
वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने उत्तर पश्चिम सीरिया में हवाई हमले कर सीनियर अलकायदा नेता अब्दुल हामिद अल-मटर मार गिराया है। सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता मेजर जान रिग्सबी ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को यह जानकारी दी। रिग्सबी ने बताया कि MQ-9 एयरक्राफ्ट के जरिए किए गए इस हवाई हमले में आम नागरिकों को नुकसान नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार आतंकी अब्दुल क्षेत्रीय हमलों, वित्त पोषण और अनुमोदन की योजना बनाता था। अमेरिकी आर्मी मेजर जान रिग्सबी ने लिखित बयान में कहा कि आतंकी अब्दुल हामिद अपने साथियों को वैश्विक हमले के लिए प्रशिक्षित कर रहा था। रिग्सबी के अनुसार हामिद अपने साथियों के साथ मिलकर 9/11 की तरह हमले की योजना बना रहा था लेकिन हमारी सेना ने उसके मंसूबे पर पानी फेर दिया। हमारे इस हमले के बाद आतंकी समूह अमेरिकी नागरिकों एवं निर्दोष लोगों पर हमला करने से डरेंगे। जानकारी के अनुसार दक्षिण सीरिया में अमेरिकी चौकी पर किए गए हमले के दो दिन बाद यह अमेरिका की ओर से हमला किया गया।
भारत पर भी हमले की योजना बना रहा अलकायदा
बता दें कि आतंकी संगठन अलकायदा भारत पर भी हमले की योजना बना रहा है। जानकारी के अनुसार असम पुलिस ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन अल-कायदा की तरफ से आतंकी हमलों की आशंका को लेकर अलर्ट जारी किया है। सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) की तरफ से जारी एक परिपत्र में कहा गया कि राज्य पुलिस की विशेष शाखा से मिली रिपोर्ट के आधार पर अलर्ट जारी किया गया है। आतंकी असम सहित देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों, सैन्य अधिकारियों व विभिन्न क्षेत्रों के शीर्ष व्यक्तियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित देहमाजांग चौक के पास बुधवार तड़के जोरदार विस्फोट हुआ। इस घटना में कितने लोग हताहत हुए हैं इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वहीं तालिबान प्रशासन ने भी मृतकों की संख्या बताने से फिलहाल इनकार कर दिया है। सूत्रों को एक स्थानीय निवासी ने जानकारी देते हुए कहा कि देहमाजांग इलाके में सुबह 7.50 बजे एक जोरदार धमाका सुनाई दिया और इस आवाज से लोगों में दहशत फैल गई। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह कार बम विस्फोट हो सकती है। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार तालिबान सुरक्षा बल के वाहन इलाके की ओर दौड़ रहे थे। तालिबान बलों को पहले ही सतर्क किया गया था प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि तालिबान बलों को संभावित हमले के बारे में पहले ही सतर्क कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने मंगलवार को काबुल शहर में कई चौकियों की स्थापना की और शहर में अलग-अलग स्थानों पर मुख्य सड़कों से गुजरने वाले हर वाहन की जांच की थी। हालांकि तालिबान प्रशासन ने इस घटना पर किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। हाल के हफ्तों में भी हुए कई हमले अगस्त के मध्य में तालिबान के कब्जे के बाद से पूरे अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति सामान्य रूप से शांत लेकिन अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि हाल के हफ्तों में कई अफगान प्रांतों में इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों द्वारा घातक बम हमलों को अंजाम दिया गया है।

काठमांडू/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत के बाद अब नेपाल में भी भारी बारिश और भूस्खलन से हाहाकार मचा हुआ है। इस घटना में अबतक 21 लोगों की मौत हो गई है और 24 लोग लापता हैं। स्थानीय प्रशासन ने इसकी जानकारी दी है। राहत और बचाव कार्य जारी है। स्थिति इतनी भयावह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों परिवारों को अपने घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है। काठमांडू टाइम्स के अनुसार, बेमौसम बारिश के कारण आई आपदा से सुदूरपश्चिम प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
ये इलाके अत्यधिक प्रभावित
नेपाल के कंचनपुर, डोटी, कैलाली, डडेलधुरा, बैतडी, और बझांग जिले बाढ़ से अत्यधिक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा महाकाली, करनाली और सेती नदियों में दशक का सबसे अधिक जल स्तर दर्ज किया गया है, जिससे जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है। डोटी के जिला पुलिस कार्यालय के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम नौ लोग मारे गए और एक लापता है।

लंदन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। जलवायु के क्षेत्र में प्रचार करने के लिए भारतीय मूल की छह साल की एलीशा गाधिया को ब्रिटिश पीएम बोरिस ने गुरुवार को जॉनसन डेली पॉइंट्स ऑफ लाइट अवार्ड से नवाजा। एलीशा एक जलवायु कार्यकर्ता हैं और ब्रिटेन की एनजीओ कूल अर्थ की मिनी एंबेसडर हैं और अपने प्रचार से उन्होंने एनजीओ के लिए 3000 पाउंड जुटाए हैं। एलीशा ने अपने स्कूल में एक विशेष जलवायु परिवर्तन क्लब भी बनाया है। इसमें वह बच्चों व उनके अभिभावकों को जलवायु की देखभाल, कूड़ा उठाने और पौधे लगाने जैसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।एलीशा कहती हैं, इस अवार्ड को लेकर वह बहुत उत्साहित और खुश हैं। पीएम बोरिस जॉनसन ने इसके लिए मुझे चुना और एक पत्र भी लिखा इसके लिए वह बहुत आभारी हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह अवार्ड मिलेगा। मेरा समर्थन करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को मिला करारा जवाब
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। यूएनजीए की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर के मसले पर एक बार फिर घड़ियाली आंसू बहाए हैं। इमरान खान ने कश्मीर पर रोना रोया तो भारत ने भी करारा पलटवार किया। पाकिस्तान के आरोपों पर भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने उसकी क्लास लगाई।यूएनजीए की बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर के मुद्दे पर एक के बाद एक गलत तथ्यों को रखा और भारत सरकार पर झूठे आरोप लगाए। अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए इमरान खान ने खुद को ही पीड़ित बता दिया।इमरान खान के झूठे आरोपों का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि इमरान खान आंतकवाद के पीड़ित होने का ढोंग करते हैं। इमरान खान के भाषण के बाद राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के झूठे आरोपों की कलई खोल कर रख दी। भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे पक्ष रखा।राजनयिक स्नेहा दुबे ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और रहेगा। इसमें कश्मीर का वो हिस्सा भी शामिल है जिस पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को तुरंत पीओके को खाली करना चाहिए। स्नेहा दुबे ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और रहेंगे। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। हम पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने का आह्वान करते हैं।वैश्विक मंच पर भारत ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए बेनकाब कर दिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान आंतकियों को पनाह देने के लिए हमेशा अपनी जमीन का इस्तेमाल करता रहा है। दुनिया जानती है कि आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह मिली थी, लेकिन अमेरिका ने उसे मार गिराया। इसके अलावा एक नहीं सैकड़ों सबूत पाकिस्तान के खिलाफ सामने आ चुके हैं, फिर भी पाकिस्तान बेशर्म की तरह मुंह छुपाते हुए अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। हालांकि, दुनिया जानती है कि आतंकवाद का सुरक्षित ठिकाना अगर कोई देश है तो वह पाकिस्तान है, जहां आतंकवाद और आंतकियों को बढ़ावा दिया जाता है।




वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)।भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने यूएनएससी (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता पर अमेरिकी समर्थन को लेकर बड़ी जानकारी दी है। श्रृंगला ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को लगता है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।श्रृंगला ने कहा कि भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता की भी सराहना की गई, विशेष रूप से अफगानिस्तान मुद्दे पर। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत के प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट देने का समर्थन किया
00 भारत सात बार रह चुका है सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य
बता दें कि भारत वर्ष 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985 1991-1992 और 2011-2012 के दौरान 7 बार सुरक्षा परिषद के एक अस्थायी सदस्य के रूप में चुना जा चुका है। यूएनएससी में कुल 15 सदस्य देश होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। 193 सदस्यों वाली महासभा हर साल इन 10 अस्थायी देशों को चुनने के लिए चुनाव करती है। अस्थायी देशों का कार्यकाल दो साल का होता है। फिलहाल स्थायी सदस्यता अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास है।
00 पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के बीच रही दोस्ताना मुलाकात
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच व्हाइट हाउस में पहली मुलाकात काफी हंसी-मजाक के बीच हुई। दोनों ही नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। जहां बाइडन ने कहा कि वे फिर से व्हाइट हाउस में मोदी का स्वागत कर के खुश हैं, तो वहीं मोदी ने बेहतरीन स्वागत के लिए बाइडन का धन्यवाद किया। इस दौरान एक मजेदार वाकया भी घटा। दरअसल, जब मीडिया के सामने दोनों नेता बातचीत कर रहे थे, तब बाइडन ऑफ-स्क्रिप्ट चले गए। उन्होंने बीच में ही मोदी को अपने 2006 के मुंबई दौरे और वहां मीडिया से हुई बातचीत के बारे में बताना शुरू कर दिया। मोदी ने भी उनकी बात पर हाजिरजवाबी दिखाई। इसके बाद शुरू हुआ ठहाकों का दौर काफी देर तक चला।
00 अफगानिस्तान मुद्दे पर हुई बातचीत
दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में आतंकवाद का मुकाबला करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने तालिबान से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2593 के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आह्वान किया, जिसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग किसी भी देश को आतंकवादी समूहों को शरण देने या प्रशिक्षित करने के लिए धमकाने और हमला करने के लिए नहीं किया जाता है।

00 3 दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे मोदी, आज उपराष्ट्रपति हैरिस से करेंगे मुलाकात
वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अमेरिका के दौरे के लिए रवाना हुए और भारतीय समयानुसार तड़के करीब 3.30 बजे वाशिंगटन पहुंचे। अपने इस अहम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।अमेरिका पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि गर्मजोशी से स्वागत के लिए वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय का आभारी हूं। हमारे प्रवासी हमारी ताकत है। यह प्रशंसनीय है कि कैसे भारतीय लोगों ने दुनिया भर में खुद को प्रतिष्ठित किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाशिंगटन के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर उतरे तो वहां बड़ी संख्या में मौजूद भारतीयों ने तिरंगा लहराकर जोरदार स्वागत किया। लोग मोदी-मोदी चिल्ला रहे थे। एयरबेस से पीएम मोदी का दल पेन्सिलवेनिया एवेन्यू स्थित होटल विलार्ड जाएगा।

00 पीएम मोदी का आज का कार्यक्रम
दो साल में पीएम मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा है, जिसमें वहां सत्ता भी बदल गई। पीएम मोदी कल शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसके बाद क्वाड लीडर्स शिखर बैठक होगी।पीएम मोदी आज गुरुवार को पांच बड़ी कंपनियों- क्वालकॉम, एडोब, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन के सीईओ से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह करीब 11 बजे विलार्ड होटल में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मुलाकात करेंगे।इसके बाद पीएम मोदी करीब 12:30 बजे अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मिलने के लिए आइजनहावर एक्जक्यूटिव ऑफिस के लिए रवाना होंगे। शनिवार को पीएम मोदी यूएनजीए के 76वें सत्र को संबोधित करेंगे।
00 सफर के दौरान की फोटो पोस्ट की
अमेरिका पहुंचने से पहले पीएम ने विमान के अंदर की एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें वह कुछ जरूरी फाइलों को पढ़ रहे हैं। खुद की तस्वीर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, `लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के माध्यम से जाने का अवसर।` अमेरिका में प्रवास के दौरान पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन संग द्विपक्षीय बातचीत, क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेंगे साथ ही UNGA में भाषण भी देंगे।अमेरिका की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, `22-25 सितंबर के बीच अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मैं राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करूंगा और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करूंगा।`पीएम मोदी ने अमेरिकी दौरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह राष्ट्रपति बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम योशीहिदे सुगा से भी मिलेंगे। क्वाड शिखर सम्मेलन के बारे में पीएम मोदी ने कहा, `यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण के आधार पर भविष्य के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करने का अवसर प्रदान करता है।`




प्योंगयांग/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिका से तनाव के बीच उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर अन्य बड़े देशों को अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने इस परीक्षण की जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार क्रूज मिसाइल विकसित करने का काम बीते दो वर्षों से चल रहा था और शनिवार तथा रविवार को परीक्षण के दौरान इसने 1,500 किलोमीटर दूर लक्ष्य सफलतापूर्वक मार की। उधर, मिसाइल टेस्ट के बाद उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने कहा कि रविवार को उत्तर कोरिया द्वारा सप्ताहांत में किए गए मिसाइल परीक्षणों से अन्य पड़ोसी देशों के लिए खतरा साबित हो सकता है। वहीं यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड ने एक बयान देते हुए कहा कि यह गतिविधि डीपीआरके के अपने सैन्य कार्यक्रम को विकसित करने और अपने पड़ोसियों एवं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरों को जारी रखने पर ध्यान केंद्रित करती है।

बता दें कि उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों को दरकिनार कर अपने एटमी हथियारों और बैलेस्टिक मिसाइलों का आधुनिकीकरण किया है। इससे पहले भी उत्तर कोरिया बहुत सी कम दूरी की नई मिसाइलों, मध्यम दूरी की और अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। गौरतलब है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच वार्ता में 2019 से गतिरोध बना हुआ है, जब अमेरिका ने पाबंदियों में बड़ी राहत देने का उत्तर कोरिया का अनुरोध ठुकरा दिया था। अब किम की सरकार बाइडन प्रशासन के वार्ता के अनुरोध को ठुकरा रही है, उसका कहना है कि पहले वाशिंगटन अपनी ‘शत्रुतापूर्ण’ नीतियों को पूरी तरह से छोड़े।

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान पर संपूर्ण कब्जा करने के बाद तालिबान अपने सबसे बड़े दुश्मन अमेरिका के सबसे बड़े जख्म को कुरेदने की फिराक में था। बताया जा रहा है कि तालिबान अमेरिका के 9/11 आतंकी हमले की बरसी के मौके पर शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित करने वाला था लेकिन सहयोगियों के दबाव के बाद इसे रद्द कर दिया है।ज्ञातव्य है कि अमेरिका में अब तक के हुए सबसे बड़े और भीषण आतंकी हमले 9/11 की आज बरसी है। इसी दिन वर्ष 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने दो विमानों को न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए थे। इन हमलों में लगभग 3,000 लोग तथा 19 अपहरणकर्ता मारे गए थे। इस घटना से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, और इसके बाद अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान शुरू हुआ, जो अलकायदा के संरक्षक माने जाने वाले तालिबान के खिलाफ था, जो लगभग 20 साल तक चला।अफगान सरकार के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समांगानी ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि नई अफगान सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कुछ दिन पहले ही रद्द कर दिया गया था। लोगों को और भ्रमित न करने के लिए हमने नई सरकार गठन का फैसला लिया था और यह अब काम करना शुरू कर दिया है।
00 रूस ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने से कर दिया था इनकार
तालिबान ने उद्घाटन समारोह में रूस, ईरान, चीन, कतर और पाकिस्तान को आमंत्रित किया था। हालांकि रूस ने कथित तौर पर कतर को सूचित कर दिया है कि अगर यह 9/11 की बरसी पर आयोजित होता है तो वह उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लेगा। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी कतर सरकार पर तालिबान को उद्घाटन समारोह पूरी तरह से आयोजित करने के खिलाफ सलाह देने के लिए दबाव डाल रहे थे, क्योंकि इस दिन को चुनना एक अमानवीय कदम के रूप में सामने आएगा।बता दें कि तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार की घोषणा की, जिसमें प्रमुख मंत्री पद शामिल हैं। एक समावेशी सरकार के उनके आश्वासन के बावजूद, नया मंत्रिमंडल पूरी तरह से कट्टरपंथी है और तालिबान की शरिया कानून की कठोर व्याख्या के अनुसार शासन करेगा।
00 तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी
तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी हैं। कई उपमंत्री और गवर्नर भी इनमें शामिल हैं। प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद, उसके दोनों उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और मौलवी अब्दुल सलाम हनफी जैसे कई नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में शामिल हैं। वहीं अमेरिकी इनामी सूची में भी इनके नाम हैं। रक्षामंत्री मुल्ला याकूब, विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्तकी और डिप्टी शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई भी आतंकियों में हैं।

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार का एलान कर दिया है। मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को जहां देश का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है, वहीं शेख मौलवी नूरल्लाह मुनीर को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। इस बीच सरकार गठन के साथ ही तालिबानी फरमान भी आने शुरू हो गए हैं जिसमें नए शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान भी शामिल है। मुनीर ने कहा है कि आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं है। मुनीर ने कहा कि हमलोगों के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी हम सरकार चला रहे हैं। ऐसे में आज के वक्त में किसी तरह की पीएचडी या मास्टर डिग्री की जरूरत नहीं है।

