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आयकर दिवस पर निर्मला सीतारमण का 5R मंत्र, टैक्स विवाद घटाने और करदाता सुविधा पर जोर

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित 167वें आयकर दिवस समारोह में जवाबदेह और करदाता-केंद्रित टैक्स व्यवस्था के लिए ‘5R’ की रूपरेखा पेश की। उन्होंने टैक्स व्यवस्था में अधिक निश्चितता लाने, कानूनी विवादों को कम करने और ईमानदार करदाताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इस दौरान आयकर अधिनियम, 2025 को कर प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार बताते हुए विभाग की तकनीक आधारित पहलों और सेवा सुधारों की भी सराहना की।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आयकर विभाग अब केवल कर संग्रह करने वाली संस्था नहीं रह गया है, बल्कि यह निष्पक्ष, कुशल, पारदर्शी और करदाता-केंद्रित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आयकर अधिनियम, 2025 को कानून को सरल बनाने, अनुपालन लागत घटाने और कारोबार सुगमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने ई-फाइलिंग पोर्टल की बेहतर क्षमता, रिटर्न प्रोसेसिंग में तेजी, शीघ्र रिफंड और शिकायत निवारण में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग को केवल शिकायतों का समाधान ही नहीं, बल्कि उनकी मूल वजहों की पहचान कर स्थायी समाधान विकसित करना चाहिए।
वित्त मंत्री ने करदाता सेवाओं के लिए ‘रिस्पॉन्सिव टैक्स गवर्नेंस’ के 5R सिद्धांत प्रस्तुत किए—
पहचानना (Recognise)
प्रतिक्रिया देना (Respond)
समाधान करना (Resolve)
विचार करना (Reflect)
सुधार करना (Reform)
उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाताओं को सुविधा मिलनी चाहिए, अनजाने में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए तथा कर प्रशासन को अपने अधिकारों का उपयोग विनम्रता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि करदाता भारत के विकास के भागीदार हैं और टैक्स संबंधी निश्चितता बढ़ाकर मुकदमों में कमी लाने की दिशा में निरंतर कार्य होना चाहिए।
निर्मला सीतारमण ने आधुनिक बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में निवेश को संस्थागत क्षमता मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, फोरेंसिक अकाउंटिंग, अंतरराष्ट्रीय कराधान, ट्रांसफर प्राइसिंग, डिजिटल एसेट्स, साइबर सुरक्षा और नेतृत्व विकास जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर बल दिया। उन्होंने विभाग से स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देने, करदाता अनुभव को सरल बनाने, तकनीक का जिम्मेदार उपयोग करने और जनता का विश्वास मजबूत करने का आह्वान किया।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने आयकर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 तथा नए नियम और प्रपत्र सरल, स्पष्ट और करदाता-अनुकूल कर प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने करदाताओं तक पहुंच बढ़ाने, शिकायतों के समाधान, कानूनी विवादों के बेहतर प्रबंधन और प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं को मजबूत करने के विभागीय प्रयासों की सराहना की। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सुधारों के केंद्र में करदाता होने चाहिए और अनुपालन में आसानी, कर निश्चितता तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाओं पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए।
सीबीडीटी के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि विभाग ने कानूनी विवादों में कमी, अपीलों के शीघ्र निपटारे और एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट्स के माध्यम से कर निश्चितता बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। निर्मला सीतारमण ने रिटर्न प्रोसेसिंग, रिफंड, अपील-प्रभाव आदेश और शिकायत निवारण में सुधार का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘प्रारंभ’ और ‘संवाद’ जैसी पहलों के माध्यम से करदाताओं से संवाद मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि पैन 2.0, आईटीबीए 2.0, आईईसी 3.0, कर साथी और सक्षम नज जैसी तकनीकी पहलों के जरिए कर अनुपालन को आसान बनाने और करदाता अनुभव बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
समारोह के दौरान वित्त मंत्री ने आयकर विभाग के छह प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय कराधान पर एफटीएंडटीआर डिवीजन की पहली वार्षिक रिपोर्ट, सूचना के आदान-प्रदान संबंधी नियमावली, एफएटीसीए और सीआरएस गाइडेंस नोट, क्रिप्टो-एसेट सेवा प्रदाताओं के लिए भारत का पहला व्यापक गाइडेंस नोट, एपीए कार्यक्रम की वार्षिक रिपोर्ट तथा कर प्रशासन के डिजिटलीकरण पर आधारित प्रकाशन शामिल हैं। कार्यक्रम में कराधान के इतिहास पर आधारित चार लघु फिल्में, कर्मयोगी शिक्षा पथ पोर्टल, वित्त वर्ष 2025-26 में आयकर विभाग की उपलब्धियां तथा डिजिटल युग में करदाता संवाद की नई पहलों का भी प्रदर्शन किया गया। 

 

कैबिनेट ने ‘भव्य-रसायन योजना’ को दी मंजूरी, तीन समर्पित रासायनिक पार्क होंगे विकसित : पीएम मोदी

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी।
योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा।
भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।
सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके।
 

‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव में दिख रही भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत, 116 पारंपरिक बुनाई शैलियों का प्रदर्शन

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हथकरघा) का कार्यालय नई दिल्ली के जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (सीसीआईई) में ‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव का आयोजन कर रहा है। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (7 अगस्त) के उपलक्ष्य में आयोजित यह महोत्सव 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। महोत्सव का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा परंपराओं, बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी और देश की विविध वस्त्र विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करना है।
महोत्सव में देशभर की 116 पारंपरिक बुनाई शैलियों पर आधारित उत्कृष्ट हस्तनिर्मित वस्त्र और परिधान प्रदर्शित किए गए हैं। यह प्रदर्शनी भारतीय बुनकरों की पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला, कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है।
प्रदर्शनी में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा सहित कई राज्यों की प्रसिद्ध हथकरघा परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। यहां बनारसी, जामदानी, कांचीपुरम सिल्क, संबलपुरी इकत, पैठणी, कानी पश्मीना, बावन बूटी, कोटपाड, इलकल, कासरगोड, हिम्रू और रिषा जैसी विशिष्ट बुनाई शैलियों को देखा जा सकता है, जो अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान और वस्त्र परंपरा को दर्शाती हैं।
उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ महोत्सव का उद्देश्य हस्तनिर्मित वस्त्रों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और टिकाऊ, कारीगर-आधारित उत्पादन प्रणाली को प्रोत्साहित करना भी है। यह आयोजन बुनकरों, डिजाइनरों, शोधकर्ताओं, संग्राहकों, खरीदारों और आम नागरिकों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि वह कारीगरों को निरंतर सहयोग, डिजाइन नवाचार, बाजार विस्तार और उपभोक्ता जागरूकता के माध्यम से देश की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है। ‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भारत की जीवंत वस्त्र परंपराओं का उत्सव मनाने के साथ नागरिकों को स्थानीय बुनकरों और हस्तनिर्मित उत्पादों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है।
‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली के जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम में आयोजित किया जा रहा है। आम जनता इस अवधि के दौरान महोत्सव का भ्रमण कर भारत की कालजयी हथकरघा विरासत और अद्वितीय शिल्पकला का अनुभव कर सकती है।







 

प्रधानमंत्री मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने देवशयनी एकादशी पर देशवासियों को दी शुभकामनाएं

25-Jul-2026

नई दिल्ली।(शोर संदेश) देशभर में शनिवार को देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आषाढ़ी एकादशी के पवित्र मौके पर बधाई। यह शुभ दिन भक्ति और दया के हमेशा रहने वाले संदेश के बारे में है। भगवान विट्ठल का आशीर्वाद खुशी, मेलजोल और खुशहाली लाए और हमें एक बेहतर समाज की ओर ले जाए। वह हर इंसान की भलाई और इज्जत के लिए बिना थके सेवा करने और काम करने के हमारे इरादे को और मजबूत करें।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद सभी पर बना रहे। यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए तथा हमें सेवा, करुणा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।”
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संदेश में कहा, “देवशयनी आषाढ़ी एकादशी पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान विट्ठल की कृपा सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पर श्लोक “सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत्सुप्तं भवेदिदम्, विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत्सर्वं चराचरम्॥” साझा करते हुए लिखा, “आप सभी को देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं। पावन चातुर्मास के शुभारंभ का यह अवसर आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपादृष्टि आप सभी पर सदैव बनी रहे।”
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संदेश में कहा, “सभी लोगों को आषाढ़ी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं। श्री पांडुरंग विट्ठल और माता रुक्मिणी देवी की कृपा सभी पर बनी रहे। यह पावन पर्व राज्य में सुख, शांति, खेती-बाड़ी में समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।”
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने लिखा, “सभी को टोली एकादशी (आषाढ़ी एकादशी) के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान महाविष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्रत्येक घर में शांति, समृद्धि, खुशी, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करे। यह पावन अवसर हमें भक्ति, करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहे।” 








 

भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम; 69,725 करोड़ रुपए की योजना मंजूर

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) केंद्र सरकार ने देश के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 69,725 करोड़ रुपए के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज का उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाना, समुद्री क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण उपलब्ध कराना, कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
लोकसभा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि भारतीय शिपयार्ड की लागत को वैश्विक शिपयार्ड के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम को मंजूरी दी गई है। इस योजना से घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को लागत के स्तर पर मजबूती मिलेगी।
पैकेज के तहत 25,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस फंड में 20,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपए का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड शामिल है।
सरकार ने 19,989 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (एसबीडीएस) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत ग्रीनफील्ड क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और मौजूदा शिपयार्ड का ब्राउनफील्ड विस्तार किया जाएगा। इसका लक्ष्य देश की जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाकर प्रतिवर्ष 45 लाख ग्रॉस टनेज तक पहुंचाना है।
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ये योजनाएं मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनुरूप तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
सरकार ने जहाज निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए हैं। इनमें बड़े वाणिज्यिक जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना और जहाजों की मांग को एकीकृत करने जैसी पहल शामिल हैं।
सरकार ने 19 सितंबर 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (जीटी) या उससे अधिक क्षमता वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया था। इसके अलावा, भारत में निर्मित 1,500 जीटी या उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को भी यह दर्जा प्रदान किया गया है।
मांग को एकीकृत करने की रणनीति के तहत 400 से अधिक जहाजों के अधिग्रहण की योजना बनाई गई है। इससे भारतीय शिपयार्ड को दीर्घकालिक ऑर्डर मिलने की स्पष्टता मिलेगी और उद्योग में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन क्लस्टरों के विकसित होने से देश की जहाज निर्माण क्षमता, रोजगार सृजन और समुद्री उद्योग के विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनके निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के प्रति खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। उनका संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चंद्रशेखर आजाद को शत-शत नमन करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया और हर भारतीय के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्र चेतना जगाने का भी कार्य किया। उन्होंने उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नई ऊर्जा बताया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें “मां भारती के अनन्य उपासक” और “अमर हुतात्मा” करार देते हुए कोटि-कोटि नमन किया।
विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि
– उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “‘दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे’ के उद्घोषक महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।”
– दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
– मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को “मध्यप्रदेश की माटी का गौरव” बताते हुए सादर नमन किया।
– राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अमर क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान, साहस तथा राष्ट्रभक्ति को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। 








 

‘प्रकृति कैफे’ जहां मिलेगा किफायती दामों पर आयुष-प्रेरित पौष्टिक भोजन

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए आयुष भवन में ‘प्रकृति कैफे’ की शुरुआत की गई।दरअसल, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज आयुष भवन में ‘प्रकृति कैफे’ का उद्घाटन किया। यह आयुष मंत्रालय की अपनी तरह की पहली कार्यस्थल पहल है, जिसका उद्देश्य ‘आयुष आहार’ से प्रेरित स्वस्थ आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देना है।
इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “प्रकृति कैफे न सिर्फ़ स्वास्थ्य देखभाल के जरिए, बल्कि रोजमर्रा के स्वस्थ विकल्पों के माध्यम से भी आरोग्य को बढ़ावा देने के हमारे दृष्टिकोण को दर्शाता है। भोजन हमारे स्वास्थ्य का एक अहम हिस्सा है और पौष्टिक भोजन अपने आप में अच्छे स्वास्थ्य के लिए पोषण और शक्ति देने का काम कर सकता है। ‘आयुष आहार’ जैसी पहलों के माध्यम से, हम पौष्टिक और संतुलित खान-पान के प्रति अधिक जागरूकता लाने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज हमारे खान-पान की आदतें बदल रही हैं। जंक फूड का बढ़ता चलन सेहत पर बुरा असर डाल रहा है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को बढ़ा रहा है। हमें विशेष रूप से युवाओं में ऐसी अस्वस्थ आदतों से जुड़े खतरों को समझना होगा और स्वस्थ विकल्पों को अपनाना होगा। ‘प्रकृति कैफे’ एक ऐसी जगह होगी जहां लोग किफायती दामों पर आयुष-प्रेरित पौष्टिक भोजन के साथ स्वस्थ जीवनशैली के मूल्यों को अपना सकेंगे।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने स्वस्थ जीवनशैली के हिस्से के तौर पर सोच-समझकर खान-पान के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “प्रकृति कैफे का मकसद आयुष के सिद्धांतों को रोजमर्रा की ज़िंदगी में अपनाना है। स्वस्थ जीवनशैली आसान और लगातार किए जाने वाले सही फैसलों से बनती है और सोच-समझकर खाना इस सफर का एक अहम हिस्सा है। हमें उम्मीद है कि प्रकृति कैफे एक ऐसी जगह बनेगी जो स्वस्थ खान-पान की आदतों, आपसी मेलजोल और पौष्टिक आहार से जुड़ी भारत की समृद्ध परंपराओं को बढ़ावा देगी।”
यह कैफे ‘आयुष आहार’ पहल से प्रेरित ताजा और पौष्टिक खाने के कई विकल्प देता है। इस पहल का मकसद भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर आधारित पौष्टिक खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना है। साथ ही, इसका उद्देश्य एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली के लिए भोजन और पोषण के महत्व के बारे में ज़्यादा जागरूकता पैदा करना भी है।
कैफे की व्यंजन-सूची में कई तरह के पौष्टिक व्यंजन शामिल हैं, जैसे चुकंदर और ओट्स कटलेट, कोसम्बरी, मिलेट ढोकला, खांडवी, ओट्स पोहा, कुटकी, (लिटिल मिलेट) वेजिटेबल उपमा और गुड़ से बनी मखाना खीर। इसके साथ ही ताज़ा नारियल पानी और हर्बल पेय जैसे कि तुलसी-अदरक चाय और ग्रीन टी के विकल्प भी उपलब्ध हैं। ये व्यंजन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संतुलित, सेहतमंद और पौष्टिक खाने को बढ़ावा देकर ‘आयुष आहार’ के सिद्धांतों को दर्शाते हैं।
उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। ‘प्रकृति कैफे’ का शुभारंभ निवारक स्वास्थ्य सेवा के समकालीन दृष्टिकोण के साथ आयुष के सिद्धांतों को जोड़कर स्वास्थ्य, आरोग्य और जागरुक जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली कार्यस्थल संस्कृति को बढ़ावा देने के मंत्रालय के प्रयासों में एक और कदम है।


 

दिल्ली मेट्रो का बड़ा फैसला: सुबह 7:30 बजे से 16 स्टेशन बंद, 3 पर इंटरचेंज की सुविधा जारी

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) दिल्ली मेट्रो ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक 16 स्टेशनों को बंद कर दिया है। दिल्ली मेट्रो की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
दिल्ली मेट्रो की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर जानकारी दी गई कि लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केन्द्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम के स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
इससे पहले बुधवार को भी सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखा गया था। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा दी गई थी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया था कि अगले आदेश तक लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे।
रविवार को भी सुरक्षा कारणों से जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया था, हालांकि कुछ समय बाद राजीव चौक और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा बहाल कर दी गई थी और उनके गेट भी खोल दिए गए थे।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने संसद तक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मार्च के दौरान हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के सिलसिले में 10 एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं के संबंध में ये मामले दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है।






 

आसियान फोरम की बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा-अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले अस्वीकार्य, आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस जरूरी

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मनीला में आयोजित 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र रूप से जारी रहना चाहिए।
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी जयशंकर ने कहा कि उन्होंने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया, जिसके पांचों प्रमुख स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा, ” भारत आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने, साझा मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित करने और वास्तविक समय व टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करने का समर्थन करता है।”
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) का समर्थन करता है। नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल, राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा, “हाल के समय में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, जमैका में आए चक्रवातों के साथ ही म्यांमार, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंपों के बाद पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग दिया है।”
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के गंभीर परिणाम होने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाले स्रोतों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया, ” भारत, मलेशिया के साथ मिलकर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (एडीएमएम+) के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है।”
समुद्री सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि भारत का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर, इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस पहल और उत्तरी अरब सागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक भारतीय नौसैनिक बलों की तैनाती समुद्री डकैती, मानव एवं मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने तथा समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण को कमजोर करने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए जिम्मेदार, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने और साइबर अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस-1982) के अनुरूप एक प्रभावी, सार्थक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करे। दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान अपने-अपने दावे करते हैं, जिसके कारण समय-समय पर समुद्री टकराव की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

हाई-डेंसिटी रेल मार्ग पर तीसरी लाइन के लिए 440 करोड़ रुपए की परियोजना मंजूर

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की 440 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना, यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना तथा परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की भारतीय रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर हर वर्ष अतिरिक्त लगभग 3.52 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी, जिससे उद्योगों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को गति मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, यह सेक्शन हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (एचयूएन-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का हिस्सा सिंगल लाइन है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से जारी है। तीसरी रेल लाइन बनने के बाद इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता और परिचालन लचीलापन दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
इस रेल मार्ग से यात्री ट्रेनों के अलावा मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा-इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, केमिकल सॉल्ट, चारकोल, सीमेंट, बैलेस्ट और राख जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। वर्तमान में इस मार्ग पर करीब 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई हो रही है।
रेलवे के मुताबिक, मौजूदा सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71% तक पहुंच चुका है, जो इस मार्ग पर अत्यधिक भीड़भाड़ को दर्शाता है। तीसरी लाइन बनने से अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी, जिससे बढ़ती यात्री और माल यातायात की मांग को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेज होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी और रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर निर्भर उद्योगों और कारोबारों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
भारतीय रेलवे ने कहा कि यह मंजूरी हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर क्षमता विस्तार की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य माल और यात्री ट्रेनों की तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करते हुए आधुनिक, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क के माध्यम से देश के आर्थिक विकास को गति देना है।




 


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