
काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिकी सेना के जाने के बाद संकट में घिरे अफगानिस्तान में आज तालिबान सरकार का एलान होगा। तालिबान का सह-संस्थापक मुल्ला बरादर इस सरकार का नेतृत्व करेगा। हालांकि नई सरकार का गठन शुक्रवार को होना था, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नई सरकार के गठन की घोषणा शनिवार को होगी। तालिबान सूत्रों ने बताया कि दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के चेयरमैन मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को सरकार का प्रमुख बनाने की सार्वजनिक घोषणा जल्द ही होगी। मुल्ला बरादर के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब व शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई की भी सरकार में अहम भूमिका होगी। तालिबान के सूचना व संस्कृति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती इनामुल्लाह सामंगानी ने कहा कि सभी शीर्ष नेता काबुल पहुंच चुके हैं और नई सरकार का एलान करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। सरकार के गठन को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है, और अब मंत्रिमंडल को लेकर कुछ आवश्यक बातचीत हो रही है।
00 अखुंदजादा बनाएगा इस्लामिक सरकार का ढांचा
एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।
00 छह से आठ महीन में लोया जिरगा बुलाने की योजना
छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।
00 जानें कौन है मुल्ला अब्दुल गनी…
1968 में अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में जन्मा बरादर शुरू से ही धार्मिक रूप से कट्टर था। वह तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का साला है। बरादर ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1992 में रूसी सेना को खदेड़ने के बाद अफगानिस्तान देश के प्रतिद्वंद्वी सरदारों के बीच गृहयुद्ध में घिर गया था। बरादर ने अपने पूर्व कमांडर मुल्ला उमर के साथ कंधार में एक मदरसा स्थापित किया था। इसके बाद मुल्ला उमर और मुल्ला बरादर ने तालिबान की स्थापना की।9/11 हमलों के बाद जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर धावा बोला तब तालिबान के सभी बड़े नेताओं को पाकिस्तान में पनाह मिली थी। इन नेताओं में मुल्ला उमर और अब्दुल गनी बरादर भी शामिल थे। बताया जाता है कि बरादर को पाकिस्तान ने फरवरी 2010 में पाकिस्तान के कराची में गिरफ्तार किया था। हालांकि, इसका खुलासा करीब एक हफ्ते बाद किया गया था। इसके बाद बरादर को अक्टूबर 2018 तक पाकिस्तान की जेल में रखा गया और बाद में अमेरिका के दखल पर उसे छोड़ दिया गया।
00 काबुल में अफगान महिलाओं ने किया प्रदर्शन
अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार में भागीदारी मांगने के लिए अफगान महिलाओं के एक समूह ने शुक्रवार को राजधानी काबुल में प्रदर्शन किया। सीएनएन के मुताबिक, वुमंस पॉलीटिक्ल पार्टिसिपेशन नेटवर्क नामक इस समूह ने अफगानिस्तान वित्त मंत्रालय के बाहर सड़कों पर हाथों में बैनर लेकर नारे लगाते हुए पैदल मार्च निकाला। मार्च में शामिल महिलाओं ने देश में अपने लिए निर्णय लेने वाली राजनीतिक भूमिका दिए जाने की मांग की।
00 भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा
तालिबान से औपचारिक बातचीत के बावजूद अफगानिस्तान की नई सरकार के मामले में भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा। तालिबान में कई गुटों के कारण भारत फैसला नहीं ले पा रहा। नई सरकार में मुल्ला बरादर गुट हावी रहा, तो भारत अफगानिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करेगा, लेकिन हक्कानी गुट प्रभावी रहा तो जांच-परख के बाद फैसला होगा।विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोहा बैठक को सरकार को मान्यता और बातचीत से नहीं जोड़ना चाहिए। हक्कानी गुट अधिक कट्टर है व उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा से गहरे रिश्ते हैं। हक्कानी अपनी शर्तों पर भारत से रिश्ते चाहता है। इसके एजेंडे में कश्मीर भी है।

00 दो शहरों में आपातकाल की घोषणा
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिका के न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी सहित कई राज्यों में इडा तूफान ने कहर मचाया हुआ है। इस तूफान में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई। दोनों ही जगहों पर आपातकाल की घोषणा की गई है। वहीं तूफान और अधिक खतरनाक होते हुए न्यू इंग्लैंड की तरफ बढ़ गया है। न्यूयॉर्क शहर में पुलिस ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि न्यूजर्सी में एक व्यक्ति की मौत हुई है। न्यूयॉर्क एफडीआर ड्राइव, मैनहट्टन के पूर्व की ओर एक बड़े हिस्से और ब्रोंक्स नदी पार्कवे बुधवार देर शाम तक पानी में डूबे थे। सबवे स्टेशनों और रास्तों पर पानी भरने से मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी को सभी सेवाओं को निलंबित करना पड़ा। न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय मौसम सेवा कार्यालय ने बुधवार रात बाढ़ को लेकर अचानक आपात स्थिति की पहली चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी विशेष परिस्थितियों में तब जारी की जाती है, जब बाढ़ से विनाशकारी क्षति हो रही हो या फिर होने वाली हो। बारिश की वजह से न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी दोनों ही जगह कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। मूसलाधार बारिश के कारण बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से हजारों लोग घरों में बिजली से वंचित हैं।

तूफान और बारिश की वजह से न्यूजर्सी के सभी 21 काउंटियों में आपातकाल की स्थिति की घोषणा की हई है। लोगों को चेतावनी जारी कर बाढ़ वाली सड़कों से दूर रहने का आग्रह किया गया है। मौसम विज्ञानियों ने बाढ़ के और विकराल होने की चेतावनी जारी की है। अमेरिका में इडा चक्रवात का कहर अभी थमा नहीं है। सोमवार को लुइसियाना के तट से टकराने के बाद यहां के तटीय क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 241 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच गई थीं। इसे अमेरिका के सबसे ताकतवर तूफानों में से एक माना गया था। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चक्रवात के कमजोर पड़ने के दो दिन बाद भी अमेरिका के कई शहरों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आलम यह है कि न्यूयॉर्क, मिसिसिप्पी, अलाबामा और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में तो सड़कों पर ही तालाब बन गए हैं और लोगों को बचाने के लिए राहत-बचावकर्मी नाव लेकर निकले हैं।



00 तैयारी में जुटे तालिबानी अधिकारी
काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिकी सेना के कब्जे से मुक्त होने के बाद अफगानिस्तान में अब तालिबान प्रशासन नई सरकार की घोषणा करने तैयारी कर रहा है। सोशल मीडिया पर तालिबान के एक अधिकारी अहमदुल्ला मोत्ताकी ने कहा कि आज काबुल के प्रेसिडेंशियल पैलेस में एक समारोह आयोजित किया जा रहा है।पंजशीर प्रांत को छोड़कर अफगानिस्तान के लगभग सभी हिस्सों पर कब्जा करने के बाद, तालिबान ने दुनिया के सामने खुद को एक उदारवादी व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है। तालिबान के सूत्रों ने एएफपी को बताया कि एक नए प्रशासन की घोषणा शुक्रवार दोपहर की नमाज के बाद की जा सकती है। नए शासकों ने 1996 से 2001 तक सत्ता में अपने पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक मिलनसार होने का वादा किया है। अब, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तालिबान युद्धग्रस्त अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में सक्षम कैबिनेट प्रदान कर सकता है और अधिक `समावेशी` सरकार के आंदोलन के वादों का सम्मान कर सकता है।तालिबान के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार तड़के ट्वीट किया कि चीन के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास को खुला रखने और संबंधों और मानवीय सहायता को `सुदृढ़` करने का वादा किया है।वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम ने कहा कि वे धन ट्रांसफर फिर से शुरू कर रहे हैं, जिस पर कई अफगान जीवित रहने के लिए विदेशों में रिश्तेदारों से भरोसा करते हैं। कतर ने कहा कि यह काबुल में हवाई अड्डे को फिर से खोलने के लिए काम कर रहा है।समूह ने मानवाधिकारों का सम्मान करने और अपने विरोधियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने से परहेज करने की कसम खाई है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य ने संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तालिबान के नेतृत्व वाली नई सरकार की मान्यता समूह के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।




वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान में अमेरिका का अभियान खत्म हो चुका है। इस अभियान में कई सैनिकों ने जान गंवाई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने एक फोटो शेयर की है। इसमें मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी विमान पर चढ़ते दिखाई दे रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने लिखा है अफगानिस्तान से विदा होता आखिरी अमेरिकी सैनिक।आतंकवाद के खिलाफ 20 साल तक चली अमेरिका की लड़ाई आखिरकार खत्म हो गई है। पराए मुल्क में चला यह अभियान जितना जोखिम भरा था उतरा ही दिलचस्प भी। अमेरिका की अफगानिस्तान में लड़ाई ऐसी थी, जैसे अंधेरे में तीर चलाना। करोड़ों डॉलर का खर्च, कई हजार सैनिकों की जान गंवाने के बाद अब वह खौफनाक मंजर अमेरिका के लिए बीती बात हो गई है।इस अभियान के खत्म होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन का बयान आया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ युद्ध में 2,461 अमेरिकी सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। इसके अलावा भी हमने बहुत कुछ ऐसा सहन किया, जिसको बयां कर पाना नामुमकिन है।लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि आतंक के खिलाफ हमने कई लड़ाईयां लड़ी हैं। हमारे लिए अमेरिकी नागरिक सबसे पहले हैं। दुनिया में उनको आतंक से बचाने के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं। आगे कहा कि हम आतंक के खिलाफ कड़ी मेहनत करेंगे और आतंक को जड़ से खत्म करके रहेंगे।
00 छह हजार अमेरिकी समेत 1 लाख 23 हजार लोगों को निकाला
अभियान खत्म होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि हमने तालिबान के खतरे के बीच अपने छह हजार नागरिकों को अफगानिस्तान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। कुल 1,23,000 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिसमें अफगानी व अन्य लोग भी शामिल हैं।



काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। काबुल एयरपोर्ट पर कुछ दिन पहले हुए बम धमाके में अमेरिकी सैनिकों की मौत आतंकियों को भारी पड़ रही है। अमेरिका ने ड्रोन हमला करके अपने सैनिकों की मौत का तो बदला ले ही लिया है, लेकिन काबुल के आसमान से अभी भी रॉकेटों की आवाज आ रही है। काबुल में सोमवार सुबह रॉकेट दागे गए हैं। सुबह करीब 6.40 बजे यहां काबुल एयरपोर्ट के पास रॉकेट्स से हमला किया गया है। रॉकेट्स के कारण अलग-अलग जगहों पर धुएं का गुबार उठने लगे, कई जगह आग भी लग गई थी और कई वाहनों को नुकसान पहुंचा है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, राजधानी काबुल में रॉकेट से हमला किया गया है। हालांकि, यह हमला किसको टॉरगेट करके किया गया है, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। कई रॉकेट्स को काबुल एयर फील्ड डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया है। बता दें कि 31 अगस्त तक अमेरिकी सेना को काबुल छोड़ना है और उससे पहले काबुल एयरपोर्ट और आसपास के इलाके को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट के बाहर आतंकी धमाकों में करीब 200 लोगों की मौत हो गई थी, मरने वालों में 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे। सैनिकों की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि अमेरिका इन मौतों को नहीं भूलेगा और इसका बदला लेगा।


वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। काबुल एयरपोर्ट के बाहर आत्मघाती हमलों के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आईएस-के के ठिकानों पर हवाई हमला किया है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत में आतंकियों के ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया है। इस हमले में एक साजिशकर्ता ढेर हो गया।अमेरिकी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस हमले में काबुल एयरपोर्ट पर धमाकों का मास्टरमाइंड मारा जा चुका है। वहीं, अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे काबुल एयरपोर्ट से तुरंत हट जाएं। अमेरिका को आशंका है कि काबुल एयरपोर्ट पर फिर से आतंकी हमला हो सकता है। पेंटागन की ओर से दावा किया गया है कि तय टारगेट को ध्वस्त कर दिया गया है। आईएसआईएस-के के ठिकाने पर ड्रोन अटैक किया गया था।
काबुल एयरपोर्ट के बाहर धमाकों में 170 लोगों की मौत
बता दें कि 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट के बाहर आतंकी संगठन आईएस के ने दो फिदायीन हमले किए थे। धमाकों में 170 लोगों को मौत हो गई। इन हमलों में 13 अमेरिकी सैनिक और 2 ब्रिटिश नागरिक भी मारे गए हैं, वहीं 1276 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। घटना के बाद राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि था समय आने पर आतंकियों को अमेरिका करारा जवाब देगा। अमेरिका इसे माफ नहीं करेगा बल्कि उसे सजा देगा।

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान का भविष्य क्या होगा? उस पर कई प्रतिबंध लगेंगे या दुनिया के सुपरपावर देश उसे मान्यता देंगे, यह सब कुछ आज होने वाली जी-7 देशों की बैठक के रुख पर निर्भर होगा। अमेरिका व उसके सहयोगी देश आज इस बड़ा फैसला कर सकते हैं।गौरतलब है जिस तरह से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया, उससे कई देश नाराज भी हैं। हो सकता है जी-7 की बैठक में तालिबान को दुनिया से अलग-थलग करने पर फैसला लिया जाए। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जो बाइडन, अफगानिस्तान में 31 अगस्त के बाद भी अमेरिकी व नाटो देशों की सेनाओं को कुछ वक्त के लिए रोकने पर फैसला ले सकते हैं।
00 अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने पर बन सकती है सहमति
जी-7 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं। संभव है कि सभी देश एक सुर में तालिबान पर कई प्रतिबंध लगा कर उसे मान्यता देने का रुख अपनाएं। एक यूरोपियन राजनयिक का कहना है कि जी-7 देश तालिबान को अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने व महिलाओं को उनके अधिकार देने की शर्त पर मान्यता दे सकते हैं। अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत कारेन पियर्स का कहना है कि मीटिंग में बोरिस जॉनसन कुछ समाधान निकाल सकते हैं। इस बैठक में यूएन सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुतारेस व संयुक्त राष्ट्र के महासचिव जेन स्टॉलटेनबर्ग के शामिल होने की भी संभावना है। बता दें कि आज होने वाली जी-7 की वर्चुअल मीटिंग के होस्ट जो बाइडन ही हैं। जी-7 की यह बैठक बुलाने की मांग ब्रिटेन की ओर से की गई है। अमेरिका के व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने अपने बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति जो बाइडन 24 अगस्त को जी-7 देशों के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक कर सकते हैं। ये नेता अफगानिस्तान के मामले में समन्वय बढ़ाने और पश्चिमी देशों का साथ देने वाले अफगानों को बाहर निकालने पर चर्चा करेंगे। साकी ने कहा कि जी-7 के नेता अफगान शरणार्थियों को मानवीय सहायता देने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
00 जॉनसन का बयान
इससे पहले ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने ट्विटर पर कहा था, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय लोगों को सुरक्षित निकालने, मानवीय संकट को रोकने और पिछले 20 वर्षों की मेहनत को सुरक्षित करने के लिए अफगान लोगों का समर्थन करने के लिए मिलकर काम करने की जरूत है।` ब्रिटेन इस साल जी-7 देशों की अध्यक्षता कर रहा है। इस समूह में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल है।
00 अफगान पॉलिसी पर कॉमन अप्रोच की बताई जरूरत
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान जो बाइडन और बोरिस जॉनसन ने 24 अगस्त को होनी वाली जी-7 की वर्चुअल मीटिंग के बारे में भी बात की। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान के हालात से निपटने के लिए आपसी सहयोग और कॉमन अप्रोच के बारे में चर्चा की। साथ ही अफगानिस्तान की पॉलिसी पर मिलकर काम करने पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि बाइडन प्रशासन अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों को निकालने को लेकर कड़ी आलोचना से गुजर रहा है।

00 पंजशीर घाटी में जुट रहे हैं तालिबान विरोधी ताकतें व सैनिक
काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद पंजशीर के लड़ाकों ने तालिबान के खिलाफ बगावत कर दी है। पंजशीर के इर्द- गिर्द तालिबान और स्थानीय लड़ाकों के बीच घमासान जारी है। पंजशीर के स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यहां से करीब 50 किलोमीटर दूर बगलान प्रांत के पुल- ए- हिसार जिले व परवान प्रांत के चारिकार इलाके समेत 3 जिलों को नॉर्दर्न अलायंस व लड़ाकों ने तालिबान के कब्जे से छुड़ा लिया है। वहीं बानू और देह- ए- सलाह जिलों में भी भीषण लड़ाई जारी है। तालिबान पर कई दिशाओं से हमला किया गया है और उन्हें भारी नुक्सान हुआ है।तालिबान के खिलाफ अफगान जनता सड़कों पर है और पंजशीर में तालिबान का सबसे पुराना दुश्मन उठ खड़ा हुआ है और उसकी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बीच उससे निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए तालिबान विरोधी ताकतें व सैनिक पंजशीर घाटी में इकट्ठे होने लगे हैं।इनमें पूर्व उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह और अफगान सरकार के वफादार सिपहसालार जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम व अता मोहम्मद नूर के अलावा नॉर्दर्न अलायंस से जुड़े अहमद मसूद की फौजें शामिल हैं। इस बीच तालिबान ने एक प्रतिनिधिमंडल को पंजशीर में अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद से वार्ता करने के लिए भेजा है। वहीं मसूद ने कहा कि वह वार्ता और हमले दोनों के लिए तैयार हैं।
00 तालिबान विरोधी प्रदर्शन कई शहरों में जारी
तलिबान के खिलाफ अफगानिस्तान के कई शहरों में लोग सड़कों पर निकल कर प्रदर्शन कर रहे हैं। तालिबान लड़ाके इन प्रदर्शनकारियों पर हमलेकर उन्हें पीट रहे हैं। राजधानी काबुल में एक ऐसे ही प्रदर्शन में करीब 200 लोग शामिल थे। तालिबान लड़ाकों ने इन्हें बड़ी क्रूरता से खदेड़ा।गुरुवार को खोस्त शहर में तालिबान द्वारा घोषित कफ्र्यू के बीच कुछ लोगों ने अफगानिस्तान की आजादी का झंडा लेकर प्रदर्शन किया। इससे पहले असादाबाद शहर में तो तालिबानों ने राष्ट्रीय झंडे के साथ जुलूस निकाल रहे लोगों पर तालिबान ने फायरिंग कर दी थी। इसमें कई लोग मारे गए।
00 9 अल्पसंख्यकों की हत्यागजनी प्रांत के मुंदाराख्त गांव में तालिबान ने हजारा अल्पसंख्यक समुदाय के 9 लोगों की हत्या कर दी। इनमें से छह लोगों की हत्या गोली मारकर की गई, जबकि तीन को प्रताडि़त कर मारा गया। उनके हाथ उखाड़ दिए गए।एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तालिबान की क्रूरता पर चिंता जताते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि 4 से 6 जुलाई के बीच गांव पर तालिबान ने कहर बरपाया था। इसके बाद एमनेस्टी के शोधकर्ताओं ने जाकर प्रत्यक्षदर्शियों से बात की और यह सच सामने आया।एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रमुख एग्नेस कालामार्ड ने कहा कि यह जघन्यता तालिबान के पहले के रिकॉर्ड की याद दिलाती है और बताता है कि तालिबान का शासन कितना क्रूर हो सकता है। अधिकार समूह ने चेतावनी दी कि कई हत्याएं हुई होंगी लेकिन अभी तक उनके बारे में सूचना नहीं है क्योंकि तालिबान ने अपने कब्जे वाले कई इलाकों में फोन सेवाएं काट दी हैं ताकि तस्वीरें प्रकाशित नहीं हों।

जिनेवा/नई दिल्ली ( शोर संदेश)। कोरोना वायरस से बचाव के लिए कोविशील्ड वैक्सीन की नकली खेप भारत और युगांडा में बरामद हुई है। बीते एक महीने में आईं अलग-अलग शिकायतों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसका खुलासा किया है। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से जानकारी लेने के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारत और युगांडा दोनों ही देशों से सख्त कार्रवाई की अपील की है। जिनेवा स्थित डब्ल्यूएचओ मुख्यालय ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि भारत और युगांडा में कोविशील्ड की नकली वैक्सीन बरामद हुई हैं। इन वैक्सीन पर बैच नंबर गलत लिखा हुआ है।

साथ ही वैक्सीन की मात्रा भी 2 एमएल लिखी हुई है, जबकि सीरम कंपनी के अनुसार एक शीशी में 10 से 12 एमएल वैक्सीन की मात्रा होती है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि भारत में मिलीं नकली वैक्सीन में बैच नंबर, उत्पादन की तारीख और एक्सपायरी डेट नहीं लिखी हुई है। जबकि युगांडा में मिलीं नकली वैक्सीन पर उत्पादन की तारीख नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नकली वैक्सीन की शिकायत संज्ञान में है। जिला स्तर पर जांच कराई जाएगी।

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान पर तालिबान का पूरी तरह से कब्जा हो चुका है। अफगान के हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं। काबुल पर तालिबान के बढ़ते खतरे के बीच अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के बीच भारतीय वायुसेना का C-17 विमान मंगलवार सुबह काबुल से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। इस विमान में 120 से ज्यादा लोग सवार हैं, जिसमें कुछ आईटीबीपी के जवान और मीडिया कर्मी भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय राजदूत आर. टंडन समेत अन्य कर्मचारियों को काबुल से वापस लाया जा रहा है। इनके अलावा वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और बाकी बचे लोगों को भी जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाएगा।
00 भारत ने सुरक्षा परिषद में उठाया मुद्दा
बता दें कि काबुल में भारत के करीब पांच सौ से अधिक लोग फंसे हुए हैं। भारत सरकार द्वारा वायुसेना के C-19 एयरक्राफ्ट के जरिए लोगों को निकाला जा रहा है। सोमवार को करीब 46 लोग वापस आए हैं। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी इस मसले को उठाया है और दुनिया को अफगानिस्तान पर गौर करने को कहा है। समाचार एजेंसी एएनआई को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अफगान से भारत लौटने वाले भारतीय सुरक्षित इलाकों में हैं और उन्हें एक या दो दिनों में सुरक्षित वापस लाया जाएगा। सोमवार को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार अफगानिस्तान की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकों को लाने के लिए स्पेशल सेल भी गठित किया है। साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
00 भारत ने अफगान नागरिकों के लिए वीजा की नयी श्रेणी की घोषणा की
वहीं गृह मंत्रालय ने अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत आने की इच्छा रखने वाले अफगान नागरिकों की अर्जियों पर जल्द फैसलों के लिए वीजा की नई श्रेणी की घोषणा की।अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर कब्जा जमाने के दो दिन बाद यह घोषणा की गई है।
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘गृह मंत्रालय अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को देखते हुए वीजा प्रावधानों की समीक्षा की है। भारत में प्रवेश के लिए वीजा अर्जियों पर जल्द फैसला लेने के लिए ‘ई-आपातकालीन एवं अन्य वीजा’ की नई श्रेणी बनाई गई है।’
00 विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री के बीच बातचीत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रमों को लेकर सोमवार को बातचीत की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि दोनों शीर्ष राजनयिकों ने अफगानिस्तान संबंधी हालात पर चर्चा की।
इसके कुछ ही देर बार जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘(अमेरिका के विदेश मंत्री) ब्लिंकन के साथ अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की। हमने काबुल में हवाईअड्डा संचालन बहाल करने की अत्यधिक आवश्यकता पर बल दिया। हम इस संबंध में अमेरिकी प्रयासों की बहुत सराहना करते हैं।