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उपराष्ट्रपति ने हाई सीज फिशिंग के राष्ट्रीय कार्यक्रम का किया शुभारंभ, ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन भी लॉन्च

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हाई सीज (गहरे समुद्र) में सतत मत्स्य दोहन के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज भी लॉन्च किया और देशभर के 10 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन तथा मछुआरों को हाई सीज फिशिंग के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन सौंपे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। इससे भारतीय मछुआरे देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में मौजूद अपार समुद्री संसाधनों का सतत और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछुआरा समुदाय के साझा प्रयासों का परिणाम है, जो मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि के नए युग की शुरुआत करेगा।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है। इसके बावजूद समुद्र में मौजूद विशाल संसाधनों का अभी तक पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया है। अब तक मछली पकड़ने की गतिविधियां मुख्य रूप से तटीय इलाकों तक सीमित थीं, लेकिन नई व्यवस्था के तहत भारतीय मछुआरे अब समुद्र की टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों का सतत दोहन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। यह क्षेत्र देश के करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका का आधार है। पिछले वित्त वर्ष में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 73,000 करोड़ रुपए से अधिक रहा। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई सीज पहल से निर्यात में और वृद्धि होगी तथा मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि नई व्यवस्था में मत्स्य सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता के आधार पर लेटर ऑफ ऑथराइजेशन दिए जाएंगे। उन्होंने इसे तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सतत मत्स्य पालन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। आर्थिक विकास के साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उपराष्ट्रपति डिजिटल ऑथराइजेशन सिस्टम, जहाजों की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अवैध, बिना रिपोर्टिंग तथा अनियमित मत्स्य पालन पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
युवाओं से अपील करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक पेशा न मानें, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा आधुनिक व्यवसाय समझें। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और संबंधित एजेंसियों से मछुआरा समुदाय को ज्ञान, तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी कहा कि ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन एक दूरदर्शी पहल है, जो ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी डीप-सी फिशिंग और समुद्री निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।” कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं एमएसएमई राज्य मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य संस्थानों के प्रतिनिधि, मछुआरा संगठनों के सदस्य और अन्य हितधारक भी मौजूद रहे।

 

मेलबर्न में हुए कम्युनिटी प्रोग्राम में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी ने इसे और भी खास बना दिया : प्रधानमंत्री मोदी

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गुरुवार को भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेलबर्न ने सचमुच सबका दिल जीत लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि मेलबर्न में हुए कम्युनिटी प्रोग्राम में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी ने इसे और भी खास बना दिया। उनका भाषण शानदार था, जिसमें भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और हमारी साझेदारी को वे कितना महत्व देते हैं, यह साफ झलकता था।
पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने मित्र और भारत के मित्र प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ का भी बहुत आभारी हूं। आप सिडनी में हमारे साथ थे और आज आप यहां मेलबर्न में भी भारतीय समुदाय के साथ शामिल हुए हैं; एक तरह से, यह सफर पूरा हो गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम वाले शहर अहमदाबाद से लेकर मशहूर स्टेडियम वाले शहर मेलबर्न तक हम दोनों जगहों पर साथ रहे हैं। हम सबने देखा है कि जब भी प्रधानमंत्री अल्बानीज़ बोलते हैं, तो वे भारतीयों का दिल और दिमाग जीत लेते हैं। आपने सिडनी में ज़बरदस्त छाप छोड़ी और यहां भी आपने सबका दिल जीत लिया है।
भारतीय समुदाय को संबोधित करने के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्पोर्ट्स सेक्टर हम दोनों देशों की साझेदारी को अधिक मजबूती प्रदान करता है। स्पोर्ट्स की दुनिया में ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रांड है। खेलो इंडिया मिशन केवल एक स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं है। इस मिशन के तहत भारत के रिमोट इलाकों में भी स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है… 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स भारत होस्ट कर रहा है। भारत 2036 में ओलंपिक खेलों को होस्ट करने का भी दावेदार है।
वहीं, सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, धन्यवाद मेलबर्न ! धन्यवाद ऑस्ट्रेलिया! आज का दिन ज़बरदस्त था।





 

पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के सच्चे और मेरे प्रिय मित्र’, मेलबर्न मीट्स मोदी में बोले अल्बनीज

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑस्ट्रेलिया का “सच्चा और अपना प्रिय मित्र” बताते हुए कहा कि मेलबर्न में भारतीय नेता की मेजबानी करना उनके लिए सम्मान की बात है। भारतीय समुदाय के लिए आयोजित भव्य कार्यक्रम ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ में अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
मेलबर्न के प्रसिद्ध मार्वल स्टेडियम में गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग मौजूद रहे। अल्बनीज ने कहा कि इस स्टेडियम ने वर्षों में कई यादगार कार्यक्रम देखे हैं, लेकिन भारतीय समुदाय का यह आयोजन सबसे खास और महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी, मेरे मित्र, शानदार मेलबर्न में आपका स्वागत है। ऑस्ट्रेलिया के सच्चे मित्र और मेरे बेहद प्रिय मित्र के रूप में आपकी मेजबानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”
उन्होंने कहा कि स्टेडियम में मौजूद लोगों की ऊर्जा भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी की भावना को दर्शाती है। यह उत्साह और सकारात्मकता दोनों देशों और उनके लोगों के बीच मजबूत होते संबंधों को आगे बढ़ाने वाली शक्ति है।
अल्बनीज ने भारत की अपनी यात्राओं को याद करते हुए कहा कि उन्हें दो बार भारत जाने का अवसर मिला और हर यात्रा ने उन्हें देश की विविधता, सुंदरता और लोगों की गर्मजोशी से प्रभावित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2023 में गुजरात यात्रा के दौरान किए गए स्वागत को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने उनका भारत में स्वागत किया था, तब दोनों नेताओं ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रथ की सवारी की थी। उन्होंने कहा कि गुजरात में 2023 के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच जो आत्मीयता उन्होंने महसूस की थी, वही भावना मेलबर्न में मौजूद भारतीय समुदाय के बीच भी दिखाई दे रही है।
अल्बनीज ने कहा कि यह अवसर दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाले रिश्ते, आपसी सम्मान, मजबूत दोस्ती और भारत से जुड़े 10 लाख से अधिक ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के योगदान का उत्सव है।
उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग राष्ट्रीय संकट और जरूरत के समय सबसे पहले मदद के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, छोटे व्यवसायों और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलिया की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारतीय छात्रों के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत से आने वाले विद्यार्थी ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा व्यवस्था और समाज को समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच “जीवंत पुल” बताते हुए कहा कि उनकी संस्कृति, मेहनत और देश के प्रति समर्पण ने ऑस्ट्रेलिया को और मजबूत, बेहतर तथा अधिक विविध बनाया है।
अल्बनीज ने कहा कि भारतीय समुदाय की वजह से ऑस्ट्रेलिया एक अधिक समृद्ध और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र बना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह रिश्ता केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है।

उत्तराखंड: चमोली में पहाड़ी से भारी बोल्डर और मलबा गिरा, नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग बंद

08-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) लगातार हो रही बारिश के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बुधवार सुबह नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग पर पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गिरा। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और स्कूली बच्चों समेत आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, चमोली जिले के नंदप्रयाग–नंदानगर मोटर मार्ग पर चमन मंदिर के पास यह घटना हुई। यहां अचानक पहाड़ी से विशाल बोल्डर और मलबा सड़क पर गिरा गया। देखते ही देखते मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सुबह का समय होने के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, शिक्षकों और दैनिक यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई शिक्षक खुद सड़क पर उतरे और बोल्डरों को हटाने का प्रयास किया, लेकिन बड़े पत्थरों के कारण मार्ग नहीं खुल सका।
उधर, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 13 जुलाई तक उत्तराखंड के अधिकतर जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। 8 जुलाई को भी उत्तराखंड राज्य के जनपदों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कई जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, राज्य के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश के साथ गर्जन और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।
अधिकारियों ने लोगों को अलर्ट किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टानें गिरने की आशंका है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों और राजमार्गों पर अवरोध उत्पन्न हो सकता है। नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर में वृद्धि और अतिप्रवाह की स्थिति बन सकती है। इसके साथ ही, निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है।
अधिकारियों ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि सावधानी पूर्वक यात्रा करें। साथ ही, छोटी नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 


कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने शुरू की ‘प्रगति’ पहल, 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

08-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को 20,000 कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने और 20 लाख किसानों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि क्षेत्र और समृद्ध गांवों के बिना वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।
कृषि को लाभकारी बनाने पर सरकार का जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधता को बढ़ावा देना और कृषि को अधिक लाभदायक बनाना भी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मूल्यवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है।
तकनीक और बाजार से किसानों को जोड़ने की पहल
कृषि मंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ पहल इसी सोच का विस्तार है। इसके माध्यम से किसानों को प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर बाजार पहुंच से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार होंगे।
एसबीआई फाउंडेशन और गेट्स फाउंडेशन का सहयोग
अधिकारी के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (एसबीआईएफ) और गेट्स फाउंडेशन सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार यह कार्यक्रम छोटे किसानों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक, समावेशी और जलवायु-लचीली पुनर्योजी कृषि पहल को गति देगा। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में पहले से लागू कृषि-उद्यमिता पहलों से मिली सीख के आधार पर तैयार किया गया है।
कृषि उद्यमियों का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य
‘प्रगति’ कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समावेशी भागीदारी और संतुलित प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए 26,000 से अधिक कृषि उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के अलावा 20,000 नए कृषि उद्यमियों का राष्ट्रव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
किसानों की आजीविका मजबूत करने पर जोर
इस पहल का समर्थन करने वाली संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष (वैश्विक सामाजिक प्रभाव) मोनिका बाउर ने कहा कि किसान स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी आजीविका को समर्थन देना मजबूत खाद्य प्रणाली के निर्माण के लिए आवश्यक है। वहीं, जागृत कोटेचा ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती के लिए जरूरी उपकरण और ज्ञान उपलब्ध कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य प्रणालियों को और मजबूत बनाया जा सके।
आठ राज्यों में लागू होगा कार्यक्रम
अधिकारी ने बताया कि ‘प्रगति’ पहल मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में लागू की जाएगी। 

 


समुद्री क्षेत्र में भारत की ताकत बढ़ी, कामराजार पोर्ट ने हासिल की नई क्षमता

08-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने ‘कैपिटल ड्रेजिंग फेज VI’ परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर 18 मीटर परिचालन ड्राफ्ट क्षमता हासिल कर ली है। इसके साथ ही कामराजार बंदरगाह, विशाखापत्तनम बंदरगाह के बाद देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह बन गया है, जहां 18 मीटर ड्राफ्ट वाले बड़े जहाजों का संचालन संभव होगा। अब यह बंदरगाह 1,70,000 टन तक भार ढोने वाले विशाल कैपसाइज जहाजों को संभाल सकेगा।
440 करोड़ रुपए के निवेश से पूरी हुई ड्रेजिंग परियोजना
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समुद्री क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मैरिटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत देश में विश्वस्तरीय बंदरगाह और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 18 मीटर ड्राफ्ट क्षमता वाला देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह बनना कामराजार पोर्ट की आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार समुद्री अवसंरचना की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बड़े कैपसाइज जहाजों के संचालन की बढ़ी क्षमता
‘कैपिटल ड्रेजिंग फेज VI’ परियोजना को लगभग 440 करोड़ रुपए के निवेश से पूरा किया गया है। इसके तहत बाहरी पहुंच मार्ग की गहराई 20 मीटर से बढ़ाकर 23 मीटर और आंतरिक प्रवेश मार्ग की गहराई 19 मीटर से बढ़ाकर 22 मीटर की गई है। इसके अलावा 18 मीटर ड्राफ्ट वाले जहाजों के संचालन के लिए बर्थ, हार्बर बेसिन और संबंधित नौवहन क्षेत्रों को भी विकसित किया गया है।
माल ढुलाई लागत घटाने और व्यापार बढ़ाने में मिलेगी मदद
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि परियोजना पूरी होने से कामराजार पोर्ट अब पूरी तरह लदे 1,70,000 टन तक के कैपसाइज जहाजों को संभालने में सक्षम हो गया है। इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह भारत के आयात-निर्यात व्यापार के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।
समुद्री क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति होगी मजबूत
बढ़ी हुई ड्राफ्ट क्षमता से जहाजरानी कंपनियां बड़े जहाजों का संचालन कर सकेंगी। इससे बड़े पैमाने पर कार्गो परिवहन संभव होगा और परिचालन दक्षता में सुधार आएगा। कामराजार पोर्ट की ‘केप कंप्लायंट’ गहराई इसे भारी मात्रा में कार्गो संभालने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के बंदरगाहों की श्रेणी में शामिल करती है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों के बीच इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
भारत के समुद्री विकास अभियान को मिलेगी नई गति
कामराजार पोर्ट की यह उपलब्धि भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक व्यापार में देश की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधुनिक बंदरगाह क्षमता से देश की आर्थिक वृद्धि और समुद्री व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।  
 

 


कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जम्मू बेस कैंप से अमरनाथ यात्रियों का सातवां जत्था रवाना

08-Jul-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भक्तिमय वातावरण के बीच बुधवार को अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का सातवां जत्था जम्मू बेस कैंप से रवाना हुआ। यात्रियों में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने यात्रा की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों की सराहना करते हुए इसे संतोषजनक बताया।एक श्रद्धालु ने बातचीत के दौरान कहा, “अमरनाथ यात्रा का अवसर केवल बाबा बर्फानी की कृपा से मिलता है।” उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में पहली बार दर्शन करने का अवसर मिला था और अब लगातार दूसरे वर्ष भी बाबा ने बुलाया है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा उन्हीं श्रद्धालुओं को नसीब होती है, जिन्हें भोलेनाथ का बुलावा आता है।
उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2022 से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से भारत भ्रमण पर हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा में 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, सात सप्तपुरी, 51 शक्तिपीठ, 108 सिद्धपीठ, पंच कैलाश, पंच केदार, पशुपतिनाथ और अमरनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन शामिल हैं।श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। एक यात्री ने कहा कि पहले यात्रा के दौरान कई बार सुरक्षा कारणों से यात्रा रोकने की खबरें आती थीं, लेकिन अब सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती है और श्रद्धालु खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सतर्कता की वजह से श्रद्धालु निश्चिंत होकर बाबा के दर्शन कर पा रहे हैं।
एक श्रद्धालु ने कहा, “यह बहुत अद्भुत है और जिस तरह से यहां सुरक्षा व्यवस्था है, वह भी बहुत अच्छा है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री और सरकार को जाना चाहिए।” एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मौसम काफी ठंडा होगा, लेकिन यहां गर्मी महसूस हो रही है। हालांकि, उन्होंने यात्रा प्रबंधन की तारीफ करते हुए कहा कि अधिकारी और कर्मचारी हर कदम पर यात्रियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं, एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि यात्रा के दौरान सभी व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं। उन्होंने बताया कि सेवा, सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक है, जिससे सभी श्रद्धालु खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

 


भारत इंडोनेशिया में प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण में मदद करेगा, पीएम मोदी बुधवार को इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि वे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर योग्याकार्ता में 1,000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे।
इंडोनेशिया रवाना होने से पहले दिए अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। उन्होंने इस स्मारक को भारत और इंडोनेशिया को एक हज़ार से ज़्यादा सालों से जोड़ने वाले गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का “एक और शानदार सबूत” बताया।
जकार्ता के इस्ताना मर्देका में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद आज एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मुझे, योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट को लॉन्च करने का सौभाग्य मिलेगा। एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
दरअसल, यह संरक्षण प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का हिस्सा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) प्रम्बानन परिसर में मौजूद कई छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
प्रम्बानन, इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के पास स्थित सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है। इसमें 9वीं सदी ईस्वी में बनी मूल संरचनाएं शामिल हैं। भूकंप (जिसमें मई 2006 का जावा भूकंप भी शामिल है), ज्वालामुखी विस्फोट और 11वीं सदी की शुरुआत में राजनीतिक सत्ता में बदलाव के कारण ये मंदिर ढह गए थे, और 17वीं सदी में इन्हें फिर से खोजा गया।
प्रम्बानन मंदिर असल में एक कॉम्प्लेक्स है, जिसमें शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित 240 मंदिर हैं। प्रम्बानन को तीन एक-दूसरे के अंदर बने चौकोर हिस्सों के रूप में डिज़ाइन किया गया था। पूरे परिसर में कुल 224 मंदिर हैं। सबसे अंदर वाले चौकोर हिस्से में 16 मंदिर हैं, जिनमें सबसे मुख्य 47 मीटर ऊंचा केंद्रीय शिव मंदिर है; इसके उत्तर में ब्रह्मा का मंदिर और दक्षिण में विष्णु का मंदिर है।
यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है; इसके अनुसार, मंदिर की पत्थर की नक्काशी में रामायण महाकाव्य के इंडोनेशियाई संस्करण को दर्शाया गया है।
प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया और इस क्षेत्र में शास्त्रीय काल की उत्कृष्ट कृति के रूप में शिव कला की भव्य संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। वैश्विक संस्था ने बताया कि 1918 से ही इसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिसमें पत्थरों को आपस में जोड़ने की पारंपरिक विधि और मंदिर के ढांचे को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के इस्तेमाल वाली आधुनिक विधि, दोनों का उपयोग किया गया है। मई से अक्टूबर के महीनों में पूर्णिमा की शाम को, मंदिर के दक्षिणी हिस्से में बने खुले थिएटर में रामायण बैले का मंचन किया जाता है।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के पहले शिक्षा मंत्री देवांतारा की साझा विरासत का सम्मान करने के लिए आने वाले साल को ‘सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति का टैगोर-देवान्तरा वर्ष’ घोषित किया।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम दोनों देश गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा का शताब्दी वर्ष भी धूम-धाम से मनाएंगे। इंडोनेशिया की विकास यात्रा में महान शिक्षाविद और यहां के पहले शिक्षा मंत्री देवान्तरा जी का अहम योगदान रहा है। शिक्षा को लेकर उनके विचारों पर गुरुदेव टैगोर की सोच का गहरा प्रभाव था। इसलिए भारत-इंडोनेशिया, इस शताब्दी वर्ष को “टैगोर और देवान्तरा year of कल्चरल एण्ड एजुकेशनल डिप्लोमेसी” के रूप में मनाएंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सुबियांतो के निमंत्रण पर दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, आज मंगलवार को पीएम मोदी ने स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों और सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने एक निजी बैठक की, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता हुई।

भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का शुरू होगा नया स्वर्णिम अध्याय : पीएम मोदी

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में नई ऊर्जा, नया विश्वास और नई गहराई आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नई उड़ान भर रही है और दोनों देश विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आज से दोनों देशों की साझेदारी का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया और मानवता पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किए जाने पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, वहां की सरकार और जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों, भारत-इंडोनेशिया की ऐतिहासिक मित्रता और दोनों देशों के लोगों के स्नेह का सम्मान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों के कोस्ट गार्ड हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों के लिए गरीबी उन्मूलन और नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिड-डे मील योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनुभव साझा किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौते से इंडोनेशिया के लोगों को भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। भारत वहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। इसके अलावा भारत में विकसित गेहूं के बीजों की आपूर्ति तथा टिकाऊ खेती और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक आधारित सदी है और दोनों देशों के युवा तकनीक के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरसंचार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देश स्टार्टअप सहयोग को भी और गहरा करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु का परिसर खोला जाएगा, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराना सहयोग रहा है। अब दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझा करने और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स, स्टील सप्लाई चेन, स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में भी नए समझौते किए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की यूपीआई सेवा जल्द ही इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जुड़ जाएगी, जिससे कारोबार और यात्रा दोनों आसान होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों नेता योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण परियोजना की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों देश ‘टैगोर और देवान्तरा वर्ष : सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति’ के रूप में विशेष आयोजन करेंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता भारत और इंडोनेशिया की साझा ताकत हैं। दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से लोकतांत्रिक सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों देशों की सोच समान है और भारत हमेशा आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत ने दो-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के सामने एक स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि का भविष्य उन्हें और करीब लाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर ‘इंडोनेशिया एमास’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करेंगे। 




 

 


दिल्ली रिज बनेगा राजधानी का ‘ग्रीन लंग्स’, अमित शाह ने शुरू किया 70 लाख पौधारोपण अभियान

07-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के महत्वाकांक्षी 70 लाख पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली के रिज क्षेत्र में बड़ी संख्या में कांटेदार बबूल और कई तरह के ऐसे पेड़ हैं, जो देखने में हरियाली का अहसास तो कराते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए उतने लाभदायक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू कर रही है।
गृह मंत्री ने बताया कि 1994 में भारतीय वन अधिनियम के तहत 7,784 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को अधिसूचित किया गया था, लेकिन पिछले 30 वर्षों में इसकी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसके संरक्षण की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अमित शाह ने रेखा गुप्ता सरकार की सराहना करते हुए कहा कि अब 5,000 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही पूरे रिज क्षेत्र को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके जरिए रिज की जैव विविधता को पुनर्जीवित, मिट्टी और जल संसाधनों का संरक्षण तथा दिल्ली के पर्यावरण को नई ऊर्जा और नया जीवन देने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में पूरे रिज क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से पीपल, बरगद, नीम, गूलर, अर्जुन और जामुन जैसे ऐसे पेड़ लगाए जाएंगे, जो 100 वर्ष से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसी के साथ दिल्ली रिज को राजधानी के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में विकसित करने का मिशन शुरू हो गया है।
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भी जमकर सराहना की। उन्होंने इसे देश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठा प्रयास बताया। इस अभियान में नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) भी अहम भूमिका निभा रही है। एनडीएमसी ने इस अभियान के तहत करीब 600 पेड़ और 50 हजार झाड़ियां लगाने का लक्ष्य रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज दिल्ली सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक ही मंच से आयोजित किए गए हैं। इनमें नरेला में हाई सिक्योरिटी प्रिजन का शिलान्यास, स्वचालित वाहन टेस्टिंग सेंटर और तीन नव निर्मित डेपो का लोकार्पण किया गया। साथ ही, 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की शुरुआत भी हुई।”
उन्होंने कहा, “आज दिल्ली सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक ही मंच से आयोजित किए गए हैं। इनमें नरेला में हाई सिक्योरिटी प्रिजन का शिलान्यास, स्वचालित वाहन टेस्टिंग सेंटर और तीन नव निर्मित डिपो का लोकार्पण किया गया। साथ ही, 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की शुरुआत भी हुई।

 



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