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स्वास्थ

शिशुओं के लिए आवश्यक है 6 माह तक का स्तनपान डॉ राजेश ध्रुव*

19-Nov-2020

00 राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह
दंतेवाड़ा (शोर सन्देश) शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के प्रति जागरूकता के लिए जिला अस्पताल दंतेवाड़ा में 15 से 21 नवम्बर तक राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रसूताओं को यह सलाह दी जा रही है कि नवजात शिशुओं को छह माह तक केवल स्तनपान करवाया जाए साथ ही नवजात के बीमारी की पहचान और उसके बेहतर देखभाल के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश ध्रुव ने बताया, राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह के कार्यक्रम के अंतर्गत जन समुदाय को बताया जा रहा कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक माँ एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाना जरूरी है और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराया जाए। जन्म के बाद नवजात का सम्पूर्ण टीकाकरण उसके सेहत के लिये बहुत जरूरी है इसे नियमित रूप से पालन करना चाहिये नवजात की नाभि सूखी एवं साफ़ रखें, संक्रमण से बचाएं और माँ शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान की जरूरत होती है शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर की विधि उपयुक्त होती है शिशु को स्तनपान कराते रहें क्योंकि कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए केवल माँ का दूध सर्वोत्तम होता है।  00 नवजात शिशु के देखभाल के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना है जरूरी
-नियमित स्तनपान- शिशु को समय पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। एक नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, अर्थात 24 घंटों में उसे 8-12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है। शिशु को जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं।  -डायपर बदलना- प्रसव के बाद नवजात शिशु की देखभाल करते समय बारबार डायपर बदलना एक महत्वपूर्ण पहलू है। शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिलने पर वह नियमित रूप से मल त्याग करेगा, जैसे ही उसका डायपर भरा हुआ महसूस हो, उसे बदलना जरूरी है
-पर्याप्त निद्रा- नवजात शिशु को शुरुआत के महीनों में प्रतिदिन लगभग 16 घंटे नींद की आवश्यकता होती है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तो नींद की अवधि कम होती जाती है.  -शिशु को संभालना- शिशु के साथ खेलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। शिशु को जोर से हिलाएं हवा में उछाले नहीं क्योंकि उसके आंतरिक अंग नाजुक होते हैं और तेज झटकों से उसे नुकसान हो सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए बच्चे को पकड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हाथ साफ सुथरे धुले हुए हों। 


दुनिया में होने वाली मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है स्ट्रोक*

28-Oct-2020

00 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेष
रायपुर (शोर सन्देश) विश्व स्ट्रोक दिवस या विश्व आघात दिवस हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाता है। स्ट्रोक ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक से होने वाले खतरों के प्रति आगाह करने के साथ साथ उनको इससे बचाव के उपाय भी सुझाना है विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार स्ट्रोक का खतरा हर चार व्यक्तियों में से एक को होता है। इसलिए इस बार की थीमवह एक बनेंरखी गयी है। इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मीरा बघेल ने बताया आजकल लोग काफी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण किसी की नौकरी छूट गयी है तो किसी का व्यापार बंद हो गया है। ऐसे में उनको स्ट्रोक होने का जोखिम और अधिक है। इसलिए स्ट्रोक के प्रति अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में हर वर्ष लगभग 1.70 करोड़ लोग स्ट्रोक्स की समस्या का सामना करते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग तो मर जाते हैं जबकि 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है, जबकि विकलांगता होने का यह तीसरा प्रमुख कारण है। इतना गंभीर होने के बाबजूद भी कम से कम आधे से अधिक स्ट्रोक्स को लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है किसी भी समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में आप नियमित जाँच करवा सकते हैं।
00 क्या है स्ट्रोक?
जब रक्त वाहिका नलिकायें किसी रुकावट या रिसाव के कारणमस्तिष्क कोरक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो ऐसी स्थिति को स्ट्रोक कहते है इसको ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है
00 स्ट्रोक्स के लक्षणों को FAST रणनीति के माध्यम से आसानी से पहचाना जा सकता है
F – फेस : किसी व्यक्ति के मुस्कुराने पर उसका चेहरा एक तरफ लटक रहा है तो उसे स्ट्रोक का खतरा हो सकता है
A – आर्म : किसी व्यक्ति द्वारा दोनों हाथों को उठाने पर एक हाथ का उठ पाना या गिर जाना
S – स्पीच : यदि किसी व्यक्ति द्वारा साधारण शब्द बोलने पर उसकी आवाज में लडख़ड़ाहट होना
T –टाइम टू एक्शन :यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण है तो एम्बुलेंस के लिए आपातकालीन नंबर पर कॉल करें
00 कैसे बचा जा सकता है स्ट्रोक से ?
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करके- स्ट्रोक्स केलगभग आधे से ज़्यादा मामले उच्च रक्तचाप से जुड़ें होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाकरउच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।
सप्ताह में पांच बार व्यायाम करने से- स्ट्रोक्सके एक तिहाई से अधिक मामले उन लोगों में होते हैं, जो कि नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते हैं।इसलिए सप्ताह में पांच बार 20 से 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए
स्वस्थ और संतुलित आहार खाना से- लगभग एक चौथाई स्ट्रोक्स के मामलेअसंतुलित आहार विशेषकर फलों एवं सब्जियों के कम सेवन करने से जुड़े होते हैं। इसलिए खाने में फल एवं सब्जियों को भी संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए साथ ही स्ट्रोक्स का ज़ोखिम कम करने के लिए नमक का सेवन कम करना चाहिए।
संतुलित वज़न बनाए रखना- लगभग 5 में से 1 स्ट्रोक मोटापे से जुड़ा होता है। इसलिए व्यायाम एवं उचित खानपान के माध्यम से वज़न को नियंत्रित रखना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल कम करना- चार में से एक से ज़्यादा स्ट्रोक के मामले उच्च कोलेस्ट्रॉल से जुड़े होते हैं। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
धूम्रपान से दूरी बनाकर- धूम्रपान रोकने से स्ट्रोक का ज़ोखिम कम होता है। इसलिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखना चाहिए
अल्कोहल से दूरी बनाकर- प्रतिवर्ष एक मिलियन से अधिक स्ट्रोक अत्यधिक अल्कोहल के सेवन से जुड़ें है। इसलिए अल्कोहल का सेवन कम करने से स्ट्रोक के ज़ोखिम को कम करने में मदद मिलती है।  मधुमेह को नियंत्रित करके- मधुमेह को नियंत्रित करके स्ट्रोक्स का जोखिम कम किया जा सकता है क्योंकि मधुमेह से स्ट्रोक का ज़ोखिम बढ़ जाता है। यदि आप मधुमेह से पीड़ित है, तो मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए उपचार और जीवन शैली बदलाव के बारे में अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। 


कोरोना संक्रमित अपनी रिपोर्ट की जानकारी वेब पोर्टल पर देख सकेंगे*

27-Sep-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमित मरीजों को टेस्ट कराने के बाद अब अपनी रिपोर्ट की जानकारी एक क्लिक पर प्राप्त कर सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल सीजीहेल्थ.एनआईसी.इन पोर्टल पर जाकर प्रदेश का कोई भी व्यक्ति जिसने इस माह की 5 तारीख के बाद कोरोना टेस्ट कराया हो वह अपनी रिपोर्ट देख सकता है और उसका प्रिंट भी ले सकता है। सीजीहेल्थ.एनआईसी.इन पोर्टल को खोलकर उसके दांए तरफ उपर की ओर चेक योर कोविड टेस्ट रिजल्ट लिखा आएगा। उसमें क्लिक करने पर उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। जो जानकारी कोरोना जांच कराते समय दिया हो। मोबाइल नंबर डालने के बाद उस नंबर पर टी पी आएगा। जिसे पोर्टल में डालने पर आपकी कोविड रिपोर्ट दिखेगी। व्यू योर रिपोर्ट में क्लिक करने पर पूरी रिपोर्ट जाएगी जिसे सेव कर के प्रिंट लिया जा सकता है।


2 साल की बच्ची की मौत, शव ले जाने अस्पताल ने नही दी एम्बुलेंस*

27-Sep-2020

00 पॉलीथिन में लपेटकर पिता ने बाइक से घर लाया बच्ची का शव
जांजगीर-चांपा (शोर सन्देश) लॉकडाउन के बीच अस्पताल प्रबंधन की शर्मनाक हरकत सामने आई है। जांजगीर में दो साल की बच्ची को सांप ने काट लिया था। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, लेकिन बच्ची की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंप दिया, लेकिन ले जाने के एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद परिजन पॉलीथिन में लपेटकर बाइक से शव ले गए। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से थोड़ी दूर स्थित ग्राम बनारी के सबरिया डेरा निवासी शीतल गोंड़ (2 साल) पिता गोपाल प्रसाद गोंड़ शुक्रवार को खेल रही थी। इसी दौरान सांप ने उसे काट लिया। परिजनों को पता चला तो पहले उसकी झाड़-फूंक करते रहे, लेकिन जब तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां इलाज शुरू होने से पहले ही शरीर में जहर फैलने से बच्ची की मौत हो गई।
लॉकडाउन के कारण प्राइवेट वाहन भी नहीं मिल सका अस्पताल प्रशासन ने बच्ची का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिजन काफी देर तक शव ले जाने के लिए वाहन तलाश करते रहे, लेकिन लॉकडाउन के चलते उन्हें नहीं मिला। गोपाल ने बताया कि उन्होंने अस्पताल से भी वाहन मांगा, पर नहीं दिया गया। इसके बाद शव को परिजनों ने पॉलीथिन में लपेटा और बाइक पर ही घर ले गए। 


अस्तित्व में आया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, सुरेश चन्द्र अध्यक्ष नियुक्त*

25-Sep-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) देश में चिकित्सा शिक्षा और व्यवसाय के शीर्ष नियामक के तौर पर, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग 25 सितम्बर 2020 से अस्तित्व में गया है। यह भारतीय चिकित्सा परिषद का स्थान लेगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बनने से 26 सितम्बर 2018 को भारतीय चिकित्सा परिषद को अतिक्रमित करने वाले संचालक बोर्ड को भंग कर दिया गया है और लगभग 64 वर्ष पुराने भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम को समाप्त कर दिया गया है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ईएनटी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. सुरेश चन्द्र शर्मा को तीन वर्ष के लिए आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में बडे सुधारों के प्रावधान वाले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम को राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष आठ अगस्त को मंजूरी दी थी। इस आयोग में एक अध्यक्ष, दस पदेन सदस्य और 22 अंशकालिक सदस्य हैं। 


बड़ी खबर : कोरोना मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को राज्य सरकार देगी प्रोत्साहन राशि, विभाग ने जारी किया आदेश*

28-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ में कोरोना मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को राज्य सरकार प्रोत्साहन राशि देने जा रही है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने इस सम्बन्ध में पत्र जारी कर सभी शासकीय अस्पताल के कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे नर्सिंग स्टाफ, पैरा मेडिकल और सहायक कर्मियों को प्रोत्साहन राशि देने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर बताया है कि यह राशि 01 सितंबर से 30 नवंबर तक दी जाएगी। यह राशि केवल उन्हीं कर्मचारियों को दी जाएगी जो कोरोना वार्ड और आईसीयू में कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे हैं। यह राशि आईसीयू मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों के लिए 200 रूपये और कोरोना वार्ड या अन्य स्थानों पर कोरोना मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को 100 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 


नेत्रदान के प्रति जागरूकता के लिए 25 अगस्त से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा*

24-Aug-2020

एक व्यक्ति के नेत्रदान से सकती है दो लोगों की आंखों में रौशनी : डॉ गर्ग
रायपुर(शोर सन्देश) पं. जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में कल 25 अगस्त से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना है। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एम. एल. गर्ग ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष 25 अगस्त से 8 सिंतबर के बीच राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष कोरोना काल को देखते हुए जनजागरण अभियान के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया एवं सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा है। नेत्र चिकित्सकों, नेत्र सहायकों, नेत्र काउंसर एवं इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म वॉट्सअप के माध्यम से लिंक भेजकर ऑनलाइन नेत्रदान पखवाड़ा का शुभारंभ किया जाएगा। विशेष आयोजनों के तहत समाचार पत्रों, दूरदर्शन, आकाशवाणी, वेबिनार इत्यादि के जरिए नेत्रदान हेतु चर्चाएं, व्याख्यान, गोष्ठियां किया जाना प्रस्तावित है। प्रतिवर्ष लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने के उद्देश्य से जनजागरण सम्बन्धी कार्यक्रम किये जाते हैं जिसके अंतर्गत नेत्र परीक्षण शिविर लगाने के साथ-साथ पाठशाला, महाविद्यालय आदि स्थानों पर व्याख्यान दिये जाते हैं।  डॉ. गर्ग कहते हैं एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी रौशन हो सकती है इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर इसका आयोजन किया जाता है। जनसाधारण की भागीदारी के लिए शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं एवं गैर शासकीय संस्थाओं का सहयोग लिया जाता है। सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध, नुक्कड़ नाटक, नेत्रदान सम्बन्धी रैली का आयोजन किया जाता है। मीडया के सहयोग से नेत्रदान सम्बन्धी चर्चायें, गोष्ठी, व्याख्यान आदि का प्रसारण किया जाता है।
अंधत्व के निवारण के लिए भिन्न-भिन्न पद्धतियों का आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाता है। जैसे - मोतियाबिंद हो जाये तो उसका ऑपरेशन हो सकता है। कांचबिंद हो जाने तो उसका निवारण दवाओं एवं ऑपरेशन से किया जाता है। दृष्टिदोष का इलाज चश्मे से होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि से अगर रौशनी जाने का खतरा है तो उसके लिये दवाईयां एवं ऑपरेशन का उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार और भी अन्य बीमारियां हैं जिनका उपचार ऑपरेशन और अन्य विधियों से किया जाता है और खोयी रौशनी वापस जाती है किंतु यदि कोई व्यक्ति कार्नियल ओपेसिटी से अंधत्व का शिकार हो जाये तो इसका इलाज नेत्रदान से प्राप्त कार्निया का प्रत्यारोपण करके ही किया जा सकता है। इसके लिए किसी अन्य प्रकार की दवा प्रभावी नहीं होती है। नेत्र का कार्निया अर्थात् स्वच्छ पटल जो सामने से देखने पर आंख की पुतली के रंगों के अनुसार काला या हल्का भूरा दिखाई देता है, आंख का पारदर्शी भाग है। इसमें सफेदी हो जाती है जिसे हम कार्नियल ओपेसिटी कहते हैं लेकिन सामान्य भाषा में इसे आंख का फूला होना या सफेद होना कहते हैं।
देशभर में हमें मोटे तौर पर लगभग दो लाख कार्निया की हर साल आवश्यकता होती है लेकिन प्राप्ति केवल 60 हजार कार्निया की होती है। इस तरह अतिरिक्त 20 हजार कार्निया की आवश्यकता प्रतिवर्ष और जुड़ जाती है इसलिए नेत्रदान पखवाड़े के माध्यम से नेत्रदान को प्रवृत्त करने हेतु जनजागरण की आवश्यकता होती है।  


कोरोना बुलेटिन, प्रदेश में आज मिले 755 मरीज, रायपुर में सर्वाधिक 207 मरीज, 6 मौतें भी*

24-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राज्य में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। प्रदेश में आज 755 कोरोना के नएम मरीज मिले है। वहीं मौतें भी छह हुई है। कोरोना बुलेटिन के अनुसार रायपुर में आज 207 मरीज मिले है। वहीं रायगढ़ में 125, राजनांदगांव में 59, दुर्ग में 41, बस्तर में 37, जांजगीर में 33, सुकमा में 28, कोंडागांव में 24, बिलासपुर में 22, बीजापुर में 21, सूरजपुर में 20, मुंगेली में 19, महासमुंद में 17, बालोद-धमतरी में 13-13, सरगुजा-नाराणपुर से 11-11, बलौदाबाजार-कांकेर से 10-10, कबीरधाम-कोरबा से 8-8, गरियाबंद से 5, दंतेवाड़ा से 4, बलरामपुर में 3, कोरिया से दो, मरवाही और जशपुर से एक-एक मरीज मिले है। वहीं अब तक 21 हजार 732 केस मिले है। इसके अलावा अब एक्टिव केस की संख्या 8105 पहुंच चुकी है। साथ ही 493 मरीज डिस्चार्ज भी हुए है। अब मौत का आंकड़ा 203 पर पहुंच गया है। वहीं महामाया पारा निवासी 57 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है। राजेंद्र नगर में 88 वर्षीय बुजुर्ग ने दम तोड़ा है। संजय नगर में 70 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है। इसके अलावा पखांजूर में 58 वर्षीय महिला की जान चले गई है। पाली में 42 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है। रायपुर के ब्रम्हपुरी में 60 वर्षीय व्यक्ति की जान गई है। 


कोरबा में 12 नए कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि*

18-Aug-2020

कोरबा (शोर सन्देश) जिला पंचायत की महिला अधिकारी और दो कर्मचारियों सहित जिले में 12 नए कोरोना संक्रमितो की पुष्टि हुई है। संक्रमितों में 6 नगर निगम कर्मचारी भी शामिल। दीपका के प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास क्वारेंटाइन सेंटर से एक और करतला से दो संक्रमित भी मिले। कोरोना संक्रमितो में 11 पुरूष और एक महिला शामिल है। सभी मरीजों की जांच रिपोर्ट रायगढ़ मेडिकल कॉलेज लैब से पुष्टि हुई। 


कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट अब मोबाइल में मैसेज से*

17-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमण की पुष्टि के लिए सैंपल जांच कराने वालों को अब जांच रिपोर्ट उनके द्वारा दर्ज कराए गए मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) विभाग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर मोबाइल नंबरों पर जांच रिपोर्ट भेजना शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कहा है कि जांच कराने वालों को रिपोर्ट प्राप्त करने में रही दिक्कतों को देखते हुए यह सुविधा शुरू की जा रही है। अब सैंपल देने वाले व्यक्ति द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर उसकी रिपोर्ट प्रेषित कर दी जाएगी। विभाग की कोशिश है कि जांच रिपोर्ट लेने के लिए किसी को भी स्वास्थ्य केंद्र आना पड़े। पॉजिटिव्ह या निगेटिव्ह होने की रिपोर्ट मैसेज के माध्यम से मिल जाए। पहले केवल पॉजिटिव्ह पाए जाने वालों को ही फोन कर उनके रिपोर्ट की जानकारी दी जाती थी। निगेटिव्ह रिपोर्ट वालों को अस्पताल आकर इसे लेना होता था। 




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