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सौर शक्ति से बदलेगा भारत का ऊर्जा परिदृश्य, PM-SSY से फ्लोटिंग सोलर को नई रफ्तार

02-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार करते हुए स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख आधार के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी देकर इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के समर्थन से 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत की स्थापित सौर क्षमता वर्ष 2014 में करीब 3 गीगावाट थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट पहुंच गई। सौर पार्क, रूफटॉप सौर प्रणाली, सौरीकृत कृषि पंप और अन्य योजनाओं ने देशभर में सौर ऊर्जा की तैनाती को गति दी है। क्षमता, विनिर्माण और उपभोक्ता भागीदारी में लगातार वृद्धि ने सौर ऊर्जा को देश के बिजली मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। कम से कम दो घंटे की अवधि के लिए 10,000 मेगावाट भंडारण क्षमता वाली ऊर्जा भंडारण प्रणालियां राज्यों को पीक डिमांड प्रबंधन में मदद करेंगी। मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का इस्तेमाल होने से भूमि संसाधनों पर दबाव भी कम होगा।
PM-SSY के लिए ₹5,070 करोड़ का बजट अनुमान रखा गया है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू की जाएगी। इसके तहत सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाभान्वित होने के पात्र होंगे। इससे देश की मौजूदा करीब 700 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता बढ़कर 5,000 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में करीब 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना है। PM-SSY से सालाना करीब 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। योजना से 16,000-17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार पैदा होने के साथ फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत ने वर्ष 2025 में 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जिससे वार्षिक वृद्धि के मामले में वह अमेरिका से आगे निकल गया। देश दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सौर विकास बाजार के रूप में भी उभरा है। यह वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
भारत के सौर विस्तार की नींव मजबूत नीतिगत ढांचे पर रखी गई है। राष्ट्रीय सौर मिशन, सोलर पार्क योजना, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और प्रतिस्पर्धी बोली व्यवस्था ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा तैनाती को गति दी। इन पहलों ने निवेश, बुनियादी ढांचे और बाजार में भरोसे को मजबूत किया है।
राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सौर क्षमता के प्रमुख केंद्र हैं। बड़ी सौर परियोजनाओं से 118.79 गीगावाट स्थापित क्षमता जुड़ी है। भड़ला सोलर पार्क, पावागड़ा सोलर पार्क और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क देश की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सौर प्रणालियां 27.88 गीगावाट का योगदान देती हैं, जबकि शेष क्षमता हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं से आती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई 23.83 गीगावाट क्षमता से करीब दोगुनी है। इसी अवधि में सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता वर्ष 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक करीब 172 गीगावाट हो गई।
देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है। गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 55.29 गीगावाट दर्ज की गई। 29 जुलाई 2025 को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत की बिजली मांग का 51.5% पूरा किया, जो अब तक दर्ज सबसे अधिक मासिक हिस्सा था।
भारत ने COP26 में पंचामृत लक्ष्यों के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। मिशन LiFE के जरिए सतत उपभोग और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं (RPO) बिजली वितरण कंपनियों और अन्य बाध्य संस्थाओं के लिए बिजली का एक निर्धारित हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से खरीदना जरूरी बनाती हैं। RPO व्यवस्था से डेवलपर्स और निवेशकों को दीर्घकालिक बाजार निश्चितता मिलती है। वर्ष 2026-27 के लिए RPO लक्ष्य 35.95% निर्धारित किया गया है।
सौर ऊर्जा की मांग उपयोगिताओं और बड़े डेवलपर्स तक सीमित नहीं है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना परिवारों को रूफटॉप सौर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) कृषि क्षेत्र में सौर पंप और फीडर सौरीकरण को बढ़ावा दे रहा है। इन योजनाओं ने परिवारों, किसानों, कारोबारियों और बिजली उपयोगिताओं की भागीदारी बढ़ाई है।
ई-रिवर्स नीलामी व्यवस्था के जरिए डेवलपर्स कम टैरिफ पर बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) जैसी खरीद एजेंसियों ने पारदर्शी टैरिफ खोज तंत्र को मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप सौर बिजली का टैरिफ वर्ष 2010 में करीब ₹18 प्रति यूनिट से घटकर 2017 में भड़ला सोलर पार्क की नीलामी में रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट तक पहुंचा।
वर्ष 2025 में यूटिलिटी-स्केल सौर पीवी की समतुल्य बिजली लागत (LCOE) भारत में करीब 35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रही, जबकि वैश्विक औसत 44 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा था। कम लागत ने सौर ऊर्जा को देश में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाने में मदद की है।
सोलर पार्क योजना के तहत फरवरी 2026 तक देशभर में 54 सोलर पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी संयुक्त स्वीकृत क्षमता 39,188 मेगावाट है। राजस्थान में 11, गुजरात में 7, आंध्र प्रदेश में 5, महाराष्ट्र में 4, मध्य प्रदेश में 9 और उत्तर प्रदेश में 8 पार्कों को मंजूरी मिली है। यह बुनियादी ढांचा बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं के विकास में मदद कर रहा है।
राजस्थान के भड़ला क्षेत्र में करीब 5,700 हेक्टेयर यानी 56 वर्ग किलोमीटर में फैले भड़ला सोलर पार्क की स्थापित क्षमता 2,245 मेगावाट है। 2015 में सोलर पार्क योजना के तहत शुरू हुआ इसका विकास चरणबद्ध तरीके से 2020 तक पूरा हुआ। उच्च सौर विकिरण, कम वर्षा और विरल वनस्पति वाला यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) कार्यक्रम का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों से मांग केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए पारेषण नेटवर्क को मजबूत करना है। फरवरी 2026 तक कार्यक्रम ने मजबूत पारेषण नेटवर्क के जरिए 24,567.8 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सक्षम बनाया। दस राज्यों में परियोजनाएं करीब 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी का समर्थन करने के लिए तैयार की जा रही हैं।
उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना 2021 में ₹4,500 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू हुई थी। वर्ष 2022 में इसमें अतिरिक्त ₹19,500 करोड़ का प्रावधान किया गया। अक्टूबर 2024 तक योजना से करीब ₹35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ और लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए।
अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM) को 2019 में सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के लिए गुणवत्ता आश्वासन ढांचे के रूप में शुरू किया गया। इसके तहत सरकार समर्थित और प्रतिस्पर्धी बोली वाली निर्धारित परियोजनाओं में केवल सूचीबद्ध निर्माताओं और मॉडलों के उपयोग की अनुमति है। PLI और ALMM ने मिलकर घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद की है।
13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य घरों तक रूफटॉप सौर ऊर्जा पहुंचाना है। जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है। दिसंबर 2025 तक ₹14,771.82 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता वितरित की गई और 9 दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों को शून्य बिजली बिल मिला।
ग्वालियर के जावर कॉलोनी निवासी सुधांशु दुबे ने पीएम सूर्य घर योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद अपने घर में रूफटॉप सौर प्रणाली लगाई। स्थापना और सब्सिडी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। पहले जहां उनका बिजली बिल अक्सर ₹10,000 से अधिक होता था, वहीं सौर प्रणाली लगाने के बाद यह खर्च लगभग नगण्य हो गया।
2019 में शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना है। इसके तहत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र, स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण को समर्थन दिया जाता है। योजना से सिंचाई के लिए दिन में विश्वसनीय बिजली, डीजल पर कम निर्भरता और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने पर जोर है।
पीएम-कुसुम के तहत करीब 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 15.89 लाख से अधिक कृषि पंपों को फीडर स्तर पर सौरीकरण के जरिए कवर किया गया है। किसानों की भूमि पर करीब 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता चालू की गई है। योजना से देशभर में 21.77 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में 44.61 गीगावाट जोड़ी गई सौर क्षमता में वितरित सौर समाधानों का योगदान 16.3 गीगावाट यानी 36% रहा। इसमें पीएम-कुसुम से 7.6 गीगावाट और रूफटॉप सौर से 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल थी। इससे स्पष्ट है कि सौर ऊर्जा का विस्तार बड़े बिजली संयंत्रों के साथ-साथ घरों और खेतों तक भी तेजी से हो रहा है।
2015 में पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) वैश्विक सौर सहयोग के प्रमुख मंचों में शामिल हो गया है। यह सदस्य देशों को सौर ऊर्जा की तैनाती तेज करने, ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने का मंच प्रदान करता है।
वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) की परिकल्पना भारत ने 2018 में की थी। COP26 में 2021 में भारत और यूनाइटेड किंगडम ने ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव-वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (GGI-OSOWOG) शुरू किया। इसका उद्देश्य परस्पर जुड़े बिजली ग्रिड के जरिए सीमा-पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है।
ISA और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए भारत वैश्विक दक्षिण में नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत कर रहा है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने की दिशा में सहमति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र नीतिगत समर्थन, बढ़ते घरेलू विनिर्माण, मजबूत बुनियादी ढांचे और बढ़ती जन भागीदारी के सहारे नए चरण में पहुंच रहा है। पंचामृत प्रतिबद्धताओं और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का प्रमुख स्तंभ बनी रहेगी। PM-SSY जैसी नई पहल फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण के जरिए इस बदलाव को और गति देने के साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्व को मजबूत कर सकती है। 


 


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