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गुवाहाटी में राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन 8 जनवरी से, 2030 तक भारत को वैश्विक वस्त्र हब बनाने पर होगा मंथन

07-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) वस्त्र मंत्रालय द्वारा असम सरकार के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन 8 जनवरी से असम के गुवाहाटी में शुरू होगा। दो दिवसीय इस सम्मेलन की थीम “भारत का वस्त्र उद्योग: विकास, विरासत और नवाचार का संगम” रखी गई है। सम्मेलन में देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वस्त्र मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
सम्मेलन का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में नीति, निवेश, स्थिरता, निर्यात, अवसंरचना विकास और प्रौद्योगिकीय उन्नति पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है। यह आयोजन सरकार के उस विजन के अनुरूप है, जिसके तहत भारत को वर्ष 2030 तक एक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करना है। इसमें निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा, जो “विकास भी, विरासत भी” की अवधारणा से जुड़ा है।
8 जनवरी 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा, वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर भारत के वस्त्र उद्योग की ताकत, नवाचार और समृद्ध विरासत को दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी और पवेलियन का भी उद्घाटन किया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान अवसंरचना और निवेश, भारत के वस्त्र निर्यात का विस्तार, कच्चा माल और रेशे, टेक्निकल टेक्सटाइल और न्यू-एज फाइबर, हथकरघा और हस्तशिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन जैसे प्रमुख विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन्स एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क, स्थिरता और पर्यावरण अनुपालन, टेक्निकल टेक्सटाइल, नवाचार और एकीकृत मूल्य-श्रृंखला विकास जैसी अहम पहलों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए मंत्री और अधिकारी कपड़ा मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों, चुनौतियों और नीतिगत सुझावों को साझा करेंगे। इससे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
8 जनवरी 2026 को ही भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ और सशक्त बनाने पर एक विशेष सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। इसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों के वस्त्र मंत्री, संसद सदस्य और केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य उत्तर-पूर्व के रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प और बांस आधारित वस्त्रों की अपार संभावनाओं को उजागर करना है। इसमें एरी, मूगा और शहतूत रेशम, महिला-केंद्रित उद्यम, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर विशेष फोकस रहेगा।
राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के इस सम्मेलन से केंद्र-राज्य सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ एक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और समावेशी वस्त्र सेक्टर के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।







 

भारतीय रेल का एक सदी लंबा परिवर्तनकारी सफर, शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की दहलीज पर देश का रेल नेटवर्क

07-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) कभी बड़े पैमाने पर डीजल द्वारा संचालित भारतीय रेल अब तेजी से इलेक्ट्रिक ट्रेनों की ओर बढ़ रहा है। यह आधुनिक और टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक बड़ी छलांग है। मिशन शत प्रतिशत विद्युतीकरण के तहत, नेटवर्क में तारों के फैले जाने के साथ, रेल प्रणाली तेज और अधिक कुशल होती जा रही है। यह परिवर्तन प्रदूषण को कम करने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे राष्ट्र के लिए स्वच्छ वातावरण और स्मार्ट परिवहन सुनिश्चित होता है। आज, लगभग पूरा रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलता है। सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को भी स्टेशनों और परिचालनों में एकीकृत किया जा रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है: हरित ट्रेनें, विश्वसनीय बिजली और स्वच्छ वातावरण।
भारत की रेलवे विद्युतीकरण की यात्रा 1925 में शुरू हुई, तब 1500 वोल्ट डीसी सिस्टम से संचालित देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चली। यह एक छोटा रेल मार्ग था, लेकिन एक ऐतिहासिक छलांग थी। यह भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का पहला परिचालन उपयोग था, जो ऊर्जा-कुशल, उच्च क्षमता वाली रेल यात्रा की शुरुआत का संकेत था।
शुरुआती दशकों में विद्युतीकरण में प्रगति मामूली थी। देश को आजादी मिलने तक केवल 388 रूट किलोमीटर (आरकेएम) का विद्युतीकरण किया गया था। उस वक्त कोयला और डीजल इंजन पटरियों पर हावी थे। इसके बाद विद्युतीकरण का लगातार विस्तार हुआ, लेकिन पिछले दशक में वास्तविक परिवर्तन ने आकार लिया, जब भारतीय रेल ने स्वच्छ और अधिक कुशल संचालन की दिशा में अपना जोर तेज कर दिया।
विद्युतीकरण का प्रभाव उल्लेखनीय रहा है। विद्युतीकरण वर्ष 2004 और 2014 के बीच लगभग 1.42 किलोमीटर प्रति दिन से बढ़कर 2019 और 2025 के बीच औसतन 15 किलोमीटर प्रति दिन से अधिक हो गया है। विद्युतीकरण की यह गति एक परिवर्तनकारी बदलाव को रेखांकित करती है कि नेटवर्क का कितनी तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। विद्युतीकृत ट्रैक हिस्सेदारी 2000 में 24 प्रतिशत से बढ़कर 2017 में 40 प्रतिशत हो  गई, और 2024 के अंत में 96 प्रतिशत को पार कर गई। आज एक सदी लंबी यह यात्रा समापन के करीब पहुंच रही है। नवंबर 2025 तक, भारतीय रेल ने अपने रेलवे नेटवर्क के लगभग 99.2 प्रतिशत को कवर करते हुए प्रभावशाली 69,427 आरकेएम का विद्युतीकरण किया है। इसमें से 46,900 आरकेएम का विद्युतीकरण 2014 और 2025 के बीच किया गया है।
सौ साल पहले बॉम्बे में एक छोटे से उपनगरीय हिस्से पर शुरू हुआ यह दुनिया की सबसे व्यापक और लगभग पूर्ण विद्युतीकृत रेल प्रणालियों में से एक बन गया है। विद्युतीकरण अब कार्बन उत्सर्जन को कम करने, दक्षता बढ़ाने और राष्ट्र को एक हरित तथा उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे के मिशन के केंद्र में है।
भारत के 70,001 आरकेएम ब्रॉड गेज नेटवर्क में से 99.2 प्रतिशत का पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है। भारतीय रेल पूर्ण विद्युतीकरण की दहलीज पर खड़ा है, जो टिकाऊ, कुशल और भविष्य के लिए तैयार रेल परिवहन में एक परिवर्तनकारी उपलब्धि है। राज्यव्यापी विवरण इस प्रकार हैं।
25 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शत प्रतिशत विद्युतीकृत हैं, कोई शेष ब्रॉडगेज रूट किलोमीटर लंबित नहीं है।
केवल 5 राज्यों में विद्युतीकरण के तहत अवशिष्ट खंड हैं, जो कुल मिलाकर केवल 574 आरकेएम या कुल ब्रॉडगेज नेटवर्क का 0.8 प्रतिशत है।
रेलवे विद्युतीकरण देश की सतत परिवहन और आर्थिक विकास रणनीति की आधारशिला है। प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के अलावा, यह ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, परिचालन दक्षता को बढ़ाता है और सभी क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। विद्युतीकरण का लाभ तेज और अधिक कुशल ट्रेन संचालन से लेकर रेलवे गलियारों के साथ औद्योगिक और ग्रामीण विकास को उत्प्रेरित करने तक फैला हुआ है, जिससे यह राष्ट्रीय प्रगति का एक शक्तिशाली प्रवर्तक बन जाता है।
भारतीय रेल ने 99.2 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल करते हुए खुद को दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्क में मजबूती से स्थापित किया है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेलवे प्रणालियों के साथ तुलना से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर विद्युतीकरण का स्तर कैसे भिन्न होता है। यह तुलना भारत की प्रगति के पैमाने और महत्व को रेखांकित करता है।
यह वैश्विक तुलना उन्नत रेलवे प्रणालियों के बीच भारत की स्थिति को दर्शाती है और दक्षता, स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता प्राप्त करने में निरंतर विद्युतीकरण के रणनीतिक महत्व को पुष्ट करती है।
टिकाऊ और कुशल परिवहन पर बढ़ते ध्यान के साथ, भारतीय रेल इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन को प्राथमिकता दे रहा है क्योंकि यह पर्यावरण के अधिक अनुकूल है और डीजल ट्रैक्शन की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक किफायती है। 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लिए भारतीय रेल के मिशन के संबंध में दो महत्वपूर्ण सकारात्मक घटनाक्रम सामने आए हैं:
जनता के लिए पर्यावरण के अनुकूल, स्वच्छ और हरित परिवहन का साधन सुनिश्चित करते हुए मिशन मोड में पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क को विद्युतीकृत करने की प्रतिबद्धता।
रेल पटरियों के किनारे उपलब्ध भूमि के विशाल हिस्सों का लाभ उठाकर नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा का दोहन करने का रणनीतिक निर्णय।
प्रमुख सौर क्षमता तैनाती
भारतीय रेल का नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना एक हरित और अधिक टिकाऊ परिवहन प्रणाली के निर्माण में एक निर्णायक कदम है। पूरे नेटवर्क में सौर ऊर्जा अपनाने का पैमाना और गति इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अभूतपूर्व क्षमता वृद्धि: नवंबर 2025 तक, भारतीय रेल ने 898 मेगावाट (एमडब्ल्यू) सौर ऊर्जा विकसित की है, जो 2014 में केवल 3.68 मेगावाट से काफी अधिक है। यह एक उल्लेखनीय छलांग है। यह सौर क्षमता में लगभग 244 गुना वृद्धि को दर्शाता है।
राष्ट्रव्यापी स्वच्छ ऊर्जा फुटप्रिंट: यह सौर ऊर्जा अब 2,626 रेलवे स्टेशनों पर स्थापित की गई है, जो विभिन्न भौगोलिक और परिचालन क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को व्यापक रूप से अपनाने को प्रदर्शित करती है।
सौर ऊर्जा रेलवे विद्युतीकरण में कैसे मदद करती है
सौर ऊर्जा कई तरीकों से विद्युतीकरण के लक्ष्य में योगदान देती है:
इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालन में मदद: विकसित की गई कुल 898 मेगावाट सौर क्षमता में से 629 मेगावाट (लगभग 70 प्रतिशत) का उपयोग ट्रैक्शन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि उत्पादित सौर ऊर्जा सीधे इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालन की बिजली जरूरतों में योगदान करती है। यह ट्रैक्शन के लिए पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता को कम करता है।
गैर-ट्रैक्शन ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना: शेष 269 मेगावाट सौर क्षमता का उपयोग स्टेशन को प्रकाशित करने, सर्विस बिल्डिंग, वर्कशॉप और रेलवे क्वार्टर जैसे गैर-ट्रैक्शन उद्देश्यों के लिए किया जाता है। सौर ऊर्जा से इन ऊर्जा जरूरतों को पूरा करके, भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ तरीके से पारंपरिक ऊर्जा उपयोग और बिजली की लागत को कम करता है, जिससे पूरे नेटवर्क में समग्र ऊर्जा सुरक्षा और परिचालन दक्षता में सुधार होता है।
आधुनिकीकरण से कहीं अधिक एक आंदोलन
विद्युतीकरण भारतीय रेल की ऊर्जा प्रोफ़ाइल को फिर से तैयार कर रहा है और सदियों पुरानी प्रणाली को एक समकालीन पावरहाउस में बदल रहा है। जो भारतीय रेल कभी डीजल से चलने वाली दिग्गज कंपनी थी, वह तेजी से एक चिकने विद्युतीकृत नेटवर्क में विकसित हो रही है। यह कम ध्वनि, कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन के साथ लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। यह सिर्फ आधुनिकीकरण नहीं है, यह गति है। भारत में रेलवे विद्युतीकरण अब केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं है; यह एक राष्ट्रीय कहानी है जहां बुनियादी ढांचा आकांक्षा को पूरा करता है और हर नया सक्रिय मार्ग आगे की तेज, हरित और परस्पर अधिक जुड़ी यात्रा का वादा करता है।


 

2026 के मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप को लगा डर, हाउस रिपब्लिकन सदस्यों से एकजुट रहने को कहा

07-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के मध्यावधि चुनावों में पार्टी की बड़ी जीत का दावा करते हुए हाउस रिपब्लिकन सदस्यों से एकजुट रहने और राजनीतिक इतिहास को बदलने का आह्वान किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक बैठक में स्पीकर माइक जॉनसन का समर्थन किया और सभी सदस्यों को अपने एजेंडे के साथ एकजुट करने की कोशिश की।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये बातें मंगलवार को हाउस रिपब्लिकन कॉकेस रिट्रीट की मीटिंग में कहीं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सभा में कहा है कि रिपब्लिकन एक अभूतपूर्व परिणाम की स्थिति में है। उन्होंने कहा, “अब हम इतिहास रचने जा रहे हैं और शानदार मध्यावधि चुनाव में जीत के साथ रिकॉर्ड तोड़ेंगे, जिसे हम हासिल करने वाले हैं।”
दरअसल, अमेरिका में अगले साल होने वाले मध्यावधि चुनाव की काफी चर्चा हैं, इस बीच ट्रंप की चुनावों को लेकर चिंता साफ नजर आ रही है। मध्यावधि चुनाव आम तौर पर व्हाइट हाउस में सत्तारूढ़ पार्टी के लिए मुश्किल माने जाते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसको स्वीकार किया, लेकिन तर्क दिया कि उनकी राष्ट्रपति पद की अवधि ने इस समीकरण को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “जो लोग राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं, उनके साथ ऐसा नहीं होता। भले ही राष्ट्रपति पद सफल रहा हो, वे चुनाव नहीं जीत पाते।”
उन्होंने मौजूदा हाउस बहुमत को उसके सीमित अंतर के बावजूद असामान्य रूप से एकजुट बताया। ट्रंप ने कहा, “यह कोई बड़ा बहुमत नहीं है, लेकिन यह एकजुट बहुमत है।” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने 2025 में 12 महीनों की अभूतपूर्व सफलता दिलाई है। अपने एक घंटे से अधिक चले भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने हाउस नेतृत्व की सराहना की और स्पीकर माइक जॉनसन का बिना शर्त समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मेरा पूर्ण समर्थन है। साथ ही, ट्रंप ने सीमित रिपब्लिकन बहुमत की बाधाओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “जब आपके पास तीन का बहुमत हो तो आप सख्त नहीं हो सकते।”
वहीं, ट्रंप ने चेतावनी दी कि आंतरिक विभाजन विधायी प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। इसी बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिनिधि डग लामाल्फा को श्रद्धांजलि दी, जिनका एक दिन पहले निधन हो गया। कैलिफोर्निया के पानी से जुड़े मुद्दों के लिए लामाल्फा को याद करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम एक महान सदस्य के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि लामाल्फा 100 प्रतिशत समय मेरे साथ वोट करते थे और ऐसे सदस्य थे जिन्हें कभी मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रंप ने यह भी बताया कि प्रतिनिधि जिम बेयर्ड और उनकी पत्नी एक गंभीर कार दुर्घटना से उबर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वे ठीक हो जाएंगे।
अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ट्रंप ने पार्टी अनुशासन और एकता को चुनावी सफलता के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि बस साथ रहें। रिपब्लिकन के पास ‘सभी नीतियां’ हैं, जबकि डेमोक्रेट्स गोंद की तरह एक साथ रहते हैं। ट्रंप ने कहा, “उनकी पॉलिसी बहुत खराब है, लेकिन वे एक साथ रहते हैं।” राष्ट्रपति ने रिपब्लिकन सदस्यों से अनुरोध किया कि वे उनके संदेश को अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाएं। 



 

पीएम मोदी और नेतन्याहू ने फोन पर की बात, भारत-इजरायल संबंधों पर हुई चर्चा

07-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर एक-दूसरे से बातचीत की। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साझेदारी और काउंटर टेररिज्म जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसकी जानकारी दी।
पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री और वहां की जनता को नए साल की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी ने इसकी जानकारी देते हुए लिखा, “अपने दोस्त, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करके और उन्हें व इजरायल के लोगों को नए साल की बधाई देकर खुशी हुई। हमने आने वाले साल में इंडिया-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। हमने क्षेत्र के हालात पर भी अपने विचार शेयर किए और आतंकवाद से और मजबूती से लड़ने के अपने इरादे को दोहराया।”
https://x.com/narendramodi/status/2008828800117985427?s=20
इससे पहले दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने पिछले साल 10 दिसंबर 2025 को एक-दूसरे से फोन पर बात की थी। पीएम नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था, और दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इसके अलावा, पीएम मोदी और नेतन्याहू ने आपसी हितों के लिए इन संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की घोर आलोचना की और आतंकवाद के हर रूप और अभिव्यक्ति के प्रति किसी भी तरह की नरमी न बरतने की अपनी नीति को दोहराया।
उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में निष्पक्ष और स्थायी शांति के प्रयासों, जिसमें गाजा शांति योजना का शीघ्र कार्यान्वयन शामिल है, के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने लगातार एक-दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की।
बता दें, इजरायली पीएम 2025 के दिसंबर में भारत का दौरा करने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश इसे रद्द कर दिया गया। इसे लेकर काफी चर्चाएं भी हो रही थीं, क्योंकि यह तीसरी बार था जब इजरायली पीएम की भारत यात्रा टाली गई। चूंकि दिल्ली में लाल किला के पास नवंबर 2025 को धमाका भी हुआ था, ऐसे में उनके इस दौरे को सुरक्षा के दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा था।









 

भविष्य के युद्ध के लिए तैयार भारतीय सेना: चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी ने जारी किया प्रशिक्षण विजन दस्तावेज

07-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने के लिए चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी ने एक महत्वपूर्ण विजन दस्तावेज जारी किया है। यह दस्तावेज थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए संयुक्त रूप से तैयार किया गया है, जो प्रशिक्षण पद्धति को अधिक आधुनिक, प्रभावी और भविष्योन्मुखी बनाने पर केंद्रित है।
एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, इस दस्तावेज में वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य तथा भविष्य की संभावित चुनौतियों का विस्तृत आकलन किया गया है।
इसका मुख्य लक्ष्य ऐसे सैन्य नेताओं का निर्माण करना है जो आधुनिक युद्धक्षेत्र की जटिलताओं को समझें और जल, थल, वायु, अंतरिक्ष तथा साइबर जैसे विभिन्न डोमेन में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स को संयुक्त एवं समन्वित रूप से संचालित करने में सक्षम हों।
विजन दस्तावेज में प्रोफेशनल मिलिटरी एजुकेशन के हर चरण के लिए स्पष्ट शिक्षण उद्देश्य परिभाषित किए गए हैं, ताकि सैन्य अधिकारियों के विकास में क्रमिक और सार्थक प्रगति सुनिश्चित हो सके।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण से लेकर उच्च अधिकारियों के सामरिक एवं रणनीतिक स्तर के प्रशिक्षण तक सभी स्तरों के लिए अपेक्षित क्षमताओं और दक्षताओं का व्यवस्थित विवरण शामिल है।
यह दस्तावेज न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सशस्त्र बलों को भविष्य की तकनीकी एवं युद्धक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का भी प्रयास करता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का यह विजन भारतीय सैन्य ढांचे को अधिक समन्वित, सक्षम और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।

तमिलनाडु में 9-10 जनवरी को भारी बारिश का अलर्ट, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

06-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को बताया कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण 9 और 10 जनवरी को तमिलनाडु के कई जिलों, खासकर डेल्टा और उत्तरी तटीय इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। 
आईएमडी ने बताया कि दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के सेंट्रल हिस्सों पर बना एक एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन अब लो-प्रेशर एरिया में बदल गया है। उम्मीद है कि यह सिस्टम अगले 24 घंटों में और मजबूत होकर डीप लो-प्रेशर एरिया बन जाएगा, जिससे तमिलनाडु और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर बारिश की संभावना बढ़ जाएगी।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, तमिलनाडु के डेल्टा जिलों में 9 जनवरी को भारी बारिश होने की संभावना है। जिन जिलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है, उनमें मायिलादुथुराई, तिरुवरूर, नागपट्टिनम, तंजावुर, पुदुकोट्टई और रामनाथपुरम शामिल हैं। इन इलाकों में तेज बारिश हो सकती है, जिससे जलभराव और ट्रांसपोर्ट और खेती में रुकावटों की चिंता बढ़ गई है।
10 जनवरी को भारी बारिश का क्षेत्र बढ़कर विल्लुपुरम, कुड्डालोर के साथ-साथ मायिलादुथुराई, तिरुवरूर, नागपट्टिनम और तंजावुर जिलों तक फैलने की उम्मीद है। जैसे-जैसे यह मौसम प्रणाली बंगाल की खाड़ी के ऊपर आगे बढ़ेगी और मजबूत होगी, तटीय और अंदरूनी जिलों में लगातार बारिश हो सकती है।
आईएमडी के अनुसार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मंगलवार-बुधवार हल्की बारिश और सुबह कोहरा, यात्रा पर असर डाल सकता है
आईएमडी की ओर से यह भी बताया गया कि बुधवार को तमिलनाडु के तटीय जिलों में कुछ जगहों पर हल्की बारिश होने की संभावना है, जो कि सबसे ज्यादा बारिश वाले दिनों से पहले होगी। इसके अलावा, मंगलवार और बुधवार को तमिलनाडु और पुडुचेरी में सुबह के समय हल्का कोहरा छाने की उम्मीद है, जिससे सड़क और रेल यात्रा प्रभावित हो सकती है।
नीलगिरी और कोडाइकनाल में पाले की चेतावनी जारी की गई है, न्यूनतम तापमान गिरने की संभावना है, इसलिए आईएमडी ने लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है
इस बीच, नीलगिरी और कोडाइकनाल इलाकों में कुछ जगहों के लिए पाला पड़ने की चेतावनी जारी की गई है, जहां रात और सुबह के समय न्यूनतम तापमान में काफी गिरावट आने की संभावना है। आईएमडी ने जिला प्रशासन, किसानों, मछुआरों और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक सलाह मानने का आग्रह किया है, क्योंकि अगले कुछ दिनों में मौसम की स्थिति बदलती रहने की उम्मीद है। 
 

ममता बनर्जी के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान कैटरिंग आरक्षण की होगी जांच, एनएचआरसी ने रेलवे बोर्ड को भेजा नोटिस

06-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) वर्ष 2010 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान लागू की गई रेलवे कैटरिंग नीति एक बार फिर विवादों में आ गई है। आरोप है कि उस समय रेलवे के खान-पान स्टॉल और कैंटीन के संचालन से जुड़ी आईआरसीटीसी की टेंडर प्रक्रिया में नीति स्तर पर बदलाव कर अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों, को 9.5% तक आरक्षण दिया गया था।
इस मामले को लेकर ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी’ नामक एक कार्यकर्ता समूह ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह आरक्षण तुष्टिकरण की नीति के तहत किया गया प्रतीत होता है, जो संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। संगठन का दावा है कि इस फैसले के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के अधिकारों में कटौती हुई, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड को पूरे मामले की जांच कर विधिसम्मत और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने जन आहार की उपलब्धता और रेलवे कैटरिंग में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यंजनों को शामिल करने की बात भी कही थी
दरअसल, वर्ष 2009-10 के रेल बजट भाषण के दौरान तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर गुणवत्ता का भोजन, स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय और बेहतर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की घोषणा की थी। उन्होंने जन आहार की उपलब्धता और रेलवे कैटरिंग में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यंजनों को शामिल करने की बात भी कही थी।
रेलवे बोर्ड ने 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग लागू की थी
इन्हीं घोषणाओं के आधार पर रेलवे बोर्ड ने 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग नीति तैयार कर लागू की थी। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (पर्यटन एवं कैटरिंग) मणि आनंद द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि यह नीति वित्त और विधि निदेशालय की सहमति से बनाई गई है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इस संबंध में सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश भेजे गए थे और आईआरसीटीसी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया था। अब एक दशक से अधिक समय बाद, इस नीति में कथित आरक्षण प्रावधान को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।











 

प्रधानमंत्री मोदी ने श्लोक साझा कर दिया मीठी वाणी का संदेश

06-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक प्राचीन संस्कृत श्लोक साझा किया, जिसमें मीठे और प्रिय बोलों के महत्व पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट में श्लोक साझा करते हुए लिखा :
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥
इस श्लोक का अर्थ है: मीठे और प्रिय वचनों के देने से सभी प्राणी प्रसन्न हो जाते हैं। https://x.com/narendramodi/status/2008373456006431059?s=20
यह श्लोक लोगों को सदैव सौम्य और प्रसन्नता देने वाली भाषा बोलने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह संदेश भारतीय संस्कृति और संस्कृत की समृद्ध परंपरा को उजागर करता है, जहां वाणी को अमृत के समान माना जाता है।

 

सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध पर UAE के सैन्य अधिकारियों से की बात

06-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी संयुक्त अरब अमीरात के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने मंगलवार को यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज के अधिकारियों को संबोधित किया। संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वैश्विक सुरक्षा परिवेश में तेजी से हो रहे बदलावों, आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और युद्धक्षेत्र में बढ़ती प्रौद्योगिकी की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। दरअसल, आधुनिक समय में तकनीक-आधारित क्षमताएं, संयुक्त परिचालन, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र की चुनौतियां विश्व सुरक्षा ढांचे को नए रूप में ढाल रही हैं।
जनरल द्विवेदी ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की दूरदृष्टि एवं नेतृत्व क्षमता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के समय में देशों के बीच सहयोगात्मक सैन्य संपर्क, साझा अभ्यास, प्रशिक्षण और संचालनात्मक तालमेल अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने भारत, यूएई तथा क्षेत्रीय साझेदार देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह सहयोग इसलिए जरूरी है ताकि पारस्परिक लाभ सुनिश्चित हों और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।
इससे पहले यूएई यात्रा में भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यूएई लैंड फोर्सेस के कमांडर मेजर जनरल स्टाफ यूसुफ मायूफ सईद अल हल्लामी से मुलाकात की। दोनों सैन्य नेताओं के बीच वार्ता में सकारात्मक रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण में साझेदारी और सामंजस्य, तथा भारत व यूएई के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और घनिष्ठता देने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सैन्य स्तर पर पारस्परिक समझ और सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।
यूएई प्रवास के दौरान जनरल द्विवेदी ने लैंड फोर्सेस म्यूजियम का भी दौरा किया, जहां उन्होंने यूएई की थल सेना के समृद्ध इतिहास, गौरवपूर्ण परंपराओं और सैन्य विरासत के बारे में विस्तृत जानकारी ली। बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यह यात्रा भारत और यूएई के मध्य बढ़ते रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यह आधिकारिक यात्रा सोमवार को प्रारंभ हुई थी। इसी दिन जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और सैन्य कूटनीति को और मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
यूएई में जनरल द्विवेदी के आगमन पर यूएई थल सेना द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। मंगलवार को यह उनकी यूएई यात्रा का अंतिम दिन है। अपने यूएई प्रवास के दौरान, सेना प्रमुख ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की है। इनमें यूएई थल सेना के कमांडर भी शामिल हैं। यूएई की यात्रा के बाद जनरल द्विवेदी 7 व 8 जनवरी को श्रीलंका की यात्रा करेंगे।




 

आंध्र प्रदेश के लिए ऐतिहासिक क्षण: भोगापुरम एयरपोर्ट पर पहले विमान की सफल लैंडिंग

05-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) आंध्र प्रदेश में विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए विजयनगर जिले के भोगापुरम में बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ट्रायल रन हुआ। इस ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहला एयरक्राफ्ट रविवार को लैंड हुआ।
नई दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट विशाखापट्टनम से लगभग 50 किलोमीटर दूर भोगपुरम एयरपोर्ट पर उतरी। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और विजयनगरम सांसद कलिसेट्टी अप्पाला नायडू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एयरक्राफ्ट में यात्रा की। एयरक्राफ्ट 3.8 किलोमीटर लंबे रनवे पर उतरा, जो देश का सबसे लंबा रनवे है और नवीनतम तकनीक से निर्मित है।
जीएमआर ग्रुप द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण के आधार पर निर्मित इस एयरपोर्ट का उद्घाटन जून में होने की उम्मीद है। जीएमआर ग्रुप की सहायक कंपनी जीएमआर विशाखापत्तनम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीवीआईएल) 2,200 एकड़ भूमि पर लगभग 4,592 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से एयरपोर्ट का निर्माण कर रही है।
जीवीआईएल के अनुसार 96% कार्य पूर्ण, पीएम मोदी चार-पांच महीनों में उद्घाटन करेंगे, एयरपोर्ट उत्तरी आंध्र की अर्थव्यवस्था बदलेगा
जीवीआईएल के अनुसार, एयरपोर्ट का 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस अवसर पर बोलते हुए राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार-पांच महीनों में एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश का चेहरा बदल देगा। उम्मीद है कि यह एयरपोर्ट उत्तरी आंध्र प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी को काफी बढ़ावा देगा और इस क्षेत्र को एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने में मदद करेगा।उन्होंने कहा कि भोगपुरम एयरपोर्ट विशाखापट्टनम के आगामी आर्थिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राम मोहन नायडू ने एयरपोर्ट सड़क अप्रैल तक पूरी होने, सात कनेक्शन सुनिश्चित करने तथा 136 एकड़ में विकसित एएडी एडुसिटी के उद्घाटन की जानकारी दी
राम मोहन नायडू ने इससे पहले कहा था कि विशाखापत्तनम से आगामी एयरपोर्ट तक निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि बंदरगाह शहर से एयरपोर्ट तक सात बिंदुओं के माध्यम से संपर्क स्थापित किया जाएगा और सड़क अप्रैल तक पूरी होने की संभावना है। पिछले महीने, नागरिक उड्डयन मंत्री ने भोगपुरम एयरपोर्ट के पास विमानन, अंतरिक्ष और रक्षा (एएडी) एडुसिटी का उद्घाटन किया। 136 एकड़ में बन रही एएडी एडुसिटी को भारत की पहली एकीकृत विमानन, अंतरिक्ष और रक्षा एडुसिटी होने का दावा किया जा रहा है।


 



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