
मुंबई (शोर सन्देश)। महान अभिनेता दिलीप कुमार के छोटे भाई असलम खान का लीलावती अस्पताल में निधन हो गया। डॉक्टर जलील पारकर ने बताया कि उनको सुगर, हाईब्लड प्रेशर और हॉर्ट की बामारी थी, लेकिन उनको कोरोना होने के कारण यहां पर भर्ती कराया गया था। वह 88 वर्ष के थे। रविवार को दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो ने असलम और एहसान खान को अस्पताल में भर्ती कराया था, जब उनका कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। ज्यादा बीमार होने के कारण उनको वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टर अपने प्रयास में लगे थे, लेकिन उनकी की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी।
असलम खान 88 वर्ष के थे, जबकि उनके बड़े भाई एहसान खान 90 वर्ष के हैं और अभी भी जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले, अनुभवी अभिनेता दिलीप कुमार ने कोरोनो वायरस संकट के बीच प्रशंसकों को घर के अंदर रहने और जीवन बचाने के लिए अनुरोध करते हुए एक सुंदर कविता लिखी थी। 97 वर्षीय अभिनेता ने ट्विटर पर चार लाइन की कविता साझा की और सभी से लॉकडाउन का पालन करने का आग्रह किया।

00 सर्जरी के लिए फिलीपींस से दिल्ली आएंगे बच्चे
मुंबई(शोर सन्देश)। कोरोना काल में अगर कोई बॉलीवुड स्टार लोगों का मसीहा बनकर उभरा है तो वो सोनू सूद हैं। सोनू सूद इतने लंबे चल रहे कोरोना काल में शुरूआत से ही लोगों की मदद कर रहे हैं और ये सिलसिला अभी भी जारी है। सोनू सूद कई सारे नेक कामों के बाद अब एक और बड़ा काम करने जा रहे हैं। एक्टर फिलीपींस से 39 बच्चों को लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए भारत ला रहे हैं। लिवर की परेशानी से जुझ रहे इन बच्चों की मदद करने का फैसला लेते हुए एक्टर ने बताया है कि वे लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए 39 बच्चों को फिलीपींस से नई दिल्ली लाने की व्यवस्था करेंगे। इन सभी बच्चों की उम्र एक से पांच साल है। फिलीपींस के कई बच्चे लिवर की बीमारी से जूझ रहे हैं और ये बच्चे कोरोना की वजह से दिल्ली आने में भी असमर्थ थें। एक्टर ने इसकी जानकारी ट्विटर के जरिए दी है। जिसमें उन्होंने लिखा है,`इन अनमोल जिंदगियों को बचाना है। अगले दो दिनों में ये 39 बच्चे भारत के लिए उड़ान भरेंगे। बच्चों अपना बैग पैक करो।`
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब सोनू सूद ने किसी नेक काम को करने का फैसला किया है बल्कि एक्टर इससे पहले भी प्रवासी मजदूरों और छात्रों को घर पहुंचाने, किर्गिस्तान में फंसे छात्रों को उनके घर लाने, पुलिसकर्मियों को शिल्ड डोनेट करने, निसर्ग चक्रवात से लोगों की जान बचाने और दशरथ मांझी के परिवार की मदद करने जैसे नेक काम कर चुके हैं।

रायपुर/मुंबई (शोर सन्देश)। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने बुधवार को मुंबई पुलिस को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि दिशा की मौत के मामले में परिवार को किसी गड़बड़ी की आशंका नहीं है और वे मुंबई पुलिस द्वारा की गई जांच से `पूरी तरह संतुष्ट` हैं। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि पत्र में दिशा के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया पर परेशान करने का आरोप लगाया है। सतीश सालियान ने पत्र में कहा कि मीडिया के लोग उनसे पुलिस की जांच से संतुष्टि को लेकर बार-बार सवाल पूछकर परिवार को तंग कर रहे हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सतीश सालियान ने सहायक पुलिस आयुक्त, मालवणी को लिखे पत्र में कहा कि पत्रकार और मीडिया द्वारा उनके परिवार को मुम्बई पुलिस में उनकी आस्था और पुलिस की जांच के तरीके को लेकर लगातार सवाल करके परेशान किया जा रहा है।
00 पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग : अधिकारी ने कहा कि सतीश सालियान ने अपने पत्र में उनके परिवार के प्रति असंवेदनशील कृत्य को लेकर पत्रकारों, नेताओं और मीडिया के खिलाफ कार्रवाई करने की पुलिस से मांग भी की। इससे पहले दिशा सालियान की मां वसंती सालियान ने भी मुंबई पुलिस की जांच पर संतुष्टि जताई थी और कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत से दिशा का कोई संबंध नहीं है। दिशा केवल एक ही बार सुशांत सिंह राजपूत से मिली थी और उनके लिए बहुत ही कम वक्त के लिए काम किया था।
00 मालवाणी पुलिस में स्टेशन में मामला दर्ज : सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड की एक ऊंची इमारत से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी और इसके करीब एक सप्ताह बाद ही 14 जून को सुशांत अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटके मिले थे। दिशा की मौत के संबंध में मालवणी पुलिस थाने में दुर्घटनावश मृत्यु का मामला दर्ज किया गया था।

रायपुर/मुंबई (शोर सन्देश)। अयोध्या में वो घड़ी आ ही गयी,जिसका सभी को सालों से इंतज़ार था। अब भव्य राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होगा। आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन कार्यक्रम है, जिसके साथ मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। राम मंदिर निर्माण आरम्भ होने से रामायण में सीता का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया भी काफ़ी ख़ुश हैं। उन्होंने कहा, ऐसा लग रहा है, इस बार दिवाली जल्दी आ गयी।
आपको बता दें कि दीपिका ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा- कल राम जन्मभूमि शिलान्यास होगा। आख़िरकार लम्बा इंतज़ार ख़त्म हुआ। रामलला की घर वापसी हो रही है। यह बेहद आलीशान अनुभव होने जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि दिवाली इस साल जल्दी आ गयी।यह सब सोचकर इमोशनल हो रही हूं। कल का इंतज़ार बेसब्री से है। गौरतलब है, अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को कर रहे हैं। इस कार्यक्रम को लेकर देश के साथ विदेश में भी उल्लास का माहौल है।बता दें कि दीपिका ने रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में सीता का किरदार निभाया था, जो अस्सी के दौर में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। यह सीरियल बेहद लोकप्रिय रहा था और रामायण के सभी मुख्य पात्रों को दर्शकों से बेहद प्यार मिला था। वास्तविक जीवन में भी लोग इन कलाकारों को श्रद्धा से देखते थे। पहले लॉकडाउन के दौरान रामायण का दूरदर्शन के डीडी नेशनल चैनल पर पुन: प्रसारण किया गया था, जिसे काफ़ी लोकप्रियता मिली थी। धारावाहिक ने कामयाबी के पुराने कीर्तिमान चकनाचूर कर दिये थे। इसी के साथ रामायण के मुख्य किरदार निभाने वाले कलाकारों को भी सोशल मीडिया के ज़रिए दर्शकों का ख़ूब प्यार मिला। रामायण में राम का किरदार अरुण गोविल और लक्ष्मण का किरदार सुनील लहरी ने निभाया था। हनुमान के रोल में दारा सिंह नज़र आये थे।

रायपुर/मुंबई (शोर सन्देश)। ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद दोनों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है और दोनों घर लौट आई हैं। ऐश्वर्या और आराध्या के डिस्चार्ज होने से बिग बी काफी खुश और इमोशनल हैं। उन्होंने दोनों की फोटो शेयर करते हुए लिखा, अपनी छोटी बिटिया और बहुरानी को अस्पताल से मुक्ति मिलने पर मैं रोक ना पाया अपने आंसू। प्रभु तेरी कृपा अपार, अपरम्पार।
बता दें कि अभिषेक ने ट्वीट कर दोनों के डिस्चार्ज होने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा, ‘आपकी प्रार्थना और शुभकामनाओं के लिए सभी का धन्यवाद। हमे हमेशा आप सभी के एहसानमंद रहेंगे। शुक्र है कि ऐश्वर्या और आराध्या की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अब दोनों घर पर रहेंगी। मैं और मेरे पिता अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की निगरानी में रहेंगे।’ बता दें कि अमिताभ बच्चन और उनका परिवार पिछले कुछ दिनों से नानावती अस्पताल में कोरोना का इलाज चल रहा है। पहले बिग बी और अभिषेक को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहीं ऐश्वर्या और आराध्या का घर पर ही इलाज चल रहा था लेकिन फिर कुछ दिनों पहले ही उन्हें भी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जया बच्चन की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी।
.jpg)
डरावनी फिल्मों से लेकर सांस्कृतिक चित्रणों में चमगादड़ को हमेशा से एक निराधार भय से जोड़कर दिखाया गया है। और अब कोविड-19 महामारी का मुख्य रुाोत होने के कारण चमगादड़ और भी बदनाम हुए हैं। ऐसे में हो सकता है कि चमगादड़ों को खत्म करने के प्रयास किए जाएं। तब चमगादड़ों का संरक्षण करना कठिन हो जाएगा, साथ ही उनसे मिलने वाले महत्वपूर्ण लाभों की रक्षा करना भी मुश्किल हो जाएगा। संभावना तो यह भी है कि चमगादड़ों के खात्मे से नई परेशानियों खड़ी हो जाएं।
वास्तव में चमगादड़ों की कुछ रोगाणुओं के प्रति बहुत आक्रामक प्रतिरक्षा प्रणाली होती है, जिसकी वजह से वायरस और भी घातक रूप में विकसित हो जाते हैं। ऐसे में मनुष्यों में यदि इस तरह का कोई वायरस प्रवेश कर जाता है तो यह जानलेवा बन सकता है।
लेकिन यहां चमगादड़ों से मिलने वाले लाभों पर बात करना भी आवश्यक है। चमगादड़ हमारे जंगलों को पुनर्जीवित करते हैं और उर्वरक प्रदान करते हैं। ये 300 से अधिक प्रजातियों की फसलों का परागण करते हैं। ककाओ, कपास, मकई और अन्य पौधों को कीटों से बचाते हैं। कम विकसित देशों में कीटों का सफाया करते हैं। जब अमेरिका के कृषि क्षेत्रों में कीटों का सफाया करने वाले चमगादड़ों की संख्या में कमी हुई थी तब कृषि क्षेत्रों में वाइट-नोज़ सिंड्रोम से शिशु रुग्णता और मृत्यु दर में तेज़ी से वृद्धि हुई थी क्योंकि कीटों से निपटने के लिए हानिकारक कीटनाशकों का छिड़काव बढ़ा था। चमगादड़ मलेरिया फैलाने वाले कीटनाशक प्रतिरोधी मच्छरों का भी भक्षण करते हैं।
भविष्य में सार्स और एबोला के जोखिम को कम करने के लिए चमगादड़ों को नुकसान पहुंचने से रोगों का खतरा बढ़ सकता है। पूर्व में इस तरह के असफल प्रयास पेरू, युगांडा, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में किए जा चुके हैं।
लेकिन अभी भी यह सवाल बना हुआ है कि आने वाली महामारियों को कैसे रोका जा सकता है। चमगादड़ों के संरक्षण की आवश्यकता है, साथ ही उनके क्षेत्रों में मानव गतिविधियों को कम करके संक्रमण से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए जंगलों के कम होने से फलभक्षी चमगादड़ों का प्रवास बांग्लादेश के खजूर के पेड़ों पर हुआ और देखते ही देखते वहां निपाह वायरस का संक्रमण शुरू हो गया। लेकिन अपने मूल निवास में रहते हुए चमगादड़ों द्वारा पालतू जानवरों में वायरस के फैलने की संभावना न के बराबर है।
ऐसे में बड़े पैमाने पर उनके प्राकृतिक वास की बहाली से हम चमगादड़ों का संपर्क मनुष्यों और पालतू जानवरों से कम कर सकते हैं। इसके अलावा हम कृत्रिम आवास और देशी फलों के वृक्षों को विशेष रूप से उनके लिए लगा सकते हैं। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके व्यापार को सीमित या समाप्त करने पर विचार करना चाहिए। यह मनुष्यों से चमगादड़ों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क को रोकने का सबसे आसान तरीका है।
सौभाग्य से हमारे पास इस तरह के वायरसों से निपटने के कुछ नए तरीके सामने आ रहे हैं। आधुनिक जीनोम अनुक्रमण विधियों से चमगादड़-वायरस सम्बंध के रहस्यमयी क्षेत्र में कुछ रास्ता साफ हुआ। हालांकि टीकों और आधुनिक तकनीकों पर काम करने के साथ यह भी आवश्यक है कि हम चमगादड़ों को संरक्षित करने, उनकी उपस्थिति को स्वीकार करने और उनसे मिलने वाले लाभों के संदेश को लोगों तक पहुंचाएं ताकि स्वास्थ्यप्रद भविष्य संभव हो सके। (स्रोत फीचर्स)

पंचांग 13 जून 2020
तिथिअष्टमी - 25:00:54 तक
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद - 21:27:47 तक
करणबालव - 11:55:01 तक, कौलव - 25:00:54 तक
पक्ष - कृष्ण
योग प्रीति - 11:00:42 तक
वार - शनिवार
00 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय - 05:20:51
सूर्यास्त - 18:45:31
चन्द्र राशि - कुम्भ - 14:46:07 तक
चन्द्रोदय - 24:45:59
चन्द्रास्त - 12:03:59
ऋतु - ग्रीष्म
00 हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत - 1942 शार्वरी
विक्रम सम्वत - 2077
काली सम्वत - 5122
दिन काल - 13:24:40
मास - अमांतज्येष्ठ
मास - पूर्णिमांत आषाढ
00 शुभ समय (शुभ मुहूर्त)
अभिजीत - 11:36:21 से 12:30:00 तक
दिशा - शूल
दिशा - शूलपूर्व
00 चन्द्रबल और ताराबल
ताराबलभरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
00 चन्द्रबल - मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ
.jpg)
सुन्दर चमकीली त्वचा, गठीला शरीर, छरहरा बदन,चेहरे पर यौवन, चमकीले बाल तथा प्राकृतिक रूप से सुन्दर दिखने की चाहत में आज कल पिफटनेस सैन्टरों, जिम, सैलून, स्पा तथा बहु राष्ट्रीय कम्पनियों के मंहगे सौदर्य प्रसाधनों को खरीदने की होड़ आम देखी जा सकती है। आज कल के प्रदूषण,तनाव, लाइफ स्टाइल तथा दिन रात की भागदौड़ भरी जिन्दगी से आप समय से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं तथा युवा उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां ,कील मुहाँसे ,फुंसियाँ ,काले धब्बे लगातार परेशानी का सबब बन जाते हैं। अधिकांश लोग सूंदर दिखने की लालसा क्या क्या नहीं कर देते लेकिन फिर भी ब्यूटी सैलूनों में घण्टों फेयरनेस ट्रीटमेंट तथा कॉस्मेटिक पर भारी खर्च करने के बाद भी चेहरे का निखार कुछ दिनों बाद ही गायब हो जाता है।ऐसे में लोग उदास होकर दिल तोड़ बैठते हैं तथा उन्हेँ लगता है की सुंदरता तो बिरासत में ही मिलती है ।
लेकिन क्या आप जानते हैं की अगर आप शारीरिक रूप से सुन्दर हैं तो आपका सौन्दर्य चेहरे पर स्वभाबिक रूप से झलकेगा । कुछ योग आसनों के नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक सुन्दरता , दमकती त्वचा तथा शारीरिक आकर्षण ग्रहण कर सकते है । बास्तव में अगर आप योग साधना को अपने जीवन से जोड़ लें तो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही प्रकृतिक तौर पर स्थाई रूप से सुन्दर तथा प्रभावशाली भी बनाया जा सकता है तथा महँगे सौन्दर्य प्रसाधनों , ब्यूटी सैलूनों के महँगे उपचार तथा समय को बचाया जा सकता है ।
भारतीय आर्युवैदिक पद्धति योग के साधारण आसनों के जरिए आप स्थाई आन्तरिक तथा बाहरी सौन्दर्य मुफ़त में आसानी में पा सकते है। प्रतिदिन महज आध घण्टा सुबह तथा शाम सूर्या नमस्कार, प्राणायाम, उत्थान आसन, कपाल भाती, धनुर आसन तथा सांसो की क्रिया के माध्यम से आप अपने यौवन, सौन्दर्य तथा प्राकृतिक आकर्षण को जीवन पर्यन्त बनाऐ रख सकते है।
बालों तथा त्वचा के सौंदर्य को बनाए रखने में प्राणायाम महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। प्राणायाम से जहां तनाव कम होता है वहीं दूसरी ओर शरीर में प्राण वायु का प्रभावी संचार होता है तथा रक्त का प्रभाव बढ़ता है। प्राणायाम सही तरीके से सांस लेने की बेहतरीन अदा है। प्रतिदिन 10 मिनट तक प्राणायाम से मानव शरीर की प्राकृतिक क्लीजिंग हो जाती है। प्राणायाम का आज पूरे विश्व में अनुसरण किया जाता है। प्राणायाम से मानव खोपड़ी में व्यापक आक्सीजन तथा रक्त संचार होता है। जिससे बालों की प्राकृतिक रूप से वृद्धि होती है तथा बालों का सफ़ेद होना तथा झड़ने जैसी समस्या को रोकने में भी मदद मिलती है। योगा का मानसिक शारीरिक, भावनात्मक तथा मनोभाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे आत्म विश्वास बढ़ता है। योगा से आप आत्मिक तौर पर शान्त महसूस करते हैं। जिससे आपके बाहरी सौन्दर्य में भी निखार आता है।
आमतौर पर अनिद्रा, तनाव आदि में पैदा होने वाली कील, मुहांसे, काले धब्बों आदि की समस्याओं के स्थाई उपचार में योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उत्थान आसन के लगातार उपयोग से आप कील, मुंहासे, काले धब्बों आदि की समस्याओं का स्थाई उपचार पा सकते है। कपालभाती में कार्बन डाईक्साईड को हटाकर खून को साफ करने में मदद मिलती है। उससे शरीर में हल्कापन महसूस होता है। धनुरासन से शरीर में रक्त का प्रभाव बढ़ता है तथा शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है इससे शरीर की त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है तथा त्वचा की रंगत में निखार भी आता है।
योग के लगातार अभ्यास से त्वचा तथा शरीर में यौवन को दीर्घकालीन तौर पर बनाए रखने में मदद मिलती है। योगासन से रीढ़ की हड्डी तथा जोड़ों को लचकदार बनाया रखा जा सकता है। जिससे शरीर लम्बे समय तक लचीला तथा आकर्षक बनता है, योग से शरीर के भार को कम करने में भी मदद मिलती है तथा इससे मांसपेशियां नरम तथा मुलायम हो जाती है। योगा से थकान से मुक्ति मिलती है। तथा शरीर में उर्जा का प्रभावी संचार होता है सूर्य नमस्कार आसन से पूरे शरीर में नवयौवन का संचार होता है। सूर्य नमस्कार से शरीर पर बढ़ती आयु के प्रभाव को रोका जा सकता है तथा यह चेहरे तथा शरीर पर बुढ़ापे की भाव मुद्राओं के प्रभाव को रोकने में मददगार साबित होता है।
चेहरे की झुर्रियों से मुक्ति पाने के लिए सूर्य नमस्कार तथा प्राणायाम दोनों प्रभावी आसन है।
आपके सुन्दर दिखने के लिए जरूरी नहीं कि आप सुन्दर ही पैदा हुए हों आप अपने प्रयत्नों से सौंदर्य प्राप्त कर सकते है। अच्छा स्वास्थ्य तथा सौंदर्य एक ही सिक्के के दो पहलू है। यदि आप आन्तरिक रूप से सुन्दर नहीं है तब तक आपका सौंदर्य चेहरे पर नहीं झलक सकता। सुन्दर त्वचा, चमकीले बाल तथा छरहरे बदन के लिऐ अच्छी सेहत का होना परम आवश्यक है। वास्तव में मैंने समग्र स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक सिद्धान्त को प्रोत्साहित किया। जिसमें योग को इस कार्यक्रम का अभिन्न अंग माना गया। मेरी समग्र सौंदर्य देखभाल की विशिष्ट अवधारणा को विश्व भर में सराहा गया है। वास्तव में मेरा विचार है कि आज की आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य तथा सौंदर्य के सन्दर्भ में योग काफी सार्थक है। योग मेरे व्यक्तिगत जीवन का अभिन्न अंग रहा है तथा मैंने इसके असंख्य लाभ महसूस किए है।
योग से मानसिक तथा शारीरिक दोनों को प्रचुर लाभ मिलता है। इससे न केवल सभी मांस पेशियों को फायदा होता है बल्कि इससे प्राण शक्ति बढ़ती है तथा आन्तरिक अंगों की रंगत में निखार आता है।
इससे नाड़ी तंत्र को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इससे तनाव को कम करने तथा मानसिक संतुलन में भी लाभ मिलता है। योग प्राचीन भारतीय विद्या है तथा इसके निरन्तर अभ्यास से संयमित व्यक्तित्व तथा वृद्वावस्था की भाव मुद्राओं को रोकने में मदद मिलती है। योग का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे सांसों पर नियन्त्रण रहता है तथा योगाभ्यास के दौरान सांस खींचने तथा सांस बाहर निकलाने की उचित विधि से ,श्वांस को संयमित करने में मदद मिलती है जिससे शरीर में आक्सीजन को नियन्त्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। योग से शारीरिक तथा मानसिक उल्लास की असीम अनुभूति प्राप्त होती है।
योग सौन्दर्य के लिए अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि आन्तरिक सौंदर्य से ही सही शारीरिक सौंदर्य की प्राप्ति की जा सकती है।
येाग से रक्त संचार के प्रवह में सुधार होता है जिससे त्वचा के स्तह तक पर्याप्त मात्रा में रक्त संचार होता है तथा यह रक्त संचार सुन्दर त्वचा के लिए अत्यधिक आवश्यक होता है क्योंकि इससे त्वचा को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं जिससे त्वचा सुन्दर तथा निखरी दिखाई देती है। योग के माध्यम से शरीर के विषैले तत्व त्वचा के माध्यम से बाहर आते है तथा रक्त संचित त्वचा के मामले में योग सबसे ज्यादा लाभदायक सिद्ध होते है। इससे त्वचा में रंगत तथा स्फूर्ति आ जाती है। योग से सौंदर्य में व्यापक निखार आता है तथा यह त्वचा को ताजा तथा बीमारियों से पूरी तरह मुक्त रखती है। यह अवधारणा बालों पर भी लागू होती है। योग से सिर की खाल तथा बालों के कोश में रक्त संचार तथा आक्सीजन का व्यापक निरन्तर प्रवाह होता है। इससे बालों के रक्त संचार को पोष्टिक तत्व पहुंचाने में काफी मदद मिलती है जिससे बालो की वृद्धि तथा सिर की खाल को स्वास्थ्य रखने में बहुत मदद मिलती है।
जब हम सौंदर्य की बात करते है तो हम केवल बाहरी चेहरे की सौंदर्य की ही बात नहीं करते बल्कि इसमें आंतरिक सूरत भी शामिल होती है जिसमें लचकपन, हाव.भाव तथा शारीरिक आकर्षण होना नितान्त आवश्यक होता है।
जहां तक बाहरी सौंदर्य का सम्बन्ध है वहां छरहरे बदन से व्यक्ति काफी युवा दिखाई देते हैं जो कि लम्बे समय तक यौवन बनाए रखने में सहायक होता है। योग से शरीर के हर टिशू को आक्सीजन प्राप्त होती है जिसे शरीर में सौंदर्य तथा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यदि आप ऐसी जीवनशैली गुजार रहे हैं जिसमें शारीरिक गतिविधि नगण्य है तो आप वास्तव में बुढ़ापे को नियंत्रण दे रहे है योग तथा शारीरिक श्रम से आदमी को यौवन की स्थिति को लम्बें समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है क्योंकि इससे शरीर सुदृढ़ होता है तथा शरीर सुव्यवस्थित तथा तन्दुरूस्त रखने में भी मदद मिलती है योग आसनों से रीढ़ की हड्डी तथा ह़डिड्यों के जोड़ों को लचकदार एवं कोमल बनाने में मदद मिलती है। इससे शरीर सुदृढ़ तथा फुर्तीला बनता है। मांसपेशियों में रंगत आती हैए रक्त संचार में सुधार होता हैए प्राण शक्ति का प्रवाह होता है तथा सौंदर्य एवं अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
अनेक सौंदर्य समस्यायें मानसिक तनाव की वजह से उत्पन्न होती है। योग से तनाव को कम करने तथा स्वछन्द मानसिक उन्मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है तथा इससे तनाव से जुड़ी सौंदर्य समस्याओं को निजात प्रदान करने में मदद मिलती है। योग के लगातार अभ्यास से कील मुंहासों, बालों के झड़ने की समस्याओं, सिर की रूसी आदि समस्याओं का स्थाई उपचार मिलता है योग तथा शारीरिक क्रियायें करने वाले युवाओं पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया हैं उनके व्यक्तित्व में भावनात्मक स्थिरता, आत्म विश्वास, उचित मनोभाव, जैसे सकारात्मक बदलाव महसूस किये जाते है। जिसका दिमाग भावनाओं तथा मिजाज पर सीधा प्रभाव दिखाई देता है। वास्तव में योग नियमित रूप से तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। जिससे त्वचा पर रंगत वापिस आ जाती है। योग करने से आप तत्काल पुनः यौवन प्राप्त करके चित प्रसन्न महसूस कर सकते है।
वास्तव में योग से बाहरी शारीरिक सौंदर्य को निखारने तथा संवारने में काफी मदद मिलती है।
आज का समय लगातार बढ़ती जटिलताओं और गति का समय है। जीवन यापन के लिए हर कोई लगातार गतिमान है। भाग-दौड़ की इन स्थितियों में एक सुसंगत,संयमित और स्वस्थ्य जीवन दृष्टि की खोज हर व्यक्ति को है। हर कोई अपने शरीर को स्वस्थ्य रखना चाहता है। भारतीय परंपरा हमेशा से ही जीवन को समग्र और संतुलित रूप से जीने की दृष्टि देती रही है। भारतीय चिंतन और परंपरा का आधार रहा है योग-शास्त्र। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है,वरन् यह जीवन को संतुलित रूप से जीने का शास्त्र है। यह निरंतर बढ़ती हुई भाग-दौड़ में व्यक्तित्व को एक ठहराव,एक गहराई देने की विद्या है। ऐसे में आज न केवल भारत बल्कि विश्व के दूसरे देश भी योग को जीवन शैली में सुधार लाने का एक प्रमुख उपाय मान रहे हैं। जीवन की भाग-दौड़ वाली जिंदगी से परेशान होकर हर कोई जिंदगी को आसान बनाना चाहता है। ऐसी स्थिति में क्या हम अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए थोड़ा समय योग को नहीं दे सकते? योग एक ऐसी विधा है जिससे हम अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। जब तक मन शुद्ध या स्थिर नहीं होता,हमारा तन भी अशुद्ध रहता है। योगाभ्यास द्वारा ही तन व मन की शुद्धि होती है और हमारा तन-मन निरोगी हो जाता है। योगाभ्यास से मन को स्वस्थ्य और शांत बनाया जा सकता है। शरीर को स्वस्थ्य बनाने में तन और मन का बेहतर योगदान होता है। आमतौर पर देखा गया है कि हमारी शारीरिक बीमारियों के मानसिक आधार होते हैं। क्रोध हमारे मन को विकृत करता है जिससे हम विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं फिर भी क्रोध से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते हैं। योगाभ्यास क्रोध पर नियंत्रण रखने में अहं भूमिका निभाता है।
योग
जब हम सौंदर्य की बात करते है तो हम केवल बाहरी चेहरे की सौंदर्य की ही बात नहीं करते बल्कि इसमें आकृतिए सूरत भी शामिल होती है जिसमें लचकपनए हावण्भाव तथा शारीरिक आर्कषण होना नितान्त आवश्यक होता है।
जहां तक बाहरी सौंदर्य का सम्बन्ध है वहां छरहरे बदन से व्यक्ति काफी युवा दिखाई देते हैं जो कि लम्बे समय तक यौवन बनाए रखने में सहायक होता है। योग से शरीर के हर टिशू को आक्सीजन प्राप्त होती है जिसे शरीर में सौंदर्य तथा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यदि आप से ऐसी जीवनशैली गुजर रहे हैं जिसमें शारीरिक गतिविधी नगण्य है तो आप वास्तव में बुढ़ापे को नियन्त्रण दे रहे है योग तथा शारीरिक श्रम से आदमी को यौवन की स्थिति को लम्बें समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है क्योंकि इससे शरीर सुदृढ़ होता है तथा शरीर सुव्यवस्थित तथा तन्दुरूस्त रखने में भी मदद मिलती है योग आसनों से रीढ़ की हड्डी तथा हड्यिं के जोड़ों को लचकदार एवं कोमल बनाने में मदद मिलती है। इससे शरीर सुदृढ़ तथा फुर्तीला बनता है। मांसपेशियों में रंगत आती हैए रक्त संचार में सुधार होता हैए प्राण शक्ति का प्रवाह होता है तथा सौंदर्य एवं अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
अनेक सौंदर्य समस्यायें मानसिक तनाव की वजह से उत्पन्न होती है। योग से तनाव को कम करने तथा स्वछन्द मानसिक उन्मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है तथा इससे तनाव से जुड़ी सौंदर्य समस्याओं को निजात प्रदान करने में मदद मिलती है। योग के लगातार अभ्यास से कील मुंहासोंए बालों के झड़ने की समस्याओंए सिर की रूसी आदि समस्याओं का स्थाई उपचार मिलता है योग तथा शारीरिक क्रियायें करने वाले युवाओं पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया हैं उनके व्यक्तित्व में भावनात्मक स्थिरताए आत्म विश्वासए उचित मनोभावए जैसे सकारात्मक बदलाव महसूस किये जाते है। जिसका दिमाग एवं भावनाओं तथा मिजाज पर सीधा प्रभाव दिखाई देता है। वास्तव में योग नियमित रूप से तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। जिससे त्वचा पर रंगत वापिस आ जाती है।
वास्तव में योग से बाहरी शारीरिक सौंदर्य को निखारने तथा संवारने में काफी मदद मिलती है।
आज का समय लगातार बढ़ती जटिलताओं और गति का समय है। जीवन यापन के लिए हर कोई लगातार गतिमान है। भाग.दौड़ की इन स्थितियों में एक सुसंगत ,संयमित ,और स्वस्थ्य जीवन दृष्टि की खोज हर व्यक्ति को है। हर कोई अपने शरीर को स्वस्थ्य रखना चाहता है। भारतीय परंपरा हमेशा से ही जीवन को समग्र और संतुलित रूप से जीने की दृष्टि देती रही है। भारतीय चिंतन और परंपरा का आधार रहा है योग.शास्त्र। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है वरन् यह जीवन को संतुलित रूप से जीने का शास्त्र है। यह निरंतर बढ़ती हुई भाग.दौड़ में व्यक्तित्व को एक ठहरावएएक गहराई देने की विद्या है। ऐसे में आज न केवल भारत बल्कि विश्व के दूसरे देश भी योग को जीवन शैली में सुधार लाने का एक प्रमुख उपाय मान रहे हैं। जीवन की भाग.दौड़ वाली जिंदगी से परेशान होकर हर कोई जिंदगी को आसान बनाना चाहता है। ऐसी स्थिति में क्या हम अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए थोड़ा समय योग को नहीं दे/ योग एक ऐसी विधा है जिससे हम अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। जब तक मन शुद्ध या स्थिर नहीं होता तब तक हमारा तन भी अशुद्ध रहता है। योगाभ्यास द्वारा ही तन व मन की शुद्धि होती है और हमारा तन.मन निरोगी हो जाता है। योगाभ्यास से मन को स्वस्थ्य और शांत बनाया जा सकता है। शरीर को स्वस्थ्य बनाने में तन और मन का बेहतर योगदान होता है। आमतौर पर देखा गया है कि हमारी शारीरिक बीमारियों के मानसिक आधार होते हैं। क्रोध हमारे मन को विकृत करता है जिससे हम विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं फिर भी क्रोध से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते हैं। योगाभ्यास क्रोध पर नियंत्रण रखने में अहम भूमिका निभाता है।
लेखिका अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ है।

एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर को कोरोना के बीच पर्यावरण की चिंता सताई है। ऐसे में भूमि पेडनेकर अब पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ करना चाहती हैं। वो लोगों को जागरूक करना चाहती हैं। इस काम को पूरा करने के लिए भूमि पेडनेकर ने भामला फाउंडेशन और पर्यावरण मंत्रालय के साथ हाथ मिलाया है। साथ ही भूमि ने एक वीडियो के जरिए सभी से पर्यावरण को बचाने की अपील की है। भूमि ने इस बात पर भी रोशनी डाली है कि इंसान के लालच के चलते पर्यावरण खराब हुआ है. यही कारण है कि अब प्रकृति अपना विकराल रूप दिखा रही है. कभी अम्फान तूफान की तबाही देखने को मिल रही है तो कभी बाढ़ की. भूमि ने वीडियो के जरिए सभी से अपील की है कि इस पर्यावरण दिवस पर हर कोई धरती की रक्षा करने की ठाने. उन्होंने चेतावनी दी है कि अभी अगर धरती की रक्षा नहीं की गई तो आने वाला समय और खतरनाक होगा।