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पंचांग : देखें कब से कब तक है लाभ और शुभ काल*

17-Jan-2021

आज का पंचांग
तिथिचतुर्थी - 08:10:14 तक
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद - पूर्ण रात्रि तक
करणविष्टि - 08:10:14 तक, बव - 20:37:42 तक
पक्षशुक्ल
योगवरियान - 18:32:19 तक
वाररविवार
00 सूर्य चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय07:14:53
सूर्यास्त17:47:37
चन्द्र राशिकुम्भ - 25:16:12 तक
चन्द्रोदय10:13:59
चन्द्रास्त21:55:00
ऋतुशिशिर
00 हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत1942 शार्वरी
विक्रम सम्वत2077
काली सम्वत5122
दिन काल10:32:43
मास अमांतपौष
मास पूर्णिमांतपौष
00 अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)
दुष्टमुहूर्त16:23:16 से 17:05:27 तक
कुलिक16:23:16 से 17:05:27 तक
कंटक10:45:48 से 11:27:59 तक
राहु काल16:28:32 से 17:47:37 तक
कालवेला / अर्द्धयाम12:10:10 से 12:52:21 तक
यमघण्ट13:34:32 से 14:16:43 तक
यमगण्ड12:31:15 से 13:50:21 तक
गुलिक काल15:09:26 से 16:28:32 तक
00 शुभ समय (शुभ मुहूर्त)
अभिजीत12:10:10 से 12:52:21 तक
दिशा शूलपश्चिम
00 चन्द्रबल और ताराबल
ताराबलभरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

चन्द्रबल मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ 


आज धूम-धाम से मनाया जाएगा लोहड़ी पर्व जानें-शुभ मुहूर्त और पूजा विधि *

13-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) देशभर में आज लोकप्रिय पावन पर्व लोहड़ी है। फसलों का त्योहार लोहड़ी मकर संक्रांति से एक रात पहले देश भर में बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी परंपरागत रूप से रबी फसलों की फसल से जुड़ा हुआ है और यह किसान परिवारों में सबसे बड़ा उत्सव भी है। पंजाबी किसान लोहड़ी के बाद भी वित्तीय नए साल के रूप में देखते हैं। कुछ का मानना है कि लोहड़ी ने अपना नाम लिया है, कबीर की पत्नी लोई, ग्रामीण पंजाब में लोहड़ी लोही है। मुख्यतः पंजाब का पर्व होने से इसके नाम के पीछे कई तर्क दिए जाते हैं। का अर्थ लकड़ी है, ओह का अर्थ गोहा यानी उपले, और ड़ी का मतलब रेवड़ी तीनों अर्थों को मिला कर लोहड़ी बना है।

00 अग्नि प्रज्जवलन का शुभ मुहूर्त
इस दिन पौष अमावस को प्रातः 10.30 तक स्नान-दान एवं पितृ तर्पण का विशेष महातम्य होगा। आज सायंकाल 6 बजे लकड़ियां, समिधा, रेवड़ियां, तिल आदि सहित अग्नि प्रदीप्त करके अग्नि पूजन के रुप में लोहड़ी का पर्व मनाएं रात्रि 11 बजकर 42 मिनट तक।
संपूर्ण भारत में लोहड़ी का पर्व धार्मिक आस्था, ऋतु परिवर्तन, कृषि उत्पादन, सामाजिक औचित्य से जुड़ा है। पंजाब में यह कृषि में रबी फसल से संबंधित है, मौसम परिवर्तन का सूचक तथा आपसी सौहार्द्र का परिचायक है।
सायंकाल लोहड़ी जलाने का अर्थ है कि अगले दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश पर उसका स्वागत करना। सामूहिक रुप से आग जलाकर सर्दी भगाना और मूंगफली , तिल, गज्जक , रेवड़ी खाकर षरीर को सर्दी के मौसम में अधिक समर्थ बनाना ही लोहड़ी मनाने का उद्देश्य है। आधुनिक समाज में लोहड़ी उन परिवारों को सड़क पर आने को मजबूर करती है जिनके दर्शन पूरे वर्ष नहीं होते। रेवड़ी मूंगफली का आदान प्रदान किया जाता है। इस तरह सामाजिक मेल जोल में इस त्योहार का महत्वपूर्ण योगदान है।
इसके अलावा कृषक समाज में नव वर्ष भी आरंभ हो रहा है। परिवार में गत वर्ष नए शिशु के आगमन या विवाह के बाद पहली लोहड़ी पर जश्न मनाने का भी यह अवसर है। दुल्ला भटटी की सांस्कृतिक धरोहर को संजो रखने का मौका है। बढ़ते हुए अश्लील गीतों के युग में `संुदरिए मुंदरिए हो ` जैसा लोक गीत सुनना बचपन की यादें ताजा करने का समय लें।
आयुर्वेद के दृष्टिकोण से जब तिल युक्त आग जलती है, वातावरण में बहुत सा संक्रमण समाप्त हो जाता है और परिक्रमा करने से शरीर में गति आती है गावों मे आज भी लोहड़ी के समय सरसों का साग, मक्की की रोटी अतिथियों को परोस कर उनका स्वागत किया जाता है।
किंवदंतियों के अनुसार लोहड़ी की उत्पत्ति दुल्ला भट्टी से संबंधित है। जिसे पंजाब के रॉबिन हुड के रूप में जाना जाता है। वह मुगल शासन के दौरान पंजाब का सबसे बड़ा मुस्लिम डाकू था। वह अमीर से लूट कर गरीबों के बीच वितरित करता था।
उन्होंने कई हिंदू पंजाबी लड़कियों को भी बचाया जिन्हें जबरन बाजार में बेचने के लिए लिया जा रहा था। हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार और उन्हें दहेज प्रदान किया। लाहौर में उनके सार्वजनिक निष्पादन के बाद अपने उद्धारकर्ता की याद में लड़कियों ने गाने गाए और बोनफायर के आसपास नृत्य किया। यह उस दिन से पंजाब की परंपरा थी और हर साल पंजाब में लोहड़ी के रूप में गर्व से मनाया जाता था। तो हर लोहड़ी गीतों में दुल्ला भट्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।


आज का राशिफल : जानें क्या कहती है आपकी ग्रहदशाएँ*

08-Jan-2021

मेष : कुछ पारिवारिक, कुछ व्यावसायिक समस्या रहेगी। आर्थिक मामलों में जोखिम उठाएं। शनि के अस्त होने से उच्च अधिकारी या घर के मुखिया का सहयोग मिलेगा।
वृष : जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।
मिथुन : आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।रुपएलृपैसे के लेनलृदेन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कर्क : रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद उत्साह वर्धक होगी, लेकिन सचेत रहें। आपसी संबंध मधुर होंगे।
सिंह : पारिवारिक कार्य में व्यस्त रहेंगे। चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं की पूर्ति होगी।
कन्या : आर्थिक मामलों में प्रगति होगी। दूसरे से सहयोग लेने में सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी।
तुला : शनि के अस्त होने से व्यावसायिक सफलता मिलेगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।
वृश्चिक : व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। भावुकता में नियंत्रण रखें। आर्थिक मामलों में जोखिम उठाएं। राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। मधुर संबंध बनेंगे।
धनु : स्थानांतरण, विभागी परिवर्तन,नई नौकरी या नया अनुबंध आदि की दिशा में सफलता मिलेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी।
मकर : शासन सत्ता से सहयोग मिलेगा। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सफलता मिलेगी। चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी।
कुंभ : जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।
मीन : भाग्यवश सुखद समाचार मिलेगा। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।


आज का राशिफल: जाने क्या कहती है आपकी ग्रह-दशाएं*

07-Jan-2021

मेष- मेष राशि संतान पक्ष से लाभ मिलेगा। किसी नए कार्य की शुरुआत मित्रों के सहयोग और सुझाव से हो सकती है। किसी भी झंझट में ना पड़ें वरना वाद विवाद होने की संभावना है। शाम का समय परिवार के साथ उत्तम बीतेगा मन प्रसन्न होगा।
वृष-गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। पूरी ऊर्जा के साथ कार्य को करेंगे तो लाभ होगा। अपनी योजनाओं को अपने तक ही सीमित रखें, किसी को बताने पर कार्य रुक सकता है। दोपहर के बाद का समय आपके लिए ब्रह्म ज्ञान का वरदान साबित होगा।
मिथुन- वैवाहिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी। यदि आप अविवाहित हैं तो विवाह के रास्ते खुलेंगे। मित्रों को सहयोग प्राप्त होगा। कहीं पिकनिक पर जाने की योजना बन सकती है। आज का दिन उत्तम बीतेगा।
कर्क- स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ के प्रति लापरवाही आपके स्वास्थ्य को गड़बड़ कर सकती है। आय के स्रोत खुल सकते हैं और आज के दिन की गई मीटिंग आपके लिए ठीक रहेगी। प्रातः काल भगवान सूर्य का पूजन आपके पूरे दिन को उत्तम बनाएगा।
सिंह- भाग्य आपका साथ पूरा देगा। आज के दिन आपका कोई मित्र ,पत्नी या पिता आपको एक ऐसी सलाह देंगे जो आपके भाग्य के द्वार को खोल देगी। आज के दिन आपकी पर्सनालिटी में निखार होगा और आपकी किस्मत के द्वार खुल जाएंगे। शाम का समय दोस्तों के साथ हंसते-मुस्कुराते बीतेगा।
कन्या-अपने कर्मठ हाथों से आप सफलता की इबारत को लिखेंगे। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आपको कुछ नुकसान पहुंचा सकता है। आज के दिन कार्यक्षेत्र में आपको खूब सफलता मिलेगी और आप के वरिष्ठ अधिकारियों से आपको लाभ और सम्मान भी मिलेगा।
तुला-आज के दिन आपको बहुत से काम आसानी से बनते दिखाई देंगे। कार्य की योजनाओं में आप जुटे रहेंगे और लोगों के लिए आप एक सलाहकार का भी काम करेंगे। पारिवारिक जीवन में खुशहाली का अनुभव आपको होगा। कुल मिलाकर आज का दिन गोल्डन टाइम की तरह बीतेगा।
वृश्चिक-आवश्यकता से अधिक खर्चा परेशानियों में डाल सकता है। खर्च पर नियंत्रण करने की आवश्यकता। आज के दिन अधिक बोलना भी आपके लिए हानिकारक हो सकता है इसलिए अगर हो सके तो किसी से कोई वादा आज के दिन करें। दोपहर के समय तनावपूर्ण तो शाम का समय रिलैक्स होगा।
धनु-अपनी बुद्धि एवं अपनी पर्सनालिटी से आज आप कमाल करके दिखाएंगे। आज का दिन निर्णय लेने के उत्तम है। अधिक आलस के कारण आपको कुछ परेशानी हो सकती है तो आज आप की लड़ाई आलस से है। आज के दिन किसी को उधार बिल्कुल नहीं देना है। दोपहर के बाद का समय आपके लिए ठीक रहेगा।
मकर-बुद्धि ज्ञान और वाणी के अनूठे संगम से आज आप कमाल करके दिखाएंगे। आज के दिन आपके विरोधी परास्त होते नजर आएंगे। घर के लिए कुछ नया सामान लाने या कुछ नया रिनोवेशन करने की मन में तीव्र इच्छा होगी जो कि आपके लिए हितकारी है।
कुंभ-बैंक बैलेंस में कुछ हानि हो सकती है। आज के दिन मन कुछ उदास हो सकता है। आप अपने पराक्रम और ज्ञान से सभी प्रकार की समस्याओं का हल निकाल लेंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा जो कि आपके मन को प्रसन्न करेगा।
मीन-माता का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। प्रातकाल माता जी को प्रणाम करके घर से निकलें, सभी प्रकार के कार्य आपके पूरे होंगे। आज के दिन आप कुछ धर्म-कर्म के कार्य में भी लीन रहेंगे। हनुमान जी के दर्शन करने से मन में उठ रहे हैं सभी प्रकार के नकारात्मक विचारों से आपको छुटकारा मिलेगा। आप चमकते हुए सूर्य की तरह उभरेंगे, बस ख्याल रहे कि आपका ओवरकॉन्फिडेंस आप को नुकसान पहुंचा सकता है। 


सर्दियों में दुल्हनों का श्रृंगार*

23-Nov-2020

 संजीव कुमार सेन (शोर सन्देश)  शहनाज हुसैन शर्द ऋतू शादियों का पसंदीदी मौसम माना जाता है। इस मौसम में शादियों की भरमार रहती है। जहाँ मौसम के तापमान के हिसाब से यह सीजन बर ,बधू और रिश्तेदारों के लिए शकून भरा माना जाता है। बहीं शादी से जुड़े प्रवन्धन के लिए भी इस मौसम को अनुकूल माना जाता है।
लेकिन इस मौसम में तापमान में कमी, वायु पर्दूषण ,धुंध ,कोहरे वायु में शुष्कता आदि की बजह से दूल्हे और दुल्हन को सजाने सवांरने में अनेक दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है जल्दी ही सौंदर्य में बिखराव आना शुरू हो जाता है। शादी के दिन जबकि दुल्हन सबसे सूंदर दिखना चाहती हैं लेकिन मौसम की मार से उन्हें अनेक दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। हालांकि मौसम की मार से झूझने का कोई शॉर्टकट कतई नहीं है लेकिन फिर भी शादी से कुछ हफ्ते पहले अगर आयुर्वेदिक सौंदर्य प्रसाधनों का सहारा लिया जाये तो सौंदर्य से जुड़ी सभी समस्यायों से आसानी से निपटा जा सकता है। दुलहन को इस खास दिन के लिए सबसे आकर्षक, रोमांटिक और सुन्दर संवारा जा सकता है।
शादी के दिन दुल्हन का सुन्दर दिखना महज मेकअप या डैऊस में ही जुड़ा नहीं होता बल्कि इसमें काफी हफ्तो की कड़ी मेहनत शामिल होती है। यदि शादी से कुछ हफ्ता पहले त्वचा के प्रति सावधनी बरती जाए तो यह शादी के दिन काफी मददगार साबित हो सकती है, सर्दियों में तैलीय त्वचा भी शुष्क पड जाती है जबकि शुष्क त्वचा को क्रीम तथा तेल की मदद से माइस्चराइज और पोषक बनाना पड़ता है।  अपनी रोजाना फेशियल केयर रूटीन के अन्र्तगत अपनी त्वचा को दिन में दो बार साफ करें। रात्रि में सोने से पहले चेहरे पर जमी मैल को साफ करना अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। रात्रि को सोने से पहले प्रतिदिन त्वचा को साफ कीजिए और काफी साफ पानी से धोईए। इसके लिए आप गुनगुना पानी उपयोग में ला सकती है। सामान्य और शुष्क दोनों प्रकार की त्वचा के लिए क्लीजिंग क्रीम या जैल का प्रयोग कीजिए। वैकल्पिक रूप में आप आधे कप ठण्डे पानी में तिल, सूरजमुखी और जैतून के वनस्पति तेल की पांच बूंदे मिलाकर इसे बोतल में डालकर भली भांति मिला लीजिए। अब काटनवूल की मदद से इस मिश्रण से त्वचा को साफ कीजिए। बाकी बचे मिश्रण को फ्रीज में रख लीजिए। यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो क्लीनजींग लोशन या फेश वाश का प्रयोग कीजिए। तैलीय त्वचा के गहरे छिद्रों को साफ करने की जरूरत होती है। चावल के पाउडर को दही से मिलाकर हफ्ते में एक या दो बार लगाईए और त्वचा के दोनों ओर हल्के से रब करके पानी से धो डािलए। सर्दियों में तैलीय त्वचा में माथे पर काले धब्बे पड़ सकते है।
सर्दियों में तैलीय त्वचा भी शुष्क हो जाती है लेकिन जब इसमें क्रीम लगाई जाती है तो इससे चेहरे पर मुंहासे जाते है। इस समस्या के निदान के लिए एक चम्मच शुद्ध गलिसटीन केा 100 मिली लीटर गुलाब जल में मिला कर बोतल को फ्रीज में रख दीजिए। इस लोशन को रोजाना त्वचा के रूखेपन को दूर करने के लिए उपयोग कीजिए।
सभी प्रकार की त्वचा में नमी तथा मुलायम लाने के लिए शहद और अलोवेरा जैल का प्रयोग किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने के 20 मिनट बाद चेहरे को स्चछ ताजें पानी से धो डालिए। सभी प्रकार की त्वचा के मामले में प्रतिदिन त्वचा को काटनवूल पैड से ठण्डे गुलाब जल से टोन कीजिए। त्वचा को साफ करके सललाइए और इसके बाद तेजी से गुलाब जल से संचित काटनवूल पैड से पोैछिए। इसे त्वचा की आभा निखरेगी।
सामान्य से शुष्क त्वचा को रोजाना रात्रि को नारिशिंग क्रीम से पोषण किया जा सकता है। त्वचा को साफ करने के बाद क्रीम को पूरे चेहरे पर हल्की-हल्की मालिश करते हुए। लगाकर 2 मिनट बाद गीली काटनवूल से हटा लीजिए। चेहरे के लिए, मास्क का घर में मिश्रण बनाकर इसे हफ्ते में दो तीन बार लगाऐं। सामान्य से शुष्क तवचा के लिए दो चम्मच चोकर में एक चम्मच बादाम, दही शुद्ध औार गुलाब जल मिलाईए।
तैलीय और मिश्रित त्वचा के लिए तीन चम्मच जई में दही, शहद और गुलाब जल मिलाऐं। इस सब का पेस्ट बना होठों अंाखों को धोकर बाकी चेहरे पर लगा ले और 20 मिनट बाद साफ पानी से धो डालिए। चेहरे पर फेस मास्क लगाने के बाद, दो काटनवूल पैड को गुलाब जल में भिगों दीजिए। इन्हें आई पैड की तरह प्रयोग कीजिए। इन्हें आंखों पर रख कर लेटकर कर आराम करें। इससे शरीर को काफी ताजगी तथा आराम मिलता है। गुलाब जल का काफी आरामदायक और शान्तिवर्धक प्रभाव पड़ता है। जिससे थकान दूर होती है और आंखों में चमक जाती है।
आंखों के इर्द-गिर्द की त्वचा काफी पतली और संवेदनशील होती है। इस भाग में झुर्रियां काफी आसानी से जाती हैं। आंखों के इर्द गिर्द क्रीम लगाकर 15 मिनट बाद गीले काटनवूल से धो डालिए। प्रतिदिन बादम तेल के प्रयोग करने और इसकी हल्के-2 मालिश करने से आंखों के इर्द-गिर्द त्वचा को निखारने में काफी मदद मिलती है। होठों की त्वचा भी काफी पतली होती है इसमें तैलीय ग्रन्थियों की कमी होती है। सर्दियों में होठ आसानी से शुष्क और फट जाते है। होठों पर प्रतिदिन धोने के बाद बादाम तेल या बादाम क्रीम लगाकर पूरी रात लगी रहने दीजिए।
दिन में त्वचा में नमी की कमी होन दें। घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन का चेहरे पर प्रयोग करें। ज्यादातर सनस्क्रीन क्रीमों में माईस्चराईज विद्यमान होते है। माइस्चराईजर क्रीम और द्रव्य रूप में उपलब्ध होतेे है। अगर आपकी त्वचा में अत्याधिक शुष्कता है तो क्रीम का उपयोग कीजिए।
सर्दियों में शरीर की त्वचा का तैलीय पौषाहार करना चाहिए। पुराने समय में त्वचा की देखभाल के लिए उबटन बनाया जाता था। सबसे पहले शरीर की तिल के तेल से मालिश की जाती है और उसके बाद घर में बनाया गया उबटन लगाया जाता है। यह उबटन मुख्यत: चोकर, बेसन, दही, मलाई और हल्दी का मिश्रण होता है। इस सबका मिश्रण करके इसे नहाने से पहले शरीर पर लगाया जाता है। आधा घंटा बाद उबटन को रगड़कर हटाकर स्नान किया जाता है। इससे नहाने के दौरान त्वचा की मृत कोशिकाओं का साफ करने में मदद मिलती है जिससे त्वचा चमकीली चिकनी, मुलायम होकर निखर जाती है।  चमकीली त्वचा के लिए सभी संघटको को पोटली में डालकर पोटली को गीला कर शरीर के सभी अंगों पर रगडऩे तथा उसके बाद स्नान कर लें।
पाऊडर, दूध, बादाम, चावल पाऊडर तथा गुुलाब की पंखुडियों का मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रण को त्वचा पर लगाने से त्वचा साफ, मुलायम हो जाती है तथा इसमें प्राकृतिक आभा जाती है। इससे शरीर रेशम की तरह मुलायम हो जाता है तथा शरीर में ताजगी तथा प्राकृतिक सुगन्ध आती है।
शादी से पहले सभी दुल्हनें किसी किसी प्रकार के तनाव के दौर से गुजरती है जिसका प्रतिदिन उनके चेहरे पर झलकता है। इस प्रकार के मानसिक तनाव की मुक्ति के लिए आराम काफी मददगार साबित होता है। शारीरिक व्यायाम से मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है। शादी से कुछ माह पहले नियमित रूप से व्यायाम कीजिए और सुबह सैर के लिए निकलिए। वास्तव में सुबह की सैर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक साबित होती है। शरीर मन की शंाति के लिए लम्बी सांसे और ध्यान काफी लाभदायक साबित होते है।


अंगारमोती मंदिर में मड़ई, दूर दराज के पहुंचे श्रद्धालु*

20-Nov-2020

धमतरी (शोर सन्देश) गंगरेल में स्थित मां अंगारमोती मंदिर में शुक्रवार को मड़ई का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दराज के श्रद्धालृु शामिल हुए। दीपावली पर्व के बाद हर साल पहले शुक्रवार को मां अंगारमोती मंदिर में मड़ई का आयोजन किया जाता है इस साल भी श्रद्धा और आस्था के साथ सुबह से शाम तक दर्शन करने वाले लोगों की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिषर के आस पास दुकाने सजी है। शहर से गंगरेल बांध तक आने जाने के लिए आटो, टैक्सी समेत विभिन्न वाहने चल रही हैं। 


जिले की पहली पवर्तारोही सुमन ताम्रकार को कलेक्टर एसपी ने किया सम्मानित*

28-Oct-2020

00 गृह पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने हरी झंडी दिखाकर टीम को किया था रवाना
जशपुरनगर (शोर सन्देश) कलेक्टर कावरे और पुलिस अधीक्षक बालाजी राव ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सादे समारोह में सरगुजा संभाग की पहली महिला पवर्तारोही और जशपुर जिले की पहली पवर्तारोही सुमन ताम्रकार को स्मृति चिन्ह और शाल भेंटकर सम्मानित किया गया। कलेक्टर और एसपी ने अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर सुमन ताम्रकार की माता रमा ताम्रकार, जिला पंचायत के मुख्य कायर्पालन अधिकारी के.एस. मंडावी, एडीएम आई.एल.ठाकुर, डिप्टी कलेक्टर आकांक्षा त्रिपाठी, जिला शिक्षा अधिकारी एन.कुजूर, बीईओ एम.जेडयू. सिद्दीकी, पीटीआई रीना, पी.पी उपाध्याय, सरफराज आलम उपस्थित थे। जशपुर शहर के भागलपुर निवासी सुमन ताम्रकार ने हिमांचल प्रदेश के सोलांग वेली में स्थित माउण्ट फे्रन्डशिप पिक पर 5289 मीटर की उंचाई और 17353 फीट पर सुमन ने 21 अक्टूबर की सुबह 11.08 मिनट पर तिरंगा लहराया। माउन्ट टेज्किंग में पर्वतशीखर पर पहुंचने वाले जिले की पहली पवर्तारोही बन गई है। इसके साथ ही सरगुजा संभाग की पहली महिला पवर्तारोही का गौरव भी सुमन ने प्राप्त किया है। सुमन ताम्रकार ने जानकारी देते हुए बताया कि 22 अगस्त को उनका कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आया था। 10 दिन तक जशपुर के कोविड केयर सेंटर में रहकर अपना ईलाज कराया और 14 दिन होम क्वारेंटाईन में रहने के बाद सुमन ने माउन्ट टेज्किंग टीम में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत शुरू की। सुमन ताम्रकार ने पहली से बारहवीं तक की शिक्षा जशपुर जिले में पूर्ण की है। उन्होंने भिलाई से इलेक्ट्रीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री ली है। छत्तीसगढ़ के माउन्टनमेन राहुल गुप्ता से उन्होंने दो माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। राहुल गुप्ता के नेतृत्व में 9 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ से पवर्तारोही का 20 सदस्यीदल माउन्ट टेज्किंग के लिए हिमांचल प्रदेश रवाना हुआ। सुमन ने बताया कि उन्हें पर्वत की चोटी तक पहुंचने में 4 दिन और वापस आने में 2 दिन का समय लगा। कुल 7 दिन में इस अभियान को पूरा करने का लक्ष्य मिला था। 17 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक इस अभियान का पूरा कर लिया गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। 20 सदस्य में से सिर्फ 8 लोग ही शिखर पर पहुंच पाए। माउन्ट टेज्किंग में 8 राज्य छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश, उतराखंड, हिमांचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, और दिल्ली के पवर्तारोही शामिल हुए थे। सुमन ताम्रकार जल संसाधन विभाग जशपुर में अमीन के पद पर कार्यरत है। 


91 की हुईं स्वर कोकिला, लता मंगेशकर के जन्मदिन पर जाने उनकी कुछ अनसुनी बातें*

28-Sep-2020

मुंबई (शोर सन्देश) भारतीय सिनेमा जगत में पिछले सात दशक से लता मंगेश्कर ने अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है, लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे आप आज तक अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 91वां जन्मदिन मना रहीं हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं। उन्होंने साल 1942 में `किटी हसाल` के लिए अपना पहला गाना गाया, लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि, इसी साल लता को `पहली मंगलगौर` में अभिनय करने का मौका मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी। बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वह 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी। लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। लता मानती हैं, “पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।मास्टर गुलाम हैदर ने लता को फिल्म `मजबूर` के गीत `अंग्रेजी छोरा चला गया` में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया था। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में लता मंगेशकर ने चांदनी, राम लखन, सनम बेवफा, लेकिन, फरिश्ते, पत्थर के फूल, डर, हम आपके हैं कौन, दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे, माचिस, दिल तो पागल है, वीर जारा, कभी खुशी कभी गम, रंग दे बसंती और लगान जैसी फिल्मों में गाने गाए।
00 लता ने क्यों नहीं की शादी पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को सेटल कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया और मैंने शादी नहीं की।
00 जब किशोर कुमार से यूं हुई थी मुलाकात
किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। इस घटना के बारे में बताते हुए लता ने बताया था कि `बॉम्बे टॉकीज` की फिल्म `जिद्दी` के गाने की रिकॉर्डिंग पर जाने के लिए वह लोकल ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस समय उन्होंने देखा कि एक शख्स भी उसी ट्रेन में सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होंने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर जा रहा है। जब वह बॉम्बे टॉकीज पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बॉम्बे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हें पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद में `जिद्धी` में लता ने किशोर कुमार के साथ `ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार` गाना गाया था। 00 रफी से बातचीत कर दी थी बंद
लता ने पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत तक बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहम्मद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि, चार साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में `दिल पुकारे` गीत गाया।
00 एक दिन में 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता
बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के. एल. सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी, जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया था। लता को अपने बचपन के दिनों में साइकल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती है।
00 सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल बहुत कम लोगों को पता होगा कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गई तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि, बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविधालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया। 


फिल्म साउंड ऑफ वॉटर को मिला 10वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में एक्सिलेंस सर्टिफिकेट*

24-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ के रहने वाले और पेशे से इंजीनियर श्रवण कुमार राठौर की फिल्म साउंड ऑफ वॉटर को 10वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2020 में एक्सिलेंस सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है। वैसे कहा जाता है कि पानी की असली कीमत वही बता सकता है, जिसने रेगिस्तान की तपती धूप में प्यासा रहकर गुजारा हो। वहीं साउंड ऑफ वॉटर के निर्माता श्रवण कुमार राठौर ने अपनी पूरी जिंदगी रायपुर नगर निगम में जल संसाधन विभाग में बतौर इंजीनियर दी है। इसके साथ ही उन्होंने पानी की उपयोगिता और महत्ता बताने में जनभागीदारी भी निभाई है। और उसके बाद अपने अनुभव को रील लाइफ में सिनेमा के द्वारा हिंदी फिल्म साऊंड ऑफ़ वाटर के माध्यम से पूरे देश में पानी की महत्ता को पेश किया। फिल्म को दर्शको ने सराहा भी। वैसे लॉक डाउन के चलते राठौर फुर्सत के पलों में अब अपनी नई फि़ल्म भी जो पानी पर ही आधारित होगी पर स्क्रिप्ट पर फाइनल वर्क कर चुके हैं। और बहुत जल्द फिल्म को फ्लोर में लेकर आएंगे। फिल्म में सफ़ाई के साथ ही ग्लोबल वार्मिंग को भी स्क्रिप्ट में साथ जोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में समुद्रों जिसके पानी में घुले ऑक्सीजन की कमी को लेकर तथा समुद्र में भिन-भिन कचरा इक्कठा होने से समुद्री जीवों का जीवन ख़तरे को लेकर है तथा सायक्लोन की सम्भावना को लेकर इस विषय पर फिल्म का निर्माण करेंगे। इस फि़ल्म में सायंटिस्ट को ही हीरो की भूमिका दिखाया जायेगा। इसके साथ ही फिल्म में लव स्टोरी ,एक्शन कॉमेडी इमोशन सन्देशात्मक होगी। 


लोगों को लुभा रहे तुंबा शिल्प के मनमोहक लैम्प*

24-Aug-2020

रायपुर, (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प कलाकारों द्वारा बनाए जा रहे मनमोहक तुम्बा लैम्प की मांग बाजारों में बढ़ती जा रही है। तुंबा के विभिन्न आकार-प्रकार वाले यह आकर्षक लैम्प अब लोगों के घर और बेडरूम की शोभा बनने लगे हैं। इन मनमोहक और आकर्षक लैम्पों का निर्माण नारायणपुर एवं बस्तर जिले आदिवासी शिल्पियों द्वारा किया जा रहा है। इसकी बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए हस्तशिल्प बोर्ड द्वारा अब इसका वृहद पैमाने पर प्रशिक्षण देकर निर्माण शुरू किए जाने की पहल की गई है। सूखे हुए तुंबे पर शिल्प कलाकार विभिन्न आकार-प्रकार की सुंदर कृतियां उकेर कर उन्हें मनमोहक और आकर्षक रूप देते हैं। हस्तशिल्प बोर्ड द्वारा इस हस्त शिल्पकला को पुर्नजीवित कर ग्रामीण युवाओं को रोजगार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा तुंबा शिल्प को बढ़ावा देने के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा है कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप हस्तशिल्पकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम उसरीबेड़ा में परम्परागत वस्तुओं से आकर्षक सजावटी वस्तु बनाने का प्रशिक्षण 24 अगस्त से दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के दौरान अनुसूचित जनजाति वर्ग के 20 युवाओं को तीन माह तक गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें 1500 रूपए प्रतिमाह की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान तैयार की गई सजावटी सामग्री के लिए प्रदर्शनी-सह-मार्केटिंग की भी सुविधा बोर्ड द्वारा मुहैया करायी जाएगी। 

गौरतलब है कि राज्य में पहली बार तुंबा शिल्प से वृहद पैमाने पर लैम्प निर्माण की शुरूआत की गई है। स्टडी टेबल लैम्प के रूप में तुंबा से बने लैम्प को काफी पसंद किया जा रहा है और इसकी हाथों-हाथ बिक्री हो रही है। छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले हस्तशिल्प मेलों में तुंबा शिल्प लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा प्रशिक्षण एवं विपणन सुविधाओं के माध्यम से तुंबा शिल्प का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया जा रहा है। 




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