
कैलीफोर्निया/नई दिल्ली (शोर संदेश)। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने अब फेस रिकग्निशन सिस्टम को बंद कर दिया है। कंपनी ने मंगलवार को इसकी जानकारी है। फेसबुक ने कहा कि वह इस बदलाव के चलते 1 अरब से अधिक लोगों के फेस रिकग्निशन टेम्पलेट को हटाएगा। कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि फेसबुक के रोजाना सक्रिय यूजर्स में से एक तिहाई से अधिक या 600 मिलियन से अधिक अकाउंट ने फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का विकल्प चुना।
फेसबुक की नयी पैरेंट (होल्डिंग) कंपनी ‘मेटा’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के उप प्रमुख जेरोम पेसेंटी द्वारा मंगलवार को पोस्ट किए गए ब्लॉग के अनुसार, ‘प्रौद्योगिकी के इतिहास में चेहरा पहचानने के उपयोग की दिशा में यह कदम सबसे बड़ा बदलाव होगा। हम फेसबुक पर फेस रिकग्निशन सिस्टम को बंद कर रहे हैं। जिन लोगों ने इसका चुनाव किया है उनकी अब फ़ोटो और वीडियो में ऑटोमेटिकली रिकॉग्नाइज नहीं किए जाएंगे और हम एक अरब से अधिक लोगों के व्यक्तिगत फेशियल रिकग्निश टेम्प्लेट को हटा देंगे।’

हालांकि इस कदम से ऑटोमेटिक ऑल्ट टेक्स्ट टेक्नोलॉजी प्रभावित होगी, जिसका उपयोग कंपनी नेत्रहीन या नेत्रहीन लोगों के लिए फोटो का पहचानने के लिए करती है। फेस रिकग्निशन सिस्टम को फेसबुक से आने वाले हफ्तों में हटा दिया जाएगा। फेसबुक ने कहा, “समाज में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को लेकर कई चिंताएं हैं, और नियामक अभी भी इसके उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियमों का एक क्लियर सेट प्रदान करने की प्रक्रिया में हैं। इस चल रही अनिश्चितता के बीच, हम मानते हैं कि रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल के मामलों के एक नैरो सेट तक सीमित करना उचित है।” फेस रिकग्निशन सिस्टम के उपयोग को समाप्त करना इस तरह की व्यापक पहचान से दूर एक कंपनी के हित में कदम का हिस्सा है।
अभी हाल ही में फेसबुक ने कंपनी की नाम बदलकर मेटा रख दिया। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि भविष्य के लिए डिजिटल रूप से हो रहे बदलाव को शामिल करने के प्रयास के तहत उनकी कंपनी को अब नये नाम ‘मेटा’ के तौर पर जाना जाएगा। जुकरबर्ग इसे ‘‘मेटावर्स’’ कहते हैं। हालांकि आलोचक कहते हैं कि यह फेसबुक पेपर्स से दस्तावेज लीक होने से उत्पन्न विवाद से ध्यान भटकाने का एक प्रयास हो सकता है।

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। 8 नवंबर से 5-11 साल के बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने जा रहा है। महामारी का कहर दुनिया में लगातार जारी है। व्यस्क लोगों की जिंदगी बचाने के लिए जहां लगातार टीकाकरण जारी है वहीं अब अमेरिका में बच्चों की वैक्सीन की उम्मीद लगाए बैठे अभिभावकों का इंतजार भी खत्म होने वाला है। दरअसल, अमेरिका में 8 नवंबर से 5-11 साल के बच्चों को फाइजर की वैक्सीन लगाई जाएगी। वहीं इस सफलता पर राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह हमारे लिए एक ‘टर्निंग प्वाइंट’ है। राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि काफी समय से अमेरिका में बच्चों की कोरोना वैक्सीन के लिए लगाए बैठे अभिभावकों का इंतजार खत्म होने वाला है। अमेरिका का यह फैसला बच्चों द्वारा दूसरों को वायरस फैलाने की आशंकाओं को कम करेगा। बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से यह हमारे देश के लिए अहम कदम है। बता दें कि 29 अक्तूबर को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इसकी मंजूरी दे दी थी, इसके बाद अब इसे सरकार द्वारा भी हरी झंडी मिल गई है।
29 अक्तूबर को एफडीए ने दी थी मंजूरी
बता दें कि 29 अक्तूबर को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इसकी मंजूरी दे दी थी, इसके बाद अब इसे सरकार द्वारा भी हरी झंडी मिल गई है। फडीए ने छोटे बच्चों में फाइजर के टीके की 10-माइक्रोग्राम खुराक को अधिकृत किया है। वहीं, 12 साल और उससे ज्यादा उम्र वाले बच्चों के लिए मूल शॉट 30 माइक्रोग्राम है।
यूएई में भी मिली मंजूरी
अमेरिका के बाद संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) ने भी अपने यहां 5 से 11 साल के बच्चों के लिए फाइजर की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। बता दें कि यूएई में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए फाइजर की वैक्सान को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
छोटे बच्चों का टीकाकरण हमें सामान्य स्थिति में लौटने के करीब लाएगा: एफडीए
वहीं इससे पहले एफडीए के अधिकारी जेनेट वुडकॉक ने अपने बयान में कहा था कि कोविड-19 के खिलाफ छोटे बच्चों का टीकाकरण हमें सामान्य स्थिति में लौटने के करीब लाएगा। टीके की सुरक्षा और प्रभावशीलता से संबंधित डाटा के व्यापक और कठोर मूल्यांकन से माता-पिता और अभिभावकों को आश्वस्त करने में मदद मिलेगी कि यह टीका हमारे उच्च मानकों को पूरा करता है।

जिनेवा/नई दिल्ली (शोर संदेश)। पिछले दो सालों में कोरोना ने कई देशों में जमकर कहर बरपाया। इस पीढ़ी ने सदी की सबसे बड़ी महामारी भी देखी तो मजबूत पक्ष यह भी रहा कि इस बीमारी ने कई देशों को आत्मनिर्भर भी बना दिया, और इन देशों ने स्वयं के टीके भी लांच किए। हालांकि, इस महामारी का मुकाबला करने में हमने दुनियाभर में 50 लाख लोगों को गंवा दिया। लड़ाई में 240 मिलियन लोग संक्रमित भी हुए। इन सब के बीच अच्छी खबर यह है कि एक दो देश छोड़ दें तो दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे घट रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, कई ऐसे देश हैं जहां संक्रमण की दर काफी कम हो गई है।
भारत में काबू में आया कोरोना भारत में कोरोना वायरस फिलहाल काबू में आ रहा है। केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 259 दिनों में देश में सबसे कम कोरोना संक्रमित व्यक्ति सामने आए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 10,423 कोरोनो के नए मामले सामने आए हैं। वहीं अब सक्रिय मामले भी घटकर 1,53,776 रह गए हैं, जो 250 दिनों में सबसे कम है।
इन देशों में जीरो हुआ संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उन देशों की सूची जारी की है, जहां संक्रमण की दर जीरो हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में इन देशों में एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि नहीं हुई है। जिन देशों में एक भी संक्रमित नहीं आए हैं, उनमे कनाडा, अर्जेंटीना, स्पेन, बांग्लादेश, बेल्जियम, कोस्टा रिका, श्री लंका, इक्वाडोर, म्यांमार, होंडुरास, घाना, अल साल्वाडोर, कैमरून, मालदीव और लक्जमबर्ग शामिल हैं।
इन देशों में काफी कम हुआ संक्रमण
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना के सिर्फ तीन नए मामले सामने आए हैं। इसी तरह, ओमान में आठ और जाम्बिया में पांच नए मामले दर्ज किए गए। मोज़ाम्बिक, कोसोवो, सेनेगल, मलावी, इस्वातिनी, बुरुंडी और मेडागास्कर में 10 या उससे कम नए कोविड के मामले दर्ज किए गए हैं।

मेंलो पार्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। फेसबुक के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के नए नाम की घोषणा कर दी है। फेसबुक को अब नए नाम Meta (मेटा) से जाना जाएगा, जबकि जिसके लिए फेसबुक ने अपना नाम बदला है, उसे मेटावर्स के नाम से जाना जाएगा। मेटावर्स एक अलग ही दुनिया है जो कि पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर है। मेटावर्स के लिए फेसबुक लगातार निवेश भी कर रहा है। फेसबुक के अलावा कई अन्य कंपनियां भी मेटावर्स बनने पर विचार कर रही हैं। मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के नए नाम के एलान के दौरान कहा, `हमने सामाजिक मुद्दों से जूझने और काफी करीबी प्लेटफॉर्म पर एक साथ रहते हुए बहुत कुछ सीखा है और अब समय आ गया है कि हमने जो कुछ भी सीखा है उसके अनुभव से एक नए अध्याय की शुरुआत करें। मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि आज से हमारी कंपनी अब मेटा है। हमारा मिशन वही है। हमारे एप्स और ब्रांड के नाम नहीं बदल रहे हैं। आज हम एक सोशल मीडिया कंपनी के नाम से जाने जाते हैं, लेकिन डीएनए के हिसाब से हम एक ऐसी कंपनी हैं जो लोगों को जोड़ने वाली टेक्नोलॉजी विकसित करती हैं।`आपके लिए यह जानना सबसे जरूरी है कि फेसबुक के नए एलान के बाद क्या-क्या बदला है और क्या नहीं बदला है। कंपनी की सिर्फ ब्रांडिंग बदली है यानी फेसबुक कंपनी को अब मेटा (Meta) के नाम से जाना जाएगा। कंपनी के हेडक्वॉटर पर मेटा लिखा जाएगा न कि फेसबुक। फेसबुक एप का नाम नहीं बदल रहा है और न ही इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर का नाम बदल रहा है। कंपनी के विभिन्न पदों में भी कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है, लेकिन 1 दिसंबर से कंपनी के स्टॉक का स्टिकर MVRS के नाम से होगा। कंपनी के हेडक्वॉटर में अंगूठा वाला (लाइक) लोगो अब हट गया है और उसकी जगह नए लोगो ने जगह ले ली है जो कि इनफिनिटी जैसा है।
मार्क जुकरबर्ग की नजर में मेटा क्या?
मार्क जुकरबर्ग ने मेटावर्स को एक वर्चुअल एनवायरमेंट (आभासी वातावरण) कहा है। जुकरबर्क के मुताबिक आप महज स्क्रीन पर देखकर एक अलग दुनिया में जा सकते हैं जहां आप लोगों से वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, आग्युमेंट रियलिटी चश्में, स्मार्टफोन एप आदि के जरिए जुड़ सकेंगे, गेम खेल सकेंगे, शॉपिंग कर सकेंगे और सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकेंगे। मेटावर्स में आप आभासी रूप से वो सारे काम कर सकेंगे जो आप आमतौर पर करते हैंं। जुकरबर्ग ने कहा है कि मेटावर्स टेक्नोलॉजी के जरिए लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी।मेटावर्स क्या है?मेटावर्स भले ही आज अचानक से चर्चा में आया है लेकिन यह काफी पुराना शब्द है। 1992 में नील स्टीफेंसन ने अपने डायस्टोपियन उपन्यास `स्नो क्रैश` में इसका जिक्र किया था। स्टीफेंसन के उपन्यास में मेटावर्स का मतलब एक ऐसी दुनिया से था जिसमें लोग गेम में डिजिटल दुनिया वाले गैजेट जैसे हेडफोन और वर्चुअल रियलिटी की मदद से आपस में कनेक्ट होते हैं। मेटावर्स का इस्तेमाल पहले से गेमिंग के लिए भी हो रहा है। मेटावर्स में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता है। सीधे शब्दों में कहें तो मेटावर्स इंटरनेट की एक नई दुनिया है जहां लोग उपस्थित ना होते हुए भी मौजूद रहेंगे, हालांकि मेटावर्स के पूरा होने में अभी लंबा वक्त लगेगा।

रोम/नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर गुरुवार देर रात दिल्ली से इटली के लिए रवाना हुए। इस दौरान वे इटली में आयोजित जी-20 शिखर बैठक में भाग लेंगे, जहां वह अन्य जी-20 नेताओं के साथ महामारी, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से वैश्विक आर्थिक और स्वास्थ्य सुधार पर चर्चा में शामिल होंगे।इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के निमंत्रण पर पीएम मोदी 30-31 अक्तूबर तक रोम में होने वाले 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी पीएम मारियो ड्रैगी के साथ बैठक भी करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस से भी मिलेंगे।दौरे पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रोम में आयोजित 16वें जी-20 सम्मेलन में भाग लेने जा रहा हूं। इस दौरान जी-20 नेताओं के साथ महामारी, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से वैश्विक आर्थिक और स्वास्थ्य सुधार पर होने वाली चर्चा होगी। 29 से 31 अक्तूबर के दौरान रोम और वेटिकन सिटी का भी दौरा करूंगा। इसके बाद मैं प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के निमंत्रण पर एक से दो नवंबर तक ग्लासगो की यात्रा पर रहूंगा।
कोप-26 में एक नवंबर को भाग लेंगे
पीएम मोदी ब्रिटेन के ग्लासगो में सीओपी-26 वर्ल्ड लीडर्स समिट में भी हिस्सा लेंगे और कार्बन स्पेस के समान वितरण समेत जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को व्यापक रूप से संबोधित करने की जरूरत को रेखांकित करेंगे। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के लिए पार्टियों का 26वें सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसमें दुनिया भर के 120 देशों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने गुरुवार को बताया कि यह आठवीं जी-20 बैठक है, जिसमें पीएम शामिल होंगे। पिछले साल संगठन की शिखर बैठक कोरोना महामारी के कारण वर्चुअल हुई थी। उसकी मेजबानी सऊदी अरब ने की थी। इससे पहले जून 2019 में जापान के ओसाका में हुई जी-20 बैठक में पीएम मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर भाग लिया था। इटली की मेजबानी में होने वाली इस साल की बैठक का विषय `जनता, पृथ्वी और समृद्धि (पीपल, प्लेनेट, प्रास्पैरिटी) है। यह विषय यूएन के टिकाऊ विकास के एजेंडा 2030 पर आधारित है।इटली बैठक का फोकस कोरोना महामारी से अर्थव्यवस्थाओं को उबारना, वैश्विक स्वास्थ्य सुशासन, जलवायु परिवर्तन, टिकाउ विकास और खाद्य सुरक्षा। श्रृंगला ने कहा कि भारत इटली द्वारा चुने गए प्राथमिकता क्षेत्रों का पूरी तरह समर्थन करता है। हम इनमें से प्रत्येक विषय पर इटली के साथ हैं और इसी के आधार पर बैठक में विचार विमर्श होगा।विदेश सचिव ने कहा कि जी-20 शिखर बैठक विचार विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसमें नए नीतिगत मसलों, जिनका नागरिकों के जीवन पर असर होता है, पर विचार किया जाता है। ये मसले वैश्विक वित्तीय स्थिरता, टिकाऊ वित्त, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा आदि हैं। प्रधानमंत्री मोदी रोम बैठक में वैश्विक चुनौतियों पर भारत का रुख सामने रख सकते हैं। वे अफगानिस्तान की स्थिति पर समग्र रूप से वैश्विक दृष्टिकोण की पैरवी करने के साथ ही जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी के खिलाफ एकजुटता की भी बात कर सकते हैं।
अफगानिस्तान को मानवीय मदद करेंगे
श्रृंगला ने कहा कि हम अफगानिस्तान को मानवीय मदद उपलब्ध कराने के पक्ष में हैं। यदि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहीं तो हम इसके लिए तैयार हैं। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत अफगानिस्तान को खाद्यान्न भेजेगा? विदेश सचिव ने बताया कि जी-20 देशों के बीच महामारी से उबरकर पुन: खड़े होने को लेकर सर्वसम्मति है। इसमें मुख्य फोकस रोजगार सृजन और कौशल विकास है। यह समग्र विचार विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

जकार्ता/नई दिल्ली (शोर संदेश)। इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री ने इस्लाम धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। सुकर्णो सुकमावती सुकर्णोपुत्री सेंटर बाली में आयोजित सुधी वडानी समारोह में सुकमावती ने हिंदू धर्म स्वीकार किया। सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिसमें वह धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करती हुई नजर आईं। वीडियो में पुजारी को मंत्र पढ़ते सुकमावती के ऊपर पवित्र जल छिड़कते हुए देखा जा सकता है। उनकी परंपरागत तरीके से आरती भी उतारी गई तथा अन्य मान्यताओं का पालन भी करवाया गया। जब यह आयोजन खत्म हुआ तो उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस भी की। सुकमावती की दादी इदा अयू नयोमान राई श्रीमबेन हिंदू बनने के इस फैसले के लिए काफी हद तक वजह बनी हैं। सुकमावती के वकील ने मीडिया के इस फैसले की जानकारी दी कहा कि उन्हें हिंदू धर्म की काफी वृहद जानकारी है। यही नहीं सुकमावती हिंदू धर्म की सभी सिद्धांतों परंपराओं से पूरी तरह से वाकिफ हैं। उनके धर्मपरिवर्तन की एक खास बात ये भी है कि उनके इस कदम का उनके भाइयों, गुंटूर सोएकर्णोपुत्र गुरुह सोएकर्णोपुत्र, बहन मेगावती सोकर्णोपुत्री ने भी समर्थन किया है। इतना ही नहीं, उनके इस कदम का स्वागत उनके बच्चों यानी मुहम्मद पुत्र परवीरा उतामा, प्रिंस हर्यो पौंड्राजरना सुमौत्रा जीवनेगारा गुस्ती राडेन आयु पुत्री सिनिवती ने भी स्वागत किया है।

सुकमावती के खिलाफ ईशनिंदा का केस
सुकमावती अभी 70 साल की हैं सुकर्णो की तीसरी बेटी हैं। उनसे छोटी पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सुकर्णोपुत्री हैं। वह इंडोनेशिया नैशनल पार्टी की संस्थापक भी हैं। उन्होंने कांजेंग गुस्ती पानगेरान अदिपति आर्या से शादी की थी लेकिन वर्ष 1984 में उनका तलाक हो गया था। वर्ष 2018 में सुकमावती पर एक ऐसी कविता कहने का आरोप लगा था जिससे इस्लाम का अपमान हुआ।


टोरंटो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कैबिनेट में फेरबदल किया और उन्होंने भारतीय मूल की अनीता आनंद को नई रक्षा मंत्री बना दिया है। अनीता लंबे समय तक रक्षा मंत्री रहे भारतीय मूल के हरजीत सज्जन की जगह लेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि उनका जोर प्रमुख सैन्य सुधारों के लिए होना चाहिए। हरजीत सज्जन को अब अंतरराष्ट्रीय मामलों का मंत्री बनाया गया है। सज्जन पर सैन्य यौन दुराचार संकट से निपटने में असफल होने के आरोप भी लगे।
सूत्रों के अनुसार, आनंद को रक्षा उद्योग के विशेषज्ञों के बीच हफ्तों तक एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा गया, जिन्होंने कहा कि उन्हें भूमिका में ले जाने से बचे लोगों और सैन्य यौन दुराचार के शिकार लोगों को एक शक्तिशाली संकेत मिलेगा कि सरकार प्रमुख सुधारों को लागू करने के लिए गंभीर है। अनीता का जन्म 1967 में नोवा स्कोटिया में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था, जो दोनों चिकित्सा पेशेवर थे। उनकी मां सरोज पंजाब से और पिता एस.वी. आनंद तमिलनाडु से थे। अनीता टोरंटो विश्वविद्यालय में कानून की प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने टोरंटो के पास ओकविले से 2019 में सांसद का चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद उनको सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री के रूप में चुना गया था।साथ ही अनीता ने व्यापक शोध के साथ एयर इंडिया जांच आयोग की सहायता की। आयोग ने 23 जून 1985 को एयर इंडिया कनिष्क उड़ान 182 की बमबारी की जांच की, जिसमें सभी 329 लोग मारे गए थे। ये मामला खालिस्तानियों से जुड़ा था।


G-20 देशों से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने की अपील
जिनेवा/नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोरोना महामारी को लेकर एक बार फिर से चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है इसलिए सभी लोगों को अभी भी सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपकरणों को प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महामारी तब ही समाप्त होगी जब दुनिया इसे समाप्त करना चाहेगी। यह हमारे हाथ में है। हमारे पास वे सभी उपकरण हैं जिनकी हमें आवश्यकता है। लेकिन दुनिया ने उन उपकरणों का अच्छी तरह से उपयोग नहीं किया है। समाचार एजेंसी एएनआाई के मुताबिक, उन्होंने बर्लिन में वर्ल्ड हेल्थ समिट को संबोधित करते हुए यह बात कही।
G-20 देशों से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने की अपील: डब्ल्यूएचओ प्रमुख
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने G-20 देशों से भी आग्रह किया कि वे अपनी 40 फीसदी आबादी को कोवैक्स तंत्र और अफ्रीकी वैक्सीन अधिग्रहण ट्रस्ट (AVAT) में सक्रिय रूप से शामिल करें। प्रमुख ने दुनियाभर के देशों से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने की अपील की। WHO की वेबसाइट के अनुसार, Covax और ACT का उद्देश्य दुनिया के हर देश के लिए विकास, उत्पादन और कोविड-19 के परीक्षण, उपचार और टीकों तक समान पहुंच में तेजी लाना है।
बूस्टर खुराक को लेकर भी जताई थी नाराजगी
बता दें कि इससे पहले डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोरोना वायरस टीकों की बड़ी आपूर्ति वाले अमीर देशों से वर्ष 2021 के अंत तक बूस्टर खुराकें देने से परहेज करने की अपील की थी। इसके साथ ही घेबरेयेसस ने कुछ दवा कंपनियों के एक प्रमुख संघ की ओर से कोरोना वैक्सीन को लेकर की गई टिप्पणियों पर हैरानी भी जताई थी। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा था कि वह दवा निर्माताओं के एक प्रमुख संघ की टिप्पणियों पर हैरान हैं, जिन्होंने कहा है कि वैक्सीन की आपूर्ति इतनी अधिक है कि उन देशों में बूस्टर डोज और वैक्सीनेशन दोनों की अनुमति दी जा सकती है।

विंधोएक/नई दिल्ली (शोर संदेश)। नामीबिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश रूसी कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी (Sputnik V) के इस्तेमाल पर रोक लगाएगा। दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि स्पूतनिक-वी वैक्सीन लेने वाले पुरुषों में एचआईवी होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। नामीबिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि रूसी वैक्सीन के इस्तेमाल को बंद करने का उनका फैसला इस चिंता के सामने आने के बाद लिया गया है कि स्पूतनिक वी लेने वाले पुरुषों में संभवतः एचाईवी होने की आशंका ज्यादा होती है। वहीं, नामीबिया के इस फैसले पर स्पूतनिक-वी वैक्सीन को विकसित करने वाले जमेलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने नाराजगी जाहिर की है। इंस्टीट्यूट ने कहा है कि नामीबिया का फैसला किसी साइंटिफिक एविडेंस या रिसर्च पर आधारित नहीं है। बीते कुछ दिन पहले देश दक्षिण अफ्रीका ने भी स्पूतनिक वैक्सीन को लेकर चिंता जाहिर की थी। दक्षिण अफ्रीकी नियामक SAHPRA ने फैसला लिया है कि वह अपने देश में स्पूतनिक-वी के आपात इस्तेमाल को मंजूरी नहीं देगा। इसके पीछे दवा नियामक ने कहा है कि कुछ शोधों से यह पता चला है कि स्पूतनिक-वी में एडेनोवायरस टाइप 5 वेक्टर है, जिसके इस्तेमाल से पुरुषों में एचाईवी होने की आशंका बढ़ जाती है। मालूम हो कि भारत में भी स्पूतनिक-वी वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई आशंका सामने नहीं आई है।

अंकारा/नई दिल्ली (शोर संदेश)। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने शनिवार को कहा कि उन्होंने 10 विदेशी राजदूतों को `अवांछित व्यक्ति` घोषित करने का आदेश दिया, जिन्होंने जेल में बंद एक परोपकारी कारोबारी की रिहाई की मांग की है। अंकारा में अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी समेत दस देशों के राजदूतों ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक बयान जारी कर कारोबारी और परोपकारी उस्मान कवाला के मामले के निस्तारण की मांग की है जो एक अपराध के मामले में दोषी करार नहीं दिए जाने के बाद भी 2017 से जेल में हैं। एर्दोआन ने कहा कि उन्होंने राजदूतों को अवांछित घोषित करने का आदेश दिया है।
उन्होंने एक रैली में कहा, ``मैंने अपने विदेश मंत्री को निर्देश दिया और कहा कि आप इन 10 राजदूतों को अवांछित व्यक्ति घोषित करने के विषय को तत्काल संभालें।`` एर्दोआन ने कहा, ``वे तुर्की को पहचानेंगे, जानेंगे और समझेंगे। जिस दिन वे तुर्की को नहीं समझेंगे, वे यहां से चले जाएंगे।``
राजदूतों में नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, नॉर्वे और न्यूजीलैंड के राजनयिक भी शामिल हैं। उन्हें मंगलवार को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया था। किसी राजनयिक को `पर्सोन नॉन ग्रेटा`(अवांछित व्यक्ति) घोषित करने का आशय सामान्य रूप से होता है कि व्यक्ति के उसके मेजबान देश में आगे बने रहने पर प्रतिबंध होता है। कवाला (64) को 2013 में राष्ट्रव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों में पिछले साल बरी कर दिया गया था, लेकिन फैसले को बदल दिया गया और इसमें 2016 के सत्तापलट के प्रयासों से जुड़े आरोपों को शामिल कर दिया गया।
तुर्की के खिलाफ करेगा कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय पयर्वेक्षकों और मानवाधिकार समूहों ने कई बार कवाला और कुर्द राजनेता सेलाहत्तिन डेमिरतस की रिहाई की मांग की। यूरोप की मानवाधिकार अदालत ने 2019 में कवाला की रिहाई की मांग करते हुए कहा था कि उनका दोष साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है और उन्हें कैद में उनका मुंह बंद करने की खातिर रखा गया है। `द काउंसिल ऑफ यूरोप` ने कहा था कि कवाला को रिहा नहीं किया जाता तो वह नवंबर में तुर्की के खिलाफ कार्रवाई करेगा।