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भारत में बारिश की कमी घटकर हुई 12%, अगस्त में अल-नीनो का खतरा

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) डोलैट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हालांकि जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ने के साथ-साथ, निकट भविष्य में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अल नीनो का जोखिम अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह बारिश के दायरे में सुधार हुआ है, लेकिन बारिश के वितरण में श्रेणियों के हिसाब से बदलाव देखने को मिला।
कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक सप्ताह पहले के 40 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया, जबकि बहुत कम बारिश वाले इलाकों की संख्या शून्य रही। वहीं, अधिक बारिश वाले इलाकों का हिस्सा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सामान्य बारिश वाले इलाकों का हिस्सा 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत रह गया। डोलैट कैपिटल के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अधिक बारिश वाले इलाकों की वजह से हुआ, न कि कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य स्थिति में आने से। इससे स्पष्ट होता है कि देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, न कि बारिश के वितरण में व्यापक सुधार हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है, “आगे देखें तो, आईएमडी का निकट-अवधि का अनुमान मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत देता है, हालांकि मजबूत होते अल-नीनो और लगभग न्यूट्रल आईओडी के कारण अगस्त में भी मौसमी जोखिम बना हुआ है।”
इस बीच सप्ताह के दौरान खरीफ की बुवाई में और प्रगति हुई। 31 जुलाई तक कुल बुवाई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 920.7 लाख हेक्टेयर था। पिछले साल की तुलना में बुवाई के अंतर में कमी आई, हालांकि फसल-वार रुझान मिले-जुले रहे। तिलहन के मामले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीजन के अधिकांश समय पीछे रहने के बाद अब यह पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त की स्थिति में आ गया है। बुवाई 172.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 171.1 लाख हेक्टेयर थी। 
इस तरह, पिछले सप्ताह 3.4 लाख हेक्टेयर की कमी से स्थिति बदलकर 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त में बदल गई।मोटे अनाज ने भी अपने अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेजी के संकेत मिलने के बावजूद धान की बुआई पिछले साल की रफ्तार से थोड़ी और पिछड़ गई। दालों की बुआई में मामूली सुधार हुआ, जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ।





 

 


महाराष्ट्र के शिक्षाविद और पूर्व गवर्नर डी.वाई. पाटिल का निधन, पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर तथा डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक डॉ. यशवंतराव (डीवाई) पाटिल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। पाटिल का मंगलवार को कोल्हापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 90 साल के थे। नेताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और जनसेवा के क्षेत्रों में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और उनके निधन को देश के लिए बड़ी क्षति बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर डॉ. पाटिल को उनके परोपकारी कार्यों और वंचितों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए याद किया। उन्होंने लिखा, “श्री डीवाई पाटिल जी परोपकार और विशेष रूप से शिक्षा के माध्यम से समाज की सेवा करने में सबसे आगे थे। उन्होंने हमेशा दूसरों, खासकर गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया। उनके निधन से दुखी हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं। ओम शांति।”
https://x.com/narendramodi/status/2084567837902021034?s=20
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जाने-माने शिक्षाविद और बिहार व पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर डॉ. डीवाई पाटिल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके जीवन भर के समर्पण और समाज सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। राजनाथ सिंह ने कहा, “जाने-माने शिक्षाविद और बिहार व पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर डॉ. डीवाई पाटिल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा को आगे बढ़ाने और अटूट प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करने में समर्पित कर दिया। उनकी शानदार जनसेवा और राष्ट्र-निर्माण में उनके स्थायी योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, प्रियजनों और चाहने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!”
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने शासन और राष्ट्र-निर्माण में डॉ. पाटिल के शानदार करियर को याद करते हुए एक्स पर लिखा, “बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर और डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक डॉ. डीवाई पाटिल के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। जनसेवा के प्रति उनका लंबा और शानदार समर्पण, साथ ही शिक्षा, शासन और राष्ट्र-निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने डॉ. पाटिल के साधारण शुरुआत से ऊंचे संवैधानिक पदों तक पहुंचने के सफर को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर और डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक पद्म डॉ. डीवाई पाटिल जी के निधन की खबर बेहद दुखद है। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विभिन्न संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने तक का उनका सफर, और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका बेमिसाल योगदान हमेशा याद रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार व उनके शुभचिंतकों को इस दुख को सहने की शक्ति दें। ओम शांति।”





 

भारत में जुलाई में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग मजबूत रही, यात्री वाहनों की बिक्री 34 प्रतिशत बढ़ी

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र जुलाई में अच्छी घरेलू मांग के चलते मजबूत रहा है। इस दौरान यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 34 प्रतिशत और रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़ी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। एचएसबीसी इंडिया की ओर से जारी किए गए विश्लेषण में कहा गया कि भारत में यात्री वाहनों के साथ दोपहिया और ट्रैक्टर्स की मांग ऐसे समय पर मजबूती रही है, जब दुनिया में वैश्विक अस्थिरता के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पैसेंजर गाड़ियों की मांग में यूटिलिटी गाड़ियों की जबरदस्त बिक्री का अहम योगदान रहा, जबकि ग्राहकों की लगातार दिलचस्पी और बेहतर सप्लाई चेन से भी कार बनाने वाली कंपनियों को फायदा हुआ। टू-व्हीलर सेगमेंट में, सालाना आधार पर होलसेल वॉल्यूम में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुल रिटेल बिक्री 34 प्रतिशत बढ़ी।
इसी तरह, कमर्शियल गाड़ियों (सीवी) की मांग को ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा से पहले की गई रिप्लेसमेंट खरीदारी से सहारा मिला। बड़ी कंपनियों की कुल सीवी (कमर्शियल व्हीकल) बिक्री में साल-दर-साल लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कमोडिटी की ऊंची कीमतें मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल के लिए कमोडिटी कॉस्ट इंडेक्स में लगभग 10-12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कमर्शियल व्हीकल और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के इंडेक्स में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में कई वाहन निर्माताओं द्वारा कम मुनाफा दर्ज किए जाने के बाद सितंबर तिमाही में भी मार्जिन पर कुछ दबाव बने रहने की उम्मीद है।
इस बीच, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का चलन मजबूत बना रहा है। जुलाई में कुल टू-व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत रही, जबकि ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर की पैठ 8 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालांकि हाल के हफ्तों में बारिश में सुधार हुआ है, लेकिन जलाशयों का जलस्तर अभी भी लंबे समय के औसत से नीचे बना हुआ है। साथ ही, 2026 में अल-नीनो की घटना की संभावना आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग और ट्रैक्टर की बिक्री के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकती है।












 

पीओके में चुनाव दिखावा, पाखंडपूर्ण मुखौटे के पार देखना जरूरी: विदेश मंत्रालय

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे “तथाकथित चुनावों” को दिखावा करार दिया है और वैश्विक संगठनों से अपील की कि आम नागरिकों पर हो रही ज्यादती के खिलाफ कदम उठाएं।
मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। वास्तिवक स्थिति वहां हो रहे जन प्रदर्शन और पाकिस्तानी बलों द्वारा की जा रही निर्मम हत्याओं की है। ऐसे खोखले दावे वास्तविकता से अलग हैं।”
पीओके में प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के परिणाम को रेखांकित करते हुए जायसवाल ने कहा, “वहां जो जन प्रदर्शन चल रहा है वहां जून से अब तक 90 लोग मारे गए हैं और कई और घायल हुए हैं। वहां की सत्ता व्यवस्था जनता के असंतोष का जवाब गोली से, संचार बंदी, दमन और धमकी से दिया है।”
उन्होंने वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान का पाखंड से भरा चेहरा साफ देखनी की अपील की। आगे कहा, “पाकिस्तान अब खोखले चुनावी अभ्यास ये वैधता का भ्रम पैदा कर रहा है। इसके लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विश्व समुदाय को मानवाधिकार पर पाकिस्तान के पाखंडपूर्ण उपदेशों के मुखौटे के पार वास्तविकता को देखना चाहिए।”
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग और दमनकारी कार्रवाई की दुनिया भर में चर्चा है। जम्मू और कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन 5 जून को शुरू हुए थे।
वहीं पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा, “सभी ने देखा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमने उन्हें कैसा जवाब दिया था। हम तो सभी देशों से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म और इसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की अपील करते हैं। हम पाकिस्तान से भी सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त एक्शन लेने और अपनी धरती से चल रहे आतंकी ठिकानों को खत्म करने की अपील करते हैं।
















 

गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी को बदलाव का माध्यम बनाने पर ब्रिक्स देशों में सहमति

04-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में “परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी” विषय के साथ संपन्न हुई। यह बैठक ब्रिक्स के व्यापक विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” के अनुरूप आयोजित की गई। कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के एनएसओ प्रतिनिधियों के साथ नीति निर्माता, शिक्षाविद, विचारक, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों समेत 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दूसरे दिन “ब्रिक्स सहयोग की संभावनाओं के लिए साझा नवाचार क्षेत्रों की पहचान” विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र-III में आधुनिक सर्वेक्षण पद्धतियों और डिजिटल डेटा संग्रहण पर चर्चा हुई। भारत और मिस्र ने सर्वेक्षण तथा जनगणना डेटा संग्रहण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
भारत ने पेपर आधारित सर्वेक्षण से आधुनिक डिजिटल उपकरणों की ओर बदलाव के दौरान मिले अनुभव और सीख प्रस्तुत की। ई-सिग्मा (ई-सर्वे सूचना संग्रहण और प्रबंधन अनुप्रयोग) कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (सीएपीआई) सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसे बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षणों को क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर में एकीकृत करने के लिए तैयार किया गया है।
मिस्र ने आधिकारिक आंकड़े तैयार करने में भू-स्थानिक तकनीक के इस्तेमाल को रेखांकित किया। बैठक में सर्वेक्षणों के संचालन में एआई के उपयोग और सर्वेक्षण डेटा के साथ प्रशासनिक डेटा के सूक्ष्म उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया।
तकनीकी सत्र-IV में व्यापक आर्थिक और क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों ने व्यापक आर्थिक सांख्यिकी को मजबूत करने के लिए अपनाई गई प्रमुख रणनीतियों और अब तक की प्रगति साझा की।
भारत ने राष्ट्रीय लेखा प्रणाली, 2025 (2025 एसएनए) के कार्यान्वयन के लिए अपना संक्रमणकालीन रोडमैप प्रस्तुत किया। साथ ही आधिकारिक सांख्यिकी तैयार करने में प्रशासनिक डेटा के प्रभावी इस्तेमाल का प्रदर्शन किया। चीन ने 2025 एसएनए ढांचे को लागू करने में अपनी प्रगति और शुरुआती व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
ब्राजील ने वैकल्पिक डेटा स्रोतों, खासकर बढ़ते ई-कॉमर्स और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऑनलाइन डेटा को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल करने की संभावनाओं को सामने रखा। ब्राजील ने कहा कि गैर-पारंपरिक डेटा मौजूदा स्रोतों का पूरक बन सकता है और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में सदस्य देशों द्वारा तैयार किए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता बढ़ा सकता है। इंडोनेशिया ने 2025 एसएनए में संक्रमण की अपनी कार्यान्वयन योजना और आईएसआईसी 5 को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति साझा की।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की बैठक के साथ सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने जनाग्रह सेंटर फॉर सिटिजनशिप एंड डेमोक्रेसी के सहयोग से “विकसित होते डेटा इकोसिस्टम में एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम का निर्माण” विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में जिम्मेदार एआई अपनाने और साक्ष्य-आधारित शासन को समर्थन देने के लिए अंतरसंचालनीय, विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाले सार्वजनिक डेटा सिस्टम के महत्व पर जोर दिया गया। एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम के व्यावहारिक आधारभूत तत्वों पर गोलमेज चर्चा हुई, जिसके बाद भारत, दक्षिण अफ्रीका, रूस, इंडोनेशिया, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य भागीदार संगठनों के केस स्टडी प्रस्तुत किए गए।
प्रतिभागियों ने खंडित डेटा सिस्टम को एआई-रेडी इकोसिस्टम में बदलने के लिए डेटा गवर्नेंस, अंतरसंचालनीयता, मेटाडेटा मानकों, संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने से जुड़े अनुभव साझा किए। चर्चा में सार्वजनिक हित के लिए एआई की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम मजबूत सार्वजनिक डेटा सिस्टम के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया गया।
बैठक के दौरान भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और बीपीएस-सांख्यिकी इंडोनेशिया ने आधिकारिक सांख्यिकी, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक द्विपक्षीय बैठक में आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए। एलओआई ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी एवं पद्धतिगत उन्नति, मानव संसाधन विकास और एआई, मेटाडेटा मानकीकरण तथा ओपन डेटा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।
सत्र का समापन ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाने और उसके बाद समापन वक्तव्य सत्र के साथ हुआ। संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाना ब्रिक्स सदस्य देशों में सांख्यिकीय ढांचों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। इससे अधिक सशक्त, पारदर्शी और नीति-प्रासंगिक आधिकारिक आंकड़ों के लिए आधार तैयार होगा।

सावन का पहला सोमवार आज: देशभर में हर-हर महादेव की गूंज, मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक आज सावन के पहले सोमवार की धूम है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक पवित्र नदी तटों, जलाशयों और मंदिरों खासतौर पर शिवालयों में हर-हर महादेव की गूंज हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी देवों के देव महादेव की आस्था में डूबी है। तड़के से ही सभी शिवालयों के पट भक्तों के लिए खुले हुए हैं।
शहर के सभी शिवालयों के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन, हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ, उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ, उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश तथा झारखंड के देवघर में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रयागराज के संगम क्षेत्र में भी ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान है। 
श्रद्धालु त्रिवेणी तट पर स्नान कर सूर्य भगवान को जल अर्पित कर रहे हैं। चित्रकूट के रामघाट पर मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भक्त सबसे पहले महाराजाधिराज मतगजेन्द्र नाथ मंदिर (शिवालय) में जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं।दिल्ली में सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख मंदिरों में अर्द्धसैनिक बल, दिल्ली पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में भक्त रात दो बजे से ही दर्शन-पूजन कर रहे हैं। मंदिर के बाहर दिल्ली पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। मेटल डिटेक्टर गेट और संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए मशीनें लगाई गई हैं। इस बार गौरी शंकर मंदिर में भक्त सीधे जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे। इसके लिए गर्भगृह के बाहर क्यारियां बनाई गई हैं।
चांदनी चौक के बनखंडी मंदिर और कनॉट प्लेस स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। विश्वेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक का अनुष्ठान भी आरंभ हो गया है। सावन के इस पहले सोमवार पर देशभर में शिव भक्ति का यह दृश्य आस्था और श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है।



 

सावन के पहले सोमवार पर NCR में बारिश के आसार, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सावन के पहले सोमवार पर दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लोगों को मौसम राहत देने वाला रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार, 4 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। 
विभाग का कहना है कि पूरे सप्ताह आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और रुक-रुक कर हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन हवा में नमी अधिक रहने के कारण उमस लोगों को परेशान कर सकती है।
मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 3 अगस्त को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन आसमान सामान्यतः बादलों से ढका रहेगा और हल्की बारिश हो सकती है। इस दिन किसी प्रकार की मौसम संबंधी चेतावनी जारी नहीं की गई है। वहीं, 4 अगस्त को भी अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हालांकि इस दिन मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वाह्न, अपराह्न और शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दिन अधिकतम आर्द्रता 90 प्रतिशत और न्यूनतम 75 प्रतिशत रह सकती है, जिससे उमस का असर अधिक महसूस होगा।
इसके बाद 5 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम सामान्यतः बादलों से घिरा रहेगा और हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
6 अगस्त को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहेगा। अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश के आसार हैं। 7 अगस्त को अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन अधिकतम आर्द्रता 95 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि न्यूनतम आर्द्रता 70 प्रतिशत रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।
सप्ताह के अंतिम दिन 8 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। इस दिन भी सामान्यतः बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर होने वाली बारिश से दिन के तापमान में बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
हालांकि वातावरण में नमी अधिक होने के कारण उमस बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप निकलने पर सावधानी बरतने और बारिश के दौरान यातायात संबंधी सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है।
 

पीएम मोदी ने एक्स पर शेयर किया सुभाषित, कहा- ‘भाग्य प्रतिकूल हो तो भी धैर्य न छोड़ें’

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक सुभाषित शेयर किया। इसमें उन्होंने मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा दी है।
पीएम मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में संस्कृत श्लोक साझा करते हुए लिखा,
“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः।
याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।।”
इसका हिंदी अर्थ है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य के बल पर वह कभी भी अपनी खोई हुई अनुकूल स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार समुद्र के बीच में जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक केवल अपने कर्म यानी जीवित रहने और तैरने के प्रयास की ही इच्छा रखता है और हिम्मत नहीं हारता।
गुरु पूर्णिमा पर भी साझा किया था सुभाषित
इससे पहले 29 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।”
उन्होंने एक और श्लोक भी साझा किया था-
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
इसका अर्थ है कि जो जीवन में प्रेरणा का संचार करे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान और सत्य का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे तथा जीवन में सत्य का बोध कराकर आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करे, ये गुरु के छह स्वरूप माने गए हैं।
28 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।”
“लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा।
ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥
दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा।
श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”
का हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।







 

सावन माह में विशेष : ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, तीनों लोकों की रोज़ाना परिक्रमा करने के बाद भगवान शिव यहां करते हैं विश्राम

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सावन माह में विशेष की कड़ी में हम आपको भारत में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बता रहे हैं। यह शिव शक्ति के वो 12 पवित्र स्थल हैं, जहां भगवान शिव स्वयंभू प्रकट हुए। इससे पहले, आपने प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, दूसरे मल्लिकार्जुन और तीसरे महाकालेश्वर के बारे में पढ़ा। आज सावन के पहले सोमवार के दिन आपको बारह ज्योतिर्लिंगों में से चौथे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के बारे में अवगत करा रह हैं। 
स्कंद पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में ओंकारेश्वर की महिमा का वर्णन मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर, इंदौर से लगभग 77 किलोमीटर दूर स्थित है। यह नदी के उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र ज्योतिर्लिंग है । माना जाता है कि तीनों लोकों की रोज़ाना परिक्रमा करने के बाद भगवान शिव यहां विश्राम करते हैं। इसलिए, यहां भगवान शिव के सोने के लिए विशेष इंतज़ाम, अनुष्ठान और ‘शयन दर्शन’ की व्यवस्था की जाती है।
हिंदू परंपराओं के अनुसार, ओंकारेश्वर से अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जो इस ज्योतिर्लिंग की धार्मिक महत्ता को रेखांकित करती हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, विंध्याचल पर्वतमाला के अधिष्ठाता देवता विंध्य ने अपने द्वारा किए गए पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की कठोर आराधना की। उन्होंने एक पवित्र यंत्र की स्थापना की तथा रेत और मिट्टी से एक शिवलिंग का निर्माण कर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव दो ओंकारेश्वर और अमलेश्वर (ममलेश्वर) स्वरूपों में प्रकट हुए। मान्यता है कि जिस स्थान पर मिट्टी का शिवलिंग दिव्य रूप में प्रकट हुआ, वही आगे चलकर ओंकारेश्वर कहलाया।
वहीं, एक अन्य कथा का संबंध इक्ष्वाकु वंश के प्रसिद्ध राजा मंधाता से है, जिन्हें भगवान राम का पूर्वज माना जाता है। कहा जाता है कि राजा मंधाता ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। कुछ परंपराओं में यह भी वर्णित है कि मंधाता के पुत्र अंबरीष और मुचुकुन्द ने भी यहाँ कठोर तप किया था। इसी कारण इस पर्वत और द्वीप को मंधाता पर्वत अथवा मंधाता द्वीप के नाम से भी जाना जाता है। एक अन्य पौराणिक आख्यान के अनुसार, देवताओं और दानवों के बीच हुए भीषण युद्ध में जब दानवों की विजय होने लगी, तब संकटग्रस्त देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दानवों का संहार कर देवताओं को विजय प्रदान की। इस कथा के कारण भी ओंकारेश्वर को धर्म और अधर्म के संघर्ष में दिव्य संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
ओंकारेश्वर का संबंध आदि शंकराचार्य के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। परंपरा के अनुसार, यहीं स्थित एक गुफा में उनकी भेंट अपने गुरु गोविन्द भगवत्पाद से हुई थी और उन्होंने उनके सान्निध्य में वेदांत का अध्ययन किया। यह गुफा आज भी ओंकारेश्वर मंदिर के निकट विद्यमान है और एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थस्थल मानी जाती है। यहां आदि शंकराचार्य की प्रतिमा भी स्थापित है, जो उनके जीवन और अद्वैत वेदांत परंपरा की स्मृति को संजोए हुए है।
 

संसद में फिर हंगामा, दोनों सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित

03-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही सोमवार को एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। हालिया छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष राज्यसभा में विधायी कामकाज के स्थगन और नियम 267 के तहत चर्चा की मांग कर रहा है। विपक्षी सांसदों ने अपनी मांग को लेकर नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में भी हंगामे की स्थिति बनी रही और वहां भी कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में सोमवार को लगातार जबरदस्त नारेबाजी होती रही। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के समीप आ गए और नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़े रहे। कई सांसद हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सांसदों को वापस अपनी सीटों पर लौटने को कहा, लेकिन विपक्षी सांसद नारे लगाते रहे।
इसे लेकर सभापति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पोस्टर लेकर प्रदर्शन करना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए हैं। यह बात पहले भी कई बार कही जा चुकी है और पूर्व में भी इस नियम के तहत चर्चा को अनुमति नहीं दी गई थी। सभापति के इस बयान के बाद सदन में नारेबाजी और हंगामा और तेज हो गया, जिसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिया है और वे नियम 267 के तहत चर्चा चाहते हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल समेत अन्य संबंधित मुद्दों पर इस नियम के तहत चर्चा की मांग कर रहे थे। हालांकि, सभापति ने नियम 267 को अस्वीकार कर दिया।
लोकसभा में भी हंगामे की स्थिति बनी रही। यहां भी सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में अभी तक प्रश्नकाल और शून्यकाल का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। सोमवार को भी यही स्थिति बनी रही और राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी।





 


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