खेत) से फाइबर (रेशा), फैक्टरी, फैशन और फॉरेन (विदेश) तक – से प्रेरित होकर, ‘भारत टेक्स 2026’ टेक्सटाइल वैल्यू चेन में बिजनेस, इन्वेस्टमेंट, इनोवेशन, पॉलिसी पर बातचीत और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक प्रमुख ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन गया है। यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के ‘विजन 2030’ को भी मजबूती प्रदान करता है, जिसका लक्ष्य भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को विश्व स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और अग्रणी बनाना है।
बता दें, पीएम मोदी ने इस लेख को NaMo ऐप के माध्यम से भी शेयर किया। यह पहल भारत को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी हुई है।
 

चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

15-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और हजारों तीर्थयात्री रोजाना पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है जबकि पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति खराब बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, हर दिन 6,000 से ज्यादा तीर्थ यात्री श्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर रहे हैं। वहीं मौजूदा तीर्थयात्रा सीजन के दौरान श्री केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है क्योंकि लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कई इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं, ट्रेकिंग के रास्ते फिसलन भरे हो गए हैं, भूस्खलन हो रहा है और मौसम से जुड़ी अन्य चुनौतियां पैदा हो गई हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों, खासकर चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश व खराब मौसम की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक इंतजाम जारी हैं।
बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद एक श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम यहां हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए आए थे। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद हमें लगा कि हमें बद्रीनाथ धाम के भी दर्शन करने चाहिए। हम यहां भी आए हैं और यह एक शानदार अनुभव रहा। सब कुछ अच्छा है। लोगों को यहां आना चाहिए, पूजा-अर्चना करनी चाहिए और इस जगह का आनंद लेना चाहिए।”
एक अन्य तीर्थयात्री ने भी मौजूदा मौसम की स्थिति के बावजूद यात्रा के लिए किए गए इंतजामों की सराहना की। श्रद्धालु ने कहा कि इंतजाम अच्छे हैं। हमारी तीर्थयात्रा अच्छी रही क्योंकि मौसम की स्थिति के बावजूद सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि मंगलवार शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक, 14 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा पूरी कर चुके हैं। अभी मौसम एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून के दौरान अक्सर सड़कें बंद हो जाती हैं और भूस्खलन का खतरा रहता है। तीर्थयात्रियों को सावधानी से यात्रा करनी चाहिए। उन्हें नदियों को पार करने और झरनों या जलधाराओं के पास जाने से बचना चाहिए क्योंकि पूरे राज्य में भारी बारिश हो रही है।
इससे पहले, मौसम के हालात को देखते हुए गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की थी कि वे यात्रा के दौरान मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चार धाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पर्याप्त तैयारियां और जरूरी इंतजाम मौजूद रहें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

15-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम् 2026’ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने AIIA के नए एमआरआई सेक्शन का भी उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने आयुर्वेद जगत से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आचार्य सुश्रुत, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है, ने सदियों पहले सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया था। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद, ट्यूमर उपचार और ईएनटी सर्जरी सहित कई जटिल शल्य तकनीकों की शुरुआत की।
राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत द्वारा रचित ‘सुश्रुत संहिता’ ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को चिकित्सा विज्ञान की नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण से जुड़ी हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को समयानुकूल आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समाज के हित में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का समग्र जीवन दृष्टिकोण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है और इसे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक एवं प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की परंपरा को वैज्ञानिक मानकों पर प्रमाणित करने के प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मानकीकृत दस्तावेजीकरण, डिजिटल हेल्थ इंटीग्रेशन और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों के प्रभावी उपयोग से आयुर्वेद को विश्व स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिलेगी।
युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासा, ईमानदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक अनुसंधान तथा उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां नई तकनीकों के उपयोग से पीछे नहीं हटना चाहिए और आचार्य सुश्रुत के मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा नैतिकता तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम 2026’ से आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नए ज्ञान का सृजन होगा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समग्र स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को और सशक्त बनाएंगे।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीर

15-Jul-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । भारत रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार है। इसे स्वच्छ, हरित और शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर हाइड्रोजन ट्रेन की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन हरियाणा से शुरू होने जा रही है।” उनकी इस पोस्ट के बाद इस परियोजना को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ गया है।
यह परियोजना भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल का हिस्सा है। इस योजना के तहत रेलवे भविष्य में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है, ताकि विरासत (हेरिटेज) और ग्रामीण मार्गों पर चल रहे पुराने डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।
नई ट्रेन को 10 कोच वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 सीटें हैं, जबकि कुल 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी लेकिन नियमित संचालन के लिए इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। चूंकि यह अभी एक पायलट परियोजना है, इसलिए इसे नियंत्रित और सावधानीपूर्वक तरीके से शुरू किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें चलते-फिरते बिजलीघर की तरह काम करती हैं। इनमें मौजूद हाइड्रोजन गैस और बाहरी वातावरण से मिलने वाली ऑक्सीजन को फ्यूल सेल के भीतर मिलाया जाता है। इस रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हानिकारक धुआं नहीं निकलता। इसके बजाय केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) और गर्मी उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन ट्रेनों का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त बनाना है, खासकर उन मार्गों पर जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना कठिन या बेहद महंगा है। हाइड्रोजन ट्रेनें बिना बड़े बुनियादी ढांचे के इलेक्ट्रिक ट्रेनों जैसे पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती हैं और इन्हें डीजल ट्रेनों की तरह कुछ ही मिनटों में दोबारा ईंधन भरकर चलाया जा सकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 15 जुलाई को करेंगी ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन

14-Jul-2026
नई दिल्ली।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार, 15 जुलाई को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित यह सेमिनार 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को पूर्व-कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
सेमिनार में आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा के एकीकरण पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के दौरान एनसीआईएसएम द्वारा तैयार “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन होगा। इस प्रणाली में एआई-सक्षम वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक्स और उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां होंगी। मुख्य विषयों में शामिल हैं:
– मलाशय रोग विज्ञान
– पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा
– एकीकृत ऑन्कोलॉजी
– चिकित्सा-कानूनी मुद्दे
– सर्जरी में बौद्धिक संपदा
– घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्सा
सेमिनार में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रमुख सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन शल्य विद्या को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







 

 


मानुका हनी से माओरी संस्कृति तक, पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड में गिनाईं दोनों देशों की समानताएं

11-Jul-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के आखिरी चरण में ऑकलैंड में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भले ही आपका शरीर न्यूजीलैंड में है, लेकिन आपकी आत्मा हिन्दुस्तान में है। भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे, पूरा हॉल मोदी-मोदी के नारे और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उंठा।
पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड की सभ्यता और विरासत को लेकर कहा, “भारत हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता है, जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में भारत ने खुद को बदला है। इसका कारण हमारी सीखने की ललक है। भारत सबसे सीखता है। हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं, जन कल्याण की भावना मायने रखती है। इसलिए हमने न्यूजीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड दुनिया का वो देश है, जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूजीलैंड की सोसायटी में महिलाएं बहुत बड़े पैमाने पर योगदान दे रही हैं। भारत भी महिलाओं के विकास का नेतृत्व करता है, महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है, ये न्यूजीलैंड ने करके दिखाया। इसकी ताकत कृषि के इर्द-गिर्द बनाया गया इकोसिस्टम है। ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे छोटे किसानों वाले बड़े कृषि देश के लिए बड़ी सीख है।
न्यूजीलैंड के मानुका शहद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड ने दिखाया है कि छोटे किसान भी बाजार के एक बड़े ब्रांड बन सकते हैं। न्यूजीलैंड की क्लाइमेट स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक में भी हमारे लिए सीखने के लिए बहुत कुछ है। न्यूजीलैंड के ‘मानुका हनी’ को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां शहद ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ा है, वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी शहद का बड़ा महत्व है। भारत में भी हम ‘बी कीपिंग’ को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में शहद के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो शहद आता है, वो सोना क्या हीरा बनता जा रहा है। न्यूजीलैंड के साथ शहद के प्रोडक्शन को बढ़ाने के बारे में बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
दोनों देशों के बीच खेल के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उन्होंने कहा कि इस साल इंडिया-न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशंस को एक साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी और उस टूर में मेजर ध्यानचंद के परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हो रही थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का दिल जीता था। कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं तो ये कोलैब का जमाना है।
रग्बी में सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “दोनों देश खेल में भी शानदार सहयोग कर सकते हैं; एक उदाहरण रग्बी का है। कुछ देर पहले ही पता चला कि ऑल ब्लैट्स ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए। इसके लिए न्यूजीलैंड हमारी बहुत मदद कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में न्यूजीलैंड रग्बी और रग्बी इंडिया के कोचिंग प्रोग्राम को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।”
स्पोर्ट्स टेक को लेकर भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां आने से पहले न्यूजीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप इवेंट में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन के नए आइडिया ने मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि इसमें भी हम साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण स्पेस के क्षेत्र में भी है। भारत के चंद्रयान ने जब चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड किया, तो पूरा न्यूजीलैंड नृत्य कर रहा था। उस दिन हम सबको गर्व हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। इस सफलता में और आपको गर्व दिलाने में न्यूजीलैंड की तकनीक का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। स्पेस सेक्टर यह बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूजीलैंड की इकोनॉमी एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती है, यही हमारे व्यापार समझौते की स्प्रिरिट है। यह व्यापार समझौता हमारे विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा।”
न्यूजीलैंड के माओरी समाज का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दोनों के व्यवसाय को अवसर देगा। दोनों देशों के बीच एक और बड़ी समानता है। यह समानता हमारी भारतीय संस्कृति की है, इसके संरक्षण की है। आज मैं ‘माओरी समाज’ को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं। मैंने हाक्का को केवल एक परफॉर्मेंस के रूप में नहीं देखा, मैंने इसमें एक समाज की आत्मा देखी है। इसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एक एहसास है। माओरी संस्कृति में एक बहुत ही सुंदर शब्द है, ‘मनाकितांगा,’ इसका मतलब है सम्मान देना, अपनापन देना और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं, ‘अतिथि देवो भवः।’ शब्द, परिवेश, पहनावा, और भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है। ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है, ‘फानो’, यानी कि परिवार।
उन्होंने आगे कहा कि इसमें कई पीढ़ियां होती हैं, रिश्ते और पूरा समुदाय होते हैं। भारत भी परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता। हमारे लिए परिवार एक संस्था है। माओड़डी परंपरा का एक और सुंदर विचार है, काइत्या कितांगा। यह हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं, संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। पृथ्वी हमारी माता है, इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं। मैं जानता हूं कि हजारों किमी दूर रहते हुए भी गदिल के किसी ना किसी कोने में दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही है। शरीर यहां होगा, मन वहां होगा। इसलिए आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नजर रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर देखते हैं तो बहुत सी चीजें छूट जाती है, लेकिन घर में टीवी पर देखते हैं तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसे ही आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। यही बात हमें सबसे खास बनाती है। भारतीय जिस देश में भी रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में पूरी तरह मदद करते हैं। अपने देश की विकास की भी जानकारी रखते हैं। हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।




 


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