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DMRC ने सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के लिए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर काम शुरू किया

25-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) दिल्ली मेट्रो रेल निगम (Delhi Metro Rail Corporation, DMRC) ने बुधवार को सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के लिए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह स्टेशन पांचवें चरण (ए) के अंतर्गत मौजूदा मैजेंटा लाइन के विस्तार के रूप में जनकपुरी पश्चिम से आर के आश्रम मार्ग तक विकसित किया जा रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य और विद्युत मंत्री मनोहर लाल, सचिव मोहुआ और दिल्ली मेट्रो रेल निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि केंद्रीय सचिवालय स्टेशन एक ट्रिपल इंटरचेंज स्टेशन बन जाएगा, जहां नया मैजेंटा लाइन स्टेशन मौजूदा येलो लाइन और वायलेट लाइन से निर्बाध रूप से जुड़ जाएगा। यह विशिष्ट सुविधा सरकारी कर्मचारियों और लुटियंस जोन तथा आसपास के प्रशासनिक जिलों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।
आपको बता दें, यह कॉरिडोर 9.913 किलोमीटर लंबा है। इसमें नौ भूमिगत स्टेशन हैं, जिनके नाम हैं-शिवाजी स्टेडियम, युग युगीन भारत, केंद्रीय सचिवालय, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, युद्ध स्मारक-उच्च न्यायालय, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम और इंद्रप्रस्थ।
यह परियोजना नई दिल्ली के केंद्र तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रमुख सरकारी कार्यालयों, न्यायिक संस्थानों, राष्ट्रीय स्मारकों और सम्मेलन स्थलों तक सुगम पहुंच प्रदान करती है, साथ ही समग्र नेटवर्क दक्षता और यात्री सुविधा को बढ़ाती है। 
 

बिनॉय जॉर्ज उरुग्वे में भारत के अगले राजदूत नियुक्त

25-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) दक्षिण अमेरिका के दक्षिणीपूर्वी हिस्से में स्थित उरुग्वे के नए राजदूत बिनॉय जॉर्ज होंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2006 बैच के आईएफएस जॉर्ज वर्तमान में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें ओरिएंटल रिपब्लिक ऑफ उरुग्वे में बतौर राजदूत नियुक्त किया गया है। वो जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे।
नियुक्ति से पहले तक, अर्जेंटीना में भारत के राजदूत अजनीश कुमार ही राजदूत के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी (समवर्ती मान्यता) निभा रहे थे।
एमईए के ऑफिशियल साइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, डॉ. बिनॉय जॉर्ज भारतीय विदेश सेवा के एक अनुभवी राजनयिक हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत के कई महत्वपूर्ण मिशनों में अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। फिलहाल वह नई दिल्ली में संयुक्त सचिव (कोंसुलर, पासपोर्ट, वीजा – सीपीवी) के रूप में कार्यरत हैं।
इसके अलावा उन्होंने जर्मनी, बेल्जियम, स्पेन, नीदरलैंड, श्रीलंका और यूरोपीय संघ में भी अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा वो बांग्लादेश में भारत के उप उच्चायुक्त के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। बर्लिन (जर्मनी) में भारतीय दूतावास, म्यूनिख में भारत के महावाणिज्य दूतावास और बैंकॉक (थाईलैंड) में भारतीय दूतावास में भी तैनात रह चुके हैं।
अनुभवी राजनयिक ने यूएनईएससीएपी (एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र का आर्थिक और सामाजिक आयोग) में भारत के वैकल्पिक उप स्थायी प्रतिनिधि (डीपीआर) के तौर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है।
वहीं, बात करें भारत और उरुग्वे के आपसी संबंधों की तो पारंपरिक रूप से ये बेहद मैत्रीपूर्ण और मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध साल 1960 में स्थापित हुए थे। दोनों देशों ने हाल ही में राजनयिक संबंधों के 75 साल का जश्न मनाया था।
ब्यूनस आयर्स स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, उरुग्वे में भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक संगठनों की अच्छी मौजूदगी है। देश में साईं बाबा, इस्कॉन, आर्ट ऑफ लिविंग और ब्रह्माकुमारी जैसे समूहों के सैकड़ों अनुयायी हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) को यहां हर साल बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें 2025 में 20 से अधिक योग स्कूलों और सैकड़ों लोगों की भागीदारी रही। इसी तरह, 2025 में आयुर्वेद दिवस भी धन्वंतरि जयंती पर मनाया गया।
भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के तहत मोन्टेविडियो में महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर पर डाक टिकट जारी किए गए, जबकि कथकली और ओडिसी जैसे भारतीय नृत्य-प्रदर्शन और “फेस्टिवल ऑफ इंडिया” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।
तकनीकी और विकास सहयोग के तहत भारत हर साल उरुग्वे को 5 आईटीईसी छात्रवृत्तियां देता है, और कई उरुग्वेयन राजनयिक नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में प्रशिक्षण ले चुके हैं। उरुग्वे में लगभग 1000 भारतीय रहते हैं, जिनमें करीब 500 टीसीएस में कार्यरत हैं, जबकि बाकी लोग आईटी कंपनियों और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
उरुग्वे क्षेत्रीय व्यापार संगठन मर्कोसुर का मुख्यालय है, जिसके साथ भारत का 2004 में प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था, जो 2009 में लागू हुआ। इसके तहत दोनों पक्षों को कुछ उत्पादों पर रियायती शुल्क मिलता है। इसके अलावा, लैटिन अमेरिकी एकीकरण संघ (एएलएडीआई) जैसे मंचों पर भी भारत के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। 
 

पद्म से सम्मानित हुईं सविता पूनिया, हॉकी इंडिया ने दी बधाई

25-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया को पद्म से सम्मानित किए जाने पर हॉकी इंडिया ने उन्हें बधाई दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में सविता को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म से सम्मानित किया।
इस उपलब्धि का जश्न मनाते हुए हॉकी इंडिया ने सविता को भारतीय खेलों की “सच्ची आइकन” बताया। संगठन ने कहा कि यह सम्मान भारतीय हॉकी में एक दशक से अधिक समय तक दिए गए उनके असाधारण योगदान की उचित पहचान है। हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “एक सच्चे आइकन के लिए पद्म श्री। भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज खिलाड़ी सविता को भारतीय खेलों में उनके शानदार योगदान के लिए माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से पद्म श्री मिला। एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत बड़ा सम्मान है, जिसने एक दशक से ज्यादा समय तक भारत के गोल पोस्ट की रक्षा की है और अपनी प्रतिभा, साहस तथा नेतृत्व क्षमता से लाखों लोगों को प्रेरित किया है।”
इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए सविता ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार और टीम के साथियों की भी है, जिन्होंने पूरे सफर में उनका साथ दिया। सविता ने कहा, “यह अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है। जब मैंने हॉकी खेलना शुरू किया था, तब कभी नहीं सोचा था कि मेरा सफर इतना लंबा होगा और मुझे इतना बड़ा व्यक्तिगत सम्मान मिलेगा। यह मेरे, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए गर्व का क्षण है।”
अपने करियर के संघर्षों को याद करते हुए सविता ने बताया कि कई बार ऐसे हालात आए जब उन्हें लगा कि शायद उन्हें खेल छोड़ना पड़ेगा, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार के समर्थन की वजह से ही मैं हॉकी में बनी रही। आज मेरा पूरा परिवार मेरे साथ है और सभी बेहद खुश हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की होने के नाते, माता-पिता से मिला समर्थन मेरे लिए बहुत खास रहा है।”
सविता ने कहा कि उनका सफर देशभर की युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने युवाओं से धैर्य, समर्पण और कड़ी मेहनत को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा, “अगर सविता यह कर सकती है तो हमारी बेटियां भी कर सकती हैं। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए पैशन, डेडिकेशन और सब्र जरूरी है। आज की पीढ़ी जल्दी परिणाम चाहती है, लेकिन खेलों में चुनौतियां और संघर्ष सफर का हिस्सा होते हैं। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।”
भारतीय हॉकी इतिहास की सबसे सफल गोलकीपरों में गिनी जाने वाली सविता ने 20 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने खुद को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में स्थापित किया। वर्ष 2025 में वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं। यह उपलब्धि उनके लंबे और सफल करियर की गवाही देती है।

दक्षिण कोरिया-भारत की उच्चस्तरीय बैठकों से द्विपक्षीय साझेदारी को मिली नई दिशा : एस. जयशंकर

25-Jun-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । दो दिवसीय दौरे पर दक्षिण कोरिया पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा कि हाल में हुई उच्चस्तरीय बैठकों और राष्ट्रपति स्तर की यात्रा के बाद भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को नई दिशा मिली है और वैश्विक परिस्थितियों में इसका महत्व और बढ़ गया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि चो ह्यून के पदभार संभालने के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर, वाशिंगटन, जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक और हाल ही में राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रियों के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि वे दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाएं और विभिन्न सरकारी तथा आर्थिक क्षेत्रों के बीच सहयोग को बेहतर ढंग से समन्वित करें।
जयशंकर ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में समान विचारधारा, साझा मूल्यों और आपसी विश्वास रखने वाले देशों के बीच सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध इसी मजबूत आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में हुई उच्चस्तरीय बैठकों, राष्ट्रपति यात्रा और जी7 जैसे मंचों पर हुई चर्चाओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान की है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश इन अवसरों का लाभ उठाकर संबंधों की पूरी क्षमता को साकार करेंगे।
जयशंकर ने चो ह्यून की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने शुरू से ही भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को मजबूत करने की स्पष्ट इच्छा दिखाई है और भारत भी इस रिश्ते को समान महत्व देता है। उन्होंने भविष्य में और अधिक सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चाओं की उम्मीद जताई।
भारत की ओर से जयशंकर ने आश्वासन दिया कि दोनों देशों के संबंधों की पूरी संभावनाओं को साकार करने के लिए ठोस और व्यावहारिक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक स्तर पर सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में काम जारी रहेगा।
 

 


सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से ही राष्ट्र की समृद्धि कायम रहती है : नरेंद्र मोदी

24-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राष्ट्र निर्माण और समृद्धि से जुड़ा एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति और स्थायी समृद्धि उसके नागरिकों के सामूहिक समर्पण, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री ने लिखा, “सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है। यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।”
प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक “यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता। नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥” भी साझा किया। इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां लोगों में राष्ट्रहित के लिए उत्साह और कर्मशीलता होती है, जहां आलस्य का स्थान नहीं होता और जहां नीति व साहस का संतुलित मेल होता है, वहां समृद्धि स्थायी रूप से बनी रहती है। त्याग, तप और समर्पण से ही राष्ट्र मजबूत और विकसित बनता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जून को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा को समर्पित कर दिया। उनके विचार और आदर्श आज भी देश की नई पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने यह संस्कृत श्लोक भी साझा किया था, “न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः। परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”। इसका भावार्थ है कि अमरत्व केवल कर्म, धन या वंश से नहीं मिलता, बल्कि त्याग, उच्च आदर्शों और निस्वार्थ समर्पण से प्राप्त होता है। जो लोग राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग करते हैं, वे समय बीत जाने के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं।
प्रधानमंत्री के संदेश का सार यह है कि किसी राष्ट्र की समृद्धि केवल प्राकृतिक संसाधनों या आर्थिक ताकत से नहीं आती, बल्कि उसके नागरिकों की मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से सुनिश्चित होती है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करता है, तब देश विकास, आत्मनिर्भरता और गौरव की नई ऊंचाइयों को छूता है। यह सुभाषित हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति या सरकार का काम नहीं है, बल्कि करोड़ों नागरिकों के सामूहिक प्रयास, परिश्रम और एकजुट संकल्प का परिणाम होता है। यही भावना विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सफलता पर भी एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने कहा था कि योग आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी दे रहा है।

अमित शाह करेंगे एनसीओआरडी की 10वीं बैठक की अध्यक्षता, ड्रग्स नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट जारी होगा

24-Jun-2026
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार, 26 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा आयोजित यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित होगी, जिसमें 44 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के प्रमुख हितधारकों के साथ राज्यों और मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 108 प्रतिनिधि भाग लेंगे।
बैठक के दौरान अमित शाह “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” जारी करेंगे। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, मादक पदार्थ प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार यह दस्तावेज़ मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और नुकसान में कमी के लिए साझा रोडमैप प्रदान करेगा।
विज़न डॉक्यूमेंट में नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन प्रणाली की परिकल्पना की गई है। इसके तहत अगले तीन वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी से निपटने, युवाओं को नशे से दूर रखने तथा नशे के आदी लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। दस्तावेज़ में विभिन्न एजेंसियों की जिम्मेदारियां, समय-सीमाएं और लक्ष्य भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं।
अमित शाह इस अवसर पर “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट-2025” भी जारी करेंगे। साथ ही जम्मू और गुवाहाटी में नवनिर्मित एनसीबी आंचलिक कार्यालयों का उद्घाटन भी करेंगे। यह कदम मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गृह मंत्री ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की भी शुरुआत करेंगे। इस विशेष अभियान के तहत देशभर में विभिन्न केंद्रीय और राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा लगभग 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थ नष्ट किए जाने की उम्मीद है। इन नशीले पदार्थों का अनुमानित मूल्य करीब 6,000 करोड़ रुपए बताया गया है।
एनसीओआरडी की यह उच्चस्तरीय बैठक देश में मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों द्वारा किए जा रहे सामूहिक प्रयासों की समीक्षा और मूल्यांकन का मंच प्रदान करेगी। बैठक में आगामी तीन वर्षों के लिए मादक पदार्थ तस्करी और नशे के दुरुपयोग से प्रभावी ढंग से निपटने की रणनीतियों पर भी चर्चा होगी।
सरकार का मानना है कि मादक पदार्थों की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए “होल-ऑफ-गवर्नमेंट अप्रोच” आवश्यक है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
 

 


कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी पूरी, श्रद्धालु मौसम की चुनौतियों के लिए रहें तैयार

23-Jun-2026
नई दिल्ली।   (शोर संदेश) चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने रविवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने यात्रियों के लिए की जा रही तैयारियों, परिक्रमा के अपने अनुभव और यात्रा से जुड़ी जरूरी सलाह साझा की। राजदूत और दूतावास के उनके साथियों ने खुद कैलाश पर्वत की परिक्रमा वाले रास्ते और आधिकारिक यात्रा के सभी प्रवेश स्थानों का दौरा किया।
उन्होंने बताया कि यह जगह स्थानीय लोगों के लिए भी बहुत पवित्र है। इसलिए यात्रियों को वहां काफी भीड़ मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए, क्योंकि यह चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के हिसाब से हर 12 साल में आने वाला एक खास साल है। उन्होंने बताया कि दूतावास की टीम ने सिर्फ प्रवेश स्थानों का ही निरीक्षण नहीं किया, बल्कि उन होटलों को भी देखा जहां यात्रियों को हर रात ठहराया जाएगा। टीम ने रसोई, यात्रियों के लिए उपलब्ध कमरों और वहां मौजूद मुख्य चिकित्सा सुविधाओं की भी जांच की।
राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार के साथ मिलकर तैयारियां पूरी करने की कोशिश की गई है, लेकिन यात्रियों को इस यात्रा की कठिनाइयों के बारे में भी पता होना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह बहुत ऊंचाई वाला इलाका है। यात्रा के दौरान आप ज्यादातर समय समुद्र तल से 3,500 मीटर से ऊपर रहेंगे। परिक्रमा का रास्ता लगभग 5,605 मीटर की ऊंचाई तक जाता है, यानी करीब 6,000 मीटर तक।”
उन्होंने मौसम की मुश्किलों के बारे में बताते हुए कहा, “जैसा कि आप देख सकते हैं, आपसे बात करते हुए भी मुझे सांस संभालनी पड़ रही है। खासकर पवित्र कैलाश पर्वत के आसपास मौसम बहुत तेजी से बदलता है। एक ही समय पर बर्फबारी, धूप और बारिश जैसी स्थिति हो सकती है।” राजदूत ने यात्रियों को कपड़ों की तैयारी, स्वास्थ्य का ध्यान रखने और ऑक्सीजन स्तर से जुड़ी सावधानियों के बारे में भी सलाह दी।
यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। इस साल कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा फिर से शुरू हो रही है, जो चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित हैं। इस साल कुल 500 श्रद्धालु नाथू ला मार्ग से यात्रा करेंगे। इन्हें 50-50 यात्रियों के 10 समूहों में बांटा गया है। हर समूह के साथ एक संपर्क अधिकारी और एक मेडिकल सहायक रहेगा, ताकि यात्रा के दौरान बेहतर तालमेल बना रहे और जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके।

दिल्ली-एनसीआर को गर्मी से राहत, पूरे सप्ताह 40°C से नीचे रहेगा तापमान; बारिश के भी संकेत

23-Jun-2026
नई दिल्ली।   (शोर संदेश) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने वाली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार पूरे सप्ताह मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलेगा। आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश तथा तेज हवाएं चलने की संभावना है।
राहत की बात यह है कि आगामी दिनों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग द्वारा जारी सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार 22 जून को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) का स्तर अधिकतम 65 प्रतिशत और न्यूनतम 40 प्रतिशत रह सकता है। विभाग ने इस दिन के लिए किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की है। 23 जून को मौसम आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा। अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस दिन भी कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। 24 जून को भी आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। अधिकतम तापमान 37 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
इसके बाद 25 जून को अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। मौसम आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा। 26 जून को तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। अधिकतम तापमान 39 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इस दिन भी आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना जताई है। सप्ताह के अंतिम दिन 27 जून को भी मौसम लगभग इसी तरह बना रहेगा। अधिकतम तापमान 39 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
आसमान में बादलों की मौजूदगी के साथ आर्द्रता का स्तर 60 से 40 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के प्रभाव से एनसीआर में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इसके चलते तापमान नियंत्रित रहेगा और लोगों को भीषण गर्मी व उमस से काफी हद तक राहत मिलेगी। हालांकि दोपहर के समय उमस महसूस हो सकती है, लेकिन हल्की बारिश और तेज हवाएं मौसम को सुहावना बनाए रखेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के सीएम विजय को दी जन्मदिन की बधाई, लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की

23-Jun-2026
नई दिल्ली।   (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को जन्मदिन की बधाई दी और उनके लंबे व स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु सी. जोसेफ विजय को जन्मदिन की बधाई। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
22 जून 1974 को चेन्नई में जन्मे विजय एक अभिनेता से राजनेता बने हैं और वर्तमान में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। राजनीति में आने से पहले वह तमिल सिनेमा के सबसे सफल और प्रभावशाली सितारों में से एक रहे और प्रशंसक उन्हें ‘थलपति’ के नाम से बुलाते हैं।
विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। वे फिल्म निर्माता एस.ए. चंद्रशेखर और गायिका शोभा चंद्रशेखर के बेटे हैं। उन्होंने अपने पिता की ओर से निर्देशित फिल्म ‘वेट्री’ (1984) में एक बाल कलाकार के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और बाद में तमिल फिल्म जगत में एक प्रमुख स्टार के रूप में उभरे।
विजय ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में खुद को सबसे बड़े नामों में से एक के रूप में स्थापित किया। ‘खुशी’, ‘थिरुमलाई’, ‘घिल्ली’, ‘पोक्किरी’ और ‘सरकार’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, उन्हें शुरू में रोमांटिक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को एक एक्शन स्टार के रूप में ढाला, जो सामाजिक और राजनीतिक न्याय के लिए लड़ने वाले पात्रों को निभाने के लिए जाने जाते थे।
प्रशंसकों के बीच उनकी जबरदस्त लोकप्रियता के कारण अक्सर उनकी तुलना उन महान तमिल अभिनेताओं से की जाती थी, जिन्होंने सफलतापूर्वक राजनीति में कदम रखा था। उनकी कई फिल्मों में राजनीतिक विषयों को उनके भविष्य के राजनीतिक इरादों के संकेत के रूप में देखा गया।
वर्ष 2024 में विजय ने ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) पार्टी बनाई और औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया। पार्टी ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया और राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा की 234 में से 108 सीटों पर विजय हासिल की।
बहुमत के आंकड़े से कम सीटें आने पर टीवीके ने कांग्रेस और अन्य दलों के साथ गठबंधन किया। इसके बाद जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ईरान के साथ वार्ता में शामिल होने के लिए पहुंचे स्विट्जरलैंड

22-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ बातचीत के लिए आज रविवार को स्विट्जरलैंड पहुंचे। स्विस विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आने का स्वागत करते हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षर किए गए ज्ञापन समझौते को लागू करने के हिस्से के तौर पर बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट जा रहा है।”
वहीं, ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात को ही स्विट्जरलैंड पहुंचा हुआ है। इस बीच, ईरान के सरकारी आईआरआईबी टीवी के अनुसार, ईरान की तरफ से बातचीत करने वाले प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच गया है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का कोडनेम ‘मिनाब 168’ है।
शनिवार को पहले, स्विट्जरलैंड ने कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच ज्ञापन समझौते को लागू करने पर बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में बातचीत को आसान बनाने के लिए एक “सावधान और भरोसेमंद माहौल” देना जारी रखेगा। दरअसल, पक्षों के बीच अंतरिम शांति समझौते को लागू करने पर शुरुआती बातचीत शुक्रवार को होनी थी, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया।
दूसरी तरफ, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड के दौरे पर रवाना हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ होने वाली बैठक से तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा आगे बढ़ सकेगी। इस वार्ता से लेबनान में हाल ही में लागू हुए संवेदनशील युद्धविराम को टिकाए रखने में भी मदद मिलने के आसार हैं, हालांकि क्षेत्र में दोबारा शुरू हुई हिंसा के चलते इन बड़े राजनयिक प्रयासों को गंभीर चुनौती मिल रही है।
उपराष्ट्रपति वेंस ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर अपने एयरक्राफ्ट में चढ़ने से पहले मीडिया से बताया कि उनकी समझ से ईरानी नेगोशिएटर पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और बातचीत शायद कई दिनों तक चलेगी।
वेंस ने कहा, “मुझे लगता है कि हम उम्मीद है कि न्यूक्लियर मुद्दे पर प्रोग्रेस करेंगे और लेबनान सीजफायर मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे। ये दो बड़ी बातें हैं जिन पर मुझे लगता है कि हमें फोकस करना है। मुझे यकीन है कि ईरानियों के भी कुछ मुद्दे होंगे जिन पर वे चर्चा करना चाहेंगे।” 

 



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