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उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने पर सहमति

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो पुराने व्यापार मार्गों से जुड़े हैं।”
राष्ट्रपति सचिवालय ने आगे लिखा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी फायदेमंद साझेदारी को गहरा करने का मौका देता है। 
इससे पहले दिन में सैदोव बख्तियार ओडिलोविच भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके स्वागत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा, “उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का नई दिल्ली में आधिकारिक दौरे पर आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है।”
सैदोव भारत सरकार के निमंत्रण पर तीन से पांच अगस्त तक भारत में रहेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वे नई दिल्ली में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होगी।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और उज्बेकिस्तान व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं। दौरे से पहले 20 जुलाई को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सैदोव से टेलीफोन पर बात की थी। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। 
डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि बातचीत व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी। सैदोव ने भी बातचीत को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों पक्ष विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसेमंद संवाद जारी रखने पर सहमत हुए। भारत और उज्बेकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी के तहत करीबी कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा है। दोनों देशों ने मई में नई दिल्ली में फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन का 17वां राउंड आयोजित किया था, जहां अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और आपसी हितों वाले क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।




 

एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक 4 अगस्त को, भाजपा संसदीय दल ने जारी किया पत्र

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ मंगलवार, 4 अगस्त को आयोजित की जाएगी। इसको लेकर भाजपा संसदीय दल की ओर से एक पत्र जारी किया गया है।
भाजपा संसदीय दल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, “राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक, ‘मंगल-मिलन,’ 4 अगस्त (मंगलवार) को सुबह 9.30 बजे संसद भवन ग्रंथालय के जी.एम.सी. बालायोगी सभागृह में आयोजित की जाएगी। राजग के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा के माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया समय से पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान करने का कष्ट करें।”‘
बता दें कि 21 जुलाई को ‘मंगल मिलन’ के तहत पहली बैठक आयोजित की गई थी। परंपरागत रूप से संसद के प्रत्येक सत्र के दौरान एनडीए संसदीय दल की बैठक हर मंगलवार को आयोजित होती रही है। हालांकि इस बार इसे ‘मंगल मिलन’ नाम दिया गया है। गठबंधन का कहना है कि इस नए नाम के जरिए नियमित संसदीय बैठकों को सांस्कृतिक और संगठनात्मक पहचान देने का प्रयास किया गया है।
28 जुलाई को भी ‘मंगल मिलन’ बैठक हुई थी। इस बैठक में पहली बार तृणमूल कांग्रेस के पूर्व बागी नेता और अब एनसीपीआई सांसद शामिल हुए थे। एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष भी इस बैठक में शामिल हुईं। ये सभी पहले तृणमूल कांग्रेस में थीं।
एनसीपीआई सांसद काकोली घोष ने बताया था कि 2014 से पहले उन्होंने इस तरह की बैठकें नहीं देखी थीं, और एनडीए में शामिल होकर उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि एनसीपीआई के सभी सांसद मिलकर काम कर रहे हैं। एनसीपीआई सांसद शताब्दी रॉय ने बैठक की सराहना करते हुए कहा था कि यह बेहद व्यवस्थित तरीके से आयोजित की गई थी। इसमें संसद में आने वाले विधेयकों, देश के विजन और सरकार की विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
एनसीपीआई सांसद सायनी घोष ने भी बैठक को ज्ञानवर्धक बताया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री बैठक में मौजूद थे। बैठक में ब्लू इकोनॉमी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक विषयों पर विस्तार से प्रस्तुति दी गई। 

शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

03-Aug-2026
रायपुर। (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।
अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।
जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।
सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।
राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।
सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 
दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।












 

राष्ट्रपति मुर्मु ने पीबीजी सोल्जरथॉन को दिखाई हरी झंडी, मांडविया ने एनसीसी साइक्लोथॉन में लिया हिस्सा

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में ‘पीबीजी सोल्जरथॉन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह भी मौजूद रहे, जो इस पहल के संरक्षक हैं। वहीं, केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण भी शुरू हुआ।
‘सैनिकों के साथ दौड़ें-सैनिकों के लिए दौड़ें’ थीम पर आयोजित पीबीजी सोल्जरथॉन का उद्देश्य फिटनेस और देशभक्ति को बढ़ावा देने के साथ सशस्त्र बलों के साहस, बलिदान और सेवा का सम्मान करना था। इसमें सैनिकों के साथ आम नागरिकों ने भी हिस्सा लिया और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता का संदेश देते हुए दौड़ लगाई।
सोल्जरथॉन में प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज और कार्यक्रम के बैनर लेकर हिस्सा लिया। इस दौरान सैनिकों के प्रति सम्मान, आभार और एकजुटता की भावना प्रदर्शित की गई। आयोजन ने नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ‘सैनिकों के लिए दौड़ें, सैनिकों के साथ दौड़ें’ के विजन से प्रेरित सोल्जरथॉन आम नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को मजबूत करने का अनूठा मंच है। उन्होंने कहा कि ‘असली नायकों (सशस्त्र बलों) का समर्थन’ थीम पर आधारित यह आयोजन सैनिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को सम्मान देता है। साथ ही यह नागरिकों को सक्रिय भागीदारी के जरिए सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए प्रेरित करता है।
आजादी के 79 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया गया। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसे हरी झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में बॉक्सर और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने भी हिस्सा लिया।
मनसुख मांडविया ने कहा कि देश की आजादी के 79 साल पूरे होने के जश्न के तहत 79 एनसीसी कैडेट साइक्लोथॉन में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनसीसी फिटनेस, अनुशासन और समाज सेवा का प्रतीक है। ये कैडेट देश का भविष्य और उम्मीद हैं। साइक्लोथॉन के जरिए युवा यह संदेश दे रहे हैं कि वे विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।
एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 में शामिल मैरी कॉम ने युवाओं से जीवन में आगे बढ़ने और बहुत कुछ हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी की यूनिफॉर्म सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि युवाओं को यही भावना सिखाना जरूरी है।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण शुरू किया गया। कार्यक्रम के जरिए फिटनेस को बढ़ावा देने के साथ युवाओं और आम लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।








 

 


सफदरजंग अस्पताल में दुनिया की पहली रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी, भारत ने रचा इतिहास

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) नई दिल्ली स्थित वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित वयस्क मरीज की रोबोटिक तकनीक से सफल सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी दुनिया में पहली बार की गई है। इस सफलता को वैश्विक चिकित्सा जगत में भारत की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग की टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुभव गुप्ता ने किया। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की जटिल हृदय संरचना को ध्यान में रखते हुए रोबोटिक तकनीक से वाल्व रिप्लेसमेंट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ऑपरेशन किए गए मरीज को दो बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय समस्याएं थीं। इनमें पहली कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (सीसीटीजीए) थी, जिसमें हृदय के निचले कक्ष सामान्य स्थिति के उलट होते हैं। इसके कारण हृदय के दाहिने हिस्से को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है।
मरीज को डेक्स्ट्रोकार्डिया की समस्या भी थी, जिसमें हृदय सामान्य बाईं ओर के बजाय दाईं ओर स्थित होता है। दोनों स्थितियों के कारण मरीज का एवी वाल्व गंभीर रूप से खराब हो गया था और हृदय की कार्यक्षमता लगातार कम हो रही थी। इस जटिल शारीरिक संरचना ने सर्जरी को सामान्य रोबोटिक प्रक्रिया से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर हृदय की थ्री-डी इमेज तैयार की। इससे डॉक्टरों को हृदय की असामान्य और जटिल बनावट को विस्तार से समझने में मदद मिली। इसके आधार पर ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की गई, ताकि सर्जरी के दौरान किसी भी संभावित चुनौती से निपटा जा सके।
आमतौर पर रोबोटिक हार्ट सर्जरी छाती के दाईं ओर से की जाती है, लेकिन मरीज का हृदय दाईं ओर स्थित होने के कारण इस तकनीक को बदलना पड़ा। डॉक्टरों ने बाईं ओर से रोबोटिक सर्जरी करने की रणनीति अपनाई। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया पहली बार अपनाई गई और यह सर्जिकल दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी काटने के बजाय छोटे-छोटे छिद्रों के जरिए रोबोटिक उपकरणों और हाई-डेफिनिशन 3डी विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इससे डॉक्टरों को अत्यधिक सटीकता के साथ खराब एवी वाल्व को बदलने में मदद मिली और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
रोबोटिक तकनीक से की गई इस तरह की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में छाती की हड्डी काटने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मरीज को कम दर्द होता है और रक्तस्राव भी अपेक्षाकृत कम होता है। संक्रमण का जोखिम घटने के साथ मरीज के जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटने की संभावना भी बढ़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक जटिल सर्जरी की सफलता नहीं है, बल्कि भारत के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता की बढ़ती क्षमता का प्रमाण भी है। इससे यह संदेश मजबूत हुआ है कि सरकारी संस्थानों में भी विश्वस्तरीय उपचार और अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सफदरजंग अस्पताल की यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के इलाज के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। साथ ही, इस तरह की सर्जिकल तकनीक दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए नए शोध और उपचार पद्धतियों के विकास का आधार बन सकती है।





 

भारतीय नौसेना को मिला पांचवां गोताखोरी सहायक पोत, डीएससी ए-24 का कोलकाता में जलावतरण

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पांच गोताखोरी सहायक जहाज (डीएससी) परियोजना के तहत निर्मित पांचवें पोत डीएससी ए-24 (यार्ड-329) का 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में आयोजित समारोह में जलावतरण किया गया। कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में कमल सिंह ने जहाज का औपचारिक जलावतरण किया। समारोह में भारतीय नौसेना और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के वरिष्ठ अधिकारियों समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
जलावतरण समारोह भारतीय नौसेना की समृद्ध परंपराओं के अनुरूप सैन्य गरिमा और निर्धारित औपचारिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया गया। इस दौरान नौसेना और टीआरएसएल के अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति और जहाज की विशेषताओं से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी साझा की।
गोताखोरी सहायक जहाजों का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल), कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। डीएससी परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे ये पोत भारतीय नौसेना की गोताखोरी और पानी के भीतर सहायता से जुड़ी परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
इन जहाजों की विस्थापन क्षमता करीब 300 से 400 टन है और इन्हें द्वि-पतवार डिजाइन पर आधारित बनाया गया है। इस डिजाइन से समुद्र में बेहतर स्थिरता के साथ अधिक डेक क्षेत्र मिलता है। चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में भी इनकी संचालन क्षमता बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे ये गोताखोरी अभियानों के लिए उपयुक्त बनते हैं।
पोतों का डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) द्वारा निर्धारित नौसैनिक मानकों और नियमों के अनुरूप किया गया है। इससे इन जहाजों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
भारतीय नौसेना में इन जहाजों के शामिल होने से गोताखोरी सहायता, पानी के भीतर जांच और बचाव अभियानों में सहायता की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा तटीय क्षेत्रों में इनकी तैनाती से नौसेना की परिचालन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
डीएससी ए-24 समेत इन जहाजों में इस्तेमाल होने वाले करीब 70% मुख्य और सहायक उपकरण घरेलू निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं। इससे देश में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिलती है।
गोताखोरी सहायक जहाज परियोजना भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घरेलू उद्योग की भागीदारी से निर्मित ये पोत भारतीय नौसेना की बढ़ती स्वदेशी क्षमता को भी दर्शाते हैं।
















 

पीएम मोदी ने जारी किए वाल्मीकि रामायण और वेदांत भिक्षुओं की कहानियों के कन्नड़ अनुवाद

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मैसूर में रामकृष्ण आश्रम द्वारा निर्मित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र (विवेक स्मारक) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वाल्मीकि रामायण और ‘स्टोरीज ऑफ वेदांत मंक्स’ के कन्नड़ अनुवाद भी जारी किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अनुवादों के माध्यम से भारत की कालातीत आध्यात्मिक और साहित्यिक विरासत कन्नड़ भाषी पाठकों, विशेषकर युवाओं के करीब पहुंचेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन प्रकाशनों से युवा अपनी मातृभाषा के माध्यम से देश की सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराना नई पीढ़ी तक विरासत पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रामकृष्ण आश्रम की अपनी यात्रा और साधुओं से बातचीत की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने कहा कि मैसूर स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम में जाना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। प्रधानमंत्री ने समाज सेवा और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में आश्रम के प्रयासों की सराहना की।
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने आश्रम के साधुओं से बातचीत की। उन्होंने समाज सेवा के लिए संस्था की ओर से किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने श्री रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के माध्यम से मूल्यों, शिक्षा और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में रामकृष्ण आश्रम की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विवेक स्मारक के उद्घाटन का स्वागत किया। उन्होंने इसे कर्नाटक के लिए ऐतिहासिक अवसर और स्वामी विवेकानंद की विरासत को श्रद्धांजलि बताया।
सूर्या ने कहा कि सांस्कृतिक नगरी मैसूर ने एक और ऐतिहासिक अवसर देखा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस विवेक स्मारक का उद्घाटन किया है, वह 1892 में स्वामी विवेकानंद की मैसूर यात्रा की स्मृति में बनाया गया है। उन्होंने इसे कर्नाटक के लिए गर्व का विषय बताया।
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कार्यक्रम परम पूज्य श्री गौतम आनंद जी महाराज की उपस्थिति में हुआ और यह रामकृष्ण आश्रम की स्थायी विरासत को दर्शाता है। स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि विवेक स्मारक देशभर के लाखों युवाओं को प्रेरित करेगा।
सूर्या ने कहा कि विवेक स्मारक केवल एक स्मारक नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से युवा भविष्य के भारत के निर्माण में योगदान देने और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे।






 

100 सप्ताह का नशामुक्ति अभियान बनेगा जन आंदोलन, नशे से दूर रहें युवा, विकसित भारत के निर्माण में निभाएं भूमिका : पीएम मोदी

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में उन्होंने हर नागरिक, खासकर युवाओं से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का तन-मन से स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरपूर और नशे जैसी घातक आदतों से दूर रहना जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह अभियान व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभियान का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है। जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तब यह आवश्यक है कि युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें, आत्मविश्वास से भरपूर हों और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा दूर रहें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी को यह संकल्प लेना होगा कि देश के युवा नशे और ड्रग्स के खतरे को समझें, हर तरह से जागरूक रहें और इससे दूर रहें। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें व्यक्ति अकेले करने का प्रयास करता है तो निराशा और थकान महसूस हो सकती है। लेकिन जब वही काम सामूहिक अभियान बन जाता है और करोड़ों लोग कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हैं, तो उसमें नई ऊर्जा पैदा होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी सामूहिक शक्ति के साथ चलाया जा रहा यह अभियान हर युवा के मन को छुएगा।
युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस बड़े अभियान के लीडर हैं। उन्होंने युवाओं की जागरूकता, समझदारी और कर्तव्यों के प्रति गंभीरता की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि युवा भारत की ‘अमृतपीढ़ी’ हैं और अगले 20-25 वर्षों में वे अपने जीवन को दिशा देने के साथ 2047 तक देश को विकसित भारत की मंजिल तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि देश को युवाओं की ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा की जरूरत है। इसलिए देश और अपने जीवन के लिए युवाओं का नशामुक्त रहना बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 100 रविवार ‘नशा मुक्त भारत’ की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा गलती से नशे की गिरफ्त में आ भी गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने परिवारों से अपील की कि यदि घर का कोई बच्चा नशे का शिकार हो गया है तो सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों और चिकित्सा सहायता की मदद लेकर बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। साथ ही, परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत नशे के खिलाफ आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज नशा छोड़ने के लिए पुनर्वास केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने युवाओं और परिवारों से जरूरत के अनुसार इन सुविधाओं की मदद लेने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कार्यक्रम से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र ऑनलाइन जुड़े हैं। इसके अलावा ‘मायभारत’ के लाखों वॉलंटियर्स और एनएसएस के स्वयंसेवक भी अभियान में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों, संस्थानों और पृष्ठभूमि से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा इस अभियान के साथ एकजुट हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से भी अपील की कि वे पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ छात्रों से ड्रग्स के खतरों पर बातचीत करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता का आंदोलन चलाया जाना चाहिए और शिक्षकों के प्रयास इसके सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में सरकार मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि देश में नशे के कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं और हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह नशे के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी क्षमता को बचाकर रखना होगा। उन्होंने कहा कि ड्रग्स कुछ समय के लिए नशा या उत्साह दे सकते हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम करियर और परिवार दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल देश के निर्माण और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए करना चाहिए।
 

सौर शक्ति से बदलेगा भारत का ऊर्जा परिदृश्य, PM-SSY से फ्लोटिंग सोलर को नई रफ्तार

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार करते हुए स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख आधार के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी देकर इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के समर्थन से 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत की स्थापित सौर क्षमता वर्ष 2014 में करीब 3 गीगावाट थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट पहुंच गई। सौर पार्क, रूफटॉप सौर प्रणाली, सौरीकृत कृषि पंप और अन्य योजनाओं ने देशभर में सौर ऊर्जा की तैनाती को गति दी है। क्षमता, विनिर्माण और उपभोक्ता भागीदारी में लगातार वृद्धि ने सौर ऊर्जा को देश के बिजली मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। कम से कम दो घंटे की अवधि के लिए 10,000 मेगावाट भंडारण क्षमता वाली ऊर्जा भंडारण प्रणालियां राज्यों को पीक डिमांड प्रबंधन में मदद करेंगी। मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का इस्तेमाल होने से भूमि संसाधनों पर दबाव भी कम होगा।
PM-SSY के लिए ₹5,070 करोड़ का बजट अनुमान रखा गया है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू की जाएगी। इसके तहत सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाभान्वित होने के पात्र होंगे। इससे देश की मौजूदा करीब 700 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता बढ़कर 5,000 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में करीब 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना है। PM-SSY से सालाना करीब 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। योजना से 16,000-17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार पैदा होने के साथ फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत ने वर्ष 2025 में 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जिससे वार्षिक वृद्धि के मामले में वह अमेरिका से आगे निकल गया। देश दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सौर विकास बाजार के रूप में भी उभरा है। यह वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
भारत के सौर विस्तार की नींव मजबूत नीतिगत ढांचे पर रखी गई है। राष्ट्रीय सौर मिशन, सोलर पार्क योजना, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और प्रतिस्पर्धी बोली व्यवस्था ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा तैनाती को गति दी। इन पहलों ने निवेश, बुनियादी ढांचे और बाजार में भरोसे को मजबूत किया है।
राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सौर क्षमता के प्रमुख केंद्र हैं। बड़ी सौर परियोजनाओं से 118.79 गीगावाट स्थापित क्षमता जुड़ी है। भड़ला सोलर पार्क, पावागड़ा सोलर पार्क और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क देश की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सौर प्रणालियां 27.88 गीगावाट का योगदान देती हैं, जबकि शेष क्षमता हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं से आती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई 23.83 गीगावाट क्षमता से करीब दोगुनी है। इसी अवधि में सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता वर्ष 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक करीब 172 गीगावाट हो गई।
देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है। गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 55.29 गीगावाट दर्ज की गई। 29 जुलाई 2025 को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत की बिजली मांग का 51.5% पूरा किया, जो अब तक दर्ज सबसे अधिक मासिक हिस्सा था।
भारत ने COP26 में पंचामृत लक्ष्यों के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। मिशन LiFE के जरिए सतत उपभोग और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं (RPO) बिजली वितरण कंपनियों और अन्य बाध्य संस्थाओं के लिए बिजली का एक निर्धारित हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से खरीदना जरूरी बनाती हैं। RPO व्यवस्था से डेवलपर्स और निवेशकों को दीर्घकालिक बाजार निश्चितता मिलती है। वर्ष 2026-27 के लिए RPO लक्ष्य 35.95% निर्धारित किया गया है।
सौर ऊर्जा की मांग उपयोगिताओं और बड़े डेवलपर्स तक सीमित नहीं है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना परिवारों को रूफटॉप सौर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) कृषि क्षेत्र में सौर पंप और फीडर सौरीकरण को बढ़ावा दे रहा है। इन योजनाओं ने परिवारों, किसानों, कारोबारियों और बिजली उपयोगिताओं की भागीदारी बढ़ाई है।
ई-रिवर्स नीलामी व्यवस्था के जरिए डेवलपर्स कम टैरिफ पर बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) जैसी खरीद एजेंसियों ने पारदर्शी टैरिफ खोज तंत्र को मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप सौर बिजली का टैरिफ वर्ष 2010 में करीब ₹18 प्रति यूनिट से घटकर 2017 में भड़ला सोलर पार्क की नीलामी में रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट तक पहुंचा।
वर्ष 2025 में यूटिलिटी-स्केल सौर पीवी की समतुल्य बिजली लागत (LCOE) भारत में करीब 35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रही, जबकि वैश्विक औसत 44 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा था। कम लागत ने सौर ऊर्जा को देश में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाने में मदद की है।
सोलर पार्क योजना के तहत फरवरी 2026 तक देशभर में 54 सोलर पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी संयुक्त स्वीकृत क्षमता 39,188 मेगावाट है। राजस्थान में 11, गुजरात में 7, आंध्र प्रदेश में 5, महाराष्ट्र में 4, मध्य प्रदेश में 9 और उत्तर प्रदेश में 8 पार्कों को मंजूरी मिली है। यह बुनियादी ढांचा बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं के विकास में मदद कर रहा है।
राजस्थान के भड़ला क्षेत्र में करीब 5,700 हेक्टेयर यानी 56 वर्ग किलोमीटर में फैले भड़ला सोलर पार्क की स्थापित क्षमता 2,245 मेगावाट है। 2015 में सोलर पार्क योजना के तहत शुरू हुआ इसका विकास चरणबद्ध तरीके से 2020 तक पूरा हुआ। उच्च सौर विकिरण, कम वर्षा और विरल वनस्पति वाला यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) कार्यक्रम का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों से मांग केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए पारेषण नेटवर्क को मजबूत करना है। फरवरी 2026 तक कार्यक्रम ने मजबूत पारेषण नेटवर्क के जरिए 24,567.8 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सक्षम बनाया। दस राज्यों में परियोजनाएं करीब 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी का समर्थन करने के लिए तैयार की जा रही हैं।
उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना 2021 में ₹4,500 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू हुई थी। वर्ष 2022 में इसमें अतिरिक्त ₹19,500 करोड़ का प्रावधान किया गया। अक्टूबर 2024 तक योजना से करीब ₹35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ और लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए।
अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM) को 2019 में सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के लिए गुणवत्ता आश्वासन ढांचे के रूप में शुरू किया गया। इसके तहत सरकार समर्थित और प्रतिस्पर्धी बोली वाली निर्धारित परियोजनाओं में केवल सूचीबद्ध निर्माताओं और मॉडलों के उपयोग की अनुमति है। PLI और ALMM ने मिलकर घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद की है।
13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य घरों तक रूफटॉप सौर ऊर्जा पहुंचाना है। जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है। दिसंबर 2025 तक ₹14,771.82 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता वितरित की गई और 9 दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों को शून्य बिजली बिल मिला।
ग्वालियर के जावर कॉलोनी निवासी सुधांशु दुबे ने पीएम सूर्य घर योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद अपने घर में रूफटॉप सौर प्रणाली लगाई। स्थापना और सब्सिडी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। पहले जहां उनका बिजली बिल अक्सर ₹10,000 से अधिक होता था, वहीं सौर प्रणाली लगाने के बाद यह खर्च लगभग नगण्य हो गया।
2019 में शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना है। इसके तहत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र, स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण को समर्थन दिया जाता है। योजना से सिंचाई के लिए दिन में विश्वसनीय बिजली, डीजल पर कम निर्भरता और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने पर जोर है।
पीएम-कुसुम के तहत करीब 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 15.89 लाख से अधिक कृषि पंपों को फीडर स्तर पर सौरीकरण के जरिए कवर किया गया है। किसानों की भूमि पर करीब 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता चालू की गई है। योजना से देशभर में 21.77 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में 44.61 गीगावाट जोड़ी गई सौर क्षमता में वितरित सौर समाधानों का योगदान 16.3 गीगावाट यानी 36% रहा। इसमें पीएम-कुसुम से 7.6 गीगावाट और रूफटॉप सौर से 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल थी। इससे स्पष्ट है कि सौर ऊर्जा का विस्तार बड़े बिजली संयंत्रों के साथ-साथ घरों और खेतों तक भी तेजी से हो रहा है।
2015 में पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) वैश्विक सौर सहयोग के प्रमुख मंचों में शामिल हो गया है। यह सदस्य देशों को सौर ऊर्जा की तैनाती तेज करने, ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने का मंच प्रदान करता है।
वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) की परिकल्पना भारत ने 2018 में की थी। COP26 में 2021 में भारत और यूनाइटेड किंगडम ने ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव-वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (GGI-OSOWOG) शुरू किया। इसका उद्देश्य परस्पर जुड़े बिजली ग्रिड के जरिए सीमा-पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है।
ISA और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए भारत वैश्विक दक्षिण में नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत कर रहा है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने की दिशा में सहमति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र नीतिगत समर्थन, बढ़ते घरेलू विनिर्माण, मजबूत बुनियादी ढांचे और बढ़ती जन भागीदारी के सहारे नए चरण में पहुंच रहा है। पंचामृत प्रतिबद्धताओं और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का प्रमुख स्तंभ बनी रहेगी। PM-SSY जैसी नई पहल फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण के जरिए इस बदलाव को और गति देने के साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्व को मजबूत कर सकती है। 


 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 3 से 5 अगस्त तक ओडिशा के दौरे पर, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 3 से 5 अगस्त तक ओडिशा के दौरे पर रहेंगी। राष्ट्रपति के आगमन से पहले राज्य प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कटक, खुर्दा और गंजाम जिलों में सुरक्षा और लॉजिस्टिक इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु 3 अगस्त को कटक स्थित जगदगुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगी। इसके बाद 4 अगस्त को वह रेल मार्ग से भुवनेश्वर से बरहमपुर पहुंचेंगी। यहां से राष्ट्रपति तप्तपानी जाएंगी और मां कंधुनी देवी मंदिर तथा शिव मंदिर में दर्शन और आरती करेंगी।
राष्ट्रपति की यात्रा से पहले जिला प्रशासन, ओडिशा पुलिस और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक तैयारियों का व्यापक निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य राष्ट्रपति के दौरे के प्रत्येक कार्यक्रम को सुचारू और बिना किसी बाधा के संपन्न कराना है।
ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में कटक, खुर्दा और गंजाम जिलों में सुरक्षा, यातायात, रेलवे और अन्य व्यवस्थाओं का आकलन किया गया।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने सभी संबंधित विभागों को तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने दौरे से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
बरहमपुर के पुलिस अधीक्षक श्रवण विवेक एम. ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है और दौरे से पहले रिहर्सल भी की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे वाले स्थानों के संबंध में आईजी की ओर से आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पुलिस टीम के साथ संबंधित स्थानों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन के साथ-साथ भुवनेश्वर और बरहमपुर रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और राष्ट्रपति की ट्रेन यात्रा के लिए सभी जरूरी इंतजाम सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अनु गर्ग ने सभी विभागों और संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है। राज्य प्रशासन राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े सुरक्षा, परिवहन, रेलवे और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहा है।


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